Category: उत्तर प्रदेश

  • काशी के नभ में गूंजेगा वायुसेना का शौर्य: नमो घाट पर 24 से 26 अक्टूबर तक एयर शो

    काशी के नभ में गूंजेगा वायुसेना का शौर्य: नमो घाट पर 24 से 26 अक्टूबर तक एयर शो

    काशी के नभ में गूंजेगा वायुसेना का शौर्य: नमो घाट पर 24 से 26 अक्टूबर तक एयर शो

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने परखीं तैयारियां, सेक्टरवार तैनात होंगे मैजिस्ट्रेट व पुलिस बल

    25 अक्टूबर के मुख्य समारोह में पीएम मोदी और रक्षा मंत्री के शामिल होने की संभावना

    भीड़ व यातायात प्रबंधन की बने एकीकृत कार्ययोजना, मॉकड्रिल कराने के निर्देश

    काशी
    देवाधिदेव महादेव की पावन नगरी काशी भारतीय वायुसेना के शौर्य, साहस और सामर्थ्य की साक्षी बनने जा रही है। गंगा की अविरल धारा के किनारे बसी काशी में जब आसमान भारतीय वायुसेना के विमानों की गर्जना से गूंजेगा, तो यह दृश्य देश के सामरिक सामर्थ्य और काशी की सनातन सांस्कृतिक विरासत का अनूठा संगम प्रस्तुत करेगा। वाराणसी के नमो घाट पर आगामी 24 से 26 अक्टूबर तक प्रस्तावित भव्य एयर शो की तैयारियों की मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को उच्चस्तरीय समीक्षा की। 25 अक्टूबर को प्रस्तावित मुख्य समारोह में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तथा रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की गरिमामयी उपस्थिति संभावित है।

    समीक्षा बैठक में भारतीय वायुसेना के अधिकारियों, वाराणसी जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों ने मुख्यमंत्री के समक्ष एयर शो की तैयारियों और संपूर्ण कार्ययोजना का विस्तृत प्रस्तुतीकरण किया। अधिकारियों ने आयोजन स्थल पर दर्शक दीर्घाओं, ग्रैंड स्टैंड, विशिष्ट एवं अतिविशिष्ट अतिथियों के लिए निर्धारित क्षेत्र, मीडिया एरीना, प्रवेश एवं निकास मार्ग, सुरक्षा जांच केंद्र तथा अन्य व्यवस्थाओं की जानकारी दी। नमो घाट के साथ गंगा के तटवर्ती क्षेत्रों में संभावित भीड़ को ध्यान में रखते हुए विभिन्न क्षेत्रों को जोन और सेक्टर में विभाजित कर व्यवस्थित प्रबंधन की कार्ययोजना से भी मुख्यमंत्री को अवगत कराया गया।

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि इस एयर शो को लेकर आम नागरिकों में भी उत्सुकता है और बड़ी संख्या में लोग भारतीय वायुसेना के प्रदर्शन को देखने के लिए पहुंच सकते हैं। इसे देखते हुए क्राउड मैनेजमेंट, सुगम यातायात, पार्किंग और जोनवार स्थल चिन्हांकन की व्यवस्था पहले से सुनिश्चित की जाए। दर्शकों के आवागमन के मार्ग स्पष्ट और सुगम हों तथा प्रत्येक क्षेत्र में पेयजल, प्राथमिक चिकित्सा, स्वच्छता और सुरक्षा से जुड़ी आवश्यक व्यवस्थाएं पर्याप्त रूप से उपलब्ध रहें। उन्होंने प्रशिक्षित पुलिसकर्मियों की तैनाती के साथ प्रत्येक सेक्टर के लिए मैजिस्ट्रेट की सुनियोजित तैनाती सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि आयोजन के दौरान नमो घाट के साथ काशी के प्रमुख घाटों और आसपास के क्षेत्रों में भी बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की संभावना है। ऐसे में घाटों पर भीड़ प्रबंधन, यातायात संचालन, पार्किंग तथा जल और थल मार्ग से आवागमन की व्यवस्थाओं को एकीकृत कार्ययोजना के साथ संचालित किया जाए। संभावित परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा और आपातकालीन व्यवस्थाओं का पूर्वाभ्यास भी कराया जाए, ताकि आवश्यकता पड़ने पर सभी संबंधित टीमें तत्काल समन्वित कार्रवाई कर सकें।

    मुख्यमंत्री ने वाराणसी मंडल के सभी जनपदों के जिलाधिकारियों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि एयर शो के दौरान आसपास के जनपदों से आने वाले लोगों की आवाजाही को देखते हुए आवश्यक मानव संसाधन और अन्य व्यवस्थाओं का समुचित समन्वय किया जाए। भारतीय वायुसेना, जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन तथा सभी संबंधित विभाग आपसी समन्वय के साथ निर्धारित समयसीमा में तैयारियां पूरी करें, ताकि काशी आने वाले श्रद्धालुओं, पर्यटकों और आम नागरिकों को सुरक्षित एवं सुगम वातावरण उपलब्ध कराया जा सके।

  • सीएम योगी से मिली स्टार्टअप को नई दिशा, इमरजेंसी हेल्थकेयर में तकनीक से बदलेगी तस्वीर

    सीएम योगी से मिली स्टार्टअप को नई दिशा, इमरजेंसी हेल्थकेयर में तकनीक से बदलेगी तस्वीर

    सीएम योगी से मिली स्टार्टअप को नई दिशा, इमरजेंसी हेल्थकेयर में तकनीक से बदलेगी तस्वीर

     योगी सरकार इमरजेंसी हेल्थकेयर को बना रही हाईटेक, गोल्डन ऑवर में मरीजों को मिलेगी शीघ्र मदद

     लखनऊ के स्टार्टअप हिंदकेयर मेडटेक की पहल, एम्बुलेंस से अस्पताल तक बेहतर समन्वय पर जोर

    स्मार्ट तकनीक से दुर्घटना की जानकारी समय पर देने और मरीज को उचित अस्पताल तक पहुंचाने का प्रयास

    लखनऊ,
    गंभीर बीमारी, दुर्घटना या किसी अन्य मेडिकल इमरजेंसी में शुरुआती पहला घंटा मरीज की जिंदगी के लिए बेहद अहम होते हैं। ऐसे समय में सिर्फ इलाज ही नहीं, बल्कि घटना की जानकारी, एंबुलेंस की उपलब्धता, अस्पताल तक सूचना पहुंचने और मरीज के लिए जरूरी मेडिकल तैयारियां समय पर होना भी महत्वपूर्ण है। इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए लखनऊ का हेल्थकेयर टेक्नोलॉजी स्टार्टअप हिंदकेयर मेडटेक इमरजेंसी हेल्थकेयर को तकनीक से जोड़ने की दिशा में काम कर रहा है। स्टार्टअप की कोशिश ऐसी तकनीक विकसित करने की है, जिससे इमरजेंसी की स्थिति में मरीज, रिस्पॉन्स टीम, एंबुलेंस और अस्पताल के बीच बेहतर समन्वय स्थापित हो सके।

