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  • जालंधर में आज होगा भव्य ड्रोन शो, गुरु रविदास प्रकाश पर्व पर दिखेगा अद्भुत नजारा

    जालंधर में आज होगा भव्य ड्रोन शो, गुरु रविदास प्रकाश पर्व पर दिखेगा अद्भुत नजारा

    जालंधर

    जालंधर में श्री गुरु रविदास महाराज जी के 650वें प्रकाश पर्व को समर्पित ड्रोन शो आज 6 सितंबर को शाम 6 बजे स्थानीय लायलपुर खालसा कॉलेज में होगा। इसे लेकर प्रशासन ने तैयारियों का जायजा लिया और जरूरी निर्देश दिए।

    इस संबंध में उप मंडल मैजिस्ट्रेट शुभी आंगरा ने कार्यक्रम स्थल पर व्यवस्थाओं का जायजा लेने और विभिन्न विभागों को ड्यूटियां सौंपने के लिए बैठक की। एसडीएम ने बताया कि ड्रोन लाइट शो के माध्यम से श्री गुरु रविदास महाराज जी के महान जीवन, दर्शन और शाश्वत शिक्षाओं को प्रभावशाली ढंग से दर्शाया जाएगा।

    बैठक के दौरान श्रद्धालुओं के लिए बेहतर अनुभव सुनिश्चित करने के लिए यातायात प्रबंधन, उचित पार्किंग, कार्यक्रम स्थल की सफाई, बैठने की व्यवस्था और आपातकालीन चिकित्सा सहायता सहित व्यापक व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया गया।

    ड्रोन शो के अलावा प्रसिद्ध रागी जत्थे भी शामिल होंगे
    ड्रोन शो के अलावा प्रसिद्ध रागी जत्थे भी शामिल होंगे, जो संगत को श्री गुरु रविदास महाराज जी की पवित्र बाणी से जोड़ने के लिए कीर्तन करेंगे। इस अवसर पर बड़ी संख्या में संगत के पहुंचने की उम्मीद है। कई प्रतिष्ठित व्यक्तित्व भी श्रद्धा भेंट करने के लिए साधारण श्रद्धालुओं के रूप में शामिल होंगे।

    पंजाब सरकार मना रही है गुरु रविदास प्रकाश पर्व
    पंजाब सरकार की ओर से श्री गुरु रविदास महाराज जी का प्रकाश पर्व मनाया जा रहा है। इस कड़ी में पूरे सूबे में ड्रोन शो के अलावा गुरु के जीवन को दर्शाने के लिए अन्य कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। 650वें प्रकाश पर्व को समर्पित 6.50 लाख पौधे लगाने का अनूठा अभियान भी शुरू किया गया है।

    गुरु रविदास जी वाणी अध्ययन केंद्र की स्थापना की जा रही
    श्री गुरु रविदास महाराज जी की शिक्षाओं के प्रसार और अकादमिक शोध को प्रोत्साहित करने के लिए डेरा सचखंड बल्लां के पास करीब 11 एकड़ क्षेत्र में श्री गुरु रविदास जी वाणी अध्ययन केंद्र की स्थापना की जा रही है।

  • पंजाब में किसान आंदोलन से बिगड़ेगा BJP-AAP का चुनावी गणित, ग्रामीण वोट बैंक पर असर

    पंजाब में किसान आंदोलन से बिगड़ेगा BJP-AAP का चुनावी गणित, ग्रामीण वोट बैंक पर असर

     पटियाला

    विधानसभा चुनाव से पहले पंजाब में एक बार फिर किसान आंदोलन गर्मा गया है। एमएसपी की कानूनी गारंटी, कर्ज माफी, अमेरिका के साथ व्यापार समझौता रद्द करने और ग्रामीण मजदूरों के लिए पेंशन समेत कई मांगों को लेकर किसान मोहाली-चंडीगढ़ सीमा पर धरना दे रहे हैं। आंदोलन का सीधा असर भाजपा पर पड़ सकता है लेकिन इस बार आम आदमी पार्टी भी इससे अछूती नहीं है। कांग्रेस और अकाली दल के लिए यह किसानों के बीच खोई जमीन वापस पाने का मौका बन सकता है।

    भाजपा के लिए ग्रामीण पंजाब में स्वीकार्यता की परीक्षा
    2020-21 के किसान आंदोलन की राजनीतिक छाया पंजाब में भाजपा पर लंबे समय तक रही। तीन कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन में किसान संगठनों ने भाजपा के विरोध में अभियान चलाया था। 2022 के विधानसभा चुनाव में संयुक्त किसान मोर्चा ने भी भाजपा के खिलाफ वोट की अपील की थी। अब भाजपा पंजाब में अपना आधार बढ़ाने में जुटी है। पार्टी 2027 में सभी 117 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने की बात कह रही है। ऐसे में ग्रामीण पंजाब में स्वीकार्यता बढ़ाना उसके लिए बड़ी चुनौती है।

    अगर आंदोलन के कारण केंद्र और भाजपा के खिलाफ माहौल फिर मजबूत हुआ तो मालवा और दोआबा की ग्रामीण सीटों पर असर पड़ सकता है। किसान संगठनों की सक्रियता वाले इलाकों में भाजपा उम्मीदवारों को विरोध और सवालों का सामना करना पड़ सकता है। चुनौती सिर्फ किसान वोट की नहीं बल्कि पूरे ग्रामीण माहौल की है। 

    आप को नाराजगी दूर करने और कांग्रेस-अकाली दल को जमीन मजबूत करने का मौका
    2020-21 में आप ने किसान आंदोलन का समर्थन किया था। 2022 में पार्टी ने 92 सीटें जीतकर सरकार बनाई। अब किसान शंभू और खनौरी मोर्चों पर मार्च 2025 में हुई पुलिस कार्रवाई और मांगें पूरी न होने को लेकर मान सरकार से नाराज हैं।

