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  • वाओं को रोजगार, नागरिकों को सुगम सेवाएं और आधुनिक कौशल से जोड़ना हमारी प्राथमिकता : मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय

    वाओं को रोजगार, नागरिकों को सुगम सेवाएं और आधुनिक कौशल से जोड़ना हमारी प्राथमिकता : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

    रायपुर

    मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय की उपस्थिति में आज मंत्रालय महानदी भवन में रोजगार, डिजिटल गवर्नेंस और कौशल विकास के क्षेत्र में तीन महत्वपूर्ण पहलों को आगे बढ़ाया गया। मुख्यमंत्री  साय ने नवा रायपुर अटल नगर विकास प्राधिकरण में चयनित युवा उप अभियंताओं को नियुक्ति पत्र प्रदान किए। नागरिकों तक शासकीय डिजिटल सेवाओं की पहुंच को अधिक व्यापक और सुविधाजनक बनाने के लिए छत्तीसगढ़ इन्फोटेक प्रमोशन सोसायटी (चिप्स) और कॉमन सर्विस सेंटर के बीच एमओयू किया गया। साथ ही नवा रायपुर में प्रस्तावित नेशनल स्किल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट की स्थापना के लिए 10 एकड़ भूमि आवंटन का पत्र सौंपा गया।

    मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने इस अवसर पर कहा कि युवाओं को रोजगार के अवसर, नागरिकों को सरल और पारदर्शी शासकीय सेवाएं तथा नई पीढ़ी को भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप आधुनिक कौशल उपलब्ध कराना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। सरकार रोजगार सृजन, कौशल विकास, डिजिटल गवर्नेंस और आधुनिक अधोसंरचना को एक-दूसरे से जोड़कर विकसित छत्तीसगढ़ की मजबूत नींव तैयार कर रही है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि शासन की योजनाओं और सेवाओं का वास्तविक उद्देश्य तभी पूरा होता है, जब उनका लाभ नागरिकों तक आसानी और समयबद्धता के साथ पहुंचे। तकनीक के माध्यम से शासन और नागरिकों के बीच की दूरी कम की जा रही है। वहीं युवाओं को सरकारी सेवाओं के साथ उद्योग, निजी क्षेत्र, उद्यमिता और कौशल आधारित रोजगार के लिए भी तैयार किया जा रहा है।

    नवा रायपुर के निर्माण में युवा अभियंताओं की होगी महत्वपूर्ण भूमिका

    मुख्यमंत्री  साय ने नवा रायपुर अटल नगर विकास प्राधिकरण में उप अभियंता के पद पर चयनित युवा अभियंताओं को नियुक्ति पत्र प्रदान कर उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने नवनियुक्त अभियंताओं के अभिभावकों को भी बधाई दी।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि नवा रायपुर भविष्य के छत्तीसगढ़ की आकांक्षाओं का शहर है। यहां आधुनिक अधोसंरचना, गुणवत्तापूर्ण नागरिक सुविधाओं और योजनाबद्ध विकास को निरंतर विस्तार दिया जा रहा है। नवनियुक्त अभियंताओं को इस आधुनिक शहर के निर्माण और विकास में योगदान देने का महत्वपूर्ण अवसर मिला है।

    उन्होंने युवा अभियंताओं से कहा कि वे अपने ज्ञान और तकनीकी दक्षता का उपयोग जनहित में करते हुए पूरी निष्ठा, ईमानदारी और कर्तव्यपरायणता के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करें। निर्माण कार्यों में गुणवत्ता, समयबद्धता और जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता दें।

    मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रदेश में युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने की दिशा में लगातार काम किया जा रहा है। विभिन्न विभागों में नियमित भर्तियां की जा रही हैं और भर्ती प्रक्रियाओं को पारदर्शी तथा समयबद्ध बनाया गया है। सभी युवाओं के लिए रोजगार की संभावनाएं केवल सरकारी नौकरियों तक सीमित नहीं हो सकतीं, इसलिए राज्य सरकार उद्योग, निजी क्षेत्र, उद्यमिता, स्टार्टअप और कौशल विकास के माध्यम से भी व्यापक अवसर तैयार कर रही है।

    उन्होंने कहा कि नई औद्योगिक नीति 2024-30 में रोजगार सृजन को विशेष प्राथमिकता दी गई है। इसके अंतर्गत अब तक 8 लाख 23 हजार करोड़ रुपए से अधिक के निवेश प्रस्तावों के एमओयू हुए हैं और अनेक परियोजनाओं पर धरातल पर काम भी प्रारंभ हो चुका है। आने वाले वर्षों में लगभग पौने दो लाख युवाओं के लिए रोजगार के अवसर सृजित करने का लक्ष्य है। स्थानीय लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने वाले उद्योगों के लिए औद्योगिक नीति में विशेष प्रोत्साहन का प्रावधान किया गया है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग के माध्यम से पारदर्शी चयन प्रक्रिया को मजबूत किया गया है। गरीब, किसान और सामान्य परिवारों के बच्चे अपनी प्रतिभा और मेहनत के बल पर चयनित होकर आगे बढ़ रहे हैं। भर्ती प्रक्रियाओं को और गति देने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ कर्मचारी चयन मंडल का भी गठन किया गया है।

    डिजिटल गवर्नेंस को नई गति, चिप्स और कॉमन सर्विस सेंटर के बीच एमओयू

    मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय की उपस्थिति में छत्तीसगढ़ इन्फोटेक प्रमोशन सोसायटी (चिप्स) और कॉमन सर्विस सेंटर के बीच एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए। चिप्स की ओर से मुख्य कार्यपालन अधिकारी  मयंक अग्रवाल तथा कॉमन सर्विस सेंटर स्पेशल पर्पस व्हीकल की ओर से स्टेट हेड  जय नारायण पटेल ने एमओयू पर हस्ताक्षर किए।

    इस एमओयू के माध्यम से सेवा सेतु पोर्टल पर उपलब्ध नागरिक-केंद्रित सेवाओं को कॉमन सर्विस सेंटर के डिजिटल प्लेटफॉर्म से भी जोड़ा जाएगा। इसी तरह कॉमन सर्विस सेंटर पर उपलब्ध सेवाओं को सेवा सेतु से जोड़ने की दिशा में कार्य होगा। इससे नागरिकों को अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर जाने की आवश्यकता कम होगी और अधिक सेवाएं उनके नजदीकी केंद्रों पर आसानी से उपलब्ध हो सकेंगी।

    कॉमन सर्विस सेंटर और सेवा सेतु केंद्रों की पहचान को नागरिकों के लिए अधिक सरल बनाने के उद्देश्य से इन केंद्रों पर एकरूप ब्रांडिंग और साइनबोर्ड लगाए जाएंगे। केंद्रों पर उपलब्ध प्रमुख सेवाओं की जानकारी भी स्पष्ट रूप से प्रदर्शित की जाएगी। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में अंतिम छोर तक शासकीय सेवाएं पहुंचाने के लिए कॉमन सर्विस सेंटर के ग्राम स्तरीय उद्यमी नेटवर्क और सेवा सेतु केंद्रों का समन्वित उपयोग किया जाएगा।

    16 हजार से अधिक सेवा सेतु केंद्र, 54 लाख से अधिक आवेदन

    वर्तमान में सेवा सेतु के माध्यम से 38 विभागों की 907 सेवाएं 16,619 केंद्रों के जरिए ऑनलाइन उपलब्ध कराई जा रही हैं। एक अप्रैल 2025 से अब तक सेवा सेतु पोर्टल पर 54 लाख 23 हजार से अधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें 90 प्रतिशत से अधिक आवेदनों का निराकरण किया गया है।

    प्रदेश में 28,450 सक्रिय कॉमन सर्विस सेंटर के माध्यम से भी 600 से अधिक शासकीय एवं व्यावसायिक सेवाएं नागरिकों को प्रदान की जा रही हैं। एमओयू के बाद सेवा सेतु की 907 शासकीय सेवाओं की पहुंच सक्रिय कॉमन सर्विस सेंटरों तक भी विस्तारित होगी। इससे विशेष रूप से ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों के नागरिकों को अपने नजदीक ही अधिक सेवाएं प्राप्त करने की सुविधा मिलेगी।