    गोल्डन ऑवर पर केंद्रित है हिंदकेयर मेडटेक स्टार्टअप
    यूपी स्टार्टअप मिशन के सीईओ सुमित महाजन ने बताया कि योगी सरकार की ओर से प्रदेश में स्टार्टअप और इनोवेशन के लिए संस्थागत व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है। उत्तर प्रदेश स्टार्टअप नीति-2026 के तहत प्रदेश को देश के अग्रणी स्टार्टअप इकोसिस्टम में स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है। नीति में यू-हब जैसे डीप-टेक इनक्यूबेशन सेंटर, 20 नए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, जिला स्तर पर इनक्यूबेशन के विस्तार और स्टार्टअप्स के लिए वित्तीय सहायता का प्रावधान किया गया है। इसी के तहत मेडिकल क्षेत्र में काम कर रहे स्टार्टअप हिंदकेयर मेडटेक को लखनऊ स्थित एसजीपीजीआई के एसटीपीआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में इनक्यूबेट किया गया है। स्टार्टअप की पूरी सोच इमरजेंसी के उस 'गोल्डन ऑवर' पर केंद्रित है, जिसमें समय पर पहचान, मरीज को अस्पताल तक पहुंचाना और तत्काल चिकित्सा उपलब्ध कराना बेहद महत्वपूर्ण होता है। स्टार्टअप का मूल विचार है कि सही मरीज को सही समय पर सही जानकारी के साथ सही अस्पताल तक पहुंचाया जाए।

    दुर्घटना की सूचना से अस्पताल तक बनेगा तकनीकी कनेक्शन
    मिशन के सीईओ सुमित महाजन ने बताया कि स्टार्टअप की प्रमुख पहल लाइफडैश स्मार्ट क्रैश-डिटेक्शन और इमरजेंसी अलर्ट प्लेटफॉर्म है। यह तकनीक संभावित सड़क दुर्घटना की पहचान करने और रियल टाइम मॉनिटरिंग के साथ इमरजेंसी नोटिफिकेशन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से तैयार की गई है। इसके जरिए घटना स्थल से इमरजेंसी रिस्पॉन्डर, एंबुलेंस सेवा और अस्पताल तक सूचना के प्रवाह को बेहतर बनाने पर जोर दिया गया है।स्टार्टअप का उद्देश्य केवल दुर्घटना की पहचान तक सीमित नहीं है। इसकी परिकल्पना एक ऐसे कनेक्टेड इमरजेंसी रिस्पॉन्स सिस्टम की है, जिसमें घटनास्थल से लेकर अस्पताल तक जरूरी जानकारी तेजी से पहुंच सके। इससे सूचना और समन्वय में होने वाली देरी को कम करने में मदद मिल सकती है और गोल्डन ऑवर के दौरान मरीज को समय पर चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने की प्रक्रिया अधिक प्रभावी हो सकती है।

    सीएम योगी के सामने भी प्रस्तुत की तकनीक
    स्टार्टअप के संस्थापक ने हाल ही में गोरखपुर में आयोजित एक स्टार्टअप/ टेक्नोलॉजी कार्यक्रम में अपनी तकनीक और विजन को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सामने भी प्रस्तुत किया। स्टार्टअप की टीम ने इमरजेंसी हेल्थकेयर में तकनीक के इस्तेमाल और मरीज, एंबुलेंस तथा अस्पताल के बीच बेहतर कनेक्टिविटी की अपनी परिकल्पना साझा की। स्टार्टअप की टीम में डॉ. आयुष सिंह फाउंडर एवं डायरेक्टर के रूप में क्लीनिकल विजन और हेल्थकेयर रणनीति का नेतृत्व कर रहे हैं।

  • योगी सरकार प्रदेश में कर रही इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग नेटवर्क का विस्तार,पीएम ई- ड्राइव योजना के दूसरे चरण में 1,500 स्थानों का लक्ष्य

    योगी सरकार प्रदेश में कर रही इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग नेटवर्क का विस्तार,पीएम ई- ड्राइव योजना के दूसरे चरण में 1,500 स्थानों का लक्ष्य

    योगी सरकार प्रदेश में कर रही इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग नेटवर्क का विस्तार,पीएम ई- ड्राइव योजना के दूसरे चरण में 1,500 स्थानों का लक्ष्य

    238 स्थानों पर कार्य आगे बढ़ा, 99 स्थानों के लिए समझौता ज्ञापन पूर्ण, 240 नए स्थान भी चिह्नित

    सभी डीएम सार्वजनिक स्थल, बस स्टेशन, मॉल, ढाबों सहित अन्य स्थानों का चिन्हीकरण कर संबंधित विभाग को प्रस्ताव जल्द भेजें

    लखनऊ, 
    उत्तर प्रदेश में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए सार्वजनिक चार्जिंग ढांचे के विस्तार की योजना पर काम तेज किया जा रहा है। योगी सरकार में प्रधानमंत्री ई-ड्राइव योजना के अंतर्गत यूपी रिन्यूएबल एनर्जी डेवलपमेंट एजेंसी (यूपीआरईवी) द्वारा राज्य में बड़े स्तर पर सार्वजनिक इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशन विकसित किए जा रहे हैं। योजना के मौजूदा चरण में 20 समूहों में 238 स्थान स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें से 99 स्थानों के लिए समझौता ज्ञापन की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, जबकि 139 स्थानों पर समझौता ज्ञापन लंबित हैं।

    20 समूहों में 238 स्थान स्वीकृत

    प्रस्तावित चार्जिंग नेटवर्क के तहत राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में गौतमबुद्ध नगर (नोएडा-ग्रेटर नोएडा) में 39, गाजियाबाद में 6 और मेरठ में 35 स्थान शामिल हैं। गैर-एनसीआर क्षेत्र में आगरा के 21, प्रयागराज के 13, गोरखपुर के 32, कानपुर के 12, कानपुर देहात के 2, लखनऊ के 36, मथुरा के 14 और वाराणसी के 28 स्थान प्रस्तावित हैं। कुल 238 स्वीकृत स्थानों में से 99 पर समझौता ज्ञापन निष्पादित हो चुके हैं।

    पीएम ई- ड्राइव योजना के दूसरे चरण में 1,500 स्थानों का लक्ष्य
       प्रधानमंत्री ई-ड्राइव योजना के दूसरे चरण में एनसीआर के 8 जिलों और माल परिवहन गलियारे को ध्यान में रखते हुए कुल 1,500 स्थानों का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इनमें नगर निगमों, उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम, परिवहन विभाग, विद्युत वितरण कंपनियों, औद्योगिक विकास प्राधिकरणों, पर्यटन, वित्त, स्वास्थ्य, शिक्षा, गन्ना संस्थान और मंडी समितियों समेत विभिन्न विभागों के स्थान शामिल हैं। अब तक 240 स्थानों की पहचान की जा चुकी है, जबकि 1,260 स्थानों की पहचान की जानी शेष है।

