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  • उज्जैन में शिव-विवाह उत्सव की धूम, बाबा महाकाल नौ स्वरूपों में करेंगे दर्शन, तैयारियां जोरों पर

    उज्जैन में शिव-विवाह उत्सव की धूम, बाबा महाकाल नौ स्वरूपों में करेंगे दर्शन, तैयारियां जोरों पर

    उज्जैन 

    महाशिवरात्रि में कुछ ही दिन का समय शेष बचा है। लेकिन शिव और पार्वती के विवाह के इस त्योहार को लेकर उज्जैन के बाबा महाकाल मंदिर में तैयारियां अभी से शुरू हो चुकी हैं। मंदिर की दीवारों से लेकर शिखर पर रंग-रोगन किया जा रहा है। इसी के साथ 6 फरवरी से मंदिर में 9 दिनों तक चलने वाले उत्सव की शुरुआत होगी, जिसमें बाबा भक्तों को नौ अलग-अलग रूपों में दर्शन देंगे।

    बाबा महाकाल की नगरी में महाशिवरात्रि का त्योहार 9 दिन तक चलता है, जो 6 फरवरी से शुरू होगा और 15 फरवरी तक चलेगा, जिसमें रोजाना भगवान का रुद्राभिषेक, 24 घंटे निराकार रूप में दर्शन और जलधारी, रात के समय स्नान और वस्त्र धारण का कार्यक्रम रहेगा। साथ ही अलग-अलग नौ विग्रहों की स्थापना और पूजा की जाएगी। ये नौ दिन भगवान की पूजा नवरात्रि के नौ दिनों जैसी होती है। भक्तों के लिए मंदिर भी खुले रहेंगे और भक्त बाबा महाकाल पर जलधारी अर्पित कर पाएंगे। महाकाल मंदिर के पुजारी पं महेश शर्मा ने बताया कि पहले दिन बाबा का दुशाला ओढ़ाकर श्रंगार होता है और फिर दूसरे दिन बाबा को शेषनाग धारण कराए जाते हैं।

    तीसरे दिन घटाघटा स्थापित किया जाता है, जो शिवलिंग के समान ही होता है। चौथे दिन प्रभु के छवि दर्शन होते हैं और पांचवें दिन बाबा को मन-महेश, उमा महेश, शिव तांडव और होलकर के रूप में सजाया जाता है। इस वर्ष 15 फरवरी को होने वाली खास पूजा और अनुष्ठान पर पुजारी पं महेश शर्मा ने बताया कि 15 फरवरी को जलधारी के साथ चारों पहर की पूजा और आरती होगी और रात के समय स्नान के साथ बाबा को दूल्हे के रूप में श्रंगार कर सजाया जाएगा और रात को विशेष श्रंगार पूजा होगी, जिसे सेहरा दर्शन भी कहा जाता है। इस दौरान नौ दिनों तक मंदिर परिसर में भजन और कीर्तन का आयोजन होगा और भक्तों के आगमन के लिए तैयारियां की जा रही हैं क्योंकि महाशिवरात्रि के दिन मंदिर में भीड़ बढ़ जाती है। मंदिर में हो रही तैयारी पर उन्होंने कहा कि गर्भगृह की सफाई, मंदिर के कुंड़ों की सफाई और रंग-रोगन का काम शुरू हो चुका है, जिसे 6 फरवरी तक खत्म करने की कोशिश रहेगी।

    अधिकारियों ने देखी व्यवस्था
    महापर्व 2026 के अवसर पर ज्योतिर्लिंग भगवान श्री महाकालेश्वर जी के दर्शन हेतु आने वाले श्रद्धालुओं की संभावित अत्यधिक संख्या को दृष्टिगत रखते हुए दर्शन व्यवस्था को सुव्यवस्थित, सुरक्षित एवं सुगम बनाए जाने के उद्देश्य से कलेक्टर एवं श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति के अध्यक्ष रोशन कुमार सिंह द्वारा आज श्री महाकालेश्वर मंदिर परिक्षेत्र एवं श्री महाकाल लोक के आंतरिक एवं बाह्य क्षेत्रों का विस्तृत भ्रमण एवं निरीक्षण किया गया।निरीक्षण के दौरान रोशन कुमार सिंह ने दर्शन मार्ग, श्रद्धालुओं की आवाजाही, सुरक्षा व्यवस्था, मूलभूत सुविधाओं तथा भीड़ प्रबंधन की व्यवस्थाओं का अवलोकन करते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश प्रदान किए। साथ ही मंदिर परिसर एवं श्री महाकाल लोक में चल रहे निर्माण कार्यों की प्रगति का भी जायजा लिया गया तथा संबंधित निर्माण एजेंसियों को कार्यों को समय-सीमा में गुणवत्ता के साथ पूर्ण करने हेतु आवश्यक निर्देश दिए गए, जिससे महापर्व के दौरान श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो। इस अवसर पर मंदिर प्रशासक एवं अपर कलेक्टर प्रथम कौशिक, अतेंद्र सिंह एडीएम उज्जैन अभिलाष मिश्रा आयुक्त नगर पालिका निगम एवं संबंधित निर्माण एजेंसियों के प्रतिनिधि, मंदिर अधिकारी एवं प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे।

  • छत्तीसगढ़ के किसानों को बड़ी राहत, धान खरीदी की तारीख 2 दिन बढ़ी, अब 4 और 5 फरवरी को भी बिकेगा धान

    छत्तीसगढ़ के किसानों को बड़ी राहत, धान खरीदी की तारीख 2 दिन बढ़ी, अब 4 और 5 फरवरी को भी बिकेगा धान

    रायपुर
    राज्य सरकार ने धान खरीदी की समय अवधि दो दिन बढ़ा दी है। अब चार और पांच फरवरी को भी धान खरीदी की जाएगी। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने मंगलवार को इसकी घोषणा की। पत्रकारों से चर्चा में उन्होंने कहा कि समीक्षा में जानकारी मिली कि कुछ किसानों के टोकन नहीं कट पाए हैं, कुछ पंजीयन नहीं कर पाए। इसलिए समय अवधि बढ़ाई जा रही है। राज्य के ऐसे किसान जो पंजीकृत है और जिनका टोकन कट चुके है, उन किसानों का धान खरीदा जाएगा।
    मुख्यमंत्री ने धान खरीदी के दिवस में बढ़ोतरी की