    किसान नेता सरवन सिंह पंधेर का आरोप है कि मोर्चों से गायब ट्रैक्टर-ट्रॉलियों और अन्य सामान का मुआवजा पंजाब सरकार ने नहीं दिया। एमएसपी कर्ज मुआवजा फसल विविधीकरण और कृषि लागत से जुड़ी मांगों का संबंध राज्य की नीतियों से भी है। ऐसे में आप विधायकों को गांवों में सवालों का सामना करना पड़ सकता है।

    कांग्रेस के लिए आंदोलन केंद्र की भाजपा सरकार और पंजाब की आप सरकार दोनों को घेरने का अवसर है। हालांकि केवल समर्थन का बयान पर्याप्त नहीं होगा। किसानों के बीच प्रभाव बढ़ाने के लिए उसे मांगों को मजबूती से उठाना होगा।

    कृषि कानूनों के मुद्दे पर भाजपा से गठबंधन तोड़ने वाला अकाली दल भी किसानों के बीच अपनी पुरानी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर सकता है। आंदोलन लंबा खिंचा तो उसे ग्रामीण पंजाब में वापसी का अवसर मिल सकता है।

    राजनीतिक मामलों के विशेषज्ञ प्रोफेसर बलविंदर सिंह टिवाणा के अनुसार किसान आंदोलन का असर भाजपा और आप पर पड़ सकता है क्योंकि किसानों की मांगें केंद्र और राज्य दोनों सरकारों से जुड़ी हैं। मांगें पूरी न होने से दोनों के खिलाफ नाराजगी है। कांग्रेस और अकाली दल सक्रियता से किसानों के समर्थन में आते हैं और उनकी मांगों को उठाते हैं तो दोनों पार्टियां किसानों के बीच अपनी पैठ दोबारा मजबूत कर सकती हैं। 

    किसान आंदोलन कैसे बिगाड़ सकते हैं भाजपा-AAP का गणित, एक्सपर्ट से जानिए…

    1. केंद्र और राज्य के खिलाफ एक साथ मोर्चा: पॉलिटिकल एक्सपर्ट पवनदीप सिंह का कहना है कि किसान संगठनों ने केंद्र और पंजाब सरकार दोनों के खिलाफ एक साथ मोर्चा खोला है। शंभू और खनौरी बॉर्डरों पर पिछले समय में हुए घटनाक्रमों, पुलिस कार्रवाई और किसान मोर्चों से गायब हुई ट्रैक्टर-ट्रॉलियों व अन्य सामान के मुआवजे का मुद्दा अब तूल पकड़ चुका है। किसान नेताओं का आरोप है कि राज्य सरकार ने न केवल आंदोलनकारियों की सुरक्षा व सहायता में ढिलाई बरती, बल्कि वादे के मुताबिक नुकसान की भरपाई भी नहीं की।

    उन्होंने कहा कि गांवों में अब आम आदमी पार्टी के विधायकों और नेताओं के खिलाफ पोस्टर-होर्डिंग्स लगाकर विरोध प्रदर्शन किए जा रहे हैं। कृषि लागत, फसल विविधीकरण और राज्य-स्तरीय मुआवजे से जुड़े मुद्दों के कारण सत्तारूढ़ दल को ग्रामीण क्षेत्रों में भारी जन-असंतोष का सामना करना पड़ रहा है। दूसरी ओर, केंद्र सरकार से एमएसपी की कानूनी गारंटी और ट्रेड डील रद्द करने की मांग को लेकर किसान अड़े हुए हैं।

    2. आप के सामने अपना गढ़ बचाने की चुनौती: पवनदीप शर्मा का कहना है कि 2020-21 के आंदोलन में आम आदमी पार्टी ने किसानों का खुलकर समर्थन किया था, जिसका सीधा फायदा उसे 2022 के चुनाव में 92 सीटें जीतकर मिला था। लेकिन सरकार बनने के बाद अब समीकरण बदल चुके हैं। शंभू और खनौरी मोर्चों पर हुई पुलिस कार्रवाई, किसान आंदोलनों के प्रति ढुलमुल रवैये का आरोप और स्थानीय कृषि समस्याओं के हल न होने से ग्रामीण क्षेत्रों में भगवंत मान सरकार के प्रति नाराजगी बढ़ी है।

    किसान नेता सरवन सिंह पंधेर के अनुसार, मोर्चों के दौरान हुए नुकसान और गायब हुई गाड़ियों के मुआवजे पर राज्य सरकार का वादा अधूरा रहा। ग्रामीण पंजाब, जो आप का सबसे मजबूत चुनावी स्तंभ माना जाता था, वहां से वोट बैंक छिटकने का सीधा खतरा पैदा हो गया है। यदि मान सरकार जल्द ही किसान संगठनों को संतुष्ट करने में विफल रहती है, तो आगामी चुनावों में उसके विधायकों को गांवों में प्रवेश करते समय भारी जन-आक्रोश का सामना करना पड़ सकता है।

    3. ग्रामीण वोट होगा बैंक प्रभावित: पॉलिटिकल एक्सपर्ट प्रमोद बातिश का कहना है कि 2020-21 के कृषि कानून विरोधी आंदोलन का असर भाजपा अब तक झेल रही है। किसान आंदोलन के कारण 2022 के विधानसभा चुनाव में संयुक्त किसान मोर्चा की अपीलों के चलते भाजपा को ग्रामीण इलाकों में भारी राजनीतिक विरोध सहना पड़ा। स्थिति यहां तक पहुंच गई थी कि कई ग्रामीण क्षेत्रों में पार्टी को अपने चुनावी बूथ तक लगाने की अनुमति नहीं मिली थी।

    उन्होंने कहा कि भाजपा ने स्पष्ट रूप से घोषणा की है कि वह 2027 के विधानसभा चुनाव में राज्य की सभी 117 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ेगी। ऐसे में मालवा और दोआबा जैसे विशाल ग्रामीण क्षेत्रों में अपनी स्वीकार्यता बढ़ाना पार्टी के लिए सबसे बड़ी चुनौती है।