    एक हजार से अधिक सेवाओं को एक डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ने की तैयारी

    मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि सेवा सेतु को नागरिक सेवाओं के एक व्यापक डिजिटल प्लेटफॉर्म के रूप में विकसित किया जा रहा है। राज्य सरकार की सेवाओं के साथ केंद्र सरकार की 166 सेवाओं को भी इससे जोड़ने की प्रक्रिया चल रही है। इससे एक हजार से अधिक सेवाओं को एक डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से नागरिकों तक पहुंचाने का मार्ग प्रशस्त होगा।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार स्वच्छ, पारदर्शी और जवाबदेह शासन व्यवस्था के लिए प्रतिबद्ध है। शासकीय सेवाओं को ऑनलाइन उपलब्ध कराने का उद्देश्य नागरिकों को कार्यालयों के अनावश्यक चक्कर से बचाना, सेवाओं की डिलीवरी को समयबद्ध बनाना और पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता तथा जवाबदेही बढ़ाना है।

    उन्होंने कहा कि नागरिकों की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 भी शुरू की गई है। इससे तहसीलदार से लेकर सचिव स्तर तक लगभग 8 हजार अधिकारी जुड़े हैं और शिकायतों के निराकरण के लिए समय-सीमा निर्धारित की गई है। शासन का प्रयास है कि नागरिक को अपनी समस्या लेकर व्यवस्था के पीछे न जाना पड़े, बल्कि व्यवस्था स्वयं उसके समाधान के लिए जवाबदेह बने।

    नवा रायपुर में लगभग 250 करोड़ रुपए की लागत से बनेगा नेशनल स्किल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट

    कार्यक्रम में नवा रायपुर में नेशनल स्किल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट की स्थापना के लिए 10 एकड़ भूमि आवंटन का पत्र भी सौंपा गया। प्रस्तावित संस्थान के निर्माण पर लगभग 250 करोड़ रुपए व्यय किए जाएंगे। यहां प्रतिवर्ष करीब 4 हजार युवाओं को आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण कौशल प्रशिक्षण देने की व्यवस्था प्रस्तावित है।

    संस्थान में लगभग 20 अलग-अलग ट्रेड में प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण कार्यक्रमों को उद्योगों और रोजगार बाजार की बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार किया जाएगा, जिससे युवाओं को नई तकनीकों का व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त हो और वे रोजगार के साथ स्वरोजगार एवं उद्यमिता के अवसरों का भी लाभ उठा सकें।

    मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि नेशनल स्किल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट छत्तीसगढ़ के युवाओं के लिए आधुनिक कौशल और रोजगार के अवसरों का महत्वपूर्ण केंद्र बनेगा। बदलती तकनीक के इस दौर में युवाओं को केवल डिग्री ही नहीं, बल्कि उद्योगों की आवश्यकता के अनुरूप आधुनिक कौशल से लैस करना भी आवश्यक है। यह संस्थान प्रदेश के युवाओं को भविष्य के रोजगार के लिए तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

    राष्ट्रीय स्तर के शिक्षा और कौशल संस्थानों के केंद्र के रूप में विकसित हो रहा नवा रायपुर :  ओ.पी. चौधरी

    आवास एवं पर्यावरण मंत्री  ओ.पी. चौधरी ने नवनियुक्त युवा अभियंताओं और उनके अभिभावकों को बधाई देते हुए कहा कि उन्हें नवा रायपुर जैसे तेजी से विकसित हो रहे आधुनिक शहर के निर्माण में योगदान देने का महत्वपूर्ण अवसर मिला है। अधोसंरचना किसी भी राज्य के आर्थिक विकास की बुनियाद होती है और गुणवत्तापूर्ण अधोसंरचना के निर्माण में इंजीनियरों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
     चौधरी ने कहा कि सरकारी नौकरी के प्रति युवाओं का आकर्षण स्वाभाविक है, लेकिन वर्तमान समय में रोजगार और करियर की संभावनाएं केवल सरकारी क्षेत्र तक सीमित नहीं हैं। निजी क्षेत्र, उद्यमिता, तकनीक और कौशल आधारित क्षेत्रों में भी व्यापक अवसर पैदा हो रहे हैं। राज्य सरकार सरकारी भर्तियों के साथ युवाओं के लिए गुणवत्तापूर्ण कौशल प्रशिक्षण और रोजगार के नए अवसर तैयार करने पर विशेष ध्यान दे रही है।

    वित्त मंत्री  चौधरी ने कहा कि पारदर्शी और निष्पक्ष भर्ती प्रक्रिया युवाओं में व्यवस्था के प्रति विश्वास मजबूत करती है। उन्होंने नवनियुक्त अभियंताओं का आह्वान किया कि जिस पारदर्शी व्यवस्था के माध्यम से उन्हें सेवा का अवसर मिला है, उसी भावना के साथ वे अपने पूरे सेवाकाल में ईमानदारी, कर्तव्यनिष्ठा और जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता दें तथा विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में सक्रिय योगदान दें।

    नागरिकों को केंद्रों पर स्पष्ट रूप से मिलेगी उपलब्ध सेवाओं की जानकारी

    सचिव  अंकित आनंद ने बताया कि मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के निर्देशानुसार सेवा केंद्रों पर नागरिकों से जुड़ी प्रमुख सेवाओं की जानकारी प्रमुखता से प्रदर्शित की जाएगी। इनमें जाति प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र, ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र, विवाह प्रमाण पत्र, बिजली कनेक्शन, भूमि उपयोग संबंधी जानकारी, व्यापार अनुज्ञप्ति, निर्माण श्रमिक पंजीयन, राशन कार्ड और सामाजिक सुरक्षा पेंशन जैसी सेवाएं शामिल हैं।
    इसके साथ ही केंद्र सरकार से संबंधित आधार, आयुष्मान, गैस कनेक्शन, पैन कार्ड, पासपोर्ट, पेंशन, फसल बीमा, फास्टैग, उद्यम परिचय पत्र, कृषि ड्रोन सेवा तथा निजी बैंकों से जुड़ी सेवाएं भी नागरिकों को उपलब्ध होंगी। 

    इस अवसर पर स्कूल शिक्षा मंत्री  गजेंद्र यादव, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री  लखन लाल देवांगन, नवा रायपुर विकास प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालन अधिकारी  चंदन कुमार सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी तथा नवनियुक्त अभियंता उपस्थित थे।

  • फिर बढ़ेगी दिव्यांगजन की पेंशन धनराशि: सीएम योगी

    फिर बढ़ेगी दिव्यांगजन की पेंशन धनराशि: सीएम योगी

    गोरखपुर

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि किसी भी समाज की प्रगति और असली पहचान ऊंची इमारतों से नहीं होती। समाज की प्रगति उस व्यवस्था में होती है, जहां शासन की योजनाओं का लाभ बिना भेदभाव, अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक मजबूती से पहुंचता है। यही सुशासन का पहला सूत्र है। उत्तर प्रदेश की डबल इंजन सरकार इसी सूत्र पर कार्य कर रही है। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने दिव्यांगजन की पेंशन धनराशि में जल्द ही फिर वृद्धि किए जाने की घोषणा की। उन्होंने सभी 18 मंडलों में जिला दिव्यांग पुनर्वास केंद्र स्थापित करने के भी निर्देश दिए हैं।

    सीएम योगी बुधवार को सिविल लाइंस स्थित गोरखपुर क्लब में दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग और हिंदुस्तान उर्वरक एवं रसायन लिमिटेड के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण वितरण समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने 509 लाभार्थियों को मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल, ई-ट्राइसाइकिल, स्मार्टफोन, स्मार्टकेन, ब्रेल किट सहित विभिन्न प्रकार के 664 सहायक उपकरणों का वितरण किया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के शासन प्रमुख के रूप में 25 वर्ष पूर्ण करने के उपलक्ष्य में चलाए जा रहे ‘सेवा संकल्प अभियान’ के अंतर्गत आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा कि मोदी जी के नेतृत्व में 12 वर्षों में देश में बिना भेदभाव शासन की योजनाओं का समाज के अंतिम पायदान पर बैठे व्यक्तियों तक पहुंचा है। डबल इंजन सरकार ने किसी भी योजना में व्यक्ति, मत, मजहब, क्षेत्र, भाषा आदि का कभी भेदभाव नहीं किया। सिर्फ एक लक्ष्य रहा- सबका साथ और सबका विकास। सबका विश्वास और सबका प्रयास। 