    उत्तर प्रदेश के नगर निगम क्षेत्रों में 129 स्थान चिह्नित किया

    दूसरे चरण के तहत नगर निगम क्षेत्रों के लिए कुल 129 स्थान चिह्नित हैं। इनमें अलीगढ़ के 22, अयोध्या के 13, बरेली के 16, फिरोजाबाद के 15, झांसी के 16, मुरादाबाद के 7, सहारनपुर के 5, शाहजहांपुर के 10, आगरा के 8, कानपुर नगर के 11, मेरठ के 5 तथा कानपुर देहात का एक स्थान शामिल है। इसके अलावा उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम के लिए 74, गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण के लिए 10 और विद्युत वितरण कंपनियों के लिए 26 स्थानों की पहचान की गई है।

    अस्पतालों, औद्योगिक क्षेत्रों और शैक्षणिक संस्थानों में भी चार्जिंग स्टेशन
      इस योजना के तहत मेडिकल कॉलेजों, जिला अस्पतालों, औद्योगिक क्षेत्रों, उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण के औद्योगिक पार्कों, विश्वविद्यालयों, गन्ना संस्थान केंद्रों, मंडी समितियों तथा जिलाधिकारी कार्यालय, विकास भवन और तहसील कार्यालयों जैसे स्थानों को भी शामिल किया गया है। प्रस्तावित सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशनों में 60 किलोवाट क्षमता के दो डीसी चार्जर और 12 किलोवाट क्षमता के एक एसी/डीसी चार्जर की व्यवस्था का प्रावधान है। योजना का उद्देश्य प्रदेश में इलेक्ट्रिक वाहन उपयोगकर्ताओं के लिए सुलभ, विश्वसनीय और व्यापक सार्वजनिक चार्जिंग ढांचा तैयार करना है।

       दरअसल, अभी हाल ही में मुख्य सचिव की बैठक में बताया गया कि एनसीआर एवं नॉन-एनसीआर क्षेत्रों में चिन्हित 238 लोकेशन के सापेक्ष अब तक 99 एमओयू पर हस्ताक्षर किए जा चुके हैं, जबकि 139 लोकेशन के एमओयू शेष हैं। मुख्य सचिव ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए कि अपने-अपने जनपदों में सार्वजनिक स्थलों, बड़े कार्यालयों, बस स्टेशनों, इंडस्ट्रियल पार्कों, शिक्षण संस्थानों, मॉल, ढाबों, पार्किंग स्थलों सहित अन्य उपयुक्त स्थानों का चिन्हीकरण कर संबंधित विभाग को प्रस्ताव शीघ्र प्रेषित करें, ताकि इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए आवश्यक चार्जिंग अवसंरचना के विकास की कार्यवाही समयबद्ध रूप से आगे बढ़ाई जा सके।

  • छात्रवृत्ति का पैसा तक खा गई थी सपा सरकार: सीएम योगी

    छात्रवृत्ति का पैसा तक खा गई थी सपा सरकार: सीएम योगी

    छात्रवृत्ति का पैसा तक खा गई थी सपा सरकार: सीएम योगी

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूर्वदशम (9-10) तथा दशमोत्तर कक्षाओं के 4.60 लाख से अधिक विद्यार्थियों के खाते में हस्तांतरित की 148 करोड़ रुपये से अधिक छात्रवृत्ति/शुल्क प्रतिपूर्ति

    मुख्यमंत्री ने 11 विद्यार्थियों को मंच पर अपने हाथों से दिया छात्रवृत्ति प्रमाण पत्र, 9 वर्ष में 4 करोड़ से अधिक बच्चों को मिली छात्रवृत्ति/शुल्क प्रतिपूर्ति

    अगले महीने 50 हजार मेधावी छात्राओं को स्कूटी देगी सरकार: सीएम योगी

    मंत्रियों का उदाहरण देकर बोले सीएम- ईमानदारी से प्रयास होगा तो परिणाम भी अनुकूल आएगा

    लखनऊ, 
     मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूर्ववर्ती सपा सरकार पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि 2016-17 में अनुसूचित जाति-जनजाति की छात्रवृत्ति भेजी ही नहीं गई। तत्कालीन सरकार यह छात्रवृत्ति खा गई। 2017 में हमारी सरकार बनी तो हमने 2016-17 व 2017-18 की छात्रवृत्ति एक साथ भेजी। पहले केवल 2900 करोड़ रुपये ही छात्रवृत्ति दी जाती थी। आज हमारी सरकार 6200 करोड़ रुपये (दोगुने से अधिक) छात्रवृत्ति देती है। 

    मुख्यमंत्री ने शनिवार को लोकभवन में चालू वित्त वर्ष के लिए पूर्वदशम (9-10) तथा दशमोत्तर कक्षाओं के 4.60 लाख से अधिक विद्यार्थियों के खाते में 148 करोड़ रुपये से अधिक की छात्रवृत्ति/शुल्क प्रतिपूर्ति हस्तांतरित की और 11 विद्यार्थियों को अपने हाथ से छात्रवृत्ति प्रमाण पत्र भी सौंपे। सीएम ने आश्वस्त किया कि छात्रों के लिए पैसे की कोई कमी नहीं है। हर पात्र बच्चे को छात्रवृत्ति मिलेगी, छूटे हुए बच्चे भी जल्द आवेदन करें। उन्होंने बच्चों का मार्गदर्शन करते हुए कहा कि छात्रवृत्ति की राशि को खान-पान के बजाय शिक्षा पर ही खर्च कीजिए। इससे अच्छी पाठ्य पुस्तकें, रेफरेंस बुक खरीदिए। पाठ्यक्रम के साथ ही महापुरुषों की आत्मकथा, ज्ञानवर्धक व धार्मिक पुस्तकों को पढ़िए, अपना बुक बैंक बढ़ाइए। सरकार दो करोड़ युवाओं को टैबलेट दे रही है, 60 लाख को मिल चुका है। शेष को भी जल्द दिया जाएगा।

    अब सीधे अकाउंट में जाती है छात्रवृत्ति
    सीएम ने कहा कि पहले 100 में से 60-70 बच्चों को ही छात्रवृत्ति का लाभ मिलता था। बाबू और अन्य लोग इस पर डाका डालते थे, छात्र ठगा रहता था। छात्रवृत्ति के लिए चक्कर लगाने में उससे ज्यादा तो युवाओं का किराया लग जाता था। लेकिन, आज खाता खोलकर छात्रों का पैसा सीधे उसमें भेजा जाता है। हमारे समय यह व्यवस्था नहीं थी, लेकिन मोदी जी ने जीरो अकाउंट पर बैंक खाते खुलवा दिए।

    9 वर्ष में 4 करोड़ से अधिक बच्चों को छात्रवृत्ति/शुल्क प्रतिपूर्ति
    सीएम योगी ने कहा कि गत वर्ष 69 लाख बच्चों को 6200 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति वितरित की गई। 9 वर्ष में 4 करोड़ से अधिक बच्चों को छात्रवृत्ति-शुल्क प्रतिपूर्ति मिली है, जबकि 2017 के पहले यह राशि और छात्रों की संख्या भी कम थी। पहले की सरकारें युवाओं को प्रोत्साहन नहीं देती थी और न समय से छात्रवृत्ति मिलती थी।

