तेहरान 

अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष विराम का ऐलान हो गया है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान से मिले 10 बिंदु बातचीत आगे बढ़ाने का आधार हैं। खबर है कि इसमें ईरान ने एक शर्त यह भी रखी है कि उसे हुए नुकसान का मुआवजा भी दिया जाएगा। सबसे बड़ी राहत स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का खुलना मानी जा रही है, जिसपर दुनिया का तेल वितरण टिका हुआ था।

3640 मौतें, 90 हजार घर गिरे

जंग में लेबनान, इराक, जॉर्डन, कुवैत, बहरीन, कतर, सऊदी अरब, यूएई, ओमान जैसे देश भी शामिल हो गए। लगभग 40 दिन तक मिसाइलें, ड्रोन और बमबारी चलती रही. अब तक की रिपोर्ट के अनुसार कुल मौतें करीब 3640 बताई जा रही हैं. हजारों लोग घायल हुए हैं. बहुत बड़ी संपत्ति का नुकसान हुआ है। 

जंग कब शुरू हुई और फैली?
28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले शुरू किए. इन हमलों में ईरान के कई सैन्य ठिकाने, परमाणु सुविधाएं और सरकार से जुड़े स्थान निशाने पर थे. ईरान ने इसे जवाब दिया और इजरायल पर मिसाइल व ड्रोन दागे. साथ ही उसने मध्य पूर्व में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर भी हमले किए। 

ईरान ने खाड़ी देशों पर भी हमले किए क्योंकि वहां अमेरिकी ठिकाने हैं. लेबनान में हिजबुल्लाह ने भी इजरायल पर रॉकेट दागे. यमन के हूती विद्रोहियों ने भी इजरायल को निशाना बनाया. इस तरह एक छोटा सा संघर्ष पूरे क्षेत्र में फैल गया. कई देशों में विस्फोटों की आवाजें सुनाई दीं और तेल-गैस की कीमतें आसमान छूने लगीं। 

इस 40 दिन की जंग में सबसे ज्यादा नुकसान ईरान को हुआ. ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार वहां 2076 लोग मारे गए. 26500 से ज्यादा घायल हुए. इनमें आम नागरिक भी शामिल हैं. लेबनान में 1497 मौतें हुईं और हजारों लोग घायल हुए. इजरायल में 26 लोग मारे गए जबकि 7183 घायल हुए. अमेरिकी सैनिकों में 13 मौतें हुईं और 200 से ज्यादा घायल हुए। 

खाड़ी देशों में कुल 28 मौतें बताई गई हैं. इनमें कुवैत में 7, बहरीन में 3, सऊदी अरब में 2, यूएई में 12, ओमान में 3 और कतर में कुछ घायल हुए. इराक में 109 मौतें और दर्जनों घायल. जॉर्डन में 29 घायल, सीरिया में 4 मौतें और साइप्रस में भी कुछ नुकसान हुआ. 
कुल मिलाकर मौतों की संख्या 3640 के आसपास पहुंच गई है. घायलों की संख्या बहुत ज्यादा है – ईरान अकेले में 26,500 से ऊपर. असली आंकड़े इससे भी ज्यादा हो सकते हैं क्योंकि स्थिति तेजी से बदल रही है। 

इमारतों और संपत्ति का भारी नुकसान
जंग ने सिर्फ लोगों की जान नहीं ली, बल्कि शहरों और गांवों को भी तबाह कर दिया. कुल 90 हजार घर पूरी तरह बर्बाद हो गए. स्कूलों पर भी बहुत असर पड़ा – 760 स्कूल क्षतिग्रस्त या नष्ट हो गए. अस्पतालों की संख्या 307 बताई गई है जो या तो बमबारी में टूट गए या इस्तेमाल नहीं हो पा रहे. हजारों व्यावसायिक इमारतें, दुकानें, बाजार और फैक्टरियां भी नष्ट हुईं। 