    पीएम मोदी जैसा योजक तो कोई अयोग्य कैसे रह सकता

    मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय संस्कृति में कहा गया है, ‘अयोग्यो पुरुषो नास्ति’। यानी, हमारी संस्कृति में किसी भी व्यक्ति को अधूरा नहीं माना गया है। भारतीय मनीषा कहती है कि कोई भी व्यक्ति अयोग्य नहीं होता। अगर कोई किसी को अयोग्य कहता है तो इसका मतलब यह है कि कोई योजक नहीं है। जब देश में प्रधानमंत्री मोदी जी जैसा योजक है तो कोई अयोग्य कैसे रह सकता है। उनके नेतृत्व में जरूरतमंदों को आवास, शौचालय, रसोई गैस कनेक्शन, पेंशन, युवाओं को रोजगार-नौकरी उपलब्ध कराई गई। केंद्र व प्रदेश की डबल इंजन सरकार का लक्ष्य हर व्यक्ति का स्वावलंबन और सबके जीवन में खुशी लाना है। 

    जल्द बढ़ेगी दिव्यांगजन की पेंशन राशि

    सीएम योगी ने दिव्यांगजन कल्याण के लिए किए गए कार्यों का विस्तार से उल्लेख करते हुए कहा कि जल्द ही उनकी पेंशन धनराशि में एक बार फिर वॄद्धि की जाएगी। पहले दिव्यांगजन को 300 रुपये पेंशन मिलती थी। सरकार ने इसे पहले 500 और फिर 1000 रुपये किया। अब कुछ दिनों में इसमें फिर बढ़ोतरी की जाएगी।
     
    सभी मंडलों में संचालित होंगे जिला दिव्यांग पुनर्वास केंद्र

    मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश के सभी 18 मंडलों में जिला दिव्यांग पुनर्वास केंद्र स्थापित करने के निर्देश दिए गए हैं। गोरखपुर में सीतापुर आई हॉस्पिटल परिसर में यह केंद्र शुरू हो चुका है। उन्होंने गोरखपुर में स्पर्श राजकीय दृष्टिबाधित बालक एवं बालिका इंटर कॉलेज, संकेत राजकीय मूकबधिर विद्यालय, बीआरडी मेडिकल कॉलेज के मनोविकास केंद्र और राजकीय कौशल विकास केंद्र का उल्लेख किया। कहा कि नॉर्मल कैंपस में आश्रय एवं प्रशिक्षण केंद्र, छात्रावास और बचपन डे केयर सेंटर भी संचालित हैं।

    दिव्यांगजन के लिए हर विधानसभा क्षेत्र में शिविर
    सीएम योगी ने कहा कि वर्ष 2026-27 में प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में शिविर लगाकर पेंशन से छूटे दिव्यांगजनों को योजनाओं से जोड़ने का लक्ष्य है। प्रदेश में 17 लाख से अधिक दिव्यांगजनों की डिजिटल पहचान मजबूत कर उन्हें कार्ड उपलब्ध कराए गए हैं। दिव्यांगजन सशक्तीकरण की शुरुआत बचपन से होनी चाहिए। शुरुआती जांच, थेरेपी, अभिभावकों को मार्गदर्शन, विशेष शिक्षा और तकनीकी सहायता पर सरकार का जोर है। इसी क्रम में तीन से सात वर्ष के श्रवणबाधित, दृष्टिबाधित और बौद्धिक दिव्यांगता वाले बच्चों के लिए बचपन डे केयर सेंटरों का विस्तार किया जा रहा है। उन्होंने दिव्यांगजनों को सीएम युवा, पीएम स्वनिधि, ओडीओपी, पीएम विश्वकर्मा, पीएम मुद्रा और स्टैंडअप जैसी योजनाओं से जोड़ने पर जोर दिया। साथ ही बताया कि प्रदेश सरकार कॉक्लियर इंप्लांट पर छह लाख रुपये तक के खर्च के साथ स्पीच थेरेपी में भी सहयोग करती है।

    प्रतिभा को दया नहीं, अवसर की आवश्यकता

    मुख्यमंत्री ने कहा कि शारीरिक चुनौती प्रतिभा की राह में बाधा नहीं बन सकती। प्रतिभा को दया नहीं, अवसर उपलब्ध कराने की आवश्यकता है। सही साधन और प्रशिक्षण मिले तो प्रतिभा अपनी क्षमता की ऊंचाई तक पहुंच सकती है। उन्होंने महान ऋषि अष्टावक्र, महाकवि सूरदास, संगीतकार रवींद्र जैन और पर्वतारोही अरुणिमा सिन्हा के साथ पैरालंपिक खिलाड़ियों दीपा मलिक, सुहास एलवाई, सुमित अंतिल, देवेंद्र, भाविना पटेल, वैभव गौतम, प्रवीण कुमार, प्रीति पाल आदि का उदाहरण देते हुए कहा कि पदक केवल मजबूत भुजाओं से नहीं, बल्कि मजबूत हौसले से जीते जाते हैं। इन खिलाड़ियों ने साबित किया कि प्रतिभा को दया नहीं, अवसर चाहिए।

    पीएम मोदी ने किया दृष्टि बदलने का प्रयास

    सीएम ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वर्ष 2015 में ‘विकलांग’ के स्थान पर ‘दिव्यांग’ शब्द का प्रयोग कर समाज की ‘दृष्टि’ बदलने का प्रयास किया। यह दृष्टि बताती है कि डबल इंजन सरकार दिव्यांगजन को अधिकार और सम्मान देने के लिए प्रतिबद्ध है। इसी दृष्टि से ब्रेल व ऑडियो सूचना, टैक्टाइल पाथ, सुलभ डिजिटल सेवाएं, सांकेतिक भाषा, कैप्शन और विजुअल अलर्ट जैसी सुविधाएं बढ़ाई जा रही हैं।

    सशक्तीकरण का सबसे बड़ा माध्यम शिक्षा
    मुख्यमंत्री ने शिक्षा को सशक्तीकरण का सबसे बड़ा माध्यम बताते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश देश का पहला राज्य है, जहां दिव्यांगजन के लिए दो विश्वविद्यालय संचालित हैं। लखनऊ में डॉ. शकुंतला मिश्रा दिव्यांगजन सशक्तीकरण विश्वविद्यालय और चित्रकूट में जगद्गुरु रामभद्राचार्य दिव्यांग विश्वविद्यालय कार्य कर रहे हैं।

    साढ़े नौ वर्षों में आया अभूतपूर्व बदलाव: नरेंद्र कश्यप

    कार्यक्रम में पिछड़ा वर्ग कल्याण एवं दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग के राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नरेंद्र कश्यप ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश में साढ़े नौ वर्षों के दौरान दिव्यांगजन के जीवन में अभूतपूर्व बदलाव आया है। उन्होंने दिव्यांगजन से जुड़ी हर योजना के लिए समुचित बजट देकर अपनी संवेदनाएं दिखाई हैं। पीडीए का ढिंढोरा पीटने वाली सपा जब सत्ता में थी तब दिव्यांगजन विभाग का बजट महज 665 करोड़ रुपये था। जबकि सीएम योगी की उदारता से वर्ष 2026-27 में यह बजट 2200 करोड़ रुपये हो गया है। मुख्यमंत्री ने राज्य की 25 करोड़ जनता का जीवन उन्नत करने के साथ ही दिव्यांगजन के जीवन को सशक्त करने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी है। अखिलेश यादव की सरकार में दिव्यांगजन को भरण पोषण के लिए मात्र 300 रुपये दिया जाता था, इसे बढ़ाकर 1000 रुपये करने का काम सीएम योगी ने किया है। उन्होंने दिव्यांग बच्चियों की यात्रा सुगम बनाने के लिए ई-स्कूटी के लिए 60 करोड़ रुपये दिए हैं। प्रदेश में 55 बचपन डे केयर संचालित है, जबकि 28 और खुलने वाले हैं।