    छात्रवृत्ति देने के लिए सरकार ने तय की समयसीमा 
    सीएम ने बताया कि गत वर्ष अनुसूचित जाति-जनजाति के 26.26 लाख विद्यार्थियों को 2750 करोड़, अल्पसंख्यक वर्ग के 5.89 लाख बच्चों को 360 करोड़, पिछ़ड़ा वर्ग के 37 लाख विद्यार्थियों को 3072 करोड़ रुपये छात्रवृत्ति दी गई। इसी क्रम में अल्प आय वर्ग वर्ग के 9.40 लाख बच्चों को छात्रवृत्ति दी गई। सरकार ने छात्रवृत्ति वितरण की समयसीमा तय की है। प्रवेश प्रक्रिया संपन्न होने के बाद छात्रवृत्ति की राशि खाते में भेजनी शुरू की गई। तय किया गया कि 2 अक्टूबर (अवकाश के कारण 3 अक्टूबर) तथा 26 जनवरी तक हर हाल में छात्रों तक धनराशि पहुंच जाए।

    अगले महीने 50,000 मेधावी बच्चियों को देंगे स्कूटी
    मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले जेईई, नीट की तैयारी के लिए युवा दूसरे राज्यों में जाते थे। अब युवा मुख्यमंत्री अभ्युदय कोचिंग के जरिए इसका लाभ उठा रहे हैं। सीएम ने मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना व मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि अगले महीने 50,000 मेधावी बच्चियों को स्कूटी देंगे। 2017 के पहले सैफई सिंडिकेट को लूट-खसोट से ही फुर्सत नहीं थी। अपने परिवार की सोचने वाले इन लोगों के लिए प्रदेश के अन्य लोग बेगाने थे, पर अब यूपी खुशहाली की राह पर चला है। 

    कोई भी पात्र छूटने न पाए, हर महीने बच्चे के खाते में जाए पैसा 
    सीएम ने समाज कल्याण, पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग, अल्पसंख्यक कल्याण विभाग से कहा कि हर महीने बच्चे के खाते में पैसा जाए, कोई भी पात्र बच्चा छूटने न पाए। पिछली बार कई कारणों से एससी-एसटी वर्ग के 4 लाख बच्चों को छात्रवृत्ति नहीं मिल पाई। तब पोर्टल को ठीक कराया गया, अब उन वंचित बच्चों को भी छात्रवृत्ति मिलने जा रही है। धनराशि के अभाव में कोई बच्चा शिक्षा से वंचित न रहने पाए। छात्रवृत्ति अल्प आय परिवार के छात्रों के लिए संबल बनेगी। 

    हर पात्र बच्चे तक छात्रवृत्ति पहुंचाएंगे
    सीएम ने कहा कि हर पात्र बच्चे तक छात्रवृत्ति पहुंचाएंगे। आज 4.60 लाख बच्चों को छात्रवृत्ति मिल रही है। इसे 70 लाख बच्चों तक पहुंचाना है। मोदी जी के टेक्नोलॉजी अभियान से सेंधमारी रुकी, अब बच्चों की छात्रवृत्ति में कोई सेंधमारी नहीं कर सकता। सरकार ने अब तक लगभग 10 लाख युवाओं को सरकारी नौकरी दी है। छह माह में एक लाख और युवाओं को नौकरी मिलेंगी। आप भी मेहनत से तैयारी कीजिए, नौकरी जरूर मिलेगी। 

    ईमानदारी से प्रयास होगा तो परिणाम भी अनुकूल
    मुख्यमंत्री ने मंच पर बैठे मंत्रियों का उदाहरण देकर युवाओं से कहा कि परिश्रम का कोई विकल्प नहीं होता। प्रयास ईमानदारी से होगा तो परिणाम भी अनुकूल आएगा। उन्होंने कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर के संघर्षों का उदाहरण देते हुए कहा कि परिश्रम का परिणाम आता है। राज्यमंत्री संजीव गोंड जंगलों में भटकते थे, उन्हें लगा कि नौकरी के पीछे नहीं भागना है, बल्कि जनता व जनजातीय समुदाय की आवाज उठाना है। मंत्री असीम अरुण आईपीएस के रूप में एडीजी व कानपुर के पुलिस आयुक्त रह चुके हैं। दानिश आजाद अंसारी और नरेंद्र कश्यप भी संघर्ष के साथ सामाजिक कार्य करते रहे। एससी-एसटी आयोग के अध्यक्ष बैजनाथ रावत पूर्व विधायक/सांसद रहे हैं। अब ये सभी लोग मंत्री के रूप में जनता की समस्याओं के समाधान का रास्ता निकालते हैं।

    बच्चों से बोले सीएम-आपकी पीढ़ी सौभाग्यशाली
    सीएम ने बच्चों से कहा कि आपकी पीढ़ी सौभाग्यशाली है कि यूपी में ऐसे समय में पढ़ रहे हैं, जब पहचान का संकट नहीं है। 2017 से पहले विद्यालयों में शिक्षक नहीं थे, भवन जर्जर थे। बेसिक शिक्षा परिषद (पहली से आठवीं तक) में ड्राप आउट रेट 19-20 फीसदी था। सरकार इसे ठीक करने में रूचि नहीं लेती थी। सरकार बनने पर जब हमने अध्ययन कराया तो पता चला कि अधिसंख्य बालिकाएं इसलिए स्कूल छोड़ती थीं, क्योंकि वहां टॉयलेट व पेयजल आदि की व्यवस्था नहीं थी। हमने ऑपरेशन कायाकल्प के जरिए इसमें सुधार किया। अब बालक-बालिकाओं के लिए अलग-अलग टॉयलेट, पेयजल, फर्नीचर, फर्श आदि के साथ ही दो यूनिफॉर्म, बैग, किताब, स्वेटर, जूता-मोजा आदि उपलब्ध करा रहे हैं। 

    अब सीना तानकर चलता है ‘यूपीवाला’
    सीएम ने कहा कि बेसिक शिक्षा परिषद के 1.60 करोड़ बच्चों को यह सुविधा मिल रही है। 2017 के पहले स्कूल वीरान थे, उन्हें सुविधाएं नहीं मिलती थीं। अब निर्माण श्रमिकों, अनाथ, निराश्रित बच्चों के लिए 18 मंडलों में अटल आवासीय विद्यालय बनाए गए हैं। इनमें 18,000 बच्चों का प्रवेश हुआ है। सरकार इन बच्चों को पालन-पोषण, अच्छा वातावरण व अच्छी शिक्षा उपलब्ध करा रही है। गरीब परिवार की बालिकाओं के लिए अब 746 विकास खंडों में कस्तूरबा गांधी विद्यालय हैं। इन्हें आठवीं से बढ़ाकर 12वीं तक किया गया। कमजोर, पिछ़ड़े व एससी-एसटी वर्ग के बच्चों के लिए जयप्रकाश नारायण आश्रम पद्धति के आवासीय विद्यालय, पीएमविद्यालय हैं। प्रोजेक्ट अलंकार के तहत 2300 से अधिक विद्यालयों के नए भवन बनाए गए हैं। यहां नए लैब, लाइब्रेरी, अटल टिकरिंग लैब, डिजिटल लाइब्रेरी, स्मार्ट क्लास आदि की सुविधाएं हैं। अब 15 दिन में हाईस्कूल-इंटर की परीक्षा होती है और 15 दिन में परिणाम भी आता है। पहले पढ़ाई न होने से प्रदेश बीमारू कहलाता था। अब रेवेन्यू सरप्लस यूपी भारत के विकास में योगदान दे रहा है। अब ‘यूपी वाला’ सीना तानकर चलता है।

