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  • परीक्षार्थियों की सुविधा के लिए मकरोनिया-मुरैना के बीच चलेगी परीक्षा स्पेशल ट्रेन

    परीक्षार्थियों की सुविधा के लिए मकरोनिया-मुरैना के बीच चलेगी परीक्षा स्पेशल ट्रेन

    परीक्षार्थियों की सुविधा के लिए मकरोनिया-मुरैना के बीच चलेगी परीक्षा स्पेशल ट्रेन

    मुरैना
     आगामी प्र
    तियोगी परीक्षाओं में शामिल होने वाले परीक्षार्थियों की अतिरिक्त भीड़ को देखते हुए रेल प्रशासन ने मकरोनिया-मुरैना के बीच परीक्षा अनारक्षित स्पेशल ट्रेन चलाने का निर्णय लिया है। गाड़ी संख्या 01711/01712 दोनों दिशाओं में तीन-तीन फेरे लगाएगी।

    गाड़ी संख्या 01711 मकरोनिया-मुरैना स्पेशल 1 से 3 अक्टूबर तक प्रतिदिन शाम 6 बजे मकरोनिया से रवाना होगी और सागर, खुरई, बीना मलखेड़ी तथा वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी होते हुए अगले दिन सुबह 4 बजे मुरैना पहुंचेगी।

    वहीं, वापसी में गाड़ी संख्या 01712 मुरैना-मकरोनिया स्पेशल 2 से 4 अक्टूबर तक प्रतिदिन सुबह 5 बजे मुरैना से चलेगी। ट्रेन वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी, अगासोद, बीना मलखेड़ी, खुरई और सागर होते हुए दोपहर 2 बजे मकरोनिया पहुंचेगी।

    रेल प्रशासन के अनुसार ट्रेन में कुल 12 आईसीएफ कोच लगाए जाएंगे। इनमें 10 द्वितीय श्रेणी स्लीपर/अनारक्षित कोच और 2 एसएलआर कोच शामिल हैं। यात्रियों से यात्रा शुरू करने से पहले 139 या NTES के माध्यम से ट्रेन की वास्तविक स्थिति जांचने की अपील की गई है।

  • TATA को चुनौती! Mahindra की EV बिक्री ने पार किया 1 लाख का आंकड़ा, सितंबर में भी दमदार प्रदर्शन

    TATA को चुनौती! Mahindra की EV बिक्री ने पार किया 1 लाख का आंकड़ा, सितंबर में भी दमदार प्रदर्शन

    मुंबई 
    महिंद्रा की गाड़ियों का हिसाब-किताब आया है और आंकड़े बता रहे हैं कि SUV के बाजार में कंपनी की पकड़ और मजबूत हुई है. सितंबर में जब कई कंपनियां बिक्री के आंकड़ों के साथ माथापच्ची कर रही थीं, महिंद्रा ने 64 हजार से ज्यादा SUV बेचकर सालाना बिक्री में 14 फीसदी की छलांग लगा दी. ऊपर से कुल वाहन बिक्री भी 15 फीसदी बढ़ी और इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री ने 1 लाख यूनिट का आंकड़ा पार कर लिया।  

    कंपनी द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार, महिंद्रा ने सितंबर में घरेलू बाजार में कुल 64,092 यूटिलिटी व्हीकल यानी SUV बेचीं. पिछले साल सितंबर में कंपनी की SUV बिक्री 56,233 यूनिट रही थी. इस तरह सालाना आधार पर SUV बिक्री में 14 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. अगर एक्सपोर्ट को भी शामिल किया जाए तो सितंबर 2026 में महिंद्रा ने कुल 1,14,874 वाहन बेचे. यह आंकड़ा पिछले साल के इसी महीने के मुकाबले 15 फीसदी ज्यादा है। 

    महिंद्रा के मुताबिक, अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच भी SUV बिक्री में अच्छी तेजी देखने को मिली है. इस 6 महीने में कंपनी ने घरेलू बाजार में 3,58,142 यूटिलिटी व्हीकल बेचे, जबकि पिछले साल इसी समय के दौरान यह आंकड़ा 2,97,570 यूनिट था. यानी साल-दर-साल बिक्री में 20 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई। 

    कमर्शियल व्हीकल सेगमेंट में भी ग्रोथ
    महिंद्रा के कमर्शियल व्हीकल कारोबार ने भी सितंबर में बेहतर प्रदर्शन किया. 2 टन से कम वजन वाले लाइट कमर्शियल व्हीकल की घरेलू बिक्री सितंबर 2026 में 4,044 यूनिट रही. पिछले साल सितंबर में कंपनी ने इस कैटेगरी में 3,386 यूनिट बेची थीं. इस तरह बिक्री में 19 फीसदी की बढ़ोतरी हुई. वहीं, 2 टन से 3.5 टन वाले लाइट कमर्शियल व्हीकल की बिक्री 13 फीसदी बढ़कर 26,376 यूनिट हो गई. सितंबर 2025 में इस कैटेगरी में कंपनी की बिक्री 23,342 यूनिट रही थी। 

    थ्री-व्हीलर की बिक्री में 26% उछाल
    महिंद्रा के थ्री-व्हीलर्स  ने भी तगड़ी रफ्तार पकड़ी है. इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर समेत कंपनी ने कुल 16,343 यूनिट वाहनों की बिक्री की है. जो पिछले साल सितंबर में बेचे गए 13,017 यूनिट के मुकाबले 26 फीसदी ज्यादा है. अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच थ्री-व्हीलर की बिक्री 82,058 यूनिट तक पहुंच गई है. पिछले साल इन्हीं 6 महीनों के दौरान कंपनी की थ्री-व्हीलर बिक्री में 53 फीसदी का इजाफा हुआ है। 

    बेची 1 लाख इलेक्ट्रिक कारें
    महिंद्रा के ऑटोमोटिव बिजनेस के प्रेसिडेंट डॉ. वेलुसामी आर. ने सितंबर सेल्स पर कहा कि कंपनी की SUV बिक्री सालाना आधार पर 14 फीसदी बढ़ी है, जबकि कुल वाहन बिक्री में 15 फीसदी की ग्रोथ दर्ज की गई है. उन्होंने यह भी बताया कि महिंद्रा ने अपनी इलेक्ट्रिक ओरिजिन एसयूवी की बिक्री का 1 लाख यूनिट का आंकड़ा पार कर लिया है. कंपनी के लिए यह एक बड़ी उपलब्धि है। 

    डोमेस्टिक मार्केट में शानदार परफॉर्मेंस के बीच महिंद्रा के एक्सपोर्ट में सितंबर में थोड़ी गिरावट आई. कंपनी ने सितंबर 2026 में 4,019 यूनिट का एक्सपोर्ट किया, जो सितंबर 2025 में दर्ज 4,320 यूनिट के मुकाबले 7 फीसदी कम है. हालांकि, छह महीने के आंकड़ों पर नजर डालें तो तस्वीर काफी अलग है. अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच महिंद्रा ने कुल 30,031 यूनिट का एक्सपोर्ट किया. पिछले साल इसी दौरान कंपनी का एक्सपोर्ट 20,303 यूनिट था. इस तरह 6 महीने में कंपनी का एक्सपोर्ट 48 फीसदी बढ़ा है। 

