वाशिंगटन/ तेहरान 

ईरान युद्ध में अमेरिका को जो झटका लगा है वैसा झटका पिछले दो दशक में कभी नहीं लगा। ईरान ने दावा किया है कि उसने अमेरिकी वायुसेना को दो विमानों को मार गिराया है। बताया जा रहा है कि एक पायलट की जान बच गई है जबकि दूसरा लापता है। पिछले 20 साल में ऐसा नहीं हुआ कि अमेरिकी सेना के दो विमान विदेशी धरती पर गिरा दिए गए हों। एक तरफ डोनाल्ड ट्रंप कहते हैं कि ईरान एकदम कमजोर हो गया है तो दूसरी तरफ ईरान कहता है कि वजह जवाब देने के लिए तैयार है। दो दिन पहले ही डोनाल्ड ट्रंप ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा था कि अमेरिका ने ''ईरान को हरा दिया है और उसे पूरी तरह से तबाह कर दिया है और हम अपने काम को बहुत तेजी से पूरा करने जा रहे हैं।'

इराक में गिराया गया था अमेरिका का विमान
ईरान ने शुक्रवार को अमेरिका का एफ-15ई स्ट्राइक ईगल मार गिराया। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक एक पायलट को बचा लिया गया जबकि दूसरे की तलाश जारी है। ईरान की मीडिया ने दावा किया है कि यूएस ए-10 विमान को भी निशाना बनाया गया है। इससे पहले 2003 में इराक युद्ध के दौरान ए-10 थंडरबोल्ट II को गिराया गया था। अमेरिकी सैन्य अधिकारियों ने कहा कि अब तक ऐसा कोई भी देश नहीं कर पाया, यह कोई चमत्कार से कम नहीं है।

मारे गए 13 अमेरिकी सैनिक
इस युद्ध के दौरान अब तक कुल 365 अमेरिकी सैनिक घायल हुए हैं, जबकि 13 सैनिकों की मौत हुई है। बीसीसी ने अमेरिकी रक्षा विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के हवासे से अपनी रिपोर्ट में यह जानकारी दी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि अभी तक यह तुरंत स्पष्ट नहीं है कि इन आंकड़ों में ईरान में हाल ही में एक अमेरिकी लड़ाकू विमान के मार गिराये जाने और लापता चालक दल को खोजने के लिए चलाए गये बचाव अभियान के दौरान घायल हुए सैनिक भी घायलों की इस सूची में शामिल हैं या नहीं।

अमेरिकी रक्षा विभाग की ओर से शुक्रवार को जारी आंकड़ों के अनुसार मरने वालों की संख्या 13 ही बनी हुई है। युद्ध के दौरान घायल हुए अमेरिकी सैनिकों में सेना के 247 जवान, नौ सेना के 63 जवान, वायु सेना के 36 जवान और 19 मरीन सैनिक शामिल हैं।

नाम नहीं जाहिर करने की शर्त पर एक अमेरिकी अधिकारी ने संवेदनशील सैन्य स्थिति पर चर्चा करते हुए पहले कहा था कि यह स्पष्ट नहीं है कि विमान दुर्घटनाग्रस्त हुआ या उसे मार गिराया गया या इसमें ईरान की कोई भूमिका थी। चालक दल की स्थिति और विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने का सटीक स्थान भी तुरंत ज्ञात नहीं हो सका।