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  • जनता दर्शन में सीएम योगी सख्त, भू-माफिया और लापरवाह पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई के निर्देश

    जनता दर्शन में सीएम योगी सख्त, भू-माफिया और लापरवाह पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई के निर्देश

    लखनऊ
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को ‘जनता दर्शन’ में प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए पीड़ितों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं। उन्होंने कहा कि सरकार हर पीड़ित की उचित समस्या का समाधान कराने के लिए प्रतिबद्ध है। सीएम ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि जनता की शिकायतों का निस्तारण संवेदनशीलता और शीघ्रता से किया जाए। उन्होंने हर पात्र व्यक्ति को जन कल्याणकारी योजनाओं का लाभ दिलाने, जरूरतमंदों के समुचित इलाज की व्यवस्था करने और जमीन कब्जाने वाले भू माफिया व दबंगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने के निर्देश दिए।

    हर पीड़ित के पास चलकर पहुंचे सीएम
    मुख्यमंत्री ‘जनता दर्शन’ में कुर्सियों पर बैठे हर पीड़ित के पास खुद चलकर गए। उनकी समस्याओं व शिकायतों को ध्यान से सुना। सबके प्रार्थना पत्रों को संबंधित अधिकारियों को संदर्भित करते हुए त्वरित और संतुष्टिपरक निस्तारण का निर्देश देने के साथ लोगों को भरोसा दिलाया कि हर पीड़ित की उचित समस्या का समाधान सुनिश्चित कराया जाएगा।

    पुलिस से जुड़ीं शिकायतों पर सख्त हुए सीएम
    सीएम योगी आदित्यनाथ के समक्ष कुछ पीड़ितों ने पुलिस से जुड़ी अलग-अलग शिकायतें बताईं। इस पर सीएम सख्त हो गए। उन्होंने कहा कि पुलिस आयुक्त, एडीजी, आईजी, डीआईजी, एसएसपी स्तर के अधिकारी ध्यान दें, किसी भी मामले में थाना, चौकी, बीट स्तर पर हीलाहवाली की शिकायत बर्दाश्त नहीं होगी। हर मामले में दोषियों पर नियमसंगत कार्रवाई सुनिश्चित करें। सीएम ने राजस्व और कानून व्यवस्था से जुड़े मामलों के शीघ्र निस्तारण के निर्देश दिए।

    बच्चों का हाल जाना और चॉकलेट दीं
    मुख्यमंत्री ने ‘जनता दर्शन’ में अभिभावकों के साथ आए नन्हे-मुन्नों का हालचाल जाना। उनकी पढ़ाई और उनकी रुचि के बारे में भी पूछा। सीएम ने बच्चों से कहा कि खूब मन लगाकर पढ़ो और अन्य गतिविधियों (खेल, संगीत, कला आदि) में भी हिस्सा लो। मुख्यमंत्री ने बच्चों को चॉकलेट देते हुए उन्हें उज्ज्वल भविष्य का आशीर्वाद दिया।

  • वाराणसी में जलभराव पर योगी सरकार की सख्ती, लापरवाही पर अधिशासी अभियंता निलंबित

    वाराणसी में जलभराव पर योगी सरकार की सख्ती, लापरवाही पर अधिशासी अभियंता निलंबित

    लखनऊ
     योगी सरकार ने जनसमस्याओं के प्रति लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर सख्त रुख अपनाया है। वाराणसी में जलभराव की समस्या को गंभीरता से लेते हुए उत्तर प्रदेश जल निगम (नगरीय) के निर्माण खंड (वि./यां.) में तैनात अधिशासी अभियंता पवन कुमार गुप्ता को निलंबित कर दिया गया है। उनके खिलाफ उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक (अनुशासन एवं अपील) नियमावली-1999 के नियम-7 के अंतर्गत अनुशासनिक जांच भी बैठाई गई है।

    नगर निकास विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार, मुख्य अभियंता (क्रय), उत्तर प्रदेश जल निगम (नगरीय), लखनऊ को इस प्रकरण में पदेन जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है। सरकार ने इस कार्रवाई के जरिये स्पष्ट किया है कि जनसुविधाओं से जुड़े मामलों में लापरवाही किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं होगी और जिम्मेदार अधिकारियों को जवाब देना होगा। प्रथम दृष्टया जांच में सामने आया कि चौकाघाट सीवेज पम्पिंग स्टेशन पर नदी के बैकफ्लो को रोकने के लिए आवश्यक गेट/बैरियर लगाने संबंधी आकलन और कार्ययोजना तैयार नहीं की गई। इसके अलावा उच्चाधिकारियों के निर्देशों के अनुपालन में भी अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई। जांच में यह भी सामने आया कि 3 और 4 सितंबर को चौकाघाट सीवेज पम्पिंग स्टेशन तथा गोईठहां एसटीपी पर स्थित पम्प बंद रखे गए।

    भारी बारिश के दौरान समय से पम्पों का संचालन नहीं होने से सीवर लाइनों पर अत्यधिक लोड पड़ा और शहर के निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति उत्पन्न हुई। इससे आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा और विभाग की छवि भी प्रभावित हुई। नगर विकास मंत्री ए.के. शर्मा ने 12 और 13 सितंबर को वाराणसी दौरे के दौरान जलभराव प्रभावित क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण किया था। उन्होंने अधिकारियों को जल निकासी की व्यवस्था युद्धस्तर पर सुनिश्चित करने और आमजन को किसी भी प्रकार की परेशानी न होने देने के निर्देश दिए थे।

    निरीक्षण के दौरान उन्होंने जलभराव की स्थिति पर नाराजगी जताते हुए लापरवाही करने वाले अधिकारियों को कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी थी। फिलहाल शासन ने अधिशासी अभियंता पवन कुमार गुप्ता को निलंबन अवधि में मुख्य अभियंता (कानपुर क्षेत्र), उत्तर प्रदेश जल निगम (नगरीय), कानपुर कार्यालय से संबद्ध किया है। उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा।

  • अधिवक्ताओं को सालाना पांच लाख तक कैशलेस मेडिकल इंश्योरेंस, चैंबर में फर्नीचर व उपकरण के लिए शासन करेगा सहयोगः सीएम

    अधिवक्ताओं को सालाना पांच लाख तक कैशलेस मेडिकल इंश्योरेंस, चैंबर में फर्नीचर व उपकरण के लिए शासन करेगा सहयोगः सीएम

    लखनऊ

    इलाहाबाद हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि नई पीढ़ी के अधिवक्ता संवैधानिक मूल्यों के प्रहरी बनें और न्याय को जमीनी धरातल तक पहुंचाने में अपनी अहम भूमिका निभाएं। फ्यूचर रेडी बार ही फ्यूचर रेडी जस्टिस सिस्टम की मजबूत नींव रख सकती है। मुख्यमंत्री ने प्रदेश के हाईकोर्ट और जिला अदालतों में सक्रिय सभी अधिवक्ताओं को सालाना पांच लाख रुपये तक की कैशलेस मेडिकल इंश्योरेंस सुविधा देने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि 10 हजार से अधिक अधिवक्ताओं के चैंबर में फर्नीचर व उपकरण के लिए शासन सहयोग करेगा और 400 राज्य विधि अधिकारियों को टैबलेट दिए जाएंगे। इसके साथ ही राज्य विधि अधिकारियों की फीस में भी 50 फीसदी से अधिक वृद्धि की गई है।
    उन्होंने कहा कि 2017 से पहले यूपी पुलिस में 45 से 50 प्रतिशत पद खाली थे। व्यवस्था में पारदर्शिता-जवाबदेही, कानून-व्यवस्था और न्यायिक इंफ्रास्ट्रक्चर भी चुनौती थे। वहीं अब पुलिस प्रशिक्षण क्षमता 3,000 से बढ़ाकर 60,000 कार्मिक प्रतिवर्ष की गई है। पहले 10 जनपदों में जिला अदालतें अस्थायी व किराए के भवनों में चलती थीं और अधिवक्ताओं के चैंबर जर्जर थे। अब 700 करोड़ रुपये की लागत से 10,000 से अधिक अधिवक्ताओं के लिए एडवोकेट चैंबर बनाए जा चुके हैं। उन्होंने अधिवक्ता कल्याण निधि की राशि 1.5 लाख से बढ़ाकर पांच लाख रुपये और अधिवक्ता के निधन पर परिजनों को आर्थिक सहायता की पात्रता आयु 60 से बढ़ाकर 70 वर्ष करने की घोषणा की है।

