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  • ग्रेटर नोएडा में बदलेगा ट्रैफिक प्लान, माल-यात्री वाहनों के लिए होंगे अलग रास्ते; 6 लेन एलिवेटेड रोड की योजना

    ग्रेटर नोएडा में बदलेगा ट्रैफिक प्लान, माल-यात्री वाहनों के लिए होंगे अलग रास्ते; 6 लेन एलिवेटेड रोड की योजना

    ग्रेटर नोएडा 
    ग्रेटर नोएडा में बढ़ते औद्योगिक और लॉजिस्टिक्स गतिविधियों के बीच यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने की तैयारी है. ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण (GNIDA) ने मालवाहक और यात्री वाहनों की आवाजाही को अलग करने का प्रस्ताव रखा है. इसके तहत हापुड़ बाईपास तक 105 मीटर चौड़ी सड़क बनाने और मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक्स हब से जेवर स्थित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट तक छह लेन की एलिवेटेड रोड बनाने की योजना पर चर्चा हुई है। 

    ग्रेटर नोएडा की कनेक्टिविटी को और मजबूत करने के लिए GNIDA ने हापुड़ बाईपास तक करीब 105 मीटर चौड़ी सड़क बनाने का प्रस्ताव दिया है. अधिकारियों के मुताबिक, इस सड़क के निर्माण से नोएडा-ग्रेटर नोएडा और गंगा एक्सप्रेसवे के बीच कनेक्टिविटी बेहतर होगी और दोनों के बीच सफर का समय घटकर करीब 30 से 45 मिनट रह सकता है। 

    प्रस्ताव के तहत मौजूदा कनेक्टिविटी को करीब 15 किलोमीटर तक आगे बढ़ाकर ग्रेटर नोएडा को गंगा एक्सप्रेसवे से जोड़ा जाएगा, इससे क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियों और आवागमन को गति मिलने की उम्मीद है। 

    लॉजिस्टिक्स हब से एयरपोर्ट तक एलिवेटेड रोड
    GNIDA ने मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक्स हब (MMLH)
    से जेवर स्थित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट तक छह लेन की एलिवेटेड रोड बनाने का भी प्रस्ताव रखा है. यह सड़क वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के समानांतर बनाई जाएगी। 

    इस कॉरिडोर को मुख्य रूप से मालवाहक वाहनों की आवाजाही के लिए इस्तेमाल करने की योजना है. इससे लॉजिस्टिक्स हब से निकलने वाले सामान को सीधे एयरपोर्ट के एयर कार्गो टर्मिनल तक पहुंचाया जा सकेगा. इससे माल परिवहन में समय की बचत होने के साथ शहर की सड़कों पर भारी वाहनों का दबाव भी कम होने की उम्मीद है। 

    मास्टर प्लान 2041 में बदलाव की तैयारी
    ये सभी प्रस्ताव ग्रेटर नोएडा मास्टर प्लान 2041 में संशोधन की योजना का हिस्सा हैं. इसका मुख्य उद्देश्य शहर में मालवाहक और यात्री वाहनों की आवाजाही को अलग-अलग करना है. सोमवार को लखनऊ में औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता की अध्यक्षता में हुई बैठक में इन प्रस्तावों पर चर्चा की गई. बैठक में औद्योगिक विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव आलोक कुमार भी मौजूद रहे। 

    GNIDA के मुताबिक, मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक्स हब और मल्टी मॉडल ट्रांसपोर्ट हब ग्रेटर नोएडा की आने वाली प्रमुख परियोजनाओं में शामिल हैं, इनके विकसित होने के बाद क्षेत्र में माल ढुलाई की क्षमता बढ़ने और लॉजिस्टिक्स हब से एयरपोर्ट के बीच यातायात व्यवस्था अधिक सुगम होने की उम्मीद है। 

    कुल मिलाकर, प्रस्तावित सड़क और एलिवेटेड कॉरिडोर ग्रेटर नोएडा में फ्रेट ट्रैफिक को यात्री यातायात से अलग करने की दिशा में अहम कदम माने जा रहे हैं। इससे औद्योगिक क्षेत्रों, लॉजिस्टिक्स हब, गंगा एक्सप्रेसवे और जेवर एयरपोर्ट के बीच कनेक्टिविटी को नया बूस्ट मिल सकता है। 
     

