Author: Admin

  • शर्लिन चोपड़ा बर्थडे: 15 साल की उम्र में बनीं मिस आंध्र, ‘प्लेबॉय’ फोटोशूट से मिली पहचान

    शर्लिन चोपड़ा बर्थडे: 15 साल की उम्र में बनीं मिस आंध्र, ‘प्लेबॉय’ फोटोशूट से मिली पहचान

    मुंबई 
     हिंदी सिनेमा में जहां सशक्त मुख्य भूमिकाओं के लिए अभिनेत्रियों की अहमियत बनी रही है, वहीं कुछ बोल्ड अभिनेत्रियों और मॉडलों ने भी अपनी अलग पहचान बनाई है। इन कलाकारों ने पारंपरिक अभिनय से इतर अपनी बेबाक छवि और बोल्ड प्रजेंटेशन के जरिए दर्शकों के बीच खास जगह बनाई। इसी कड़ी में नाम आता है शर्लिन चोपड़ा का, जो 11 फरवरी को अपना 38वां जन्मदिन मना रही हैं। आज भी वह ओटीटी मंचों पर सक्रिय हैं और अपने बोल्ड दृश्यों के कारण चर्चा में रहती हैं।

     मीडिया में भी उनकी मौजूदगी लगातार बनी रहती है, जिससे वह सुर्खियों में रहती हैं। कम ही लोग जानते हैं कि शर्लिन चोपड़ा को असली पहचान फिल्मों के जरिए नहीं, बल्कि मैग्जीन जगत से मिली। एक प्रतिष्ठित मैग्जीन में उनकी बोल्ड फोटोज ने उन्हें वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाई, जिसके बाद वह अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी चर्चा का विषय बनीं। यही पहचान आगे चलकर उनके करियर की दिशा तय करने में भी अहम साबित हुई।

    हैदराबाद में जन्मी शर्लिन को मॉडल बनने का शौक बचपन से था और यही वजह रही कि मात्र 15 साल की उम्र में अभिनेत्री ने मिस आंध्र का खिताब जीता था। मॉडलिंग के बाद अभिनेत्री फिल्मों में काम करने के लिए कई ऑडिशन दिए और साल 2002 में उन्हें तमिल फिल्म वेंडी मब्बू' में काम किया था, जो एरोटिक फिल्म थी। उसी साल, उन्होंने एक तमिल फिल्म 'यूनिवर्सिटी' और एक अंग्रेजी फिल्म 'बीपर' में भी अभिनय किया। तीनों फिल्में पर्दे पर रिलीज हुई लेकिन बॉक्स ऑफिस कलेक्शन में अपना बजट भी नहीं निकाल पाई।

    बॉलीवुड में शर्लिन ने एंट्री 2005 में आई फिल्म 'टाइम पास' से की थी। जिसके बाद 'दोस्ती: फ्रेंड्स फॉरएवर', जवानी दीवानी: ए यूथफुल जॉयराइड', 'नॉटी बॉय','गेम','रकीब', 'रेड स्वस्तिक',और 'दिल बोले हड़िप्पा! जैसी फिल्मों में काम किया। शर्लिन की फिल्में कब आईं और कब चली गईं, किसी को पता नहीं चला, लेकिन साल 2012 में ग्लोबल लेवल पर शर्लिन के नाम की सुनामी आ गई।

    अभिनेत्री शर्लिन चोपड़ा उस समय सुर्खियों में आईं, जब वह प्लेबॉय मैग्जीन के लिए बिना कपड़ों के फोटो शूट कराने वाली पहली भारतीय महिला बनीं। हालांकि, इस मामले में विवाद तब खड़ा हुआ, जब प्लेबॉय मैग्जीन ने यह कहकर इनकार किया कि उनकी शर्लिन के साथ किसी तरह की प्रत्यक्ष मुलाकात हुई थी। इसके बावजूद बाद में अभिनेत्री का डिजिटल फोटो शूट जारी किया गया।