     ने अपनी पड़ताल के बाद खबर प्रकाशित कर सरकार को चेताया था कि टोकन कट जाने के बाद भी प्रदेश के लगभग ढाई लाख किसानों का धान नहीं बिक पाया है। इसके बाद राज्य सरकार ने मामले को संज्ञान में लिया। कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने भी जिलों से जानकारी मांगी थी और इसके बाद मुख्यमंत्री ने धान खरीदी के दिवस में बढ़ोतरी कर दी।

    अब तक 140 लाख टन धान की खरीदी

    15 नवंबर 2025 से शुरू धान खरीदी का महाभियान के तहत 31 जनवरी 2026 तक 25 लाख 11 हजार से अधिक किसानों से लगभग 140 लाख टन धान की खरीदी की गई है। धान खरीदी के एवज में इन किसानों को 33 हजार 149 करोड़ रुपये का भुगतान बैंक लिकिंग व्यवस्था के तहत किया जा चुका है। राज्य में इस वर्ष 27 लाख 43 हजार 145 किसानों ने पंजीयन कराया है। 2,740 धान उपार्जन केंद्रों के माध्यम से खरीदी की प्रक्रिया हुई है। शासन की यह व्यवस्था सुनिश्चित कर रही है कि वास्तविक किसान को ही लाभ मिले और बिचौलियों अथवा फर्जी प्रविष्टियों की कोई गुंजाइश न रहे।

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    ये किसान होंगे धान बेचने के पात्र

      ऐसे किसान जिन्होंने 10 जनवरी 2026 के बाद टोकन के लिए आवेदन तो किया था, लेकिन उनका भौतिक सत्यापन अभी तक पूरा नहीं हो पाया है।

     वे किसान जिन्होंने 10 जनवरी 2026 के बाद आवेदन किया और सत्यापन के दौरान जिनके पास वास्तव में धान का स्टॉक (बचा हुआ धान) पाया गया है।

     ऐसे किसान जिन्हें 28, 29 या 30 जनवरी 2026 के लिए टोकन जारी किया गया था, लेकिन वे किसी भी कारणवश निर्धारित तिथि पर अपना धान नहीं बेच पाए थे।

    हमने धान खरीदी की समीक्षा की है। कुछ किसान जिनका टोकन कट गया था और धान नहीं बेच पाए थे और कुछ किसानों का पंजीयन नहीं हो पाया था। इसलिए दो दिन और किसानों का धान खरीदेंगे। – विष्णु देव साय, मुख्यमंत्री, छत्तीसगढ़

     

     

  • अंदरूनी साजिश का पर्दाफाश: होटल कर्मचारी ने रची 75 लाख की लूट, 4 धराए

    अंदरूनी साजिश का पर्दाफाश: होटल कर्मचारी ने रची 75 लाख की लूट, 4 धराए

     नरसिंहपुर.
     जिला मुख्यालय के मुशरान पार्क चौराहा के समीप स्थित होटल कुसुम वैली में हुई करीब 75 से 80 लाख रुपये की सनसनीखेज लूट के 4 आरोपियों को पुलिस ने चंद घंटों में गिरफ्तार कर लिया। 2-3 जनवरी की दरमियानी रात्रि करीब 2.30 बजे जिला मुख्यालय में मुशरान पार्क चौराहा के पास स्थित होटल कुसुम वैली के कर्मचारियों ने थाना में सूचना दी कि 3–4 नकाबपोश बदमाशों ने होटल में जबरन प्रवेश कर वहां रखी नकद राशि लूट ली है। सूचना मिलते ही सुबह 4 बजे पुलिस अधीक्षक डा. ऋषिकेश मीणा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक संदीप भूरिया के साथ स्वयं घटनास्थल पहुंचे और मौके का निरीक्षण कर अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
    होटल में रखी रकम बना लालच की वजह

    जांच के दौरान सामने आया कि होटल कर्मचारी अनुज कुमार वाल्मीकि को होटल में रखी नकदी की पूर्व जानकारी थी।
    लालच में आकर उसने यह जानकारी रात्रिकालीन मैनेजर चंद्रेश रजक एवं राकेश कुमार शुक्ला को दी। फिर अनुज ने अपने साथी मोनू उर्फ डइया वंशकार निवासी रिप्टापार से संपर्क कर इस राशि को हड़पने की साजिश रची।

    इसके तहत मोनू अपने अन्य तीन साथियों के साथ होटल में पहुंचा और वहां मौजूद अनुज, राकेश शुक्ला व चंद्रेश रजक से दिखावटी मारपीट की और ड्राज में रखी हुई रकम निकालकर वहां से फरार हो गए।
        पुलिस ने घटनास्थल से महत्वपूर्ण भौतिक एवं तकनीकी साक्ष्य एकत्र किए गए।
       

    सीसीटीवी फुटेज लूट की साजिश उजागर करने में अहम कड़ी साबित हुई, जिसके आधार पर पुलिस ने तेजी से आरोपियों तक पहुंच बनाई।

    4 गिरफ्तार, 3 फरार

    पुलिस अधीक्षक ऋषिकेश मीणा ने देर शाम पत्रकारवार्ता आयोजित कर वारदात के संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि मामले में आरोपी चंद्रेश रजक निवासी यादव कॉलोनी नरसिंहपुर,

    राकेश कुमार शुक्ला निवासी लखीमपुर खीरी उ.प्र., हाल निवास नरसिंहपुर, अनुज कुमार वाल्मीकि निवासी लखीमपुर खीरी उ.प्र., हाल निवास नरसिंहपुर एवं मोनू उर्फ डइया बंशकार निवासी रिपटा पार, नरसिंहपुर को गिरफ्तार कर लिया है। घटना में संलिप्त 3 अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के प्रयास जारी हैं।

     

  • जश्न तो मनाएंगे, लेकिन सच भी बताइए… भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर थरूर के मोदी सरकार से कड़े सवाल

    जश्न तो मनाएंगे, लेकिन सच भी बताइए… भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर थरूर के मोदी सरकार से कड़े सवाल

    नई दिल्ली
    मंगलवार को कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने भारत और अमेरिका के बीच हुए व्यापार समझौते पर केंद्र सरकार से स्पष्टता की मांग की। थरूर ने कहा कि भले ही भारतीय वस्तुओं पर अमेरिकी टैरिफ (शुल्क) को 50 फीसदी से घटाकर 18 फीसद करना सकारात्मक हो सकता है, लेकिन सरकार को इसके सभी पहलुओं और विवरणों को सार्वजनिक करना चाहिए। थरूर ने कहा कि वे इस डील को लेकर जश्न मनाना चाहेंगे लेकिन पहले सरकार बताए तो कि मसला क्या है?

