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  • विश्व कप से पहले अमेरिका ने पाकिस्तान की दुखती रग पर रखा हाथ, दबाव बढ़ेगा उनके ऊपर

    विश्व कप से पहले अमेरिका ने पाकिस्तान की दुखती रग पर रखा हाथ, दबाव बढ़ेगा उनके ऊपर

    कोलंबो
    टी20 विश्व कप में मंगलवार को ग्रुप ए के मुकाबले में शाम 7 बजे कोलंबो में पाकिस्तान और अमेरिका की टीमें आमने-सामने होंगी। पिछले वर्ल्ड कप में यूएस की टीम ने पाकिस्तान को सुपर ओवर तक चले मैच में शिकस्त देकर बड़ा उलटफेर किया था। अब इस बार मुकाबले से पहले अमेरिका ने पाकिस्तान की उस दुखती रग पर हाथ रख दिया है। अमेरिकी स्पिनर मोहम्मद मोहसिन ने पाकिस्तान को पिछली हार की याद दिलाते हुए कहा है कि उनकी टीम को मनोवैज्ञानिक बढ़त हासिल है।

    मुकाबले से पहले सलमान अली आगा के नेतृत्व वाली टीम को चेतावनी देते हुए मोहसिन ने कहा, 'पिछला मैच हारने की वजह से पाकिस्तान के ऊपर दबाव होगा।'

    मोहसिन पाकिस्तानी मूल के हैं और वह 5 साल पहले अमेरिका शिफ्ट होने से पहले पाकिस्तान में काफी क्रिकेट खेले हैं। उन्होंने कहा, 'मैं पाकिस्तान टीम के ज्यादातर खिलाड़ियों के साथ खेल चुका हूं, इसलिए मैंने टीम को इनपुट दिया है और अब हम और ज्यादा कुशल और विश्वास से भरी टीम हैं।'
    जब अमेरिका ने पाकिस्तान को 22 गज की पट्टी पर चटाई थी धूल

    पिछले वर्ल्ड कप में अमेरिका ने पाकिस्तान को हराकर चौंका दिया था। वो मैच काफी चर्चित रहा था और उसका फैसला सुपर ओवर में हुआ था। डलास में 6 जून 2024 को खेले गए मैच में पाकिस्तान ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 7 विकेट के नुकसान पर 159 रन बनाए थे। जवाब में अमेरिका ने भी निर्धारित 20 ओवर में 3 विकेट के नुकसान पर 159 रन ही बनाए। उसके बाद मैच सुपर ओवर में गया।

    सुपर ओवर में पाकिस्तान के सबसे अनुभवी गेंदबाज मोहम्मद आमिर ने लचर गेंदबाजी की। उन्होंने सबसे महत्वपूर्ण ओवर में 3 वाइड फेंके। इसके अलावा विकेटकीपर मोहम्मद रिजवान की गलती से ओवरथ्रो के रूप में भी अमेरिका को गिफ्ट मिला। अमेरिकी टीम ने सुपर ओवर में 1 विकेट खोकर कुल 18 रन बनाए। जवाब में पाकिस्तान सुपर ओवर में 1 विकेट खोकर सिर्फ 13 रन ही बना सका और उसे हार का सामना करना पड़ा था।
    इस बार पहले ही मैच में अमेरिका ने भारत की बढ़ा दी थी टेंशन

    पिछले वर्ल्ड कप में पाकिस्तान के ऊपर अमेरिका की जीत को तुक्का समझने की भूल किसी भी टीम को भारी पड़ सकती है। इस बार भारत के पहले ही मुकाबले में अमेरिका ने ये साबित भी कर दिया। भारत की बेजोड़ बल्लेबाजी को अमेरिकी गेंदबाजों ने पूरी तरह अंकुश में रखा। एक समय तो 76 रन पर भारत के 6 विकेट गिर चुके थे। भला हो कप्तान सूर्यकुमार यादव के नाबाद 84 रनों की जबरदस्त पारी का जो टीम 9 विकेट के नुकसान पर 161 रन का स्कोर खड़ा कर पाई। जवाब में अमेरिका की टीम 8 विकेट पर 132 रन ही बना सकी और इस तरह टीम इंडिया ने मैच 29 रनों से जीता।

  • ज्ञान, तकनीक और नवाचार के क्षेत्र में भी देश में विशेष पहचान बनाएगा छत्तीसगढ़ : मुख्यमंत्री साय

    ज्ञान, तकनीक और नवाचार के क्षेत्र में भी देश में विशेष पहचान बनाएगा छत्तीसगढ़ : मुख्यमंत्री साय

    रायपुर
    छत्तीसगढ़ प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध राज्य है। हमारा लक्ष्य है कि छत्तीसगढ़ ज्ञान, तकनीक और नवाचार के क्षेत्र में भी देश में अपनी विशिष्ट पहचान बनाए। छत्तीसगढ़ सरकार राज्य को ज्ञान, तकनीक और नवाचार के क्षेत्र में अग्रणी बनाने की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रही है।आधुनिक अधोसंरचना, प्रभावी ई-गवर्नेंस प्रणाली और निवेश-अनुकूल नीतियों के चलते छत्तीसगढ़ आज आईटी, आईटीईएस एवं इमरजिंग टेक्नोलॉजी आधारित उद्योगों के लिए एक भरोसेमंद और आकर्षक गंतव्य के रूप में उभर रहा है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज अपने निवास कार्यालय में इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग, छत्तीसगढ़ शासन एवं सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क्स ऑफ इंडिया (एसटीपीआई) के मध्य हुए महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) उपरांत कार्यक्रम को संबोधित करते हुए यह बात कही।  