    4. किसानों के प्रति भाजपा ने बदली रणनीति: पॉलिटिकल एक्सपर्ट प्रमोद बातिश का कहना है कि किसानों के लगातार विरोध के बीच पंजाब में अपनी जड़ें जमाने का प्रयास कर रही भाजपा को यह भली-भांति अहसास हो गया है कि किसानों को साधे बिना राज्य की सत्ता तक पहुंचना संभव नहीं है। इसी रणनीति के तहत केंद्र और पड़ोसी राज्य हरियाणा की भाजपा सरकारों ने अपने रुख में बड़ा बदलाव किया है। टकराव की स्थिति को टालने और किसानों के बीच सकारात्मक संदेश देने के लिए भाजपा नेतृत्व अब तुरंत संवाद की नीति पर काम कर रहा है।

    उन्होंने कहा कि हाल ही में जब किसानों ने दिल्ली कूच का आह्वान किया और हरियाणा पुलिस ने उन्हें शंभू बॉर्डर पर रोका, तो गतिरोध बढ़ाने के बजाय हरियाणा सरकार के मंत्री तुरंत वार्ता के लिए मौके पर पहुंचे। उन्होंने किसानों की सीधी बातचीत केंद्र सरकार के उच्च अधिकारियों से करवाई, जिससे सीमा पर पक्का मोर्चा लगाने की नौबत टल गई। इसी संवाद प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने दिल्ली में किसान प्रतिनिधियों के साथ उच्चस्तरीय बैठक की और उनकी मांगों का न्यायसंगत समाधान निकालने का ठोस आश्वासन दिया। भाजपा का स्पष्ट लक्ष्य कम्युनिकेशन गैप को खत्म करना है ताकि 2020 जैसी टकराव वाली स्थितियां दोबारा पैदा न हों और ग्रामीण क्षेत्रों में उसका बढ़ता जनाधार प्रभावित न हो।

    5. 2017 से 2024 तक पंजाब का बदलता सियासी गणित: पॉलिटिकल एक्सपर्ट वैवस्वत वेंकट का कहना है कि पंजाब का राजनीतिक परिदृश्य पिछले आठ वर्षों में भारी बदलावों से गुजरा है। वोट प्रतिशत के आंकड़े यह साफ दर्शाते हैं कि कैसे आंदोलनों और जन-असंतोष ने स्थापित राजनीतिक ताकतों के आधार को हिलाया है।

    उन्होंने कहा कि इन आंकड़ों का विश्लेषण करें तो साफ होता है कि 2022 के विधानसभा चुनाव में आप ने 42.01% वोट हासिल करके प्रचंड बहुमत प्राप्त किया था, लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव में उसका वोट शेयर घटकर 26.02% पर आ गया। दूसरी तरफ, भाजपा का वोट प्रतिशत 2022 के 6.60% से बढ़कर 2024 में 18.56% जरूर हुआ, लेकिन यह बढ़त मुख्य रूप से शहरी क्षेत्रों तक सीमित रही। ग्रामीण विरोध के चलते पार्टी लोकसभा में एक भी सीट जीतने में नाकाम रही।

  • हरियाणा में कर्मचारियों की हड़ताल जारी, नियमितीकरण की मांग पर सरकार से नहीं बनी सहमति

    हरियाणा में कर्मचारियों की हड़ताल जारी, नियमितीकरण की मांग पर सरकार से नहीं बनी सहमति

    चंडीगढ़
    हरियाणा में सफाई, सीवर, पालिका, परिषद, नगर निगम और अग्निशमन विभाग के कर्मचारियों की हड़ताल फिलहाल नियमितीकरण की मांग पर अटकी हुई है। हरियाणा सरकार कर्मचारियों की 13 में से 12 मांगें मानने को तैयार है, लेकिन दो वर्ष की सेवा पूरी कर चुके कच्चे कर्मचारियों को नीति बनाकर नियमित करने की मुख्य मांग पर सहमति नहीं बन रही। कर्मचारी नेताओं का कहना है कि जब तक नियमितीकरण की नीति नहीं बनती, आंदोलन जारी रहेगा।

    नगरपालिका कर्मचारी संघ हरियाणा के प्रधान नरेश कुमार शास्त्री और हरियाणा अग्निशमन विभाग कर्मचारी यूनियन के राज्य प्रधान राजेंद्र सिंद ने कहा कि सरकार द्वारा टर्मिनेशन, निलंबन और मुकदमे दर्ज करने जैसी कार्रवाई के बावजूद कर्मचारी पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने दावा किया कि शुक्रवार को प्रदेश के 84 शहरों में 500 से अधिक कर्मचारियों ने सामूहिक मुंडन करवाकर विरोध दर्ज कराया।

    वेतन में 15 प्रतिशत वृद्धि करने को तैयार
    कर्मचारी नेताओं ने कहा कि दो वर्ष की सेवा पूरी कर चुके कच्चे कर्मचारियों को नियमित करने के लिए सरकार को स्पष्ट नीति बनानी चाहिए। उनका आरोप है कि वर्षों से ठेका व्यवस्था में काम कर रहे सफाई और सीवर कर्मचारियों को रोजगार की स्थायी सुरक्षा नहीं मिल रही।

    वहीं, सरकार का तर्क है कि पूरे देश में दो वर्ष की सेवा के आधार पर कच्चे कर्मचारियों को नियमित करने जैसी कोई नीति नहीं है। सरकार नियमितीकरण की बजाय कर्मचारियों को सेवा सुरक्षा के दायरे में लाने और उनके वेतन में 15 प्रतिशत वृद्धि करने को तैयार है।