    शशि थरूर की मुख्य आपत्तियां
    एएनआई से बात करते हुए थरूर ने सरकार की कार्यशैली और पारदर्शिता पर सवाल उठाए। उन्होंने तंज कसते हुए पूछा- हमारे पास राष्ट्रपति ट्रंप और प्रधानमंत्री मोदी के ट्वीट हैं; क्या संसदीय लोकतंत्र में इतना ही काफी है? क्या भारत सरकार को देश की जनता को यह नहीं समझाना चाहिए कि इस सौदे में वास्तव में क्या है?

    उन्होंने विशेष रूप से कृषि क्षेत्र पर समझौते के प्रभाव को लेकर चिंता जताई। थरूर ने कहा कि यदि अमेरिका भारत को अपने कृषि उत्पादों का बड़ा बाजार बनाना चाहता है, तो यह स्पष्ट होना चाहिए कि भारतीय किसानों के हितों की सुरक्षा के लिए क्या प्रावधान किए गए हैं। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अगर अमेरिका 500 अरब डॉलर के व्यापार की बात कर रहा है, जबकि भारत का कुल आयात बिल लगभग 700 अरब डॉलर है, तो क्या भारत को अन्य देशों से आयात कम करना पड़ेगा। थरूर ने कहा- विपक्ष सिर्फ इतना जानना चाहता है कि इस समझौते में है क्या। अगर यह अच्छी खबर है तो हम खुशी-खुशी इसका स्वागत करेंगे, लेकिन सरकार को देश को बताना चाहिए कि इसमें कौन-सी शर्तें शामिल हैं।

    कांग्रेस पार्टी के तीखे सवाल
    कांग्रेस पार्टी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर एक विस्तृत पोस्ट शेयर कर सरकार से कई कड़े सवाल पूछे हैं-

    घोषणा का तरीका: कांग्रेस ने आपत्ति जताई कि युद्धविराम की तरह इस व्यापार समझौते की घोषणा भी अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा की गई। यह भी कहा गया कि यह समझौता प्रधानमंत्री मोदी के अनुरोध पर हुआ है।

    'जीरो' टैरिफ का डर: ट्रंप के दावे के अनुसार, भारत अमेरिकी उत्पादों पर टैरिफ और गैर-टैरिफ बाधाओं को 'शून्य' करने पर सहमत हो गया है। कांग्रेस का मानना है कि इससे भारतीय बाजार पूरी तरह अमेरिका के लिए खुल जाएगा, जिससे स्थानीय उद्योगों, व्यापारियों और किसानों को भारी नुकसान हो सकता है।

    रूसी तेल पर पाबंदी: सबसे बड़ा सवाल रूसी तेल को लेकर है। कांग्रेस ने पूछा है कि क्या मोदी सरकार ने ट्रंप के दावे के अनुसार रूस से मिलने वाले रियायती तेल की खरीद बंद करने पर सहमति जता दी है?

    विपक्ष का मुख्य तर्क यह है कि किसी भी बड़े अंतरराष्ट्रीय समझौते को केवल सोशल मीडिया घोषणाओं तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। कांग्रेस ने मांग की है कि सरकार संसद और जनता के सामने इस सौदे का पूरा कच्चा चिट्ठा रखे ताकि यह स्पष्ट हो सके कि भारतीय किसानों और राष्ट्रीय हितों की सुरक्षा कैसे की जा रही है।

  • कुदरत का कहर: ग्वालियर में ओलावृष्टि से 90% तक फसलें तबाह, एक किसान की जान गई

    कुदरत का कहर: ग्वालियर में ओलावृष्टि से 90% तक फसलें तबाह, एक किसान की जान गई

    ग्वालियर.
     पश्चिमी विक्षोभ के असर के चलते ग्वालियर जिले में मंगलवार सुबह वर्षा और भारी ओलावृष्टि हुई। प्रकृति का यह प्रकोप भितरवार-चीनोर क्षेत्र के गांव कछौआ, बड़की सराय, जुझारपुर, भोरी, ररुआ, चीनोर, आंतरी, करहिया और सिकरौदा समेत 12 से अधिक गांवों में देखा गया। जहां पर भीषण ओलावृष्टि हुई। ओलावृष्टि की तीव्रता इतनी अधिक थी कि खेतों में फसलों के ऊपर चार-चार इंच तक बर्फ जम गई।

    बर्फ की चादर से ढका कश्मीर जैसा नजारा

    मंजर ऐसा था कि दूर-दूर तक फैली हरियाली गायब हो गई और पूरा इलाका बर्फ की चादर से ढका कश्मीर जैसा नजर आने लगा। किसानों के मुताबिक गेहूं, सरसों व चना आदि फसलों में 70 से 90 प्रतिशत तक नुकसान हुआ है। ओलावृष्टि की सूचना मिलते ही प्रशासन की टीमें फसलों में हुए नुकसान का सर्वे करने के लिए मौके पर पहुंची। कुछ गांवों में कलेक्टर रुचिका चौहान भी नुकसान को देखने के लिए पहुंची। मौसम विज्ञान केंद्र के मुताबिक आगामी 24 घंटों में गरज चमक के साथ वर्षा व ओलावृष्टि की संभावना अभी बनी हुई है। साथ ही कोहरा भी रहेगा।

    आसमानी बिजली से किसान की मौत

    शिवपुरी में आसमानी बिजली की चपेट में आने से एक किसान की मौत भी हो गई। कई खेतों में तो नुकसान का आकलन 70 से 90 प्रतिशत तक बताया जा रहा है। ओलावृष्टि की सूचना के बाद कलेक्टर रुचिका चौहान ने बड़की सराय व सिकरौदा गांव में पहुंचकर ओलावृष्टि से प्रभावित क्षेत्र निरीक्षण किया और किसानों से बात की।

    शिवपुरी में बिजली गिरने से किसान झुलसा

    शिवपुरी के सिलानगर निवासी वीर सिंह पुत्र रामप्रसाद आदिवासी उम्र 25 साल गांव में बटाई से खेती करता है। रात में खेत पर फसल की रखवाली के लिए रुका था। इसी दौरान तेज आंधी, वर्षा आदि से बचने के लिए वह खेत में बनी झोंपड़ी के अंदर जाकर सो गया। इसी दौरान आसमानी बिजली झोपड़ी गिरी, जिससे झोंपड़ी में आग लग गई। किसान झोपड़ी में लगी आग की चपेट में आ गया, जिससे उसकी जलने के कारण मौके पर ही मौत हो गई। पुलिस ने पोस्टमॉर्टम करवाकर मर्ग कायम कर लिया है।

     

  • AK-47 के साथ मैदान में उतरीं बलूच महिलाएं, पाकिस्तानी सेना के खिलाफ क्यों भड़का विद्रोह?