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि युवाओं में उद्यमिता विकसित करने और उन्हें आईटी एवं आईटीईएस जैसे क्षेत्रों में विश्वस्तरीय अवसर राज्य के भीतर ही उपलब्ध कराने की दिशा में यह पहल की गई है। इस एमओयू के तहत राज्य में सेंटर ऑफ एंटरप्रेन्योरशिप (CoE) एवं इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम डिजाइन एंड डेवलपमेंट (ESDD) सेंटर की स्थापना की जाएगी। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित सेंटर ऑफ एंटरप्रेन्योरशिप के माध्यम से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, वन एवं औषधीय उत्पाद आधारित मेडटेक, स्मार्ट सिटी समाधान तथा स्मार्ट कृषि जैसे चार महत्वपूर्ण क्षेत्रों में नवाचार और स्टार्ट-अप को प्रोत्साहन मिलेगा। साथ ही, एक अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम डिजाइन एंड डेवलपमेंट (ESDD) सेंटर की स्थापना की जाएगी, जो प्रति वर्ष लगभग 30 से 40 हार्डवेयर स्टार्ट-अप और एमएसएमई को प्रोडक्ट डिजाइन, प्रोटोटाइपिंग, कौशल विकास एवं क्षमता निर्माण की सुविधाएं प्रदान करेगा।
                  
    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि इस पहल से प्रदेश के युवाओं को राज्य के भीतर ही इनक्यूबेशन, मेंटरशिप, फंडिंग और आधुनिक प्रयोगशालाओं की सुविधा उपलब्ध होगी। इससे उच्च कौशल वाले युवाओं का बड़े शहरों की ओर पलायन रुकेगा और स्थानीय स्तर पर रोजगार एवं उद्यमिता को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने एसटीपीआई जैसी राष्ट्रीय स्तर की प्रतिष्ठित संस्था के सहयोग को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि देशभर में 68 केंद्रों और 24 सेक्टर-विशेष सेंटर ऑफ एंटरप्रेन्योरशिप के माध्यम से एसटीपीआई का व्यापक अनुभव छत्तीसगढ़ के स्टार्ट-अप और नवाचार इकोसिस्टम को नई ऊँचाइयों तक ले जाएगा।

    मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि यह एमओयू राज्य के आर्थिक विकास में एक मील का पत्थर साबित होगा और छत्तीसगढ़ को डिजिटल नवाचार, तकनीकी उद्यमिता और स्टार्ट-अप के क्षेत्र में राष्ट्रीय मानचित्र पर एक नई पहचान दिलाएगा।

    इस अवसर पर मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, इलेक्ट्रॉनिक और प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव अंकित आनंद, निदेशक एसटीपीआई रवि वर्मा, चिप्स के सीईओ प्रभात मलिक सहित अन्य अधिकारीगण उपस्थित थे।

  • दिग्विजय सिंह ने दिया था कांग्रेस में शामिल होने का ऑफर, गोपाल भार्गव बोले- मैं टिकाऊ हूं, बिकाऊ नहीं

    दिग्विजय सिंह ने दिया था कांग्रेस में शामिल होने का ऑफर, गोपाल भार्गव बोले- मैं टिकाऊ हूं, बिकाऊ नहीं

    भोपाल/सागर
     मध्य प्रदेश की राजनीति में वरिष्ठ नेताओं की भूमिका और संगठनात्मक सम्मान को लेकर चल रही बहस एक बार फिर तेज हो गई है. इसकी वजह बने हैं भाजपा के कद्दावर नेता और रहली विधायक गोपाल भार्गव, जिनका सार्वजनिक मंच से दिया गया बयान सियासी हलकों में दूर तक गूंज रहा है. सागर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान गोपाल भार्गव ने न सिर्फ अपने लंबे राजनीतिक संघर्ष का जिक्र किया, बल्कि यह भी स्पष्ट किया कि राजनीति में उपेक्षा किसी भी नेता को भीतर से तोड़ सकती है. उनके शब्दों में दर्द भी था और अनुभव की गंभीरता भी. जिस तरह उन्होंने अपने जीवन के तीन दशक से अधिक समय को पार्टी और संगठन को समर्पित करने की बात कही, उसने यह संकेत दिया कि मामला सिर्फ व्यक्तिगत असंतोष का नहीं, बल्कि भाजपा के भीतर वरिष्ठ नेताओं की भूमिका और सम्मान से जुड़ा बड़ा सवाल है.

    गोपाल भार्गव बोले-मैं टिकाऊं, बिकाऊं नहीं 

    गोपाल भार्गव ने कहा 'राजनीति में उपेक्षा किसी भी व्यक्ति को भीतर से तोड़ देती है, कई बार सरकार में बात नहीं सुनी जाती तो भी मन टूट जाता है. उन्होंने कांग्रेस के कार्यकाल का जिक्र करते हुए कहा कि मैंने तो 20 साल संघर्ष किया है, अपनी मांगे रखता रहा, जूझता रहा. लेकिन जब सरकार नहीं मानती तो मन टूट जाता है. मैंने 20 साल मन को बांधे रखा, उस दौरान कई मंत्री यहां तक पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह कहते थे कि गोपालजी बीजेपी में क्या रखा है, कुछ नहीं है, आप तो हमारे पास आ जाओ, मैं आपको किसी अच्छे विभाग का मंत्री बना दूंगा, लेकिन तब मैंने भी कहा दिया था कि  राजा साहब एक बात कहता हूं, ये माल टिकाऊ है बिकाऊ नहीं है. मैं 20 साल विपक्ष में रहा, लेकिन यहां तो लोग 20 महीने में पलटी मार जाते हैं. 