    आंदोलन को आगे बढ़ाते हुए संघ ने पांच और छह सितंबर को प्रदेश सरकार के मंत्रियों के आवासों और कैंप कार्यालयों पर झाड़ू प्रदर्शन करने का ऐलान किया है। कर्मचारी नेताओं का कहना है कि सरकार ने वर्ष 2014 में सफाई कर्मचारियों को पक्का करने का वादा किया था, जिसे अब तक पूरा नहीं किया गया।

    उनका कहना है कि नियमितीकरण और अन्य मांगों पर ठोस लिखित आदेश जारी होने तथा दमनात्मक कार्रवाई वापस लिए जाने तक हड़ताल जारी रहेगी।

  • त्योहारों में घर जाना होगा आसान, दो जोड़ी फेस्टिवल स्पेशल ट्रेनों के बढ़े फेरे

    त्योहारों में घर जाना होगा आसान, दो जोड़ी फेस्टिवल स्पेशल ट्रेनों के बढ़े फेरे

    पटना
     त्योहारों के इस मौसम में घर जाने की सोच रहे यात्रियों के लिए एक राहत भरी खबर सामने आई है। भारतीय रेलवे के पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (एनएफआर) जोन ने यात्रियों की अतिरिक्त भीड़ और लंबी वेटिंग लिस्ट की समस्या से निपटने के लिए दो जोड़ी फेस्टिवल स्पेशल ट्रेनों की सेवाओं का विस्तार कर दिया है। रेलवे के इस महत्वपूर्ण फैसले से बिहार, उत्तर प्रदेश, असम और मुंबई के बीच सफर करने वाले हजारों यात्रियों को आवागमन के लिए बेहतर और सुविधाजनक विकल्प मिल सकेंगे, साथ ही प्रमुख व्यस्त रूटों पर अत्यधिक भीड़भाड़ का दबाव भी कम होगा।
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    मुंबई-कटिहार और कानपुर-गुवाहाटी रूट पर राहत
    ​एनएफआर द्वारा दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, जिन दो प्रमुख गाड़ियों के फेरे बढ़ाए गए हैं, उनमें ट्रेन संख्या 09189/09190 मुंबई सेंट्रल कटिहार मुंबई सेंट्रल फेस्टिवल स्पेशल और ट्रेन संख्या 04127/04128 कानपुर सेंट्रल गुवाहाटी कानपुर सेंट्रल फेस्टिवल स्पेशल शामिल हैं। ये सभी स्पेशल ट्रेनें अपने पुराने निर्धारित समय, ठहराव (स्टॉपेज), कोच कंपोजिशन और तयशुदा शेड्यूल के अनुसार ही पटरियों पर दौड़ेंगी, जिससे यात्रियों को किसी भी तरह की भ्रम की स्थिति का सामना नहीं करना पड़ेगा।

    ​ट्रेन संख्या 09189/09190 (मुंबई सेंट्रल कटिहार) की नई तिथियां
    ​मुंबई सेंट्रल से कटिहार के बीच चलने वाली ट्रेन संख्या 09189 फेस्टिवल स्पेशल इस त्योहारी सीजन में कुल सात अतिरिक्त फेरे लगाएगी। यह गाड़ी 5 और 12 सितंबर, 17, 24 और 31 अक्टूबर, तथा 7 और 14 नवंबर 2026 को अपनी यात्रा शुरू करेगी।

    ​वहीं, वापसी की दिशा में कटिहार से मुंबई सेंट्रल जाने वाली ट्रेन संख्या 09190 फेस्टिवल स्पेशल भी सात अतिरिक्त फेरों के साथ संचालित होगी। यह वापसी सेवा 8 और 15 सितंबर, 20 और 27 अक्टूबर, और साथ ही 3, 10 और 17 नवंबर 2026 को यात्रियों के लिए उपलब्ध रहेगी।
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    ट्रेन संख्या 04127/04128 (कानपुर सेंट्रल गुवाहाटी) का विस्तारित शेड्यूल
    ​कानपुर सेंट्रल और गुवाहाटी के बीच यात्रा करने वाले यात्रियों को इस बार लंबी अवधि की राहत दी गई है। कानपुर सेंट्रल से गुवाहाटी के लिए चलने वाली ट्रेन संख्या 04127 स्पेशल को 10 सितंबर से 10 दिसंबर 2026 तक कुल 14 अतिरिक्त फेरों के लिए बढ़ाया गया है।
    ​इसके विपरीत दिशा में, गुवाहाटी से कानपुर सेंट्रल लौटने वाली ट्रेन संख्या 04128 स्पेशल 11 सितंबर से 11 दिसंबर 2026 तक 14 अतिरिक्त फेरों के साथ अपनी सेवाएं प्रदान करेगी, जिससे उत्तर प्रदेश और पूर्वोत्तर के बीच संपर्क और मजबूत होगा।
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    यात्रियों की सुविधा और भीड़ नियंत्रण पर जोर
    ​पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी (सीपीआरओ) कपिंजल किशोर शर्मा ने इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि त्योहारी सीजन के दौरान ट्रेनों में अचानक बढ़ने वाली भारी भीड़ को सुव्यवस्थित करने के उद्देश्य से यह कदम उठाया गया है। उन्होंने कहा कि इन अतिरिक्त फेरों के संचालन से यात्रियों को यात्रा करने के लिए अधिक विकल्प प्राप्त होंगे और व्यस्त मार्गों पर यात्रियों का दबाव घटेगा। रेलवे का मुख्य उद्देश्य हर यात्री को इस व्यस्त समय में एक आसान, सुरक्षित, सुविधाजनक और आरामदायक यात्रा अनुभव प्रदान करना है।

     

  • झारखंड में 3500 सरकारी भवनों पर सोलर प्लांट, अब IoT से होगी निगरानी

    झारखंड में 3500 सरकारी भवनों पर सोलर प्लांट, अब IoT से होगी निगरानी

    रांची
     झारखंड में सरकारी भवनों की छतों का इस्तेमाल सौर ऊर्जा उत्पादन के लिए किया जा रहा है. राज्य के 3500 से अधिक सरकारी भवनों पर रूफटॉप सोलर पावर प्लांट लगाए जा चुके हैं. इनकी कुल उत्पादन क्षमता करीब 82 मेगावाट है.
    617 सोलर मिनी ग्रिड से 30 हजार घरों में पहुंची बिजली

    वहीं, सुदूर और दुर्गम ग्रामीण इलाकों में बिजली पहुंचाने के लिए 617 से अधिक सोलर मिनी ग्रिड स्थापित किए गए हैं. इनकी कुल क्षमता करीब 10.60 मेगावाट है. इन मिनी ग्रिड के जरिए 30 हजार से अधिक घरों तक सौर ऊर्जा पहुंचने का दावा किया गया है.

