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  • हरियाणा में खिलाड़ियों के लिए बनेगा नया पोर्टल, खेल सुविधाओं की होगी डिजिटल मैपिंग

    हरियाणा में खिलाड़ियों के लिए बनेगा नया पोर्टल, खेल सुविधाओं की होगी डिजिटल मैपिंग

    चंडीगढ़.

    पूरे खेल तंत्र को एकीकृत डिजिटल मंच से जोड़ने के लिए राज्य खेल पोर्टल स्थापित किया जाएगा। प्रदेशभर की खेल अवसंरचना की व्यापक मैपिंग, साझा राज्य खेल कैलेंडर और जमीनी स्तर से राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर तक प्रतिभाओं को तैयार करने टैलेंट-पाथवे फ्रेमवर्क विकसित किया जाएगा।

    मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी की अध्यक्षता में बुधवार को राज्य खेल प्रशासनिक समिति की पहली बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। मान्यता प्राप्त खिलाड़ी और खेल क्लब अब स्कूल-कॉलेजों, पंचायतों और शहरी निकायों में उपलब्ध खेल सुविधाओं का इस्तेमाल कर सकेंगे। खेल विभाग की प्रधान सचिव अमनीत पी कुमार ने बताया कि राज्य खेल पोर्टल पर खेल सुविधाओं एवं परिसंपत्तियों, प्रतियोगिताओं एवं प्रशिक्षण शिविरों, प्रशिक्षकों, खेल उपकरणों, खिलाड़ियों तथा उनकी उपलब्धियों से जुड़ी जानकारी एक ही स्थान पर उपलब्ध होगी।

    खेल सुविधाओं का तैयार किया जाएगा डेटाबेस
    खेल अवसंरचना से जुड़े सभी विभाग, बोर्ड और निगम नोडल अधिकारी नामित करेंगे, जो पोर्टल पर सूचना को नियमित रूप से अपडेट रखेंगे। प्रदेशभर में खेल विभाग, शिक्षा विभाग, पंचायती राज संस्थाओं, शहरी स्थानीय निकायों, हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण, विश्वविद्यालयों और अन्य एजेंसियों के अधीन उपलब्ध खेल सुविधाओं की व्यापक मैपिंग कर एक आधारभूत डेटाबेस तैयार किया जाएगा।
    इससे खेल सुविधाओं में मौजूद कमियों की पहचान करने, संसाधनों का बेहतर उपयोग करने और भविष्य की खेल अवसंरचना के विकास के लिए अधिक वैज्ञानिक योजना बनाने में मदद मिलेगी। विभिन्न विभागों एवं संस्थानों द्वारा आयोजित प्रतियोगिताओं, टूर्नामेंटों, प्रशिक्षण शिविरों और अन्य खेल गतिविधियों को शामिल करते हुए समेकित राज्य खेल कैलेंडर तैयार किया जाएगा। इससे प्रतियोगिताओं की तिथियों में अनावश्यक टकराव से बचने, खेल सुविधाओं और संसाधनों के बेहतर उपयोग तथा खिलाड़ियों की अधिक भागीदारी सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। खेल प्रतिभाओं की पहचान और उनके व्यवस्थित विकास के लिए टैलेंट-पाथवे फ्रेमवर्क तैयार किया जाएगा। स्कूल और पंचायत स्तर पर प्रतियोगिताओं एवं प्रतिभा पहचान से इसकी शुरुआत होगी।

    खेल पोर्टल के जरिए रखी जाएगी निगरानी
    इसके बाद प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को जिला और राज्य स्तर के केंद्रों के माध्यम से आगे बढ़ाते हुए आवश्यक प्रशिक्षण और सहयोग उपलब्ध करवाया जाएगा। खेल निदेशक पार्थ गुप्ता ने बताया कि खिलाड़ियों को उपलब्ध करवाए जा रहे प्रशिक्षण, छात्रवृत्ति, पुरस्कार, खेल उपकरण, आहार तथा परिवहन एवं अन्य सहायता की अधिक समन्वित निगरानी राज्य खेल पोर्टल के माध्यम से की जा सकेगी। खेल मैदानों, स्टेडियमों, स्विमिंग पूल, जिम्नेजियम, फ्लड-लाइटिंग व्यवस्था, दर्शक दीर्घाओं और खेल उपकरणों की सुरक्षा जांच छह माह में सुनिश्चित की जाएगी तथा इसकी निगरानी पोर्टल से जोड़ी जाएगी।

    महिला खिलाड़ियों को मिलेगी बेहतर आवासीय एवं परिवहन सुविधा
    महिला खिलाड़ियों के लिए सुरक्षित खेल सुविधाओं, महिला प्रशिक्षकों की उपलब्धता तथा बेहतर आवासीय एवं परिवहन सहायता को मजबूत किया जाएगा। पंचायत स्तर के खेल मैदानों और ग्रामीण खेल गतिविधियों के अधिक उपयोग को बढ़ावा दिया जाएगा। जिला स्तर पर खेल सुविधाओं, प्रशिक्षकों की उपलब्धता और खिलाड़ियों की भागीदारी का आकलन कर अपेक्षाकृत कम सुविधाओं वाले जिलों और खंडों की पहचान की जाएगी।

  • नर्सिंग फर्जीवाड़े पर हाईकोर्ट सख्त, हर डुप्लीकेट फैकल्टी पर ₹3 लाख जुर्माना; लगाने होंगे 50 पौधे

    नर्सिंग फर्जीवाड़े पर हाईकोर्ट सख्त, हर डुप्लीकेट फैकल्टी पर ₹3 लाख जुर्माना; लगाने होंगे 50 पौधे

    जबलपुर
     मध्य प्रदेश के नर्सिंग कॉलेजों की मान्यता से जुड़े बहुचर्चित फर्जीवाड़े मामले में हाईकोर्ट ने एक बहुत बड़ा और सख्त फैसला सुनाया है। अदालत ने प्रत्येक डुप्लीकेट फैकल्टी पर कॉलेज प्रबंधन के खिलाफ तीन-तीन लाख रुपये का भारी जुर्माना लगाया है। हाईकोर्ट की इस सख्ती से उन तमाम कालेजों की नींद उड़ गई है, जो नियमों को ताक पर रखकर फर्जीवाड़े में लिप्त पाए गए थे।

    एक महीने में जमा करना होगा जुर्माना
    हाईकोर्ट के जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस बीपी शर्मा की युगलपीठ ने स्पष्ट निर्देश जारी करते हुए कहा है कि कॉलेज प्रबंधन को जुर्माने की यह राशि एक महीने के भीतर जमा करनी होगी। अदालत के आदेश के अनुसार, प्रत्येक डुप्लीकेट फैकल्टी पर लगने वाले तीन लाख रुपये में से दो लाख रुपये एमपीएनआरसी (MPNRC) और एक लाख रुपये जुवेनाइल जस्टिस फंड में जमा कराने होंगे।

    निर्धारित अवधि में जुर्माने की राशि जमा करने वाले कॉलेजों को ही उपयुक्त माना जाएगा। इसके बाद ही उनके विद्यार्थियों को परीक्षाओं में शामिल होने और उनके रुके हुए रिजल्ट जारी करने की अनुमति मिलेगी।

