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  • MP Budget 2026-27: 18 फरवरी को पेश, जानें इस साल क्या खास रहेगा

    MP Budget 2026-27: 18 फरवरी को पेश, जानें इस साल क्या खास रहेगा

    भोपाल

    मध्यप्रदेश सरकार 18 फरवरी 2026 को विधानसभा में अपना तीसरा बजट पेश करेगी, जिसे वित्त मंत्री और उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा पेश करेंगे। यह बजट रिकॉर्ड रकम और समावेशी विकास के एजेंडा के साथ तैयार किया जा रहा है।

    बताया जा रहा है कि राज्य का अनुमानित बजट 4.63 लाख करोड़ रुपए के आसपास हो सकता है। जो पिछले बजट से करीब 10 फीसदी अधिक होगा। बताते चलें कि एमपी विधानसभा बजट सत्र 16 फरवरी को शुरू होने जा रहा है और 18 फरवरी को एमपी बजट पेश किया जाएगा। बता दें कि कुशाभाऊ ठाकरे कन्वेंशन सेंटर में आयोजित की गई प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सीएम मोहन यादव ने एक सवाल का जवाब देते हुए कहा कि ये तो 18 फरवरी को MP Budget 2026-27 में पता चल जाएगा।

    MP Budget 2026-27 का फोकस क्या या क्या हो सकता है खास?

    •     कृषि और ग्रामीण विकास- किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को समृद्ध बनाने वालीे योजनाओं पर
    •     रोजगार सृजन- अनुमान जताया जा रहा है कि लगभग 50 हजार सरकारी नौकरियां निकाली जाएंगी।
    •     युवा और कौशल- तकनीकी कौशल, उद्यमिता और नौकरियों के अन्य अवसरों पर जोर
    •     महिला सशक्तिकरण के लिए योजनाएं- महिला सशक्तिकरण से जुड़ी योजनाओं में वृद्धि की जा सकती है।

    केंद्रीय बजट 2026-27 – एमपी को क्या मिला?

    बता दें कि हाल ही पेश किए गए केंद्रीय बजट 2026-27 का असर एमपी के बजट की तैयारियों को प्रभावित कर सकता है। माना जा रहा है कि वित्त आयोग के करों को लेकर नये फॉर्मूले के कारण एमपी को केंद्रीय कर हिस्से से करीब 7,500 करोड़ का नुकसान होने की उम्मीद है। रेलवे और इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए एमपी को करीब 15,188 करोड़ का आवंटन किया गया है। नगर निगमों के लिए हरित बॉन्ड प्रोत्साहन में कमी कुछ शहरी वित्तीय प्रोत्साहन में एमपी नगर निकाय लाभ से वंचित रह सकते हैं। 

    उम्मीदें!

    विश्लेषकों का कहना है कि MP Budget 2026-27 राज्य की विकास यात्रा को तेज करने वाला बजट हो सकता है। यदि इसमें रोजगार, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और शिक्षा पर पर्याप्त निवेश होता है, खासकर उस स्थिति में जब राज्य की कर हिस्सेदारी घट चुकी है।

    तीसरा और अंतिम अनुपूरक बजट भी रहेगा खास

    बताया जा रहा है कि चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए तीसरा और अंतिम अनुपूरक बजट भी सदन में रखा जाएगा। सूत्रों के मुताबिक ये अनुपूरक बजट करीब 10 हजार करोड़ का हो सकता है। सरकार ने साफ कर दिया है कि अनुपूरक बटज में न तो किसी नई योजना के लिए प्रावधान होगा और न ही किसी विभाग को नये वाहन खरीदने के लिए राशि दी जाएगी। ऐसा कोई भी वित्तीय प्रावधान नहीं किया जाएगा। इससे राज्य के राजकोष पर अतिरिक्त बोझ पड़े।

  • बागेश्वरधाम में आयोजित होगा विशाल आयोजन, 300 युवतियों सहित नेपाल की बेटी भी शामिल; धीरेंद्र शास्त्री ने रखी शर्त

    बागेश्वरधाम में आयोजित होगा विशाल आयोजन, 300 युवतियों सहित नेपाल की बेटी भी शामिल; धीरेंद्र शास्त्री ने रखी शर्त

    छतरपुर 

    हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी बागेश्वर धाम में कन्या विवाह महोत्सव आयोजित होने जा रहा है। इस बार का महोत्सव इसलिए खास है क्योंकि यह सिर्फ राष्ट्रीय नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय हो गया है। नेपाल की भी एक बेटी का विवाह धाम से हो रहा है। रविवार को बागेश्वर धाम के पीठाधीश पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने वर-वधु को लहंगा, चुनरी, शेरवानी, टोपी, वरमाला आदि सामग्री भेंट की। वहीं उन्हें समझ्या कि अंतरराष्ट्रीय विवाह सम्मेलन में उन्हें कैसे आना है, क्या पहनकर आना है। क्या सुविधाएं मिलेंगी और क्या घर से करना होगा?

    सामूहिक विवाह का खर्च बागेश्वर धाम की दानपेटी से

    पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने बताया "यह 7वां सामूहिक कन्या विवाह महोत्सव होगा. आयोजन में पूरा खर्च धाम की दानपेटी से करते हैं. बागेश्वर धाम पर आयोजित होने वाला सामूहिक विवाह सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि उन बेटियों के लिए जीवन बदल देने वाला अवसर होता है, जिनके परिवार आर्थिक कारणों से विवाह नहीं कर पाते. इस बार बागेश्वर धाम की ओर से 300 बेटियों के हाथ पीले कर विदाई कराने का लक्ष्य रखा गया है. आयोजन में देशभर के वर-वधु शामिल होते हैं."