ईरान में कई शहरों में आवासीय इलाके, स्कूल और अस्पताल प्रभावित हुए. लेबनान में भी बड़े पैमाने पर घर और इमारतें गिर गईं. इजरायल में कुछ इलाकों में क्षति हुई लेकिन वहां की एयर डिफेंस ने कई हमलों को रोक लिया. खाड़ी देशों में तेल और गैस के प्लांट, बंदरगाह और एयरपोर्ट पर हमले हुए जिससे ऊर्जा उत्पादन प्रभावित हुआ. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तेल परिवहन बाधित होने से पूरी दुनिया में तेल की कीमतें बढ़ गईं। 
ईरान इस जंग का मुख्य केंद्र रहा. वहां सबसे ज्यादा मौतें और घायल हुए. उसके परमाणु और सैन्य कार्यक्रम को बड़ा झटका लगा. लेबनान में हिजबुल्लाह से जुड़े इलाकों में भारी बमबारी हुई जिससे आम लोगों का जीवन अस्त-व्यस्त हो गया. इजरायल ने अपनी मजबूत रक्षा व्यवस्था से कई हमलों को रोका लेकिन कुछ मौतें और चोटें हुईं। 

खाड़ी देश जैसे सऊदी अरब, यूएई, कतर, बहरीन आदि ने ईरानी हमलों का सामना किया. इन देशों में ज्यादातर हमले ऊर्जा सुविधाओं पर थे. हालांकि इन देशों की एयर डिफेंस ने ज्यादातर मिसाइलों और ड्रोन को मार गिराया, फिर भी कुछ मौतें और संपत्ति का नुकसान हुआ। 

ईरान ने रखीं हैं 10 शर्तें

एक-दूसरे पर हमला न करना

Strait of Hormuz पर ईरान का नियंत्रण बने रहना

यूरेनियम संवर्धन की अनुमति देना

सभी प्राथमिक प्रतिबंधों को हटाना

सभी माध्यमिक प्रतिबंधों को हटाना

UNSC के सभी प्रस्तावों को समाप्त करना

IAEA बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के सभी प्रस्तावों को समाप्त करना

ईरान को हुए नुकसान का मुआवजा देना

क्षेत्र से अमेरिकी लड़ाकू बलों को वापस बुलाना

सभी मोर्चों पर युद्ध रोकना, जिसमें लेबनान के 'इस्लामिक रेजिस्टेंस' के खिलाफ युद्ध भी शामिल है।

ट्रंप का बयान
ट्रंप ने लिखा, 'पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और फील्ड मार्शल असीम मुनीर से हुई बातचीत के आधार पर, जिसमें उन्होंने मुझसे ईरान पर आज रात होने वाले विनाशकारी हमले को रोकने का अनुरोध किया था। साथ ही ईरान के स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पूरा, तत्काल और सुरक्षित तरीके से खोलने के मद्देनजर मैं दो सप्ताह के लिए ईरान पर दो हफ्ते के लिए बमबारी और हमले रोकने के लिए तैयार हो गया हूं।'

ट्रंप ने कहा, 'अमेरिका और ईरान के बीच पिछले विवाद के लगभग सभी बिंदुओं पर सहमति बन चुकी है, लेकिन दो हफ्तों का संघर्ष विराम समझौते को अंतिम रूप देने और लागू करने में मदद करेगा।'

पाकिस्तान में होगी वार्ता
पाकिस्तान ने बुधवार को अमेरिका और ईरान को इस्लामाबाद में वार्ता के लिए आमंत्रित किया। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि अमेरिका और ईरान ने तत्काल संघर्षविराम पर सहमति जताई है। शरीफ ने बताया कि पाकिस्तान ने दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडलों को 10 अप्रैल को इस्लामाबाद में आमने-सामने बातचीत के लिए आमंत्रित किया है, ताकि 'सभी विवादों का समाधान' निकाला जा सके।

चीन की है अहम भूमिका?
एपी ने सूत्रों के हवाले से बताया कि चीन ने ईरान के नेताओं से बातचीत करके उन्हें अमेरिका से युद्धविराम का रास्ता तलाशने के लिए राजी करने की कोशिश की। दो अधिकारियों ने नाम जाहिर नहीं करने की शर्त पर कहा कि बातचीत के दौरान चीनी अधिकारी ईरानी अधिकारियों के संपर्क में थे। एक अधिकारी ने कहा कि चीन अपने प्रभाव का इस्तेमाल करने की कोशिश कर रहा है और वह मुख्य रूप से पाकिस्तान, तुर्किये और मिस्र समेत मध्यस्थों के साथ काम कर रहा है।