    अब इन सभी सौर ऊर्जा परियोजनाओं की निगरानी और उनके प्रदर्शन का आकलन डिजिटल तकनीक के जरिए करने की तैयारी है.

    IoT से होगी सोलर प्लांट की निगरानी
    झारखंड रिन्यूएबल एनर्जी डेवलपमेंट एजेंसी (JREDA) इसके लिए एक एजेंसी का चयन करने जा रही है. यह एजेंसी IoT यानी इंटरनेट ऑफ थिंग्स आधारित सिस्टम तैयार करेगी. इसके तहत सोलर प्लांट की स्थिति, उत्पादन, प्रदर्शन और तकनीकी समस्याओं की जानकारी डिजिटल तरीके से मिल सकेगी. इसके अलावा एसेट और इन्वेंट्री मैनेजमेंट सिस्टम तथा IT आधारित परफॉर्मेंस मॉनीटरिंग और इवैल्यूएशन फ्रेमवर्क भी तैयार किया जाएगा.

    तीन साल का व्यापक वार्षिक रखरखाव अनुबंध
    चयनित एजेंसी सिस्टम के डिजाइन, डेवलपमेंट, इंप्लीमेंटेशन, होस्टिंग और संचालन का काम करेगी. राज्यभर की सौर ऊर्जा परियोजनाओं के लिए तीन साल का व्यापक वार्षिक रखरखाव अनुबंध भी किया जाएगा. इससे सोलर प्लांट का समय-समय पर मेंटेनेंस सुनिश्चित किया जा सकेगा.

    66 से 70 करोड़ रुपये की बचत का दावा
    JREDA के अनुसार सरकारी भवनों पर रूफटॉप सोलर प्लांट लगाने से बिजली के खर्च में कमी आई है. इससे राज्य को हर साल करीब 66 से 70 करोड़ रुपये की बिजली बचत होने का दावा किया गया है.

    डिजिटल निगरानी भी जरूरी
    JREDA के एमडी केके वर्मा के अनुसार, एजेंसी का फोकस केवल सरकारी भवनों की छत पर सोलर प्लांट लगाने तक सीमित नहीं है. प्लांट से कितना बिजली उत्पादन हो रहा है, उसकी स्थिति कैसी है, परिसंपत्तियों का रिकॉर्ड क्या है और रखरखाव ठीक से हो रहा है या नहीं, इसकी डिजिटल निगरानी भी जरूरी है.

    हर प्लांट की स्थिति पर रहेगी नजर
    नई डिजिटल व्यवस्था से सौर परियोजनाओं की परिसंपत्तियों और इन्वेंट्री का रिकॉर्ड ऑनलाइन तैयार किया जा सकेगा. IoT आधारित सिस्टम के माध्यम से हर प्लांट के प्रदर्शन की लगातार निगरानी और उसका मूल्यांकन किया जाएगा. इससे यह पता लगाया जा सकेगा कि कौन सा सोलर प्लांट अपनी निर्धारित क्षमता के अनुसार बिजली पैदा कर रहा है और कहां तकनीकी खराबी या उत्पादन में कमी आ रही है.

    सोलर परियोजनाओं के रखरखाव और प्रदर्शन से जुड़ी जानकारी भी एक ही डिजिटल सिस्टम में उपलब्ध रहेगी. इससे खराबी की पहचान और उसके समाधान में तेजी आने की उम्मीद है. साथ ही राज्य में चल रही सौर ऊर्जा परियोजनाओं के प्रबंधन को भी अधिक व्यवस्थित बनाया जा सकेगा.

     

  • बिहार में कल बदलेगा मौसम, 7 जिलों में ऑरेंज अलर्ट; भारी बारिश की चेतावनी

    बिहार में कल बदलेगा मौसम, 7 जिलों में ऑरेंज अलर्ट; भारी बारिश की चेतावनी

     पटना
    बिहार में कल यानी 6 सितंबर 2026 को मौसम कई इलाकों में बदला हुआ रह सकता है. मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार राज्य के उत्तर-पूर्वी हिस्सों में बारिश और गरज-चमक की गतिविधि देखने को मिल सकती है. कुछ जिलों में तेज हवा के साथ मौसम खराब होने की संभावना है. उत्तर और उत्तर-पूर्व के कई जिलों को ऑरेंज और येलो अलर्ट जारी किया गया है. दक्षिण-पश्चिम और दक्षिण-मध्य बिहार के कई जिलों में कोई चेतावनी नहीं दी गई है.

    इन सात जिलों में ऑरेंज अलर्ट
    कल उत्तर-पूर्वी बिहार के 7 जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है. इनमें सुपौल, अररिया, किशनगंज, सहरसा, मधेपुरा, पूर्णिया और कटिहार शामिल हैं. इन जिलों में मौसम खराब होने के साथ गरज-चमक और तेज बारिश हो सकती हैं.

    बारिश और आंधी-तूफान के दौरान लोगों को खुले स्थानों पर जाने से बचने की सलाह दी गई है. खेतों और खुले इलाकों में काम करने वाले लोगों को भी विशेष रूप से मौसम पर नजर रखने की जरूरत है.