    इस अवसर पर जिले के प्रभारी मंत्री एवं प्रदेश के जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, मत्स्य विभाग के मंत्री संजय निषाद, प्रदेश सरकार के पूर्व कैबिनेट मंत्री डॉ. महेंद्र सिंह, जिला पंचायत की प्रशासक साधना सिंह, महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव, भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष एवं एमएलसी डॉ. धर्मेंद्र सिंह, विधायक फतेह बहादुर सिंह, श्रीराम चौहान, राजेश त्रिपाठी, महेंद्रपाल सिंह, विपिन सिंह, डॉ. विमलेश पासवान, प्रदीप शुक्ल, सरवन निषाद, राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष चारू चौधरी, हिंदुस्तान उर्वरक एवं रसायन लिमिटेड के प्रबंध निदेशक एसपी मोहंती, दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग के प्रमुख सचिव राजेश कुमार सिंह, भाजपा के जिलाध्यक्ष जनार्दन तिवारी आदि प्रमुख रूप से उपस्थित रहे। स्वागत संबोधन भाजपा के महानगर अध्यक्ष रमेश प्रताप गुप्ता ने किया। 

    दिव्यांगजन को मिले सवा करोड़ रुपये के सहायक उपकरण

    कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दिव्यांगजन को करीब सवा करोड़ रुपये के सहायक उपकरण उपलब्ध कराए। इसमें 127 दिव्यांगजन को मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल, 25 को ई-ट्राइसाइकिल, 70 को ट्राइसाइकिल, 155 दिव्यांगजन को 319 स्मार्ट केन एवं ब्रेल किट, 90 को हियरिंग एड, 5 को स्मार्टफोन, 1 को ब्रेल लिपि की गीता, 1 को ब्रेल लिपि की रामचरितमानस, 10 को कृत्रिम अंग, 20 को वयोश्री योजना का लाभ और 5 दिव्यांगों को पाठ्य पुस्तकों का वितरण किया गया।

  • राहुल गांधी की लीडरशिप पर शिवराज का बड़ा दावा, बोले- INDIA गठबंधन नहीं मानता नेता

    राहुल गांधी की लीडरशिप पर शिवराज का बड़ा दावा, बोले- INDIA गठबंधन नहीं मानता नेता

    नई दिल्ली

    दिल्ली में INDIA गठबंधन की बैठक को लेकर भारतीय जनता पार्टी हमलावर है. केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह ने INDIA गठबंधन की मीटिंग पर निशाना साधते हुए कहा है कि "इंडी गठबंधन राहुल गांधी को नेता मानने को तैयार नहीं है. साथ ही कांग्रेस के नेता भी राहुल गांधी को नेता मानने को तैयार नहीं हैं. उन्होने कहा कि जिसे कांग्रेसी नेता नहीं मान रहे, उसे देश नेता कैसे मानेगा?"

    शिवराज ने आरोप लगाते हुए आगे कहा कि "राहुल गांधी की लीडरशिप इंडी गठबंधन को स्वीकार नहीं है, इसलिए सहयोगी बैठक में नहीं आ रहे हैं. नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर तंज कसते हुए शिवराज सिंह ने कहा कि" राहुल गांधी खुद कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक में कह रहे हैं कि मुझे नेता मानो, मुझ पर विश्वास करो। 

    INDIA गठबंधन की मीटिंग पर तंज
    उन्होंने कहा कि इंडी गठबंधन, बैठक से पहले ही बिखर गया है, DMK बैठक में नहीं आ रही है. अखिलेश यादव कहीं और व्यस्त हैं, "आप" ने पहले ही बैठक में आने से मना कर दिया है. साथ ही उद्धव ठाकरे फिजिकली नहीं, वर्चुअली जुड़ेंगे। 

    केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विपक्षी नेताओं पर बड़ा हमला बोला. उन्होंने कहा कि इंडिया गठबंधन हताशा में है और यह गठबंधन राहुल गांधी को अपना नेता मानने को तैयार नहीं है. उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव इस बैठक में क्यों शामिल नहीं हुए। 

    शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि इंडिया गठबंधन का कोई विजन नहीं है. साथ ही, राहुल गांधी को 50वीं बार लॉन्च करने की तैयारी चल रही है. केंद्रीय कृषि मंत्री ने आगे कहा कि एक के बाद एक चुनाव में कांग्रेस की हार के बाद माना जा रहा था कि कांग्रेस जनता से माफी मांगेगी. लेकिन कांग्रेस ने तय कर लिया है कि हम नहीं सुधरेंगे।

    शुद्ध वोटर लिस्ट लोकतंत्र की आत्मा
    SIR प्रक्रिया और चुनाव आयोग के हालिया मामले पर बचाव करते हुए केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि "शुद्ध वोटर लिस्ट लोकतंत्र की आत्मा है, अगर वोटर लिस्ट में गलत नाम जुड़ते हैं तो लोकतंत्र ही मर जाएगा. जो जीवित ही नहीं बचा, उसका नाम वोटर लिस्ट से काटने पर विपक्ष को इतनी आपत्ति क्यों है? प्रश्न तो यह है कि "जो देश का नागरिक नहीं है, उसका नाम वोटर लिस्ट में क्यों जुड़ना चाहिए? पवित्र लोकतंत्र के लिए वोटर लिस्ट का शुद्ध होना जरूरी है। 

    विपक्ष अपनी हार पर बहाने बनाता है
    SIR पर विपक्ष की आपत्ति को लेकर शिवराज ने कहा कि "ये लोग मैदान में जीत नहीं पाते हैं, इसलिए हार का ठीकरा प्रधानमंत्री मोदी पर फोड़ते रहते हैं. अगर सब कुछ में धांधली है तो "उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव की 37 सीटें कैसे आ गईं?

    "अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग चुनाव परिणाम क्यों आते हैं? ये लोग हार जाते हैं तो वोट चोरी का बहाना बनाते हैं. वोट बिल्कुल भी चोरी नहीं हुए है, देश सब कुछ समझता है, इसीलिए जनता ने कांग्रेस को और इनके सहयोगियों को वोट देना बंद कर दिया है। 

  • मोदी सरकार के 3 बड़े फैसले, MSP बढ़ा; ₹2.79 लाख करोड़ के पैकेज को मंजूरी

    मोदी सरकार के 3 बड़े फैसले, MSP बढ़ा; ₹2.79 लाख करोड़ के पैकेज को मंजूरी

    नई दिल्ली 
    केन्द्र की मोदी सरकार ने आज कैबिनेट की बैठक में तीन बड़े फैसले लिए हैं। केन्द्र की मोदी सरकार ने किसानों के हित में बड़ा फैसला लेते हुए 6 रबी की फसलों पर 90 हजार, 962 करोड़ रुपये खर्च करने का खाका बनाया है। केन्द्र की मोदी सरकार ने गेंहू की MSP पर बढ़ोत्तरी करते हुए इसे 2610 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया है। वहीं देश में क्लीन एनर्जी के लिए मोदी कैबिनेट ने PM धारा योजना को मंजूरी दे दी है। इसके लिए केन्द्र की सरकार ने 1.86 लाख करोड़ रुपये मंजूर किए हैं। केन्द्र की मोदी सरकार ने 3 बड़े फैसले लेते हुए दिल्ली-एनसीआर… में टै्रफिक सिस्टम को ठीक करने के लिए दिल्ली में इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ITMS ) को लागू करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। ITMS योजना पर 1,790 करोड़ रूपये मंजूर किए गए हैं। इसे 24 माह में तीन चरणों में लागू किया जाएगा। 

    कैबिनेट मंत्री अश्वनी वैष्णव ने दी जानकारी
    केन्द्र की मोदी सरकार द्वारा लिए गए तीन बड़े फैसलों की जानकारी बुधवार को कैबिनेट मंत्री अश्वनी वैष्णव ने प्रेसवार्ता में दी। उन्होंने बताया कि MSP को लेकर फैसला लिया गया है। उन्होंने बताया कि MSP पर 50 प्रतिशत तक की बढ़ोत्तरी की व्यवस्थाकी गई है। खबर अपडेट की जा रही है। 