    9 बार के अपराजेय विधायक गोपाल भार्गव का यह बयान ऐसे समय आया है, जब मोहन यादव सरकार की कैबिनेट को लेकर पहले से ही राजनीतिक चर्चाएं चल रही हैं. वरिष्ठ होने के बावजूद मंत्री पद न मिलना और संगठनात्मक फैसलों में कथित अनदेखी, इन सभी बातों ने उनके शब्दों को और अधिक अर्थपूर्ण बना दिया है. जब उन्होंने कहा कि उन्होंने 20 साल तक कठिन परिस्थितियों में खुद को टिकाए रखा, जबकि आज के दौर में लोग 20 महीने भी नहीं टिक पाते, तो यह सिर्फ आत्मकथा नहीं थी, बल्कि वर्तमान राजनीतिक संस्कृति पर सीधा कटाक्ष था. यही वजह है कि उनका “मैं टिकाऊ हूं, बिकाऊ नहीं” वाला बयान अब सिर्फ एक संवाद नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश की राजनीति में वैचारिक निष्ठा बनाम अवसरवाद की बहस का प्रतीक बन गया है.

    राजनीति में उपेक्षा का दर्द, अनुभव और योगदान की अनदेखी से गहरी हुई पीड़ा 

    कार्यक्रम को संबोधित करते हुए गोपाल भार्गव ने साफ शब्दों में कहा कि जब किसी जनप्रतिनिधि की बात सरकार या संगठन नहीं सुनता, तो उसका मनोबल टूटता है. उन्होंने यह भी जोड़ा कि उपेक्षा किसी को भी भीतर से कमजोर कर सकती है. यह बयान उस मानसिक स्थिति को दर्शाता है, जिससे अक्सर लंबे समय तक सेवा देने वाले वरिष्ठ नेता गुजरते हैं. राजनीति में पद और प्रभाव भले बदलते रहते हों, लेकिन अनुभव और योगदान की अनदेखी गहरी पीड़ा पैदा करती है. भार्गव के शब्दों में यही पीड़ा झलकती है.

    “मैं टिकाऊ हूं, बिकाऊ नहीं” का सियासी संदेश
    गोपाल भार्गव के बयान का सबसे चर्चित हिस्सा तब सामने आया, जब उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के कांग्रेस में शामिल होने के प्रस्ताव का जिक्र किया. उन्होंने स्पष्ट कहा कि उन्होंने उस प्रस्ताव को ठुकरा दिया, क्योंकि वे बिकाऊ नहीं हैं. यह टिप्पणी सिर्फ एक घटना का जिक्र नहीं थी, बल्कि उनकी वैचारिक प्रतिबद्धता और राजनीतिक ईमानदारी का सार्वजनिक ऐलान भी थी. भाजपा के भीतर इसे निष्ठा का प्रतीक माना जा रहा है, वहीं विपक्ष इसे संगठन के अंदर असंतोष की स्वीकारोक्ति के रूप में देख रहा है.

    पूरा जीवन पार्टी को समर्पित कर दिया, अपेक्षित सम्मान नहीं 
    गोपाल भार्गव ने यह भी कहा कि उन्होंने अपना पूरा जीवन पार्टी को समर्पित कर दिया है. उन्होंने कई बार चुनाव जीते, संगठन को मजबूत किया और सरकार में रहते हुए अहम विभागों की जिम्मेदारी निभाई. इसके बावजूद जब अपेक्षित सम्मान नहीं मिलता, तो पीड़ा स्वाभाविक है. उनका यह बयान भाजपा के उन वरिष्ठ नेताओं की आवाज बनता दिख रहा है, जो खुद को हाशिए पर महसूस कर रहे हैं.

    भाजपा में वरिष्ठता और अनुभव का सवाल
    गोपाल भार्गव का राजनीतिक सफर लंबा और प्रभावशाली रहा है. वे रहली विधानसभा से लगातार विधायक चुने गए हैं और कई महत्वपूर्ण विभागों के मंत्री रह चुके हैं. संगठन और सरकार दोनों स्तरों पर उनका अनुभव उन्हें भाजपा के मजबूत स्तंभों में शामिल करता है.

    जनता ने मेरा साथ दिया 

    गोपाल भार्गव ने कहा 'हमने उस दौरान बहुत कोशिश की है, जब हमारी सरकार आएंगी तो हमने अपने क्षेत्र का विकास करवाएंगे, इस दौरान जनता ने भी मेरा पूरा साथ दिया है, आज जनता के साथ होने से ही क्षेत्र में विकास कार्य किए जा रहे हैं.' गोपाल भार्गव का यह बयान अहम माना जा रहा है, राजनीतिक जानकारों का कहना है कि एक तरह से उन्होंने न केवल अपनी पीड़ा जाहिर की है, साथ ही यह भी बताया है कि वह पार्टी के प्रति हमेशा वैचारिक प्रतिबद्धता और राजनीतिक ईमानदारी से काम करते रहे हैं. 