    TATA को चुनौती
    इलेक्ट्रिक व्हीकल सेगमेंट का लीडर टाटा मोटर्स है. लेकिन महिंद्रा की इस रफ्तार ने टाटा को कड़ी चुनौती दी है. बीते अगस्त में भी महिंद्रा ने इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री के मामले में टाटा को पछाड़ा था. धीमे-धीमे महिंद्रा भी अपना व्हीकल पोर्टफोलियो बढ़ा रहा है. फिलहाल कंपनी चार इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री कर रही है. इनमें XUV 3XO EV की कीमत ₹13.89 लाख से ₹14.96 लाख, BE 6 की कीमत ₹18.90 लाख से ₹26.90 लाख, XEV 9e की कीमत ₹21.90 लाख से ₹30.50 लाख और XEV 9S की कीमत ₹19.95 लाख से ₹29.45 लाख (सभी एक्स-शोरूम) है। 

  • जनरेशन कंपनी एमडी एस.के. कटियार के कार्यकाल में पुन: वृद्धि

    जनरेशन कंपनी एमडी एस.के. कटियार के कार्यकाल में पुन: वृद्धि

    जनरेशन कंपनी एमडी एस.के. कटियार के कार्यकाल में पुन: वृद्धि

    राज्य शासन ने 31 मार्च 2027 तक कार्यकाल बढ़ाया

    रायपुर
     छत्तीसगढ़ स्टेट पावर जनरेशन कंपनी के प्रबंध निदेशक संजीव कुमार कटियार के कार्यकाल में राज्य शासन ने पुन: वृद्धि की है। वे  ऊर्जा विभाग द्वारा इस संबंध में जारी आदेश में उनके कार्यकाल में 31 मार्च 2027 तक वृद्धि की गई है। 

     कटियार के कार्यकाल की प्रमुख उपलब्धियों में वित्त वर्ष 2023-24 में एबीवीटीपीएस मारवा के प्लांट लोड फैक्टर (पीएलएफ) को 49 प्रतिशत से बढ़ाकर 84.4 प्रतिशत करना उल्लेखनीय है। इसके परिणामस्वरूप छत्तीसगढ़ स्टेट पावर जनरेशन कंपनी 33 राज्य जनित निगमों में प्रथम स्थान पर रही। इसी तरह कोरबा पश्चिम ताप विद्युत संयंत्र में जटिल स्टेशन नियंत्रण एवं इंस्ट्रूमेंटेशन सिस्टम के नवीनीकरण का कार्य महज 46 दिनों में पूरा किया गया।

    मैकेनिकल इंजीनियरिंग में स्नातक श्री कटियार प्रमाणित ऊर्जा लेखा परीक्षक हैं तथा उन्होंने प्रबंधन में डिप्लोमा भी प्राप्त किया है। उनकी कार्यशैली में स्पष्ट दिशा-निर्देश, टीम को प्रेरित करना और अधिकारियों-कर्मचारियों को जिम्मेदारी के साथ कार्य करने के लिए सशक्त बनाना प्रमुख है।

     

  • हादसों के ब्लैक स्पॉट पर परिवहन  विभाग की सख्ती

    हादसों के ब्लैक स्पॉट पर परिवहन  विभाग की सख्ती

    हादसों के ब्लैक स्पॉट पर परिवहन  विभाग की सख्ती

    वाहनों से वसूला 31,200 रुपए जुर्माना

    रायपुर

    जिले के चिन्हित ब्लैक स्पॉट क्षेत्रों में सड़क हादसों पर  अंकुश लगाने परिवहन विभाग ने भौतिक निरीक्षण और  प्रवर्तन कार्रवाई तेज कर दी है। हाईकोर्ट बिलासपुर के निर्देशों के पालन में परिवहन आयुक्त कार्यालय के मार्गदर्शन में  परिवहन उड़नदस्ता रायपुर की टीम ने टाटीबंध, भाटागांव,  बेमता-भूमिया, सिलतरा ओवरब्रिज-निको कंपनी गेट और  पारागांव-निस्दा मोड़ सहित  संवेदनशील क्षेत्रों में जांच  अभियान चलाया।

    टाटीबंध में घुमावदार चौक होने के कारण रॉन्ग साइड वाहन चलाने की शिकायतों के  मद्देनजर टीम ने वाहन चालकों की जांच की और नियम तोड़ने वालों के खिलाफ चालानी कार्रवाई की। भाटागांव और सिलतरा  ओवरब्रिज से निको कंपनी गेट मार्ग पर भी रॉन्ग साइड वाहन चलाने वालों पर कार्रवाई की गई।

    बेमता से भूमिया मार्ग पर  रायपुर-बिलासपुर मुख्य मार्ग के डिवाइडर को स्थानीय लोगों ने आवाजाही की सुविधा के लिए कई जगह से काटकर  रास्ता बना लिया है। इससे खासकर दोपहिया  वाहन चालकों के दुर्घटना की आशंका बनी हुई है। टीम ने ऐसे रास्तों का  इस्तेमाल करने वाले वाहन  चालकों पर कार्रवाई कर उन्हें समझाइश दी। इन अवैध कटों को बंद करने के लिए लोहे की जाली लगाने की कार्रवाई भी शुरू की गई है।
    इसी तरह पारागांव से निस्दा मोड़ के बीच घुमावदार मार्ग  पर डिवाइडर काटकर बनाए  गए रास्ते को भी दुर्घटना की  दृष्टि से संवेदनशील माना गया। यहां स्कूली बच्चों, वाहन चालकों और स्थानीय लोगों को  सड़क सुरक्षा के प्रति  जागरूक किया गया।

    परिवहन विभाग के लगातार जांच अभियान में रॉन्ग साइड ड्राइविंग और अनधिकृत  पार्किंग के मामलों में 15  वाहनों पर कार्रवाई कर  31,200 रुपए का चालान  किया गया। विभाग का कहना है कि  हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुरूप ब्लैक स्पॉट क्षेत्रों में नियमित निरीक्षण और सख्त प्रवर्तन कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।

  • छत्तीसगढ़ के लगभग 10 हजार युवाओं को मिलेंगे रोजगार के अवसर

    छत्तीसगढ़ के लगभग 10 हजार युवाओं को मिलेंगे रोजगार के अवसर

    छत्तीसगढ़ के लगभग 10 हजार युवाओं को मिलेंगे रोजगार के अवसर

    रायपुर में 7-8 अक्टूबर को सरकार द्वारा आयोजित किया जा रहा राज्यस्तरीय रोजगार मेला

    रायपुर
    रोजगार की तलाश कर रहे छत्तीसगढ़ के युवाओं के लिए बड़ा अवसर सामने आया है। छत्तीसगढ़ सरकार आगामी 7-8 अक्टूबर को रायपुर में दो दिवसीय राज्यस्तरीय रोजगार मेला आयोजित कर रही है। इस रोजगार मेले में करीब 10 हजार युवाओं को नौकरियां मिलने की उम्मीद है। अलग-अलग शैक्षणिक योग्यताओं और हुनर वाले युवा इस मेले में हिस्सा लेकर नौकरियां पा सकते हैं। 