  • पंजाब में BJP का चुनावी शंखनाद, PM मोदी-शाह के बाद नितिन नवीन भी संभालेंगे मोर्चा

    पंजाब में BJP का चुनावी शंखनाद, PM मोदी-शाह के बाद नितिन नवीन भी संभालेंगे मोर्चा

     चंडीगढ़
     पंजाब विधानसभा चुनाव में अब करीब छह महीने का समय शेष है और भाजपा ने प्रदेश में अपनी चुनावी गतिविधियां तेज कर दी हैं। पार्टी ने सितंबर और अक्टूबर में अपने शीर्ष नेतृत्व के कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार करनी शुरू कर दी है।राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संभावित कार्यक्रमों को लेकर पार्टी स्तर पर तैयारियां चल रही हैं।

    सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी अक्टूबर में तीन दिन पंजाब में रह सकते हैं। हालांकि, अभी दौरे की तारीख तय नहीं हुई है। पार्टी का प्रयास है कि उनके कार्यक्रम को अमृतसर, जालंधर, लुधियाना और पटियाला के आसपास केंद्रित किया जाए।

    प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार प्रधानमंत्री पहले दिन माझा क्षेत्र के कई विधानसभा क्षेत्रों से रोड शो के माध्यम से गुजर सकते हैं। उनके रात्रि विश्राम के लिए राधा स्वामी सत्संग ब्यास के मुख्यालय पर विचार किया जा रहा है।

    प्रधानमंत्री की जनसभा को लेकर भी पार्टी में मंथन चल रहा है। भाजपा के कुछ नेता बठिंडा अथवा पटियाला में जनसभा कराने के लिए राष्ट्रीय नेतृत्व से संपर्क में हैं। बठिंडा से पटियाला तक रोड शो की संभावना पर भी विचार किया जा रहा है।

    प्रधानमंत्री कार्यालय और भाजपा का राष्ट्रीय नेतृत्व मिलकर दौरे की अंतिम रूपरेखा तैयार करेगा।

    केंद्र की घोषणाओं पर भी मंथन
    प्रधानमंत्री के दौरे को चुनावी दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पार्टी स्तर पर यह आकलन किया जा रहा है कि केंद्र सरकार पंजाब के लिए किन योजनाओं, परियोजनाओं या घोषणाओं की घोषणा कर सकती है।

    इसके साथ ही जनता के समक्ष रखे जाने वाले संभावित वादों पर भी मंथन शुरू हो गया है।
    18 सितंबर से नशे और कानून-व्यवस्था के खिलाफ यात्रा

    इसी कड़ी में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन 18 सितंबर को पठानकोट से पंजाब में नशे और कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर यात्रा की शुरुआत करेंगे। भाजपा आगामी विधानसभा चुनाव में नशे और बिगड़ती कानून-व्यवस्था को प्रमुख मुद्दा बनाने की रणनीति पर काम कर रही है।

    19 से 21 सितंबर के बीच प्रदेश के अन्य हिस्सों से भी यात्राएं निकाली जाएंगी। इन यात्राओं की संभावित शुरुआत श्री केसगढ़ साहिब, तलवंडी साबो और फाजिल्का से किए जाने पर विचार चल रहा है।

    यात्रा के दौरान बाइक रैली भी निकाली जाएगी। पार्टी की योजना इन यात्राओं को प्रदेश के सभी 117 विधानसभा क्षेत्रों तक ले जाने की है।

    यात्राओं का समापन जालंधर में प्रस्तावित है। यहां केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह बड़ी रैली को संबोधित कर सकते हैं। उनकी रैली 29 या 30 सितंबर को होने की संभावना जताई जा रही है, हालांकि तारीख अभी अंतिम नहीं है।

    यात्राओं के नेतृत्व के लिए एक दर्जन से अधिक केंद्रीय मंत्रियों, राष्ट्रीय पदाधिकारियों और वरिष्ठ नेताओं को जिम्मेदारी देने की तैयारी है। मंगलवार को नई दिल्ली में होने वाली बैठक में यात्रा के कार्यक्रम, तीन अन्य शहरों से निकलने वाली यात्राओं और अमित शाह की रैली की तारीख पर अंतिम निर्णय होने की संभावना है।

    बैठक में प्रदेश प्रभारी डा सतीश पूनिया, प्रदेश अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों और प्रदेश संगठन मंत्री मंथरी श्रीनिवासुलु के शामिल होने की संभावना है। अमित शाह के भी बैठक में शामिल होने की उम्मीद है।

  • Whales: Giants of the Ocean

    Whales: Giants of the Ocean

    Whales are among the largest and most remarkable animals on Earth. These marine mammals live in oceans around the world, from warm tropical waters to the cold seas surrounding the poles.