    गोपाल भार्गव रिकॉर्ड 9वीं बार विधायक 

    गोपाल भार्गव वर्तमान में मध्य प्रदेश विधानसभा में सबसे सीनियर विधायक हैं, वह सागर जिले की रहली विधानसभा सीट से लगातार 9वीं बार 2023 में विधायक चुने गए थे. वह 2003 से 2013 तक लगातार अलग-अलग विभागों के मंत्री रहे, जबकि 15 महीने की कमलनाथ सरकार के दौरान वह विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष भी रहे हैं, इसके अलावा 2023 तक वह फिर से मंत्री रहे हैं, लेकिन नई सरकार में उन्हें जिम्मेदारी नहीं मिली है. बीजेपी में गोपाल भार्गव के प्रशासनिक अनुभव और संगठनात्मक पकड़ को अहम माना जाता है. ऐसे में उनका यह बयान फिलहाल चर्चा में बना हुआ है.  

    मोहन कैबिनेट से बाहर रहने की पीड़ा
    मुख्यमंत्री मोहन यादव की वर्तमान कैबिनेट में गोपाल भार्गव को मंत्री पद नहीं मिला. इसके बाद से ही उनके बयानों में नाराजगी के संकेत लगातार दिखाई दे रहे हैं. इससे पहले उनके ब्राह्मण समाज को लेकर दिए गए बयान ने भी राजनीतिक हलचल मचा दी थी. राजनीतिक जानकार मानते हैं कि यह असंतोष सिर्फ एक नेता तक सीमित नहीं है, बल्कि संगठन के भीतर वरिष्ठ और अनुभवी चेहरों की भूमिका को लेकर चल रही असमंजस की स्थिति को उजागर करता है.

    सियासी हलचल और आगे के संकेत
    गोपाल भार्गव के बयान ने मध्य प्रदेश की राजनीति में नई चर्चा को जन्म दिया है. भाजपा के लिए यह संकेत है कि संगठनात्मक संतुलन और वरिष्ठ नेताओं के सम्मान पर दोबारा विचार करने की जरूरत है. वहीं विपक्ष इसे भाजपा के भीतर बढ़ते असंतोष के प्रमाण के रूप में पेश कर रहा है. आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि पार्टी इस संदेश को कैसे लेती है.

     

  • लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर राहुल गांधी ने क्यों नहीं किए साइन? कांग्रेस ने बताई वजह

    लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर राहुल गांधी ने क्यों नहीं किए साइन? कांग्रेस ने बताई वजह

     नई दिल्ली

    विपक्ष ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ आक्रामक रुख अख्तियार कर लिया है. अब विपक्षी ने लोकसभा सेक्रेटरी जनरल को बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव सौंप दिया है. इसमें कांग्रेस, DMK, समाजवादी पार्टी जैसे दलों के करीब 120 सांसदों ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पद से हटाने के लिए प्रस्ताव लाने के नोटिस पर साइन किए हैं.

    लोकसभा के महासचिव को सौंपे गए नोटिस के बाद ओम बिरला ने खुद को सदन की कार्यवाही के संचालन से अलग कर लिया है और मंगलवार को वह सदन की कार्यवाही का संचालन करने आसन पर नहीं आए.

    अविश्वास प्रस्ताव पर राहुल गांधी ने हस्ताक्षर नहीं किया है. कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि संसदीय लोकतंत्र की गरिमा को देखते हुए विपक्ष के नेता के द्वारा स्पीकर के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव के नोटिस पर हस्ताक्षर करना ठीक नहीं है.

    विपक्ष ने मंगलवार को लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पद से हटाने के लिए एक प्रस्ताव लाने का नोटिस दिया. बिरला ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर सदन में राहुल गांधी और दूसरे विपक्षी नेताओं को बोलने से रोका था. विपक्ष ने नोटिस में कहा है कि सदन में स्पीकर की टिप्पणी से कांग्रेस सदस्यों पर साफ़ तौर पर झूठे आरोप लगे.

    अविश्वास प्रस्ताव पर हस्ताक्षर से TMC का इनकार

    संसद के बजट सत्र के दौरान लोकसभा में लगातार गतिरोध देखने को मिल रहा है. विपक्ष का आरोप है कि राहुल गांधी को लोकसभा में बोलने नहीं दिया जा रहा है. इसके चलते कांग्रेस सहित विपक्षी पार्टियां लोकसभा स्‍पीकर ओम बिरला से बेहद नाराज हैं. यही कारण है कि विपक्षी पार्टियां उनके खिलाफ अविश्‍वास प्रस्‍ताव लाने जा रही है. हालांकि इस बार विपक्ष बंटा हुआ नजर आ रहा है. विपक्ष की सबसे प्रमुख पार्टियों में से एक तृणमूल कांग्रेस ने लोकसभा अध्‍यक्ष के खिलाफ अविश्‍वास प्रस्‍ताव पर हस्‍ताक्षर नहीं किए हैं. तृणमूल सांसद अभिषेक बनर्जी ने कहा कि ब्रह्मास्‍त्र का इस्‍तेमाल पहले क्‍यों किया जाए. 