    हालांकि, डुप्लीकेट टीचिंग फैकल्टी वाले कॉलेजों को प्रति डुप्लीकेट फैकल्टी 3 लाख रुपए का जुर्माना जमा करना होगा। जुर्माना जमा करने के बाद ही संबंधित कॉलेजों को पात्र माना जाएगा और उनके छात्रों की परीक्षाएं आयोजित हो सकेंगी। पहले हो चुकी परीक्षाओं के रोके गए रिजल्ट भी जारी किए जाएंगे।

    कोर्ट ने प्रत्येक संबंधित कॉलेज को परिसर या आसपास 50 पौधे लगाने और उनकी देखरेख करने के भी निर्देश दिए हैं। पौधारोपण की तस्वीरें निसर्ग ऐप पर अपलोड करनी होंगी।

    मामले में लॉ स्टूडेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष एडवोकेट विशाल बघेल की जनहित याचिका सहित सभी संबंधित मामलों की सुनवाई हुई। अगली सुनवाई 24 सितंबर 2026 को होगी।

    डुप्लीकेट फैकल्टी पर 3 लाख रुपए जुर्माना
    सीबीआई की रिपोर्ट के अनुसार, जांच में सूटेबल पाए गए 119 कॉलेजों और डिफिशिएंट पाए गए 153 कॉलेजों में टीचिंग फैकल्टी की डुप्लीकेसी मिली है। वहीं, 35 सूटेबल कॉलेज ऐसे हैं, जहां डुप्लीकेट फैकल्टी नहीं मिली। हाईकोर्ट ने डुप्लीकेट फैकल्टी वाले कॉलेजों के लिए प्रति फैकल्टी 3 लाख रुपए जुर्माना तय किया है।

    इसमें 2 लाख रुपए एमपी नर्सिंग रजिस्ट्रेशन काउंसिल (MPNRC) और 1 लाख रुपए जुवेनाइल जस्टिस फंड में जमा करने होंगे। कॉलेजों को यह राशि एक महीने के भीतर जमा करनी होगी। इसके बाद संबंधित कॉलेजों के छात्रों की परीक्षा और रिजल्ट की प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी। प्रदेश में करीब एक हजार डुप्लीकेट शिक्षक हैं।

    50 पौधे लगाने और देखरेख के निर्देश
    हाईकोर्ट ने संबंधित कॉलेजों को अपने परिसर या आसपास 50 पौधे लगाने के निर्देश भी दिए हैं। कॉलेजों को इन पौधों की पेड़ बनने तक देखरेख करनी होगी। पौधारोपण के बाद उसकी तस्वीरें निसर्ग ऐप पर अपलोड करनी होंगी। कोर्ट के इस निर्देश का पालन संबंधित कॉलेजों को परीक्षा संबंधी राहत हासिल करने की प्रक्रिया के तहत करना होगा।

    BSc, MSc और पोस्ट बेसिक BSc छात्रों को राहत

    हाईकोर्ट के आदेश से बीएससी नर्सिंग, एमएससी नर्सिंग और पोस्ट बेसिक बीएससी नर्सिंग के छात्रों को राहत मिलेगी। जिन छात्रों ने पहले परीक्षा दे दी है, उनके रिजल्ट भी जारी किए जाएंगे। वहीं, पात्र कॉलेजों के जिन छात्रों की परीक्षाएं रुकी हुई थीं, उनके लिए परीक्षा आयोजित करने का रास्ता साफ हो गया है।

    MPNRC को सख्त हिदायत
    हाईकोर्ट ने मध्य प्रदेश नर्सिंग रजिस्ट्रेशन काउंसिल को नए नर्सिंग कॉलेजों को मान्यता देते समय पूरी सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कॉलेजों के निरीक्षण और तय मापदंडों के पालन में किसी भी तरह की लापरवाही होने पर संबंधित नियामक अधिकारी व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार होंगे। कोर्ट ने नए मान्यता प्राप्त सभी नर्सिंग कॉलेजों का रिकॉर्ड भी तलब किया है।

    मामले में सुनवाई के दौरान अधिवक्ता आलोक बागरेचा और अधिवक्ता विशाल बघेल ने कोर्ट के सामने कई तथ्य रखे। हाईकोर्ट ने मान्यता प्रक्रिया में हुई गड़बड़ियों को लेकर संबंधित अधिकारियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं।

    सीबीआई जांच में सामने आया था बड़ा फर्जीवाड़े का जाल
    ला स्टूडेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष एडवोकेट विशाल बघेल की तरफ से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने पहले सीबीआई जांच के आदेश दिए थे। सीबीआई की जांच में प्रदेशभर के 695 नर्सिंग कॉलेजों की पड़ताल की गई थी, जिसमें चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए। जांच में पाया गया कि सूटेबल पाए गए 119 कॉलेजों और डिफिशिएंट पाए गए 153 कॉलेजों में बड़े पैमाने पर टीचिंग फैकल्टी की डुप्लीकेसी चल रही थी। केवल 35 सूटेबल कॉलेज ऐसे थे, जहां कोई डुप्लीकेट फैकल्टी नहीं मिली।

        नर्सिंग कॉलेजों में डुप्लीकेट फैकल्टी मिलने पर प्रति फैकल्टी 3 लाख का जुर्माना।
        जुर्माने की राशि का दो हिस्सा: 2 लाख MPNRC और 1 लाख जुवेनाइल जस्टिस फंड में जमा होगा।
        कॉलेजों को अपने परिसर में लगाने होंगे 50-50 पौधे, निसर्ग ऐप पर अपलोड करनी होगी फोटो।
        जुर्माना जमा करने के बाद ही छात्रों को परीक्षा और रिजल्ट की मिलेगी अनुमति।
        हाईकोर्ट ने नए मान्यता प्राप्त सभी कॉलेजों का रिकॉर्ड भी तलब किया है।

  • डबरा में बौद्ध भिक्षु बनकर रह रहे थे बांग्लादेशी, सत्यापन करने वालों को जारी होंगे नोटिस

    डबरा में बौद्ध भिक्षु बनकर रह रहे थे बांग्लादेशी, सत्यापन करने वालों को जारी होंगे नोटिस

    ग्वालियर
    बांग्लादेशी नागरिकों को कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर हिंदू नाम से भारतीय पासपोर्ट जारी होने के मामले में जांच अब केवल पासपोर्ट हासिल करने वाले संदिग्धों तक सीमित नहीं रही है. इस पूरे प्रकरण में पुलिस वेरिफिकेशन की प्रक्रिया भी जांच के केंद्र में आ गई है. ग्वालियर के डबरा थाने से शुरू हुई सत्यापन प्रक्रिया एसपी कार्यालय की पासपोर्ट सेल तक पहुंची और इसके बाद संबंधित दस्तावेज पासपोर्ट सेवा केंद्र भेजे गए. अब स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) यह पता लगाने में जुटी है कि इस पूरी प्रक्रिया में कथित फर्जी दस्तावेज और गलत पहचान आखिर किस स्तर पर नहीं पकड़ी गई। 