    सही दिशा में आगे बढ़ा उत्तर प्रदेश 
    सीएम ने कहा कि यूपी अब सही दिशा में आगे बढ़ा है। युवा, नौनिहाल यूपी के सारथी हैं। उन्होंने बच्चों से कहा कि आप जब 36-37 साल के होंगे, तब 2047 तक आपको खुशहाल व समृद्ध भारत मिलेगा। इसके लिए आपको भी योगदान देना होगा, क्योंकि देश से बढ़कर कुछ नहीं हो सकता। देश खुशहाल, समृद्ध व सुरक्षित रहेगा तो हम भी रहेंगे।  

    बॉक्स
    सीएम के हाथों इन विद्यार्थियों को मिला छात्रवृत्ति प्रमाण पत्र

    सीएम योगी आदित्यनाथ के हाथों छात्र रणवीर वर्मा, मिली, अजीत रावत, अंश मिश्रा, अनन्या अवस्थी, अधिकांश वर्मा, करिश्मा, अभिषेक यादव, बुशरा, साइमा, अल कैफ को मंच पर छात्रवृत्ति प्रमाण पत्र मिला।

  • UP में 23 PCS अफसरों का तबादला, कई जिलों में बदली प्रशासन की कमान

    UP में 23 PCS अफसरों का तबादला, कई जिलों में बदली प्रशासन की कमान

    लखनऊ 
    उत्तर प्रदेश सरकार ने एक बार फिर प्रशासनिक स्तर पर बड़ा फेरबदल किया है। शासन ने 23 PCS अधिकारियों के तबादले करते हुए उन्हें अलग-अलग जिलों और विभागों में नई जिम्मेदारियां सौंपी हैं। तबादला सूची में अपर जिलाधिकारी, उपजिलाधिकारी, अपर नगर आयुक्त सहित कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक पदों पर तैनात अधिकारी शामिल। 

    यूपी में 23 PCS अफसरों का तबादला

    देवरिया और संतकबीरनगर में बदले अधिकारी
    चंद्र कुमार को अपर जिलाधिकारी (न्यायिक), संतकबीरनगर के पद से स्थानांतरित कर मुख्य राजस्व अधिकारी, देवरिया बनाया गया है। वहीं जितेंद्र विक्रम को उपजिलाधिकारी, ललितपुर से स्थानांतरित कर अपर जिलाधिकारी (न्यायिक), संतकबीरनगर की जिम्मेदारी दी गई है।इसके अलावा लवी त्रिपाठी को अपर नगर आयुक्त, नगर निगम मेरठ से हटाकर अपर जिलाधिकारी (प्रशासन), सहारनपुर बनाया गया है।

    मेरठ और रामपुर में भी नई तैनाती
    राजेश कुमार को उपजिलाधिकारी, सिद्धार्थनगर से अपर नगर आयुक्त, नगर निगम मेरठ बनाया गया है। वहीं पुष्पेंद्र पटेल को उपजिलाधिकारी, अमेठी से स्थानांतरित कर अपर जिलाधिकारी (प्रशासन), रामपुर की जिम्मेदारी दी गई है। प्रतीक्षारत चल रहे अर्पित गुप्ता को कुलसचिव, बांदा कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय नियुक्त किया गया है।

    विश्वविद्यालय और दुग्ध विभाग में भी बदलाव
    विजय शंकर को उपजिलाधिकारी, बिजनौर से स्थानांतरित कर कुलसचिव, महात्मा बुद्ध कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, कुशीनगर बनाया गया है।वहीं अभिनव कन्नौजिया को उपजिलाधिकारी, अमेठी से हटाकर संयुक्त दुग्ध आयुक्त, दुग्ध आयुक्त कार्यालय की जिम्मेदारी दी गई है।

    मेरठ विकास प्राधिकरण में बदली कमान
    बृजेश कुमार सिंह को अपर जिलाधिकारी (नगर), मेरठ से स्थानांतरित कर सचिव, मेरठ विकास प्राधिकरण बनाया गया है।शिवानी सिंह को संबद्ध राजस्व परिषद, लखनऊ से हटाकर अपर जिलाधिकारी (नमामि गंगे एवं ग्रामीण जलापूर्ति), जालौन की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं प्रेम चंद्र मौर्य को जालौन से स्थानांतरित कर अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व), प्रतापगढ़ बनाया गया है।

    लखनऊ से मुरादाबाद तक अधिकारियों का फेरबदल
    रामजी मिश्रा को उपनिदेशक, उत्तर प्रदेश राज्य कृषि उत्पादन मंडी परिषद से हटाकर अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व), लखनऊ बनाया गया है। राजेंद्र कुमार को उपजिलाधिकारी, गाजियाबाद से अपर जिलाधिकारी (न्यायिक), हरदोई भेजा गया है। वहीं प्रफुल्ल कुमार त्रिपाठी को अपर जिलाधिकारी (न्यायिक), हरदोई से स्थानांतरित कर अपर जिलाधिकारी (प्रशासन), मुरादाबाद बनाया गया है।

    लखीमपुर खीरी और मुजफ्फरनगर में भी बदलाव
    बृजेश कुमार त्रिपाठी को संयुक्त निदेशक, दिव्यांगजन सशक्तीकरण निदेशालय, लखनऊ से स्थानांतरित कर अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व), लखीमपुर खीरी की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं अनिरुद्ध प्रताप सिंह को अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व), मुजफ्फरनगर से हटाकर उपनिदेशक, उत्तर प्रदेश राज्य कृषि उत्पादन मंडी परिषद बनाया गया है।

    कुछ अधिकारी हुए प्रतीक्षारत
    तबादला सूची में किशुक श्रीवास्तव को अपर जिलाधिकारी (नगर), अयोध्या के पद से हटाकर प्रतीक्षारत किया गया है।संगीता देवी को अपर जिलाधिकारी (प्रशासन), मुरादाबाद से स्थानांतरित कर अपर जिलाधिकारी (नगर), अलीगढ़ बनाया गया है।वहीं गंभीर सिंह को अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व), आजमगढ़ से इसी पद पर मुजफ्फरनगर भेजा गया है।