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आज का दिन अत्यंत महत्वपूर्ण है। हिंदी दिवस के साथ हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी का भी अवसर है। उन्होंने आस्था की इस भूमि से प्रदेशवासियों को हिंदी दिवस, हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी की हृदय से बधाई और शुभकामनाएं दीं।

    स्वाधीनता आंदोलन से राष्ट्र निर्माण तक अधिवक्ता समाज की अहम भूमिका

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अधिवक्ता समाज देश के प्रबुद्ध समाज का महत्वपूर्ण हिस्सा है। वह समाज की राय बनाने के साथ उसके विश्वास का प्रतीक भी माना जाता है। स्वाधीनता आंदोलन से लेकर संविधान निर्माण, स्वतंत्र भारत में शासन-प्रशासन के संचालन, लोकतंत्र के सभी स्तंभों को मजबूती देने और राष्ट्र निर्माण के वर्तमान अभियान तक अधिवक्ता समाज की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उन्होंने कहा कि भारत का स्वतंत्रता आंदोलन लंबे समय तक बिखरा रहा। दक्षिण अफ्रीका से अपनी वकालत छोड़कर महात्मा गांधी के आंदोलन की कमान संभालने के बाद इसे नई दिशा और गति मिली। प्रयागराज की धरती भी ऐसे अनेक अधिवक्ताओं की गवाह रही है, जिन्होंने इलाहाबाद हाई कोर्ट में प्रैक्टिस के साथ स्वाधीनता आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि पंडित मोतीलाल नेहरू और महामना पंडित मदन मोहन मालवीय जैसे अधिवक्ताओं ने लंबे समय तक देश और स्वतंत्रता आंदोलन को गति दी तथा क्रांतिकारियों के पक्ष में खड़े दिखाई दिए। सरदार वल्लभभाई पटेल और डॉ. भीमराव आंबेडकर ने भी देश की आजादी के आंदोलन को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

    डॉ. राजेंद्र प्रसाद के प्रयागराज से जुड़े जीवन का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि संगम तट पर स्थित प्रेसिडेंशियल सूट भारत की संविधान सभा के अध्यक्ष और देश के प्रथम राष्ट्रपति की याद दिलाता है। डॉ. राजेंद्र प्रसाद प्रत्येक कुंभ के दौरान प्रयागराज आते थे और माघ मेले में कल्पवास करते थे। उन्होंने कहा कि स्वतंत्र भारत में सोमनाथ मंदिर के पुनरुद्धार और प्राण प्रतिष्ठा के अवसर पर तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद स्वयं सोमनाथ पहुंचे थे। राष्ट्र के प्रति डॉ. राजेंद्र प्रसाद के योगदान और संविधान निर्माण से लेकर स्वतंत्र भारत के प्रथम राष्ट्रपति के रूप में उनकी भूमिका के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए प्रदेश सरकार ने प्रयागराज में डॉ. राजेंद्र प्रसाद नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी स्थापित करने का निर्णय लिया।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र के तीनों प्रमुख स्तंभ अपनी-अपनी व्यवस्था के तहत काम करते हैं, लेकिन उनके बीच बेहतर समन्वय और संवाद लोकतंत्र को अधिक परिपक्व और मजबूत बनाता है। न्यायपालिका भी विधि के शासन और सुशासन के लक्ष्यों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने कहा कि न्याय के रथ के बार और बेंच दो महत्वपूर्ण पहिए हैं। दोनों के बीच बेहतर संवाद और समन्वय हमेशा बना रहना चाहिए। 

    मुख्यमंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री और मुख्य न्यायाधीश की बैठकों में केवल न्यायपालिका से जुड़े विषयों पर चर्चा नहीं होती, बल्कि अधिवक्ताओं की समस्याओं को भी समान महत्व दिया जाता है। मुख्य न्यायाधीश, न्यायपालिका के संरक्षक के रूप में, अधिवक्ताओं से जुड़े मुद्दों को भी शासन के सामने प्रभावी तरीके से रखते हैं और उनके समाधान का रास्ता निकालने का प्रयास होता है।

    बार-बेंच के बीच सम्मान, संवाद और समन्वय जरूरी

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि न्याय प्रशासन के लिए बार और बेंच के बीच आपसी सम्मान, शिष्टाचार, संवाद, समन्वय और सहयोग निरंतर बना रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने भी 2017 से पहले की स्थिति की ओर ध्यान दिलाया। उस समय चुनौती केवल संसाधनों की नहीं, बल्कि व्यवस्था के दृष्टिकोण, प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही, कानून-व्यवस्था तथा न्यायिक इंफ्रास्ट्रक्चर की भी थी। न्याय व्यवस्था की पहली कड़ी पुलिस है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के 56 जनपदों में सबसे ऊंची इमारतों में पुलिस इंफ्रास्ट्रक्चर, पुलिस बैरक या प्रशिक्षण संस्थान शामिल हैं। उन्होंने लखनऊ में 2017 में किए गए पुलिस बैरक के अचानक निरीक्षण का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि वहां दो पुलिसकर्मी रह रहे थे और छत टूटी होने के साथ जाले लगे थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन पुलिसकर्मियों से दिन-रात, सर्दी-गर्मी और बरसात में रक्षक की भूमिका निभाने की अपेक्षा है, उन्हें बुनियादी सुविधाएं देना भी व्यवस्था की जिम्मेदारी है।

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रदेश की अधीनस्थ अदालतों की स्थिति भी बेहद खराब थी। कई अदालतें अस्थायी और किराए के भवनों में संचालित होती थीं। सरकार ने प्रभावी विटनेस प्रोटेक्शन की व्यवस्था मजबूत की है। पहले गवाहों के डर के कारण मुकर जाने से गंभीर आपराधिक मामलों में सजा दिलाना चुनौती बन जाता था। अपराधियों को जेल से अदालत लाने के लिए पुराने और असुरक्षित वाहनों की जगह व्यवस्था को सुरक्षित बनाया गया है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि कार्यपालिका और न्यायपालिका के बेहतर समन्वय से व्यवस्था में रिफॉर्म और ट्रांसफॉर्मेशन के परिणाम सामने आ रहे हैं। सुदृढ़ न्यायपालिका सुशासन की आधारशिला को मजबूत करती है और सुशासन चुनी हुई सरकार की पहली प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि पुलिस-प्रॉसिक्यूशन कोऑर्डिनेशन से कन्विक्शन रेट में सुधार हुआ है। अभियोजन प्रणाली को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से जोड़कर समय पर चार्जशीट दाखिल करने और वैज्ञानिक साक्ष्यों को न्यायालय के समक्ष मजबूती से रखने की व्यवस्था की गई है। जिला अदालतों और जेलों को हाईस्पीड इंटरनेट व वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से जोड़ा गया है। न्याय श्रुति प्रणाली के माध्यम से अदालतों में गवाही वर्चुअल दर्ज कराने की शुरुआत हुई है। अदालती दस्तावेजों की स्कैनिंग और डिजिटाइजेशन में भी तेजी लाई गई है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि 10 जनपदों में इंटीग्रेटेड कोर्ट कॉम्प्लेक्स का निर्माण तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने इसके लिए मुख्य न्यायमूर्ति अरुण भंसाली के प्रयासों की सराहना की। इन परिसरों में एक ही छत के नीचे सभी न्यायिक कार्यों के साथ न्यायिक अधिकारियों के आवास, अधिवक्ताओं के चेंबर, स्पोर्ट्स और इंडोर स्टेडियम तथा अधिवक्ताओं के लिए सस्ती कैंटीन जैसी सुविधाएं उपलब्ध होंगी।
    उन्होंने बताया कि त्वरित न्याय के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट की व्यवस्था को बढ़ाया गया है और प्रथम चरण में 900 जनपदीय स्तर के न्यायालयों के गठन की मंजूरी दी गई है।