    रबी सीजन के लिए छह फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य में बढ़ोतरी को सरकार की मंजूरी मिली है. इनमें सबसे ज्यादा बढ़ोतरी कुसुम (Safflower MSP) के लिए की गई है, जो अब 675 रुपये प्रति क्विंटल हो गई है. वहीं सबसे कम बढ़ोतरी गेहूं की एमएसपी में की गई है, जो 25 रुपये प्रति क्विंटल है। 

    रबी की 6 फसलों का MSP कितना बढ़ा?
    केंद्र सरकार ने मार्केटिंग सीजन 2027-28 के लिए गेहूं, जौ, चना, मसूर, सरसों और कुसुम के MSP में बढ़ोतरी की है. उनमें बढ़ोतरी और ताजा एमएसपी पर गौर करें।

    फसलMSP (2027-28) Increase MSP
    गेहूं2610 रुपये25 रुपये
    जौ 2286 रुपये136 रुपये
    चना5958 रुपये83 रुपये
    मसूर7390 रुपये390 रुपये
    सरसों6613 रुपये413 रुपये
    कुसुम7215 रुपये675 रुपये

     

    अश्विनी वैष्णव ने बताया MSP का गणित
    केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि "आज देश भर में दूरगामी असर डालने वाले तीन बड़े फैसले लिए गए। पहला फैसला रबी फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) तय करने से जुड़ा है। गेहूं, जौ, चना, मसूर, रेपसीड और सरसों जैसी फसलों के लिए MSP को उत्पादन लागत से कम से कम 50% ज़्यादा तय किया गया है। उदाहरण के लिए गेहूं को ही लें: इसकी उत्पादन लागत ₹1,264 है, फिर भी MSP ₹2,610 प्रति क्विंटल तय किया गया है, जो लागत से 100% से ज़्यादा (लागत का दोगुने से भी ज़्यादा) है। इसी तरह, जौ के लिए MSP को अनुमानित उत्पादन लागत से 58% ज़्यादा तय किया गया है; ₹1,447 की लागत के मुकाबले MSP ₹2,286 प्रति क्विंटल है… कुल मिलाकर, इस रबी सीज़न में 324 लाख मीट्रिक टन की खरीद से किसानों तक ₹90,962 करोड़ पहुंचेंगे।"

    केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट के फैसलों के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि अखिल भारतीय औसत उत्पादन लागत पर अनुमानित मार्जिन गेहूं के लिए 106% है. इसके बाद सरसों के लिए 96%, मसूर के लिए 92%, चना के लिए 59%, जौ के लिए 58% और कुसुम के लिए 50% है. रबी फसलों के MSP में यह बढ़ोतरी किसानों को लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करेगी और फसल विविधीकरण को बढ़ावा देगी। 

    सरकार ने ये फैसले भी लिए
    केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि कैबिनेट ने एक और महत्वपूर्ण फैसला लंबे समय तक चलने वाले प्रोग्राम को लेकर लिया गया है, जिसका नाम है PM धारा है. यह रिन्यूएबल एनर्जी को पहुंचाने के लिए जरूरी ग्रिड और स्मार्ट ग्रिड इंफ्रास्ट्रक्चर का प्रोग्राम है. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने देश के बिजली उत्पादन में रिन्यूएबल एनर्जी को इतने बड़े पैमाने पर शामिल किया है, जितना कई देश हासिल नहीं कर पाए हैं। 

    Modi Cabinet का तीसरा फैसला दिल्ली के लिए इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ITMS) है. राजधानी के लिए Intelligent Traffic Management System को मंजूरी दे दी गई है. तकनीक की मदद से ट्रैफिक की निगरानी और मैनेजमेंट को बेहतर बनाने पर जोर दिया जाएगा. ITMS का इस्तेमाल ट्रैफिक जाम, सड़क सुरक्षा और वाहनों की आवाजाही को बेहतर तरीके से संभालने के लिए होगा। 

     

     

  • नई कृषि तकनीक करेगी किसानों को लाभान्वित : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    नई कृषि तकनीक करेगी किसानों को लाभान्वित : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    भोपाल 

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि किसानों के कल्याण के लिए प्रदेश सरकार ने कृषक कल्याण वर्ष में विभिन्न गतिविधियों के आयोजन के साथ अनेक जनहितैषी निर्णय लिए हैं। किसानों को नई तकनीक का लाभ दिया जा रहा है। उमरिया जिला कोयला भंडारों के लिए प्रसिद्ध है, जिसे काला सोना भी कहते हैं। यहां स्थित बांधवगढ़ किला मध्यप्रदेश की शान है। उमरिया जिला प्राकृतिक औषधि और वन्यजीव संपदा से समृद्ध है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार को मंत्रालय से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के द्वारा उमरिया जिले में आयोजित बलराम कृषि महोत्सव को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री मती संपतिया उइके, लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्यमंत्री  नरेंद्र शिवाजी पटेल, किसान मोर्चा के प्रदेशाध्यक्ष  जयपाल सिंह चावड़ा भी उपस्थित थे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जिले के किसानों को उपज का समुचित मूल्य दिलवाने के लिए नई कृषि तकनीक और खाद्य प्रसंस्करण को निरंतर प्रोत्साहित किया जा रहा है। उत्तम खेती के लिए सिंचाई सुविधाएं बेहद जरूरी है। इसीलिए राज्य सरकार ने हर गांव और हर खेत को सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराने का संकल्प लिया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसान धान और अन्न फसलों के उपार्जन के लिए समय रहते पंजीयन कराएं, ताकि एमएसपी का लाभ मिलता रहे। उन्होंने कहा कि इसी सीजन से किसानों को दिन में भी 10 घंटे बिजली मिलेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जिला प्रशासन को किसान चौपाल लगाकर हितग्राहियों को कल्याणकारी योजनाओं का लाभ सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए।

    कल्याणकारी योजनाओं का पूरा लाभ उठाएं किसान

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसान गोपालन, दूध उत्पादन, खाद्य प्रसंस्करण, उद्यानिकी फसलों और जैविक-प्राकृतिक खेती को अपनाकर अपनी आय बढ़ाएं। उन्होंने उमरिया के किसानों को बताया कि शीघ्र ही जिले में एक बड़ी फूड प्रोसेसिंग यूनिट शुरू होगी। इससे युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जिला प्रशासन को पंचायत स्तर पर दुग्ध संकलन समितियों के पंजीयन कार्य की गति बढ़ाने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किसानों से कस्टम हायरिंग सेंटर और सोलर पंप जैसी कृषक कल्याण योजनाओं का लाभ लेने की अपील की।

    नि:शुल्क रजिस्ट्री का लाभ

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के सेवा कार्य के 25 वर्ष पूर्ण होने पर प्रदेश में सेवा से संकल्प अभियान जारी है। राज्य सरकार जिलों में जन विश्वास अभियान के जरिए भी पात्र हितग्राहियों को योजनाओं का लाभ दे रही है। सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत ग्रामीण आबादी क्षेत्र के अभिलेखों की नि:शुल्क रजिस्ट्री करवाई जा रही है। किसानों को भी इस स्वामित्व योजना का लाभ मिल रहा है। संपत्ति की पक्की रजिस्ट्री मिलने से हितग्राही बैंक लोन और अन्य आवश्यकताओं के लिए इसे उपयोग कर पाएंगे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि शिक्षित और समृद्ध मध्यप्रदेश बनाने के लिए राज्य सरकार स्कूली बच्चों को कई सौगातें दे रही है। शासकीय स्कूलों के मेधावी विद्यार्थियों को लैपटॉप और स्कूटी दी गई हैं। प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों के बच्चों को नि:शुल्क किताबें, ड्रेस और साइकिलें वितरित की जा रही हैं। प्रदेशभर में सांदीपनि विद्यालय प्रारंभ किए गए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बलराम कृषि महोत्सव के लिए उमरिया में उपस्थित मंत्री  नागर सिंह चौहान और पूर्व मंत्री सु मीना सिंह से भी संवाद किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसान और स्थानीय जन उपस्थित थे।

     

  • मंत्री सिलावट ने की जलाशयों में जलभराव स्थिति की समीक्षा

    मंत्री सिलावट ने की जलाशयों में जलभराव स्थिति की समीक्षा

    मंत्री सिलावट ने की जलाशयों में जलभराव स्थिति की समीक्षा

    अधिक जलभराव वाले बांधों की सतत निगरानी और कम वर्षा वाले क्षेत्रों में जल प्रबंधन पर विशेष ध्यान देने के दिये निर्देश