    बाबा बागेश्वर ने लिस्ट जारी की

    इस बार होने वाले सामूहिक आयोजन में बेटियों की बाबा बागेश्वर ने लिस्ट जारी कर नामों की घोषणा की. बाबा बागेश्वर खुद आयोजन की देखरेख करते है. लिस्ट बनाने में समिति को करीब 2 माह का समय लगा है. फार्म जमा होना, टीम का घर-घर जाना, परीक्षण होना, 30 हजार किलामीटर 40 से ज्यादा लोगों ने यात्रा कर सूची बनाई है. इस आयोजन में देशभर की बेटियों के हाथ पीली किये जा रहे हैं. मध्य प्रदेश, यूपी, बंगाल, राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली, महाराष्ट्र, झारखंड, छत्तीसगढ़ सहित देशभर की गरीब निर्धन बेटियों के विवाह होंगे. 

    समधियों को दी समझाइश

    उन्होंने सभी समधियों को समझाइश दी कि वे बहू को बेटी की तरह रखें, किसी भी प्रकार की कोई शिकायत न आए। शास्त्री ने कुछ समधियों को बुलाकर उनसे हंसी मजाक करते उन्हें गुलाल भी लगाया। धीरेंद्र शास्त्री ने ट्वीट कर दी विवाह महोत्सव की पूरी जानकारी। यहां सुन लें आप भी…

    वर-वधू के नाम से होगी संयुक्त एफडी

    पं. शास्त्री ने बताया, इस बार वर-वधू के नाम से संयुक्त रूप से 30 हजार की एफडी कराई जाएगी। यह एफडी 5 वर्ष से पहले नहीं तोड़ी जा सकेगी। बागेश्वर धाम में महाशिवरात्रि को सप्तम कन्या विवाह महोत्सव आयोजित हो रहा है। 

    300 बेटियों का गठबंधन

    मध्यप्रदेश के छतरपुर जिले में होने वाले इस सामूहिक विवाह महोत्सव में 300 बेटियों को परिणय सूत्र में बांधा जाएगा। पं. शास्त्री ने कहा जो बेटियां दूर से आने वाली हैं, वे 14 फरवरी को आ जाएं। रविवार को वर और वधू पक्ष को बुलाकर शुरुआती सामग्री भेंट की गई। पं. धीरेंद्र शास्त्री ने विवाह महोत्सव में शामिल होने वाले वर वधू पक्ष को बताया क्या होंगी व्यवस्थाएं, क्या हैं नियम…

    वर-वधु पक्ष के लिए यह रहेगी व्यवस्था

    वर एवं वधू पक्ष को जो महत्वपूर्ण पास दिए गए हैं, उनमें वधू पक्ष के वाहनों के लिए दो पास एवं वधू के लिए एक कार्ड दिया गया है। इसी तरह वर पक्ष के वाहनों के लिए दो पास एवं उपहार ले जाने के लिए एक उपहार वाहन पास दिया गया है। साथ ही वर के लिए कार्ड दिया गया है। वर तथा वधु पक्ष के 25-25 सदस्यों के लिए भोजन के कूपन भी उपलब्ध कराए गए हैं, ताकि वे आसानी से भोजन प्राप्त कर सकें। महाराज ने वरवधु मंडप भोजन हेतु अलग से भोजन की व्यवस्था की है।

    पिछले साल 251 विवाह हुए थे

    साल 2025 में हुए कन्या विवाह में 108 आदिवासी बेटियों सहित 251 बेटियों को परिणय सूत्र में बांधा गया था. राष्ट्रपति महामहिम द्रोपदी मुर्मू ने बागेश्वर धाम आकर न केवल बेटियों को आशीर्वाद दिया था बल्कि अपनी ओर से उपहार भी भेंट किये थे. इसके अलावा देशभर से साधु-संतों ने भी वर-वधू को शीर्वाद दिया था.

    शास्त्री बोले- बहू को अपनी बेटी की तरह रखें

    सामग्री वितरण के दौरान धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने वर पक्ष के अभिभावकों से विशेष अपील की। उन्होंने कहा, "घर आने वाली बहू को अपनी बेटी की तरह रखें। समाज में ऐसी कोई शिकायत नहीं मिलनी चाहिए जिससे धाम की मर्यादा पर आंच आए।"

    उन्होंने बताया कि 500 से अधिक आवेदनों में से सर्वे टीम ने उन बेटियों को चुना है जो अत्यंत गरीब हैं या जिनके सिर से माता-पिता का साया उठ चुका है।

    मेहमानों और व्यवस्थाओं की खास तैयारी

    आयोजन को सुचारू बनाने के लिए प्रशासन और धाम के सेवादारों ने पुख्ता इंतजाम किए हैं।

    वाहनों के लिए पास: वर और वधू पक्ष को अलग-अलग वाहन पास जारी किए गए हैं ताकि यातायात में परेशानी न हो।

    भोजन व्यवस्था: दोनों पक्षों के 25-25 सदस्यों के लिए भोजन कूपन दिए गए हैं। साथ ही वर-वधू और मंडप में मौजूद लोगों के लिए अलग से विशेष भोजन की व्यवस्था की गई है।

    विशिष्ट अतिथि: इस भव्य महोत्सव में देशभर के बड़े संत, महात्मा और राजनैतिक जगत की हस्तियां शामिल होंगी।

    14 फरवरी तक पहुंचेंगी बेटियां

    दूर-दराज के क्षेत्रों से आने वाली बेटियों को 14 फरवरी तक धाम पहुंचने का निर्देश दिया गया है। महाराज ने इस आयोजन को सफल बनाने में जुटी सर्वे टीम और सेवादारों की मेहनत की सराहना करते हुए कहा कि धाम की वर्तमान क्षमता के अनुसार श्रेष्ठ व्यवस्थाएं की जा रही हैं।