    आजमगढ़, मेरठ और वाराणसी में भी नई जिम्मेदारी
    नरेंद्र सिंह को उपनिदेशक, उत्तर प्रदेश राज्य कृषि उत्पादन मंडी परिषद से स्थानांतरित कर अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व), आजमगढ़ बनाया गया है।आदित्य कुमार प्रजापति को अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व), प्रतापगढ़ से अपर जिलाधिकारी (नगर), मेरठ की जिम्मेदारी दी गई है। इसी तरह अमित कुमार को अपर नगर आयुक्त, वाराणसी से हटाकर उपनिदेशक, उत्तर प्रदेश राज्य कृषि उत्पादन मंडी परिषद बनाया गया है। वहीं मयंक कुंड को उपजिलाधिकारी, हरदोई से स्थानांतरित कर उपजिलाधिकारी, मुरादाबाद बनाया गया है।उत्तर प्रदेश सरकार के इस फेरबदल से कई जिलों और विभागों में प्रशासनिक जिम्मेदारियां बदली हैं। नई तैनाती के साथ संबंधित अधिकारियों को अपने नए पदों पर कार्यभार संभालना होगा।

  • इमरान मसूद की नियुक्ति पर रालोद का तंज, कहा-कांग्रेस-सपा गठबंधन में तनाव चरम पर

    इमरान मसूद की नियुक्ति पर रालोद का तंज, कहा-कांग्रेस-सपा गठबंधन में तनाव चरम पर

    इमरान मसूद की नियुक्ति पर रालोद का तंज, कहा-कांग्रेस-सपा गठबंधन में तनाव चरम पर

    ‘150 से कम सीटों पर नहीं मानेगी कांग्रेस’, रोहित अग्रवाल ने सपा-कांग्रेस गठबंधन पर किया दावा

    रालोद का दावा-सपा के सामने गठबंधन बचाने और अंदरूनी असंतोष से निपटने की चुनौती

    कांग्रेस-सपा की गठबंधन वाली रस्सी में तनाव! रोहित अग्रवाल ने पूछा -अब टूटने की बारी किसकी?

    इमरान मसूद के बयानों पर रालोद का सवाल-किसके इशारे पर बोल रहे थे?

    ‘एक तरफ कुआं, दूसरी तरफ खाई’, रोहित अग्रवाल ने सपा की सियासी स्थिति पर कसा तंज 

    इमरान मसूद को कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जाने पर रालोद का तंज, बोले-कांग्रेस-सपा गठबंधन में तनाव चरम पर

    लखनऊ, 
    उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के द्वारा इमरान मसूद को प्रदेश कांग्रेस कमेटी का कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जाने के बाद 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) के प्रवक्ता रोहित अग्रवाल ने कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच सीट बंटवारे को लेकर खींचतान का दावा करते हुए कहा कि दोनों दलों के गठबंधन में तनाव चरम पर पहुंच गया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस अपने आत्मसम्मान से समझौता करने को तैयार नहीं है और 150 से कम सीटों पर मानने को तैयार नहीं है।

    सपा कार्यकर्ताओं में सीट शेयरिंग को लेकर असंतोष
    रोहित अग्रवाल ने इमरान मसूद के बयान को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि यह देखना होगा कि वह किसके इशारे पर बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी में लंबे समय से टिकट की उम्मीद लगाए बैठे कार्यकर्ता भी कांग्रेस के साथ गठबंधन की जरूरत पर सवाल उठा रहे हैं। उनके मुताबिक, सपा के कुछ कार्यकर्ताओं का मानना है कि उत्तर प्रदेश में कांग्रेस का कोई खास राजनीतिक अस्तित्व नहीं है और उसके साथ सीटों का समझौता करने की जरूरत नहीं है।

    सपा के सामने एक तरफ कुआं, दूसरी तरफ खाई
    रालोद प्रवक्ता ने कांग्रेस और सपा के बीच मौजूदा स्थिति को गठबंधन की रस्सी में बढ़ते तनाव जैसा बताते हुए कहा कि अब देखना होगा कि पहले समाजवादी पार्टी के भीतर असंतोष बढ़ता है या दोनों दलों के गठबंधन में दरार आती है। उन्होंने सपा के सामने इसे एक तरफ कुआं और दूसरी तरफ खाई जैसी स्थिति बताया।

    सपा-कांग्रेस में सत्ता को लेकर खींचतान
    रोहित अग्रवाल ने 2027 के विधानसभा चुनाव का जिक्र करते हुए दावा किया कि दोनों दलों के बीच आपसी तनाव और असमंजस को देखते हुए जनता उनके राजनीतिक इरादों को समझ चुकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि दोनों दलों के बीच सत्ता को लेकर खींचतान है और जनता की सेवा उनके एजेंडे में प्राथमिकता पर नहीं है।

  • साइबर ठगों पर यूपी पुलिस का डिजिटल वार, ठगी की रकम रोकने की दर राष्ट्रीय औसत से आगे

    साइबर ठगों पर यूपी पुलिस का डिजिटल वार, ठगी की रकम रोकने की दर राष्ट्रीय औसत से आगे

    साइबर ठगों पर खाकी का ‘डिजिटल वज्रपात’

    ठगी के बाद धनराशि को रोकने में राष्ट्रीय औसत से आगे निकला यूपी

    यूपी में धनराशि फ्रीज दर सितम्बर में बढ़कर 34% हो गई, जबकि राष्ट्रीय औसत 31%

    सीएम योगी के नेतृत्व में यूपी का साइबर डिफेंस हुआ मजबूत, 84 हजार साइबर अवेयरनेस ड्राइव से तोड़ी गई डिजिटल जालसाजों की रीढ़

    साइबर फ्रॉड मिटिगेशन सेंटर बना डिजिटल ढाल, टेक्नोलॉजी से ठगों का नेटवर्क ध्वस्त कर रही योगी सरकार

    लखनऊ,
     साइबर ठगी के खिलाफ उत्तर प्रदेश में पुलिस की कार्रवाई को तकनीक के जरिए मजबूत किया जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश में साइबर अपराध की रोकथाम के साथ ही ठगी के बाद धनराशि को रोकने और वापस कराने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। सितंबर में साइबर फ्रॉड की रकम फ्रीज कराने की प्रदेश की दर 34 प्रतिशत रही, जो राष्ट्रीय औसत 31 प्रतिशत से अधिक है। साइबर फ्रॉड मिटिगेशन सेंटर के माध्यम से रियल टाइम रूटिंग के जरिये डाइवर्ट की गई रकम को फ्रीज और रिकवर कराने की कार्रवाई की जा रही है। कई मामलों में तय समय सीमा के भीतर 100 प्रतिशत तक रिकवरी दर्ज की गई है।