    700 करोड़ से बने अधिवक्ता चेंबर 

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रयागराज में करीब 700 करोड़ रुपये की लागत से 10,000 से अधिक अधिवक्ताओं के लिए एडवोकेट चेंबर बनाए जा चुके हैं। इसके साथ मल्टीलेवल पार्किंग, डाइनिंग हॉल, कॉमन रूम और लाइब्रेरी जैसी सुविधाएं भी विकसित की गई हैं। जनपदीय स्तर पर भी एडवोकेट चेंबर के निर्माण के लिए धनराशि उपलब्ध कराई गई है। कौशांबी, लखनऊ, कासगंज, श्रावस्ती समेत करीब एक दर्जन जनपदों में अधिवक्ताओं के चेंबर बनाए जा चुके हैं या निर्माणाधीन हैं।

    न्याय व्यवस्था की सबसे बड़ी ताकत आम आदमी का विश्वास

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में तीन नए कानून लागू हुए हैं।  इनके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए अधिवक्ताओं को बड़े पैमाने पर प्रशिक्षण की चुनौती थी, लेकिन बार ने जिस तेजी से नए कानूनों को अपनाया, वह सराहनीय है। मुख्यमंत्री ने कहा कि न्याय व्यवस्था की सबसे बड़ी ताकत आम आदमी का विश्वास है। न्यायपालिका, कार्यपालिका और विधायिका तभी लोकतंत्र की कसौटी पर खरी उतरती हैं, जब नागरिकों का विश्वास कायम रहे। इसके लिए समय पर न्याय सबसे महत्वपूर्ण है। नागरिक को निष्पक्ष सुनवाई, भेदभाव रहित व्यवहार और कानून की नजर में समानता का भरोसा होना चाहिए।

    उन्होंने कहा कि संवेदनशील और सशक्त न्याय व्यवस्था के लिए पारदर्शिता, निर्णयों में सत्यनिष्ठा, संस्थाओं में जवाबदेही और नागरिकों का विश्वास जरूरी है। बदलते दौर में कानून के सामने साइबर क्राइम, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा प्राइवेसी, डिजिटल कॉमर्स, फिनटेक, इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी और क्लाइमेट लिटिगेशन जैसी नई चुनौतियां और संभावनाएं सामने हैं। अधिवक्ताओं को टेक्नोलॉजी, बदलती अर्थव्यवस्था और समाज में हो रहे परिवर्तनों की गहरी समझ विकसित करनी होगी। 

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट की समृद्ध परंपरा को आगे बढ़ाने की सबसे बड़ी जिम्मेदारी नई पीढ़ी के अधिवक्ताओं की है। युवा अधिवक्ता केवल सफल लीगल प्रोफेशनल बनने तक सीमित न रहें, बल्कि संवैधानिक मूल्यों के प्रहरी और समाज के प्रति संवेदनशील एवं उत्तरदायी नागरिक बनें। उन्होंने कहा कि अधिवक्ता की जिम्मेदारी केवल मुकदमे के परिणाम तक सीमित नहीं है। उसके प्रयास किसी व्यक्ति के विश्वास और जीवन की दिशा बदलने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

    चैंबर में सुविधाओं के लिए सरकार देगी पूरा सहयोग

    सीएम योगी ने इस दौरान अधिवक्ता भवन की चाबी भी सौंपी। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट परिसर में 10 हजार से अधिक अधिवक्ताओं के लिए मल्टीलेवल पार्किंग और चैंबर बनाए गए हैं। चैंबर में फर्नीचर और आवश्यक उपकरणों जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए न्यायपालिका या बार एसोसिएशन के माध्यम से मुख्य न्यायमूर्ति की ओर से जो प्रस्ताव आएगा, राज्य सरकार उसमें हर प्रकार का सहयोग करेगी।

    निर्दोष को छेड़ेंगे नहीं और अपराधी को छोड़ेंगे नहीं : केशव मौर्य

    उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि प्रयागराज संगम के साथ न्याय की भी भूमि है और यहां के अधिवक्ताओं ने लोकतंत्र की रक्षा में बड़ी भूमिका निभाई है। अधिवक्ताओं और सरकार के बीच संबंध लोगों को न्याय दिलाने की साझा जिम्मेदारी से जुड़े हैं। आज ईज ऑफ जस्टिस को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पुराने औपनिवेशिक कानून बदले गए हैं। आज अपराधी कानून से डरता है और आम आदमी का कानून पर भरोसा बढ़ा है। सरकार की नीति साफ है कि निर्दोष को छेड़ेंगे नहीं और अपराधी को छोड़ेंगे नहीं।
     
    समारोह में इलाहाबाद हाई कोर्ट के मुख्य न्यायमूर्ति अरुण भंसाली, वरिष्ठ न्यायमूर्ति अरिंदम सिन्हा, प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी, महाधिवक्ता अजय मिश्रा, इलाहाबाद हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राकेश पांडे, महासचिव अखिलेश कुमार शर्मा आदि उपस्थित रहे।

  • प्रधानमंत्री  मोदी द्वारा प्रज्ज्वलित विकास के दीपक का प्रकाश फैल रहा हैं देशभर में: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    प्रधानमंत्री मोदी द्वारा प्रज्ज्वलित विकास के दीपक का प्रकाश फैल रहा हैं देशभर में: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    भोपाल

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी द्वारा प्रज्ज्वलित विकास के दीपक का प्रकाश देशभर में फैल रहा है। यह  मोदी के सेवा और जिम्मेदारी के 25 वर्षों के उजास का प्रतीक है। प्रदेश में सेवा-संकल्प अभियान 17 सितम्बर से 17 अक्टूबर तक संचालित होगा। प्रदेशवासी प्रधानमंत्री  मोदी के जन्म दिवस 17 सितम्बर को बड़ी संख्या में दीप प्रज्जवलित कर उनके प्रति आभार प्रदर्शित करेंगे, हमारा प्रयास हो कि इस अवसर पर दीप प्रज्ज्वलन का विश्व रिकॉर्ड कायम हो। सेवा संकल्प अभियान का आयोजन ग्राम और नगर स्तर पर अधिक से अधिक जनसहभागिता सुनिश्चित करते हुए उत्साह पूर्वक किया जाये। सभी कार्यक्रमों की पूर्व तैयारी के लिए अधिकारियों-कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय कर प्रभावी मॉनीटरिंग हो। विभिन्न कार्यक्रमों की व्यवस्था के लिए अधिकारियों-कर्मचारियों के साथ ही जनप्रतिनिधियों से भी बेहतर समन्वय और सभी संबंधितों की शत्-प्रतिशत सहभागिता सुनिश्चित की जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सेवा के रंग-राष्ट्र के संग कार्यक्रम के अंतर्गत जबलपुर में ह्युमन रंगोली का राज्य स्तरीय आयोजन किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सेवा संकल्प अभियान की प्रदेश में जारी तैयारियों की समत्व भवन में समीक्षा के दौरान यह निर्देश दिए।