                    कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार विभाग द्वारा यह मेला बूढ़ापारा स्थित सरदार बलबीर सिंह जुनेजा इंडोर स्टेडियम में आयोजित किया जाएगा। इसका उद्देश्य प्रदेश के शिक्षित और प्रशिक्षित युवाओं को निजी क्षेत्र में उनकी योग्यता के अनुरूप रोजगार के अधिक अवसर उपलब्ध कराना है। इसके लिए अब तक 62 कंपनियों और प्लेसमेंट एजेंसियों से 9,449 रिक्त पदों की जानकारी सरकार को मिली है।अन्य कंपनियों से भी संपर्क जारी है, जिससे उपलब्ध अवसरों की संख्या और बढ़ने की संभावना है। इस मेले के माध्यम से स्थानीय कंपनियों के साथ राष्ट्रीय स्तर की निजी कंपनियों को भी एक मंच पर लाया जा रहा है। 

                   रोजगार मेले के दूसरे दिन (8 अक्टूबर) मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय और कौशल विकास एवं रोजगार मंत्री गुरु खुशवंत साहेब चयनित युवाओं को ऑफर लेटर वितरित करेंगे। यह आयोजन युवाओं को रोजगार से जोड़ने और स्वावलंबी बनाने की दिशा में प्रदेश सरकार के प्रयासों को आगे बढ़ाएगा।कौशल विकास एवं रोजगार मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने कहा, ‘राज्य सरकार युवाओं के सर्वांगीण विकास और उन्हें स्वावलंबी बनाने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। रोजगार मेले के माध्यम से अधिक से अधिक युवाओं को उनकी योग्यता और कौशल के अनुरूप अवसर दिलाने का प्रयास है।’

    विभिन्न क्षेत्रों में रोजगार के अवसर

                इस मेले में दसवीं और बारहवीं पास युवाओं से लेकर आईटीआई, डिप्लोमा और इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर चुके अभ्यर्थियों के लिए रिक्तियां उपलब्ध हैं। कृषि स्नातक, सामान्य स्नातक तथा एमबीए और एमसीए सहित स्नातकोत्तर योग्यताधारी युवा भी अपनी पात्रता के अनुसार आवेदन कर सकते हैं। तकनीकी प्रशिक्षण प्राप्त युवाओं के लिए मशीन ऑपरेटर, असेंबली ऑपरेटर, फिटर, वेल्डर, इलेक्ट्रिशियन, इलेक्ट्रिक मीटर टेक्नीशियन और मेंटेनेंस इलेक्ट्रिशियन जैसे पद भी रिक्तियों में शामिल हैं। मैकेनिकल इंजीनियर और गुणवत्ता निरीक्षक के पदों के लिए भी रिक्तियां प्राप्त हुई हैं। 

               इनके अलावा कंप्यूटर ऑपरेटर, कस्टमर केयर एग्जीक्यूटिव, टेलीकॉलर,  रिलेशनशिप मैनेजर, सेल्स एग्जीक्यूटिव और सेल्स ऑफिसर जैसे पदों पर काम करने के इच्छुक अभ्यर्थियों के लिए भी रोजगार मेले में रिक्तियां उपलब्ध हैं। साथ ही बैंकिंग, फाइनेंस और मानव संसाधन (एचआर) से संबंधित अवसर भी मेले में उपलब्ध कराए जा रहे हैं। स्वास्थ्य एवं देखभाल के क्षेत्र में नर्सिंग स्टाफ और केयर टेकर सहित  सुरक्षा सेवाओं में गार्ड और सुपरवाइजर, जबकि परिवहन तथा सामान की आवाजाही से जुड़े कामों में ड्राइवर, डिलीवरी कर्मी, बाइक राइडर और पिकर-पैकर जैसे पद भी इसमें शामिल हैं। अभ्यर्थी अपनी योग्यता, रुचि और संबंधित पद की पात्रता देखकर आवेदन कर सकेंगे।

    ये कंपनियां एवं संस्थाएं लेंगी हिस्सा

                रोजगार मेले के लिए क्वेस कॉर्प, रैंडस्टैड इंडिया, राजस्थान टेक्सटाइल मिल्स-सतलज टेक्सटाइल्स, वर्द्धमान टेक्सटाइल्स, जेनस पावर इंफ्रास्ट्रक्चर और एयरटेल पेमेंट बैंक जैसी कंपनियों ने रिक्तियां उपलब्ध कराई हैं। इनके अलावा इंस्टाकार्ट, स्पंदना स्फूर्ति फाइनेंशियल, स्वतंत्र माइक्रोफिन, एनआईआईटी, आइसेक्ट, शांता टेक्नो, राजत इक्विपमेंट्स और फर्स्ट फ्लाई कॉर्पाेरेट भी इनमें शामिल हैं।

    ई-रोजगार पोर्टल से ऑनलाइन आवेदन

               रोजगार मेले में आवेदन और चयन प्रक्रिया को सुगम तथा व्यवस्थित बनाने के लिए ई-रोजगार पोर्टल का उपयोग किया जा रहा है। विभिन्न कंपनियों और प्लेसमेंट एजेंसियों से प्राप्त रिक्तियोंको पोर्टल पर प्रदर्शित किया जा रहा है। इच्छुक युवा आधिकारिक पोर्टल www.erojgar.cg.gov.in पर रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं, घर बैठे पदों की जानकारी देख सकते हैं और अपनी पात्रता के अनुसार आवेदन कर सकते हैं। इससे उन्हें मेले से पहले ही उपलब्ध रोजगार अवसरों को समझने का समय मिलेगा।

                नियोजक भी पोर्टल पर अभ्यर्थियों की प्रोफाइल और आवेदन देख सकेंगे। इनके आधार पर जरूरत के अनुसार उम्मीदवारों की सूची तैयार करने तथा प्रारंभिक चयन प्रक्रिया संचालित करने की सुविधा होगी। 

                  इससे पहले वित्त वर्ष 2024-25 और 2025-26 में छत्तीसगढ़ रोजगार एवं प्रशिक्षण विभाग के राज्य एवं जिला स्तरीय रोजगार मेलों और प्लेसमेंट कैंप में 9,463 अभ्यर्थी चयनित हुए थे।रोजगार विभाग के   आंकड़ों के अनुसार 2024-25 में 311 प्लेसमेंट कैंप और रायपुर, दुर्ग एवं बिलासपुर में रोजगार मेले आयोजित हुए जिनमें 5,314 अभ्यर्थी चयनित हुए।जबकि 2025-26 में 245 प्लेसमेंट कैंप और रायपुर, बलौदाबाजार एवं दुर्ग में आयोजित रोजगार मेले में 4,149 अभ्यर्थी चयनित हुए। वित्त वर्ष 2026 में सितंबर तक राज्य में 224 प्लेसमेंट कैंप और रोजगार मेलों का आयोजन हो चुका है, जिनमें 8,878 अभ्यर्थी चयनित हुए हैं।

  • कुपोषण पर योगी सरकार का ‘संभव’ प्रहार, 26 जिलों में 395 आंगनबाड़ी केंद्रों की पड़ताल

    कुपोषण पर योगी सरकार का ‘संभव’ प्रहार, 26 जिलों में 395 आंगनबाड़ी केंद्रों की पड़ताल