    भोपाल

    जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट ने प्रदेश में वर्षा एवं जलाशयों में जलभराव की स्थिति की वृहद समीक्षा की। उन्होंने कहा कि प्रदेश के अधिकांश जलाशयों में जलभराव की स्थिति संतोषजनक है। आगामी रबी सीजन की सिंचाई एवं पेयजल आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए उपलब्ध जल का वैज्ञानिक और संतुलित उपयोग सुनिश्चित किया जाए। अधिक जलभराव वाले जलाशयों में सतत निगरानी रखते हुए सुरक्षा मानकों का पालन किया जाए तथा कम वर्षा वाले क्षेत्रों में जल उपलब्धता के आधार पर अभी से जल प्रबंधन की कार्ययोजना तैयार की जाए।

    मंत्री सिलावट ने कहा कि प्रदेश में अब तक प्रदेश में कुल 908.30 मिलीमीटर वर्षा दर्ज हुई है, जो दीर्घावधि औसत 949.50 मिलीमीटर की तुलना में लगभग 4 प्रतिशत कम है। पश्चिमी मध्यप्रदेश में 773.60 मिलीमीटर वर्षा हुई है, जो औसत से 12 प्रतिशत कम है, जबकि पूर्वी मध्यप्रदेश में 1083.60 मिलीमीटर वर्षा हुई है, जो औसत से 4 प्रतिशत अधिक है। उन्होंने अधिकारियों को वर्षा की क्षेत्रवार स्थिति को ध्यान में रखते हुए जलाशयों के जल प्रबंधन की कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए।

    54 प्रमुख बांधों में 89.32 प्रतिशत जलभराव

    प्रदेश के बाढ़ नियंत्रण प्रकोष्ठ के अंतर्गत 54 प्रमुख बांधों में वर्तमान में औसत जलभराव 89.32 प्रतिशत है। पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 95.13 प्रतिशत था, जबकि विगत पांच वर्षों का औसत 88.45 प्रतिशत रहा है। वर्तमान में 35 बांध 90 प्रतिशत से अधिक भरे हुए हैं। 9 बांधों में 75 से 90 प्रतिशत, 5 में 50 से 75 प्रतिशत, 4 में 25 से 50 प्रतिशत तथा एक बांध में 10 से 25 प्रतिशत जलभराव है। मंत्री सिलावट ने 90 प्रतिशत से अधिक जलभराव वाले 35 बांधों की विशेष निगरानी के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक बांध में जलस्तर, पानी की आवक और निकासी की नियमित समीक्षा की जाए तथा आवश्यकता के अनुसार निर्धारित प्रोटोकॉल के तहत जल प्रबंधन किया जाए। बांधों के डाउनस्ट्रीम क्षेत्रों में जिला प्रशासन, पुलिस और आपदा प्रबंधन दलों के साथ समन्वय बनाए रखने के निर्देश भी दिए।

    कम वर्षा वाले क्षेत्रों के लिए विशेष जल प्रबंधन

    मंत्री सिलावट ने पश्चिमी मध्यप्रदेश में औसत से कम वर्षा को देखते हुए उज्जैन तथा नर्मदा-ताप्ती बेसिन में उपलब्ध जल की विशेष समीक्षा के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि रबी सीजन में सिंचाई, पेयजल तथा अन्य आवश्यकताओं के लिए उपलब्ध जल का बेसिनवार एवं परियोजनावार जल बजट तैयार किया जाए। किसानों को सिंचाई के लिए संभावित जल उपलब्धता की जानकारी समय पर उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए गए। समीक्षा में बताया गया कि बेसिनवार जलभराव की स्थिति में गंगा बेसिन 99 प्रतिशत, यमुना बेसिन 94 प्रतिशत तथा नर्मदा बेसिन 95 प्रतिशत है। चंबल-बेतवा एवं सागर बेसिन में 82-82 प्रतिशत, नर्मदापुरम में 81 प्रतिशत, वैनगंगा में 80 प्रतिशत, उज्जैन में 71 प्रतिशत तथा नर्मदा-ताप्ती बेसिन में 57 प्रतिशत औसत जलभराव दर्ज किया गया है।

    मंत्री सिलावट ने अधिकारियों से कहा कि मानसून समाप्त होने के बाद जलाशयों, बांधों, नहरों एवं जल वितरण प्रणालियों का विस्तृत निरीक्षण कर आवश्यक मरम्मत एवं रखरखाव की कार्ययोजना तैयार की जाए। साथ ही कम वर्षा वाले क्षेत्रों में स्थानीय जल संरक्षण, भूजल पुनर्भरण और उपलब्ध जल संसाधनों के बेहतर उपयोग पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। बैठक में विभागीय वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

     

  • 36वीं राज्य स्तरीय कला प्रदर्शनी में कलाकारों को मिलेगा मौका, 1 अक्टूबर से आवेदन शुरू

    36वीं राज्य स्तरीय कला प्रदर्शनी में कलाकारों को मिलेगा मौका, 1 अक्टूबर से आवेदन शुरू

    लखनऊ

    योगी सरकार प्रदेश के कलाकारों को राज्य स्तर पर पहचान दिलाने का बड़ा मौका दे रही है। राज्य ललित कला अकादमी (संस्कृति विभाग) की ओर से '36वीं राज्य स्तरीय कला प्रदर्शनी 2026-27' का आयोजन किया जा रहा है। इसमें चित्र, रेखांकन, ग्राफिक यानी छापा कला, मूर्ति, पोर्ट्रेट यानी व्यक्ति चित्र-मूर्ति, वॉश और पारंपरिक कला विधाओं में कलाकार अपनी कृतियां भेज सकेंगे। प्रदर्शनी में शामिल होने के लिए प्रविष्टि शुल्क और छायाचित्र जमा करने की प्रक्रिया पहली अक्टूबर से 31 अक्टूबर तक चलेगी। अकादमी की ओर से प्रदर्शनी में चयनित अति विशिष्ट कृतियों के लिए 10 कलाकारों को 25-25 हजार रुपये, प्रमाणपत्र और स्मृति चिह्न दिए जाएंगे।

    प्रदर्शनी में भाग लेने के लिए 300 रुपये प्रवेश शुल्क देना होगा। शुल्क निदेशक राज्य ललित कला अकादमी, उत्तर प्रदेश के नाम नकद, मनीऑर्डर या लखनऊ में देय बैंक ड्राफ्ट के माध्यम से जमा किया जा सकता है। विवरण पत्र यानी शेड्यूल, छायाचित्र, जीवन परिचय और पोट्रेट से संबंधित सामग्री कलाकार स्वयं या उचित माध्यम से अकादमी के पते पर भेज सकते हैं। एक कलाकार केवल एक ही विधा में भाग ले सकेगा। आवेदन अकादमी द्वारा निर्धारित प्रपत्र पर ही करना होगा। चयन के पहले चरण में आवेदन के साथ भेजे गए छायाचित्रों के आधार पर कृतियों का चयन होगा और दूसरे चरण में चयनित कृतियों में से पुरस्कार के लिए चयन किया जाएगा।

    1 अक्टूबर 2025 के बाद बनाई गई कृतियां ही इस प्रदर्शनी के लिए स्वीकार की जाएंगी। ऐसी कृति स्वीकार नहीं की जाएगी जो पहले किसी राज्य स्तरीय प्रदर्शनी में प्रदर्शित हो चुकी हो। छायाचित्र 5×7 इंच के दो-दो स्पष्ट रंगीन फोटो के रूप में भेजने होंगे। फोटो के पीछे केवल कृति का शीर्षक, माध्यम, मूल्य और निर्माण वर्ष लिखा जाना चाहिए। निर्धारित आकार से छोटा फोटो या अतिरिक्त जानकारी लिखे होने पर उसे अस्वीकार किया जा सकता है। चित्र का अधिकतम आकार 4×4 फीट और मूर्ति का अधिकतम आकार 4×4×4 फीट, जबकि मूर्ति का न्यूनतम आकार 2×2 फीट निर्धारित है। मूर्तियां धातु, लकड़ी, पत्थर और फाइबर ग्लास जैसे टिकाऊ पदार्थों की होनी चाहिए। 