    बैठक में उप मुख्यमंत्री  राजेन्द्र शुक्ल, मंत्री  कैलाश विजयवर्गीय, मंत्री  प्रहलाद पटेल, मंत्री  राकेश सिंह, मंत्री सु निर्मला भूरिया, मंत्री  विश्वास सारंग,  नागर सिंह चौहान, मंत्री  राकेश शुक्ला, मंत्री  इन्दर सिंह परमार और राज्यमंत्री  नरेन्द्र शिवाजी पटेल वर्चुअली शामिल हुए। समत्व भवन (मुख्यमंत्री निवास) में हुई बैठक में मुख्य सचिव  अशोक बर्णवाल, अपर मुख्य सचिव  नीरज मंडलोई,  केसी गुप्ता,  संजय दुबे,  अनुपम राजन,  संजय शुक्ला,  शिवशेखर शुक्ला तथा अन्य अधिकारी उपस्थित थे। बैठक से समस्त संभागायुक्त तथा जिला कलेक्टर्स वर्चुअली जुड़े।

    अभियान के अंतर्गत संचालित गतिविधियों पर हुआ प्रेजेंटेशन

    सेवा-संकल्प अभियान की शुरुआत प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के जन्म दिवस 17 सितम्बर को आशीर्वाद का दीया कार्यक्रम अंतर्गत प्रदेश में दीप प्रज्ज्वलन के साथ होगी। उज्जैन के महाकाल महालोक सहित प्रदेश की सभी ग्राम पंचायतों और नगरीय निकायों के प्रत्येक वार्ड में शाम 7 बजे एकसाथ दीप प्रज्ज्वलित किए जाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव, उज्जैन से कार्यक्रम में सहभागिता करेंगे। प्रदेश के सभी लाभार्थी परिवारों और संस्थाओं को दीप प्रज्जवलन में शामिल किया जाए। इसी दिन सभी स्वास्थ्य केंद्रों और मेडिकल कॉलेजों में रक्तदान शिविर आयोजित होंगे। बैठक में रक्त संग्रह, परिवहन और संग्रहण के लिए आवश्यक व्यवस्था के भी निर्देश दिए हैं। कार्यक्रम के राज्य प्रभारी, नगरीय विकास एवं आवास मंत्री  कैलाश विजयवर्गीय होंगे।

    सेवा-संकल्प अभियान अंतर्गत मेरे सपनों का भारत कार्यक्रम में 19 से 26 सितम्बर तक जिलास्तर पर और 4 व 5 अक्टूबर को राज्यस्तर पर चित्रकला और भाषण प्रतियोगिताएं होंगी। इनमें सभी शासकीय और निजी स्कूल, कॉलेज भागीदारी करेंगे। राज्य स्तरीय प्रतियोगिता के विजेता विद्यार्थियों को पुरस्कार और मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा हस्ताक्षरित प्रमाण-पत्र वितरित किए जाएंगे। कार्यक्रम के राज्य प्रभारी, स्कूल शिक्षा मंत्री  राव उदय प्रताप सिंह होंगे।

    नमो सेवा-अनकही कहानियां गतिविधि 19 सितम्बर से 5 अक्टूबर तक होगी, जिसके अंतर्गत विभिन्न सार्वजनिक स्थलों पर नुक्कड़ नाटकों की प्रस्तुति होगी। कार्यक्रम के राज्य प्रभारी संस्कृति मंत्री  धर्मेन्द्र सिंह लोधी होंगे।

    आंगन मिलन सेवा का आयोजन 26 सितम्बर से 5 अक्टूबर तक सभी आंगनवाड़ियों में होगा। इसके अंतर्गत बच्चों और माताओं के लिए स्वल्पाहार, खेल सामग्री, पठन सामग्री आदि की व्यवस्था की जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अपील का वीडियो भी आंगनवाड़ी में महिलाओं और बच्चों को दिखाया जाएगा। आंगन मिलन सेवा में स्वास्थ्य, पोषण, टीकाकरण, एनीमिया और स्वच्छता की जानकारी दी जाएगी। कार्यक्रम की राज्य प्रभारी महिला एवं बाल विकास मंत्री सु निर्मला भूरिया होंगी।

    सेवा की कहानी कार्यक्रम 17 सितम्बर से 17 अक्टूबर तक होगा। इसके अंतर्गत केन्द्र/राज्य सरकार की योजनाओं से जिन हितग्राहियों का जीवन बदला है, आभार स्वरूप उनके संदेश जारी किए जाएंगे। कार्यक्रम की राज्य प्रभारी, नगरीय विकास एवं आवास राज्यमंत्री मती प्रतिमा बागरी होंगी।

    सेवा ज्योति कलश यात्रा 7 अक्टूबर को प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में निकाली जाएगी। इसके अंतर्गत जिला विकास पुस्तिकाओं का वितरण और जिले में हुई विकास गतिविधियों पर चर्चा होगी। कार्यक्रम के राज्य प्रभारी खेल एवं युवा कल्याण मंत्री  विश्वास सारंग होंगे।

    वड़नगर (गुजरात)-वाराणसी सेवा यात्रा की अवधि 17 सितम्बर से 7 अक्टूबर तक रहेगी। प्रदेश के सभी जिलों से यह यात्रा गुजरेगी। कार्यक्रम के प्रभारी लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री  नरेन्द्र शिवाजी पटेल होंगे।

    सेवा मेरा योगदान कार्यक्रम 2 अक्टूबर से 10 अक्टूबर तक होगा। इसके अंतर्गत समाज के सभी वर्गों और संस्थाओं की सहभागिता से विभिन्न सेवा गतिविधियां संचालित की जाएंगी। कार्यक्रम के राज्य प्रभारी लोक निर्माण मंत्री  राकेश सिंह होंगे।

    सेवा सेतु अभियान 2 से 10 अक्टूबर तक होगा। कार्यक्रम में विकास खण्ड स्तर पर और नगरीय निकायों में जोन वार शिविरों का आयोजन किया जाएगा। केन्द्र और राज्य सरकार की विभिन्न हितग्राही मूलक योजनाओं के हितलाभ पात्र हितग्राहियों को मौके पर ही प्रदान किए जाएंगे। इस कार्यक्रम से जनविश्वास अभियान को भी जोड़ा जाएगा। कार्यक्रम के राज्य प्रभारी उप मुख्यमंत्री, लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री  राजेन्द्र शुक्ल होंगे।

    सेवा के रंग-राष्ट्र के संग कार्यक्रम में भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर, झाबुआ और अलीराजपुर में 9 और 10 अक्टूबर को बड़े पैमाने पर जनसहभागिता से ह्युमन रंगोली का निर्माण किया जाएगा। कार्यक्रम के राज्य प्रभारी अनुसूचित जाति कल्याण मंत्री  नागर सिंह चौहान होंगे।

    सेवा फर्स्ट इनोवेशन चैलेंज कार्यक्रम 12 अक्टूबर को होगा। इसमें में इन्क्यूबेटर्स, स्टार्ट-अप लीडर्स और इनोवेटर्स सहभागिता करेंगे। कार्यक्रम के राज्य प्रभारी मंत्री  राकेश शुक्ला, नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री होंगे।

    सुशासन सेवा संवाद का कार्यक्रम राष्ट्रीय स्तर पर 17 अक्टूबर को नई दिल्ली में आयोजित किया जाएगा। जिसमें प्रदेश के पंच-सरपंच शामिल होंगे। कार्यक्रम के राज्य प्रभारी पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री  प्रहलाद पटेल होंगे।

    25 साल-25 कहानियां के अंतर्गत सभी जिलों में गणमान्य नागरिकों और प्रबुद्ध वर्ग के परिवारों को केन्द्र सरकार से प्राप्त होने वाली किट्स भेंट की जाएंगी। कार्यक्रम के राज्य प्रभारी उच्च शिक्षा मंत्री  इंदरसिंह परमार होंगे।

