भोपाल
राजधानी में ई-बस सेवा शुरू होने की दिशा में अहम कदम बढ़ाते हुए सोमवार को नई इलेक्ट्रिक बसों का पहला ट्रायल रन किया गया, जो सफल रहा। पहले दिन बसों ने बैरागढ़ से कोलार और बैरागढ़ से निशातपुरा कोच फैक्ट्री वाले दो रास्तों को कवर किया। ई-बसों ने ट्रायल रन के दौरान शहर के विभिन्न मार्गों से गुजरते हुए बसों ने 40 किमी के रास्ते को लगभग डेढ़ घंटे में तय किया।
ई-रिक्शा की वजह से परेशानी सामने आई
बसों को कहीं भी रोककर यात्रियों को नहीं बैठाया गया। ट्रैफिक की वजह से कुछ जगह रफ्तार जरूर कम हुई, लेकिन बसों का साइज छोटा होने की वजह से शहर में कहीं भी फंसने वाली स्थिति नहीं बनी। ट्रायल रन के दौरान भोपाल रेलवे स्टेशन और पुराने शहर में अतिक्रमण और ई-रिक्शा की वजह से होने वाली परेशानी सामने आई।
इसके अलावा चार्जिंग सिस्टम, चालक की स्थिति को समझा गया। ट्रायल रन के दौरान बसों में चालक के साथ बीसीएलएल के कर्मचारी भी मौजूद थे। बीसीएलएल के अधिकारियों के अनुसार, पहले चरण में पांच दिन तक खाली बसों का ट्रायल होगा, जिसके बाद अगले सप्ताह इन्हें यात्रियों के लिए शुरू किया जाएगा।
इन बसों को भोपाल शहर के अलावा फंदा, औबदुल्लागंज, सीहोर, मंडीदीप, भोजपुर, बिलखिरिया समेत कई निकायों तक चलाया जाएगा। महापौर मालती राय और अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी ने बताया कि इन नई बसों में कई खासियतें भी हैं।
सबसे प्रमुख दिव्यांगों के चढ़ने-उतरने के लिए हाईड्रोलिक डोर हैं। जिनके जरिए वे ट्रायसिकल, व्हील चेयर समेत बस में आ-जा सकेंगे। मेयर मालती राय और अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी ने पार्षदों के सामने देखा कि ये हाईड्रोलिक डोर कैसे काम करते हैं? इन बसों में जिस जगह हाईड्रोलिक डोर है, उसके ठीक सामने इतनी जगह है कि दो व्ही लचेयर या ट्रायसिकल एक साथ खड़ी हो सके। दिव्यांगजनों के लिए पहली बार बस में यह सुविधा दी गई है।
इन रास्तों से होकर गुजरीं बसें
बैरागढ़ डिपो से शुरू होने के बाद बसें लालघाटी से पुराने भोपाल होते हुए बोर्ड ऑफिस चौराहा पहुंचीं। यहां से बसें दो अलग-अलग रूट बोर्ड ऑफिस से कोलार वाले रूट और बोर्ड ऑफिस से भोपाल रेलवे स्टेशन प्लेटफॉर्म नंबर एक वाले रूट से निशातपुरा कोच फैक्ट्री पहुंचीं।
आधुनिक तकनीक से लैस हैं ई-बसें
ऑटोमैटिक पैसेंजर काउंटिंग सिस्टम: बस में चढ़ने और उतरने वाले यात्रियों की संख्या स्वतः दर्ज करेगा।
हाइड्रोलिक रैंप: दिव्यांग यात्रियों की सुविधा के लिए हाइड्रोलिक रैंप लगाया गया है, जिससे व्हीलचेयर पर सवार यात्री आसानी से बस में प्रवेश कर सकेंगे।
सीसीटीवी कैमरे: यात्रियों की सुरक्षा के लिए प्रत्येक बस में आठ सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, जो अंदर और बाहर दोनों ओर की गतिविधियों की रिकॉर्डिंग करेंगे।