    Life Beneath the Surface

    Although whales spend their lives in water, they breathe air through blowholes located on top of their heads. They must regularly return to the surface to breathe before diving again in search of food or traveling through the ocean.

    Whales are warm-blooded, give birth to live young, and nurse their calves with milk. A thick layer of fat called blubber helps protect them from cold water and stores energy during long migrations.

    Two Main Groups

    Whales are generally divided into baleen whales and toothed whales. Baleen whales filter small animals from the water using flexible plates inside their mouths. This group includes blue whales, humpback whales, and gray whales.

    Toothed whales use teeth to catch fish, squid, and other prey. Many of them also use echolocation, producing sounds and listening for returning echoes to understand their surroundings. Sperm whales, belugas, and orcas belong to this group.

    The Blue Whale

    The blue whale is the largest known animal to have ever lived. An adult can grow longer than a city bus and weigh well over one hundred tonnes. Despite its enormous size, it feeds mainly on tiny crustaceans called krill.

    Communication and Migration

    Whales communicate using clicks, whistles, pulses, and complex songs. Some sounds can travel across great distances underwater. Humpback whales are especially famous for their long, patterned songs.

    Many species migrate thousands of kilometres each year. They often feed in cold, nutrient-rich waters before traveling to warmer regions where they mate and give birth.

    Protecting Whales

    Commercial hunting once caused severe declines in many whale populations. Today, whales also face threats from fishing gear, ship collisions, underwater noise, pollution, and changes to ocean ecosystems.

    Conservation programs, safer fishing practices, protected habitats, and international cooperation can help whale populations recover. Protecting whales also supports healthier oceans because these animals play an important role in marine food webs and nutrient cycles.

  • Whales: Giants of the Ocean

    Whales: Giants of the Ocean

    Whales are among the largest and most remarkable animals on Earth. These marine mammals live in oceans around the world, from warm tropical waters to the cold seas surrounding the poles.

    Life Beneath the Surface

    Although whales spend their lives in water, they breathe air through blowholes located on top of their heads. They must regularly return to the surface to breathe before diving again in search of food or traveling through the ocean.

    Whales are warm-blooded, give birth to live young, and nurse their calves with milk. A thick layer of fat called blubber helps protect them from cold water and stores energy during long migrations.

    Two Main Groups

    Whales are generally divided into baleen whales and toothed whales. Baleen whales filter small animals from the water using flexible plates inside their mouths. This group includes blue whales, humpback whales, and gray whales.

    Toothed whales use teeth to catch fish, squid, and other prey. Many of them also use echolocation, producing sounds and listening for returning echoes to understand their surroundings. Sperm whales, belugas, and orcas belong to this group.

    The Blue Whale

    The blue whale is the largest known animal to have ever lived. An adult can grow longer than a city bus and weigh well over one hundred tonnes. Despite its enormous size, it feeds mainly on tiny crustaceans called krill.

    Communication and Migration

    Whales communicate using clicks, whistles, pulses, and complex songs. Some sounds can travel across great distances underwater. Humpback whales are especially famous for their long, patterned songs.

    Many species migrate thousands of kilometres each year. They often feed in cold, nutrient-rich waters before traveling to warmer regions where they mate and give birth.

    Protecting Whales

    Commercial hunting once caused severe declines in many whale populations. Today, whales also face threats from fishing gear, ship collisions, underwater noise, pollution, and changes to ocean ecosystems.

    Conservation programs, safer fishing practices, protected habitats, and international cooperation can help whale populations recover. Protecting whales also supports healthier oceans because these animals play an important role in marine food webs and nutrient cycles.

  • Whales: Giants of the Ocean

    Whales: Giants of the Ocean

    Whales are among the largest and most remarkable animals on Earth. These marine mammals live in oceans around the world, from warm tropical waters to the cold seas surrounding the poles.

    Life Beneath the Surface

    Although whales spend their lives in water, they breathe air through blowholes located on top of their heads. They must regularly return to the surface to breathe before diving again in search of food or traveling through the ocean.

