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  • मेरा काम आसान करते हैं… सूर्यकुमार यादव की कप्तानी पर गौतम गंभीर हुए फिदा

    मेरा काम आसान करते हैं… सूर्यकुमार यादव की कप्तानी पर गौतम गंभीर हुए फिदा

    नई दिल्ली
    भारत के मुख्य कोच गौतम गंभीर ने सूर्यकुमार यादव की 'संयमित नेतृत्व क्षमता' की तारीफ की है। उन्होंने कहा कि टी20 प्रारूप में कप्तान के तौर पर SKY सभी कसौटी पर खरे उतरते हैं और इससे उनका दबाव भरा काम थोड़ा आसान हो जाता है।

    स्टार स्पोर्ट्स द्वारा साझा किए गए एक छोटे वीडियो में गंभीर ने कहा कि मौजूदा टी20 विश्व कप में सूर्यकुमार जैसे आक्रामक बल्लेबाज का कप्तान होना भारत के लिए सौभाग्य की बात है। इस वीडियो में यह नहीं पता चल रहा है कि गंभीर ने यह बयान कब दिया है। गंभीर ने कहा, ‘सूर्यकुमार ने इस प्रारूप में मेरा काम बहुत आसान कर दिया है। वह लोगों के लिए एक बेहतरीन कप्तान हैं, यह सिर्फ इसलिए नहीं कि वह मैदान पर क्या करते हैं, या बल्लेबाज के रूप में कैसे हैं, या उनके शॉट्स इस प्रारूप में कैसे हैं।’

    उन्होंने कहा, ‘कोच के तौर पर कभी-कभी आपके दिमाग में कई बातें चल रही होती हैं, लेकिन जब आप जानते हैं कि सूर्यकुमार माहौल को शांत बनाए रखेंगे, जैसा किसी भी कोच का सपना होता है, तो बहुत कुछ आसान हो जाता है।’

    भारत ने सूर्यकुमार यादव की शानदार बल्लेबाजी के बूते शनिवार को विश्व कप के अपने शुरुआती मैच में अमेरिका को हराया। भारतीय कप्तान ने एक छोर से विकेटों के पतझड़ के बीच 49 गेंदों में नाबाद 84 रन के साथ पारी को संभाला था।
    भारतीय टीम बृहस्पतिवार को अब दिल्ली में नामीबिया के खिलाफ खेलेगी।

    गंभीर ने कहा, ‘मेरे लिए खिलाड़ी सूर्यकुमार को अलग रखा जा सकता है, लेकिन कप्तान सूर्यकुमार के तौर पर उन्होंने हर कसौटी पर खरा उतरकर मेरी जिंदगी बहुत आसान बना दी है। वह वास्तव में एक शानदार नेतृत्वकर्ता हैं।’

    उन्होंने कहा, ‘यह बहुत अच्छा है कि देश का नेतृत्व उनके जैसे खिलाड़ी के हाथ में है, क्योंकि उनका दिल सही जगह पर है और दबाव में वह सही निर्णय लेते हैं।’ पैंतीस साल के सूर्यकुमार यादव दो साल पहले रोहित शर्मा की कप्तानी में टी20 विश्व कप जीतने वाली भारतीय टीम का हिस्सा थे। रोहित के इस प्रारूप से संन्यास के बाद उन्हें टीम की कमान सौंपी गई।

  • आर्थिक समीक्षा में ग्राम विकास क्षेत्र की उपलब्धियों का ब्योरा, ग्राम पंचायतों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ी

    आर्थिक समीक्षा में ग्राम विकास क्षेत्र की उपलब्धियों का ब्योरा, ग्राम पंचायतों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ी

    लखनऊ.

    उत्तर प्रदेश सरकार की वर्ष 2025-26 की आर्थिक समीक्षा के अनुसार, ‘विकसित उत्तर प्रदेश’ की परिकल्पना को साकार करने के लिए योगी सरकार ने ग्रामीण विकास पर खर्च लगातार बढ़ाया है। वर्ष 2017-18 में जहां ग्राम विकास पर 10,508 करोड़ रुपये व्यय हुए थे,  जो 2025-26 में बढ़कर 20,081 करोड़ रुपये हो गया। बीते आठ वर्षों में ग्राम विकास कार्यों में व्यय में 8.43 प्रतिशत की वार्षिक चक्रवृद्धि दर से वृद्धि हुई है।

    मानव दिवस सृजन में देश में पहला स्थान

    वर्ष 2017-18 के 1814.34 लाख मानव दिवसों की तुलना में 2024-25 में 85.41 प्रतिशत वृद्धि के साथ 3363.97 लाख मानव दिवस सृजित किए गए, जिससे यूपी को देश में प्रथम स्थान मिला। वित्तीय वर्ष 2025-26 में दिसंबर 2025 तक 1805 लाख से अधिक मानव रोजगार दिवस सृजित हो चुके हैं।

    ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार संवर्धन के लिए वीबी-जी राम जी योजना के तहत आजीविका, पर्यावरण संरक्षण और बुनियादी ढांचे के कार्य तेजी से कराए गए। योजना के अंतर्गत 266 प्रकार के सामुदायिक और व्यक्तिगत लाभार्थीपरक कार्यों को लागू किया गया।

    तकनीक, पारदर्शिता और नवाचार का असर

    बुंदेलखंड की जल समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में अभिनव पहल करते हुए ललितपुर के बिरधा विकास खंड में विलुप्त शहजाद नदी के 1500 मीटर हिस्से का पुनरुद्धार किया गया, जिससे 9859 मानव दिवसों का सृजन हुआ और भूजल व सिंचाई संसाधनों को मजबूती मिली।

    कार्यों में पारदर्शिता के लिए ई-एमबी मॉड्यूल, त्रि-स्तरीय जियो टैगिंग, ऑनलाइन सॉफ्टवेयर, आधार आधारित मजदूरी भुगतान, नेशनल मोबाइल मॉनिटरिंग सिस्टम ऐप, एरिया ऑफिसर ऐप और ड्रोन तकनीक का उपयोग किया गया।

    2024-25 में 65.26 लाख परिवारों के 75.83 लाख श्रमिकों को रोजगार मिला। जबकि 6.16 लाख परिवारों को पूर्ण 100 दिन का काम दिया गया। 2025-26 में अक्तूबर 2025 तक 47 लाख से अधिक परिवारों को रोजगार उपलब्ध कराया गया। तमिलनाडु के बाद यूपी दूसरा सबसे अधिक परिवारों को रोजगार देने वाला राज्य है।

    पर्यावरण, खेल और सामाजिक सहभागिता

    वीबी-जी राम जी योजना के तहत ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान में 2024-25 में 13.54 करोड़ और 2025-26 में 13.23 करोड़ पौधरोपण किया गया। वहीं, नवंबर 2025 तक 19 हजार से अधिक अमृत सरोवरों का निर्माण/पुनरुद्धार कर यूपी देश में अग्रणी रहा। इसके साथ ही 2025-26 में अक्तूबर 2025 तक 3550 खेल मैदान और 1706 आंगनबाड़ियों का निर्माण पूरा किया गया।

    महिलाओं की भागीदारी बढ़कर 42 फीसदी पहुंची

    वीबी-जी राम जी के तहत महिलाओं की भागीदारी भी बढ़ी है। यह 2018-19 में 35 प्रतिशत से बढ़कर 2024-25 में 42 प्रतिशत तक पहुंच गई। वहीं, सोशल ऑडिट के जरिए पारदर्शिता सुनिश्चित करते हुए 2024-25 में 55,991 ग्राम पंचायतों में और 2025-26 में दिसंबर तक 51,648 ग्राम पंचायतों में ऑडिट पूरा किया गया।

  • राहुल-खरगे की अनसुनी बात, संसद में विपक्ष का हंगामा, सांसदों ने किया वॉकआउट

    राहुल-खरगे की अनसुनी बात, संसद में विपक्ष का हंगामा, सांसदों ने किया वॉकआउट

    नई दिल्ली
    संसद के बजट सत्र के दौरान दोनों ही सदनों में जमकर हंगामा हो रहा है। मंगलवार को कार्यवाही शुरू होते ही लोकसभा में हंगामे का दौर शुरू हो गया और थोड़ी ही देर बाद सदन को 2 बजे तक स्थगित करना पड़ा। दूसरी तरफ राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे को ना बोलने देने का आरोप लगाते हुए विपक्षी सांसदों ने वॉकआउट कर दिया।

    एक बार स्थगन के बाद बारह बजे सदन की कार्यवाही शुरू होते ही पीठासीन अधिकारी कृष्णा प्रसाद तेन्नेटी ने जरूरी कागजात सभा पटल पर रखवाए। उन्होंने उसके बाद आम बजट पर चर्चा की शुरुआत करने के लिए कांग्रेस के शशि थरूर का नाम पुकारा। इस बीच कांग्रेस के कयी सदस्य अपने स्थान से खड़े होकर शून्यकाल के साथ राहुल गांधी को अपनी बात रखने देने की मांग करने लगे।

    पीठासीन अधिकारी ने बार बार कहा कि यह समय बजट पर चर्चा के लिए निर्धारित किया गया है और विपक्ष के नेता बजट पर अपनी बात रख सकते हैं। इस पर कांग्रेस समेत विपक्ष के सदस्य श्री गांधी को अपनी बात रखने देने की मांग करने लगे। विपक्षी सदस्य अपने स्थान पर खड़े होकर अपनी मांग को लेकर शोरगुल करने लगे जिसके कारण सदन की कार्यवाही दो बजे तक स्थगित कर दी गई।

    इससे पहले कार्यवाही शुरू होते ही अध्यक्ष ओम बिरला ने सदन को बताया कि छह फरवरी को अंडर-19 भारतीय क्रिकेट टीम ने विश्व कप जीता है इसके लिए उन्हें वह सदन की तरफ से बधाई देते हैं। युवा क्रिकेट टीम को बधाई देने के बाद श्री बिरला ने प्रश्न काल की कार्रवाई शुरू की तो विपक्षी दलों के सदस्य अपनी मांगों को लेकर सीटों पर खड़े हो गए और जोर-जोर से बोलने लगे। अध्यक्ष ने इसी बीच प्रश्न काल की कार्यवाही को आगे बढ़ाया लेकिन विपक्ष की तरफ से तेज हंगामा शुरू हो गया।

    बिरला ने हंगामा कर रहे सदस्यों से कहा कि प्रश्न काल के बाद सदस्यों को बोलने का अवसर दिया जाएगा। उनका कहना था कि वह हमेशा सब सदस्यों को बोलने का अवसर देते हैं इसलिए सदन को बाधित नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि बजट पर चर्चा होगी तो सभी दलों को अपनी बात रखने का मौका मिलेगा इसलिए प्रश्न काल को चलने दें। उनका कहना था कि यह सदस्यों का समय होता है और सबको मौका मिलना चाहिए इसलिए वह सभी सदस्यों से सदन को बाधित न करने का आग्रह कर रहे है। सदन में सार्थक चर्चा के लिये सहयोग करें।

    उन्होंने तेज लहजे में कहा कि सदस्य नियमित सदन की कार्यवाही में अवरोध करने का प्रयास कर रहे हैं और उन्हें ऐसा नहीं होना चाहिए। इसी बीच सदस्य नारे लगाते हुए सदन के बीचों-बीच आ गये और शोर शराबा करने लगे। हंगामा और बढ़ने लगा तो श्री बिरला ने सदन की कार्यवाही 12 बजे तक स्थगित कर दी।

     

  • आर्थिक समीक्षा में सामने आई सुदृढ़ और समृद्ध होती शिक्षा व्यवस्था

    आर्थिक समीक्षा में सामने आई सुदृढ़ और समृद्ध होती शिक्षा व्यवस्था

    लखनऊ.