पैनिक बटन: किसी भी आपात स्थिति में उपयोग के लिए पैनिक बटन दिया गया है। इसे दबाते ही आरटीओ और पुलिस कंट्रोल रूम तक अलर्ट पहुंच जाएगा।
स्टॉप बटन: किसी यात्री को आपात स्थिति में उतरना हो तो उसके लिए बस में स्टॉप बटन लगाया गया है। बटन दबाते ही चालक के पास सिग्नल पहुंच जाएगा और वह सुरक्षित स्थान पर बस रोक सकेगा।
किराया: बसों का किराया प्रति किलोमीटर के हिसाब से 1.50 रुपये निर्धारित किया गया है, जबकि न्यूनतम किराया सात रुपये तक है।
ई-बसों में सवार होकर महापौर और पार्षदों ने किया भ्रमण
इधर, नई ई-बस सेवा का अनुभव लेने के लिए सोमवार को महापौर, नगर निगम परिषद अध्यक्ष और पार्षदों ने ई-बसों में सवार होकर शहर का भ्रमण किया। नगर निगम मुख्यालय अटल भवन से सभी जनप्रतिनिधि पांच ई-बसों में रवाना हुए। बसों का काफिला माता मंदिर, न्यू मार्केट, पॉलिटेक्निक चौराहा, कमला पार्क, रेत घाट, वीआईपी रोड, लालघाटी, हमीदिया अस्पताल और कर्फ्यू वाली माता मंदिर होते हुए कमला पार्क, न्यू मार्केट होते हुए वापस निगम मुख्यालय पहुंचा।
भ्रमण से पहले महापौर ने सभी पार्षदों के सामने बस में लगा हाइड्रोलिक रैंप का प्रदर्शन कराया। उन्होंने बताया कि इस सुविधा से व्हीलचेयर पर आने वाले दिव्यांग यात्रियों को बस में चढ़ने-उतरने में आसानी होगी। यात्रा के दौरान पार्षदों ने बीसीएलएल के कर्मचारियों से बसों की तकनीकी और सुरक्षा सुविधाओं की जानकारी ली। उन्होंने पैनिक बटन, स्टॉप बटन और ऑटोमैटिक पैसेंजर काउंटिंग सिस्टम के संचालन और उपयोग को लेकर सवाल भी किए।
शहर भ्रमण के दौरान वीआईपी रोड स्थित राजा भोज की प्रतिमा के पास बसों को रोककर महापौर, परिषद अध्यक्ष और पार्षदों ने चना जोर गरम का स्वाद लिया। वहीं, वापसी के दौरान कमला पार्क के पास सभी ने भुट्टा पार्टी का आनंद लिया। इस दौरान निगम परिषद अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी, एमआईसी सदस्य मनोज राठौर सहित अन्य पार्षद मौजूद थे।
भोपाल के ट्रैफिक के लिहाज से इसलिए खास
ई-बस की लंबाई 9 मीटर और चौड़ाई करीब साढ़े 3 मीटर है, जबकि वर्तमान में जो सिटी बसें चल रही हैं, उनकी लंबाई 12 मीटर तक है। ऐसे में कई बार ये बसें तंग सड़कों और ट्रैफिक में फंस जाती है। सोमवार को जब बसों का ट्रैफिक से भरी सड़कों पर ट्रायल रन हुआ तो कोई दिक्कत नहीं आई।
नई ई-बस सेवा शहर के सार्वजनिक परिवहन को आधुनिक और सुविधाजनक बनाएगी। इन बसों में दिव्यांगजनों के लिए हाइड्रोलिक रैंप, यात्रियों की सुरक्षा के लिए पैनिक बटन, स्टाप बटन जैसी आधुनिक सुविधाएं हैं। ट्रायल पूरा होने के बाद अगले सप्ताह से नागरिकों को इन बसों का लाभ मिलना शुरू हो जाएगा। – मालती राय, महापौर
















