भोपाल.
उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री श्री इन्दर सिंह परमार ने, गणतंत्र दिवस के अवसर पर भोपाल के लाल परेड मैदान में आयोजित राज्यस्तरीय समारोह में उच्च शिक्षा विभाग द्वारा "शोध एवं अनुसंधान, समृद्ध मध्यप्रदेश की पहचान" थीम पर प्रस्तुत आकर्षक झांकी को राज्य स्तर पर द्वितीय स्थान अर्जित करने की महत्वपूर्ण उपलब्धि मिलने पर, उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारियों, प्राध्यापकों और विद्यार्थियों को बधाई दी है।
अनुसंधान, नवाचार और कृत्रिम बुद्धिमता पर आधारित रही उच्च शिक्षा विभाग की झांकी
राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल एवं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा रविंद्र भवन में आयोजित लोकरंग कार्यक्रम के दौरान, गणतंत्र दिवस के अवसर पर भोपाल के लाल परेड मैदान में आयोजित राज्य स्तरीय समारोह में उच्च शिक्षा विभाग द्वारा प्रस्तुत "शोध एवं अनुसंधान, समृद्ध मध्यप्रदेश की पहचान" थीम पर आकर्षक झांकी को द्वितीय स्थान मिलने पर सम्मानित किया गया।
ज्ञातव्य है कि राज्य स्तरीय समारोह में प्रस्तुत 23 विभागों की झांकियों में, उच्च शिक्षा विभाग की झांकी ने राज्य स्तर पर द्वितीय स्थान प्राप्त किया। उच्च शिक्षा विभाग की यह झांकी प्रदेश को अनुसंधान, नवाचार और कृत्रिम बुद्धिमता आधारित ज्ञान-व्यवस्था के अग्रणी राज्य के रूप में प्रस्तुत कर रही थी। इसका मूल भाव यह प्रतिपादित करता है कि उच्च शिक्षा में शोध, तकनीकी नवाचार और वैज्ञानिक दृष्टिकोण ही समृद्ध, आत्मनिर्भर और सतत विकासशील मध्यप्रदेश की सुदृढ़ आधारशिला हैं। प्रदेश की प्रगति का मार्ग ज्ञान-सृजन, नवाचार और अनुसंधान आधारित समाधानों से होकर गुजरता है, यही इस झांकी का केन्द्रीय संदेश रहा है। झांकी के अग्र भाग में रिसर्च एवं एआई इनोवेशन जोन का सजीव चित्रण किया गया, जहाँ अत्याधुनिक कृत्रिम बुद्धिमता, रोबोटिक्स, डेटा एनालिक्स और डिजीटल डैशबोर्ड के माध्यम से विद्यार्थी एवं शोधकर्ता नवाचार करते हुए दिखाई दे रहे थे। यह दृश्य, उच्च शिक्षा संस्थानों में विकसित होती अनुसंधान संस्कृति, स्टार्टअप इकोसिस्टम और तकनीक आधारित समाधान निर्माण के प्रति राज्य की प्रतिबद्धता को प्रभावी रूप से रेखांकित करता दिखाई दिया।
झांकी का मध्य भाग प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस के प्रतीकात्मक मॉडल के रूप में प्रस्तुत किया गया। स्मार्ट कक्षाएँ, डिजीटल प्रयोगशालाएँ, इनोवेशन हब, सोलर पैनल और हरित संरचनाएँ यह दर्शाती दिखीं कि राज्य में उच्च शिक्षा को शोध-आधारित, कौशल-उन्मुख और सतत विकास से जोड़ा जा रहा है। झांकी के अगले भाग में व्यावहारिक अनुप्रयोगों को दर्शाया गया, जहाँ ड्रोन तकनीक, स्मार्ट कृषि, डेयरी विकास और जल-प्रबंधन जैसे दृश्य स्पष्ट करते हैं कि विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में विकसित शोध सीधे ग्रामीण विकास और किसान सशक्तीकरण से जुड़ रहा है। झांकी के साथ चलते विद्यार्थी, युवा वैज्ञानिक और भावी उद्यमी, यह स्पष्ट संदेश देते दिखे कि ये ही राज्य की युवा शक्ति का प्रतीक हैं, जो ज्ञान, अनुसंधान और नवाचार के माध्यम से प्रदेश को विकास के नए शिखर पर ले जाने के लिए संकल्पित है।
