    येलो अलर्ट भी कई जिलों में जारी
    येलो अलर्ट वाले जिलों की संख्या अधिक है. इनमें पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सीवान, सारण, सीतामढ़ी, शिवहर, मुजफ्फरपुर, वैशाली, दरभंगा, मधुबनी, समस्तीपुर, खगड़िया, लखीसराय, मुंगेर, भागलपुर, बांका और जमुई शामिल हैं. इन जिलों में भी मौसम को लेकर सतर्क रहने की जरूरत है. बक्सर, भोजपुर, पटना, अरवल, जहानाबाद, नालंदा, शेखपुरा, नवादा, गया, औरंगाबाद, रोहतास और कैमूर में कोई चेतावनी नहीं दी गई है.

    पिछले 24 घंटे के दौरान कैसा रहा मौसम
    मौसम विभाग के 5 सितंबर तक के आंकड़ों के अनुसार बिहार में पिछले 24 घंटे के दौरान बारिश सामान्य रही. राज्य में अब तक 524.1 मिमी बारिश दर्ज हुई है, जबकि सामान्य बारिश 812.2 मिमी होनी चाहिए थी. इस तरह बारिश में 35 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है. 4 सितंबर को कैमूर के भभुआ में राज्य का सबसे अधिक अधिकतम तापमान 36.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ.

    5 सितंबर को पश्चिम चंपारण के वाल्मीकि नगर में सबसे कम न्यूनतम तापमान 25 डिग्री सेल्सियस रहा. पिछले 24 घंटे में सीवान के नौतन में 80.8 मिमी बारिश सबसे अधिक दर्ज की गई. इसके बाद सीवान के गोरियाकोठी में 80.2 मिमी और सीवान के भगवानपुर हाट में 78.6 मिमी बारिश दर्ज हुई.

  • मुजफ्फरपुर में शराब तस्करी का अनोखा खेल, किताब-कॉपियों के बीच छिपाई 360 बोतलें

    मुजफ्फरपुर में शराब तस्करी का अनोखा खेल, किताब-कॉपियों के बीच छिपाई 360 बोतलें

     मुजफ्फरपुर
    शराब की तस्करी करने को लेकर धंधेबाज नए-नए आइडिया अपना रहे हैं। धंधेबाजों ने किताब-कापी को भी नहीं छोड़ा है। उत्पाद विभाग की कार्रवाई में पहली बार चौंकाने वाला मामला सामने आया है। दरअसल, अहियापुर के भिखनपुर से उत्पाद विभाग की टीम ने एक आटो को पकड़ा। इसकी तलाशी लेने पर कापियों का बंडल मिला।

    जब इसे खोला गया तो पाया कि कापियों को काटकर इसके बीच में शराब की बोतलों को छिपाया गया है। गिनती करने पर यह 360 बोतल पाई गई। उत्पाद इंस्पेक्टर प्रकाश कुमार राम ने बताया कि कांटी के आटो चालक सद्दाम अंसारी को गिरफ्तार किया गया है। उसके विरुद्ध अभियाेग दर्ज कर जेल भेजने की कवायद की जा रही है।

    सैंपल लेकर लैब में जांच के लिए भेजा
    उन्होंने बताया कि ऑटो से शराब की आपूर्ति करने की गुप्त सूचना मिली थी। इसी आधार पर एएसआई राजा जन्मेजय के साथ छापेमारी की गई। ऑटो को रोककर तलाशी लेने पर शराब मिली। जब्त शराब की बोतलों पर उत्तर प्रदेश निर्मित लिखा है। हालांकि प्रारंभिक जांच में यह नकली प्रतीत हो रहा है। इसलिए इसका सैंपल लेकर लैब में जांच के लिए भेजा गया है।

    उन्होंने बताया कि बोरियों के बंडल में कापियां रखी गई थी। इसे इस प्रकार की पैकिंग किया गया था कि बाहर से देखने पर संदेह नहीं हो रहा था, लेकिन सटीक सूचना के आधार पर बोरियों के बंडल को खोला गया तो कापियों से 180 एमएस वाली प्लास्टिक की शराब की बोतल मिली।

  • बिहार में बाढ़ से बिगड़े हालात, 13 मंत्रियों को जिलों की निगरानी की जिम्मेदारी

    बिहार में बाढ़ से बिगड़े हालात, 13 मंत्रियों को जिलों की निगरानी की जिम्मेदारी

    पटना
    बिहार में भारी बारिश और प्रमुख नदियों में उफान के बाद बाढ़ से हालात बिगड़ते जा रहे हैं। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 13 मंत्रियों को अपने प्रभार वाले जिलों में बाढ़ की निगरानी का काम सौंपा है। उनके साथ प्रभारी सचिवों की भी ड्यूटी लगाई गई है। बक्सर से पटना, समस्तीपुर और भागलपुर तक कई इलाके जलमग्न हैं। पटना में बाढ़ के चलते अधिकारियों को हाई अलर्ट पर रहने का निर्देश दिया गया है। सीएम सम्राट लगातार दूसरे दिन बाढ़ प्रभावित इलाके के हवाई सर्वे पर निकले हैं। शनिवार को वह भागलपुर में बाढ़ से राहत एवं बचाव कार्य का जायजा ले रहे हैं।

    बिहार सरकार की ओर से गंगा किनारे स्थित जिलों में राहत और बचाव कार्यों की सघन निगरानी का काम प्रभारी मंत्रियों और सचिवों को सौंपा है। जिन 13 जिलों के लिए निर्देश जारी हुए हैं, उनमें बक्सर, भोजपुर, पटना, सारण, वैशाली, बेगूसराय, समस्तीपुर, लखीसराय, खगड़िया, मुंगेर, भागलपुर और कटिहार शामिल हैं। मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार, प्रभारी मंत्री और प्रभारी सचिव संबंधित जिले में बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा करेंगे और जमीन पर राहत एवं बचाव कार्य की निगरानी करेंगे।