    प्रदेश में साइबर अपराध से बचाव के लिए 84 हजार साइबर अवेयरनेस ड्राइव भी चलाए गए हैं। इन अभियानों के माध्यम से लोगों को फिशिंग, फर्जी वेबसाइट, डेटा चोरी, फर्जी अप्रूवल और साइबर ठगी के दूसरे तरीकों के प्रति जागरूक किया गया। सिनेमा हॉल से लेकर रेलवे स्टेशन तक विभिन्न स्थानों पर लोगों को डिजिटल लेनदेन में सावधानी बरतने और किसी भी डिजिटल प्लेटफॉर्म की प्रामाणिकता जांचने की जानकारी दी गई।

    रियल टाइम ट्रैकिंग से रकम रोकने की कोशिश

    साइबर फ्रॉड मिटिगेशन सेंटर साइबर ठगी की रकम रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। शिकायत मिलते ही संबंधित बैंक के माध्यम से रकम को रोकने की कार्रवाई शुरू की जाती है। रियल टाइम रूटिंग और डेटा शेयरिंग के जरिये डाइवर्ट किए गए फंड को फ्रीज कराने और उसे वापस कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाती है। इससे ठगी के बाद रकम के तेजी से दूसरे खातों में जाने की चुनौती से निपटने में मदद मिलती है।

    डीजी साइबर क्राइम ने जवानों को अत्याधुनिक तकनीक से किया लैस

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर डीजी साइबर क्राइम विनोद कुमार सिंह ने प्रदेश के पुलिस कर्मियों को अत्याधुनिक तकनीक से लैस किया है। इसके अलावा जवानों को साइबर अपराध से मुकाबले के लिए नई तकनीक की ट्रेनिंग भी दी जा रही है। एआई-डीपफेक, म्यूल अकाउंट और साइबर अपराध के बदलते तरीकों को देखते हुए पुलिस की तकनीकी क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।

    गोल्डन आवर में शिकायत जरूरी

    एसपी साइबर क्राइम राजेश यादव ने बताया कि साइबर फ्रॉड में समय सबसे महत्वपूर्ण है। पहले एक घंटे के भीतर शिकायत करने पर रकम को होल्ड या फ्रीज कराने की संभावना काफी बढ़ जाती है। उन्होंने कहा कि फिशिंग, फर्जी वेबसाइट, डेटा चोरी और फर्जी अप्रूवल समेत कई तरीकों से साइबर अपराधी लोगों को निशाना बनाने की कोशिश करते हैं। ऐसे में डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करते समय उसकी प्रामाणिकता की जांच करना और सतर्क रहना जरूरी है।

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में साइबर अपराध से निपटने के लिए प्रदेश में मजबूत व्यवस्था की गई है। हर थाने में साइबर हेल्प डेस्क है। वहीं लखनऊ में 1930 कॉल सेंटर और साइबर फ्रॉड मिटिगेशन सेंटर संचालित किया जा रहा है। शिकायत मिलते ही संबंधित बैंक के माध्यम से रकम रोकने की कार्रवाई की जाती है।

    सिर्फ पुलिस नहीं, समाज की भागीदारी भी जरूरी

    साइबर अपराध की कोई भौगोलिक सीमा नहीं होती। इसलिए इससे मुकाबले के लिए पुलिस और बैंकों के साथ स्कूल-कॉलेज, ग्राम पंचायत, स्वयं सहायता समूह, यूथ एवं स्पोर्ट्स क्लब और स्थानीय संगठनों की भागीदारी भी जरूरी है। जागरूकता और त्वरित शिकायत के जरिये साइबर ठगी से होने वाले नुकसान को कम किया जा सकता है।

  • मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 4.60 लाख विद्यार्थियों की पढ़ाई को दिया ₹148 करोड़ का संबल

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 4.60 लाख विद्यार्थियों की पढ़ाई को दिया ₹148 करोड़ का संबल

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 4.60 लाख विद्यार्थियों की पढ़ाई को दिया ₹148 करोड़ का संबल
     
    एक क्लिक पर छात्र-छात्राओं के बैंक खातों में पहुंची छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति की धनराशि
     
    मुख्यमंत्री ने लोक भवन में 11 छात्र-छात्राओं को अपने हाथों से प्रदान किए प्रमाणपत्र
     
    अन्य पिछड़ा वर्ग के 2.23 लाख और अनुसूचित जाति के 1.59 लाख विद्यार्थियों को मिला लाभ
     
    लखनऊ

    उत्तर प्रदेश के 4,60,559 छात्र-छात्राओं की पढ़ाई को शनिवार को आर्थिक संबल मिला। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लोक भवन सभागार में आयोजित कार्यक्रम में एक क्लिक कर डीबीटी के माध्यम से उनके बैंक खातों में ₹148.04 करोड़ की छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति की धनराशि भेजी। उन्होंने मंच पर 11 छात्र-छात्राओं को अपने हाथों से छात्रवृत्ति प्रमाणपत्र भी प्रदान किए।
     
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से प्रमाणपत्र पाने वालों में रणबीर वर्मा, अजीत रावत, अंश मिश्रा, अलकैफ, अनन्या अवस्थी, मिली, अधिकांश वर्मा, करिश्मा, बुशरा, अभिषेक यादव और साइमा शामिल रहे। मुख्यमंत्री के हाथों प्रमाणपत्र पाकर विद्यार्थियों के चेहरे खिल उठे।
     
    सरकार की इस पहल का सबसे अधिक लाभ अन्य पिछड़ा वर्ग और अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों को मिला है। अन्य पिछड़ा वर्ग के 2,23,615 विद्यार्थियों के खातों में ₹60.01 करोड़ भेजे गए। अनुसूचित जाति के 1,59,959 विद्यार्थियों को ₹64.54 करोड़ की छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति मिली। इसी तरह सामान्य वर्ग के 38,084 विद्यार्थियों के खातों में ₹11.43 करोड़ और अल्पसंख्यक वर्ग के 38,901 विद्यार्थियों के खातों में ₹12.06 करोड़ पहुंचाए गए।
     
    आर्थिक अभाव के कारण नहीं छूटेगी पढ़ाई
    योजना में अल्प आय वर्ग के पूर्वदशम यानी कक्षा नौ और दस के साथ दशमोत्तर कक्षाओं में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को शामिल किया गया है। छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति से विद्यार्थियों को अपनी पढ़ाई जारी रखने में मदद मिलेगी। इसके पीछे सरकार का उद्देश्य आर्थिक अभाव को किसी विद्यार्थी की शिक्षा की राह में बाधा नहीं बनने देना है।
     
    आधार आधारित भुगतान से बढ़ी पारदर्शिता
    छात्रवृत्ति आवेदन से लेकर भुगतान तक की व्यवस्था ऑनलाइन कर दी गई है। आधार आधारित भुगतान प्रणाली से धनराशि सीधे पात्र विद्यार्थियों के बैंक खातों में पहुंच रही है। पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए आधार आधारित पैकेट सिस्टम भी लागू किया गया है। इससे छात्रवृत्ति वितरण में बिचौलियों की भूमिका समाप्त हुई है और विद्यार्थियों को बिना किसी दौड़भाग के योजना का लाभ मिल रहा है।
     