    एसटीएफ की टीम ग्वालियर एसपी कार्यालय पहुंची और पासपोर्ट से जुड़े रिकॉर्ड जुटाए. टीम दस्तावेजों की पड़ताल के साथ यह भी देख रही है कि पुलिस वेरिफिकेशन के दौरान आवेदकों की पहचान और पते का भौतिक सत्यापन किस आधार पर किया गया था. जांच का एक महत्वपूर्ण बिंदु यह भी है कि थाना स्तर से क्लियर रिपोर्ट भेजे जाने के बाद एसपी कार्यालय की पासपोर्ट सेल में दस्तावेजों की स्क्रूटनी किस तरह की गई। 

     बांग्लादेशी नागरिकों को भारतीय पासपोर्ट जारी होने के मामले में एसटीएफ अब पुलिस सत्यापन की पूरी कड़ी खंगालेगी। पड़ताल में सामने आया है जिस समय 22 बांग्लादेशी नागरिकों के पासपोर्ट डबरा के पते पर बने, उस समय यह लोग सिमरिया ताल गांव स्थित बौद्ध विहार में ही बौद्ध भिक्षु बनकर रहते थे।

    पासपोर्ट केंद्र में आवेदन के बाद जब पुलिस वेरीफिकेशन की बारी आई, तब एसपी कार्यालय की पासपोर्ट शाखा से फाइल ऑनलाइन डबरा थाने भेजी गई। यहां डबरा थाने के तत्कालीन एचसीएम भूपेंद्र गुर्जर को भौतिक सत्यापन करना था, घर जाकर देखना था और आसपास के लोगों भी पूछताछ करनी थी, लेकिन यह पूरी कार्रवाई थाने में ही बैठकर कर दी। सीधे टीप लगा दी- सब सही है।

     

    डबरा थाने से शुरू हुई थी सत्यापन की प्रक्रिया
    जांच में सामने आए तथ्यों के अनुसार संदिग्ध पासपोर्ट के लिए पुलिस वेरिफिकेशन डबरा थाने के स्तर से किया गया था. उस अवधि में विनायक शुक्ला डबरा थाना प्रभारी के पद पर थे. वर्तमान में वे दतिया जिले में एसडीओपी बड़ौनी के पद पर पदस्थ हैं. थाना क्षेत्र में संबंधित आवेदकों के पते और पहचान के भौतिक सत्यापन की जिम्मेदारी बीट स्तर पर थी। 

    उस समय डबरा थाने के बीट प्रभारी भूपेंद्र गुर्जर थे. बताया जा रहा है कि बीट प्रभारी ने आवेदकों के बताए गए पते और पहचान का मौके पर सत्यापन कर रिपोर्ट तैयार की थी. इसी रिपोर्ट के आधार पर थाना स्तर से पासपोर्ट के लिए पुलिस क्लियरेंस दी गई और इसे आगे एसपी कार्यालय भेजा गया। 

    अब एसटीएफ का मुख्य सवाल यही है कि बीट प्रभारी द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट वास्तव में किस आधार पर तैयार हुई. क्या आवेदकों के पते पर जाकर उनका भौतिक सत्यापन किया गया था या दस्तावेजों के आधार पर ही रिपोर्ट तैयार कर दी गई? एसटीएफ इस बिंदु पर रिकॉर्ड और संबंधित अधिकारियों के बयान के माध्यम से स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश कर रही है। 

    एसपी कार्यालय की पासपोर्ट सेल की भूमिका भी जांच में
    थाना स्तर से पुलिस वेरिफिकेशन रिपोर्ट एसपी कार्यालय की पासपोर्ट सेल में पहुंची थी. यहां दस्तावेजों और पुलिस रिपोर्ट की स्क्रूटनी के बाद प्रकरण पासपोर्ट सेवा केंद्र तक गया. अब जांच एजेंसी इस पूरी कड़ी को जोड़कर देख रही है। 

    एसटीएफ यह पता कर रही है कि थाना स्तर से भेजी गई रिपोर्ट में ऐसी कौन-कौन सी जानकारियां थीं, जिनके आधार पर पासपोर्ट प्रक्रिया आगे बढ़ी. यदि दस्तावेजों में कोई विसंगति थी तो वह एसपी कार्यालय की पासपोर्ट सेल की जांच में क्यों सामने नहीं आई. इसके साथ ही पासपोर्ट सेवा केंद्र के स्तर पर हुई जांच की प्रक्रिया को भी जांच के दायरे में लिया गया है। 

    जांच एजेंसी के लिए यह महत्वपूर्ण है कि एक व्यक्ति को भारतीय नागरिक के रूप में स्थापित करने वाली अलग-अलग प्रक्रियाओं में दस्तावेजों की विश्वसनीयता की जांच किस स्तर पर हुई. पुलिस सत्यापन, जिला स्तर की स्क्रूटनी और पासपोर्ट जारी होने की प्रक्रिया के बीच यदि कोई खामी रही है तो उसका पता लगाने के प्रयास किए जा रहे हैं। 

    सात राज्यों तक पहुंची संदिग्धों की तलाश
    मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि एसटीएफ की जांच का दायरा ग्वालियर तक सीमित नहीं है. फर्जी दस्तावेजों के आधार पर पासपोर्ट हासिल करने वाले संदिग्धों की तलाश में सात राज्यों में टीमें भेजी गई हैं. जांच में कुछ संदिग्धों के भारत से बाहर निकलकर थाईलैंड पहुंचने की जानकारी भी सामने आई है। 

    बताया जा रहा है कि इनमें कुछ संदिग्ध बौद्ध भिक्षु के रूप में रह रहे हैं. हालांकि विदेश में मौजूद संदिग्धों के संबंध में जांच एजेंसी उपलब्ध जानकारी और रिकॉर्ड का सत्यापन कर रही है. भारत में मौजूद अन्य संदिग्धों की तलाश भी जारी है। 
    एसटीएफ अब यह भी जोड़ने का प्रयास कर रही है कि फर्जी दस्तावेज तैयार करने, पहचान बदलने, पुलिस सत्यापन हासिल करने और पासपोर्ट प्राप्त करने की प्रक्रिया में कहीं कोई संगठित नेटवर्क तो सक्रिय नहीं था. अलग-अलग स्थानों से मिले दस्तावेज और रिकॉर्ड की कड़ियों को जोड़कर जांच आगे बढ़ाई जा रही है। 

    फर्जी पासपोर्ट रद्द कराने की तैयारी
    जांच में जिन पासपोर्ट को फर्जी दस्तावेजों के आधार पर तैयार किया हुआ पाया जाएगा, उन्हें रद्द कराने की प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी. एसटीएफ के अनुसार ऐसे मामलों में विदेश मंत्रालय को पत्र भेजा जाएगा, ताकि संबंधित पासपोर्ट को निरस्त कराया जा सके। 

    जांच एजेंसी की चिंता उन संदिग्धों को लेकर भी है, जो अभी भारत में मौजूद हैं. फर्जी दस्तावेजों से तैयार पासपोर्ट का इस्तेमाल कर वे देश से बाहर न निकल सकें, इसके लिए आवश्यक कार्रवाई की जा रही है. वहीं जो संदिग्ध विदेश पहुंच चुके हैं, उनके संबंध में आगे की कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाएगी. जरूरत पड़ने पर उनके खिलाफ रेड कार्नर नोटिस जारी कराने की कार्रवाई भी आगे बढ़ाई जा सकती है। 