    कुपोषण पर योगी सरकार का ‘संभव’ प्रहार, 26 जिलों में 395 आंगनबाड़ी केंद्रों की पड़ताल

    बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग व यूनिसेफ की निगरानी से पोषण सेवाओं को मिल रही गति

    संभव 6.0 अभियान के जरिए कमियों को दूर करने पर फोकस, दस्तावेजीकरण, प्रशिक्षण को मिल रहा जोर

    26 जिलों में विभागीय समन्वय की मजबूत तस्वीर, आगरा, एटा व फिरोजाबाद में भी टीम ने किया दौरा

    लखनऊ
     उत्तर प्रदेश में कुपोषण की रोकथाम और बच्चों की पोषण स्थिति में सुधार के लिए योगी सरकार के संभव 6.0 अभियान को जमीनी स्तर पर और प्रभावी बनाने की कवायद तेज है। बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग के साथ यूनिसेफ की राज्य एवं मंडलीय टीमें लगातार क्षेत्रीय अनुश्रवण (मॉनिटरिंग) कर अभियान की प्रगति, सेवाओं की गुणवत्ता और विभागीय समन्वय का जायजा ले रही हैं। अब तक 26 जनपदों के 395 आंगनबाड़ी केंद्रों का अनुश्रवण किया जा चुका है।

    395 केंद्रों पर परखी गई पोषण सेवाओं की गुणवत्ता

    अनुश्रवण के दौरान बच्चों के वजन और लंबाई-ऊंचाई की माप, वृद्धि निगरानी, संभव 6.0 की गतिविधियों और माइक्रोप्लान के क्रियान्वयन को देखा गया। अधिकांश केंद्रों पर वृद्धि निगरानी के आवश्यक उपकरण उपलब्ध मिले और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की मापन संबंधी व्यावहारिक दक्षता सामान्यतः अच्छी पाई गई।

    26 जिलों में विभागीय समन्वय की मजबूत तस्वीर

    26 जिलों में आकलन के दौरान अधिकांश जनपदों में आईसीडीएस, स्वास्थ्य और पंचायती राज विभाग के बीच समन्वय तथा अधिकारियों की सक्रिय भागीदारी सकारात्मक मिली। जनपद स्तर पर माइक्रोप्लान तैयार कर नियमित समीक्षा बैठकों, प्रशिक्षण और अभिमुखीकरण के माध्यम से अभियान को गति दी जा रही है।

    आगरा, एटा और फिरोजाबाद में भी टीम ने किया दौरा

    यूनिसेफ की राज्य स्तरीय टीम के डॉ. सन्दीप सेठ ने हाल में आगरा, एटा और फिरोजाबाद में क्षेत्रीय अनुश्रवण किया। आंगनबाड़ी केंद्रों पर संभव 6.0 की गतिविधियों और वृद्धि निगरानी का जायजा लेने के साथ अधिकारियों व फ्रंटलाइन कार्यकर्ताओं से संवाद कर आवश्यक तकनीकी सुझाव दिए गए।

    दस्तावेजीकरण, प्रशिक्षण को और मिलेगा जोर

    बाल विकास एवं पुष्टाहार तथा राज्य पोषण मिशन की निदेशक हर्षिता माथुर ने बताया कि अनुश्रवण में कुछ स्थानों पर गतिविधियों के बेहतर संचालन के बावजूद दस्तावेजीकरण मजबूत करने की जरूरत सामने आई। माइक्रोप्लान, बैठक कार्यवाही, फील्ड विजिट और एक्शन टेकन रिपोर्ट को व्यवस्थित रखने पर जोर दिया जा रहा है। साथ ही फ्रंटलाइन कार्यकर्ताओं की वृद्धि निगरानी उपकरण (जीएमडीएस), संभव 6.0 और गंभीर कुपोषण (एसएएम) की पहचान एवं प्रबंधन संबंधी तकनीकी क्षमता बढ़ाने के लिए प्रशिक्षण देने पर भी जोर दिया जा रहा है।

  • Gen Z ने शराब से बनाई दूरी, लेकिन सीनियर लोगों में बढ़ी खपत; रिसर्च में सामने आई वजह

    Gen Z ने शराब से बनाई दूरी, लेकिन सीनियर लोगों में बढ़ी खपत; रिसर्च में सामने आई वजह

    नई दिल्ली
    शराब पीने को लेकर एक नया ट्रेंड सामने आया है,  पिछले कुछ सालों में 40 साल से कम उम्र के लोगों में शराब पीने का चलन कम हुआ है, वहीं 50 से 64 साल की उम्र के लोगों में शराब पीने वालों की संख्या बढ़ी है. इतना ही नहीं, इस उम्र के कुछ लोग पहले से ज्यादा शराब पीने लगे हैं। 

    नई स्टडी Annals of Internal Medicine में प्रकाशित हुई है. रिसर्च के मुताबिक, 2022 से 2024 के बीच अमेरिका में शराब पीने वाले युवाओं की संख्या अब कम हो रही है, युवा शराब से दूरी बन रहे हैं, कोरोना महामारी के बाद युवाओं में ये शराब पीने का ट्रेंड कम हो रहा है. रिसर्च में जो आंकड़े बताए गए हैं उनके मुताबिक, 2018 तक अमेरिका में 40 साल से कम उम्र वाले 66 % लोग शराब पीत थे, 2020 में ये आंकड़ा 69 % था, लेकिन 2024 में ये 67 % रह गया है. 40 साल से कम उम्र में जेन- जी यानी 26 से 30 साल की उम्र के युवा भी शामिल हैं. रिसर्च में ये भी बताया गया है कि 50 साल से अधिक उम्र में शराब पीने का ट्रेंड अब ज्यादा क्यों बढ़ा है। 

    50 की उम्र के बाद क्यों चिंता ज्यादा?
    डॉक्टरों के मुताबिक, 50 से 64 साल की उम्र में शराब का ज्यादा सेवन खास तौर पर चिंता का विषय है. इस उम्र में पहले से ही हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, मोटापा, लिवर और दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ने लगता है, ज्यादा शराब इन जोखिमों को और बढ़ा सकती है। 

    स्टडी के प्रमुख शोधकर्ता और लिवर विशेषज्ञ डॉ. ब्रायन पी. ली के मुताबिक, इस उम्र के लोग ज्यादा मानसिक तनाव में हैं, इस वजह से वह शराब का सहारा ले रहे हैं. हालांकि इसका मतलब ये नहीं है कि 40 से कम उम्र वालों में मानसिक तनाव कम हो गया है, लेकिन 50 प्लस वाले इसको कम करने के लिए शराब ज्यादा पी रहे हैं।   

    रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि जो लोग कभी-कभी शराब पीते हैं, उनमें से 53 प्रतिशत लोग अब शराब की खपत कम करने की कोशिश कर रहे हैं. यह संख्या पांच साल पहले केवल 44 प्रतिशत थी. साथ ही, जिन लोगों ने कभी शराब नहीं पी, उनकी संख्या भी 2020 के बाद 3 प्रतिशत बढ़ गई है. हालांकि, वैश्विक स्तर पर शराब की बिक्री अभी भी बहुत बड़ी है. 2024 में दुनिया भर में शराब की कुल खपत 253 बिलियन लीटर तक पहुंच गई है. लेकिन इसके बावजूद, इसका विकास बहुत धीमा हो गया है। 