    डिजिटल फोटो शूट के सामने आते ही व्यापक चर्चा शुरू हो गई और रातो-रात शर्लिन देशभर के अखबारों और टीवी चैनलों की सुर्खियां बन गईं। इस घटनाक्रम ने मनोरंजन जगत में खासा हलचल पैदा की।
    मैग्जीन के अलावा शर्लिन चोपड़ा ने रियलिटी शो बिग बॉस-3 में भी हिस्सा लिया था। शो के दौरान उनके पहनावे और बयानों को लेकर भी खूब चर्चा हुई। उन्होंने सार्वजनिक रूप से यह कहा था कि वह अभिनेता अमिताभ बच्चन की बड़ी प्रशंसक हैं और भविष्य में ऐसे ही लंबे कद और मजबूत कद-काठी वाले जीवनसाथी से विवाह करना चाहेंगी।
    शर्लिन चोपड़ा अपने बेबाक बयानों और बोल्ड अंदाज के कारण आज भी अक्सर खबरों में बनी रहती हैं और मनोरंजन जगत में चर्चा का विषय रहती हैं।

  • कलेक्टर ने ली समय-सीमा की बैठक, फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम अंतर्गत अभियान की शुरुआत

    कलेक्टर ने ली समय-सीमा की बैठक, फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम अंतर्गत अभियान की शुरुआत

    महासमुंद 
    कलेक्टर विनय कुमार लंगेह ने आज सुबह 10ः30 बजे से कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में समय-सीमा की बैठक आयोजित कर जिले में संचालित शासकीय योजनाओं, कार्यक्रमों एवं आगामी आयोजनों की विस्तृत समीक्षा की। इस अवसर पर जिला पंचायत सीईओ हेमंत नंदनवार, अपर कलेक्टर सचिन भूतड़ा, रवि कुमार साहू, अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), विभागीय जिलाधिकारी, जनपद सीईओ, नगरीय निकायों के सीएमओ तथा वीसी के माध्यम से ब्लॉक स्तरीय अधिकारी उपस्थित रहे।

    बैठक के दौरान कलेक्टर विनय कुमार लंगेह ने सिरपुर महोत्सव 2026 के सफल आयोजन में उत्कृष्ट योगदान देने वाले अधिकारी-कर्मचारियों को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। उन्होंने आयोजन के दौरान सौंपे गए दायित्वों का जिम्मेदारीपूर्वक निर्वहन करने एवं विभिन्न व्यवस्थाओं में सराहनीय सहयोग देने के लिए सभी को बधाई दी।

    कलेक्टर लंगेह ने राष्ट्रीय फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम अंतर्गत दवा सेवन करते हुए अभियान का शुभारम्भ किया। इस अवसर पर बैठक में मौजूद जिला अधिकारियों ने भी दवा का सेवन किया। कलेक्टर ने कहा कि जिले में 10 से 25 फरवरी तक स्वास्थ्य विभाग की टीम द्वारा सामूहिक दवा सेवन कराया जाना है। उन्होंने स्वास्थ्य अधिकारियों को निर्देशित किया कि डीईसी एवं एल्बेंडाजोल दवा का वितरण एवं सेवन निर्धारित समय-सारणी एवं दिशा-निर्देशों के अनुरूप किया जाए तथा दवा सेवन स्वास्थ्य कर्मियों की निगरानी में कराया जाए। कलेक्टर लंगेह ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे अभियान के दौरान स्वास्थ्य कर्मियों का सहयोग करें और स्वयं तथा अपने परिवार के सभी पात्र सदस्यों को दवा अवश्य सेवन कराएं, ताकि जिले को फाइलेरिया मुक्त बनाया जा सके।