    पटना में बाढ़ से हाई अलर्ट
    सीएम सम्राट ने पटना के शहरी क्षेत्र में गंगा के बढ़ते जलस्तर की विशेष निगरानी के आदेश दिए हैं। पटना में तटबंध और आसपास के क्षेत्र पर खास ध्यान दिया जाएगा। पटना नगर निगम, जिला प्रशासन और जल संसाधन विभाग को हाई अलर्ट पर रहने को कहा गया है।

    गंगा नदी का जलस्तर
    पटना में गांधी घाट के पास गंगा नदी खतरे के निशान ऊपर बह रही है। शनिवार सुबह 10 बजे गांधी घाट गेज साइट पर जलस्तर 50.53 मीटर दर्ज किया गया, जो 48.60 मीटर के खतरे के निशान से लगभग 1.93 मीटर ऊपर है। नदी अपने उच्चतम बाढ़ स्तर (HFL) 50.52 मीटर के करीब बह रही है। अधिकारियों ने जलस्तर में और बढ़ोतरी होने की चेतावनी दी है।

    बिहार बाढ़ की स्थिति
    बिहार में बाढ़ की वर्तमान स्थिति की जानकारी डिप्टी सीएम विजय कुमार चौधरी ने ली। वह शनिवार को फिर पटना में सिंचाई भवन स्थित जल संसाधन विभाग के कंट्रोल कमांड सेंटर पहुंचे। उन्होंने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पूरे राज्य के विभिन्न संवेदनशील स्थलों का जायजा लिया। अधिकारियों को तटबंधों पर सतत निगरानी के निर्देश दिए।

    बिहार बाढ़ से 10 लाख आबादी प्रभावित- सरकार
    आपदा प्रबंधन विभाग ने शनिवार को कहा कि बिहार के 11 जिलों के 50 प्रखंडों की 201 पंचायतों में 10.28 लाख की आबादी बाढ़ से प्रभावित हुई है। यहां राहत एवं बचाव कार्य जारी है।

    इन जिलों में बाढ़ की निगरानी करेंगे प्रभारी मंत्री-
        बक्सर – नंद किशोर राम
        भोजपुर – अरुण शंकर प्रसाद
        पटना – विजय चौधरी
        सारण – बिजेंद्र प्रसाद यादव
        वैशाली – निशांत कुमार
        बेगूसराय – रामकृपाल यादव
        समस्तीपुर – दामोदर रावत
        लखीसराय – सुनील कुमार
        खगड़िया – मदन सहनी
        मुंगेर – संजय पासवान
        भागलपुर – नीतीश मिश्रा
        कटिहार – प्रमोद चंद्रवंशी

  • JPSC नियुक्ति घोटाला: पूर्व अध्यक्ष एल खियांग्ते की जमानत याचिका खारिज

    JPSC नियुक्ति घोटाला: पूर्व अध्यक्ष एल खियांग्ते की जमानत याचिका खारिज

    रांची
    जेपीएससी नियुक्ति घोटाला मामले में जेपीएससी के पूर्व अध्यक्ष एल खियांग्ते को राहत नहीं मिली है। सीआईडी कोर्ट ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी है।

    इससे पूर्व, 3 सितंबर को दोनों पक्षों की ओर से विस्तृत बहस सुनने के बाद अदालत ने अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया था। सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकील ने तर्क प्रस्तुत किया कि उनके मुवक्किल के विरुद्ध कोई ठोस सबूत मौजूद नहीं है।
    दोषी ठहराए जाने का कोई साक्ष्य नहीं मिला

    उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जांच एजेंसी द्वारा की गई छापेमारी में भी ऐसा कोई आपत्तिजनक दस्तावेज या साक्ष्य नहीं मिला जो उन्हें दोषी ठहराए, इसलिए उन्हें जमानत का लाभ दिया जाना चाहिए।

    दूसरी ओर, सीआईडी की जांच रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि एक ब्लैकलिस्टेड निजी कंपनी (टीडीपीएल) को परीक्षा आयोजित करने का काम दिलाने और इसके एवज में भारी कमीशन लेने में उनकी मुख्य भूमिका रही है। पूछताछ के दौरान साक्ष्य नष्ट करने की कोशिशों की बात सामने आने पर सीआईडी ने उन्हें गिरफ्तार किया था, जिसके बाद से वे न्यायिक हिरासत में जेल में हैं।

  • जोधपुर की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की मुख्य सचिव ने की समीक्षा, हाई रिस्क प्रेगनेंसी की मॉनिटरिंग पर जोर

    जोधपुर की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की मुख्य सचिव ने की समीक्षा, हाई रिस्क प्रेगनेंसी की मॉनिटरिंग पर जोर

    जयपुर
     मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने शनिवार को जोधपुर के डॉ. संपूर्णानंद मेडिकल कॉलेज के सभागार में जिले की चिकित्सा एवं स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की समीक्षा बैठक ली।

    श्रीनिवास ने सुरक्षित मातृत्व, गुणवत्तापूर्ण प्रसव सेवाओं एवं स्वस्थ शैशव के लिए संचालित कार्यक्रमों की प्रगति की समीक्षा करते हुए हाई रिस्क प्रेगनेंसी की प्रभावी मॉनिटरिंग, गुणवत्तापूर्ण एंटीनेटल केयर तथा नवजात शिशुओं के लिए कंगारू केयर जैसी व्यवस्थाओं को और सुदृढ़ करने के निर्देश दिए।