    वहीं रिपोर्ट के अनुसार, भारत में शराब की खपत 2024 से 2029 के बीच 357 मिलियन लीटर बढ़ने की संभावना है. इससे भारत दुनिया में तेजी से बढ़ने वाला शराब बाजार बन रहा है. हालांकि, यह बदलाव वैश्विक प्रवृत्ति के विपरीत है, जहां युवा वर्ग शराब से दूर हो रहे हैं. रिपोर्ट ने नॉन-अल्कोहल स्पिरिट्स की बढ़ती मांग पर भी प्रकाश डाला है. शराब की बिक्री में केवल 0.6 प्रतिशत की मामूली बढ़ोतरी हुई और इसका कुल बाजार मूल्य 1.7 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचा, वहीं नॉन-अल्कोहल स्पिरिट्स की बिक्री 17 प्रतिशत बढ़ी. रिपोर्ट में कहा गया है कि 2025 से 2029 तक यह बाजार 24 प्रतिशत बढ़ने की उम्मीद है और 2029 तक यह 10.2 बिलियन लीटर से अधिक हो जाएगा। 

    मानसिक तनाव में शराब लेना बन सकता है आदत
    द गार्जियन की रिपोर्ट के मुताबिक, मानसिक तनाव के समय कुछ लोग शराब को राहत पाने का तरीका मान लेते हैं, लेकिन इससे समस्या खत्म नहीं होती. धीरे-धीरे शराब तनाव से निपटने की आदत बन सकती है और इसकी मात्रा भी बढ़ सकती है.
    इसलिए अगर कोई व्यक्ति 50 की उम्र के बाद  शराब पीता है या पहले से ज्यादा शराब लेने लगा है, तो इसे सिर्फ आदत मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। 

    कौन सी शराब खरीदना पसंद कर रहे हैं युवा?
    आज की पीढ़ी केवल सस्ती शराब देखकर ही नहीं खरीद रही है, इसके अलावा भी उनकी कुछ पंसद है, जिस पर उनका फोकस ज्यादा रहता है जैसे…

        ऐसी शराब जिसका टेस्ट अलग हो.
        शराब की क्वालिटी भी अच्छी हो.
        साथ ही कोई खास पहचान हो.

    शराब का बिजनेस आखिर कैसे बढ़ा?
    युवा ने शराब पीना भले ही कम कर दिया है, लेकिन इसके बावजूद शराब कंपनियों के बिजनेस में तेजी देखने को मिल रही है, जिसकी वजह यह है कि युवा शराब को कम जरूर पी रहे हैं, लेकिन जब भी पी रहे हैं तो महंगी और क्वालिटी को देखते हुए ही पी रहे हैं. जिसकी वजह से शराब कंपनियों की कमाई आगे बढ़ी है. खास कर इस बदलाव का असर वोदका के अलग-अलग फ्लेवर की पसंद में भी दिख रहा है। 

    इन कंपनियों का प्रर्दशन रहा अच्छा
    युवा की बदलती मांग की वजह से ही रैडिको खेतान, यूनाइटेज स्पिरिट्स और यूनाइटेड ब्रुअरीज जैसी कंपनियां अच्छा प्रदर्शन कर रही हैं. यानी Gen Z अब कम शराब जरूर पी रहे हैं, लेकिन बेहतर क्वालिटी और अलग फ्लेवर की शराब पीना पसंद कर रहे हैं। 

  • ‘सरकार आपके द्वार’ अभियान, नागरिकों को मिलेंगी त्वरित सेवाएं; 3-4 अक्टूबर को शिविर

    ‘सरकार आपके द्वार’ अभियान, नागरिकों को मिलेंगी त्वरित सेवाएं; 3-4 अक्टूबर को शिविर

    नागरिकों को त्वरित सेवाएं देने के लिए"सरकार आपके द्वार अभियान

    3 अक्टूबर को विकासखंड और 4 अक्टूबर को नगरीय क्षेत्र में लगेंगे शिविर
    जन-विश्वास अभियान से जुड़ा सेवा सेतु

    भोपाल

    नागरिकों को पारदर्शी, संवेदनशील, उत्तरदायी एवं समयबद्ध लोक सेवाएँ सीधे उनके गाँव व वार्ड स्तर पर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रदेशव्यापी ''सरकार आपके द्वार”अभियानके तहत 3 अक्टूबर शनिवार को विकासखण्ड स्तर तथा 4 अक्टूबर रविवार को नगरीय क्षेत्र में शिविरों का आयोजन किया जाएगा। यह अभियान प्रदेश में चल रहे व्यापक “सेवा संकल्प अभियान” 17 सितम्बर से 17 अक्टूबर 2026 का एक अत्यंत महत्वपूर्ण एवं केंद्रीय घटक है। सामान्य प्रशासन विभाग ने इस संबंध में सभी कलेक्टर, कमिश्नर एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत, आयुक्त नगर पालिका / नगर निगम / नगर पालिका परिषद को निर्देश जारी किए है।

    इस अभियान का मुख्य उद्देश्य केन्द्र एवं राज्य सरकार की समस्त फ्लैगशिप हितग्राहीमूलक योजनाओं का लाभ नागरिकों, विशेषत: कृषकों, ग्रामीणजनों, श्रमिकों, महिलाओं, वंचितों और कमजोर वर्गों को पहुँचाना है। अभियान को “जन-विश्वास अभियान” के साथ भी संबद्ध किया गया है, जिससे जनता के बीच सुशासन, पारदर्शिता और प्रशासनिक जवाबदेही के विश्वास का सेतु स्थापित हो सके।

    विकासखंड और नगरीय क्षेत्र में आयोजित होंगे शिविर

    प्रत्येक जिले के समस्त विकासखण्डों में 3 अक्टूबर को शिविर आयोजित किए जाएंगे। नगरीय क्षेत्र में 4 अक्टूबर को नगर पालिका निगम में जोनवार, नगर पालिका तथा नगर परिषद में शिविर आयोजित किए जाएंगे।

    शिविर स्थल का आयोजनसार्वजनिक एवं सुलभ स्थानों पर किया जाएगा।उत्कृष्ट विद्यालय प्रांगण, जनपद पंचायत परिसर, सामुदायिक भवन या खेल मैदानजहाँ पर्याप्त खुली जगह, पेयजल, छाया तथा आवागमन की सुगम सुविधा हो। शिविरों के लिए लोक सेवा प्रबंधन, नगरीय विकास एवं आवास, पंचायत एवं ग्रामीण विकास सहयोगी विभाग होंगे।

    कलेक्टर जिला स्तर पर एक नोडल अधिकारी एवं सहायक नोडल अधिकारी की नियुक्ति करेंगे जो जिला स्तर पर अभियान का समन्वय करेंगे। कैंप के प्रभारी अधिकारी की सहायता के लिये सहायक अधिकारी की नियुक्ति जिला स्तर से की जायेगी।विकासखण्ड स्तर पर कैम्प के लिए प्रभारी अधिकारी पदेन मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत और नगर पंचायत/परिषद तथा नगर पालिका के लिए प्रभारी अधिकारी मुख्य नगर पालिका अधिकारी एवं नगर निगम जोनल कार्यालय के लिए जोनल अधिकारी नगर निगम होंगे।

