लखनऊ

कुछ महीने पहले औरैया स्थित वन स्टॉप सेंटर में एक 24 वर्षीय महिला घबराई हुई हालत में पहुंची। घरेलू कलह और लगातार बढ़ते विवादों ने उसके पारिवारिक जीवन को लगभग टूटने की कगार पर ला खड़ा किया था। वहां मौजूद परामर्शदाताओं ने धैर्य और संवेदनशीलता के साथ उसकी पूरी बात सुनी। केंद्र की पहल पर पति को भी बुलाया गया और दोनों की काउंसलिंग की प्रक्रिया शुरू हुई। कई दौर की बातचीत और सलाह के बाद पति पत्नी के बीच संवाद का रास्ता खुला। नतीजा यह रहा कि आपसी विवाद सुलझ गया और एक परिवार टूटने से बच गया। संपर्क करने पर महिला ने बताया कि अब उसका दाम्पत्य जीवन सामान्य है और घर का माहौल पहले से बेहतर हो गया है। यह घटना बताती है कि योगी सरकार द्वारा संचालित वन स्टॉप सेंटर संकट में घिरी महिलाओं के लिए भरोसे और सहारे का मजबूत केंद्र बन चुके हैं।

एक ही छत के नीचे मिल रही हर जरूरी सहायता

हिंसा या उत्पीड़न की शिकार महिलाओं को त्वरित सहायता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संचालित वन स्टॉप सेंटर अब प्रदेश में प्रभावी सहायता तंत्र के रूप में स्थापित हो चुके हैं। यहां पीड़ित महिलाओं को एक ही स्थान पर चिकित्सकीय सहायता, मनोवैज्ञानिक परामर्श, विधिक सलाह और पुलिस सहायता उपलब्ध कराई जाती है। जरूरत पड़ने पर महिलाओं को पांच दिनों तक अल्प प्रवास की सुविधा भी दी जाती है। इससे संकट की घड़ी में उन्हें सुरक्षित वातावरण मिल सके। प्रशिक्षित परामर्शदाता महिलाओं की समस्याओं को गंभीरता से सुनते हुए समाधान की दिशा में मार्गदर्शन देते हैं। 

96 वन स्टॉप सेंटर से महिलाओं को सहायता

प्रदेश में तेजी से मजबूत हुआ वन स्टॉप सेंटर का नेटवर्क महिला सुरक्षा और सशक्तीकरण को प्राथमिकता देते हुए राज्य सरकार ने वन स्टॉप सेंटर की व्यवस्था को लगातार विस्तार दिया है। वर्तमान में उत्तर प्रदेश के 75 जिलों में 96 वन स्टॉप सेंटर संचालित हैं। प्रदेश की बड़ी आबादी को ध्यान में रखते हुए कई जिलों में अतिरिक्त सेंटर स्थापित करने की स्वीकृति भी दी गई है, जिससे अधिक से अधिक महिलाओं को समय पर सहायता मिल सके। इन केंद्रों के माध्यम से महिलाओं को न केवल तत्काल राहत मिल रही है बल्कि उन्हें अपने अधिकारों और उपलब्ध सेवाओं की जानकारी भी मिल रही है।

आपात स्थिति में त्वरित सहायता के लिए वाहन

महिला सुरक्षा के इस तंत्र को और प्रभावी बनाने के लिए प्रत्येक वन स्टॉप सेंटर पर आकस्मिक सेवाओं के लिए एक वाहन की व्यवस्था भी की गई है। इससे जरूरत पड़ने पर पीड़ित महिला तक तुरंत पहुंचकर सहायता उपलब्ध कराना संभव हो रहा है। सरकार का उद्देश्य है कि किसी भी महिला को संकट की स्थिति में मदद के लिए भटकना न पड़े और उसे सुरक्षित वातावरण में हर जरूरी सहयोग तुरंत मिल सके।