    बैठक में कलेक्टर विनय कुमार लंगेह ने जिले में जारी धान उठाव की समीक्षा करते हुए डीईओ के विरुद्ध लंबित धान उठाव की स्थिति पर ध्यान देते हुए संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिन उपार्जन केंद्रों में डीईओ के विरुद्ध धान का उठाव लंबित है, वहाँ प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र उठाव सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने स्टॉक का भौतिक सत्यापन करने तथा धान खरीदी पूर्णतः प्रमाण पत्र जारी करने के निर्देश दिए। कलेक्टर ने कहा कि धान उठाव के लिए 15 फरवरी तक डीईओ जारी करें एवं उठाव सुनिश्चित करें। स्टॉक के भौतिक सत्यापन में किसी तरह की लापरवाही न बरती जाए। बैठक में आधार बेस्ड उपस्थिति प्रणाली को अनिवार्य करते हुए कलेक्टर ने निर्देश दिए कि सभी अधिकारी-कर्मचारी प्रतिदिन सुबह 10 बजे कार्यालय में उपस्थित रहें। उपस्थिति में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। ई-ऑफिस प्रणाली को लेकर कलेक्टर ने निर्देश दिए कि सभी फाइलों का मूवमेंट ई-फाइल के माध्यम से ही किया जाए, यह अनिवार्य है। इससे कार्यों में पारदर्शिता एवं समयबद्धता सुनिश्चित होगी।

    उन्होंने मुख्य सचिव द्वारा किए गए समीक्षा के अनुरूप विभिन्न विभागों के व्यापक समीक्षा की और शासन से प्राप्त निर्देशानुसार क्रियान्वयन करने के निर्देश दिए गए। प्रमुख रूप से स्वास्थ्य, महिला बाल विकास, जिला पंचायत, कृषि, शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण विभागों के कार्यक्रम अनुसार समीक्षा की। कलेक्टर ने कहा कि शासन की महत्वाकांक्षी योजनाओं को ध्यान में रखते हुए जिले को विकास क्रम में अग्रणी बनाए रखना है।

    इसके अतिरिक्त बैठक में अन्य शासकीय योजनाओं एवं कार्यक्रमों की भी विस्तृत समीक्षा की गई। कलेक्टर ने कहा कि शासन की मंशा के अनुरूप जनहित के कार्यों में तेजी, गुणवत्ता और पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए, तथा समय-सीमा के भीतर कार्य पूर्ण करना सभी विभागों की जिम्मेदारी है। साथ ही उन्होंने पीएम जनमन, मुख्यमंत्री जनदर्शन, कलेक्टर जन चौपाल, समय-सीमा पत्रक और राजस्व प्रकरणों की समीक्षा करते हुए गुणवत्तापूर्ण निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

  • टी20 विश्व कप: बास डे लीडे के ऑलराउंड प्रदर्शन से नीदरलैंड ने नामीबिया को 7 विकेट से हराया

    टी20 विश्व कप: बास डे लीडे के ऑलराउंड प्रदर्शन से नीदरलैंड ने नामीबिया को 7 विकेट से हराया

    नई दिल्ली 
     अरुण जेटली क्रिकेट स्टेडियम में टी20 विश्व कप 2026 का ग्रुप ए का मुकाबला नामीबिया और नीदरलैंड के बीच मंगलवार को खेला गया। बास डे लीडे के बेहतरीन ऑलराउंड प्रदर्शन के दम पर नीदरलैंड ने नामीबिया को 2 ओवर पहले ही 7 विकेट से हरा दिया। नीदरलैंड को जीत के लिए 157 रन का लक्ष्य मिला। टीम की शुरुआत अच्छी नहीं रही और मैक्स ओ दाउद के रूप में पहला झटका 16 के स्कोर पर लगा। वह 7 रन बनाकर आउट हुए। तीसरे नंबर पर बल्लेबाजी के लिए उतरे बास डे लीडे ने बेहतरीन बल्लेबाजी की और 48 गेंद पर 4 छक्कों और 5 चौकों सहित नाबाद 72 रन की पारी खेल टीम को 12 गेंद पहले 7 विकेट से जीत दिला दी। डे लीडे ने दूसरे विकेट के लिए माइकल लेविट 28, के साथ 30 और तीसरे विकेट के लिए कोलिन एकरमैन 32 के साथ 68 रन की अहम साझेदारी की। इसके अलावा लीडे ने कप्तान स्कॉट एडवर्ड्स नाबाद 18 के साथ 43 रन की साझेदारी की।