     

  • भोपाल मेट्रो में बड़ा विस्तार: 32 किमी नई लाइन और 27 रैक मिलने की योजना

    भोपाल मेट्रो में बड़ा विस्तार: 32 किमी नई लाइन और 27 रैक मिलने की योजना

     भोपाल 
    एमपी के भोपाल शहर में मेट्रो का काम चल रहा है। इसी बीच मेट्रो रैक की वडोदरा से आपूर्ति फिलहाल रोक दी गई है। यहां से तीन-तीन कोच के 27 रैक मिलने तय हुए हैं। आठ रैक की आपूर्ति हो चुकी है। अभी कमर्शियल रन में महज दो रैक का ही उपयोग किया जा रहा है। छह रैक अभी डिपो में ही हैं। ऐसे में जब तक प्रोजेक्ट में 32 किमी की लाइन नहीं बन जाती, तब तक नए रैक की आपूर्ति रोक दी गई है। गौरतलब है कि मेट्रो ट्रेन की रैक को बनाने का काम वडोदरा के पास स्थापित प्लांट में हो रहा है।
    देरी से बढ़ेगी कीमत

    मेट्रो रैक के लिए अनुबंध किया हुआ है। अब तब रैक भेजा जाएगा, जब लाइन पूरी होगी। उस समय की स्थिति के अनुसार कीमत होगी। 2023 में पहला रैक यहां आया था। 2024 तक आठ रैक आ गए। इस समय इनकी कीमत दस फीसदी तक बढ़ गई है। 2028 तक ये करीब 20 फीसदी महंगी होगी। यानी प्रोजेक्ट में जितनी देरी होगी, रैक उतना महंगा होगा। एमडी मेट्रो रेल चैतन्य कृष्णा के अनुसार प्रोजेक्ट की शुरुआती दो लाइनों पर फोकस किया जा रहा है। अब तेजी से इसे पूरा किया जा रहा है।

    देरी का असर यहां पर भी

    -भोपाल मेट्रो परियोजना की लागत 2017- 18 में 6,941 करोड़ रुपए तय थी

    -प्रति किमी 249 करोड़ रुपए की लागत आंकलित की थी

    वर्ष 2025 में बढ़कर ये 10,033 करोड़ रुपए हो गई

    -प्रति किमी खर्च 371 करोड़ रुपए पहुंच गया

    -ये बढ़ोतरी 43 प्रतिशत है। देरी से कीमत बढऩे और प्रोजेक्ट के वित्तीय संकट के तौर पर होगा

    शहर को मिलेगी बड़ी सौगात

    केंद्रीय बजट में भोपाल मेट्रो समेत नेशनल हाइवे और ब्रिज की उम्मीद बेहतर हुई। टियर दो- तीन शहरों के लिए 12.02 लाख करोड़ रुपए आवंटित हुए हैं, इसमें भोपाल की भागीदारी होगी। मेट्रो की मौजूदा 32 किमी की लाइन को पूरा करने 5000 करोड़ रुपए की जरूरत है।

    इसी तरह टियर 2 शहरों में सिटी इकोनॉमिक रीजन का प्रावधान किया है, जिसमें पांच साल में 5000 करोड़ रुपए मिलेंगे। भोपाल को लाभ मिला तो यहां लॉजिस्टिक व हाइवे कनेक्टिविटी के लिए काम शुरू हो सकता है।

  • MP की पंचायतें हुईं डिजिटल! 2100 सेवाओं का लाभ अब मोबाइल पर, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा मजबूती

    MP की पंचायतें हुईं डिजिटल! 2100 सेवाओं का लाभ अब मोबाइल पर, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा मजबूती

    भोपाल 

    पंचायतों में ई-सेवा ऐप व पोर्टल लागू होगा। इसके तहत पंचायत स्तर की सेवाओं की कम से कम समय में डिलीवरी होगी। अभी लोगों को इन सुविधाओं के लिए जनपद से लेकर जिला पंचायत तक चक्कर लगाने पड़ते हैं। इस ऐप पर 2100 तरह की सेवाएं उपलपध कराई जानी हैं, इनमें से करीब 600 सेवाओं को उपलब्ध कराया जाने लगा है। इनमें पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की सेवाएं भी शामिल हैं। इन सभी सेवाओं की नियमित डिलीवरी हो, पंचायतों के स्तर पर किए जाने वाले कामों में गति आए और पंचायत स्तर पर पर गड़बडिय़ां का स्तर जीरो हो जाए, इसके लिए सरकार ई-ऑफिस की तरह ई-पंचायत मॉडल लागू करने जा रही है।
    अब ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत करने की कवायद

    असल में केंद्र व राज्य सरकार का बड़ा फोकस शहरों पर रहा है। अब ग्रामीण अर्थ व्यवस्था को भी मजबूत करने की कवायद की जा रही है। इसका रास्ता पंचायतों से ही होकर गुजरता है। ऐसा इसलिए क्योंकि राज्य की बड़ी आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में ही रहती है। इन सभी बातों को देखते हुए पंचायतों को सशक्त बनाने के प्रयास तेज किए हैं। इसके साथ ही ऐप के जरिए पंचायत से मिलने वाली सेवाओं को और अधिक पारदर्शी भी बनाया जा सकेगा।

    खाली जमीनों से हटाया जाएगा अतिक्रमण

    मध्यप्रदेश में ज्यादातर पंचायतों के पास खाली जमीनों का एक बड़ा लैंडबैंक है, जिसका उपयोग नहीं हो रहा है। कई पंचायतों में तो अतिक्रमण करने वालों बेशकीमती जमीनों पर कव्जा कर रखा है। अब सरकार उक्त खाली जमीन का उपयोग पंचायतों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए करने जा रही है। इसके तहत पंचायतों की जमीनों के एक हिस्से का भविष्य में व्यावसायिक उपयोग हो सकता है।