    मुख्य सचिव ने प्रसव सखी सहित मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य से जुड़े नवाचारों के प्रभावी क्रियान्वयन तथा उपयोगी कार्यप्रणालियों को अन्य चिकित्सा संस्थानों में भी अपनाने की आवश्यकता रेखांकित की। उन्होंने गर्भवती महिलाओं को समयबद्ध परामर्श, आवश्यक जांच एवं समुचित फॉलोअप उपलब्ध कराने तथा हाई रिस्क प्रेगनेंसी की पहचान से लेकर उपचार तक निरंतर निगरानी की व्यवस्था प्रभावी बनाए रखने के निर्देश दिए।

     उम्मेद चिकित्सालय में मानक प्रोटोकॉल एवं उपचार प्रक्रियाओं को और सुदृढ़ करने के निर्देश
    मुख्य सचिव ने उम्मेद चिकित्सालय में अत्यधिक मरीज भार के मद्देनजर उपलब्ध चिकित्सा संसाधनों एवं उपचार व्यवस्थाओं की समीक्षा की। उन्होंने ऑपरेशन थिएटरों में निर्धारित मानक चिकित्सा प्रोटोकॉल की प्रभावी पालना, उपचार प्रक्रियाओं की नियमित मॉनिटरिंग तथा मरीजों की सुरक्षा के दृष्टिगत व्यवस्थाओं को और सुदृढ़ करने के निर्देश दिए।

    श्रीनिवास ने एनेस्थिसियोलॉजी, ऑब्सटेट्रिक्स एवं गायनेकोलॉजी विभागों के मध्य बेहतर समन्वय के साथ कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने तथा आवश्यक सुधारात्मक कदम समयबद्ध रूप से लागू करने के निर्देश दिए। उन्होंने गंभीर एवं जटिल मामलों में त्वरित चिकित्सकीय हस्तक्षेप सुनिश्चित करने तथा उपचार प्रक्रिया को अधिक सुव्यवस्थित एवं परिणामोन्मुख बनाने के निर्देश दिए।

    सैटेलाइट अस्पतालों में सीजेरियन सेवाओं के विस्तार की दिशा में कार्यवाही के निर्देश
    मुख्य सचिव ने जिले के सैटेलाइट अस्पतालों की भूमिका को और प्रभावी बनाने के लिए बिलाड़ा, भोपालगढ़, धवा, पीपाड़ शहर, ओसियां एवं बालेसर स्थित चिकित्सा संस्थानों में आवश्यक मानव संसाधन एवं सहायक चिकित्सकीय सेवाओं को सुदृढ़ करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि स्थानीय स्तर पर चिकित्सा सुविधाओं की उपलब्धता बढ़ने से मरीजों को समय पर उपचार मिल सकेगा तथा उच्च स्तरीय चिकित्सा संस्थानों पर पड़ने वाले भार को भी कम किया जा सकेगा।

    उन्होंने इन चिकित्सा संस्थानों में आवश्यक व्यवस्थाओं के सुदृढ़ीकरण के साथ सीजेरियन सेक्शन सेवाओं को चरणबद्ध रूप से ऑपरेशनलाइज करने की दिशा में कार्यवाही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। इस संबंध में आवश्यक संसाधनों एवं व्यवस्थाओं की उपलब्धता के लिए राज्य स्तर पर समुचित सहयोग एवं समन्वय सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए।

    एंटीनेटल केयर एवं मातृ स्वास्थ्य सेवाओं में प्रक्रिया-प्रवाह को और बेहतर बनाने के निर्देश
    मुख्य सचिव ने जिले में एंटीनेटल केयर की व्यवस्थाओं की समीक्षा करते हुए गर्भवती महिलाओं को निर्धारित अंतराल पर आवश्यक परामर्श एवं जांच सेवाएं उपलब्ध कराने की प्रक्रिया को और प्रभावी बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने हाई रिस्क प्रेगनेंसी की शीघ्र पहचान, नियमित फॉलोअप एवं आवश्यकता के अनुरूप उपचार की समेकित व्यवस्था विकसित करने को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए।

    उन्होंने उम्मेद चिकित्सालय में अपनाई जा रही प्रभावी कार्यप्रणालियों एवं नवाचारों को उपयोगी बेस्ट प्रैक्टिस के रूप में चिन्हित कर अन्य चिकित्सा संस्थानों में स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप अपनाने की कार्यवाही करने के निर्देश दिए।

    राउंड-द-क्लॉक ऑपरेशन थिएटर, एचडीयू एवं आईसीयू सेवाओं की प्रभावी मॉनिटरिंग के निर्देश
    मुख्य सचिव ने उम्मेद चिकित्सालय में अत्यधिक मरीज भार के बावजूद चिकित्सा सेवाओं के सुचारू संचालन की समीक्षा की। उन्होंने राउंड-द-क्लॉक ऑपरेशन थिएटर, हाई डिपेंडेंसी यूनिट एवं इंटेंसिव केयर यूनिट में गंभीर मरीजों एवं नवजात शिशुओं को उपलब्ध कराई जा रही जीवनरक्षक चिकित्सा सेवाओं की सतत मॉनिटरिंग एवं प्रभावी संचालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

    उन्होंने उम्मेद चिकित्सालय को मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य सेवाओं का महत्वपूर्ण केंद्र बताते हुए उपलब्ध विशेषज्ञ सेवाओं एवं संसाधनों का अधिकतम प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करने तथा गंभीर मामलों में समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उन्होंने चिकित्सा सेवाओं में किए जा रहे सुधार एवं प्रक्रिया-प्रवाह को निरंतर आगे बढ़ाने तथा प्रभावी व्यवस्थाओं को संस्थागत रूप देने की आवश्यकता बताई।

    बैठक में डॉ. संपूर्णानंद मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. बी.एस. जोधा ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से जिले की चिकित्सा व्यवस्थाओं, उपचार पद्धति, चिकित्सकीय संसाधनों, स्वास्थ्य अवसंरचना तथा विभिन्न चिकित्सा सेवाओं की प्रगति की विस्तृत जानकारी दी।