    शिविरों के प्रमुख कार्य

    शिविर में पूर्व से योजना का लाभ प्राप्त किये जाने वाले हितग्राहियों की जानकारी का संकलन, शेष पात्र हितग्राहियों को सूचीबद्ध करना तथा शेष पात्र हितग्राहियों को शासन द्वारा दिये गए वार्षिक लक्ष्य अनुसार कैंप में ही लाभ देना सुनिश्चित किया जाएगा।लक्षित योजनाओं में वार्षिक लक्ष्य-प्राप्ति से शेष रहे हितग्राहियों को क्रमबद्ध तरीके से लाभ प्रदाय किया जायेगा।

    अभियान अंतर्गत कैंप में आने वाले हितग्राहियों का रजिस्ट्रेशन किया जायेगा। पंजीयन के लिए पृथक से 3 स्टॉल लगाये जाएंगे।स्टॉल पर अधिकारी/कर्मचारी की उपस्थिति रहेगी। कैंप प्रभारी यह सुनिश्चित करेंगे कि संबंधित विभाग के अधिकारी/कर्मचारी स्टॉल पर उपस्थित रहे। यदि ब्लॉक स्तर पर विभागीय अधिकारी पदस्थ नहीं है तब कलेक्टर अपने स्तर से अधिकारी को कैंप के लिए नियुक्त करेंगे।

    ऑन-स्पॉट डिलीवरी एवं स्वास्थय शिविर

    अंतर-विभागीय समन्वय एवं हितग्राहीमूलक योजनाओं की ऑन-स्पॉट डिलीवरी अंतर्गत शिविर में राज्य विभाग नोडल की भूमिका निभाते हुए अन्य प्रमुख विभागों के समन्वय से योजनाओं के लाभ मौके पर प्रदान कराएगा।

    स्वास्थ्य शिविर में होगी जाँच

    प्रत्येक शिविर स्थल पर स्वास्थ्य शिविर का आयोजन अनिवार्य रूप से किया जायेगा। स्थल पर प्रदर्शनी का आयोजन भी किया जायेगा जिसमें केन्द्र एवं राज्य सरकार की महत्वपूर्ण योजनाओं को सम्मिलित किया जायेगा। विभिन्न विभागों की सेवा के लिए न्यूनतम 25 सुसज्जित एकरूप स्टॉल स्थापना, बैठक व्यवस्था, पेयजल, विद्युत, कम्प्यूटर तथा इंटरनेट की व्यवस्था, सेल्फी पाइंट्स एवं अन्य व्यवस्थायें स्थानीय निकायों यथा जनपद पंचायत, नगर निगम, नगर पालिका एवं नगर परिषद के द्वारा की जायेंगी।

    पोर्टल रिपोर्टिंग एवं सफलता की कहानियाँ

    दैनिक पोर्टल रिपोर्टिंगके अंतर्गतप्रत्येक शिविर में कुल प्राप्त आवेदन, मौके पर स्वीकृत आवेदन, लंबित आवेदन एवं वितरित हितलाभों की संख्यात्मक जानकारी अधिकृत राज्य पोर्टल पर प्रतिदिन शाम 6:00 बजे तक अनिवार्य रूप से प्रविष्ट की जाएगी। सफलता की कहानियाँ अंतर्गत शिविरों के माध्यम से यदि किसी पीड़ित, किसान अथवा निर्धन नागरिक की वर्षों पुरानी समस्या का मौके पर समाधान हुआ हो, तो उसके फोटोग्राफ, संक्षिप्त वीडियो एवं सफलता की कहानी www.modiat25.in⁠ पर अपलोड किए जाएंगे। शिविर की सूचना के लिए स्थानीय स्तर पर पर्याप्त प्रचार-प्रसार सुनिश्चित किया जायेगा।

     

  • 13 घंटे, 700 KM और खूबसूरत वादियां, अब इस रूट पर दौड़ेगी वंदे भारत ट्रेन

    13 घंटे, 700 KM और खूबसूरत वादियां, अब इस रूट पर दौड़ेगी वंदे भारत ट्रेन

    बेंगलुरु   

    बेंगलुरु से गोवा जाना हो तो आपके पास आमतौर पर दो विकल्प होते हैं- जल्दी पहुंचना है तो फ्लाइट और कम खर्च में जाना है तो बस या ट्रेन. लेकिन अगर मंजिल के साथ रास्ते का मजा भी लेना हो, तो बेंगलुरु-गोवा वंदे भारत का सफर अलग अनुभव दे सकता है. रेलवे मंगलुरु-मडगांव वंदे भारत एक्सप्रेस को बेंगलुरु तक बढ़ाने जा रहा है. इसके बाद गोवा और बेंगलुरु के बीच रेल कनेक्टिविटी को एक प्रीमियम ट्रेन का नया विकल्प मिल जाएगा। 

    करीब 13 घंटे की यह यात्रा शहर की भागदौड़ से निकलकर पश्चिमी घाट की हरियाली, पहाड़ी रास्तों और तटीय कर्नाटक के खूबसूरत नजारों के बीच से गुजरती है. इस सफर में रास्ते के नजारे भी यात्रा का हिस्सा बन जाते हैं. इसमें वंदे भारत जैसी नए जमाने की ट्रेन का साथ मिल जाए तो फिर क्या ही कहने. अभी बेंगलुरु और गोवा के बीच चलने वाली पारंपरिक ट्रेनों को सफर पूरा करने में करीब 15 घंटे लगते हैं। 

    मंगलुरु के रास्ते गोवा पहुंचेगी ट्रेन

    रेलवे मंत्रालय की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक मौजूदा मंगलुरु सेंट्रल-मडगांव वंदे भारत एक्सप्रेस को यशवंतपुर जंक्शन तक बढ़ाया जाएगा. यानी ट्रेन बेंगलुरु से चलकर मंगलुरु होते हुए गोवा के मडगांव तक जाएगी. रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इसी महीने की शुरुआत में सांसद बृजेश चौटा और विश्वेश्वर हेगड़े कागेरी को लिखे पत्र में इसकी जानकारी दी थी. अभी यह ट्रेन मंगलुरु सेंट्रल और मडगांव के बीच सप्ताह में छह दिन चलती है. गुरुवार को इसकी सेवा नहीं होती. मंगलुरु से मडगांव के बीच एक तरफ का सफर 6 घंटे से थोड़ा कम समय में पूरा होता है। 

    करीब 13 घंटे में पूरा होगा सफर
    बेंगलुरु के यशवंतपुर से गोवा के मडगांव रेलवे स्टेशनों के बीच वंदे भारत का यह सफर करीब 13 घंटे का होगा. बेंगलुरु से गोवा की दूरी करीब 700 किलोमीटर के आसपास है और इस रूट पर ट्रेन को कई पहाड़ी और घुमावदार हिस्सों से होकर गुजरना पड़ता है. अगर आपकी प्राथमिकता सिर्फ जल्दी पहुंचना है, तो फ्लाइट अब भी काफी कम समय लेती है. वहीं रात की बस से सफर करने में करीब 12 से 14 घंटे लग सकते हैं. वंदे भारत ट्रेन इन दोनों के बीच एक ऐसा विकल्प साबित होगी, जिसमें पूरा सफर दिन के समय करते हुए प्राकृतिक सुंदरता से भरे इस पूरे रास्ते को देखने का मौका मिलेगा। 