    प्रदेश सरकार ने वर्ष 2017-18 से अब तक शिक्षा को सर्वसुलभ, गुणवत्तापरक और रोजगारोन्मुख बनाने के लिए अनेक ठोस और दूरदर्शी कदम उठाए हैं। युवाओं को कौशल विकास, नवाचार और स्टार्टअप संस्कृति से जोड़ते हुए शिक्षा को प्रदेश की प्रगति का प्रमुख आधार बनाया जा रहा है। बजट सत्र के पहले दिन प्रस्तुत आर्थिक समीक्षा में यह स्पष्ट रूप से परिलक्षित होता है कि प्राथमिक शिक्षा में ड्रॉपआउट रोकने से लेकर उच्च शिक्षा को वैश्विक मानकों के अनुरूप विकसित करने तक में सरकार ने उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं।

    विद्यालयों का विस्तृत नेटवर्क 

    केन्द्र की राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 को उत्तर प्रदेश में क्रियान्वित करने और सबके लिए शिक्षा को सुलभ बनाने के लिए 2 लाख 62 हजार 358 विद्यालयों का एक विस्तृत नेटवर्क तैयार किया गया है। इनमें 1 लाख 35 हजार 658 प्राथमिक, 90 हजार 243 उच्च प्राथमिक, 11 हजार 938 सेकेंडरी, 24 हजार 519 हायर सेकेंडरी स्कूल शामिल हैं। वहीं प्रधानमंत्री स्कूल फॉर राइजिंग इंडिया (पीएमश्री) योजना के अंतर्गत प्रदेश के 1722 विद्यालयों का चयन किया गया जिन्हें "हरित विद्यालय" के रूप में विकसित किया जा रहा है। 

    साक्षरता दर में वृद्धि

    2017-18 से लेकर 2023-24 तक उत्तर प्रदेश में शैक्षिक उपलब्धता, आधारभूत ढांचे, बच्चों के नामांकन, शिक्षा में लोगों की सामुदायिक सहभागिता जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है। साक्षरता दर की बात करें तो जहां 2017-18 में पुरुष साक्षरता दर 80.6% व महिला साक्षरता दर 62.9% थीं, वहीं 2023-24 में यह बढ़कर क्रमश: 86% व 70.4% हो गई है। 

    बढ़ाया गया प्राथमिक शिक्षा का बजट

    सुदृढ़ शैक्षिक ढांचे के लिए आर्थिक प्रोत्साहन के महत्व को समझते हुए प्रदेश सरकार ने 2024-25 में प्राथमिक शिक्षा पर कुल 68.46 हजार करोड़ और 2025-26 में 82.34 हजार करोड़ रुपये व्यय किए, जो कि वर्ष 2016-17 में केवल 32.91 हजार करोड़ था। अर्थात 2017-18 की तुलना में 2025-26 में लगभग 2.08 गुना की वृद्धि दर्ज की गई। प्रदेश में समग्र शिक्षा अभियान के अंतर्गत स्कूली शिक्षा संवर्धन के लिए वर्ष 2017-18 में कुल 6322.07 करोड़ रुपये खर्च किए गए, जो कि 2024-25 में बढ़कर 8263.37 करोड़ रुपये हो गया। समग्र शिक्षा योजना के ही अंतर्गत 2274 उच्च प्राथमिक एवं कम्पोजिट स्कूलों में लर्निंग-बाई-डूइंग कार्यक्रम चल रहा है, जो 2025-26 में 3288 स्कूलों तक पहुंच चुका है। 

    योजनाएं, जिनसे हो रहा है प्राथमिक शिक्षा का उन्नयन 

    शैक्षिक सत्र 2025-26 में कक्षा 1 से 8 के 1 करोड़ 47 लाख बच्चों को नि:शुल्क पाठ्य पुस्तकें व कार्य पुस्तिकाएं वितरित की गई हैं। सभी परिषदीय व एडेड स्कूलों में कक्षा 1 से 8 तक के बच्चों को यूनिफॉर्म, स्कूल-बैग, जूता-मोजा व स्टेशनरी उपलब्ध कराने के लिए उनके माता-पिता के खाते में डीबीटी के माध्यम से 1200 रुपये प्रति छात्र/छात्रा उपलब्ध कराए जा रहे हैं। डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए 25 हजार 790 परिषदीय उच्च प्राथमिक, कम्पोजिट व कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में स्मार्ट क्लास सेटअप बनाए गए हैं। साथ ही 880 विकासखंडों के ब्लॉक संसाधन केन्द्रों व 4688 स्कूलों में आईसीटी लैब की स्थापना की गई है। वर्ष 2025-26 में 5810 उच्च प्राथमिक व कम्पोजिट स्कूलों में स्मार्ट क्लास सेटअप व 8291 स्कूलों में आईसीटी लैब की स्थापना की जा रही है। 

    शिक्षा के पंखों से उड़ान भरती बालिकाएं

    प्रदेश में बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए सभी 746 कस्तूरबा गांधी विद्यालयों में 87700 बालिकाएं शिक्षा ग्रहण कर रही है। आईआईटी गांधीनगर, गुजरात के सहयोग से लगभग 68000 बालिकाओं में रोचक गतिविधियों के माध्यम से विज्ञान विषय में रुचि व क्षमता बढ़ाने के लिए क्यूरियोसिटी प्रोग्राम चल रहे हैं। खेलों के प्रति बालिकाओं की रुचि बढ़ाने के लिए "एक केजीबीवी एक खेल" कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है। बालिकाओं में आत्मरक्षा कौशल बढ़ाकर उन्हें सशक्त बनाने के लिए रानी लक्ष्मीबाई आत्मरक्षा प्रशिक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत अब तक 10 लाख 22 हजार 508 बालिकाओं को प्रशिक्षण दिया जा चुका है।

    शिक्षा को सर्वोन्मुखी बनाने के लिए सरकार के अन्य प्रयास

    दिव्यांग बच्चों की गुणवत्तापरक समावेशी शिक्षा के लिए 6 से 14 वर्ष के दिव्यांग बच्चों को चिन्हित करने व ऑनलाइन ट्रैकिंग करने के लिए समर्थ पोर्टल विकसित किया गया है। दृष्टि दिव्यांग बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ते हुए 2793 पूर्ण दृष्टि दिव्यांग बच्चों को ब्रेल पाठ्य-पुस्तकें, 4438 अल्प दृष्टि दिव्यांग बच्चों को इन्लार्ज प्रिंट की पाठ्य पुस्तकें उपलब्ध कराई गई हैं। साथ ही विशिष्ट दिव्यांग बच्चों को उनकी जरूरत के हिसाब से उपकरण भी उपलब्ध कराए गए हैं।

    सरकार के प्रयासों से हुए उल्लेखनीय सुधार

    यूनीफाइड डिस्ट्रिक्ट इन्फॉर्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन प्लस, भारत सरकार की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार शैक्षिक सत्र 2017-18 में उच्च प्राथमिक विद्यालयों में बच्चों की सकल नामांकन दर 75.3% थी जो वर्ष 2024-25 में 83.9% हो गई है। प्राथमिक विद्यालयों में सत्र 2017-18 में ड्रॉपआउट की दर 7.2 थी जो 8 वर्षों में घटकर शून्य हो चुकी है। वहीं उच्च प्राथमिक विद्यालयों में ड्रॉपआउट 7.4 से घटकर आठ वर्षों में 3.0 हो गया है। सरकार के प्रयासों से स्कूलों में रिटेंशन (ठहराव) भी बढ़ा है। वर्ष 2017-18 के मुकाबले यह रिटेंशन 77.8% से बढ़कर 2025-26 में 86.9% हो चुका है। 

    सुदृढ़ हुआ माध्यमिक शिक्षा का ढांचा

    वर्तमान में प्रदेश में 29 हजार 532 माध्यमिक विद्यालय संचालित हैं जिनमें 2814 राजकीय, 4523 अशासकीय सहायता प्राप्त व 22195 स्ववित्तपोषित विद्यालय हैं। माध्यमिक शिक्षा का ढांचा सुदृढ़ करने के लिए परख, प्रज्ञान, पहुंच पोर्टल विकसित किए गए हैं। "पंख पोर्टल" से करियर गाइडेंस दिया जा रहा है। बोर्ड परीक्षाओं के दौरान राज्य स्तरीय कंट्रोल रूप से सभी 8373 परीक्षा केन्द्रों में वॉयस रिकॉर्डर से लैस सीसीटीवी कैमरों द्वारा लाइव मॉनीटिरिंग करवाई गई। प्रोजेक्ट अलंकार व समग्र शिक्षा अभियान के अंतर्गत कुल 500 स्कूलों में विज्ञान प्रयोगशालाएं बनाने का लक्ष्य है। राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में कुल 1084 आईसीटी लैब स्थापित हो चुके हैं। 