    Whales are warm-blooded, give birth to live young, and nurse their calves with milk. A thick layer of fat called blubber helps protect them from cold water and stores energy during long migrations.

    Two Main Groups

    Whales are generally divided into baleen whales and toothed whales. Baleen whales filter small animals from the water using flexible plates inside their mouths. This group includes blue whales, humpback whales, and gray whales.

    Toothed whales use teeth to catch fish, squid, and other prey. Many of them also use echolocation, producing sounds and listening for returning echoes to understand their surroundings. Sperm whales, belugas, and orcas belong to this group.

    The Blue Whale

    The blue whale is the largest known animal to have ever lived. An adult can grow longer than a city bus and weigh well over one hundred tonnes. Despite its enormous size, it feeds mainly on tiny crustaceans called krill.

    Communication and Migration

    Whales communicate using clicks, whistles, pulses, and complex songs. Some sounds can travel across great distances underwater. Humpback whales are especially famous for their long, patterned songs.

    Many species migrate thousands of kilometres each year. They often feed in cold, nutrient-rich waters before traveling to warmer regions where they mate and give birth.

    Protecting Whales

    Commercial hunting once caused severe declines in many whale populations. Today, whales also face threats from fishing gear, ship collisions, underwater noise, pollution, and changes to ocean ecosystems.

    Conservation programs, safer fishing practices, protected habitats, and international cooperation can help whale populations recover. Protecting whales also supports healthier oceans because these animals play an important role in marine food webs and nutrient cycles.

  • अब घर बैठे खाद की बुकिंग कर सकेंगे किसान, मोबाइल ऐप से मिलेगा उर्वरक; जानें पूरी प्रक्रिया

    अब घर बैठे खाद की बुकिंग कर सकेंगे किसान, मोबाइल ऐप से मिलेगा उर्वरक; जानें पूरी प्रक्रिया

    पूर्णिया
     किसानों को अब खाद के लिए उर्वरक दुकानों की दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी। किसान अब ऐप के माध्यम से खाद की बुकिंग कर सकेंगे। फ्रेमवर्क फॉर फर्टिलाइजर सेल के नाम से डिजिटल प्रणाली विकसित किया गया है। इसके तहत किसान घर बैठे मोबाइल ऐप के माध्यम से अपनी जरूरत के अनुसार खाद की बुकिंग कर सकेंगे।

    इसके लिए किसान की फार्मर आईडी होना अनिवार्य है। मोबाइल ऐप पर आधार संख्या और ओटीपी के माध्यम से किसान की पहचान का सत्यापन होगा। ऐप पर किसान अपने खेत और फसल का विवरण दर्ज कर आसानी से मोबाइल से ही खाद की बुकिंग कर रहे हैं।

    बुकिंग के बाद मोबाइल पर मिलने वाले क्यूआर कोड को अधिकृत विक्रेता के पास स्कैन कराने पर तुरंत खाद उपलब्ध कराई जाएगी।

    कृषि कर्मियों को दी गई है जागरूकता की जिम्मेदारी
    अधिकारियों का मानना है कि इससे खाद के वितरण में पारदर्शिता आएगी और वास्तविक किसानों तक उर्वरक पहुंचाने में मदद मिलेगी। नई व्यवस्था को लेकर किसानों को जानकारी देने की जिम्मेदारी पंचायत एवं प्रखंड स्तर के कृषि कर्मियों को दी गई है।

    किसान सलाहकार, कृषि फसल की जानकारी ऐप में दर्ज करेंगे तो उसके अनुसार उर्वरक की उचित मात्रा ऐप पर दिखेगी।

    जिला कृषि पदाधिकारी ने बताया कि जिन किसानों की फार्मर आईडी नहीं बनी है, उन्हें पहले इसे बनवाना होगा। फार्मर आईडी बनने के बाद किसान मोबाइल ऐप के माध्यम से खाद की बुकिंग कर सकेंगे।

    कृषि विभाग का मानना है कि डिजिटल बुकिंग शुरू होने के बाद खाद की उपलब्धता और वितरण पर निगरानी पहले से अधिक प्रभावी होगी।

    बटाइदार भी कर सकेंगे खाद का उठाव
    जिन किसानों की जमीन उनके नाम पर दर्ज है, वे आसानी से इस व्यवस्था का लाभ उठा सकेंगे। जिन किसानों के पूर्वजों के नाम जमीन दर्ज है या जिनका नाम जमाबंदी में नहीं है, उनके लिए भी निर्धारित प्रक्रिया के तहत फार्मर आईडी बनाने की व्यवस्था की गई है।