    AK-47 के साथ मैदान में उतरीं बलूच महिलाएं, पाकिस्तानी सेना के खिलाफ क्यों भड़का विद्रोह?

    बलूचिस्तान
    पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में बलूच विद्रोहियों के हमलों ने सरकार और सेना दोनों की स्थिति को बेहद कमजोर कर दिया है। बलूच विद्रोहियों ने बलूचिस्तान के 12 अलग-अलग स्थानों पर सुरक्षा बलों, पुलिस और नागरिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाकर हमले किए, जिनमें कम से कम 10 सुरक्षाकर्मी मारे गए। इन घटनाओं से प्रांत में सुरक्षा स्थिति गंभीर बनी हुई है। मुख्यमंत्री सरफराज बुगती इन हमलों के बाद सार्वजनिक रूप से बहुत व्यथित नजर आए। इन हमलों के बाद बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (बीएलए) द्वारा जारी की गई दो हमलावरों की तस्वीरें काफी चर्चा में रहीं। इन तस्वीरों में दोनों हमलावर महिलाएं थीं। यह बात इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि सशस्त्र उग्रवाद को लंबे समय से पुरुष-प्रधान गतिविधि के रूप में देखा जाता रहा है।

    समाज के भीतर गुस्सा
    विश्लेषकों के अनुसार, बलूच प्रतिरोध आंदोलन अब पारंपरिक जनजातीय ढांचे से आगे बढ़कर सामाजिक और रणनीतिक बदलाव के दौर से गुजर रहा है। उनका कहना है कि पाकिस्तानी सुरक्षा प्रतिष्ठान की सख्त कार्रवाइयों, जबरन गुमशुदगियों और राजनीतिक संवाद की कमी ने स्थानीय लोगों में असंतोष को और गहरा कर दिया है। राजनीतिक विश्लेषक आयशा सिद्दीका का मानना है कि किसी विद्रोह में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी उस समाज के भीतर गहरे गुस्से और टूटते सामाजिक ढांचे की ओर इशारा करती है।

    हाल के दिनों में हुए हमलों में कुल 50 नागरिकों और 17 सुरक्षाकर्मियों की मौत के बाद बीएलए ने दो महिला हमलावरों की पहचान जाहिर की। इनमें से एक की पहचान 24 वर्षीय आसिफा मेंगल के रूप में हुई है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने भी पुष्टि की कि कम से कम दो हमलों में महिला उग्रवादियों की भूमिका रही। बीएलए के अनुसार, आसिफा मेंगल ने जनवरी 2024 में फिदायीन हमले का फैसला किया था और नुश्की में एक हमला अंजाम दिया।

    इसी बीच सोशल मीडिया पर बीएलए से जुड़ी एक महिला लड़ाके का वीडियो भी वायरल हुआ, जिसमें वह हथियारों से लैस होकर सुरक्षा प्रतिष्ठानों के आसपास गतिविधियां करती दिख रही थी। वीडियो में उसके साथ पुरुष लड़ाके भी नजर आए, जो पाकिस्तानी सरकार और सुरक्षा बलों पर तंज कसते दिखे।

    बलूच महिलाओं की बढ़ रही भागीदारी
    दरअसल, हाल के वर्षों में बलूच महिलाओं की सशस्त्र संगठनों में भागीदारी लगातार बढ़ रही है। हालांकि यह पहला मौका नहीं है जब महिला आत्मघाती हमलावर सामने आई हों। वर्ष 2022 में कराची विश्वविद्यालय के कन्फ्यूशियस इंस्टीट्यूट के बाहर हुए हमले में पहली बार एक महिला फिदायीन की भूमिका सामने आई थी, जिसमें तीन चीनी नागरिकों सहित चार लोगों की मौत हुई थी। इसके बाद जून 2022 और मार्च 2025 में भी बलूचिस्तान में महिला उग्रवादियों द्वारा हमलों की घटनाएं दर्ज हुईं। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, इन घटनाओं ने पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा चुनौतियों को और जटिल बना दिया है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि जैसे-जैसे बलूच आंदोलन का नेतृत्व जनजातीय सरदारों से हटकर शिक्षित मध्यम वर्ग की ओर बढ़ा, वैसे-वैसे महिलाओं की भागीदारी भी बढ़ी। वॉइस फॉर बलूच मिसिंग पर्सन्स के अनुमान के मुताबिक, वर्ष 2000 के बाद से 5000 से अधिक लोग लापता हुए हैं, जिनमें ज्यादातर पुरुष हैं। ऐसे में कई परिवारों में महिलाओं ने सामाजिक और राजनीतिक प्रतिरोध की जिम्मेदारी उठाई है।

    रणनीतिक मामलों के जानकार ब्रह्मा चेलानी ने इंडिया टुडे से बातचीत में कहा कि महिला उग्रवादियों की बढ़ती भूमिका बलूच समाज में गहरी निराशा और हताशा को दर्शाती है। वहीं, पाकिस्तानी सत्ता के करीबी कुछ विश्लेषक इसे सशक्तिकरण के बजाय संगठित शोषण बताते हैं और आरोप लगाते हैं कि उग्रवादी संगठन युवा महिलाओं को भावनात्मक और वैचारिक दबाव में भर्ती कर रहे हैं।

    पाकिस्तान के लिए बड़ी चुनौती
    सुरक्षा आंकड़ों की बात करें तो 2011 के बाद से बलूच उग्रवाद से जुड़े हमलों में पाकिस्तान में कम से कम 350 लोगों की जान जा चुकी है। वर्ष 2024 और 2025 में संघर्ष से जुड़ी मौतों में तेज इजाफा हुआ है, जिससे सुरक्षा बलों पर दबाव और बढ़ गया है। विश्लेषकों का मानना है कि मौजूदा हालात में बलूचिस्तान में उग्रवाद की दिशा और उसमें महिलाओं की बढ़ती भूमिका पाकिस्तान के लिए एक बड़ी रणनीतिक तथा राजनीतिक चुनौती बनती जा रही है।