    पिछले एक दशक में महाविद्यालयों की संख्या 6681 से बढ़कर 8030 हो गई है, यानी लगभग 20% की वृद्धि हुई है। कुल 75 निर्माणाधीन राजकीय महाविद्यालयों में से 70 महाविद्यालय संचालित भी हो चुके हैं। प्रदेश में वर्तमान में कुल 38 राज्य विश्वविद्यालय और 52 निजी विश्वविद्यालय संचालित हैं। उच्च शिक्षा में शोध, नवाचार व ज्ञान सृजन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से वित्तीय वर्ष 2025-26 में 26916.03 लाख रुपये के बजट का प्रावधान किया गया है।

    शिक्षा में बढ़ी अंतरराष्ट्रीय और वैश्विक सहभागिता

    प्रदेश में विश्वविद्यालयों द्वारा कुल 289 अंतरराष्ट्रीय एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए हैं, जिनमें 33 संयुक्त राज्य अमेरिका, 21 नेपाल और 19 रूस के साथ हैं। इन एमओयू के अंतर्गत विभिन्न शैक्षणिक एवं शोध गतिविधियों से 97 हजार 197 छात्र व 259 संकाय सदस्य लाभान्वित हुए हैं। 
    नैक मूल्यांकन में उल्लेखनीय प्रगति

    नैक A++ श्रेणी के विश्वविद्यालयों की संख्या शून्य से बढ़कर 6 हो चुकी है। मात्र एक वर्ष में नैक प्रत्यायित संस्थानों की संख्या 95 से बढ़कर 155 हो गई है। वहीं क्यू एस रैकिंग में सम्मिलित विश्वविद्यालयों की संख्या भी शून्य से बढ़कर 3 हो गई है। 

    प्राविधिक और व्यावसायिक शिक्षा में बढ़ते कदम

    वर्तमान में प्रदेश में कुल 184 राजकीय व अनुदानित पॉलीटेक्निक संचालित हैं, जिनकी कुल प्रवेश क्षमता 55127 है। इनमें 165 राजकीय पॉलीटेक्निक संस्थान हैं तथा राज्य सरकार से सहायता प्राप्त 19 अनुदानिक संस्थाएं हैं। 21 महिला पॉलीटेक्निक संचालित हैं। नवाचार तथा स्टार्टअप कल्चर को प्रोत्साहित करने के लिए "कलाम अभ्युदय योजना" संचालित है। राजकीय आईटीआई में इंडस्ट्री 4.0 की अपेक्षाओं के अनुरूप अभिनव ट्रेड्स जैसे ड्रोन टेक्नोलॉजी का प्रशिक्षण शुरू किया गया है।

  • बंगाल SIR केस में सुप्रीम कोर्ट सख्त, जांच की डेडलाइन एक हफ्ते बढ़ी; DGP से हलफनामा तलब

    बंगाल SIR केस में सुप्रीम कोर्ट सख्त, जांच की डेडलाइन एक हफ्ते बढ़ी; DGP से हलफनामा तलब

    नई दिल्ली
    सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को पश्चिम बंगाल के विशेष गहन संशोधन (एसआईआर) मामले पर सुनवाई हुई। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी समेत तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के अन्य नेताओं की याचिकाओं पर यह सुनवाई हुई। सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में दस्तावेजों की पड़ताल और फाइनल वोटर लिस्ट की समयसीमा को 1 हफ्ते बढ़ाया। पहले फाइनल वोटर लिस्ट जारी करने की डेडलाइन 14 फरवरी थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पश्चिम बंगाल सरकार सुनिश्चित करें कि उसकी ओर से उपलब्ध कराए गए 8505 ग्रुप बी के अधिकारी कल शाम 5 बजे तक निर्वाचन अधिकारी (निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी) को रिपोर्ट करें। ईसीआई चाहे तो अपने अधिकारियों की जगह इन अधिकारियों की सेवा ले सकता है। कोर्ट ने साफ किया कि माइक्रो ऑब्जर्वर या ग्रुप बी के अधिकारियों की भूमिका सिर्फ ईआरओ को सहयोग करने की रहेगी। वोटर लिस्ट पर अंतिम फैसला ईआरओ ही लेंगे।
    चुनाव आयोग की ओर से कोर्ट को शिकायत की गई कि ऑब्जेक्शन फॉर्म जलाने वाले लोगों के खिलाफ कोई एफआईआर दर्ज नहीं की है। कोर्ट ने इस पर राज्य के डीजीपी को कारण बताओ नोटिस जारी किया। कोर्ट ने कहा कि डीजीपी हलफनामा दाखिल करें।
    वहीं, सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता चंद्र उदय सिंह ने कहा कि नोटिस के जवाब पर चर्चा होनी चाहिए। शुरुआत में वकीलों की दलीलों में तालमेल न होने से चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) सूर्यकांत नाराज हो गए। उन्होंने कहा कि सब एक साथ बोल रहे हैं और एक-दूसरे की बात काट रहे हैं, जिससे सुनवाई करना मुश्किल हो रहा है। इसके बाद ममता बनर्जी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दिवान ने दलीलें शुरू कीं।
    सीजेआई ने पिछली सुनवाई का जिक्र करते हुए पूछा कि क्या ड्राफ्ट में 70 लाख मतदाताओं के नामों में स्पेलिंग मिसमैच है। साथ ही मैनपावर की कमी के कारण चुनाव आयोग को माइक्रो-ऑब्जर्वर्स लगाने पड़े थे। श्याम दिवान ने बताया कि राज्य सरकार ने 8,500 अधिकारियों की व्यवस्था कर ली है। सीजेआई ने चुनाव आयोग से पूछा कि क्या आपको इन अधिकारियों की सूची मिल गई है। आयोग के वकील ने कहा कि अभी तक कोई नाम नहीं मिला है।
    सीजेआई ने टिप्पणी की कि 4 या 5 फरवरी को ही नाम भेजे जा सकते थे। दिवान ने कहा कि डेटा भेज दिया गया था और आयोग से पुष्टि मांगी गई थी, उसके बाद पूरा विवरण भेजा जाता। सीजेआई ने कहा कि राज्य सरकार को तुरंत सूची भेजनी चाहिए थी, कोर्ट के माध्यम से नहीं।
    वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से कहा कि आयोग ने कभी ग्रुप-बी अधिकारियों की मांग नहीं की थी। यह सुझाव कोर्ट से आया था, इसलिए विवरण जुटाने में समय लगा। दिवान ने दोहराया कि सूची सौंप दी गई है, लेकिन आयोग ने इनकार किया। सीजेआई ने ईमेल चेक करने को कहा और पूछा कि क्या सूची में नाम, पदनाम, संपर्क और क्षेत्र दिए गए हैं।
    सिंघवी ने कहा कि ईमेल भेज दिया गया है और क्या इन अधिकारियों को जिला निर्वाचन अधिकारी के समक्ष रिपोर्ट करने के निर्देश दिए जाएं। दिवान ने कहा कि आयोग की मंजूरी के बाद नामों की सूची दी जाएगी। उन्होंने जोर दिया कि छोटी-मोटी विसंगतियों के कारण बड़े पैमाने पर नाम नहीं हटाए जा सकते।
    सीजेआई ने पूछा कि क्या पश्चिम बंगाल का कोई अधिकारी है, जिससे सवाल किए जा सकें। याचिकाकर्ताओं ने बताया कि पूर्व मुख्य सचिव और वर्तमान प्रधान सचिव मनोज पंत मौजूद हैं। पंत ने कहा कि 292 ईआरओ (ग्रुप-ए, एसडीएम रैंक) के नाम भेजे गए हैं। कुछ आईएएस भी हैं। कुल 8,525 सहायक ईआरओ हैं।
    सीजेआई ने हर विधानसभा क्षेत्र में एईआरओ की संख्या पूछी। पंत ने बताया कि सूची में 65 प्रतिशत ग्रुप-बी, 10-12 प्रतिशत ग्रुप-सी और बाकी ग्रुप-ए के अधिकारी हैं। इन्हें तैनात करने से पहले आयोग को सूचित किया गया था। सीजेआई ने पूछा कि क्या एईआरओ ईआरओ से वरिष्ठ होगा? राज्य ने कहा कि एईआरओ सहायता करता है।
    आयोग के वकील डीएस नायडू ने कहा कि ईआरओ अर्ध-न्यायिक अधिकारी होते हैं, इसलिए एसडीएम जैसे अनुभवी अधिकारियों की जरूरत थी। राज्य ने वेतन समानता पर आधारित सूची दी, लेकिन आयोग ने कहा कि विभिन्न क्षेत्रों के लोग अर्ध-न्यायिक कार्य नहीं कर पाएंगे।
    सीजेआई ने कहा कि अनुपयुक्त ईआरओ और एईआरओ को नए सक्षम अधिकारियों से बदला जा सकता है। दिवान ने कहा कि बदलाव में कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन छोटी विसंगतियों के लिए बड़े पैमाने पर नाम हटाने की अनुमति नहीं है।
    सीजेआई ने आयोग से कहा कि वे एईआरओ बदलने पर विचार करें। माइक्रो-ऑब्जर्वर्स मतदाताओं की आपत्तियों पर सलाह देते हैं, लेकिन निर्णय ईआरओ लेते हैं। आयोग ने कहा कि माइक्रो-ऑब्जर्वर्स को 10 दिनों का प्रशिक्षण दिया गया और दस्तावेज जांच पूरी हो गई है।
    सीजेआई ने सुझाव दिया कि अगर ये अधिकारी कल सुबह शामिल होते हैं, तो उन्हें फाइलें देखने दें, जिससे निर्णय की गुणवत्ता बढ़ेगी। सुनवाई जारी है और कोर्ट ने सभी पक्षों से सहयोग की अपील की है ताकि वैध मतदाताओं के अधिकार सुरक्षित रहें।
    वहीं, सीजेआई ने कहा कि पश्चिम बंगाल में एसआईआर प्रक्रिया को आसान बनाने और जताई गई चिंताओं का ध्यान रखने के लिए निम्नलिखित अंतरिम निर्देश जारी किए जाते हैं। राज्य सरकार यह सुनिश्चित करे कि सभी 8,555 ग्रुप बी अधिकारी, जिनकी सूची आज सौंपी गई है, शाम 5 बजे तक जिला चुनाव अधिकारियों (डीआरओ) को रिपोर्ट करें। चुनाव आयोग (ईसीआई) के पास मौजूदा ईआरओ और एईआरओ को बदलने और योग्य पाए जाने पर अधिकारियों की सेवाओं का उपयोग करने का अधिकार होगा।

  • आठ साल में दोगुने से ज्यादा बढ़ी यूपी की अर्थव्यवस्था

    आठ साल में दोगुने से ज्यादा बढ़ी यूपी की अर्थव्यवस्था

    लखनऊ.

     वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने सोमवार को विधानमंडल के बजट सत्र के पहले दिन उत्तर प्रदेश की पहली आर्थिक समीक्षा सदन के पटल पर प्रस्तुत की। समीक्षा में प्रदेश की अर्थव्यवस्था, निवेश, प्रति व्यक्ति आय, राजकोषीय स्थिति और क्षेत्रीय योगदान को विस्तार से सामने रखा गया है। वित्त मंत्री ने बताया कि उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था ने बीते आठ वर्षों में ऐतिहासिक विस्तार किया है। वर्ष 2016–17 में ₹13.30 लाख करोड़ की अर्थव्यवस्था, वर्ष 2024–25 में बढ़कर ₹30.25 लाख करोड़ पार कर चुकी है। वित्तीय वर्ष 2025–26 में इसके ₹36 लाख करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है। यह वृद्धि उत्तर प्रदेश को देश की सबसे बड़ी राज्य अर्थव्यवस्थाओं में मजबूती से स्थापित करती है।

    राज्य की प्रगति, जन-आकांक्षाओं और भविष्य की संभावनाओं का जीवंत दस्तावेज

    वित्त मंत्री ने सदन में कहा कि आज हम सब एक ऐतिहासिक पल के साक्षी बन रहे हैं, जब उत्तर प्रदेश भी भारत सरकार की तरह अपनी आर्थिक समीक्षा पहली बार सदन के समक्ष प्रस्तुत कर रहा है। प्रदेश की आर्थिक समीक्षा केवल आंकड़ों का संकलन नहीं, बल्कि राज्य की प्रगति, जनता की आकांक्षाओं और भविष्य की संभावनाओं का जीवंत दस्तावेज है। भारत की सांस्कृतिक धरोहर और ऐतिहासिक गौरव का प्रतीक, उत्तर प्रदेश आज नई आर्थिक दृष्टि और ऊर्जा के साथ अपने लक्ष्यों की ओर अग्रसर है। प्रदेश की अर्थव्यवस्था 25 करोड से अधिक नागरिकों की आकांक्षाओं का प्रतिबिंब है, जो इसे कृषि उत्पादन, औद्योगिक विकास और तकनीकी नवाचार का प्रमुख केंद्र बना रहा है।

    निवेशकों का बदला नजरिया, ₹50 लाख करोड़ से अधिक के मिले निवेश प्रस्ताव

    वित्त मंत्री ने कहा कि एक समय निवेशकों की प्राथमिकता सूची में न रहने वाला उत्तर प्रदेश अब औद्योगिक निवेश का प्रमुख केंद्र बन चुका है। पारदर्शी नीतियों, समयबद्ध स्वीकृतियों और ‘ट्रिपल एस’ (सेफ्टी, स्टेबिलिटी और स्पीड) की गारंटी के चलते प्रदेश को अब तक ₹50 लाख करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। यह निवेश वातावरण में आए निर्णायक बदलाव को दर्शाता है।

    राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में बढ़ा उत्तर प्रदेश का योगदान

    आर्थिक समीक्षा के अनुसार, राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में उत्तर प्रदेश का योगदान वर्ष 2016–17 के 8.6 प्रतिशत से बढ़कर वर्ष 2024–25 में 9.1 प्रतिशत तक पहुंच गया है। यह वृद्धि प्रदेश की आर्थिक मजबूती और राष्ट्रीय विकास में बढ़ती भूमिका को रेखांकित करती है।

    प्रति व्यक्ति आय में ऐतिहासिक बदलाव

    समीक्षा में बताया गया कि स्वतंत्रता के बाद पहली बार उत्तर प्रदेश ने प्रति व्यक्ति आय में गिरावट के लंबे रुझान को पलटा है। वर्ष 2016–17 में ₹54,564 रही प्रति व्यक्ति आय (प्रति व्यक्ति निवल उत्पाद) वर्ष 2024–25 में बढ़कर ₹1,09,844 हो गई है। वित्तीय वर्ष 2025–26 के लिए इसके ₹1,20,000 तक पहुंचने का अनुमान लगाया गया है। राष्ट्रीय औसत की तुलना में भी प्रति व्यक्ति आय अनुपात में सुधार दर्ज किया गया है। 2014-15 में यह राष्ट्रीय औसत का केवल 50.2% रह गई थी, जबकि 2024-25 में गिरावट के रुख में बदलाव करते हुए प्रतिव्यक्ति अनुपात बढ़कर 53.5% हो गया। 

    कृषि, उद्योग और सेवा तीनों क्षेत्र में संतुलित विकास

    आर्थिक समीक्षा के अनुसार, वर्ष 2024–25 में प्रदेश की जीएसडीपी में कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों की हिस्सेदारी 25.8 प्रतिशत, औद्योगिक क्षेत्र की 27.2 प्रतिशत तथा सेवा क्षेत्र की 47 प्रतिशत रही है। यह दर्शाता है कि उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था अब केवल कृषि आधारित न रहकर बहु-क्षेत्रीय विकास की ओर अग्रसर है।

    बजट आकार में अभूतपूर्व वृद्धि

    वित्त मंत्री ने बताया कि प्रदेश के बजट आकार में भी विगत 9 वर्षों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2016–17 में ₹3.47 लाख करोड़ का बजट अब बढ़कर वर्ष 2025–26 में ₹8.33 लाख करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है। समीक्षा में बताया गया कि यह वृद्धि 4.86 लाख करोड़) पूर्ववर्ती सरकारों की तुलना में कहीं अधिक तेज रही है। 2008-09 से 2016-17 (8 वर्ष) में यह वृद्धि मात्र 2.34 लाख करोड़ थी।

    पूंजीगत व्यय से विकास को गति

    उन्होंने बताया कि सार्वजनिक निवेश को प्राथमिकता देते हुए पूंजीगत व्यय में दो गुने से अधिक वृद्धि की गई है। वर्ष 2016–17 में पूंजीगत व्यय ₹69.79 हजार करोड़ रहा, जबकि वर्ष 2024–25 में यह बढ़कर ₹147.72 हजार करोड़ हो गया है। इसका सीधा असर अवसंरचना, औद्योगिक विकास और रोजगार सृजन पर पड़ा है।

    वित्तीय अनुशासन की मिसाल बना उत्तर प्रदेश

    आर्थिक समीक्षा में प्रदेश की राजकोषीय स्थिति को संतुलित और अनुशासित बताया गया है। सार्वजनिक ऋण-से-जीसडीपी अनुपात वर्ष 2016–17 के 29.3 प्रतिशत से घटकर वर्ष 2024–25 में 28.0 प्रतिशत हो गया है, जो राष्ट्रीय और वैश्विक औसत से काफी कम है। यह प्रदेश की मजबूत वित्तीय प्रबंधन नीति को दर्शाता है।

    कर राजस्व में ढाई गुना वृद्धि

    प्रदेश का अपना कर राजस्व भी उल्लेखनीय रूप से बढ़ा है। वर्ष 2016–17 में ₹0.86 लाख करोड़ रहा स्टेट ओन टैक्स रेवेन्यू वर्ष 2024–25 में लगभग ढाई गुना बढ़कर ₹2.09 लाख करोड़ तक पहुंच गया है। आर्थिक समीक्षा में इसे कर सुधारों और प्रशासनिक दक्षता का परिणाम बताया गया है।

  • वीबी जी राम जी योजना से गांव-गांव पहुंचेगा रोजगार

    वीबी जी राम जी योजना से गांव-गांव पहुंचेगा रोजगार

    रायपुर.

    शासन की महत्वाकांक्षी विकसित भारत जी राम जी (वीबी जी राम जी) योजना के अंतर्गत जिला दंतेवाड़ा की ग्राम पंचायतों में प्रत्येक माह की 07 तारीख को रोजगार दिवस, चावल उत्सव और आवास दिवस का आयोजन किया जा रहा है। इस कार्यक्रम के माध्यम से ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों को विभिन्न शासकीय योजनाओं की जानकारी दी जा रही है।

    ग्रामीण जरूरतमंद परिवार तक रोजगार के अवसर पहुंचाना

    अधिकारियों ने बताया कि पहले महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत 100 दिनों का रोजगार उपलब्ध कराया जाता था, जिसे अब विकसित भारत जी राम जी योजना के अंतर्गत बढ़ाकर 125 दिनों तक किया गया है। योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों के प्रत्येक जरूरतमंद परिवार तक रोजगार के अवसर पहुंचाना है।

    क्यूआर कोड से बढी पारदर्शिता

    कार्यक्रम के दौरान ग्रामीणों को क्यूआर कोड आधारित नई प्रणाली की जानकारी दी गई। अब जॉब कार्ड और मस्टर रोल का मिलान क्यूआर कोड स्कैन कर किया जा रहा है, जिससे पारदर्शिता बढ़ी है और गड़बड़ी की संभावना कम हुई है।

    गुणवत्तापूर्ण आवास निर्माण लिए तकनीकी मार्गदर्शन

    प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के अंतर्गत स्वीकृत हितग्राहियों के नामों का वाचन किया गया तथा आवास निर्माण के लिए मिलने वाली किश्तों, मजदूरी भुगतान, निर्माण सामग्री और अन्य विभागों से मिलने वाली सुविधाओं की जानकारी दी गई। अधिकारियों ने हितग्राहियों को समय-सीमा में गुणवत्तापूर्ण आवास निर्माण पूरा करने के लिए तकनीकी मार्गदर्शन भी दिया।

    बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण, मोबाइल आधारित निगरानी प्रणाली और नागरिक सहभागिता से पारदर्शिता

    रोजगार दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन और विकसित भारत जी राम जी योजना के तहत मिलने वाली रोजगार गारंटी की जानकारी भी दी गई। बताया गया कि विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने और रोजगार सुनिश्चित करने के लिए यह पहल की जा रही है।

    कार्यक्रम में बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण, मोबाइल आधारित निगरानी प्रणाली और नागरिक सहभागिता जैसे आधुनिक तकनीकी उपायों की जानकारी दी गई, जिससे कार्यों की निगरानी, उपस्थिति सत्यापन और भुगतान प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाया जा सके।

    डबरी निर्माण कर मत्स्य पालन और अन्य आजीविका गतिविधियों को प्रोत्साहन

    इसके अलावा आजीविका डबरी निर्माण के बारे में भी ग्रामीणों को बताया गया। डबरी निर्माण से मत्स्य पालन और अन्य आजीविका गतिविधियों के माध्यम से आय बढ़ाने की संभावनाओं पर प्रकाश डाला गया। कार्यक्रम के अंत में ग्रामीणों से अपील की गई कि वे प्रत्येक माह की 07 तारीख को आयोजित रोजगार दिवस, चावल उत्सव और आवास दिवस में भाग लेकर शासकीय योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाएं।

  • स्थापना दिवस विशेष: बदला सफर का मतलब, मजबूत हुई अर्थव्यवस्था

    स्थापना दिवस विशेष: बदला सफर का मतलब, मजबूत हुई अर्थव्यवस्था

    रायपुर.