    विकसित भारत संकल्प यात्रा इन्फ्लूऐंसर एक्सचेंज कार्यक्रम के अंतर्गत प्रदेश में आए अन्य राज्यों के सोशल मीडिया इन्फ्लूऐंसर्स प्रदेश के जिलों का भ्रमण करेंगे। कार्यक्रम के राज्य प्रभारी उच्च शिक्षा मंत्री  इन्दर सिंह परमार होंगे।

    बैठक में सेवा सेतु मेगा शिविरों की विकासखण्डवार और जोन वार तैयारी कर अधिक से अधिक पात्र हितग्राहियों को विभिन्न शासकीय योजनाओं का लाभ दिलाने के निर्देश दिए गए। साथ ही अभियान के अंतर्गत आयोजित होने वाले कार्यक्रमों में शामिल होने प्रतिभागियों के आवागमन, भ्रमण, भोजन आदि की बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए जिलाधिकारियों को निर्देशित किया गया।

     

  • सीएम सहभागिता योजना के तहत 93,287 लाभार्थियों को 1,67,658 गोवंश किए गए सुपुर्द

    सीएम सहभागिता योजना के तहत 93,287 लाभार्थियों को 1,67,658 गोवंश किए गए सुपुर्द

    लखनऊ
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार द्वारा निराश्रित एवं बेसहारा गोवंश के संरक्षण के साथ ही उनके बेहतर पालन-पोषण के लिए लगातार प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं। इसी क्रम में सीएम सहभागिता योजना के माध्यम से निराश्रित गोवंश को इच्छुक एवं पात्र लाभार्थियों को सुपुर्द कर उनका संरक्षण और देखभाल सुनिश्चित किया जा रहा है।
    अपर मुख्य सचिव श्री मुकेश मेश्राम ने बताया कि इस योजना के अंतर्गत अब तक 93,287 लाभार्थियों को 1,67,658 गोवंश सुपुर्द किए जा चुके हैं। इसके माध्यम से बड़ी संख्या में निराश्रित गोवंश को सुरक्षित एवं बेहतर आश्रय उपलब्ध हुआ है। साथ ही ग्रामीण परिवारों को गोवंश के पालन-पोषण से जोड़कर उनकी आजीविका को मजबूत करने का भी प्रयास किया जा रहा है।

    उन्होंने बताया कि सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर निराश्रित गोवंश की समस्या को कम करने के साथ-साथ गोवंश के संरक्षण एवं संवर्धन को जनसहभागिता से प्रभावी बनाया जा रहा है। सीएम सहभागिता योजना इसी दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। इस योजना के तहत लाभार्थियों द्वारा सुपुर्द किए गए गोवंश की देखभाल, चारा-पानी एवं संरक्षण की जिम्मेदारी ली जाती है। इससे गोवंश को सुरक्षित वातावरण मिलता है और पशुपालन को बढ़ावा देकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान करने में मदद मिलती है।
    अपर मुख्य सचिव ने बताया कि प्रदेश में सार्वजनिक एवं गोचर भूमि को अवैध कब्जों से मुक्त कराने के लिए लगातार अभियान चलाया जा रहा है। प्रदेश के 62 जनपदों में कुल 39,721.541 हेक्टेयर गोचर भूमि को अवैध कब्जे से मुक्त कराया गया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार की प्राथमिकता गोचर भूमि को सुरक्षित रखते हुए उसका उपयोग गोवंश के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए सुनिश्चित करना है। इससे निराश्रित गोवंश के संरक्षण की व्यवस्था को और मजबूती मिलने के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन को भी बढ़ावा मिलेगा।

  • यूपी के वकीलों को बड़ा तोहफा, सालाना 5 लाख तक कैशलेस इलाज का ऐलान

    यूपी के वकीलों को बड़ा तोहफा, सालाना 5 लाख तक कैशलेस इलाज का ऐलान

    लखनऊ

    यूपी के वकीलों को 5 लाख तक का कैशलेस इलाज की को लेकर सीएम योगी ने ऐलान किया है।

    यूपी के वकीलों के लिए अच्छी खबर है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के अधिवक्ताओं के लिए पांच लाख रुपये सालाना कैशलेस चिकित्सा सुविधा की घोषणा की है। इसका लाभ हाईकोर्ट और जिला अदालतों में सक्रिय रूप से प्रैक्टिस करने वाले वकीलों को मिलेगा। उन्होंने हाईकोर्ट में 10 हजार से अधिक अधिवक्ताओं के लिए बने चैंबर में मेंटेनेंस के लिए फर्नीचर और उपकरण उपलब्ध कराने के लिए मुख्य न्यायमूर्ति के माध्यम से आने वाले प्रस्ताव पर सरकार की ओर से पूरा सहयोग देने का भरोसा दिया। साथ ही 400 राज्य विधि अधिकारियों को आधुनिक तकनीक से जोड़ने के लिए टैबलेट देने की घोषणा की।

    हाईकोर्ट बार एसोसिएशन, इलाहाबाद की ओर से आयोजित सम्मान समारोह में मुख्यमंत्री ने कहा कि करीब 700 करोड़ रुपये की लागत से 10 हजार से अधिक अधिवक्ताओं के लिए चैंबर, मल्टीलेवल पार्किंग, डाइनिंग हॉल, कॉमन रूम और लाइब्रेरी का निर्माण कराया गया है। अधिवक्ता कल्याण निधि की राशि डेढ़ लाख से बढ़ाकर पांच लाख रुपये की गई है। अधिवक्ता के निधन पर परिजनों को मिलने वाली आर्थिक सहायता की आयु सीमा भी 60 से बढ़ाकर 70 वर्ष की गई है। इसके अलावा कौशांबी, लखनऊ, कासगंज और श्रावस्ती समेत करीब एक दर्जन जिलों में अधिवक्ता चैंबर के निर्माण के लिए अलग से धनराशि उपलब्ध कराई गई है।

    अधिवक्ताओं की समस्याओं पर भी होती है सीएम और चीफ जस्टिस की बैठक में चर्चा

    मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि अधिवक्ता समाज देश के प्रबुद्ध वर्ग का महत्वपूर्ण हिस्सा है। स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर संविधान निर्माण, लोकतंत्र के स्तंभों को मजबूत करने और राष्ट्र निर्माण तक अधिवक्ताओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। बार और बेंच न्याय रूपी रथ के दो महत्वपूर्ण स्तंभ हैं। दोनों के बीच आपसी सम्मान, शिष्टाचार, संवाद, समन्वय और सहयोग निरंतर बना रहना चाहिए। मुख्यमंत्री और मुख्य न्यायमूर्ति की बैठक में केवल न्यायपालिका से जुड़े विषयों पर ही चर्चा नहीं होती, बल्कि अधिवक्ताओं की समस्याएं भी रखी जाती हैं और उनके समाधान का रास्ता निकाला जाता है।

    इंटीग्रेटेड कोर्ट कॉम्प्लेक्स में चैंबर और सस्ती कैंटीन भी

    मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि प्रदेश में न्यायिक आधारभूत ढांचे को बेहतर किया जा रहा है। जिन 10 जिलों में जिला अदालतें किराये के भवनों में संचालित हो रही थीं, वहां इंटीग्रेटेड कोर्ट कॉम्प्लेक्स के निर्माण का काम तेजी से आगे बढ़ा है। इनमें न्यायिक अधिकारियों के आवास के साथ अधिवक्ताओं के चैंबर, खेल सुविधाएं, इंडोर स्टेडियम और अधिवक्ताओं के लिए सस्ती कैंटीन की व्यवस्था भी की जा रही है। त्वरित निस्तारण के लिए पहले चरण में जिला स्तर पर 900 न्यायालयों के गठन को मंजूरी दी गई है।