    प्रदेश सरकार ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में 65.95 लाख से अधिक छात्र-छात्राओं को ₹4,793 करोड़ से अधिक की छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति दी है। सरकार की कोशिश प्रक्रिया को और सरल बनाकर प्रत्येक पात्र विद्यार्थी तक योजना का लाभ पहुंचाने की है।

  • UP के 4.60 लाख छात्रों को स्कॉलरशिप, CM योगी ने एक क्लिक में खातों में भेजी करोड़ों की राशि

    UP के 4.60 लाख छात्रों को स्कॉलरशिप, CM योगी ने एक क्लिक में खातों में भेजी करोड़ों की राशि

    लखनऊ
    सीएम योगी आदित्यनाथ ने शनिवार की सुबह उत्तर प्रदेश के 4.60 लाख छात्र-छात्राओं के बैंक खाते में एक क्लिक से स्कॉलरशिप भेज दी। लखनऊ के लोक भवन सभागार में आयोजित हो रहे इस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सीएम योगी ने कहा कि 2017 के पहले स्कॉलरशिप न तो समय पर मिलती थी और न ही पूरी। भ्रष्टाचारी लोग छात्रों की स्कॉलरशिप डकार जाते थे। बाबू जब स्कॉलरशिप छात्र को देता था तो उसमें से अपना कमीशन काट लेता था।

    उन्होंने बताया कि पहले प्रदेश में सिर्फ 2900 करोड़ रुपए की धनराशि स्कॉलरशिप में जाती थी। आज हम लोग 6200 रुपए स्कॉलरशिप में मुहैया करा रहे हैं। यानी दोगुने से भी ज्यादा। सीएम योगी ने कहा कि आज एडमिशन लेने के बाद ही स्कॉलरशिप छात्रों को भेज दी जाती है। 2 अक्टूबर को बैंक बंद होने के नाते आज 3 अक्टूबर को स्कॉलरशिप ट्रांसफर की गई है। सीएम योगी ने संबंधित विभागों से कहा कि कोई भी बच्चा स्कॉलरशिप से वंचित न रहने पाए। सीएम योगी ने कहा कि पिछले साल संस्था की गलती, छात्र द्वारा देरी से आवेदन या किसी अन्य त्रुटि की वजह से यदि स्कॉलरशिप नहीं मिल पाई तो हम उसे भी स्कॉलरशिप मुहैया करा रहे हैं।

    सीएम योगी ने कहा कि सरकार चाहती है कि किसी भी छात्र की पढ़ाई पैसे के अभाव में बाधित नहीं हो। स्कॉलरशिप हर छात्र का संबंल बनेगी। उन्होंने बताया कि सरकार सभी वर्गों के छात्रों को स्कॉलरशिप मुहैया करा रही है। यह केवल स्कॉलरशिप तक सीमित नहीं है। आपकी पीढ़ी सौभाग्यशाली है कि आप यूपी के अंदर ऐसे समय में शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं जब आपके सामने पहचान का संकट नहीं है। 2017 के पहले यूपी के युवाओं को यूपी के बाहर जाने पर लोग यूपी वाला कहकर किनारे कर देते थे।

    उन्होंने कहा कि 2017 से पहले यूपी में अक्सर दंगे-कर्फ्यू लगते थे। बच्चे पढ़ाई छोड़ देते थे। सरकार कहती थी की उनकी रुचि ही नहीं। हमने अध्ययन कराया तो पता चला कि ज्यादातर बच्चियां स्कूल छोड़ती हैं क्योंकि स्कूल में पीने का पानी और टायलेट भी नहीं है। हमने ऑपरेशन कायाकल्प के तहत बालक-बालिकाओं के लिए अलग-अलग टायलेट की व्यवस्था कराई। पीने के पानी और अन्य सुविधाओं का इंतजाम किया। आज के दिन में बेसिक शिक्षा के 1.60 करोड़ बच्चों को हम कॉपी-किताब, यूनिफॉर्म, जूते-मोजे आदि का भी इंतजाम कर हैं। अटल विद्यालयों में अनाथ बच्चों का पालन पोषण करने के साथ ही सरकार उनकी अच्छी पढ़ाई-लिखाई भी करा रही है। कस्तूरबा विद्यालयों में इंटर तक की पढ़ाई की व्यवस्था की जा रही है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में 65.95 लाख+ छात्र-छात्राओं को 4793 करोड़+ की छात्रवृति/ शुल्क प्रतिपूर्ति डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के जरिए से ट्रांसफर की गई है।

    किस वर्ग के कितने बच्चों को मिली स्कॉलरशिप
    अन्य पिछड़ा वर्ग 2,23,615 60.01 करोड़ रुपए

    अनूसूचित वर्ग 1,59,959 64.54 करोड़ रुपए

    सामान्य वर्ग 38, 084 11.43 करोड़ रुपए

  • लखनऊ में छात्रवृत्ति वितरण कार्यक्रम, मंत्री दानिश आजाद अंसारी ने युवाओं के लिए बताया महत्वपूर्ण

    लखनऊ में छात्रवृत्ति वितरण कार्यक्रम, मंत्री दानिश आजाद अंसारी ने युवाओं के लिए बताया महत्वपूर्ण

    लखनऊ

    उत्तर प्रदेश सरकार के अल्पसंख्यक कल्याण राज्य मंत्री  दानिश आजाद अंसारी जी ने आज लखनऊ में मुख्यमंत्री  योगी आदित्यनाथ जी की गरिमामयी उपस्थिति में आयोजित छात्रवृत्ति वितरण कार्यक्रम को प्रदेश के युवाओं एवं छात्र-छात्राओं के लिए महत्वपूर्ण बताया।

    इस अवसर पर अल्प-आय वर्ग के पूर्वदशम एवं दशमोत्तर कक्षाओं के 4.60 लाख से अधिक छात्र-छात्राओं के बैंक खातों में ₹148 करोड़ से अधिक की छात्रवृत्ति प्रदान की गई।

    श्री दानिश आजाद अंसारी जी ने कहा कि आज का दिन उत्तर प्रदेश के युवाओं, नौजवानों और विशेष रूप से जेन-जी युवाओं के लिए महत्वपूर्ण है। मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी ने हमेशा युवाओं के सपनों को उड़ान देने और उन्हें आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध कराने का कार्य किया है।

    उन्होंने कहा कि छात्रवृत्ति केवल आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के सपनों को पूरा करने का महत्वपूर्ण माध्यम है। मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी के नेतृत्व में प्रदेश सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि आर्थिक कारणों से किसी भी छात्र की शिक्षा प्रभावित न हो।

    कार्यक्रम में मा. कैबिनेट मंत्री श्री ओमप्रकाश राजभर जी, मा. पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री श्री नरेंद्र कश्यप जी, मा. समाज कल्याण मंत्री श्री असीम अरुण जी, मा. मंत्री श्री संजीव कुमार गोंड जी, अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष श्री बैजनाथ रावत जी, मा. विधायक श्रीमती जय देवी जी, मा. श्री अमरेश कुमार जी सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण एवं अधिकारीगण उपस्थित रहे।