    छत्तीसगढ़ के विकास को रफ्तार दे रहा एनएचएआई

    भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) अपने गठन के 31वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है। छत्तीसगढ़ जैसे तेजी से विकसित होते राज्य के लिए सड़कें केवल आवागमन का साधन मात्र नहीं हैं, बल्कि ये आर्थिक प्रगति की धमनियां हैं। पिछले वर्षों में एनएचएआई ने राज्य के भौगोलिक नक्शे पर डामर और कांक्रीट से विकास की जो गाथा लिखी है, उसने छत्तीसगढ़ को देश के लॉजिस्टिक और औद्योगिक हब के रूप में मजबूती से स्थापित किया है। आज छत्तीसगढ़ की सड़कें केवल गंतव्य तक पहुँचने का रास्ता नहीं, बल्कि राज्य के सुनहरे भविष्य का मार्ग प्रशस्त कर रही हैं।

    वैश्विक व्यापार की लाइफलाइन – एनएच-53

    छत्तीसगढ़ से गुजरने वाला राष्ट्रीय राजमार्ग-53 जो एशियाई मार्ग-46 का एक अभिन्न हिस्सा है, वर्तमान में राज्य की अर्थव्यवस्था की रीढ़ बन चुका है। महाराष्ट्र सीमा से शुरू होकर राजनांदगांव, दुर्ग, भिलाई, रायपुर, आरंग और सरायपाली होते हुए ओडिशा सीमा तक फैला यह शानदार फोरलेन खंड राज्य की औद्योगिक क्षमता को वैश्विक पहचान दिला रहा है। इसी मार्ग पर आरंग के पास साल 2019 में महानदी पर बना एक किलोमीटर लंबा छत्तीसगढ़ का पहला भव्य सिक्स-लेन ब्रिज इंजीनियरिंग का एक उत्कृष्ट नमूना है। दुर्ग बायपास से लेकर सीमावर्ती क्षेत्रों तक फैला यह राजमार्ग व्यापारिक सुगमता को नई ऊंचाइयां दे रहा है।

    राजधानी और औद्योगिक केंद्रों का 'गोल्डन लिंक'

    एनएचएआई ने छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर, न्यायधानी बिलासपुर और ऊर्जाधानी कोरबा को आपस में जोड़ने के लिए अभूतपूर्व कार्य किया है। राष्ट्रीय राजमार्ग-130 के माध्यम से रायपुर- से बिलासपुर और वहां से पथरापाली-कटघोरा तक की फोरलेन सड़क ने सफर के समय को आधा कर दिया है। इसी क्रम में चांपा-कोरबा-कटघोरा खंड (NH-149B) ने कोयला और ऊर्जा क्षेत्र के परिवहन को नई गति प्रदान की है। उत्तर में अंबिकापुर और दक्षिण में धमतरी तक फैले सड़कों के इस जाल ने राज्य के सुदूर कोनों को मुख्य धारा से जोड़ दिया है।

    रायपुर-विशाखापट्टनम कॉरिडोर

    वर्तमान में निर्माणाधीन परियोजनाओं में सबसे महत्वाकांक्षी 'रायपुर-विशाखापट्टनम इकोनॉमिक कॉरिडोर' है। रायपुर से धमतरी और कांकेर होते हुए कोंडागांव के बीच तैयार हो रहा यह 125 किलोमीटर का सिक्स-लेन मार्ग छत्तीसगढ़ को सीधे बंदरगाह से जोड़ेगा। इस परियोजना की सबसे बड़ी विशेषता राज्य की पहली 3 किलोमीटर लंबी स्मार्ट टनल (सुरंग) है। यह कॉरिडोर बस्तर के घने वनों के बीच से गुजरते हुए पर्यावरण संरक्षण और आधुनिकता के अद्भुत संगम के रूप में उभर रहा है।

    फ्लाईओवर और आधुनिक इंटरचेंज

    राजधानी रायपुर का टाटीबंध चौक, जो कभी अपनी जटिल बनावट के कारण दुर्घटनाओं का केंद्र था, आज एनएचएआई के इंजीनियरिंग का गौरव है। साढ़े तीन किलोमीटर लंबे स्टैंड-अलोन फ्लाईओवर ने न केवल यातायात को सुगम बनाया है, बल्कि इसे जीरो एक्सीडेंट जोन बनाने की दिशा में भी बड़ी सफलता हासिल की है। इसी तरह बिलासपुर का पेंड्रीडीह इंटरचेंज आधुनिक कनेक्टिविटी का उत्कृष्ट उदाहरण है, जो रायपुर, बिलासपुर और रायगढ़ की ओर जाने वाले भारी वाहनों को बिना किसी बाधा के अपनी मंजिल तक पहुँचाता है।

    औद्योगिक क्रांति का नया गलियारा – दुर्ग बायपास

    शहरी क्षेत्रों में बढ़ते प्रदूषण और यातायात के दबाव को कम करने 92 किलोमीटर लंबा दुर्ग-रायपुर-आरंग बायपास निर्माणाधीन है। सिक्स-लेन का यह मार्ग मुंबई-कोलकाता कॉरिडोर का हिस्सा होगा, जो राज्य में औद्योगिक निवेश के नए द्वार खोलेगा। 

    रायपुर-धनबाद कॉरिडोर

    छत्तीसगढ़ और झारखंड के बीच की दूरियां अब बीते दौर की बात होने वाली हैं। 627 किलोमीटर लंबा रायपुर-धनबाद आर्थिक गलियारा इन दो राज्यों के रिश्तों को नई मजबूती देगा। इस कॉरिडोर का 384 किलोमीटर का बड़ा हिस्सा छत्तीसगढ़ से होकर गुजरता है। इसके पूर्ण होने से रायपुर से धनबाद का 11 घंटे का सफर मात्र 7 घंटे में सिमट जाएगा, जिससे कोरबा और रायगढ़ के इस्पात एवं कोयला उद्योगों को सीधा लाभ मिलेगा।

    पर्यटन और आस्था की सुगम राह

    आधुनिक राजमार्गों ने छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक और प्राकृतिक संपदा तक पहुँच को अत्यंत सहज बना दिया है। एनएच-53 आज डोंगरगढ़ की माँ बम्लेश्वरी देवी, ऐतिहासिक सिरपुर और बारनवापारा अभयारण्य जैसे प्रमुख स्थलों को जोड़कर पर्यटन को नई ऊंचाई दे रहा है। इसी प्रकार, एनएच-130 श्रद्धालुओं को रतनपुर स्थित माँ महामाया मंदिर से जोड़ने के साथ-साथ अंबिकापुर के रास्ते छत्तीसगढ़ का शिमला कहे जाने वाले मैनपाट के नैसर्गिक सौंदर्य तक पहुँचने का सुगम मार्ग प्रशस्त करता है। वहीं एनएच-30 छत्तीसगढ़ के प्रयाग राजिम और गंगरेल बांध को राजधानी से जोड़ता है। बस्तर के पर्यटन केंद्रों तक पहुँचना भी अब बेहद आसान हो गया है। वहीं, एनएच-149बी के माध्यम से कोरबा के सतरेंगा, कोसगाई, मडवारानी और चांपा के प्रसिद्ध कोसा केंद्र व स्थानीय मंदिरों तक पहुँचना अब सुगम हो गया है। अब पर्यटकों को राष्ट्रीय राजमार्ग के माध्यम से विश्वस्तरीय सड़कों की सुविधा मिल रही है, जिससे छत्तीसगढ़ में पर्यटन की नई संभावनाएं जागृत हुई हैं।

    सड़कों के साथ संरक्षण और सामाजिक सरोकार

    एनएचएआई का लक्ष्य केवल कांक्रीट का ढांचा खड़ा करना नहीं, बल्कि सामाजिक उत्तरदायित्वों का निर्वहन करना भी है। इसी कड़ी में बिलासपुर के भेलमुड़ी और रतनपुर में 'केटल शेल्टर' का निर्माण किया जा रहा है। राजमार्गों पर पशुओं की सुरक्षा और उनके संरक्षण की दिशा में यह एक अनूठी और संवेदनशील पहल है, जो सड़क सुरक्षा को भी सुनिश्चित करती है।

     “मजबूत सड़कें किसी भी राज्य की मजबूत अर्थव्यवस्था की बुनियाद होती हैं। एनएचएआई और केंद्र सरकार के सहयोग से छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय राजमार्गों का तेजी से विस्तार हुआ है, जिससे उद्योग, कृषि, खनन और पर्यटन सभी क्षेत्रों को नई गति मिली है। बेहतर कनेक्टिविटी ने दूरस्थ अंचलों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ा है और रोजगार, निवेश व व्यापार के नए अवसर पैदा किए हैं। यही सड़कें आज छत्तीसगढ़ की प्रगति की पहचान बन रही हैं।” – मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय

    “छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय राजमार्ग केवल रास्ते नहीं, बल्कि विकास के कॉरिडोर बन चुके हैं। एनएचएआई द्वारा निर्मित आधुनिक सड़कें, फ्लाईओवर और आर्थिक गलियारे शहरों का दबाव कम कर रहे हैं और औद्योगिक निवेश को आकर्षित कर रहे हैं। बेहतर परिवहन व्यवस्था से समय, ईंधन और लागत की बचत हो रही है, जिससे राज्य की आर्थिक गतिविधियां तेज हुई हैं। यह सड़क नेटवर्क छत्तीसगढ़ के आत्मनिर्भर और समृद्ध भविष्य की मजबूत नींव है।” – उप मुख्यमंत्री एवं लोक निर्माण मंत्री  अरुण साव