    विधि अधिकारियों की फीस 50 फीसदी से अधिक बढ़ी

    मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि जिला न्यायालय, हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में राज्य का प्रतिनिधित्व करने वाले विधि अधिकारियों की फीस में 50 फीसदी से अधिक की वृद्धि की गई है। अब 400 राज्य विधि अधिकारियों को टैबलेट भी उपलब्ध कराए जाएंगे। इससे उन्हें शासन से जुड़े न्यायालय में आने वाले मामलों की जानकारी आधुनिक तकनीक के माध्यम से मिल सकेगी।

    फ्यूचर रेडी बार से बनेगा फ्यूचर रेडी जस्टिस सिस्टम

    मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि तीन नए कानूनों को तेजी से अपनाने में अधिवक्ताओं ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। साइबर क्राइम, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा प्राइवेसी, डिजिटल कॉमर्स, फिनटेक, इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी और क्लाइमेट लिटिगेशन जैसे नए क्षेत्रों के लिए अधिवक्ताओं को खुद को अपडेट करना होगा। तकनीक, अर्थव्यवस्था और समाज में हो रहे बदलावों की गहरी समझ आज की आवश्यकता है। फ्यूचर रेडी बार ही फ्यूचर रेडी जस्टिस सिस्टम की मजबूत नींव रखेगा।

    समय पर न्याय से कायम रहेगा आम आदमी का विश्वास

    मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि न्याय व्यवस्था की सबसे बड़ी ताकत आम आदमी का विश्वास है और इसकी पहली शर्त समय पर न्याय है। नागरिक को भरोसा होना चाहिए कि उसकी निष्पक्ष सुनवाई होगी, उसके साथ किसी तरह का भेदभाव नहीं होगा और कानून की नजर में सभी समान हैं। पारदर्शिता, निर्णयों में ईमानदारी, संस्थाओं की जवाबदेही और नागरिकों का विश्वास सशक्त न्याय व्यवस्था के लिए जरूरी है। मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि जिला अदालतों और जेलों को हाईस्पीड इंटरनेट और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से लैस किया गया है। न्याय श्रुति प्रणाली से अदालतों में वर्चुअल गवाही की व्यवस्था शुरू की गई है। अदालती दस्तावेजों की स्कैनिंग और डिजिटाइजेशन को भी गति दी गई है। पुलिस और अभियोजन के बेहतर समन्वय के साथ अभियोजन प्रणाली को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से जोड़ा गया है, जिससे चार्जशीट और वैज्ञानिक साक्ष्य समय पर न्यायालय के सामने रखे जा सकें।

    अधिवक्ताओं को पार्किंग, भवन और अन्य सुविधाएं मिलना खुशी की बात: मुख्य न्यायाधीश

    इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली ने कहा कि बार एसोसिएशन हाईकोर्ट का अभिन्न अंग है। बार के अनेक अधिवक्ताओं ने लोकतंत्र को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। अधिवक्ताओं को पार्किंग, भवन और अन्य सुविधाएं मिलना खुशी की बात है। इसके लिए उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का विशेष रूप से आभार जताया। उन्होंने कहा कि युवा अधिवक्ताओं की जिम्मेदारी है कि वे बार और हाईकोर्ट को और आगे ले जाएं तथा लोगों की सेवा करें। न्यायपालिका और सरकार के बीच बेहतर समन्वय के लिए भी उन्होंने धन्यवाद दिया।

     

  • पाकिस्तान पर ICC का डबल अटैक, WTC में कटे 11 अंक और लगा भारी जुर्माना; श्रीलंका सीरीज से पहले बड़ा झटका

    पाकिस्तान पर ICC का डबल अटैक, WTC में कटे 11 अंक और लगा भारी जुर्माना; श्रीलंका सीरीज से पहले बड़ा झटका

    करांची 

    इंग्लैंड के खिलाफ तीन मैचों की टेस्ट सीरीज में पाकिस्तान को 0-3 से शर्मनाक हार का सामना करना पड़ा था. बर्मिंघम के एजबेस्ट मैदान पर खेले गए सीरीज के आखिरी टेस्ट मैच में पाकिस्तानी टीम ने कुछ संघर्ष किया, लेकिन वो जीत दिलाने के लिए काफी नहीं था. इंग्लैंड ने वो मुकाबला 8 विकेट से जीतकर पाकिस्तान का सीरीज में 0-3 से सफाया किया था। 

    अब पाकिस्तानी टीम पर इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (ICC) ने तगड़ा एक्शन लिया है. एजबेस्टन टेस्ट में धीमा ओवर रेट पाकिस्तान को भारी पड़ गया. आईसीसी ने पाकिस्तानी टीम पर मैच फीस का 50 फीसदी जुर्माना लगाया है, साथ ही वर्ल्ड टेस्ट चैम्पियनशिप (WTC) 2025-27 में उसके खाते से 11 अंक भी काट दिए हैं। 

    समय की तय छूट को शामिल करने के बाद भी पाकिस्तान की टीम निर्धारित लक्ष्य से 11 ओवर पीछे रही. इसी वजह से टीम पर यह कार्रवाई हुई. आईसीसी एलीट पैनल के मैच रेफरी रंजन मदुगले ने मामले में सजा सुनाई. मैदानी अंपायर्स पॉल राइफल और क्रिस गैफनी, थर्ड अंपायर अल्लाहुद्दीन पालेकर और चौथे अंपायर रसेल वॉरेन ने धीमे ओवर रेट का आरोप लगाया था। 

    आईसीसी के नियम के अनुसार, निर्धारित समय में कम कराए गए प्रत्येक ओवर पर खिलाड़ियों की मैच फीस का 5 फीसदी जुर्माना लगाया जाता है. हालांकि, इसकी अधिकतम सीमा 50 फीसदी है. पाकिस्तान के 11 ओवर कम रहने के कारण उस पर अधिकतम 50 फीसदी जुर्माना लगाया गया। 

    आर्थिक जुर्माने से ज्यादा बड़ा झटका पाकिस्तान को डब्ल्यूटीसी में लगा है. नियमों के मुताबिक, प्रत्येक कम ओवर के लिए एक डब्ल्यूटीसी अंक काटा जाता है. लिहाजा 11 ओवर कम रहने के कारण पाकिस्तान के खाते से सीधे 11 अंक घटा दिए गए. पाकिस्तान WTC तालिका में पहले ही सबसे नीचे था. इस कटौती के बाद उसकी हालत और खराब हो गई है. उसका अंक प्रतिशत घटकर 4.63 रह गया है. इंग्लैंड के खिलाफ 0-3 की हार के बाद टीम के लिए यह दोहरी मुश्किल है। 

  • प्रदेश के अधिवक्ताओं को हर साल पांच लाख तक कैशलेस उपचार की सुविधा: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

    प्रदेश के अधिवक्ताओं को हर साल पांच लाख तक कैशलेस उपचार की सुविधा: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

    प्रयागराज
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के अधिवक्ताओं के लिए पांच लाख रुपये सालाना कैशलेस चिकित्सा सुविधा की घोषणा की है। इसका लाभ हाईकोर्ट और जिला अदालतों में सक्रिय रूप से प्रैक्टिस करने वाले अधिवक्ताओं को मिलेगा। उन्होंने हाईकोर्ट में 10 हजार से अधिक अधिवक्ताओं के लिए बने चैंबर में फर्नीचर और उपकरण उपलब्ध कराने के लिए मुख्य न्यायमूर्ति के माध्यम से आने वाले प्रस्ताव पर सरकार की ओर से पूरा सहयोग देने का भरोसा दिया। साथ ही 400 राज्य विधि अधिकारियों को आधुनिक तकनीक से जोड़ने के लिए टैबलेट देने की घोषणा की।
     