    लोकसभा अध्‍यक्ष के खिलाफ जब पूरा विपक्ष एकजुट नजर आ रहा है, तृणमूल कांग्रेस ने अलग रुख अपनाया है. टीएमसी ने स्‍पीकर के खिलाफ अविश्‍वास प्रस्‍ताव पर हस्‍ताक्षर नहीं किए हैं. इसे लेकर टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी ने सफाई दी है.

    स्‍पीकर को साझा चिट्ठी लिखनी चाहिए थी: बनर्जी 

    उन्‍होंने एनडीटीवी से कहा कि हमारी राय में पहले विपक्ष को अपनी मांगों को लेकर स्पीकर को एक साझा चिट्ठी लिखनी चाहिए थी और तीन दिनों का समय देना चाहिए था. 

    पहले ही ब्रह्मास्‍त्र का इस्‍तेमाल क्‍यों करें: बनर्जी 

    उन्‍होंने कहा कि अगर कोई कार्रवाई नहीं होती तो फिर तीन दिन बाद अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस देना चाहिए था, तब टीएमसी भी इसमें साथ देती. उन्‍होंने कहा कि अविश्वास प्रस्ताव आखिरी कदम है, पहले ही ब्रह्मास्त्र का इस्तेमाल क्यों करें.

    अभिषेक बनर्जी चाहे कोई भी तर्क दें, लेकिन इससे संदेश ठीक नहीं है. जानकार कहते हैं कि विपक्षी एकता की बात करने वाले इंडिया गठबंधन के दलों के बीच इस तरह की स्थिति बताती है कि ऐसे मतभेद सामूहिक प्रयासों को ही कमजोर करते हैं. 

    विपक्ष क्यों लेकर आई अविश्वास प्रस्ताव

    विपक्षी नेताओं का आरोप है कि स्पीकर सदन में पक्षपाती रवैया अपनाते हैं। विपक्ष की आवाज को दबाया जाता है। प्रियंका गांधी ने कहा कि स्पीकर साहब का खुद निरादर किया गया है। स्पीकर साहब पर दबाव है कि उनको खुद बयान देना पड़ रहा है जो सही नहीं है। सवाल ही नहीं उठता कि पीएम पर कोई हमला करे। सरकार द्वारा उन पर दबाव डाला गया है इसलिए उन्होंने ये कहा है क्योंकि उस दिन पीएम मोदी की हिम्मत नहीं हुई सदन में आने की। इसलिए स्पीकर सफाई दे रहे हैं, ये गलत बात है।

    'बहुत ही जरूरी कदम…'

    कांग्रेस नेता मणिकम टैगोर बी ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, "विपक्ष ने संवैधानिक मर्यादा में अपना भरोसा रखा है. माननीय स्पीकर का पर्सनल सम्मान करते हुए भी, हम विपक्षी MPs को पब्लिक इंपॉर्टेंस के मुद्दे उठाने का मौका लगातार न देने से दुखी और परेशान हैं. कई सालों के बाद, स्पीकर के खिलाफ नो-कॉन्फिडेंस नोटिस दिया गया है. यह एक बहुत ही जरूरी कदम है."

  • ‘बस्तर पंडुम’ बस्तर की बदली पहचान का सशक्त प्रतीक : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

    ‘बस्तर पंडुम’ बस्तर की बदली पहचान का सशक्त प्रतीक : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

    जनजातीय परंपराओं के संरक्षण के साथ बस्तर को नई ऊँचाइयों तक ले जाने के लिए प्रतिबद्ध है सरकार : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

    रायपुर 
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 7 से 9 फरवरी के बीच छत्तीसगढ़ में आयोजित बस्तर पंडुम को बस्तर की समृद्ध संस्कृति, परंपरा और जनजातीय विरासत का भव्य उत्सव बताते हुए इससे जुड़े सभी सहभागियों को हार्दिक बधाई दी है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन हमारी सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करने के साथ-साथ स्थानीय समुदायों को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि एक समय बस्तर का नाम आते ही माओवाद, हिंसा और विकास में पिछड़ेपन की छवि उभरती थी, लेकिन आज परिस्थितियाँ पूरी तरह बदल चुकी हैं। अब बस्तर शांति, विकास और स्थानीय लोगों के बढ़ते आत्मविश्वास के लिए जाना जा रहा है। उन्होंने कामना की कि बस्तर का आने वाला समय शांति, प्रगति और सांस्कृतिक गौरव से परिपूर्ण हो।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व और निरंतर मार्गदर्शन से बस्तर आज सांस्कृतिक गौरव और समावेशी विकास के सशक्त प्रतीक के रूप में अपनी नई पहचान गढ़ रहा है। ‘बस्तर पंडुम’ जैसे आयोजन जनजातीय परंपराओं, लोक-संस्कृति और विरासत को सहेजने के साथ-साथ शांति, विश्वास और समावेशी प्रगति का प्रभावी संदेश देते हैं।

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों से बस्तर के जनजीवन में सकारात्मक परिवर्तन स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं। सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, संचार और आजीविका के अवसरों के विस्तार से क्षेत्र में भरोसे और सहभागिता का नया वातावरण बना है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में जनजातीय समाज की परंपराओं और सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण के साथ-साथ बस्तर को शांति, समृद्धि और विकास की नई ऊँचाइयों तक निरंतर अग्रसर करने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।