    संयुक्त स्वामित्व वाली जमीन समेत जिन किसानों की फार्मर रजिस्ट्री आईडी नहीं बनी है, जो बटाईदार हैं या फिर सामुदायिक, मंदिर, सरकारी अथवा संस्थागत जमीन पर खेती करते हैं, उनके लिए भी इस निर्धारित प्रक्रिया के तहत खाद लेने की पूरी व्यवस्था की गई है।

    विभिन्न प्रकार की जमीन पर खेती करने वाले किसान भी निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार इस व्यवस्था से जुड़ सकेंगे।

    जिले में ऐप के माध्यम से एक सितंबर से खाद की बुकिंग शुरू हो गई है। इस डिजिटल पहल का उद्देश्य किसानों को उनकी जरूरत के अनुसार अनुशंसित मात्रा में उर्वरक उपलब्ध कराना और पूरी बिक्री व्यवस्था में पारदर्शिता लाना है। जिले में अब तक 4,846 किसानों ने ऐप के माध्यम से खाद की बुकिंग की है जिन्हें नियमानुसार उर्वरक उपलब्ध कराया जा रहा है। – विजय प्रकाश, जिला कृषि पदाधिकारी, पूर्णिया

     

  • रामदेवरा मेले की तैयारी पूरी, जोधपुर से सुबह-शाम मिलेंगी ट्रेनें; जानें पूरा शेड्यूल

    रामदेवरा मेले की तैयारी पूरी, जोधपुर से सुबह-शाम मिलेंगी ट्रेनें; जानें पूरा शेड्यूल

     जैसलमेर
    किसी के हाथ में बाबा की ध्वजा है, किसी के सिर पर चुनरी, आंखों में दर्शन की चमक और जयकारों से मेले की आस्था परवान चढ़ रही है। भोर की पहली किरण के साथ कोई बाबा के दरबार के लिए निकल रहा है तो कोई शाम ढलते ही ट्रेन पकड़कर धोरों की उस धरती की ओर बढ़ रहा है, जहां हर रास्ता आस्था से जुड़ जाता है। जोधपुर से रामदेवरा के बीच चल रही नियमित ट्रेनों ने श्रद्धालुओं के इस आस्था-सफर को आसान बना दिया है। इस वर्ष रामदेवरा मेला 13 सितंबर 2026 से शुरू होकर 21 सितंबर 2026 (भादवा सुदी दशमी) तक चलेगा।

    उत्तर पश्चिम रेलवे के जोधपुर मंडल रेल प्रबंधक अनुराग त्रिपाठी ने बताया कि मेले में बढ़ते यात्री भार को देखते हुए नियमित ट्रेनों के साथ मेला स्पेशल ट्रेन का भी संचालन किया जा रहा है। श्रद्धालुओं की सुविधा और सुगम आवागमन के लिए रेलवे की ओर से आवश्यक व्यवस्थाएं की गई हैं।

    रामदेवरा जाने वाली ट्रेनें
    जोधपुर से रामदेवरा के लिए सुबह से रात तक नियमित ट्रेनों के विकल्प हैं। ट्रेन संख्या 12249 शकूरबस्ती-जैसलमेर स्वर्णनगरी एक्सप्रेस सुबह 4 बजे जोधपुर से रवाना होकर 7.01 बजे रामदेवरा पहुंचती है वहीं ट्रेन संख्या 20492 साबरमती-जैसलमेर सुपरफास्ट सुबह 6.10 बजे चलकर 9.07 बजे रामदेवरा पहुंचती है।

    इसी तरह दोपहर में ट्रेन संख्या 74844 भगत की कोठी-जैसलमेर डेमू दोपहर 2 बजे जोधपुर से रवाना होकर 5.25 बजे रामदेवरा पहुंचती है। दोपहर में ही ट्रेन 20486 साबरमती-जैसलमेर सुपरफास्ट जोधपुर से दोपहर 2.50 बजे रवाना होकर शाम 6.25 बजे रामदेवरा, जबकि शाम को ट्रेन संख्या 15014 काठगोदाम-जैसलमेर रानीखेत एक्सप्रेस और 25014 काठगोदाम-जैसलमेर कॉर्बेट पार्क लिंक एक्सप्रेस शाम 5 बजे रवाना होकर करीब 8 बजे रामदेवरा पहुंचती हैं।