  • T20 WC से बाहर होने के बाद हर्षित राणा का बड़ा अपडेट, सर्जरी के बाद बोले– अब पूरा फोकस वापसी पर

    T20 WC से बाहर होने के बाद हर्षित राणा का बड़ा अपडेट, सर्जरी के बाद बोले– अब पूरा फोकस वापसी पर

    नई दिल्ली
    भारतीय टीम के तेज गेंदबाज हर्षित राणा का उस वक्त टी20 वर्ल्ड कप 2026 खेलने का का सपना टूट गया, जब वह साउथ अफ्रीका के खिलाफ अभ्यास मैच में चोटिल हो गए थे। हर्षित ने अभ्यास मैच में केवल एक ओवर डाला और उसके बाद घुटने की चोट के कारण मैदान से बाहर जाना पड़ा। उन्होंने अब अहम इंजरी अपडेट दिया है। उन्होंने सर्जरी कराई है, जो सफल रही। वह सर्जरी के बाद जल्द से जल्द क्रिकेट के मैदान पर लौटना चाहते हैं।

    हर्षित ने सोमवार को इंस्टाग्राम पर तस्वीर शेयर करते हुए लिखा, ''सर्जरी सही तरह हो गई है। अब मेरा ध्यान रिकवरी और फिर से उस चीज को करने पर है जो मुझे पसंद है।'' गेंदबाज की पोस्ट पर फैंस और शुभचिंतकों के जमकर रिएक्शन आ रहे हैं। एक यूजर ने कमेंट किया, ''जल्दी ठीक हो जाओ भाई।'' दूसरे ने लिखा, ''तुम्हारी जल्दी ठीक होने की कामना करता हूं।'' अन्य ने कहा, ''मैदान पर देखने का बेसब्री से इंतजार है।''

    हर्षित ने नवंबर 2024 में इंटरनेशनल डेब्यू किया। उन्होंने अब तक दो टेस्ट, 14 वनडे और 9 टी20 इंटरनेशनल मैच खेले हैं। हर्षित के बाहर होने पर पेसर मोहम्मद सिराज की 18 महीने बाद भारतीय टी20 टीम में वापसी हुई। सिराज टी20 वर्ल्ड कप के लिए शुरुआत में भारत की योजनाओं का हिस्सा नहीं थे। उन्होंने टूर्नामेंट में पहले मैच ही प्रभावी गेंदबाजी की। सिराज ने अमेरिका के खिलाफ 4 ओवर में 29 रन देकर तीन विकेट चटकाए।

    सिराज ने शनिवार को मैच के बाद कहा कि उन्हें नहीं लगा था कि तुरंत प्लेइंग इलेवन में जगह मिलेगी लेकिन रणजी ट्रॉफी में हैदराबाद की कप्तानी के अनुभव से मदद मिली। उन्होंने कहा, ''सबसे पहले तो मुझे नहीं पता था कि मैं खेलूंगा। मुझे बुलाए जाने पर खुशी हुई लेकिन मुझे सुबह पता चला कि मैं खेल रहा हूं इसलिए मैं थोड़ा और उत्साहित था क्योंकि मैं शुक्रवार को ही आया था।''

  • राज्यपाल का अभिभाषण

    राज्यपाल का अभिभाषण

    लखनऊ.

    उत्तर प्रदेश विधानमंडल के बजट सत्र के प्रथम दिन दोनों सदनों के संयुक्त अधिवेशन में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल का अभिभाषण प्रदेश की बदली हुई पहचान का स्पष्ट घोषणापत्र बनकर सामने आया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश ने बीते वर्षों में ‘बॉटलनेक स्टेट’ की छवि से बाहर निकलकर ‘ब्रेकथ्रू स्टेट’ के रूप में सुशासन, सुदृढ़ कानून-व्यवस्था, आर्थिक सशक्तिकरण, कृषि विस्तार, महिला सशक्तिकरण, अवसंरचना विकास और व्यापक जनकल्याण के क्षेत्रों में ठोस उपलब्धियां हासिल की हैं। राज्यपाल का अभिभाषण सरकार की नीतिगत दृढ़ता, प्रशासनिक दक्षता और विकसित उत्तर प्रदेश की ओर बढ़ते आत्मविश्वासपूर्ण कदमों का तथ्यात्मक और संवैधानिक प्रस्तुतीकरण रहा।

    यूपी बना देश के लिए मॉडल राज्य

    राज्यपाल ने कहा कि उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था की स्थिति आज देशभर में एक प्रभावी मानक के रूप में उभर रही है। सरकार की कठोरता और संवेदनशीलता के संतुलित दृष्टिकोण ने संगठित अपराध और माफिया तंत्र पर निर्णायक नियंत्रण स्थापित किया है। आधुनिक तकनीक के व्यापक उपयोग, पुलिस बल के सुदृढ़ीकरण, त्वरित एवं प्रभावी न्याय व्यवस्था तथा पारदर्शी प्रशासनिक प्रणालियों के माध्यम से प्रदेश में भयमुक्त और विश्वासपूर्ण वातावरण तैयार हुआ है। यही सुरक्षित परिवेश उत्तर प्रदेश को उद्योग, व्यापार, स्टार्टअप, निवेश और बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन के लिए देश के सर्वाधिक आकर्षक और भरोसेमंद राज्यों में स्थापित कर रहा है।

    जीरो टॉलरेंस, सख्त कार्रवाई

    राज्यपाल ने कहा कि प्रदेश में कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति ने ठोस और निर्णायक परिणाम दिए हैं। संगठित अपराध के विरुद्ध कार्रवाई में अब तक 35 माफिया व 94 सह-अपराधी दोषसिद्ध, 2 अपराधियों को मृत्युदंड, जबकि 267 अपराधी मुठभेड़ में ढेर किए गए हैं। 977 अभियुक्तों को एनएसए के तहत निरुद्ध किया गया है और माफिया तत्वों से ₹4,137 करोड़ से अधिक की अवैध संपत्ति जब्त की जा चुकी है। त्वरित पुलिसिंग के लिए यूपी-112 का रिस्पॉन्स टाइम 25 मिनट 42 सेकंड से घटकर 6 मिनट 51 सेकंड किया गया है। साइबर अपराधों से निपटने हेतु प्रदेश के सभी 75 जिलों में साइबर क्राइम थाने कार्यरत हैं, जबकि एटीएस ने 148 आतंकवादियों को गिरफ्तार किया है। 146 रोहिंग्या बांग्लादेशी, पाकिस्तानी व अन्य अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया गया है। भ्रष्टाचार पर सख्त प्रहार करते हुए भ्रष्टाचार निवारण संगठन द्वारा 999 सफल ट्रैप ऑपरेशन किए गए हैं।

    मजबूत हुए संस्थान

    राज्यपाल ने कहा कि सुरक्षा तंत्र की संस्थागत मजबूती की दिशा में 2017 के बाद 8 नई विधि विज्ञान प्रयोगशालाएं स्थापित की गई हैं और 6 अन्य निर्माणाधीन हैं। इसी अवधि में 2.19 लाख से अधिक पुलिस भर्तियां, 1.58 लाख कर्मियों को प्रोन्नति तथा 83,122 पदों पर भर्ती प्रक्रिया जारी है। पुलिस बल के सुदृढ़ीकरण हेतु बजट में लगभग 150 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। 41,424 होमगार्ड पदों पर नामांकन, 6 नए जिला कारागारों सहित इटावा केंद्रीय कारागार का निर्माण, और 1,010 बंदियों की समयपूर्व रिहाई कारागार सुधारों की दिशा में अहम कदम हैं। न्याय व्यवस्था को सुलभ और प्रभावी बनाने के लिए 10 जिलों में एकीकृत न्यायालय परिसरों को स्वीकृति, प्रयागराज में डॉ. राजेंद्र प्रसाद राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय की स्थापना, 81 फास्ट ट्रैक न्यायालयों का स्थायीकरण, लोक अदालतों में 3.60 करोड़ मामलों का निस्तारण, तथा 2,609 विधिक साक्षरता शिविरों का आयोजन किया गया है, जिससे प्रदेश में त्वरित, पारदर्शी और जन-संवेदनशील न्याय व्यवस्था को नई मजबूती मिली है।

    तेज कनेक्टिविटी, तेज विकास

    राज्यपाल ने अवसंरचना विकास के क्षेत्र में सरकार की उपलब्धियों को रेखांकित करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में संपर्क, परिवहन और लॉजिस्टिक्स को नई दिशा दी गई है। उन्होंने बताया कि प्रदेश के 168 विकासखंड मुख्यालयों को डबल-लेन सड़कों से जोड़ा जा चुका है, जबकि 1,410 किलोमीटर लंबाई की 161 सड़कों का निर्माण कार्य पूर्ण किया गया है। राज्य सरकार ने वर्ष 2025–26 तक 46,600 किलोमीटर सड़कों के सुदृढ़ीकरण का लक्ष्य निर्धारित किया है, वहीं अब तक लगभग 28,000 किलोमीटर सड़कों का नवीनीकरण पूरा हो चुका है। अंतर्राज्यीय और अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से जुड़े प्रमुख मार्गों को न्यूनतम फोर-लेन कनेक्टिविटी प्रदान करने का कार्य तेजी से प्रगति पर है, जिससे व्यापार, परिवहन, पर्यटन और औद्योगिक निवेश को व्यापक गति मिल रही है।

    उत्पादन, उत्पादकता और कृषि अर्थव्यवस्था तीनों मोर्चों पर तेजी से आगे बढ़ रहा है उत्तर प्रदेश: राज्यपाल

    विधानमंडल के संयुक्त अधिवेशन में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने अपने अभिभाषण में उत्तर प्रदेश के विकास की व्यापक और तथ्यपरक तस्वीर प्रस्तुत की। उन्होंने ऊर्जा आपूर्ति से लेकर कृषि-आधारित अर्थव्यवस्था, गन्ना किसानों के भुगतान, पशुपालन, पर्यावरण संरक्षण, खनन सुधार, सार्वजनिक परिवहन, सामाजिक सुरक्षा, महिला सशक्तिकरण, शहरी आवास और श्रमिक कल्याण तक सरकार की नीतियों और उनके ठोस परिणामों को क्रमबद्ध रूप से प्रस्तुत किया। 