  • मध्य प्रदेश में 60 जवानों को समय से पहले प्रमोशन, बालाघाट में बनेगा अमर जवान ज्योति

    मध्य प्रदेश में 60 जवानों को समय से पहले प्रमोशन, बालाघाट में बनेगा अमर जवान ज्योति

     बालाघाट

    मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सोमवार को बालाघाट में आयोजित एक कार्यक्रम में नक्सली मुठभेड़ों में अदम्य साहस और वीरता का प्रदर्शन करने वाले 60 जवानों को नियमों से हटकर पदोन्नति प्रदान की। एक आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, मुख्यमंत्री ने राज्य की शांति और सुरक्षा के लिए प्राणों की आहुति देने वाले जवानों को अमर जवान ज्योति पर पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।

    इसके अतिरिक्त, मुख्यमंत्री यादव ने बालाघाट जिले में आईएसओ मानकों के अनुसार विकसित किए गए 32 थानों और अन्य सरकारी कार्यालयों का रिमोट से उद्घाटन किया। मुख्यमंत्री ने जिले में आयोजित कार्यक्रम के दौरान हॉक फोर्स और पुलिस कर्मियों के साथ दोपहर का भोजन भी किया।

    नक्सलियों को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया

    कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री यादव ने कहा कि बालाघाट नाम में ही शक्ति निहित है। अपने दृढ़ संकल्प से इस जिले ने यह साबित कर दिया है कि नक्सलवाद जैसी हिमालयी चुनौती का भी अंत किया जा सकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में नक्सलवाद के उन्मूलन के लिए राष्ट्रव्यापी अभियान चलाया गया। मध्य प्रदेश पुलिस ने प्रभावी अभियान चलाकर नक्सलियों को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया और राज्य में लाल सलाम को अंतिम विदाई दी।

    मध्य प्रदेश अब नक्सलवाद से मुक्त

    मुख्यमंत्री यादव ने कहा कि नक्सलवाद को खत्म करने में हॉक फोर्स के बहादुर जवानों की भूमिका वाकई सराहनीय है। बालाघाट कभी नक्सलियों के खून-खराबे का अड्डा हुआ करता था, लेकिन सुरक्षा बलों की बहादुरी, पुलिस के दृढ़ संकल्प और जनता के भरोसे ने मिलकर इस क्षेत्र को नक्सली आतंक की जंजीरों से मुक्त कराया। राज्य सरकार अमर जवान ज्योति के जरिए शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित कर रही है। हम गर्व से कह सकते हैं कि मध्य प्रदेश अब नक्सलवाद से मुक्त है।

    नक्सल प्रभावित 250 विद्यालयों का जीर्णोद्धार

    उन्होंने आगे कहा कि राज्य सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए व्यापक व्यवस्था कर रही है कि नक्सलियों को दोबारा पैर जमाने का मौका कभी न मिले। बालाघाट जिले में नक्सल प्रभावित 250 विद्यालयों का जीर्णोद्धार किया गया है। स्थानीय नागरिकों के लिए एकल-खिड़की सेवा केंद्र स्थापित किए गए हैं, जबकि आदिवासी समुदायों को वन अधिकार प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र और रोजगार के अवसर प्रदान करने के लिए शिविरों का आयोजन किया गया है।

    बालाघाट में अमर जवान ज्योति बनेगा

    मुख्यमंत्री ने इस वर्ष को किसान कल्याण वर्ष घोषित करते हुए महाकौशल क्षेत्र के बालाघाट में कृषि मंत्रिमंडल की बैठक की घोषणा की। बालाघाट में अमर जवान ज्योति नक्सल मुक्त अभियान की स्मृति के रूप में स्थापित की जाएगी। मुख्यमंत्री ने नक्सल विरोधी अभियानों की सफलता के लिए पुलिसकर्मियों को बधाई दी।

  • गिरवानी और कन्हर एनीकट के लिए 7.69 करोड़ स्वीकृत

    गिरवानी और कन्हर एनीकट के लिए 7.69 करोड़ स्वीकृत

    रायपुर
    छत्तीसगढ़ शासन जल संसाधन विभाग द्वारा बलरामपुर रामानुजगंज जिले के अंतर्गत दो सिंचाई योजना के कार्यों के लिए 7.69 करोड़ की राशि स्वीकृत किये गये हैं। स्वीकृत कार्यो में विकासखण्ड-रामचंद्रपुर की रामानुजगंज शहर के कन्हर एनीकट के जीर्णोद्धार व घाट निर्माण कार्य के लिए 4 करोड़ 11 लाख 87 हजार  रुपये स्वीकृत किये गये है। 

    योजना के निर्माण से भू-जल संवर्धन निस्तारी एवं पेयजल की सुविधा उपलब्ध होगी। इसी तरह से विकासखण्ड-रामचंद्रपुर की गिरवानी नदी एनीकट योजना के निर्माण कार्य हेतु 3 करोड़ 57 लाख 60 हजार रुपये स्वीकृत किये गये हैं। योजना से जल संवर्धन निस्तारी, पेयजल एवं आवागमन के साथ किसानों द्वारा स्वयं के साधनो से 75 हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ फसलों की सिंचाई की सुविधा उपलब्ध होगी। योजना के अंतर्गत निर्माण कार्यों को कराने मुख्य अभियंता हसदेव गंगा कछार जल संसाधन विभाग अम्बिकापुर को प्रशासकीय स्वीकृति दी गई हैं।