    अधिकारियों और कर्मचारियों के बयान होंगे दर्ज
    एसटीएफ अब उन सभी लोगों से पूछताछ की तैयारी कर रही है, जिनकी भूमिका पुलिस वेरिफिकेशन और पासपोर्ट प्रक्रिया में रही. तत्कालीन डबरा थाना प्रभारी विनायक शुक्ला और तत्कालीन बीट प्रभारी भूपेंद्र गुर्जर को नोटिस देकर उनके बयान दर्ज किए जाने की बात कही गई है। 

    इसके अलावा एसपी कार्यालय की पासपोर्ट सेल से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों से भी जानकारी ली जाएगी. पासपोर्ट सेवा केंद्र के संबंधित अधिकारियों की भूमिका और उनके स्तर पर हुई दस्तावेजी जांच को भी जांच का हिस्सा बनाया गया है। 

    एसटीएफ यह स्पष्ट करना चाहती है कि यदि आवेदकों की पहचान और पते का भौतिक सत्यापन किया गया था तो उसकी पुष्टि करने वाले दस्तावेज और रिकॉर्ड क्या हैं. यदि सत्यापन रिपोर्ट में गलत जानकारी दर्ज की गई थी तो उसके लिए जिम्मेदारी किसकी बनती है, यह भी जांच के बाद सामने आएगा। 

    भारतीय पासपोर्ट लेकर घूम रहे बांग्लादेशियों को पकड़ना चुनौती
    एसटीएफ की अलग-अलग टीमें अब भारतीय पासपोर्ट लेकर घूम रहे बांग्लादेशियों को पकड़ने के लिए कई राज्यों में डेरा जमाए हुए हैं। दो टीमें असम और बंगाल में हैं। एक टीम दिल्ली है। भोपाल और ग्वालियर यूनिट इस पर काम कर रहे हैं। वर्जनइस मामले में अलग-अलग राज्यों में टीमें पहुंची हैं। जिससे भारतीय पासपोर्ट लेकर घूम रहे बांग्लादेशियों को पकड़ा जा सके। पुलिसकर्मियों को नोटिस देकर बयान के लिए बुलाया जाएगा। राजेश सिंह भदौरिया, एसपी, एसटीएफ

    पासपोर्ट को लेकर यह है जांच प्रक्रियाडाटा ट्रांसफर
    पासपोर्ट सेवा केंद्र पर दस्तावेजों के सत्यापन के बाद आवेदन, सारे दस्तावेजों की फाइल आनलाइन डिजिटल संबंधित जिले के पुलिस अधीक्षक कार्यालय की पासपोर्ट शाखा को भेजी जाती है। यहां से फाइल संबंधित थाने को आनलाइन ट्रांसफर की जाती है।थाना प्रभारी और बीट प्रभारी की भूमिकाथाने में फाइल प्राप्त होते ही थाना प्रभारी इसे संबंधित बीट प्रभारी को जांच के लिए सौंपते हैं। बीट प्रभारी आवेदक के दिए गए पते पर जाते हैं या आवेदक को मूल दस्तावेजों के साथ थाने में उपस्थित होने का संदेश देते हैं।

    आधार कार्ड, मतदाता पहचान पत्र, बिजली/पानी बिल आदि मूल प्रमाण-पत्रों का मिलान किया जाता है। बीट अधिकारी कम से कम दो स्थानीय पड़ोसियों/ गवाहों से पूछताछ करते हैं और उनके हस्ताक्षर लेते हैं ताकि यह स्पष्ट हो सके कि आवेदक पिछले एक वर्ष से उसी पते पर रह रहा है।

    बीट प्रभारी जांच पूरी करके अपनी रिपोर्ट थाना प्रभारी के समक्ष प्रस्तुत करता है। थाना प्रभारी रिपोर्ट का अवलोकन कर आवेदक से मिलता है। डिजिटल साइन/ स्वीकृति देकर वापस एसएसपी कार्यालय की पासपोर्ट शाखा को भेजते हैं।

    क्रिमिनल रिकॉर्ड चेक
    बीट प्रभारी थाने, सीसीटीएनएस, आईसीजेएस सॉफ्टवेयर में आवेदक का नाम और पिता का नाम डालकर चेक करते हैं कि उसके खिलाफ कोई केस, वारंट या कोर्ट केस पेंडिंग तो नहीं है। जांच पूरी होने पर एसएसपी कार्यालय द्वारा पासपोर्ट पोर्टल पर तीन में से एक रिपोर्ट दर्ज की जाती है

        क्लियर : सभी दस्तावेज सही हैं और कोई आपराधिक रिकार्ड नहीं है।
        अपूर्ण : यदि कोई दस्तावेज अधूरा हो या आवेदक पते पर न मिला हो।
        प्रतिकूल : कोई गंभीर आपराधिक मामला पेंडिंग हो या पते का विवरण झूठा पाया गया हो।

    पुलिस सत्यापन पर उठे सवालों के जवाब तलाश रही एसटीएफ
    इस पूरे मामले ने पासपोर्ट जारी करने से पहले होने वाली पुलिस वेरिफिकेशन व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े किए हैं. सामान्य तौर पर आवेदक की पहचान और उसके पते की पुष्टि के लिए पुलिस स्तर पर सत्यापन किया जाता है. इसके बाद रिपोर्ट संबंधित स्तर पर भेजी जाती है. ऐसे में यदि किसी विदेशी नागरिक ने कथित तौर पर भारतीय पहचान के आधार पर पासपोर्ट हासिल कर लिया, तो जांच का स्वाभाविक केंद्र यह बन गया है कि सत्यापन के दौरान उसकी वास्तविक पहचान सामने क्यों नहीं आई। 

    एसटीएफ इसी सवाल का जवाब रिकॉर्ड के जरिए तलाश रही है. फिलहाल जांच पूरी नहीं हुई है, इसलिए किसी अधिकारी या कर्मचारी की जिम्मेदारी तय नहीं की गई है. एजेंसी दस्तावेज, पुलिस रिकॉर्ड और संबंधित अधिकारियों के बयान जुटाकर पूरे घटनाक्रम की कड़ी तैयार कर रही है। 

    दोषियों पर कार्रवाई का एसटीएफ का दावा
    एसटीएफ के पुलिस अधीक्षक राजेश सिंह भदौरिया के अनुसार मामले में किसी भी जिम्मेदार व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा. वहीं मध्य प्रदेश एसटीएफ के एडीजी डी. श्रीनिवास वर्मा ने कहा कि जाली दस्तावेजों से पासपोर्ट बनवाने वालों की तलाश देशभर में की जा रही है. पुलिसकर्मियों की भूमिका की भी जांच कराई जा रही है और जांच में दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। 

    अब जांच की दिशा दो स्तरों पर आगे बढ़ रही है. एक ओर उन लोगों की तलाश की जा रही है, जिन्होंने कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों के सहारे भारतीय पहचान और पासपोर्ट हासिल किया. दूसरी ओर डबरा थाने से लेकर एसपी कार्यालय और आगे पासपोर्ट सेवा केंद्र तक पहुंची प्रक्रिया की जांच की जा रही है. एसटीएफ की पड़ताल से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि इस पूरे मामले में दस्तावेजी फर्जीवाड़ा किस स्तर पर हुआ और सरकारी सत्यापन की कई परतों को पार कर संदिग्धों के लिए भारतीय पासपोर्ट हासिल करना कैसे संभव हुआ। 

  • महावीर जी मंदिर विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई पूरी, फैसला बाद में

    महावीर जी मंदिर विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई पूरी, फैसला बाद में

    जयपुर
     सुप्रीम कोर्ट ने प्रसिद्ध 'श्री महावीर जी जैन मंदिर' के प्रबंधन और संचालन को लेकर जैन धर्म के श्वेतांबर और दिगंबर संप्रदायों के बीच चल रहे विवाद पर बुधवार को सुनवाई पूरी कर ली। फैसला बाद में सुनाया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों को धार्मिक भावनाओं से जुड़े इस मामले में संयम बरतने की सलाह देते हुए कहा, जिस भगवान के नाम पर दोनों पक्ष लड़ रहे हैं, क्या वह इस तरह कानूनी लड़ाई से खुश होंगे?