    छायाचित्रों के चयन के बाद अकादमी की ओर से चयनित कृति भेजने के लिए कलाकारों को अलग से सूचना दी जाएगी। कलाकार अपनी ओर से सीधे कृति अकादमी को नहीं भेज सकेंगे, जब तक अकादमी की ओर से उसे आमंत्रित न किया जाए। निर्धारित समय में कृति अकादमी को नहीं पहुंचने पर उसे प्रदर्शनी और कैटलॉग में शामिल नहीं किया जाएगा। चयन एवं निर्णायक समिति का निर्णय अंतिम होगा। सभी पर ‘अन्तर्वस्तु 36वीं राज्य स्तरीय कला प्रदर्शनी 2026-27, लखनऊ के लिए है’ लिखना होगा। प्रदर्शनी में शामिल सभी कलाकारों को एक-एक निशुल्क कैटलॉग भी दिया जाएगा। चयनित कृति को प्रदर्शनी समाप्त होने से पहले हटाने की अनुमति नहीं होगी।

    प्रदर्शनी से संबंधित आवेदन और पत्राचार राज्य ललित कला अकादमी, लाल बारादरी भवन, ललित कला अकादमी मार्ग, कैसरबाग, लखनऊ-226001 के पते पर किया जा सकता है। अकादमी का दूरभाष 0522-2616033 और ईमेल slka_up@yahoo.com है। 

    पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि प्रदेश की समृद्ध कला और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने के साथ ही कलाकारों को उचित मंच और प्रोत्साहन देना योगी सरकार की प्राथमिकता है। राज्य ललित कला अकादमी के माध्यम से युवा, उभरते, स्थापित और वरिष्ठ कलाकारों को प्रतिभा प्रदर्शित करने के अवसर दिए जा रहे हैं। 36वीं राज्य स्तरीय कला प्रदर्शनी प्रदेश के कलाकारों को अपनी रचनात्मक प्रतिभा सामने लाने और राज्य स्तर पर पहचान बनाने का महत्वपूर्ण मंच प्रदान करेगी। सरकार का प्रयास है कि प्रदेश के दूरदराज क्षेत्रों में रहने वाले कलाकार भी कला गतिविधियों से जुड़ें और उन्हें प्रशिक्षण, प्रदर्शन, पुरस्कार व आर्थिक सहयोग के माध्यम से आगे बढ़ने के अवसर मिलें।

  • जनभागीदारी से रेडक्रॉस के सेवा कार्यों को दें विस्तार : चैयरमेन तोमन साहू

    जनभागीदारी से रेडक्रॉस के सेवा कार्यों को दें विस्तार : चैयरमेन तोमन साहू

    जनभागीदारी से रेडक्रॉस के सेवा कार्यों को दें विस्तार : चैयरमेन तोमन साहू

    रक्तदान, अंगदान और नशामुक्ति के प्रति जागरूकता बढ़ाने युवाओं को जोड़ने पर जोर

    बिल्हा के विद्यालयों में मासिक धर्म स्वास्थ्य एवं स्वच्छता के प्रति चलेगा जागरूकता अभियान

    बिलासपुर, 
    भारतीय रेडक्रॉस सोसायटी के राज्य चेयरमेन तोमन साहू की अध्यक्षता में जिला शाखा बिलासपुर की समीक्षा बैठक जिला कार्यालय के मंथन सभाकक्ष में आयोजित की गई। उन्होंने जनभागीदारी से सेवा कार्यों का विस्तार करने और युवाओं की सक्रिय सहभागिता बढ़ाने पर जोर दिया। बैठक में कलेक्टर संजय अग्रवाल, एसएसपी रजनेश सिंह, नगर निगम आयुक्त प्रकाश कुमार सर्वे एवं जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी संदीप अग्रवाल उपस्थित थे।
          बैठक में जूनियर रेडक्रॉस एवं यूथ रेडक्रॉस को मजबूत करने, सदस्यता अभियान को गति देने तथा रक्तदान एवं अंगदान के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने पर चर्चा हुई। सिकल सेल, टीबी एवं मलेरिया नियंत्रण के लिए स्वास्थ्य विभाग के साथ समन्वय से कार्य करने पर जोर दिया गया। नशामुक्ति अभियान को व्यापक स्तर पर संचालित करने का निर्णय लिया गया। इसके लिए सामाजिक संस्थाओं एवं यूथ रेडक्रॉस के युवाओं की सहभागिता से नुक्कड़ नाटक, लघु चलचित्र और अन्य माध्यमों से लोगों को जागरूक किया जाएगा। सेवा संकल्प अभियान के तहत जिले के विभिन्न स्थानों पर आयोजित रक्तदान शिविरों की जानकारी बैठक में दी गई। इन शिविरों में रक्तदान के साथ रक्त शर्करा, रक्तचाप, हीमोग्लोबिन एवं सिकल सेल की निःशुल्क जांच भी की जा रही है। शिक्षा विभाग के सहयोग से आयोजित जिला स्तरीय चित्रकला एवं भाषण प्रतियोगिता की जानकारी भी दी गई।
          बस्ता एजुकेशन एंड हेल्थ फाउंडेशन की संस्थापक सुविनीता पटेल ने ‘प्रोजेक्ट आरुग’ के अंतर्गत मासिक धर्म स्वास्थ्य एवं स्वच्छता के प्रति प्रस्तावित जागरूकता अभियान की विस्तृत जानकारी दी। एसईसीएल से सामाजिक उत्तरदायित्व मद में प्राप्त 48.96 लाख रुपये की राशि से रेडक्रॉस के सहयोग से बिल्हा विकासखंड के 114 हाई स्कूल एवं कुछ माध्यमिक विद्यालयों में अभियान संचालित किया जाएगा। बैठक में रेडक्रॉस कार्यालय के लिए मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय परिसर में स्थल चयन की जानकारी दी गई। भविष्य में रक्त भंडारण केंद्र की स्थापना, अंगदान के लिए जिला स्तरीय समिति के गठन तथा युवाओं को ‘युवोदय रेडक्रॉस मितान योजना’ से जोड़ने पर भी चर्चा हुई।
          बैठक में जिला शिक्षा अधिकारी संदीप पांडेय, राज्य शाखा के वाइस चेयरमेन बालाराम साहू एवं सदस्य केशव साहू, प्रबंध समिति के चेयरमेन डॉ. बी.एल. गोयल, कोषाध्यक्ष अमरजीत सिंह दुआ, राज्य प्रतिनिधि ब्रजेन्द्र शुक्ला, प्रबंध समिति के सदस्य डॉ. राजीव अवस्थी, सुरेन्द्र गुम्बर एवं श्रीकांत सहारे, रेडक्रॉस सचिव डॉ. शुभा गरेवाल, नोडल अधिकारी डॉ. एम.ए. जीवानी, जिला समन्वयक सौरभ सक्सेना एवं सहायक जिला अधिकारी आदित्य पांडेय उपस्थित थे। लक्ष्मीनारायण मिश्रा, मनीष मिश्रा, रेडक्रॉस औषधि केंद्र के प्रबंधक सुशील राजपूत, सुविनीता पटेल, श्रीमती गीतेश्वरी चंद्रा, अन्नू पटेल, यश शर्मा, पूजा कैवर्त एवं प्रीति चंद्रा सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी, चिकित्सक एवं रक्त बैंक के प्रतिनिधि भी बैठक में शामिल हुए।

     

  • डेयरी क्षेत्र में 22 कंपनियां करेंगी 695.18 करोड़ का निवेश

    डेयरी क्षेत्र में 22 कंपनियां करेंगी 695.18 करोड़ का निवेश

    लखनऊ

    उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो (यूपीआईटीएस-2026) युवाओं के लिए रोजगार के बड़े अवसर भी लेकर आया। ट्रेड शो में मिले प्रस्तावों के जरिए डेयरी क्षेत्र की 22 कंपनियां उत्तर प्रदेश में 695.18 करोड़ का निवेश करेंगी। कुल निवेश से 2500 से अधिक युवाओं को रोजगार व नौकरी मिलेगी। यहां डेयरी क्षेत्र में सबसे बड़ा निवेश ऐस इंटरनेशनल लि. की ओर से किया जाएगा। कंपनी हाथरस, अलीगढ़ व आगरा में 457 करोड़ का निवेश कर 1500 युवाओं को रोजगार/नौकरी देगी। वहीं केयरब्रो इनोवेटर्स प्रा. लि. की ओर से 100 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए। 

    ऐस इंटरनेशनल लि. करेगी 457 करोड़ का निवेश, 1500 युवाओं को देगी रोजगार 
    ऐस इंटरनेशनल लिमिटेड के आदित्य गोयल उत्तर प्रदेश को निवेश का सबसे उपयुक्त गंतव्य मानते हैं। उन्होंने बताया कि उनकी कंपनी यहां 457 करोड़ का निवेश करेगी। उन्होंने हाथरस, अलीगढ़, आगरा में प्रस्तावित निवेश को लेकर विभाग से समन्वय किया है। वे लगभग 1500 से अधिक युवाओं को अपने साथ जोड़कर उन्हें समृद्धि के राह पर लाएंगे। 

    अयोध्या, लखनऊ, मेरठ व बरेली में 100 करोड़ का निवेश करेगी केयरब्रो इनोवेटर्स प्रा. लि. 