  • भारत-अमेरिका आर्थिक साझेदारी से उत्तर प्रदेश को मिलेगी नई उड़ान

    भारत-अमेरिका आर्थिक साझेदारी से उत्तर प्रदेश को मिलेगी नई उड़ान

    लखनऊ
     भारत और अमेरिका के बीच हाल ही में संपन्न हुई आर्थिक साझेदारी और अमेरिकी टैरिफ में की गई कटौती ने उत्तर प्रदेश की औद्योगिक और आर्थिक संभावनाओं को नई दिशा दे दी है। अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों और आर्थिक विश्लेषकों के अनुसार, अमेरिका ने भारतीय उत्पादों पर लागू टैरिफ को पहले के लगभग 50 प्रतिशत स्तर से घटाकर औसतन 18 प्रतिशत कर दिया है। यह निर्णय भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों में एक निर्णायक मोड़ माना जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसे भारत की बढ़ती वैश्विक स्वीकार्यता और आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था की बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहा कि यह समझौता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्णायक और दृढ़ नेतृत्व का परिणाम है, जिसमें भारत ने अपनी नीतियों पर अडिग रहते हुए वैश्विक शक्तियों के साथ समानता के आधार पर संवाद किया।

    वैश्विक भरोसे की कसौटी पर खरा उतरा भारत

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने फार्मा कॉन्क्लेव में स्पष्ट शब्दों में कहा कि 2014 से पहले जिस भारत को गंभीरता से नहीं लिया जाता था, आज वही भारत अपनी नीतियों पर दृढ़ रहते हुए वैश्विक शक्तियों को भी संवाद और सहयोग के लिए विवश कर रहा है। भारत अब अपनी शर्तों पर आगे बढ़ रहा है। अमेरिकी टैरिफ में की गई यह कटौती इसी बदले हुए वैश्विक दृष्टिकोण का प्रमाण मानी जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि अब भारतीय निर्यातकों पर लगने वाला अतिरिक्त ‘पेनल्टी टैरिफ’ हट चुका है और केवल रेसिप्रोकल टैक्स स्ट्रक्चर लागू है, जिससे भारतीय उत्पाद अमेरिकी बाजार में पहले से कहीं अधिक प्रतिस्पर्धी बन गए हैं।

    एमएसएमई और ओडीओपी सेक्टर को मिलेगा सीधा और दीर्घकालिक लाभ

    अमेरिका द्वारा भारतीय उत्पादों पर लगाए जाने वाले आयात शुल्क में की गई कटौती का व्यापक और प्रत्यक्ष असर उत्तर प्रदेश के एमएसएमई और ओडीओपी सेक्टर पर पड़ने वाला है। भदोही के हस्तनिर्मित कालीन, मुरादाबाद के पीतल व धातु उत्पाद, आगरा का चमड़ा उद्योग, वाराणसी की रेशमी साड़ियां और कन्नौज का पारंपरिक इत्र अब अमेरिकी बाजार में पहले की तुलना में कम लागत और बेहतर लाभांश के साथ पहुंच सकेगा। अब तक ऊंचे टैरिफ के कारण ये उत्पाद कीमत के मामले में चीन, वियतनाम और बांग्लादेश जैसे देशों से पिछड़ जाते थे, लेकिन शुल्क में कमी के बाद उत्तर प्रदेश के पारंपरिक उद्योग वैश्विक प्रतिस्पर्धा में मजबूती से खड़े हो सकेंगे। 

    आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि इससे न केवल निर्यात ऑर्डर बढ़ेंगे, बल्कि सीधे निर्यात को भी प्रोत्साहन मिलेगा, जिससे बिचौलियों पर निर्भरता घटेगी और कारीगरों को उनकी मेहनत का सही मूल्य मिलेगा। इसका सकारात्मक असर रोजगार पर भी दिखाई देगा। उत्पादन बढ़ने से बुनकरों, शिल्पकारों, कारीगरों और छोटे उद्योगों में काम करने वाले लाखों लोगों को नियमित रोजगार मिलेगा, वहीं नई यूनिट्स की स्थापना से स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियां तेज होंगी। 

    डिफेंस कॉरिडोर में तकनीक का होगा प्रवेश

    भारत-अमेरिका के बीच टैरिफ में कटौती और व्यापारिक रिश्तों में आई मजबूती का प्रभाव अब रणनीतिक क्षेत्रों तक भी महसूस किया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब दो देश व्यापार और निवेश के मोर्चे पर एक-दूसरे के प्रति भरोसा जताते हैं, तो उसका स्वाभाविक विस्तार रक्षा और उन्नत तकनीक जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में भी होता है। इसी क्रम में भारत-अमेरिका के बीच बढ़ते सहयोग का सकारात्मक असर उत्तर प्रदेश के डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर पर भी दिख सकता है। झांसी, कानपुर, लखनऊ, अलीगढ़ और आगरा जैसे रणनीतिक नोड्स अब केवल असेंबली यूनिट्स तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि यहां टेक्नोलॉजी ट्रांसफर, संयुक्त उपक्रमों और उच्चस्तरीय अनुसंधान के माध्यम से उन्नत रक्षा उपकरणों के निर्माण की संभावनाएं आकार ले रही हैं। 

    जानकारों के अनुसार, अमेरिकी रक्षा कंपनियों के साथ संभावित सहयोग से ड्रोन सिस्टम, रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स, संचार एवं राडार सिस्टम तथा अत्याधुनिक कंपोनेंट्स का निर्माण प्रदेश में ही संभव हो सकता है। टैरिफ में कटौती से बने अनुकूल निवेश माहौल और भारत की नीतिगत स्थिरता ने विदेशी कंपनियों का भरोसा बढ़ाया है, जिसका लाभ रक्षा क्षेत्र को भी मिलने की संभावना जताई जा रही है। इससे न केवल आयात पर निर्भरता घटेगी, बल्कि रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश की भूमिका राष्ट्रीय स्तर पर और अधिक सशक्त होगी। 

    इस बदलाव का सबसे बड़ा लाभ प्रदेश के युवाओं को मिलने वाला है। उन्नत मैन्युफैक्चरिंग और रक्षा तकनीक से जुड़े प्रोजेक्ट्स के कारण इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स और एयरोस्पेस जैसे क्षेत्रों में उच्च कौशल आधारित रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। साथ ही एमएसएमई सेक्टर को भी रक्षा आपूर्ति श्रृंखला से जुड़ने का अवसर मिलेगा, जिससे स्थानीय उद्योगों को दीर्घकालिक मजबूती मिलेगी।