    वेस्टर्न घाट की खूबसूरती के दीदीर
    इस रूट पर सकलेशपुर-सुब्रह्मण्य रोड के बीच करीब 55 किलोमीटर का घाट सेक्शन आता है. पश्चिमी घाट का यह इलाका रेल यात्रा के सबसे खूबसूरत हिस्सों में गिना जाता है. ट्रेन यहां पहाड़ियों, हरियाली और घाटियों के बीच से गुजरती है. इलेक्ट्रिफिकेशन और रेलवे के इंफ्रास्ट्रक्चर ढांचे में सुधार के बाद इस सेक्शन पर रेल ऑपरेशन पहले से बेहतर हुआ है, लेकिन पहाड़ी रास्ता होने की वजह से यहां ट्रेन की रफ्तार मैदानी हिस्सों जैसी नहीं रहती. यही वजह है कि बेंगलुरु से गोवा की पूरी यात्रा में इस हिस्से का असर सफर के समय पर भी पड़ता है। 

    किन जगहों से होकर गुजरती है ट्रेन?
    यशवंतपुर से निकलने के बाद ट्रेन हासन, सकलेशपुर, सुब्रह्मण्य रोड और मंगलुरु क्षेत्र से होते हुए तटीय कर्नाटक की ओर बढ़ती है. इसके बाद गोवा के मडगांव तक पहुंचती है. यात्रा के दौरान रास्ता लगातार बदलता रहता है. बेंगलुरु के शहरी इलाके से निकलने के बाद हरियाली बढ़ती जाती है और पश्चिमी घाट के पहाड़ी हिस्से शुरू हो जाते हैं. इसके बाद तटीय कर्नाटक का इलाका आता है और आखिर में गोवा। 

    वंदे भारत से और मजेदार होगी यात्रा
    वंदे भारत में चेयर कार और एग्जीक्यूटिव चेयर कार की सुविधा मिलती है. एग्जीक्यूटिव क्लास में रोटेट होने वाली सीटें और बड़ी खिड़कियां सफर के दौरान बाहर के नजारों को देखने में मदद करेंगी. वंदे भारत एक सेल्फ-प्रोपेल्ड ट्रेनसेट है. इसमें अलग से इंजन नहीं लगा होता बल्कि हर कोच इंजन की तरह काम करता है. इसके चलते सफर के दौरान शोर और झटके पारंपरिक ट्रेनों की तुलना में कम महसूस होते हैं. करीब 13 घंटे के दिन के सफर में यह सुविधा खासतौर पर काम आएगी, क्योंकि यात्री रास्ते के नजारों का आनंद लेते हुए आराम भी कर सकेंगे। 

    ट्रेन में खाने-पीने की सुविधा उपलब्ध
    लंबे सफर को ध्यान में रखते हुए वंदे भारत एक्सप्रेस में यात्रियों के लिए भोजन और नाश्ते की व्यवस्था रहती है. यात्रा के अलग-अलग हिस्सों में नाश्ता, भोजन और चाय जैसे विकल्प मिलते हैं. ट्रेन में बायो-वैक्यूम टॉयलेट जैसी सुविधाएं भी हैं. करीब 13 घंटे की इस यात्रा में वंदे भारत की साफ-सफाई और बैठने की सुविधा, पारंपरिक ट्रेनों की तुलना में यात्रियों के लिए एक अलग अनुभव लेकर आएगी। 

    फ्लाइट, बस और वंदे भारत में फर्क
    अगर आपका मकसद बेंगलुरु से गोवा सबसे कम समय में पहुंचना है, तो फ्लाइट का मुकाबला करना वंदे भारत के लिए मुश्किल है. उड़ान का समय करीब डेढ़ घंटे हो सकता है, हालांकि एयरपोर्ट तक पहुंचने, चेक-इन और सुरक्षा जांच में लगने वाला समय अलग है. बस से सफर में करीब 12 से 14 घंटे लग सकते हैं. रात को बस से सफर करने पर पहाड़ी और घुमावदार सड़कों की वजह से कुछ यात्रियों को परेशानी भी हो सकती है. वंदे भारत का फायदा यह है कि सफर आरामदायक तरीके से दिन में पूरा होगा. साथ ही वेस्टर्न घाट और कोस्टल कर्नाटक की प्राकृतिक सुंदरता को देखने का मौका मिलेगा। 

    फ्लाइट के मुकाबले किराए में अंतर
    इस रूट पर यात्रा के लिए अलग-अलग साधनों का खर्च भी अलग है. उपलब्ध जानकारी के मुताबिक वंदे भारत चेयर कार का किराया करीब ₹1,500 से ₹1,800 और एग्जीक्यूटिव क्लास का करीब ₹2,800 से ₹3,200 के आसपास हो सकता है. फ्लाइट का किराया तारीख और बुकिंग के समय के हिसाब से करीब ₹4,500 से ₹8,000 या उससे ज्यादा भी हो सकता है. बस का किराया करीब ₹1,200 से ₹2,500 के बीच रह सकता है. हालांकि बस और फ्लाइट का किराया यात्रा की तारीख, सीट और बुकिंग के समय के अनुसार बदल सकता है। 

    किसके लिए सही है ट्रेन का सफर?
    अगर आपके पास समय कम है और गोवा पहुंचकर ज्यादा से ज्यादा समय बिताना चाहते हैं, तो फ्लाइट ज्यादा सुविधाजनक विकल्प हो सकती है. लेकिन अगर सफर को भी छुट्टी का हिस्सा बनाना चाहते हैं, तो वंदे भारत का विकल्प दिलचस्प है. खासकर उन यात्रियों के लिए जो पश्चिमी घाट की हरियाली, पहाड़ों और घाटियों के नजारे देखना चाहते हैं. हालांकि एक बात ध्यान रखने वाली है. यह रात की स्लीपर ट्रेन नहीं है. करीब 13 घंटे का पूरा सफर बैठकर करना होगा. इसलिए छोटे वीकेंड ट्रिप पर जाने वाले यात्रियों के लिए यात्रा के समय को ध्यान में रखना जरूरी है। 

    खिड़की वाली सीट का अलग मजा
    अगर आप सिर्फ मंजिल तक पहुंचने के बजाय रास्ते को भी देखना चाहते हैं, तो खिड़की वाली सीट लेना बेहतर रहेगा. खासकर घाट सेक्शन में बाहर का नजारा इस सफर का सबसे खास हिस्सा हो सकता है. मोबाइल नेटवर्क पहाड़ी और सुरंग वाले हिस्सों में कमजोर हो सकता है, इसलिए लंबी यात्रा के लिए जरूरी सामग्री पहले से डाउनलोड कर लेना बेहतर है. साथ ही करीब 13 घंटे के सफर में बीच-बीच में सीट से उठकर थोड़ा चलना भी आरामदायक रहेगा। 