    रोशनी, भरोसा और राहत

    राज्यपाल ने ऊर्जा क्षेत्र में हुए व्यापक सुधारों को रेखांकित करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में बिजली आपूर्ति व्यवस्था में ऐतिहासिक परिवर्तन दर्ज किया गया है। वर्तमान में नगरीय मुख्यालयों को 24 घंटे, तहसील मुख्यालयों को 21 घंटे और ग्रामीण क्षेत्रों को 19 घंटे निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। ‘इंटेंसिव डिस्ट्रीब्यूशन स्कीम’ के अंतर्गत अब तक 59.83 लाख स्मार्ट/इलेक्ट्रिक मीटर स्थापित किए जा चुके हैं, जबकि 37.45 लाख पुराने मीटरों का प्री-पेड में प्रतिस्थापन किया गया है। राज्यपाल ने यह भी स्पष्ट किया कि पिछले 6 वर्षों में बिजली दरों में कोई वृद्धि नहीं की गई, जिससे उपभोक्ताओं को स्थायी राहत मिली है और ऊर्जा क्षेत्र में भरोसे का वातावरण मजबूत हुआ है।

    अन्नदाता की ताकत, प्रदेश की प्रगति

    राज्यपाल ने कृषि क्षेत्र में हुई ऐतिहासिक प्रगति का विस्तृत विवरण प्रस्तुत करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश आज उत्पादन, उत्पादकता और कृषि अर्थव्यवस्था तीनों मोर्चों पर तेजी से आगे बढ़ रहा है। वर्ष 2016–17 में 557.46 लाख मीट्रिक टन रहा खाद्यान्न उत्पादन 2023–24 में बढ़कर 670.80 लाख मीट्रिक टन हो गया, और 2024–25 में यह 737.40 लाख मीट्रिक टन तक पहुंचा। कृषि क्षेत्र के सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) में भी उल्लेखनीय उछाल दर्ज किया गया है, जो 2016–17 में ₹2.96 लाख करोड़ से बढ़कर वर्तमान में ₹6.95 लाख करोड़ हो गया है। यह 135 प्रतिशत वृद्धि के साथ लगभग 18 प्रतिशत वार्षिक विकास दर को दर्शाता है।

    बागवानी बना ग्रामीण समृद्धि का मजबूत आधार

    बागवानी क्षेत्र में भी प्रदेश ने नई ऊंचाइयां छुई हैं। खेती का क्षेत्रफल 21.40 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 26 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है, जबकि उत्पादन 3.80 करोड़ मीट्रिक टन से बढ़कर 6 करोड़ मीट्रिक टन हो गया है। बागवानी उत्पादों के निर्यात में ₹400 करोड़ से बढ़कर ₹1,700 करोड़ तक की उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इन उपलब्धियों का सीधा लाभ किसानों को मिला है, जिससे फलों और सब्जियों से किसानों की आय ₹41,000 करोड़ से बढ़कर ₹1,25,000 करोड़ तक पहुंच गई है।

    गन्ना किसानों को रिकॉर्ड भुगतान, चीनी उद्योग को नई मजबूती

    राज्यपाल ने चीनी उद्योग और गन्ना किसानों को लेकर सरकार की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश ने गन्ना मूल्य भुगतान के क्षेत्र में अभूतपूर्व कीर्तिमान स्थापित किए हैं। उन्होंने बताया कि वर्ष 2017 के बाद से अब तक किसानों को ₹3,04,321 करोड़ से अधिक का भुगतान किया गया है, जो 1995 से 2017 के बीच हुए कुल भुगतान ₹2,13,519 करोड़ से ₹90,802 करोड़ अधिक है। राज्यपाल ने बताया कि 2017 के बाद पिपराइच, मुंडेरवा और रामाला में तीन नई चीनी मिलों की स्थापना से प्रदेश की पेराई क्षमता में प्रतिदिन 1.25 लाख क्विंटल की वृद्धि हुई है। किसानों के हित में गन्ना मूल्य में ₹30 प्रति क्विंटल की वृद्धि की गई है, वहीं गन्ना उत्पादकता 72.38 मीट्रिक टन प्रति हेक्टेयर से बढ़कर लगभग 84 मीट्रिक टन प्रति हेक्टेयर तक पहुंच गई है। स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से 59.75 करोड़ पौध किसानों तक पहुंचाई गईं तथा ₹76.88 करोड़ की वित्तीय सहायता प्रदान की गई। इन समन्वित प्रयासों का परिणाम है कि चीनी उद्योग और गन्ना क्षेत्र से जुड़े 10 लाख से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर प्राप्त हुए हैं।

    गो-कल्याण ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को दी नई मजबूती

    राज्यपाल ने पशुपालन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के सुदृढ़ीकरण पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में गो-कल्याण को केवल संरक्षण नहीं, बल्कि स्थायी आजीविका के सशक्त माध्यम के रूप में विकसित किया गया है। प्रदेश के 7,497 गो-आश्रय स्थलों में 12,38,547 निराश्रित गोवंश की देखभाल की जा रही है। मुख्यमंत्री सहभागिता योजना और पोषण मिशन के अंतर्गत 1,81,418 गोवंश गो-पालकों को सुपुर्द किए गए हैं, जिससे 1,13,631 परिवारों को स्थायी आजीविका प्राप्त हुई है। गो-पालन को आर्थिक रूप से सक्षम बनाने के लिए प्रति पशु प्रतिदिन ₹50 की दर से सहायता राशि सीधे डीबीटी के माध्यम से हस्तांतरित की जा रही है, जिसके अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2025–26 में अब तक ₹1,484 करोड़ से अधिक का भुगतान किया गया है। इन समन्वित प्रयासों से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को ठोस आधार मिला है और पशुपालन आत्मनिर्भरता की दिशा में प्रभावी साधन बनकर उभरा है।

    जनभागीदारी से मजबूत हुआ पर्यावरण संरक्षण

    राज्यपाल ने वनों और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में प्रदेश की उल्लेखनीय उपलब्धियों को रेखांकित करते हुए बताया कि वर्ष 2017 के बाद से अब तक 242.13 करोड़ पौधों का रोपण किया जा चुका है, जिसके परिणामस्वरूप प्रदेश का वनावरण बढ़कर 9.96 प्रतिशत तक पहुंच गया है। पर्यावरण संरक्षण को केवल सरकारी अभियान न मानकर सामाजिक जनभागीदारी से जोड़ने की रणनीति ने उत्तर प्रदेश को इस क्षेत्र में एक प्रभावी और अनुकरणीय मॉडल के रूप में स्थापित किया है। पौधरोपण, संरक्षण और संवर्धन के समन्वित प्रयासों से प्रदेश ने सतत विकास और पर्यावरणीय संतुलन की दिशा में ठोस प्रगति की है।

    पारदर्शी खनन से बढ़ा राजस्व

    राज्यपाल ने खनन क्षेत्र में किए गए व्यापक सुधारों का उल्लेख करते हुए बताया कि वर्ष 2017 के बाद से अब तक प्रदेश को ₹28,920 करोड़ का खनन राजस्व प्राप्त हुआ है, जबकि 2012–17 की अवधि में यह मात्र ₹7,712 करोड़ था। तकनीक-सक्षम निगरानी, ई-टेंडरिंग और पारदर्शी नीलामी व्यवस्था के चलते न केवल राजस्व में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, बल्कि अवैध खनन पर भी प्रभावी नियंत्रण सुनिश्चित हुआ है।

    सार्वजनिक परिवहन को नई गति*

    उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम की उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए राज्यपाल ने बताया कि निगम की 13,621 बसों ने 103.37 करोड़ किलोमीटर का संचालन किया, जिससे 37.10 करोड़ यात्रियों को सुरक्षित और सुलभ परिवहन सेवाएं उपलब्ध कराई गईं। इस कुशल प्रबंधन के परिणामस्वरूप निगम ने ₹3,810.63 करोड़ का राजस्व अर्जित किया, जो प्रदेश के सार्वजनिक परिवहन तंत्र की मजबूती और वित्तीय स्थिरता को दर्शाता है।

    सामाजिक सुरक्षा और महिला सशक्तिकरण को मिला मजबूत आधार

    सामाजिक सुरक्षा और जनकल्याण के क्षेत्र में हुई प्रगति को रेखांकित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि प्रदेश में स्वयं सहायता समूह सामाजिक समावेशन और महिला सशक्तिकरण का सशक्त माध्यम बनकर उभरे हैं। इन समूहों में 64 प्रतिशत से अधिक सदस्य अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) समुदाय से हैं, जबकि 45,611 से अधिक अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति की महिलाएं भी सक्रिय रूप से जुड़ी हैं। स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से ₹109 करोड़ से अधिक की धनराशि सीधे लाभार्थियों तक पहुंचाई गई है, जिससे महिलाओं की आर्थिक स्वतंत्रता, सामाजिक सहभागिता और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को उल्लेखनीय मजबूती मिली है।

    आरक्षण सुधार और लक्षित वित्तीय सहायता से सामाजिक न्याय को मजबूती

    राज्यपाल ने कहा कि सामाजिक न्याय की भावना को केंद्र में रखते हुए सरकार ने बाबा साहेब अंबेडकर रोजगार प्रोत्साहन योजना में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए 23 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित किया है,  जिसमें इस वर्ग तथा दिव्यांगों के लिए अधिकतम ₹70,000 तक सब्सिडी का प्रावधान है। सामान्य श्रेणी में यह सब्सिडी प्रति यूनिट 25 प्रतिशत या अधिकतम ₹50,000 है। लक्षित वित्तीय सहायता की व्यवस्था ने पात्र लाभार्थियों को आर्थिक संबल प्रदान किया है और उन्हें योजनाओं का वास्तविक लाभ दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। ये सुधार समावेशी विकास और समान अवसर की दिशा में सरकार की प्रतिबद्धता को स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं।

    सुरक्षित घर, सशक्त शहर

    शहरी विकास और आवास क्षेत्र में हुई प्रगति पर राज्यपाल ने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के अंतर्गत 36.37 लाख आवासों का निर्माण किया गया है, जो लक्ष्य का 99.49 प्रतिशत और देश में सर्वाधिक है। इसी तरह मुख्यमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत अब तक 3.67 लाख आवासों का निर्माण पूरी तरह पूर्ण हो चुका है। यह उपलब्धि गरीबों को सम्मानजनक आवास उपलब्ध कराने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