    खाली जमीन पर सभी तरह की प्लानिंग से पहले लैंडबैंक तैयार किया जा रहा है, जो यह बताएगा कि किस पंचायत में कुल कितनी जमीन हैं, उसमें से कितनी का उपयोग हो रहा है, कितनी खाली है और कितने क्षेत्र में अतिक्रमण है और उसको हटाने की कार्रवाई किस स्तर पर है।

    एक बगिया मां के नाम… बनेगी आय का जरिया

    पंचायतों में बड़े स्तर पर एक बगिया मां के नाम विकसित की जा रही हैं। इनका मकसद पंचायतों में फलदार व छायादार पेड़ों वाला ह्रश्वलांटेशन विकसित करना है, ताकि पंचायतों के लिए आय का जरिया बन सके और पंचायतें आत्मनिर्भर बनने के साथ पर्यावरण को भी लाभ हो।

    इन पर भी फोकस

    आपदाओं से बचाने की पहल: अभी पंचायत स्तर पर प्राकृतिक आपदा से बचने और उससे होने वाले नुकसानों की वैज्ञानिक आधार पर गणना करने के कोई विकल्प नहीं है। पहली बार सरकार ने पंचायतों में मौसम केंद्र व वर्षामापी यंत्र लगाने की पहल की है। इसके लिए 23 हजार पंचायतों पर 350 करोड़ रुपए खर्च किए जाने का प्रावधान किया है। इससे स्थानीय स्तर पर मौसम में बदलाव की जानकारी समय पूर्व मिलेगी। इससे 
    किसानों व ग्रामीणों को बचाव करने में लाभ होंगे।

    वर्षामापी यंत्र: बारिश को रेकॉर्ड करने में मदद मिलेगी। अभी यह काम जिला स्तर पर होता है लेकिन कई मौके ऐसे आ चुके हैं जब एक या कुछ पंचायतों में ही अतिवृष्टि हो जाती है, पूरा जिला प्रभावित नहीं होता। इसके कारण संबंधित अफसर और एजेंसियां नुकसान नहीं मानती। इस तरह संबंधित पंचायतों के लोगों को नुकसान की भरपाई नहीं होती।

  • चिकन नेक के लिए मास्टरस्ट्रोक! जमीन के अंदर 40 KM लंबा कनेक्शन, दुश्मन भी रह जाएंगे हैरान

    चिकन नेक के लिए मास्टरस्ट्रोक! जमीन के अंदर 40 KM लंबा कनेक्शन, दुश्मन भी रह जाएंगे हैरान

    नई दिल्ली

    बंगाल सिलीगुड़ी के पास ‘चिकन नेक’ भारत की वह नब्ज है, जो शेष भारत को पूर्वोत्तर राज्यों से जोड़ता है. यह एक संकरा क्षेत्र है, जिसकी चौड़ाई मात्र 20 किलोमीटर है. इसकी संकरापन देखते हुए कई लोगों ने तोड़ने की धमकी दी, हालांकि, उनको समय पर उचित जवाब दिया जाता रहा है. केंद्र की सरकार इसकी सुरक्षा को लेकर लेकर काफी गंभीर है. इसकी सुरक्षा के लिए केंद्र ना केवल आसमान और धरती पर पैनी नजर रख रही है बल्कि अब धरती के अंदर से भी इसकी सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की तैयारी चल रही है. सरकार चिकन नेक की सुरक्षा के लिए फूल-प्रूफ प्लान लेकर आई है. अब चिकन नेक से होते हुए 40 किलोमीटर लंबे रेलवे टनल बनाने की तैयारी चल रही है.

    सोमवार को केंद्रीय रेलवे मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इसकी जानकारी दी. उन्होंने सोमवार को टनल के बारे में जानकारी देते हुए बताया, ‘केंद्र नॉर्थ-ईस्ट को बाकी भारत से जोड़ने वाले 40 किलोमीटर लंबी स्ट्रेटेजिक कॉरिडोर पर अंडरग्राउंड रेल ट्रैक बनाने की योजना बना रहा है. इससे नॉर्थ-ईस्ट और बाकी भारत के बीच कनेक्टिविटी को मजबूत और सुरक्षित किया जा सकेगा.’

    अश्विनी वैष्णव ने क्या कहा देखिए

    कहां से कहां तक ?
    प्रस्तावित अंडरग्राउंड हिस्सा टिन माइल हाट और रंगापानी रेलवे स्टेशनों के बीच संकरे सिलीगुड़ी कॉरिडोर पर चलेगा. इसे आमतौर पर चिकन नेक के नाम से जाना जाता है. यह नॉर्थ-ईस्ट के आठ राज्यों अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, सिक्किम और त्रिपुरा को मुख्य शेष भारत को जोड़ने का काम करता है. चिकन नेक जमीन नॉर्थ ईस्ट को जोड़ने वाली संकरी पट्टी है. इसकी लंबाई 60 किलोमीटर और चौड़ाई मुश्किल से 20 किलोमीटर है. इसकी सीमा नेपाल, भूटान और बांग्लादेश से लगती है. भौगोलिक स्थिति और स्ट्रेटेजिक संवेदनशीलता के कारण, इस कॉरिडोर को लंबे समय से राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक गंभीर खतरा माना जाता रहा है.

    बजट पर बात करते हुए जानकारी दी

    रेलवे के लिए यूनियन बजट में हुए आवंटन के बारे में वीडियो कॉन्फ्रेंस के ज़रिए रिपोर्टरों से बात की. वैष्णव ने कहा, ‘नॉर्थ ईस्ट को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ने वाले 40 किलोमीटर के स्ट्रेटेजिक कॉरिडोर के लिए खास प्लानिंग है. अंडरग्राउंड रेलवे ट्रैक बिछाने और मौजूदा ट्रैक को चार-लाइन करने की भी प्लानिंग चल रही है.’