    केयरब्रो इनोवेटर्स प्रा. लि. की ओर से दुग्धशाला विकास विभाग को निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। निवेशक अमित सिंह ने बताया कि उनकी कंपनी अयोध्या, लखनऊ, मेरठ व बरेली में 100 करोड़ का निवेश करेगी। इसके जरिए 250 से अधिक युवाओं को रोजगार से जोड़ा जाएगा। 

    सहकारी व निजी क्षेत्र के उद्यमियों को प्रदान किया गया प्रमाण पत्र 

    दुग्धशाला विकास विभाग की ओऱ से उप्र दुग्धशाला विकास व दुग्ध उत्पाद प्रोत्साहन नीति-2022 के अंतर्गत यह निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुआ है। विभाग, सहकारी व निजी डेयरी उद्यमियों के स्टॉल पर लगभग काफी भीड़ भी रही। पराग-अमूल, नमस्ते इंडिया, पारस डेयरी, ज्ञान डेयरी, न्यू एरा डेयरी, अल्फा मिल्क फूड्स, सीपी मिल्क समेत अनेक कंपनियों ने हिस्सा लिया। वित्त नियंत्रक अरविंद कुमार सिंह, मुख्य दुग्धशाला विकास अधिकारी एपी सिंह, दुग्धशाला विकास अधिकारी आईबी सिंह आदि ने निवेशकों, आगंतुकों को विभाग से जुड़ी योजनाओं की जानकारी दी। 

    विभाग को मिले शीर्ष 5 निवेश प्रस्ताव 

    कंपनी                  निवेश प्रस्ताव     रोजगार    प्रस्तावित जनपद 
    ऐस इंटरनेशनल लिमिटेड   457 करोड़   1500  हाथरस, अलीगढ़ व आगरा 
    केयरब्रो इनोवेटर्स प्रा. लि.    100 करोड़   250  अयोध्या, मेरठ, लखनऊ व बरेली
    अंजुम डेयरी         50 करोड़           40   मुरादाबाद, अमरोहा व रामपुर
    ग्विन व्हे प्रोटीन एलएलपी        27 करोड़    250   एटा, फिरोजाबाद व इटावा
    गौरी फूड एंड बेवरेजेज    14.65 करोड़      55   झांसी 

    उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो (यूपीआईटीएस-2026) में दुग्धशाला विकास विभाग को 695.18 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। निवेश से प्रदेश के अनेक जनपदों में यह प्रस्ताव धरातल पर उतरेंगे। इससे प्रदेश के 2500 से अधिक युवाओं को रोजगार/नौकरी भी मिलेगी। इसके अतिरिक्त विभाग अन्य निवेशकों को प्रदेश में आमंत्रित कर युवाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए कार्य कर रहा है। 

    धनलक्ष्मी के. 
    दुग्ध आयुक्त, उत्तर प्रदेश

  • धमतरी का बेंद्रानवागांव बना ‘हर घर जल’ प्रमाणीकृत ग्राम

    धमतरी का बेंद्रानवागांव बना ‘हर घर जल’ प्रमाणीकृत ग्राम

    ​नल से जल, स्वावलंबन से कल

     धमतरी का बेंद्रानवागांव बना ‘हर घर जल’ प्रमाणीकृत ग्राम
    ​
    रायपुर

            जब पानी घर के आंगन और चौखट तक पहुँचता है, तो केवल एक जीवनदायिनी सुविधा ही नहीं बदलती, बल्कि गाँव की दिनचर्या, स्वच्छता और पूरे ग्रामीण जनजीवन की तस्वीर बदल जाती है। सेवा संकल्प अभियान के तहत शासन की कल्याणकारी योजनाओं को जन-भागीदारी के ज़रिए धरातल पर उतारने की एक अनुकरणीय मिसाल धमतरी विकासखंड के ग्राम बेंद्रानवागांव से सामने आई है। दूर-दराज से पानी ढोने की मजबूरी को पीछे छोड़ते हुए बेंद्रानवागांव अब आधिकारिक रूप से ‘हर घर जल’ प्रमाणीकृत ग्राम घोषित हो चुका है। इसके साथ ही यह धमतरी विकासखंड का 137वां प्रमाणीकृत गाँव बन गया है। यह उपलब्धि महज़ एक औपचारिक प्रमाण-पत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि गाँव के प्रत्येक परिवार तक नल के माध्यम से शुद्ध पेयजल की पहुँच और इस व्यवस्था को निरंतर बनाए रखने के सामूहिक संकल्प की प्रतीक है।
             ​इस सफलता की नीव प्रशासनिक दक्षता और जन-भागीदारी के बेहतरीन तालमेल से रखी गई। योजना का कार्य पूर्ण होने के बाद ग्राम पंचायत के सरपंच ने 24 सितंबर 2026 को लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग को इसकी आधिकारिक सूचना दी। इसके उपरांत 30 सितंबर को गाँव में एक विशेष ग्राम सभा का आयोजन किया गया, जिसमें पंचायत के प्रतिनिधियों, सचिव, गणमान्य नागरिकों और बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने भाग लिया। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के सहायक अभियंता ने ग्राम सभा में उपस्थित होकर योजना के उद्देश्यों, जलापूर्ति व्यवस्था, संचालन और इसके रखरखाव की बारीकियों को ग्रामीणों के साथ साझा किया। ग्रामीणों ने इस नई व्यवस्था पर पूर्ण संतोष व्यक्त किया, जिसके बाद सरपंच द्वारा विभाग को प्रमाणीकरण प्रमाण-पत्र सौंपा गया और विभाग की ओर से योजना का हस्तांतरण पत्र ग्राम पंचायत को जारी कर दिया गया।
              ​बेंद्रानवागांव की इस विकास यात्रा की सबसे खास बात सुविधा से आगे बढ़कर स्वावलंबन की ओर बढ़ना है। अब इस जलापूर्ति व्यवस्था के संचालन और संधारण की पूरी कमान गाँव स्वयं संभालेगा। इसके लिए ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति (पानी समिति) को जिम्मेदारी सौंपी गई है। योजना को दीर्घकालिक और आत्मनिर्भर बनाए रखने के उद्देश्य से पंचायत ने प्रति परिवार 70 रुपये प्रतिमाह जल कर निर्धारित किया है। इस राशि से बिजली बिल के भुगतान के साथ-साथ गाँव में ही कार्यरत पंप ऑपरेटर, इलेक्ट्रिशियन और प्लम्बर की सेवाओं का भुगतान किया जाएगा।
            ​शासन की पहल पर हर घर तक पहुँचा नल का जल अब बेंद्रानवागांव में सामुदायिक सहभागिता का जीवंत उदाहरण बन चुका है। बेंद्रानवागांव का यह सफर स्पष्ट करता है कि जब प्रशासनिक प्रतिबद्धता, पंचायत का मजबूत नेतृत्व और ग्रामीणों की सहभागिता एक साथ जुड़ती है, तो विकास केवल आंकड़ों में दिखाई नहीं देता—वह हर घर की चौखट पर महसूस होता है।