    हाईकोर्ट बार एसोसिएशन, इलाहाबाद की ओर से आयोजित सम्मान समारोह में मुख्यमंत्री ने कहा कि करीब 700 करोड़ रुपये की लागत से 10 हजार से अधिक अधिवक्ताओं के लिए चैंबर, मल्टीलेवल पार्किंग, डाइनिंग हॉल, कॉमन रूम और लाइब्रेरी का निर्माण कराया गया है। अधिवक्ता कल्याण निधि की राशि डेढ़ लाख से बढ़ाकर पांच लाख रुपये की गई है। अधिवक्ता के निधन पर परिजनों को मिलने वाली आर्थिक सहायता की आयु सीमा भी 60 से बढ़ाकर 70 वर्ष की गई है। इसके अलावा कौशांबी, लखनऊ, कासगंज और श्रावस्ती समेत करीब एक दर्जन जिलों में अधिवक्ता चैंबर के निर्माण के लिए अलग से धनराशि उपलब्ध कराई गई है।
     
    अधिवक्ताओं की समस्याओं पर भी होती है सीएम और चीफ जस्टिस की बैठक में चर्चा
    मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि अधिवक्ता समाज देश के प्रबुद्ध वर्ग का महत्वपूर्ण हिस्सा है। स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर संविधान निर्माण, लोकतंत्र के स्तंभों को मजबूत करने और राष्ट्र निर्माण तक अधिवक्ताओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। बार और बेंच न्याय रूपी रथ के दो महत्वपूर्ण स्तंभ हैं। दोनों के बीच आपसी सम्मान, शिष्टाचार, संवाद, समन्वय और सहयोग निरंतर बना रहना चाहिए। मुख्यमंत्री और मुख्य न्यायमूर्ति की बैठक में केवल न्यायपालिका से जुड़े विषयों पर ही चर्चा नहीं होती, बल्कि अधिवक्ताओं की समस्याएं भी रखी जाती हैं और उनके समाधान का रास्ता निकाला जाता है।
     
    इंटीग्रेटेड कोर्ट कॉम्प्लेक्स में चैंबर और सस्ती कैंटीन भी
    मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि प्रदेश में न्यायिक आधारभूत ढांचे को बेहतर किया जा रहा है। जिन 10 जिलों में जिला अदालतें किराये के भवनों में संचालित हो रही थीं, वहां इंटीग्रेटेड कोर्ट कॉम्प्लेक्स के निर्माण का काम तेजी से आगे बढ़ा है। इनमें न्यायिक अधिकारियों के आवास के साथ अधिवक्ताओं के चैंबर, खेल सुविधाएं, इंडोर स्टेडियम और अधिवक्ताओं के लिए सस्ती कैंटीन की व्यवस्था भी की जा रही है। त्वरित निस्तारण के लिए पहले चरण में जिला स्तर पर 900 न्यायालयों के गठन को मंजूरी दी गई है।
     
    विधि अधिकारियों की फीस 50 फीसदी से अधिक बढ़ी
    मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि जिला न्यायालय, हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में राज्य का प्रतिनिधित्व करने वाले विधि अधिकारियों की फीस में 50 फीसदी से अधिक की वृद्धि की गई है। अब 400 राज्य विधि अधिकारियों को टैबलेट भी उपलब्ध कराए जाएंगे। इससे उन्हें शासन से जुड़े न्यायालय में आने वाले मामलों की जानकारी आधुनिक तकनीक के माध्यम से मिल सकेगी।
     
    फ्यूचर रेडी बार से बनेगा फ्यूचर रेडी जस्टिस सिस्टम
    मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि तीन नए कानूनों को तेजी से अपनाने में अधिवक्ताओं ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। साइबर क्राइम, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा प्राइवेसी, डिजिटल कॉमर्स, फिनटेक, इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी और क्लाइमेट लिटिगेशन जैसे नए क्षेत्रों के लिए अधिवक्ताओं को खुद को अपडेट करना होगा। तकनीक, अर्थव्यवस्था और समाज में हो रहे बदलावों की गहरी समझ आज की आवश्यकता है। फ्यूचर रेडी बार ही फ्यूचर रेडी जस्टिस सिस्टम की मजबूत नींव रखेगा।
     
    समय पर न्याय से कायम रहेगा आम आदमी का विश्वास
    मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि न्याय व्यवस्था की सबसे बड़ी ताकत आम आदमी का विश्वास है और इसकी पहली शर्त समय पर न्याय है। नागरिक को भरोसा होना चाहिए कि उसकी निष्पक्ष सुनवाई होगी, उसके साथ किसी तरह का भेदभाव नहीं होगा और कानून की नजर में सभी समान हैं। पारदर्शिता, निर्णयों में ईमानदारी, संस्थाओं की जवाबदेही और नागरिकों का विश्वास सशक्त न्याय व्यवस्था के लिए जरूरी है।
     
    मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि जिला अदालतों और जेलों को हाईस्पीड इंटरनेट और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से लैस किया गया है। न्याय श्रुति प्रणाली से अदालतों में वर्चुअल गवाही की व्यवस्था शुरू की गई है। अदालती दस्तावेजों की स्कैनिंग और डिजिटाइजेशन को भी गति दी गई है। पुलिस और अभियोजन के बेहतर समन्वय के साथ अभियोजन प्रणाली को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से जोड़ा गया है, जिससे चार्जशीट और वैज्ञानिक साक्ष्य समय पर न्यायालय के सामने रखे जा सकें।

    अधिवक्ताओं ने लोकतंत्र को मजबूत करने में निभाई महत्वपूर्ण भूमिका: मुख्य न्यायाधीश
    इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली ने कहा कि बार एसोसिएशन हाईकोर्ट का अभिन्न अंग है। बार के अनेक अधिवक्ताओं ने लोकतंत्र को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। अधिवक्ताओं को पार्किंग, भवन और अन्य सुविधाएं मिलना खुशी की बात है। इसके लिए उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का विशेष रूप से आभार जताया। उन्होंने कहा कि युवा अधिवक्ताओं की जिम्मेदारी है कि वे बार और हाईकोर्ट को और आगे ले जाएं तथा लोगों की सेवा करें। न्यायपालिका और सरकार के बीच बेहतर समन्वय के लिए भी उन्होंने धन्यवाद दिया।
     

  • UCC पर अमित शाह के ऐलान से NDA में हलचल, गृह मंत्री से मिलेंगे संजय झा; JDU रखेगी अपना पक्ष

    UCC पर अमित शाह के ऐलान से NDA में हलचल, गृह मंत्री से मिलेंगे संजय झा; JDU रखेगी अपना पक्ष

    नईदिल्ली 

    समान नागरिक संहिता यानी UCC को लेकर बिहार में एनडीए के भीतर शुरू हुई बयानबाजी के बीच जेडीयू ने बड़ा बयान दिया है.जेडीयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन ने बताया कि पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा UCC के मसले पर जल्द ही केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात करेंगे. बता दें कि अमित शाह के 21 राज्यों में 2029 से पहले UCC लागू करने वाले बयान के बाद बिहार में दो अलग-अलग सुर सुनाई दिए. जदयू विधायक श्याम रजक ने कहा बिहार में UCC किसी कीमत पर लागू नहीं होगा. वहीं सरकार में मंत्री संतोष सुमन ने कहा अमित शाह ने कहा है तो अच्छी बात होगी, लागू हो सकता है. बताया जा रहा है कि अब इस खींचतान को खत्म करने के लिए संजय झा मोर्चा संभालेंगे। 