    श्रमिक कल्याण की सशक्त व्यवस्था, सामाजिक सुरक्षा का विस्तार

    श्रम एवं श्रमिक कल्याण योजनाओं का उल्लेख करते हुए राज्यपाल ने कहा कि प्रदेश में असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाने के लिए अभूतपूर्व कार्य किए गए हैं। ई-श्रम पोर्टल पर अब तक 8 करोड़ 51 लाख से अधिक श्रमिकों का पंजीकरण किया जा चुका है, जो इस दिशा में प्रदेश की व्यापक पहुंच को दर्शाता है। प्रधानमंत्री श्रमयोगी मानधन योजना के अंतर्गत 7,01,484 श्रमिकों को पेंशन सुरक्षा से जोड़ा गया है, जिससे श्रमिकों के भविष्य को आर्थिक संबल मिला है और उत्तर प्रदेश श्रमिक हितैषी राज्य के रूप में अपनी मजबूत पहचान बना रहा है।

    राज्यपाल ने शिक्षा के विस्तार से लेकर आकांक्षात्मक जिलों की प्रगति और “विकसित भारत” की परिकल्पना तक सरकार की नीतियों, उपलब्धियों और भविष्य की दिशा को किया प्रस्तुत*

    विधानमंडल के संयुक्त अधिवेशन में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के अभिभाषण के दौरान उत्तर प्रदेश के समग्र विकास की स्पष्ट तस्वीर सामने रखी। राज्यपाल ने शिक्षा के विस्तार से लेकर आकांक्षात्मक जिलों की प्रगति, आबकारी राजस्व में ऐतिहासिक वृद्धि और “विकसित भारत” की परिकल्पना तक सरकार की नीतियों, उपलब्धियों और भविष्य की दिशा को तथ्यात्मक और संतुलित ढंग से प्रस्तुत किया। अभिभाषण में यह संदेश प्रमुख रहा कि उत्तर प्रदेश अब प्रशासनिक सुधारों, वित्तीय सुदृढ़ता और समावेशी विकास के सहारे देश के अग्रणी राज्यों की पंक्ति में मजबूती से खड़ा हो रहा है।

    शिक्षा का विस्तार

    शिक्षा के क्षेत्र में हुई उपलब्धियों को रेखांकित करते हुए राज्यपाल ने बताया कि प्रदेश में 6,808 सहायक अध्यापकों और 1,939 राजकीय शिक्षकों की नियुक्ति की गई है, जिससे कुल 8,966 नई नियुक्तियों के माध्यम से शैक्षणिक ढांचे को सुदृढ़ किया गया है। विद्यालयों में 778 आईसीटी लैब की स्थापना, 1236 सरकारी माध्यमिक स्कूलों में स्मार्ट कक्षाओं की स्थापना,  6 नए राज्य विश्वविद्यालयों और 71 नए राजकीय महाविद्यालयों की स्थापना ने उच्च एवं तकनीकी शिक्षा की गुणवत्ता और पहुंच, दोनों को नई दिशा दी है।

    आकांक्षात्मक जिलों की उड़ान

    इसके साथ ही राज्यपाल ने आकांक्षात्मक जिलों की प्रगति का उल्लेख करते हुए बताया कि देश के 112 आकांक्षात्मक जिलों में शामिल उत्तर प्रदेश के 8 जिलों विशेषकर बलरामपुर, सिद्धार्थनगर, सोनभद्र, चंदौली, फतेहपुर और बहराइच ने स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि और पोषण जैसे प्रमुख संकेतकों में उल्लेखनीय सुधार कर समावेशी विकास का मजबूत उदाहरण प्रस्तुत किया है।

    आबकारी राजस्व में ऐतिहासिक उछाल, वित्तीय सुदृढ़ता को मजबूती

    राज्यपाल ने आबकारी राजस्व में दर्ज की गई उल्लेखनीय वृद्धि पर प्रकाश डालते हुए बताया कि वर्ष 2016–17 में जहां प्रदेश का आबकारी राजस्व मात्र ₹14,273 करोड़ था, वहीं 2024–25 में यह बढ़कर ₹52,573 करोड़ तक पहुंच गया है। सुदृढ़ नीति, पारदर्शी व्यवस्था और प्रभावी प्रशासनिक नियंत्रण के परिणामस्वरूप वर्ष 2025–26 के लिए आबकारी राजस्व को ₹63,000 करोड़ तक ले जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जो उत्तर प्रदेश की वित्तीय मजबूती और राजस्व प्रबंधन की सफलता को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।

    विकसित भारत की ओर अग्रसर उत्तर प्रदेश

    राज्यपाल ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार का स्पष्ट लक्ष्य विकास की गति को और अधिक तीव्र करना, प्रशासनिक पारदर्शिता को सुदृढ़ बनाना तथा प्रदेश को “विकसित भारत” की परिकल्पना के अनुरूप अग्रणी राज्य के रूप में स्थापित करना है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सुशासन, संवैधानिक मूल्यों और जनभागीदारी के समन्वित प्रयासों से उत्तर प्रदेश आने वाले समय में न केवल राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को नई मजबूती देगा, बल्कि समावेशी, संतुलित और टिकाऊ विकास के प्रभावी मॉडल के रूप में देशभर में अपनी विशिष्ट और प्रेरक पहचान भी स्थापित करेगा।

    जनसंख्या के लिहाज से नहीं, बल्कि प्रदर्शन-परिणाम के आधार पर भी देश का नेतृत्व कर रहा उत्तर प्रदेश: राज्यपाल

    विधानमंडल के संयुक्त अधिवेशन में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के अभिभाषण के दौरान उत्तर प्रदेश को देश के अग्रणी और “नंबर वन” राज्यों में स्थापित करने वाली उपलब्धियों का विस्तृत लेखा-जोखा प्रस्तुत किया गया। कृषि, किसान कल्याण, ऊर्जा, आवास, सामाजिक सुरक्षा, उद्योग, स्वास्थ्य, पर्यावरण और प्रशासनिक सुधारों जैसे लगभग हर प्रमुख क्षेत्र की योजनाओं में उत्तर प्रदेश की प्रथम स्थान की उपलब्धियों को राज्यपाल ने तथ्यात्मक आधार के साथ रेखांकित किया। अभिभाषण में यह स्पष्ट संदेश दिया गया कि उत्तर प्रदेश अब केवल जनसंख्या के लिहाज से नहीं, बल्कि प्रदर्शन और परिणाम के आधार पर भी देश का नेतृत्व कर रहा है।

    कृषि उत्पादन में देश का सिरमौर उत्तर प्रदेश

    राज्यपाल ने बताया कि उत्तर प्रदेश आज खाद्यान्न, गन्ना, चीनी, दुग्ध, आम और आलू उत्पादन में देश में प्रथम स्थान पर है। खाद्यान्न उत्पादन 2016–17 के 557.46 लाख मीट्रिक टन से बढ़कर 2024–25 में 737.40 लाख मीट्रिक टन तक पहुंच गया है। यह उपलब्धि प्रदेश को न केवल आत्मनिर्भर बनाती है, बल्कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा में भी उसकी केंद्रीय भूमिका को दर्शाती है।

    किसान कल्याण योजनाओं में शीर्ष पर प्रदेश

    प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के प्रभावी क्रियान्वयन में उत्तर प्रदेश देश में पहले स्थान पर रहा है। कृषि निवेश पर अनुदान का डीबीटी के माध्यम से भुगतान करने वाला उत्तर प्रदेश देश का पहला राज्य बना। गन्ना किसानों को रिकॉर्ड ₹3 लाख करोड़ से अधिक का भुगतान कर सरकार ने किसान हितैषी प्रशासन का मजबूत उदाहरण प्रस्तुत किया है।

    ऊर्जा, एथेनॉल और हरित पहल में अग्रणी

    राज्यपाल ने बताया कि पीएम सूर्य घर योजना में उत्तर प्रदेश देश में प्रथम स्थान पर है। इसके साथ ही एथेनॉल उत्पादन और आपूर्ति में भी प्रदेश देश का नेतृत्व कर रहा है, जिससे न केवल किसानों की आय बढ़ी है, बल्कि स्वच्छ ऊर्जा और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में भी ठोस योगदान मिला है।

    आवास, स्वच्छता और बुनियादी सुविधाओं में नंबर वन

    प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण व शहरी) के अंतर्गत आवास निर्माण में उत्तर प्रदेश देश में प्रथम स्थान पर है। ग्रामीण स्वच्छ शौचालय निर्माण में भी प्रदेश शीर्ष पर है, जो स्वच्छ भारत मिशन की जमीनी सफलता को दर्शाता है।

    सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में व्यापक कवरेज

    राज्यपाल ने बताया कि अटल पेंशन योजना में पंजीकरण में उत्तर प्रदेश प्रथम स्थान पर है। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत 1.85 करोड़ गैस कनेक्शन देकर प्रदेश देश में पहले स्थान पर है। प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना और प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना, दोनों में उत्तर प्रदेश देश में अग्रणी है। 

    उद्योग, एमएसएमई और रोजगार में नया रिकॉर्ड

    96 लाख से अधिक सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों (एमएसएमई) की स्थापना के साथ उत्तर प्रदेश देश का अग्रणी राज्य बना है। जेम पोर्टल के माध्यम से सर्वाधिक सरकारी खरीद करने वाला राज्य भी उत्तर प्रदेश ही है, जिससे पारदर्शिता और स्थानीय उद्यमों को बढ़ावा मिला है।

    प्रशासनिक दक्षता और डिजिटल गवर्नेंस में आगे
    राज्यपाल ने बताया कि मिशन कर्मयोगी के तहत iGOT पोर्टल पर सर्वाधिक यूजर्स के साथ उत्तर प्रदेश प्रथम स्थान पर है। ई-प्रॉसिक्यूशन प्रणाली के प्रभावी उपयोग में भी प्रदेश देश में नंबर वन है। सर्वाधिक 20.98 लाख एक्टिव करदाताओं के साथ उत्तर प्रदेश कर अनुपालन में भी शीर्ष पर है। 

    स्वास्थ्य और डिजिटल हेल्थ में बड़ी उपलब्धि

    आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के अंतर्गत आभा आईडी निर्माण में उत्तर प्रदेश देश में प्रथम स्थान पर है। यह डिजिटल हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में प्रदेश की बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।