    न्यायाधीश जेबी पारदीवाला और न्यायाधीश के. विनोद चंद्रन की पीठ ने इस मामले पर बुधवार को सुनवाई की। दोनों पक्षों को आठ दिन के भीतर लिखित बहस पेश करने के निर्देश दिए हैं। लोक न्यास अधिनियम, 1959 के तहत कार्यवाही से विवाद शुरू हुआ था। मंदिर प्रबंधन से दिगंबर समिति अध्यक्ष और सचिव को हटाने तथा श्वेतांबर संप्रदाय की नई प्रबंध समिति बनाने की मांग की गई।

    विवाद करें समाप्त
    सुनवाई के दौरान न्यायाधीश पारदीवाला ने दोनों पक्षों से कहा, यह बहुत ही संवेदनशील मामला है और किसी भी पक्ष की भावनाओं को ठेस पहुंचाए बिना विवाद को समाप्त करने की जरूरत है। उन्होंने दोनों पक्षों से पूछा कि क्या ऐसा संभव है कि सुबह श्वेतांबर संप्रदाय अपनी परंपरा के अनुसार भगवान की पूजा करे और शाम को दिगंबर संप्रदाय भगवान के वस्त्र बदलकर अपनी पद्धति से पूजा करे। आप अनावश्यक मुकदमेबाजी कर भगवान को क्यों परेशान कर रहे हैं? क्या आपको लगता है भगवान इस सबसे खुश होंगे?

    बताते चलें कि साल 1970 में एसडीएम ने दिगंबर समिति के खिलाफ प्रार्थना पत्र मंजूर किया। दिगंबर समिति की ओर से पूजा स्थल अधिनियम, 1991 के तहत पेश प्रार्थना पत्र के आधार पर अक्टूबर 1994 में ट्रायल कोर्ट ने रोक लगा दी। हाईकोर्ट में अपील दायर की गई, जिसका दिगंबर समिति ने विरोध किया कि 1991 के अधिनियम के तहत कार्यवाही समाप्त हो चुकी थी।

    क्या है दोनों पक्षों की दलीलें?
    वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान का तर्कः इस मामले में पूजास्थल परिवर्तन की कोई मांग नहीं की गई है, इसलिए पूजा स्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 1991 इस मामले में लागू नहीं होता है। उन्होंने कहा कि यह मामला केवल संपूर्ण जैन समुदाय के हित में मंदिर के प्रबंधन से जुड़ा है।

    दिगंबर समिति की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आर्यमा सुंदरम का तर्क
    हाईकोर्ट को अपील पर सुनवाई नहीं करनी चाहिए थी, क्योंकि 1991 के कानून के तहत कार्यवाही समाप्त कर दी गई और उसमें अपील का प्रावधान नहीं है। ऐसे में हाईकोर्ट में याचिका दायर होनी चाहिए थी। तथ्य यह है कि मूर्ति (देवता), मंदिर और उससे जुड़ी संपत्तियों का नियंत्रण, कब्जा और प्रबंधन दिगंबर जैन संप्रदाय के पास ही रहा है।

  • मुख्य नगर पालिका अधिकारी ने सीसी रोड निर्माण कार्य का किया निरीक्षण

    मुख्य नगर पालिका अधिकारी ने सीसी रोड निर्माण कार्य का किया निरीक्षण

    मुख्य नगर पालिका अधिकारी ने सीसी रोड निर्माण कार्य का किया निरीक्षण

    निर्माण कार्य में गुणवत्ता एवं समयबद्धता का विशेष ध्यान रखने के दिए निर्देश

    शहडोल 
     नगर पालिका परिषद शहडोल द्वारा नगर में नागरिकों को बेहतर एवं सुगम आवागमन की सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से विभिन्न विकास एवं निर्माण कार्य कराए जा रहे हैं।  मुख्य नगर पालिका अधिकारी श्रीमती आशा जितेंद्र भंडारी ने पुराना नगर पालिका चौक से पुलिस लाइन होकर गुजरने वाली सीसी रोड के निर्माण कार्य का स्थल निरीक्षण किया।

    निरीक्षण के दौरान मुख्य नगर पालिका अधिकारी ने निर्माणाधीन सड़क की कार्य-प्रगति एवं गुणवत्ता का जायजा लिया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों एवं ठेकेदार को निर्देश दिए कि सड़क निर्माण कार्य में निर्धारित मापदंडों एवं गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखा जाए तथा निर्माण कार्य को निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण किया जाए, ताकि आम नागरिकों को शीघ्र बेहतर एवं सुगम आवागमन की सुविधा उपलब्ध हो सके।

    मुख्य नगर पालिका अधिकारी द्वारा झूला पुल के पास चल रहे निर्माण कार्य का भी निरीक्षण किया गया। उन्होंने मौके पर उपस्थित संबंधित अधिकारियों एवं ठेकेदार से कार्य की प्रगति की जानकारी ली तथा आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नगर में संचालित सभी निर्माण कार्यों में गुणवत्ता एवं समयबद्धता को प्राथमिकता दी जाए तथा कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए।

    नगर पालिका परिषद द्वारा नगर के विकास एवं नागरिक सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए विभिन्न निर्माण कार्य निरंतर कराए जा रहे हैं। निरीक्षण के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि सभी कार्य निर्धारित मापदंडों के अनुरूप एवं गुणवत्तापूर्ण तरीके से पूर्ण हों।

    निरीक्षण के दौरान नगर पालिका के उपयंत्री श्री सुखेंद्र सिंह तोमर, संबंधित ठेकेदार एवं नगर पालिका के अन्य अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।

  • यूएस ओपन में बड़ा उलटफेर, बेंजामिन शेल्टन ने कार्लोस अलकराज को हराकर सेमीफाइनल में बनाई जगह

    यूएस ओपन में बड़ा उलटफेर, बेंजामिन शेल्टन ने कार्लोस अलकराज को हराकर सेमीफाइनल में बनाई जगह

    नई दिल्ली
    23 वर्षीय अमेरिकी युवा बेंजामिन शेल्टन ने मंगलवार देर रात बड़ा उलटफेर करते हुए मौजूदा विजेता स्पेन के कार्लोस अलकराज को साढ़े चार घंटे तक चले मैराथन मुकाबले में हराकर सेमीफाइनल में जगह बना ली।