    डिफेंस के लहजे से अहम

    अंडरग्राउंड रेल का प्रस्ताव इंडियन रेलवे की लॉन्ग-टर्म स्ट्रैटेजी का हिस्सा है. ताकि कॉरिडोर पर भीड़ कम हो, जरूरत के हिसाब से सामान बेहतर हो. यात्रियों, के साथ-साथ सामान और डिफेंस लॉजिस्टिक्स की बिना रुकावट आवाजाही पक्की हो सकेगी. अभी, सिलीगुड़ी कॉरिडोर में कई रेलवे लाइनें, हाईवे, तेल पाइपलाइन और कम्युनिकेशन नेटवर्क हैं, जो इसे देश के सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले और सेंसिटिव ट्रांजिट जोन में से एक बनाता है.

    सुरक्षा के लिए जरूरी
    नॉर्थईस्ट फ्रंटियर रेलवे (NFR) के जनरल मैनेजर चेतन कुमार श्रीवास्तव ने इसे लेकर अहम जानकारी दी. उन्होंने बताया अंडरग्राउंड रेलवे लाइनें पश्चिम बंगाल में तीन मील हाट-रंगापानी सेक्शन पर बनाई जाएंगी. श्रीवास्तव ने कहा, ‘यह अंडरग्राउंड हिस्सा सुरक्षा के नज़रिए से ज़रूरी है.’ उन्होंने कॉरिडोर की स्ट्रेटेजिक अहमियत और ऐसे इंफ्रास्ट्रक्चर की ज़रूरत पर ज़ोर दिया जो कुदरती और इंसानों की बनाई, दोनों तरह की रुकावटों को झेल सके.

  • 4 फरवरी का राशिफल: ग्रहों की चाल बदलेगी इन राशियों की किस्मत

    4 फरवरी का राशिफल: ग्रहों की चाल बदलेगी इन राशियों की किस्मत

    मेष

    मेष राशि वालों के लिए दिन सामान्य रहने वाला है। कामकाज में धीरे-धीरे बात बनेगी, बस जल्दबाजी से बचें। आज छोटे फैसले ज्यादा असर दिखा सकते हैं। परिवार या किसी करीबी से बातचीत मन हल्का करेगी। पैसों को लेकर ज्यादा रिस्क न लें और बेवजह खर्च से बचें। सेहत सामान्य रहेगी, लेकिन थकान लगे तो खुद को थोड़ा आराम जरूर दें।
    वृषभ

    वृषभ राशि वालों के लिए दिन मिला-जुला रहेगा। काम में रफ्तार भले धीमी लगे, लेकिन मेहनत बेकार नहीं जाएगी। पैसों के मामले में सोच-समझकर चलना जरूरी है, छोटी बचत आगे काम आ सकती है। घर का माहौल ठीक रहेगा और किसी अपने का साथ अच्छा लगेगा। सेहत ठीक रहेगी, बस खानपान में लापरवाही न करें।
    मिथुन

    मिथुन राशि वालों के दिमाग में कई बातें चलेंगी। एक साथ बहुत कुछ करने के बजाय एक काम पर ध्यान दें। काम से जुड़ा कोई नया आइडिया फायदेमंद साबित हो सकता है। पैसों में फिजूलखर्ची से बचना बेहतर रहेगा। रिश्तों में बातचीत से बात बनेगी, बस शब्दों का ध्यान रखें। सेहत के लिहाज से दिन सामान्य है।
    कर्क

    कर्क राशि वालों का ध्यान परिवार और निजी जिंदगी पर रहेगा। घर से जुड़ी कोई बात मन को सुकून दे सकती है। काम में धैर्य रखना जरूरी है, चीजें अपने समय पर आगे बढ़ेंगी। पैसों में कोई बड़ी दिक्कत नहीं है, लेकिन खर्च संभालकर करें। सेहत ठीक रहेगी, तनाव को खुद पर हावी न होने दें।
    सिंह

    सिंह राशि वालों पर जिम्मेदारियां थोड़ी ज्यादा रह सकती हैं। काम में आपकी बात सुनी जाएगी, लेकिन अहंकार से दूरी रखें। पैसों के मामले में स्थिति स्थिर रहेगी। रिश्तों में थोड़ा समझौता करना पड़ सकता है। सेहत सामान्य है, बस ज्यादा भागदौड़ से बचें।
    तुला

    तुला राशि वालों के लिए दिन व्यवस्थित रहने वाला है। कामकाज में आपकी मेहनत दिखेगी और तारीफ भी मिल सकती है। पैसों का हिसाब साफ रखें, इससे तनाव नहीं रहेगा। रिश्तों में छोटी बातों को तूल न दें। सेहत ठीक है, दिनचर्या बनाए रखें।
    धनु

    धनु राशि वालों को संतुलन बनाकर चलना होगा। काम और घर दोनों जगह तालमेल जरूरी रहेगा। पैसों को लेकर कोई भी फैसला सोच-समझकर लें। रिश्तों में सहयोग मिलेगा और बातचीत से गलतफहमी दूर हो सकती है। सेहत में हल्की सुस्ती रह सकती है, थोड़ा एक्टिव रहें।
    मकर

    मकर राशि वालों के लिए बड़े बदलाव का दिन हो सकता है। काम में कोई नई जिम्मेदारी मिल सकती है, जो आगे फायदेमंद रहेगी। पैसों की स्थिति सुधर सकती है, लेकिन जल्दबाजी ठीक नहीं। रिश्तों में साफ बात रखना जरूरी है। सेहत में पहले से बेहतर महसूस करेंगे।
    कुम्भ