    आईटी, जीसीसी और डेटा सेंटर सेक्टर को मिलेगी गति

    भारत-अमेरिका के बीच टैरिफ में कटौती और द्विपक्षीय व्यापारिक संबंधों में आई मजबूती का असर केवल पारंपरिक उद्योगों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका विस्तार उच्च तकनीक और डिजिटल अर्थव्यवस्था तक भी देखा जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, जब वैश्विक स्तर पर व्यापार बाधाएं कम होती हैं और नीतिगत स्थिरता का संकेत मिलता है, तो अंतरराष्ट्रीय टेक कंपनियों के लिए निवेश निर्णय लेना आसान हो जाता है। इसी पृष्ठभूमि में उत्तर प्रदेश की जीसीसी नीति-2024 को नया बल मिलता नजर आ रहा है।

    नोएडा और लखनऊ में विकसित हो रहा एआई, आईटी और डेटा सेंटर इकोसिस्टम अब अमेरिकी और अन्य वैश्विक टेक कंपनियों के लिए अधिक आकर्षक बनता जा रहा है। टैरिफ कटौती से आईटी हार्डवेयर, सर्वर, नेटवर्किंग उपकरण और सेमीकंडक्टर से जुड़ी आयात लागत में संभावित कमी आने से डेटा सेंटर प्रोजेक्ट्स की आर्थिक संभाव्यता और बेहतर होगी। इससे बड़े पैमाने पर कैपिटल-इंटेंसिव निवेश को गति मिलने की संभावना जताई जा रही है। जानकारों का मानना है कि अनुकूल व्यापार माहौल और मजबूत भारत-अमेरिका तकनीकी सहयोग के चलते नोएडा, ग्रेटर नोएडा और लखनऊ जैसे शहर ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (जीसीसी) के नए हब के रूप में उभर सकते हैं। इन केंद्रों के माध्यम से क्लाउड कंप्यूटिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सिक्योरिटी, फिनटेक और एनालिटिक्स जैसे क्षेत्रों में उच्चस्तरीय कार्य होंगे, जिससे प्रदेश के युवाओं को वैश्विक स्तर के रोजगार के अवसर मिलेंगे। 

    राज्य सरकार का फोकस डेटा सेंटर, एक्सप्रेसवे कनेक्टिविटी, जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट और स्थिर बिजली आपूर्ति जैसे बुनियादी ढांचे पर है। इन कारकों और टैरिफ कटौती से बने सकारात्मक वैश्विक माहौल के चलते डेटा सेंटर, सेमीकंडक्टर और आईटी सेवाओं में आने वाले वर्षों में हजारों करोड़ रुपये के निवेश की संभावनाएं बन सकती हैं।

    फार्मा और ग्रीन एनर्जी में यूपी की रणनीतिक बढ़त

    भारत-अमेरिका के बीच टैरिफ में की गई कटौती का सबसे प्रत्यक्ष और संरचनात्मक लाभ फार्मास्यूटिकल और मेडिकल डिवाइस सेक्टर को मिलने की संभावना जताई जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिकी बाजार में दवाओं, बल्क ड्रग्स और मेडिकल उपकरणों पर आयात शुल्क कम होने से भारतीय उत्पादों की लागत प्रतिस्पर्धी होगी, जिससे निर्यात को बढ़ावा मिलेगा। इस बदले हुए परिदृश्य में उत्तर प्रदेश के लिए अवसर और भी व्यापक हो गए हैं। 

    ललितपुर में प्रस्तावित बल्क ड्रग पार्क को लेकर पहले से ही निवेशकों की रुचि रही है, लेकिन टैरिफ में राहत के बाद अब यह परियोजना वैश्विक सप्लाई चेन के लिहाज से और आकर्षक बन गई है। इससे फार्मा कंपनियों को एपीआई (एक्टिव फार्मास्यूटिकल्स इन्ग्रेडिएंट्स) और इंटरमीडिएट्स का उत्पादन प्रदेश में स्थापित करने का आर्थिक प्रोत्साहन मिलेगा। जानकारों का मानना है कि इससे आयात पर निर्भरता घटेगी और यूपी घरेलू के साथ-साथ निर्यात-उन्मुख फार्मा मैन्युफैक्चरिंग का प्रमुख केंद्र बन सकता है। 

    मेडिकल डिवाइस मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में भी टैरिफ कटौती का सकारात्मक असर देखने को मिल सकता है। इमेजिंग उपकरण, डायग्नोस्टिक किट, सर्जिकल उपकरण और अन्य हाई-वैल्यू मेडिकल डिवाइसेज के निर्यात में लागत घटने से उत्तर प्रदेश में उत्पादन इकाइयां स्थापित करने की संभावनाएं बढ़ेंगी। इससे ‘मेक इन इंडिया’ के साथ-साथ ‘मेक फॉर द वर्ल्ड’ की अवधारणा को भी बल मिलेगा। 

    ग्रीन एनर्जी के क्षेत्र में, विशेष रूप से बुंदेलखंड के सोलर पार्क और ग्रीन हाइड्रोजन परियोजनाओं के लिए भी टैरिफ में राहत एक सकारात्मक संकेत मानी जा रही है। सोलर पैनल, इलेक्ट्रोलाइजर और स्वच्छ ऊर्जा से जुड़े उपकरणों के आयात-निर्यात में व्यापार बाधाएं कम होने से तकनीक हस्तांतरण और विदेशी निवेश को गति मिल सकती है। अमेरिकी कंपनियों की भागीदारी से उन्नत तकनीक और पूंजी का प्रवाह बढ़ने की संभावना जताई जा रही है, जिससे उत्तर प्रदेश ऊर्जा आत्मनिर्भरता और स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बन सकता है।

  • सतर्कता, समन्वय और समयबद्ध तैयारी से होगा सफल बाढ़ प्रबंधन: मुख्यमंत्री

    सतर्कता, समन्वय और समयबद्ध तैयारी से होगा सफल बाढ़ प्रबंधन: मुख्यमंत्री

    लखनऊ.