    पांच सेट तक खिंचा ये मुकाबला अमेरिकी समयानुसार सुबह 3:33 बजे खत्म हुआ और इसके साथ ही ये इस टूर्नामेंट में अब तक का सबसे देरी से खत्म हुआ मैच भी बन गया। अन्य मुकाबलों में एरिना सबालेंका ने चेक गणराज्य की 21 वर्षीय लिंडा नोस्कोवा के विरुद्ध संघर्षपूर्ण जीत दर्ज करते हुए खिताब की उम्मीद बरकरार रखने में सफलता हासिल की।

    पुरुष सिंगल्स के क्वार्टर फाइनल में अलकराज ने कलाई की चोट से जूझने के बाद वापसी में इस मैच से पहले तक जबरदस्त प्रदर्शन किया, किसी भी मैच में उनका खेल देखकर नहीं लगा कि वह पांच महीने तक टेनिस से दूर थे लेकिन इस मैच में शेल्टन ने उन्हें 6-7(5), 6-1, 6-3, 1-6, 7-6(10-7) से हरा दिया।

    23 साल के अलकराज के खेल में सटीकता का नामोनिशान नहीं था और उन्होंने 53 अनचाही गलतियां कीं। शेल्टन ने जीत के बाद कहा कि कार्लोस अभी से हमारे खेल के महानतम विजेताओं में से एक हैं। उनके विरुद्ध खेलना हमेशा मजेदार होता है।
    कई बार उनकी कलाकारी देखना अद्भुत होता है लेकिन ये मेरे करियर का अभी तक का सबसे आनंदपूर्ण मैच रहा। इस मैच से पहले अलकराज किसी भी ग्रैंडस्लैम टूर्नामेंट में किसी अमेरिकी खिलाड़ी से नहीं हारे थे, अमेरिकी प्रतिद्वंद्वियों के विरुद्ध मैचों में उनका रिकार्ड 13-0 था।

    सेमीफाइनल में शेल्टन का मुकाबला 11वीं वरीयता प्राप्त हमवतन फ्रांसिस टियाफो से होगा जिन्होंने पहले दो सेट हारने के बाद अमेरिका के ही एलेक्स मिचेलसन को 5-7, 3-6, 7-5, 6-3, 7-6 (10-6) से हराया। आल अमेरिकन सेमीफाइनल के साथ ही तय हो गया है कि इस बार के फाइनल में एक अमेरिकी जरूर खेलेगा।

    सेमीफाइनल में पहुंचीं सबालेंका और पेगुला एरिना
    सबालेंका ने नंबर वन रैंकिंग और यूएस ओपन की अपनी बादशाहत को अपने हाथों से फिसलते देख ऐसी जोरदार वापसी कर डाली कि 21 साल की लिंडा नोस्कोवा हतप्रभ रह गईं। सबालेंका ने लगातार तीसरे यूएस ओपन टाइटल की अपनी उम्मीदें जिंदा रखते हुए नोस्कोवा को 7-6 (1), 3-6, 7-6 (10-7) से हराया।

    मैच के बाद उन्होंने कहा, क्या कमाल का मैच रहा, वह अद्भुत खिलाड़ी हैं और अभी मेरे पास शब्द नहीं हैं क्योंकि इस मैच को जीतने के लिए मैंने खुद को हद पार करने तक खींचा, खासतौर से तीसरे सेट में। सच में मुझे लगा कि बस हो गया, मैच खत्म है अब और शायद इसी ने मुझे ऐसी वापसी करने में मदद की।
    रैंकिंग में शीर्ष स्थान पर बने रहने की उम्मीदें बचाने के लिए सबालेंका को ये मैच जीतना ही था और अब वह अमेरिका की जेसिका पेगुला से भिड़ेंगे। तीसरी वरीय पेगुला ने नंबर 26 पर काबिज एम्मा नवारो को 3-6, 6-4, 6-3 से हराया।

     

  • लखनऊ में 14 सितंबर को लॉन्च होंगी दो नई टाउनशिप, 5 हजार वर्गफुट के प्लॉट भी मिलेंगे

    लखनऊ में 14 सितंबर को लॉन्च होंगी दो नई टाउनशिप, 5 हजार वर्गफुट के प्लॉट भी मिलेंगे

    लखनऊ
    लखनऊ विकास प्राधिकरण की दो महत्वाकांक्षी आवासीय योजनाएं वरुण बिहार और नैमिषनगर अब आकार लेने जा रही हैं। एलडीए दोनों योजनाओं में बड़े बंगलों के लिए भी भूखण्ड बेचेगा। बड़े बंगलों के लिए पांच पांच हजार वर्गमीटर के भूखण्ड मिलेंगे। प्राधिकरण 14 सितंबर को दोनों योजनाओं को लॉन्च करने की तैयारी में है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इनके शुभारंभ करेंगे। छोटे आकार के भूखंड भी विकसित किए जाएंगे, जिससे अलग-अलग आय वर्ग के लोगों को घर बनाने का अवसर मिलेगा।

    नैमिषनगर में आध्यात्मिकता और आधुनिक सुविधाओं का संगम
    नैमिषनगर योजना को धार्मिक और आध्यात्मिक पर्यटन के साथ आधुनिक जीवनशैली से जोड़कर विकसित किया जाएगा। यहां आध्यात्मिक साधना, योग एवं शांति जीवनशैली केंद्र, ध्यान केंद्र, आश्रम और सांस्कृतिक केंद्र बनाए जाएंगे। इसके अलावा एक जिला, एक उत्पाद केंद्र, वाणिज्यिक केंद्र, शिक्षा केंद्र, खुले व्यायाम स्थल, सामुदायिक पार्क और खरीदारी मार्ग जैसी सुविधाएं भी प्रस्तावित हैं। नैमिषनगर में भूखंडों की दर 3,800 रुपये प्रति वर्गफुट रखी गई है। यहां 5 हजार वर्गफुट का भूखंड 1.90 करोड़ रुपये में मिलेगा। इसके लिए 9.50 लाख रुपये पंजीकरण राशि देनी होगी।

    नैमिषनगर में भूखंडों की कीमत और पंजीकरण राशि
    भूखंड का आकार——– कीमत——— ————-पंजीकरण राशि

    5,000 वर्गफुट——- ₹ 1.90 करोड़——- ———–₹9.50 लाख

    3,200 वर्गफुट ——-₹ 1.21 करोड़ 60 हजार——- ₹6.08 लाख

    2,178 वर्गफुट——- ₹ 82 लाख 76 हजार 400—— ₹ 4.13 लाख

    1,800 वर्गफुट——- ₹ 68 लाख 40 हजार———— ₹ 3.42 लाख

    1,250 वर्गफुट——— ₹ 47 लाख 50 हजार ————₹ 2.37 लाख

    800 वर्गफुट———– ₹ 30 लाख 40 हजार ————-₹ 1.52 लाख

    वरुण बिहार में गोल्फ कोर्स, झील और वाणिज्यिक केंद्र
    आगरा रोड पर विकसित होने वाली वरुण बिहार योजना को बड़े पैमाने पर नियोजित किया जा रहा है। यहां बड़ा गोल्फ कोर्स, करीब 800 एकड़ में हरित पट्टी और पार्क, केंद्रीय व्यावसायिक केन्द्र, 300 एकड़ का माल परिवहन केंद्र और 70 एकड़ में झील विकसित करने की योजना है। इसके अलावा स्वास्थ्य एवं आरोग्य केंद्र, शिक्षा केंद्र और 20 एकड़ में खेल केंद्र भी प्रस्तावित है। वरुण बिहार में भूखंडों की दर 2,800 रुपये प्रति वर्गफुट निर्धारित की गई है। 5 हजार वर्गफुट का भूखंड 1.40 करोड़ रुपये में मिलेगा।