    कुंभ राशि वालों को धैर्य से काम लेना होगा। काम में चीजें धीरे आगे बढ़ेंगी, लेकिन दिशा सही रहेगी। पैसों को लेकर प्लानिंग जरूरी है, नहीं तो खर्च बढ़ सकता है। रिश्तों में बातचीत से माहौल बेहतर रहेगा। सेहत सामान्य रहेगी।
    कन्या

    कन्या राशि वालों के लिए मेहनत का दिन है। काम में आपकी लगन पहचान दिला सकती है। पैसों में स्थिरता बनी रहेगी, लेकिन बड़े निवेश फिलहाल टालें। परिवार के साथ समय बिताने से मन को सुकून मिलेगा। सेहत ठीक है, बस काम का बोझ ज्यादा न लें।
    वृश्चिक

    वृश्चिक राशि वालों के मन में नए आइडिया आ सकते हैं। काम में बदलाव का फायदा मिल सकता है। पैसों में सुधार के संकेत हैं, लेकिन खर्च संभालकर करें। रिश्तों में दोस्ताना माहौल रहेगा। सेहत के लिहाज से दिन ठीक रहेगा।
    मीन

    मीन राशि वालों के लिए दिन थोड़ा शांत रहने वाला है। काम में धीरे-धीरे स्पष्टता आएगी। पैसों को लेकर संतुलन बनाए रखना जरूरी है। रिश्तों में भावनात्मक जुड़ाव बढ़ेगा। सेहत ठीक रहेगी, बस मन को शांत रखने की कोशिश करें।

  • वर्दी में भी राज छुपते हैं: जम्मू-कश्मीर के पूर्व DGP ने जनरल नरवणे को दी नसीहत

    वर्दी में भी राज छुपते हैं: जम्मू-कश्मीर के पूर्व DGP ने जनरल नरवणे को दी नसीहत

    नई दिल्ली
    लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने पूर्व सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे के अप्रकाशित संस्मरण (मेमॉयर) पर आधारित एक लेख का हवाला देकर पिछले दो दिनों से राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े करने की कोशिश की है। मंगलवार को उन्होंने लोकसभा में फिर से चीन के साथ सैन्य टकराव का मुद्दा उठाने का प्रयास किया, जिसके बाद सदन में सत्तापक्ष और विपक्ष के सदस्यों के बीच तीखी नोकझोंक और हंगामा हो गया। इस हंगामे और विवाद के बीच जम्मू-कश्मीर के पूर्व डीजीपी एसपी वैद ने जनरल नरवणे को नसीहत देते हुए एक बड़ा बयान दिया है।

    पूर्व डीजीपी एसपी वैद ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पूर्व सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे को नसीहत देते हुए लिखा कि पूर्व सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे को बेहतर समझदारी दिखानी चाहिए थी। वर्दीधारी सैनिकों के पास जो कुछ भी होता है, उसका अधिकांश हिस्सा उनके साथ कब्र तक जाने के लिए होता है। अगर हर कोई इस बारे में बोलने लगे, तो सरकारें कांप उठेंगी।

    बता दें कि राहुल गांधी ने मंगलवार को नरवणे की पुस्तक पर आधारित लेख को सत्यापित करने की मांग करते हुए सदन के पटल पर रखा। उन्होंने कहा कि मैं चाहता हूं कि इसे सत्यापित किया जाए, मैं इसे पटल पर रख रहा हूं। इतना ही नहीं, कांग्रेस नेता ने लेख का हवाला देते हुए कहा कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा का महत्वपूर्ण मुद्दा है, जो चीन और पाकिस्तान से जुड़ा है तथा राष्ट्रपति के अभिभाषण का प्रमुख हिस्सा है।

    राहुल गांधी के बयान पर संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि जब आसन की ओर से व्यवस्था दी जा चुकी है, तो नेता प्रतिपक्ष को उस विषय का उल्लेख नहीं करना चाहिए। उन्होंने कांग्रेस नेताओं के साथ हुई बैठक का हवाला दिया, जिस पर कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने मंत्री पर सदन को गुमराह करने का आरोप लगाया।

    कांग्रेस अध्यक्ष ने भी सरकार को घेरा
    वहीं, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान राहुल गांधी को पूर्व सेनाध्यक्ष मनोज मुकुंद नरवणे की पुस्तक के बारे में बोलने से रोके जाने पर हैरानी जताई और सवाल उठाया कि आखिर इस किताब में ऐसा क्या है जिससे मोदी सरकार के बड़े-बड़े मंत्री घबरा रहे हैं। खरगे ने सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट में कहा कि आरएसएस-भाजपा की वैचारिक आधारशिला ही तथ्यों को छिपाने पर टिकी है, तभी मोदी सरकार संसद में राष्ट्रीय सुरक्षा के गंभीर सवालों पर जवाब देने से ऐसे बच रही है जैसे उसकी दुखती रग पर किसी ने हाथ रख दिया हो। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सदन में राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा एक बेहद गंभीर मुद्दा उठाया है।

    मोदी सरकार के बड़े मंत्री क्यों घबरा रहे?
    उन्होंने कहा कि पूर्व सेनाध्यक्ष की किताब में ऐसा क्या लिखा है जिससे मोदी सरकार के बड़े-बड़े मंत्री घबरा रहे हैं। उनकी किताब को प्रकाशित होने से कौन रोक रहा है। पूरा देश जानता है कि भाजपा का राष्ट्रवाद झूठा है। वे देशभक्ति की बड़ी-बड़ी बातें करते हैं, पर 2020 में गलवान में हमारे 20 जवानों के सर्वोच्च बलिदान के बाद मोदी जी खुद चीन को क्लीन चिट थमा देते हैं। क्या ये सच नहीं है? उन्होंने सवाल किया कि क्या संसद में इससे पहले राष्ट्रीय सुरक्षा तथा विदेश नीति से जुड़े मुद्दों पर देश को विश्वास में नहीं लिया गया है। उन्होंने मोदी सरकार को कठघरे में खड़ा करते हुए कहा कि 'लोकतंत्र की जननी' की बात करने वाले लोकतंत्र की आत्मा को रौंदने में क्यों जुटे हुए हैं।