    प्रदेश में संभावित बाढ़ और अतिवृष्टि की चुनौतियों को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को व्यापक तैयारी और प्रभावी समन्वय पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जितनी बेहतर तैयारी होगी, उतनी ही तेजी और सफलता से चुनौती का समाधान किया जा सकेगा। मुख्यमंत्री ने बाढ़/अतिवृष्टि पूर्व प्रबंधन की विस्तृत समीक्षा करते हुए सभी तटबंधों, ड्रेनों और संवेदनशील स्थानों की समयबद्ध मरम्मत, सुदृढ़ीकरण और निगरानी को अनिवार्य बताया। उन्होंने निर्देश दिया कि सतर्कता, समन्वय और तय समयसीमा में काम पूरा करना ही सुरक्षित बाढ़ प्रबंधन की मूल कुंजी है।

    बैठक में प्रमुख सचिव सिंचाई एवं जल संसाधन ने बताया कि उत्तर प्रदेश में गंगा, सरयू (घाघरा) राप्ती, रामगंगा, गंडक, यमुना, गोमती और सोन नदी बेसिन के आस-पास के जनपद बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में आते हैं। नदी-पट्टी और वर्षा पैटर्न का विश्लेषण करते हुए इस वर्ष 12 जनपदों में 18 तटबंधों को संवेदनशील चिह्नित किया गया है, जिनकी कुल लंबाई 241.58 किमी है। 11 जनपद के 19 तटबंधों को अति संवेदनशील चिन्हित किया गया है, जिनकी कुल लंबाई 464.92 किमी है। इन सभी स्थानों पर अग्रिम सुरक्षा कार्य प्राथमिकता पर चल रहे हैं।

    बैठक में बताया गया कि ग्रामीण इलाकों में जल-निकासी को सुचारु रखने के लिए बड़े पैमाने पर ड्रेनों की सफाई और ड्रेजिंग कराई जा रही है। विभाग के अधीन कुल 10,727 ड्रेन हैं, जिनकी संयुक्त लंबाई 60,047 किमी है। कई महत्त्वपूर्ण रूटों की सफाई पूरी हो चुकी है और शेष कार्य तय समय में पूरे किए जा रहे हैं।

    अधिकारियों ने यह भी बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए अनुमोदित ड्रेजिंग परियोजनाएं जनपदवार लागू की जा रही हैं, जिससे नदी प्रवाह सुधरेगा और तटीय इलाकों में जलभराव कम होगा। इसके साथ ही वर्ष 2026 की संभावित बाढ़ स्थिति को ध्यान में रखते हुए नई सुरक्षा परियोजनाएं भी प्रस्तावित की गई हैं, जिनके परीक्षण और अनुमोदन की प्रक्रिया जारी है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी तटबंधों और बैराजों पर रियल-टाइम मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाए। उन्होंने ड्रोन-मैपिंग, वाटर लेवल सेंसर और स्थानीय प्रशासन के साथ समन्वय को और मजबूत बनाने का निर्देश दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि जहां कहीं नदी के मेन स्ट्रीम में सिल्ट की अधिकता हो, नदी उथली हो, वहां ड्रेजिंग को प्राथमिकता दी जाए और नदी को चैनलाइज किया जाए। यदि ड्रेजिंग से समाधान होना संभव न हो, तब ही तटबंध अथवा कटान निरोधी अन्य उपायों को अपनाया जाये।

  • सिल्क एक्सपो-2026 का कैबिनेट मंत्री राकेश सचान ने किया उद्घाटन, आईजीपी लखनऊ में 06 फरवरी तक चलेगी प्रदर्शनी

    सिल्क एक्सपो-2026 का कैबिनेट मंत्री राकेश सचान ने किया उद्घाटन, आईजीपी लखनऊ में 06 फरवरी तक चलेगी प्रदर्शनी

    लखनऊ

    उत्तर प्रदेश में सिल्क उद्योग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आज लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में सिल्क एक्सपो-2026 का शुभारंभ हुआ। एक्सपो का उद्घाटन प्रदेश के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम तथा रेशम उद्योग मंत्री राकेश सचान ने किया। पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री नरेंद्र कश्यप भी इस अवसर पर मौजूद रहे। इस मौके  पर ‘रेशम मित्र-2025’ पत्रिका के विमोचन के साथ ही उद्योग से जुड़े लोगों को सम्मानित भी किया गया। एक्सपो के आयोजन से सिल्क उत्पादकों व उद्यमियों को प्रोत्साहन मिलने के साथ ही प्रदेश में सिल्क उत्पादन तथा इससे जुड़े उद्योगों व व्यापार को भी बढ़ावा मिलेगा।

    मंत्री राकेश सचान ने इस अवसर पर रेशम उत्पादकों व उद्यमियों को संबोधित करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री रेशम विकास योजना के तहत प्रदेश सरकार का लक्ष्य दस वर्षों में लगभग 13,500 उत्पादकों को लाभ पहुंचाना है। योजना के तहत अब तक 1630 लाभार्थियों को 32.49 करोड़ रुपये की अनुदान सहायता दी जा चुकी है, जिससे उत्पादन में अच्छी वृद्धि हुई है। इसके साथ ही 9,000 एकड़ में शहतूत पौधरोपण का कार्य जारी है, जिससे 360 मीट्रिक टन अतिरिक्त रेशम उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। प्रदेश में रेशम उद्योग उत्पादकों व बुनकरों को नियमित रोजगार के अवसर दे रहा है। मल्टी रीलिंग इकाइयों की स्थापना से प्रसंस्करण की सुविधाएं मजबूत हुई हैं। रेशम मित्र पोर्टल के जरिए ऑनलाइन आवेदन, निगरानी और पारदर्शी क्रियान्वयन भी सुनिश्चित किया जा रहा है।

    इस अवसर पर उपस्थित पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री नरेंद्र कश्यप ने कहा कि डबल इंजन सरकार के समर्थन से उत्तर प्रदेश में रेशम उद्योग ने अभूतपूर्व प्रगति की है। प्रदेश में रेशम उत्पादन 27 मीट्रिक टन से बढ़कर अब 450-500 मीट्रिक टन तक पहुंच गया है, जो आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश के लक्ष्य को मजबूती दे रहा है। साथ ही प्रदेश गरीब और पिछड़े तबके के लोगों को आय और रोजगार के नये अवसर प्रदान कर रहा है। 

    इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान (आईजीपी) के मरकरी हॉल में आयोजित सिल्क एक्सपो के उद्घाटन अवसर पर प्रदेश के रेशम उद्योग से जुड़े 16 उत्पादकों, बुनकरों, उद्यमियों और अन्य योगदानकर्ताओं को पं. दीन दयाल उपाध्याय रेशम रत्न सम्मान प्रदान किया गया। साथ ही रेशम निदेशालय की विभागीय उपलब्धियों पर आधारित ‘रेशम मित्र-2025’ पत्रिका का विमोचन भी किया गया। सिल्क एक्सपो, 06 फरवरी 2026 तक चलेगा, जहां देशभर के बुनकर और व्यापारी हाथ से बने रेशमी वस्त्र, साड़ियां, दुपट्टे और अन्य उत्पाद लेकर आए हैं। यह आयोजन प्रदेश के रेशम उद्योग को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान देने के साथ यूपी को रेशम उत्पादन व निर्यात का केंद्र बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो रहा है।

  • कभी जो मजदूरी करने के लिए मजबूर था, वह आज सीएम योगी की प्रेरणा से दिखा रहा लाखों युवाओं को रास्ता

    कभी जो मजदूरी करने के लिए मजबूर था, वह आज सीएम योगी की प्रेरणा से दिखा रहा लाखों युवाओं को रास्ता

    लखनऊ

     कभी साइकिल पर अखबार बेचकर घर का खर्च चलाने वाला लड़का आज राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उत्तर प्रदेश और भारत का नाम रोशन कर रहा है। यूपी के बागपत जनपद के छोटे से गांव ट्यौढी का रहने वाला अमन कुमार संघर्ष, संकल्प और योगी सरकार के सहयोग से ऐसा उदाहरण बन चुका है, जो लाखों युवाओं को प्रेरणा दे रहा है।

    बचपन में गरीबी और बाल मजदूरी की पीड़ा झेलने वाले अमन कुमार ने कभी नहीं सोचा था कि एक दिन उनकी पहचान इंटरनेशनल यूथ आइकॉन के रूप में होगी। अमन कहते हैं कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार की युवा केंद्रित नीतियों, डिजिटल पहल और जनभागीदारी आधारित योजनाओं ने उनके जैसे युवाओं को न केवल अवसर दिए, बल्कि आगे बढ़ने का भरोसा भी दिया।

    12वीं के बाद बढ़ाई सक्रियता

    अमन कुमार आज यूपी सरकार के युवा कल्याण विभाग से संबद्ध उड़ान यूथ क्लब के अध्यक्ष हैं। खुद अवसरों के अभाव में पले-बढ़े अमन ने ठान लिया कि अब कोई भी होनहार युवा सिर्फ जानकारी न होने की वजह से पीछे नहीं रहेगा। उन्होंने बताया कि इसी सोच से 12वीं के बाद व्हाट्स-ऐप ग्रुप बनाया और उसे विस्तार देकर वेबसाइट प्रोजेक्ट ‘कॉन्टेस्ट 360’ तैयार किया। एक क्लिक पर शिक्षा, स्कॉलरशिप, करियर और सरकारी अवसरों की जानकारी देने वाली इस वेबसाइट को अब तक 84 लाख से अधिक युवा देख चुके हैं।

    कांवड़ यात्रा से लेकर चुनाव तक डिजिटल समाधान

    कांवड़ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की सहूलियत के लिए अमन ने वर्ष 2022 में प्रशासन के साथ मिलकर कांवड़ यात्रा ऐप तैयार किया। यात्रा मार्ग, चिकित्सा सहायता, शिविर, आपात संपर्क और प्रशासनिक सहयोग जैसी सुविधाएं एक मंच पर उपलब्ध कराई गईं, जिसे साढ़े तीन लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने उपयोग किया। इसके बाद उन्होंने लोकसभा निर्वाचन में स्वीप बागपत ऐप बनाकर भारत निर्वाचन आयोग की सेवाएं सवा लाख मतदाताओं तक पहुंचाईं।

    जिलाधिकारी के मार्गदर्शन में सरकारी योजनाओं को जोड़ने का मॉडल बनाया

    बागपत की जिलाधिकारी अस्मिता लाल के मार्गदर्शन में अमन प्रशासन के कार्यों में योगदान दे रहे हैं। उन्होंने सूचना विभाग के सहयोग से सूचना सेतु ऐप तैयार कर एक क्लिक पर अधिकारियों और सरकारी योजनाओं से जोड़ने का मॉडल बनाया। यहीं नहीं, बागपत फॉर एनिमल्स ऐप के जरिए पशु कल्याण और ग्राम पंचायत फैजपुर निनाना की वेबसाइट बनाकर डिजिटल पंचायत की दिशा में भी अहम पहल की। अब वह अगले चरण में वेबसाइट और इनोवेशन के जरिए प्रदेशभर के युवाओं को जोड़ने की तैयारी कर रहे हैं।

    युवाओं को आगे बढ़ाने में सक्रिय भूमिका

    अमन के जुनून और नवाचार को राष्ट्रीय पहचान तब मिली, जब यूपी सरकार ने उन्हें स्वामी विवेकानंद यूथ अवॉर्ड से सम्मानित किया। आज अमन कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों से जुड़े हैं। वह यूनेस्को ग्लोबल यूथ कम्युनिटी, यूनेस्को इन्क्लूसिव पॉलिसी लैब नेटवर्क, यूनेस्को मीडिया इन्फॉर्मेशन लिटरेसी एलायंस, यूनिसेफ नेशनल यू एंबेसडर, हंड्रेड फाउंडेशन, नेचर पॉजिटिव यूनिवर्सिटीज, क्लाइमेट कार्डिनल्स, यांगो जैसे संस्थानों से जुड़कर युवाओं को आगे बढ़ाने के लिए सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

    वर्ष 2026 में आयोजित विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग में अमन को टीम यूपी का ग्रुप कैप्टन बनाया गया, जहां उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समक्ष राष्ट्रीय मंच पर युवाओं की अगुवाई की। इसके अलावा, नोबेल शांति पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी के साथ भी काम किया।

    सम्मान और पहचान

    अमन कुमार को वर्ष 2025 में देश के स्वयंसेवा क्षेत्र का प्रतिष्ठित आई वॉलंटियर अवॉर्ड मिला। इसके साथ ही यूनिसेफ इंडिया में इंडियाज मोस्ट वैल्यूएबल यू रिपोर्टर अवॉर्ड, यंग ट्रांसफॉर्मर्स अवॉर्ड, शिक्षा रत्न सम्मान सहित कई राष्ट्रीय उपलब्धियां उनके नाम हैं। भारत सरकार के माई भारत संस्थान ने उन्हें यूपी में यूथ मेंटर बनाया है।