    वरुण बिहार में भूखंडों की कीमत और पंजीकरण राशि
    भूखंड का आकार— —कीमत ————-पंजीकरण राशि

    5,000 वर्गफुट—- ₹ 1.40 करोड़ ——————–₹ 7 लाख

    3,229 वर्गफुट—— ₹ 90 लाख 41 हजार——- ₹ 4 लाख 52 हजार 60

    3,200 वर्गफुट ——-₹ 89 लाख 60 हजार—– ₹ 4 लाख 48 हजार

    2,178 वर्गफुट —–₹ 60 लाख 98 हजार 400 —₹3 लाख 4 हजार 930

    1,800 वर्गफुट—— ₹ 50 लाख 40 हजार——— ₹2 लाख 52 हजार

    1,250 वर्गफुट——- ₹35 लाख——————- ₹ 1.75 लाख

    आरक्षित वर्ग को पंजीकरण में राहत
    दोनों योजनाओं में आरक्षित वर्ग के आवेदकों से 2.5 प्रतिशत, जबकि अन्य वर्ग के आवेदकों से 5 प्रतिशत पंजीकरण राशि लिए जाने की व्यवस्था बताई गई है। ऐसे में अंतिम पंजीकरण राशि वर्ग और योजना पुस्तिका में निर्धारित नियमों के अनुसार होगी।

    दोनों योजनाओं में क्या खास
    नैमिषनगर: आध्यात्मिक केंद्र, योग, ध्यान, आश्रम और सांस्कृतिक सुविधाएं।

    वरुण बिहार: गोल्फ कोर्स, 70 एकड़ की झील, हरित क्षेत्र और खेल केंद्र।

    बड़े बंगले: दोनों योजनाओं में 5 हजार वर्गफुट तक के भूखंड।

    छोटे भूखंड: 800 और 1,250 वर्गफुट जैसे विकल्प भी उपलब्ध।

    शुभारंभ: 14 सितंबर को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा योजना लॉन्च किए जाने की तैयारी।

  • रामानंद सागर के पोते लाएंगे श्रीमद्भागवतम् की भव्य कहानी, जारी हुआ पहला टीजर पोस्टर

    रामानंद सागर के पोते लाएंगे श्रीमद्भागवतम् की भव्य कहानी, जारी हुआ पहला टीजर पोस्टर

    बॉलीवुड में आज तक सैकड़ों धार्मिक और पौराणिक फिल्में बनी हैं, लेकिन आज तक कोई निर्माता-निर्देशक श्रीमद्भागवत् को रुपहले पर्दे पर साकार नहीं कर सका. लेकिन अब ये बड़ा कारनामा होना तय हो गया है. श्रीमद्भागवतम् के पहले पार्ट ‘श्रीमद्भागवतम् पार्ट I: विष्णुरत’ का पहला टीजर पोस्टर आज जारी कर दिया गया. रामानंद सागर के पोते आकाश सागर और अमृत सागर द्वारा सह निर्देशित पोस्टर में भगवान श्रीकृष्ण के हाथ की एक झलक दिख रही है. फिल्म अगले साल रिलीज होगी.

    क्या है फिल्म की कहानी?
    भारत के सबसे पूजनीय धर्मग्रंथों में से एक भागवत महापुराण पर आधारित है, जिसे दुनियाभर में करोड़ों लोग पढ़ते और श्रद्धा से देखते हैं. इसके पहले पार्ट में जुड़े ‘विष्णुरत’ का अर्थ है—‘विष्णु द्वारा संरक्षित’. यही भाव फिल्म की आध्यात्मिक और सिनेमाई यात्रा की बुनियाद भी है. फिल्म का पहला पोस्टर इसकी दुनिया की पहली झलक पेश करता है, जिसमें ईश्वरीय संरक्षण के भाव को केंद्र में रखा गया है.

    फिल्म के बारे में सागर पिक्चर्स एंटरटेनमेंट कर्ताधर्ता और निर्देशक जोड़ी आकाश सागर चोपड़ा और अमृत सागर चोपड़ा ने कहा- इस फिल्म के सह-निर्देशक होने के साथ-साथ हम दोनों भाई हैं और भागवत की कहानियां सुनते हुए ही बड़े हुए हैं. हमारा मानना है कि करोड़ों भारतीयों के लिए ये कथाएं केवल आध्यात्मिक ज्ञान नहीं, बल्कि हमारी वर्षों पुरानी स्मृति का हिस्सा हैं.

    'हमारे दादाजी ने रामायण को पर्दे पर उतारा था. वो एक ऐसा धारावाहिक साबित हुआ, जिसके जरिए पूरी एक पीढ़ी ने इस महाकाव्य का आध्यात्मिक अनुभव किया. लेकिन उन्होंने जो किया, उसे हम दोबारा नहीं बना सकते और न ही ऐसा करने की हमारी कोशिश है. हर पीढ़ी को अपनी सिनेमाई भाषा खुद खोजनी होती है, जो उसके समय के माध्यम और संभावनाओं के अनुरूप हो.'

    ‘श्रीमद्भागवतम् पार्ट I विष्णुरत’ की शूटिंग लगभग पूरी हो चुकी है और अब ये प्रोडक्शन के अंतिम दौर में है. इस फिल्म का भव्य प्रोडक्शन डिजाइन, आधुनिक फिल्म निर्माण तकनीक और विशिष्ट विजुअल ग्रामर के जरिए एक ऐसी सिनेमाई दुनिया रची जा रही है, जिसे पहले कभी इस रूप में नहीं देखा गया. इस दुनिया की जड़ें मूल ग्रंथ की प्रामाणिकता में हैं, जबकि इसका पैमाना और कल्पनाशीलता उसके विराट स्वरूप के अनुरूप रखी गई है.

    आकाश-अमृत कहते हैं- पिछले 6 वर्षों से हम दोनों ने पहले भागवत को समझने की कोशिश की, उसके बाद ही खुद को इस बात के लिए तैयार किया कि इसे पर्दे के लिए लिखा जा सकता है. इस यात्रा में हमें महसूस हुआ कि पार्ट I ‘विष्णुरत’ को एक पारंपरिक फिल्म की तरह नहीं बनाया जा सकता. मूल ग्रंथ की विराटता और कल्पनाशीलता एक बहुत बड़े सिनेमाई कैनवास की मांग करती है.