  • तेल पर ट्रंप के दावों का सच: रूस ने खोला राज, भारत में हड़कंप

    तेल पर ट्रंप के दावों का सच: रूस ने खोला राज, भारत में हड़कंप

    मॉस्को
    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दावे के बाद भारत-रूस संबंधों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। ट्रंप ने भारत पर लगे टैरिफ को घटाते हुए सोमवार को कहा था कि भारत ने अमेरिका के साथ व्यापार समझौते के तहत रूस से तेल खरीदना बंद करने पर सहमति जताई है, लेकिन रूस ने इस दावे पर साफ शब्दों में कहा है कि भारत की ओर से उसे ऐसा कोई आधिकारिक संदेश नहीं मिला है। रूस के राष्ट्रपति कार्यालय (क्रेमलिन) के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने मंगलवार को कहा कि मॉस्को भारत के साथ अपने रणनीतिक साझेदारी वाले रिश्तों को बेहद अहम मानता है और उन्हें आगे भी मज़बूत करना चाहता है।
     
    ट्रंप का बड़ा ऐलान
    ट्रंप ने एक दिन पहले घोषणा की थी कि अमेरिका और भारत के बीच एक नया व्यापार समझौता हुआ है। इसके तहत अमेरिकी बाजार में भारतीय निर्यात पर लगने वाला टैरिफ 50% से घटाकर 18% कर दिया जाएगा। इसी के साथ ट्रंप ने दावा किया था कि इसके बदले भारत रूस से तेल खरीद बंद करेगा और अमेरिका से ज़्यादा तेल खरीदेगा। ट्रंप ने यह भी कहा था कि भारत के रूसी तेल खरीदने से यूक्रेन युद्ध में रूस को अप्रत्यक्ष रूप से मदद मिल रही है।

    रूस की दो टूक
    इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए क्रेमलिन के प्रवक्ता पेसकोव ने कहा, “रूस भारत के साथ संबंधों पर ट्रंप की टिप्पणियों का ध्यान से विश्लेषण कर रहा है।” जब उनसे सीधे पूछा गया कि क्या भारत ने रूसी तेल खरीदना बंद करने का फैसला किया है, तो उन्होंने दो टूक जवाब दिया, "अब तक तो हमने भारत की ओर से रूस से तेल खरीद रोकने को लेकर कोई आधिकारिक बयान नहीं सुना है।” उन्होंने कहा कि नई दिल्ली भारत-रूस साझेदारी को भी उतनी ही अहमियत देता है।

    पेसकोव ने कहा, "हम द्विपक्षीय अमेरिकी-भारतीय संबंधों का सम्मान करते हैं लेकिन हम रूस और भारत के बीच एक उन्नत रणनीतिक साझेदारी के विकास को भी उतना ही महत्व देते हैं। भारत के साथ हमारे रिश्ते हमारे लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं और हम उन्हें आगे भी विकसित करना चाहते हैं।”

    तेल और कूटनीति
    यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद 2022 से भारत रियायती रूसी कच्चे तेल का सबसे बड़ा खरीदार बनकर उभरा है। पश्चिमी देशों ने इस पर नाराज़गी जताई है और रूस की ऊर्जा आय को सीमित करने के लिए कई प्रतिबंध लगाए हैं। हालांकि भारत का रुख हमेशा यही रहा है कि वह अपनी ऊर्जा सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देता है। बहरहाल, तस्वीर अभी साफ नहीं है क्योंकि एक तरफ ट्रंप का बड़ा दावा है, तो दूसरी तरफ रूस का इनकार। भारत की ओर से अब तक इस मुद्दे पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। ऐसे में यह साफ है कि तेल, व्यापार और कूटनीति का यह खेल अभी जारी रहेगा।

  • 10वीं छात्र की मौत: दोस्तों संग पब में पार्टी के बाद 7वीं मंजिल से कूदकर हुआ संदिग्ध हादसा

    10वीं छात्र की मौत: दोस्तों संग पब में पार्टी के बाद 7वीं मंजिल से कूदकर हुआ संदिग्ध हादसा

    बेंगलुरु
    कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु शहर में शनिवार रात एक दुखद और चौंकाने वाली घटना सामने आई, जब कक्षा 10 के एक छात्र की अपने अपार्टमेंट की सातवीं मंजिल से गिरने के बाद मौत हो गई। पुलिस इस मामले की हर पहलू से जांच कर रही है और अब तक की जांच में इसे एक संभावित आत्मघाती कदम माना जा रहा है। पुलिस के अनुसार, छात्र शनिवार शाम अपने स्कूल के कुछ दोस्तों के साथ एक पब गया था। पार्टी के बाद वह करीब रात 9 बजे घर लौटा। सीसीटीवी फुटेज में देखा गया है कि उसके दोस्त उसे अपार्टमेंट के गेट तक छोड़कर चले गए। इसके बाद छात्र अकेले लिफ्ट से सातवीं मंजिल पर गया।