    ट्रेन संख्या 14087 दिल्ली-जैसलमेर रुणिचा एक्सप्रेस शाम 7.40 बजे जोधपुर से रवाना होती है जो रात 11.20 बजे रामदेवरा पहुंचा देती है। साप्ताहिक ट्रेन के रूप में ट्रेन संख्या 22931 बांद्रा टर्मिनस-जैसलमेर सुपरफास्ट प्रत्येक शनिवार को सुबह 3.50 बजे जोधपुर से रवाना होकर 6.40 बजे रामदेवरा पहुंचती है।

    दर्शन के बाद वापसी की भी राह आसान
    बाबा के दर्शनों के बाद जोधपुर लौटने वालों के लिए भी सुबह से रात तक ट्रेनें हैं। ट्रेन संख्या 15013 जैसलमेर-काठगोदाम रानीखेत एक्सप्रेस सुबह 4.55 बजे रामदेवरा से रवाना होकर 8.20 बजे जोधपुर पहुंचती है। जबकि ट्रेन संख्या 20485 जैसलमेर-साबरमती सुपरफास्ट सुबह 7.53 बजे चलकर 11.30 बजे जोधपुर पहुंचती है। वहीं 74843 जैसलमेर-भगत की कोठी डेमू सुबह 9.10 बजे रामदेवरा से रवाना होकर 1.10 बजे जोधपुर, 20491 जैसलमेर-साबरमती सुपरफास्ट शाम 5.35 बजे चलकर रात 9 बजे और 12250 जैसलमेर-शकूरबस्ती स्वर्णनगरी एक्सप्रेस शाम 6.21 बजे चलकर रात 9.50 बजे जोधपुर आती है। इसी प्रकार रात में ट्रेन संख्या 14088 जैसलमेर-दिल्ली रुणिचा एक्सप्रेस 8.24 बजे रामदेवरा से रवाना होकर 11.40 बजे जोधपुर पहुंच रही है। वहीं ट्रेन संख्या 22932 जैसलमेर-बांद्रा टर्मिनस साप्ताहिक सुपरफास्ट प्रत्येक शनिवार रात 8.10 बजे रामदेवरा से चलकर 11.30 बजे जोधपुर आने का समय निर्धारित है।

  • बिहार में ड्रग्स तस्करी का नया तरीका, सरसों के दाने जैसी ‘कोटा’ हेरोइन की तस्करी; 71 तस्कर गिरफ्तार

    बिहार में ड्रग्स तस्करी का नया तरीका, सरसों के दाने जैसी ‘कोटा’ हेरोइन की तस्करी; 71 तस्कर गिरफ्तार

    पटना
    ड्रग्स तस्करी के अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट ने सिर्फ रूट ही नहीं बदला है, बल्कि हेरोइन की हाई क्वालिटी तैयार कर उसका स्वरूप भी बदल दिया है, जिसे 'कोटा' (हेरोइन) के नाम से जाना जाता है।

    सरसों के दाने की तरह दिखने वाले 'कोटा' (हेरोइन) की तस्करी भी साबुन और माचिस की डिब्बी में रखकर ठिकाने तक पहुंचाया जा रहा है। पहले बिहार एसटीएफ के हाथ 'कोटा' (हेरोइन) लगा था, जिसकी मात्रा कम थी, लेकिन इसका असर बेहद खतरनाक बताया गया। इसका दिमाग और शरीर पर बहुत घातक प्रभाव पड़ता है।

    बिहार पुलिस कुछ दिन पहले इसका एक वीडियो क्लिप बनाकर इंटरनेट मीडिया पर अपलोड कर लोगों को जागरूक भी किया था। एसटीएफ 'कोटा' (हेरोइन) बरामदगी मामले में अब तक 27 केस दर्ज करा चुकी है और 71 आरोपितों को जेल भेजा जा चुका है। इनमें 15 महिलाएं शामिल थीं।

    बिहार पुलिस ने अपील की कि आपके पास नशीले पदार्थों की खरीद-फरोख्त, तस्करी या सेवन से संबंधित कोई सूचना है, तो तुरंत 1933 पर काल करें। आपकी पहचान गोपनीय रखी जाएगी। नशीले पदार्थों का नेटवर्क तेजी से बढ़ा है, जिसके खिलाफ बिहार पुलिस और एसटीएफ लगातार बड़े स्तर पर छापेमारी कर रही हैं।