    UCC पर अमित शाह के ऐलान के बाद JDU की पहल
    बता दें कि हाल में ही केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हाल ही में कहा था कि 2029 से पहले भाजपा और भाजपा नेतृत्व वाले एनडीए शासित सभी 21 राज्यों में समान नागरिक संहिता लागू की जाएगी. इस बयान के बाद बिहार में UCC को लेकर राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है. वहीं जेडीयू के विधायक श्याम रजक ने साफ-साफ कह दिया था कि जदयू बिहार में यूसीसी किसी भी कीमत पर लागू नहीं होने देगी। 

    लेकिन, अब जब जेडीयू के शीर्ष नेतृत्व से कहा गया है कि अमित शाह से मुलाकात करके पार्टी अपना पक्ष रखेगी तो इसको डैमेज कंट्रोल के तौर पर देखा जा रहा है. दरअसल, जदयू का मानना है कि UCC जैसे संवेदनशील मुद्दे पर बिना सभी समाजों से बातचीत के फैसला नहीं होना चाहिए. जेडीयू ने स्पष्ट किया है कि पार्टी इस मुद्दे पर केंद्रीय नेतृत्व से बातचीत करेगी. जेडीयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन ने कहा कि पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा जल्द ही अमित शाह से UCC के मसले पर बातचीत करेंगे। 

    संजय झा अमित शाह के सामने रखेंगे पार्टी का पक्ष
    राजीव रंजन के बयान से साफ है कि जेडीयू इस मुद्दे को सार्वजनिक बयानबाजी तक सीमित रखने के बजाय गठबंधन के शीर्ष नेतृत्व के साथ बातचीत के जरिए आगे बढ़ाना चाहती है. संजय झा की अमित शाह से मुलाकात में बिहार की स्थिति और पार्टी के रुख पर चर्चा होने की संभावना है. बता दें कि जेडीयू पहले ही संकेत दे चुकी है कि संसद में किसी विधेयक का समर्थन करना और उसे अपने राज्य में लागू करने का फैसला करना दो अलग-अलग विषय हैं। 

    बिहार में UCC को लेकर JDU का रुख अलग
    जेडीयू के वरिष्ठ नेता श्याम रजक ने हाल ही में साफ कहा था कि बिहार में UCC लागू नहीं होगा. उनका कहना था कि पार्टी ने संसद में कानून का समर्थन जरूर किया था, लेकिन उसी समय यह भी स्पष्ट कर दिया था कि बिहार में इसे लागू नहीं किया जाएगा. ऐसे में संजय झा की अमित शाह से प्रस्तावित मुलाकात को बिहार के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है. यह मुलाकात गठबंधन के भीतर इस संवेदनशील मुद्दे पर समन्वय की कोशिश भी हो सकती है। 

  • अगस्त में थोक महंगाई ने बढ़ाई चिंता, तेल-बिजली से लेकर खाने-पीने की चीजें हुईं महंगी

    अगस्त में थोक महंगाई ने बढ़ाई चिंता, तेल-बिजली से लेकर खाने-पीने की चीजें हुईं महंगी

    नई दिल्ली

    भारत में थोक महंगाई (WPI) अगस्त में बढ़कर 9.92 फीसदी पर पहुंच गई है. जुलाई में यह आंकड़ा 9.78 फीसदी था. यानी एक महीने में थोक महंगाई में 0.14 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. सरकार की ओर से सोमवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक, खाने-पीने की चीजों, तैयार सामान और ईंधन-बिजली से जुड़ी कीमतों में तेजी ने महंगाई को ऊपर धकेला है. खास बात यह है कि ईंधन और बिजली की महंगाई बाकी प्रमुख श्रेणियों के मुकाबले काफी ज्यादा रही। 

    खाने-पीने की चीजों की कीमतों में भी अगस्त के दौरान दबाव बढ़ा. फूड इंडेक्स में थोक महंगाई अगस्त में 7.05 फीसदी रही, जबकि जुलाई में यह 6.65 फीसदी थी. यानी एक महीने में खाद्य महंगाई में 0.40 फीसदी की बढ़ोतरी हुई. महंगाई बढ़ने में मिनरल ऑयल, खाद्य वस्तुएं और खाद्य उत्पादों का निर्माण जैसी श्रेणियों की अहम भूमिका रही. पश्चिम एशिया में तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जुड़े घटनाक्रमों के बीच वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल और उर्वरक की लागत बढ़ने का असर भी कीमतों पर पड़ा है। 

    मैन्युफैक्चर्ड आइटम्स में तेजी

    अगस्त में मैन्युफैक्चर्ड आइटम्स की थोक महंगाई 8.37 फीसदी रही. जुलाई में यह 8.29 फीसदी थी. यानी इस श्रेणी में भी महंगाई बढ़ी है. सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, बेसिक मेटल्स का निर्माण, नॉन-फूड आर्टिकल्स और केमिकल व केमिकल प्रोडक्ट्स का निर्माण अगस्त में थोक कीमतों पर दबाव बढ़ाने वाले प्रमुख क्षेत्रों में शामिल रहे। 

    फ्यूल-पावर में ज्यादा महंगाई
    थोक महंगाई के आंकड़े में सबसे ज्यादा दबाव फ्यूल और पावर से आया. इस श्रेणी में अगस्त की महंगाई दर 22.93 फीसदी रही. यह दर फूड और मैन्युफैक्चर्ड आइटम्स की तुलना में काफी ज्यादा है. मिनरल ऑयल की कीमतों में बदलाव का भी इस श्रेणी पर असर पड़ा है. ईंधन की लागत बढ़ने का असर आगे ट्रांसपोर्ट और उत्पादन लागत पर भी पड़ सकता है, जिसका प्रभाव दूसरी वस्तुओं की कीमतों पर दिखाई दे सकता है। 

    महंगाई बढ़ने की बड़ी वजहें ये रहीं
    वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के मुताबिक, अगस्त में थोक कीमतों पर दबाव बढ़ाने वाली प्रमुख चीजों में मिनरल ऑयल, फूड आर्टिकल्स, फूड प्रोडक्ट्स का निर्माण, बेसिक मेटल्स का निर्माण, नॉन-फूड आर्टिकल्स और केमिकल व केमिकल प्रोडक्ट्स का निर्माण शामिल रहे. यानी महंगाई का दबाव सिर्फ एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहा. खाने-पीने की चीजों से लेकर ईंधन और औद्योगिक सामान तक कई हिस्सों में कीमतें बढ़ीं। 

    RBI के लिए भी अहम है आंकड़ा
    थोक महंगाई का यह आंकड़ा ऐसे समय आया है जब रिजर्व बैंक महंगाई और ब्याज दरों के रुख पर नजर रख रहा है. पिछले महीने मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने बेंचमार्क पॉलिसी रेट को 5.25 फीसदी पर बरकरार रखा था. RBI ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए खुदरा महंगाई का अनुमान 5 फीसदी रखा है. केंद्रीय बैंक ने कमजोर और असमान दक्षिण-पश्चिम मॉनसून और अल नीनो की स्थिति को महंगाई के लिए जोखिमों में शामिल किया था। 

    आम आदमी पर क्या असर पड़ेगा?
    थोक महंगाई सीधे तौर पर आपकी खरीदारी की कीमत तय नहीं करती, लेकिन इसमें लगातार बढ़ोतरी का असर आगे चलकर कारोबार की लागत और कुछ वस्तुओं की खुदरा कीमतों पर पड़ सकता है. फिलहाल अगस्त के आंकड़ों में फूड, फ्यूल और पावर तथा मैन्युफैक्चर्ड आइटम्स तीनों में दबाव दिखाई दे रहा है. इसलिए आने वाले महीनों में इन तीनों क्षेत्रों की कीमतों का रुख अहम रहेगा. अगर ईंधन और कच्चे माल की लागत ऊंची बनी रहती है, तो महंगाई पर दबाव भी आगे बना रह सकता है।