    पुलिस का कहना है कि वह अपने फ्लैट में जाने के बजाय बालकनी की ओर गया, जहां से उसके गिरने की आशंका है। बालकनी की रेलिंग ऊंची होने के कारण हादसे की संभावना कम मानी जा रही है। छात्र की मौत रात करीब 9.40 बजे हुई। जांच के दौरान पुलिस को जानकारी मिली कि छात्र ने शाम को Legacy Brewing Company नामक पब में दोस्तों के साथ कथित तौर पर शराब पी और धूम्रपान भी किया। इसी आधार पर पब के मालिकों और कर्मचारियों के खिलाफ नाबालिग को शराब परोसने का मामला दर्ज किया गया है। हालांकि पब प्रबंधन ने इन आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि उन्होंने नाबालिग को शराब नहीं दी और वह कथित तौर पर अपने साथ शराब लेकर आया था। पुलिस अब पब के सीसीटीवी फुटेज की जांच कर रही है ताकि घटनाक्रम की सच्चाई सामने आ सके। इस बीच, पुलिस ने जांच पूरी होने तक पब का लाइसेंस रद्द करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।

    हर एंगल से जांच
    एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया, “फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि छात्र किन परिस्थितियों में गिरा। आत्महत्या सहित सभी पहलुओं की जांच की जा रही है।” पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या छात्र परिवार की प्रतिक्रिया से डर रहा था, या फिर उस पर पढ़ाई का दबाव था या मानसिक तनाव या कोई निजी परेशानी इस घटना की वजह तो बनी। पुलिस छात्र के दोस्तों और परिवार के बयान दर्ज कर रही है। सभी सीसीटीवी फुटेज की बारीकी से जांच के बाद ही स्थिति साफ होने की बात कही जा रही है।

     

  • इलाहाबाद HC का सख्त रुख: यूपी के सभी सहायक शिक्षकों की नियुक्तियों पर होगी गहन जांच

    इलाहाबाद HC का सख्त रुख: यूपी के सभी सहायक शिक्षकों की नियुक्तियों पर होगी गहन जांच

    इलाहाबाद
    उत्तर प्रदेश में शिक्षा विभाग के भीतर जड़ें जमा चुके भ्रष्टाचार और फर्जीवाड़े पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बेहद सख्त रुख अपनाया है। एक ऐतिहासिक फैसले में अदालत ने राज्य सरकार को आदेश दिया है कि पूरे उत्तर प्रदेश में सहायक अध्यापकों की नियुक्तियों की व्यापक जांच की जाए। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नौकरी हथियाने वाले शिक्षकों को न केवल बर्खास्त किया जाए, बल्कि उनसे अब तक ली गई सैलरी की वसूली भी की जाए।

    6 महीने के भीतर जांच पूरी करने का निर्देश
    न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान की एकल पीठ ने प्रदेश के बेसिक शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव को यह जिम्मेदारी सौंपी है। अदालत ने निर्देश दिया है कि पूरी जांच प्रक्रिया को छह महीने के भीतर पूरा किया जाए। हाईकोर्ट ने उन अधिकारियों को भी कड़ी चेतावनी दी है जिनकी मिलीभगत या लापरवाही की वजह से ऐसे फर्जी शिक्षक सिस्टम में बने रहे। अदालत ने आदेश दिया है कि जांच में दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ भी सख्त दंडात्मक और अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए।

    15 साल की सेवा के बाद खुली पोल
    यह पूरा मामला गरिमा सिंह नाम की एक शिक्षिका की याचिका से शुरू हुआ। गरिमा सिंह को जुलाई 2010 में देवरिया जिले के सलेमपुर विकास खंड के एक उच्चतर प्राथमिक विद्यालय में सहायक अध्यापक के पद पर नियुक्त किया गया था। वह लगभग 15 वर्षों से अपनी सेवा दे रही थीं।

    2025 में एक शिकायत के आधार पर हुई जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ। स्पेशल टास्क फोर्स (STF) और अन्य संबंधित अधिकारियों की जांच में पाया गया कि गरिमा सिंह ने जिन शैक्षिक दस्तावेजों और निवास प्रमाण पत्र का उपयोग किया था, वे फर्जी थे। असल में वे दस्तावेज किसी अन्य व्यक्ति के थे, जिनके नाम का सहारा लेकर उन्होंने धोखाधड़ी से नौकरी हासिल की थी। इसके बाद अगस्त 2025 में बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) देवरिया ने उनकी नियुक्ति रद्द कर दी थी।

    कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए जताई चिंता
    गरिमा सिंह ने अपनी बर्खास्तगी को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। उनके वकील का तर्क था कि वह 15 साल से निष्कलंक सेवा दे रही हैं और नियुक्ति के समय उनके दस्तावेजों का वेरिफिकेशन हो चुका था। हालांकि, अदालत ने इन दलीलों को सिरे से खारिज कर दिया। न्यायमूर्ति चौहान ने टिप्पणी की कि "धोखाधड़ी से प्राप्त लाभ का लाभ उठाने वाला व्यक्ति किसी भी तरह की रियायत या जांच का हकदार नहीं है।"

    अदालत ने उत्तर प्रदेश की शिक्षा प्रणाली में फर्जी प्रमाण पत्रों के बढ़ते पैटर्न पर गहरी चिंता व्यक्त की। कोर्ट ने कहा कि कई सहायक अध्यापक फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बरसों से नौकरी कर रहे हैं और यह सब प्रबंधन या शिक्षा विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत के बिना संभव नहीं है।

    छात्रों का भविष्य सबसे ऊपर
    इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि अधिकारियों की निष्क्रियता न केवल धोखाधड़ी को बढ़ावा देती है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था की नींव पर प्रहार करती है। अदालत के अनुसार, छात्रों का हित सर्वोपरि है और अयोग्य शिक्षकों द्वारा बच्चों को दी जाने वाली शिक्षा के साथ समझौता नहीं किया जा सकता।