    कुछ दिन पूर्व बरौनी रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म पर बने नए फुटओवर ब्रिज के नीचे से पुलिस ने दो महिलाओं समेत चार ड्रग तस्करों को गिरफ्तार किया है। इनके पास से 118 ग्राम कोटा हेरोइन बरामद की गई है। यह हेरोइन बिहार या उसके आसपास के राज्यों से नहीं, बल्कि पूर्वोत्तर राज्य नागालैंड से लाई गई थी।

    उन्हें यह मादक पदार्थ नागालैंड के ज्यूरक शहर के रहने वाले एक तस्कर ने सप्लाई किया था। चारों आरोपित कविगुरु एक्सप्रेस ट्रेन से सफर तय कर असम के कामाख्या से होते हुए बरौनी स्टेशन पहुंचे थे। इसी तरह मुजफ्फरपुर के कच्ची पक्की ओपी क्षेत्र में पुलिस ने घर में चल रहे रैकेट का भंडाफोड़ किया था।

    वहां से 25 ग्राम अवैध 'कोटा' हेरोइन की 64 पुड़िया बरामद कर एक तस्कर दंपती को गिरफ्तार किया था। बख्तियारपुर में एसटीएफ और पटना पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई में सौ ग्राम हेरोइन के साथ चार तस्करों को दबोचा था।

    इसे आठ साबुनदानीनुमा डिब्बों में रखा गया था। इसी तरह नदी थाना क्षेत्र में छापेमारी कर एक घर से 162 ग्राम 'कोटा' (हेरोइन) और पैकिंग के 1,500 खाली डिब्बे जब्त किए गए थे।

    छिपाने के लिए अपना रहे शातिराना तरीका
    चेकिंग से बचने के लिए हेरोइन छिपाने का बेहद शातिराना तरीका अपना रहे हैं। बरौनी से गिरफ्तार दोनों महिलाओं ने हेरोइन से भरे प्लास्टिक के डिब्बों को अपने ब्लाउज के अंदर छिपा रखा था।

    दो अन्य तस्करों ने हेरोइन के पैकेटों को अपनी पैंट की जेब और पिठ्ठू बैग व प्लास्टिक के झोले में छिपा रखा था। तस्करी के दौरान किसी को संदेह नहीं हो, इसके लिए इसे सरसों के दाने की तरह तैयार कर कैरियर के जरिए तय ठिकाने पर भेजा जा रहा है।

    असम के दीमापुर और मणिपुर से पहुंच रही खेप
    सूत्रों की मानें तो पुलिस की छानबीन में सिंडिकेट से लेकर चेन से जुड़े कई राज उजागर हुए। स्थानीय लोगों को कैरियर के रूप में इस्तेमाल कर बस या ट्रेन से उन्हें पूर्वोत्तर राज्यों में बुला रहे हैं।

    असम के दीमापुर और मणिपुर के इम्फाल जैसे पूर्वोत्तर राज्यों से हेरोइन/कोटा की खेप लाकर बिहार के अलग-अलग जिलों में सप्लाई कर रहे हैं। नेपाल सीमा से सटे सीतामढ़ी और मुजफ्फरपुर के रास्ते चरस और अन्य ड्रग्स को बिहार के बाहर भी तस्करी की जा रही है।

    डेढ़ वर्ष में 17 किलोग्राम से अधिक हेरोइन/स्मैक बरामद
    एसटीएफ और उसकी नार्कोटिक्स सेल की टीम ने वर्ष 2025 में अप्रैल से दिसंबर तक 7.662 किलोग्राम हेरोइन और 4.215 किलोग्राम स्मैक जब्त किया गया।

    इसी तरह वर्ष 2026 में जनवरी से आठ अगस्त तक 5.724 किलोग्राम हेरोइन/स्मैक बरामद किया गया। एसटीएफ का अभियान जारी है और लगातार किसी न किसी क्षेत्र में मादक पदार्थ के साथ गिरफ्तारी की जा रही है।

  • पंजाब में बोर्ड परीक्षाओं की री-चेकिंग और री-इवैल्यूएशन के आवेदन शुरू, जानें पूरी प्रक्रिया

    पंजाब में बोर्ड परीक्षाओं की री-चेकिंग और री-इवैल्यूएशन के आवेदन शुरू, जानें पूरी प्रक्रिया

    मोहाली.

    पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड (PSEB) द्वारा जुलाई 2026 में आयोजित की गई मैट्रिक (10वीं) और सीनियर सेकेंडरी (12वीं) की अनुपूरक परीक्षाओं (री-अपीयर/कंपार्टमेंट और अतिरिक्त/वोकेशनल विषय) का परिणाम घोषित किया जा चुका है।

    12वीं कक्षा का परिणाम 25 अगस्त 2026 और 10वीं कक्षा का परिणाम 28 अगस्त 2026 को जारी किया गया था। इस संबंध में जानकारी देते हुए पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड के एक प्रवक्ता ने बताया कि ​इन परीक्षाओं से संबंधित जो परीक्षार्थी अपने उत्तर-पुस्तिकाओं की री-चेकिंग (पुनः जांच) या री-मूल्यांकन (Re-evaluation) करवाना चाहते हैं, वे 07 सितंबर 2026 से 21 सितंबर 2026 तक ऑनलाइन फॉर्म और फीस जमा कर सकते हैं।

    ​मुख्य बातें:

    • आवेदन की अवधि: 07 सितंबर 2026 से 21 सितंबर 2026 तक।
    • आवेदन प्रक्रिया: फॉर्म और फीस केवल ऑनलाइन माध्यम से ही स्वीकार किए जाएंगे।
    • ​हार्ड कॉपी जमा करने की आवश्यकता नहीं: फॉर्म भरने और फीस का भुगतान करने के बाद परीक्षार्थी प्रिंटआउट अपने पास रिकॉर्ड के लिए संभाल कर रखें। इसे बोर्ड कार्यालय में जमा करवाने की आवश्यकता नहीं है।
    • अधिक जानकारी: विस्तृत दिशा-निर्देशों और अन्य जानकारी के लिए बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट www.pseb.ac.in पर जाएं।
  • हरियाणा में वन मित्रों को बड़ी राहत, 15 सितंबर तक बकाया भुगतान के निर्देश

    हरियाणा में वन मित्रों को बड़ी राहत, 15 सितंबर तक बकाया भुगतान के निर्देश

    चंडीगढ़
     हरियाणा के वन एवं पर्यावरण मंत्री राव नरबीर सिंह ने वन मित्रों की वित्तवर्ष 2025-26 और 2026-27 की बकाया मैनटेनेंस राशि का भुगतान 15 सितंबर तक हर हाल में करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने जिला वन अधिकारियों (डीएफओ) को स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि भुगतान में किसी तरह की मनमानी या देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

    वन मित्रों से जुड़े लंबित मामलों की समीक्षा बैठक में मंत्री ने कहा कि पौधारोपण अभियान में वन मित्र विभाग और आमजन के बीच महत्वपूर्ण कड़ी हैं। उन्होंने वन मित्रों को निजी भूमि के साथ वन विभाग की जमीन पर भी पौधे लगाने की अनुमति देने के निर्देश दिए, ताकि प्रदेश में हरित क्षेत्र बढ़ाने के साथ लगाए गए पौधों की नियमित देखभाल भी सुनिश्चित हो सके।

    बैठक में बताया गया कि वित्तवर्ष 2026-27 में 635 वन मित्रों ने करीब चार लाख पौधे लगाए हैं। इनमें से 2 लाख 14 हजार 992 पौधों का सत्यापन कर उनका विवरण पोर्टल पर अपलोड किया जा चुका है।

    मंत्री ने वन मित्रों के पंजीकरण के लिए पोर्टल को 30 सितंबर 2026 तक खुला रखने के निर्देश दिए। उन्होंने पहले से पंजीकृत वन मित्रों से अधिक लोगों को अभियान से जोड़ने का आह्वान किया। स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं को भी वन मित्र बनाने पर जोर दिया गया।

    राव नरबीर सिंह ने वन विभाग की जमीन पर पौधारोपण बढ़ाने और लगाए गए पौधों की चार से पांच वर्ष तक देखभाल सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि प्राण वायु देवता पेंशन योजना के तहत प्रदेश में करीब 5,300 पेड़ों की पहचान की गई है। इनकी देखभाल करने वालों को सालाना एक हजार रुपये पेंशन दी जाती है।