  • बसनारा और पहिया जलाशय योजना के लिए 5.61 करोड़ रूपए स्वीकृत

    बसनारा और पहिया जलाशय योजना के लिए 5.61 करोड़ रूपए स्वीकृत

    रायपुर
    छत्तीसगढ़ शासन, जल संसाधन विभाग द्वारा सूरजपुर जिले की दो जलाशय योजनाओं के कार्यों के लिए 5 करोड़ 61 लाख 51 हजार रूपए स्वीकृत किए गए है। स्वीकृत कार्यों में विकासखण्ड-ओड़गी की बसनारा जलाशय का मरम्मत (जीर्णोद्वार) कार्य के लिए एक करोड 26 लाख 66 हजार रूपए स्वीकृत किए गए है। 

    योजना के प्रस्तावित कार्यो के पूर्ण हो जाने से रूपांकित सिंचाई क्षमता 60 हेक्टेयर के विरूद्ध 30 हेक्टेयर की हो रही कमी की पूर्ति सहित पूर्ण रूपांकित क्षेत्र में सिंचाई की सुविधा मिलेगी। इसी तरह विकासखण्ड प्रतापपुर की पहिया जलाशय योजना के निर्माण कार्य के लिए 4 करोड़ 34 लाख 85 हजार रूपए स्वीकृत किए गए है। योजना के निर्माण से 100 हेक्टेयर खरीफ एवं 30 हेक्टेयर रबी सहित कुल 130 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई की सुविधा होगी। सिंचाई योजनाओं के कार्य पूर्ण कराने मुख्य अभियंता हसदेव गंगा कछार जल संसाधन विभाग अंबिकापुर को प्रशासकीय स्वीकृति दी गई है।

  • बांग्लादेश के अगले प्रधानमंत्री का कौन होगा? चुनाव से पहले सर्वे का नतीजा, भारत विरोधी जमात की हालत

    बांग्लादेश के अगले प्रधानमंत्री का कौन होगा? चुनाव से पहले सर्वे का नतीजा, भारत विरोधी जमात की हालत

    ढाका 

    बांग्लादेश में आम चुनाव से पहले माहौल काफी गर्म हैं। इस बार बांग्लादेश में भारत विरोधी ताकतें भी चुनाव में पूरा जोर लगा रही हैं। वहीं अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना की आवामी लीग को बैन कर दिया गया है। अगस्त 2024 में शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद से नोबेल विजेता मोहम्मद यूनुस की अगुआई में अंतरिम सरकार चल रही है। वहीं अब उम्मीद है कि बांग्लादेश को पूर्णकालिक प्रधानमंत्री मिल जाएगा।

    किसके बीच है मुकाबला

    इस बार बांग्लादेश में मुख्य मुकाबला पूर्व प्रधानमंत्री दिवंगत खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान की अगुआई वाली बीएनपी और कट्टरपंथी जमात-ए-इस्लामी के बीच है। जमात-ए-इस्लामी का प्रमुख मुद्दा ही अल्पसंख्यकों और भारत के विरोध में रहता है। वहीं बीएनपी का अजेंडा भी भारत के समर्थन में कभी नहीं रहा है।

    क्या कहता है चुनाव पूर्व का सर्वे

    बांग्लादेश के अखबार प्रथोमोलो ने इस चुनाव को लेकर सर्वे करवाया है। इसके मुताबिक बीएनपी को 200 से ज्यादा सीटें मिल सकती हैं और तारिक रहमान बांग्लादेश के नए प्रधानमंत्री हो सकते हैं। तारिक रहमान लंबे समय के बाद ब्रिटेन से बांग्लादेश लौटे है। सर्वे के मुताबिक बांग्लादेश नेशलिस्ट पार्टी (BNP) पूर्ण बहुतम मिल सकता है। वहीं भारत विरोधी जमात की हालत बहुत अच्छी नहीं है। हालांकि वह विपक्ष की भूमिका अदा कर सकता है। जमात-ए-इस्लामी शफीकुर्रहमान के नेतृत्व में चुनाव लड़ रहा है।

    सर्वे में बताया गया है कि बीएनपी 200 से ज्यादा सीटें जीत सकती है वहीं, जमात-ए-इस्लामी 50 के आसपास सीटें जीत सकता है। बांग्लादेश की जातीय पार्टी के खाते में 3 सीटें जा सकती हैं। बाकी सीटें निर्दलीय उम्मीदवारों के खाते में जाने का अनुमान है। बता दें कि बांग्लादेश की संसद निर्वाचिन के लिए कुल सीटों की संख्या 350 है। 300 सदस्यों को जनता चुनती है और 50 सदस्यों का सीधा निर्वाचन होता है। भारत की तरह बांग्लादेश में भी सांसदों का कार्यकाल पांच साल का होता है।

    बांग्लादेश में बनेगी किसकी सरकार? सर्वे ने किया इशारा

    बांग्लादेश में 12 फरवरी को होने वाले आम चुनाव के लिए चुनाव प्रचार थम चुका है. इसके बाद अब कोई भी राजनीतिक दल या उम्मीदवार प्रचार नहीं कर सकेगा. मतदान संसद की कुल 300 में से 299 सीटों पर होगा. एक सीट पर चुनाव नहीं हो रहा है. इसके साथ ही मतदाता जुलाई चार्टर पर एक जनमत संग्रह में भी हिस्सा लेंगे. इस चुनाव के लिए भारत ने कोई चुनाव पर्यवेक्षक नहीं भेजा है. वहीं अवामी लीग को चुनाव लड़ने की अनुमति नहीं दी गई है, जिसका विरोध शेख हसीना कर रही हैं.