    ट्रेन को मिलेगा नया नंबर और नया नाम
    बेंगलुरु और गोवा के बीच वंदे भारत चलाने का प्रस्ताव इस साल फरवरी में सामने आया था. दक्षिण पश्चिम रेलवे (SWR), कोंकण रेलवे कॉरपोरेशन लिमिटेड (KRCL) और दक्षिण रेलवे (SR) की ओर से इसको लेकर प्रस्ताव तैयार किया गया था. प्रस्ताव के मुताबिक ट्रेन यशवंतपुर से सुबह 6:05 बजे रवाना होकर शाम 7:15 बजे मडगांव पहुंचेगी. शुरुआती प्रस्ताव में ट्रेन को मंगलुरु सेंट्रल स्टेशन पर लाए बिना बायपास करने की बात थी. लेकिन अब इस योजना में बदलाव किया गया है. विस्तारित सेवा में ट्रेन को मंगलुरु सेंट्रल से होकर चलाने की तैयारी है। 

    बेंगलुरु-मंगलुरु रूट पर सितंबर में 16 कोच वाली वंदे भारत रेक के साथ दो ट्रायल रन भी किए गए थे. इन परीक्षणों के दौरान ट्रेन ने यह दूरी 7 घंटे से कम समय में पूरी की थी. विस्तार के बाद ट्रेन नए नंबरों के साथ चलेगी. दोनों दिशाओं में इसके लिए 26655 और 26656 नंबर तय किए गए हैं. ये मौजूदा 20646 और 20645 नंबर से अलग होंगे. ट्रेन का नाम भी बदलकर यशवंतपुर-मडगांव वंदे भारत एक्सप्रेस किया जाएगा. अभी इस ट्रेन सेवा की शुरुआत की तारीख और अंतिम टाइम-टेबल तय नहीं हुआ है. ट्रेन के कितने स्टॉपेज होंगे इसका भी असर पूरी यात्रा के समय पर पड़ेगा। 

  • सरकार आपके द्वार शिविरों में किसान, श्रमिक, महिला और युवा सहित सभी वर्गों पर फोकस

    सरकार आपके द्वार शिविरों में किसान, श्रमिक, महिला और युवा सहित सभी वर्गों पर फोकस

    सरकार आपके द्वार शिविरों में किसान, श्रमिक, महिला और युवा सहित सभी वर्गों पर फोकस

    सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का मिलेगा लाभ

    भोपाल

    सेवा सेतु अभियान- ''सरकार आपके द्वार'' कार्यक्रम के तहत विकासखंड और नगरीय क्षेत्रों में 3 और 4 अक्टूबर को आयोजित होने वाले शिविरों में हितग्राहियों को विभागवार योजनाओं और कार्यक्रमों का लाभ देने के लिए निर्देश दिए हैं।

    सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी निर्देश अनुसार ''सरकार आपके द्वार'' कार्यक्रम में राजस्व विभाग की स्वामित्व योजना – स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन योजना 2026, सभी पात्र किसानों की फार्मर आई.डी. निर्माण, अविवादित नामांतरण/ बंटवारा/ सीमांकन, समाधान एक दिवसीय योजना – आय प्रमाण पत्र/ स्थानीय निवासी प्रमाण पत्र/ खसरा/ नक्शा आदि, बी.पी.एल, C.M. Helpline अंतर्गत शिकायतों का मौके पर निराकरण, प्रधानमंत्री किसान सम्मान योजना एवं मुख्यमंत्री किसान सम्मान योजना का लाभ दिया जाएगा।

    पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की दीनदयाल अंत्योदय योजना – राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन, प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण), रोजगार पंजीकरण / जॉब कार्ड और रोजगार की मांग एवं प्रधानमंत्री पोषण अभियान शामिल है। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग की आयुष्मान भारत – प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PMJAY) एवं स्वास्थ्य शिविर का आयोजन होगा। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग की पीएम स्वनिधि (PM SVANidhi) – रेहड़ी-पटरी वालों (स्ट्रीट वेंडर्स) के लिए ऋण/आवेदन में सहायता एवं अन्य योजनायें भी लाभ शामिल है।

    खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग की प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना, वन नेशन वन राशन कार्ड (ONORC) – राशन कार्ड पोर्टेबिलिटी/ई-केवाईसी/स्थिति से संबंधित सहायता एवं प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना शामिल है। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विभाग की मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना का लाभ भी शामिल है।

    कृषि और किसान कल्याण विभाग की पीएम प्रणाम (PM PRANAM), नैनो उर्वरक एवं किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) योजना का लाभ शामिल है। मत्स्य पालन विभाग की किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) शामिल है। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग की जल जीवन मिशन (मुख्यमंत्री ग्रामीण पेयजल योजना / नल-जल योजना) शामिल है वित्त विभाग की जन धन योजना, जीवन ज्योति बीमा योजना, सुरक्षा बीमा योजना एवं अटल पेंशन योजना का लाभ शामिल है।

    शिविरों में श्रम विभाग की ई-श्रम-यूएएन (UAN) / ई-श्रम कार्ड पंजीकरण, प्रधानमंत्री श्रम योगी मान-धन (PM-SYM) – पेंशन पंजीकरण, संबल योजना एवं भवन संनिर्माण कर्मकार कल्याण मण्डल के हितग्राहियों का सत्यापन एवं पंजीयन शामिल है। कौशल विकास और उद्यमिता विभाग की पीएमकेवीवाई (PMKVY) / स्किल इंडिया- कौशल प्रशिक्षण के लिए स्वैच्छिक पंजीकरण एवं नेशनल करियर सर्विस (NCS) जॉब सीकर पंजीकरण / जॉब मैचिंग शामिल है। कुटीर एवं ग्रामोद्योग विभाग की प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना एवं उर्जा विभाग/उर्जा विकास निगम की पीएम सूर्य घरः मुफ्त बिजली योजना आवेदन में सहायता शामिल है।

    महिला एवं बाल विकास विभाग की मुख्यमंत्री लाड़ली लक्ष्मी योजना, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (PMMVY) एवं सी.एम. हेल्पलाइन शामिल है। सामाजिक न्याय विभाग की मुख्यमंत्री कन्या विवाह/निकाह योजना, वृद्धावस्था पेंशन, कल्याणी पेंशन, दिव्यांग पेंशन एवं दिव्यांग प्रमाण पत्र, राष्ट्रीय परिवार सहायता योजना, सामाजिक सुरक्षा पेंशन, नशामुक्ति अभियान एवं अन्य योजनाऐं शामिल है। स्कूल शिक्षा विभाग की मुख्यमंत्री स्कूटी योजना (फ्री ई-स्कूटी योजना), विभिन्न प्रकार की छात्रवृत्ति योजनाएं एवं अन्य योजनाऐं शामिल है। उच्च शिक्षा विभाग की गांव की बेटी योजना, सहकारिता विभाग की KCC (किसान क्रेडिट कार्ड) शामिल है।

    आदिवासी जिलों के लिए अतिरिक्त फोकस योजनाएं अंतर्गत सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन, एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों में नामांकन, छात्रवृत्ति योजनाएं, वन अधिकार स्वामित्वः व्यक्तिगत और सामुदायिक भूमि एवं वन धन विकास केंद्र : स्व-सहायता समूहों का संगठन का लाभ शामिल है।