    उन्होंने आगे कहा- सदियों से हमारे चित्रों, मूर्तियों और धार्मिक प्रतीकों में ईश्वर ने अलग-अलग स्वरूप लिए हैं. हमारी कोशिश उन छवियों के प्रति सच्चे रहने की है, जिन्हें देखते, पहचानते और जिनकी आराधना करते हुए हम बड़े हुए हैं. हमारा उद्देश्य केवल नया दिखाने के लिए उन्हें नए रूप में गढ़ना नहीं है, बल्कि आज सिनेमा में उपलब्ध तकनीक और संभावनाओं की मदद से उन्हें यथार्थ, प्रामाणिकता और भव्यता के साथ जीवंत करना है. ‘विष्णुरत’ के जरिए हमारी कोशिश उसी परिचित और पवित्र दृश्य-स्मृति को जीवंत करने और दर्शकों को भागवत महापुराण का अनुभव अब तक के सबसे विशाल सिनेमाई कैनवास पर कराने की है.

    सागर पिक्चर्स एंटरटेनमेंट द्वारा निर्मित ‘श्रीमद्भागवतम् पार्ट I: विष्णुरात’ 2027 में दुनियाभर के सिनेमाघरों में सभी प्रीमियम फॉर्मेट्स में रिलीज होगी.

  • संत रविदास महाराज की 650वीं जयंती पर ब्यौहारी में निकली विशाल समरसता संकल्प यात्रा

    संत रविदास महाराज की 650वीं जयंती पर ब्यौहारी में निकली विशाल समरसता संकल्प यात्रा

    संत रविदास महाराज की 650वीं जयंती पर ब्यौहारी में निकली विशाल समरसता संकल्प यात्रा

    प्रमुख शरद कोल के नेतृत्व में हजारों लोगों ने लिया सामाजिक एकता एवं भाईचारे का संकल्प

    ब्यौहारी 
    संत शिरोमणि रविदास महाराज की 650वीं जयंती के अवसर पर  ब्यौहारी में विशाल समरसता संकल्प यात्रा का आयोजन किया गया। यात्रा का नेतृत्व ब्यौहारी विधायक श्री शरद कोल ने किया। यात्रा के माध्यम से सामाजिक एकता, भाईचारे एवं समरसता का संदेश जन-जन तक पहुंचाया गया।

    समरसता संकल्प अभियान के तहत यात्रा प्लाजा तिराहा, ब्यौहारी से प्रारंभ होकर विनायक पैलेस पहुंची, जहां यात्रा का समापन हुआ। यात्रा में बड़ी संख्या में समाज के लोगों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। 
    यह कलश यात्रा संत शिरोमणि रविदास महाराज की जन्मभूमि वाराणसी से प्रारंभ होकर ब्यौहारी उपनगर तक पहुंची। यात्रा के दौरान संत रविदास महाराज के विचारों, सामाजिक एकता, भाईचारे एवं समरसता का संदेश लोगों तक पहुंचाया गया।

    कार्यक्रम में सदस्य जिला योजना समिति श्रीमती अमिता चपरा, नगर पालिका अध्यक्ष कृष्ण गुप्ता राजन, राम लखन खटीक, रामदुलारे प्रजापति, एसपी साकेत, सुंदरलाल साकेत,  कृष्णा देवी चौधरी, दीना साकेत, सरपंच हीरालाल साकेत, देवीदीन प्रजापति एवं राधा साकेत सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। समारोह में उपस्थित जनसमुदाय ने संत रविदास के आदर्शों को आत्मसात करते हुए समाज में एकता, भाईचारे एवं सामाजिक समरसता को मजबूत बनाने का संकल्प लिया।

  • मुख्यमंत्री जन-विश्वास अभियान के तहत 11 सितम्बर को बदरा में आयोजित होगा कैम्प

    मुख्यमंत्री जन-विश्वास अभियान के तहत 11 सितम्बर को बदरा में आयोजित होगा कैम्प

    मुख्यमंत्री जन-विश्वास अभियान के तहत 11 सितम्बर को बदरा में आयोजित होगा कैम्प

    मैदानी भ्रमण कर शासकीय संस्थाओं का निरीक्षण करेंगे अधिकारी, लंबित प्रकरणों के निराकरण पर रहेगा विशेष जोर

    अनूपपुर 
     मुख्यमंत्री जन-विश्वास अभियान-2026 के अंतर्गत 11 सितम्बर 2026 को आईटीआई बदरा में कैम्प आयोजित किया जाएगा। अभियान के तहत आमजन की समस्याओं के निराकरण, शासकीय योजनाओं एवं सेवाओं के प्रभावी क्रियान्वयन तथा मैदानी स्तर पर शासकीय संस्थाओं की व्यवस्थाओं का जायजा लेने के लिए अधिकारियों द्वारा क्षेत्र का भ्रमण एवं विभिन्न संस्थाओं का निरीक्षण किया जाएगा।

    कलेक्टर श्री रत्नाकर झा ने अभियान से जुड़े अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि कैम्प के पूर्व संबंधित क्षेत्र में सीएम हेल्पलाइन, जनसुनवाई एवं लोक सेवा गारंटी अधिनियम के अंतर्गत लंबित प्रकरणों की विभागवार समीक्षा कर अधिकाधिक प्रकरणों का निराकरण सुनिश्चित किया जाए। भ्रमण तिथि तक शेष रहने वाले प्रकरणों में नियमानुसार आवश्यक कार्यवाही करते हुए यथासंभव मौके पर ही निराकरण सुनिश्चित कराया जाए।

    अभियान के तहत अधिकारी क्षेत्र की विभिन्न शासकीय संस्थाओं का निरीक्षण करेंगे। इनमें स्कूल, महाविद्यालय, पुलिस थाना, राशन दुकान, आंगनबाड़ी केन्द्र, स्वास्थ्य केन्द्र, छात्रावास, कृषि उपज मंडी तथा निर्माणाधीन वृहद परियोजनाओं सहित अन्य संस्थाएं शामिल रहेंगी। निरीक्षण के दौरान संस्थाओं में उपलब्ध व्यवस्थाओं, शासकीय योजनाओं के क्रियान्वयन तथा नागरिकों को प्रदान की जा रही सेवाओं की स्थिति का जायजा लिया जाएगा और आवश्यक सुधार के लिए संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया जाएगा।

    कैम्प दिवस के प्रथम चरण में अधिकारी पूर्व निर्धारित भ्रमण कार्यक्रम के अनुसार मैदानी क्षेत्रों का निरीक्षण करेंगे तथा दोपहर 12:30 बजे तक कैम्प स्थल पर पहुंचेंगे। कैम्प में विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं मैदानी अमला उपस्थित रहकर नागरिकों से प्राप्त आवेदनों एवं समस्याओं के निराकरण की कार्यवाही करेंगे। कैम्प की समाप्ति तक अधिकारियों की उपस्थिति सुनिश्चित की जाएगी।

    कैम्प में प्राप्त आवेदनों का संधारण एवं निराकरण जनसुनवाई में प्राप्त आवेदनों की प्रक्रिया के अनुरूप किया जाएगा। प्राप्त आवेदनों को जनआकांक्षा पोर्टल पर दर्ज कर संबंधित विभागों के माध्यम से आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित की जाएगी। साथ ही अधिकारियों द्वारा किए गए निरीक्षण की संक्षिप्त रिपोर्ट जिला प्रशासन को उपलब्ध कराई जाएगी।

    कैम्प के लिए अनुविभागीय अधिकारी राजस्व अनूपपुर सुश्री प्राची अग्रवाल को नोडल अधिकारी तथा मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत अनूपपुर श्री रवि गुप्ता को सहायक नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है।