    बांग्लादेश में चुनाव प्रचार 22 जनवरी से शुरू हुआ था. इस दौरान 299 सीटों के लिए 1,981 उम्मीदवार मैदान में हैं और करीब 12.7 करोड़ पंजीकृत मतदाता वोट डालेंगे. चुनावी मुकाबला मुख्य रूप से दो बड़े गठबंधनों के बीच माना जा रहा है. एक तरफ तारिक रहमान के नेतृत्व वाला बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) गठबंधन है, जिसे 33 से 35 फीसदी समर्थन अकेले ही मिलने का अनुमान है. दूसरी तरफ जमात-ए-इस्लामी और नेशनल सिटीजन पार्टी (एनसीपी) के नेतृत्व वाला 11 दलों का गठबंधन है, जिसे 30 से 34 फीसदी समर्थन मिलने की संभावना जताई जा रही है. सबसे बुरी खबर तो जमात-ए-इस्लामी के लिए है.

    निकल गई जमात-ए-इस्लामी की अकड़

    अन्य सर्वे क्या कहते हैं?
    हालांकि एक अन्य सर्वे में मुकाबला काफी करीबी बताया गया है. इस सर्वे के मुताबिक बीएनपी गठबंधन को 44.1 फीसदी और जमात गठबंधन को 43.9 फीसदी वोट मिल सकते हैं. इसमें कहा गया है कि जमात गठबंधन 105 सीटों और बीएनपी गठबंधन 101 सीटों पर जीत दर्ज कर सकता है. चुनाव के नतीजे 13 फरवरी को घोषित किए जाएंगे.

    चुनाव के साथ ही जनमत संग्रह भी

    बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस ने अपने देश के लोगों से 12 फरवरी को आम चुनावों के साथ-साथ होने वाले जनमत संग्रह में 'हां' में वोट देने और उनके प्रस्तावित सुधार पैकेज का समर्थन करने की जोरदार अपील की। यूनुस ने सोमवार देर रात वरिष्ठ सचिवों और शीर्ष नौकरशाहों को संबोधित करते हुए कहा, ''यदि जनमत संग्रह के दौरान 'हां' में अधिक वोट मिलते हैं तो बांग्लादेश के भविष्य का निर्माण अधिक सकारात्मक तरीके से होगा।''

    यूनुस ने कहा कि जनमत संग्रह के दौरान यदि लोग 'हां' में वोट करते है तो इससे ''कुशासन'' दूर करने में मदद मिलेगी। यूनुस का प्रशासन जटिल 84-सूत्रीय सुधार पैकेज को लेकर जनता का समर्थन हासिल करने के लिए पिछले कई हफ्तों से सक्रिय अभियान चला रहा है।

  • प्रदेश की बेटी ने पूरा किया 2500Km का सफर: नारी शक्ति का संदेश दे रही आशा, आर्मी डे पर शुरू की थी साइकल यात्रा

    प्रदेश की बेटी ने पूरा किया 2500Km का सफर: नारी शक्ति का संदेश दे रही आशा, आर्मी डे पर शुरू की थी साइकल यात्रा

    राजगढ़
    राजगढ़ जिले की रहने वाली साइक्लिस्ट आशा मालवीय ने अपनी भारत यात्रा के तहत लगभग 2550 किलोमीटर का सफर पूरा कर लिया है। बीती रात वह जयपुर, राजस्थान से गुजरात यात्रा करते हुए पीथमपुर पहुंचीं, जहां उनका स्वागत किया गया। इसके बाद वे महू के लिए रवाना हुईं।

    आशा मालवीय ने यह यात्रा आर्मी डे 15 जनवरी के अवसर पर जयपुर से शुरू की थी। उनकी कुल यात्रा 7500 किलोमीटर की है, जो जयपुर से अरुणाचल प्रदेश तक जाएगी। मीडिया से बातचीत में उन्होंने बताया कि उनकी इस साइकिल यात्रा का उद्देश्य नारी शक्ति, देशभक्ति और अदम्य साहस का संदेश देना है।

    मालवीय ने जानकारी दी कि वर्तमान यात्रा से पहले भी वह लगभग 60 हजार किलोमीटर की साइकिल यात्राएं कर चुकी हैं। वह एक एथलीट भी रह चुकी हैं।

    पुलिस ने प्रोटोकॉल के तहत सीमा तक छोड़ा

    पीथमपुर के सेक्टर एक थाना क्षेत्र में संजय जलाशय चौकी प्रभारी अजय भदौरिया, सहायक उप निरीक्षक राजेश चौहान और हेड कांस्टेबल मंजीत सिंह ने आशा मालवीय की आगवानी की। सेक्टर एक थाना पुलिस ने उन्हें प्रोटोकॉल के तहत अपनी सीमा से विदा किया और उनके साहस की सराहना की।

    किशनगंज थाना पुलिस के उप निरीक्षक सखाराम जामोद, सहायक उप निरीक्षक सुरेश यादव और हेड कांस्टेबल आशीष पारिख ने उन्हें महू के लिए रवाना किया। जहां वो रात रुकेंगी।