    नीदरलैंड ने 18 ओवर में 3 विकेट पर 159 रन बनाकर मैच जीता। विजयी चौका बास डे लीडे के बल्ले से निकला।
    टॉस गंवाकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी नामीबिया ने 8 विकेट पर 156 रन बनाए थे। निकोल लोफ्टी-ईटन ने सबसे ज्यादा 42 रन की पारी खेली थी। 38 गेंदों की पारी में उन्होंने 2 छक्के और 1 चौका लगाया था। इसके अलावा जान फ्राइलिंक ने 30 और जेजे स्मिट ने 22 रन की पारी खेली। कप्तान गेरहर्ड इरासमस ने 9 गेंद पर 18 रन बनाए थे।

    नीदरलैंड के लिए बास डे लीडे और लोगान वान बीक ने 2-2, जबकि आर्यन दत्त और फ्रेड क्लासेन ने 1-1 विकेट लिए थे।
    बास डे लीडे को उनकी बेहतरीन बल्लेबाजी और गेंदबाजी के लिए प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया। 

  • 352 स्कूलों में आधार बायोमेट्रिक अपडेट कैंप, 21,406 विद्यार्थियों का होगा सत्यापन

    352 स्कूलों में आधार बायोमेट्रिक अपडेट कैंप, 21,406 विद्यार्थियों का होगा सत्यापन

    महासमुंद
    जिले में यूडाईस 2025-26 के अंतर्गत आधार से संबंधित बायोमेट्रिक अपडेट की प्रक्रिया को तेज करने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। 06 फरवरी 2026 की स्थिति में जिले में कुल 30,587 विद्यार्थियों का बायोमेट्रिक अपडेट लंबित है, जिसे शीघ्र पूर्ण किया जाना है। इस हेतु विद्यालयों में विशेष बायोमेट्रिक अपडेट शिविर आयोजित किए जाएंगे, जिनके माध्यम से यूआईडीएआई से डाटा अपडेट कर उसकी प्रविष्टि यूडाईस पोर्टल पर की जाएगी। अभियान के अंतर्गत ई.डी.एम. चिप्स से समन्वय कर 20 से अधिक लंबित बायोमेट्रिक वाले 352 विद्यालयों का चयन किया गया है, जिसमें लगभग 21,406 विद्यार्थियों का अपडेट किया जाना है।

    जिला मिशन समन्वयक समग्र शिक्षा रेखराज शर्मा द्वारा सभी विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी एवं विकासखंड स्त्रोत केंद्र समन्वयकों को निर्देशित करते हुए अभियान के प्रचार-प्रसार के लिए विद्यालयों को पालकों एवं विद्यार्थियों को जागरूक करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि अधिक से अधिक छात्र-छात्राएं शिविर में उपस्थित होकर अपना बायोमेट्रिक अपडेट करवा सकें। इस कार्य के सफल संचालन के लिए विकासखंड स्तर पर बीआरसी एवं संकुल स्तर पर संकुल समन्वयकों को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। पूरे अभियान की प्रतिदिन मॉनिटरिंग जिला शिक्षा अधिकारी महासमुंद द्वारा किया जाएगा। प्रथम चरण में 5 से 7 वर्ष एवं 15 से 17 वर्ष आयु वर्ग के विद्यार्थियों के बायोमेट्रिक अपडेट पर फोकस करते हुए शत-प्रतिशत लक्ष्य प्राप्त करने के निर्देश दिए गए हैं।

    यूआईडीएआई द्वारा बायोमेट्रिक अपडेट की जानकारी यूडाईस पोर्टल पर अपडेट करने की सुविधा भी उपलब्ध करा दी गई है। साथ ही यूआईडीएआई के निर्देशानुसार 7 से 15 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों का अनिवार्य बायोमेट्रिक अपडेट एक वर्ष के लिए निःशुल्क किया गया है, जबकि 5 से 7 वर्ष एवं 17 वर्ष के बच्चों के लिए यह सुविधा पहले से ही निःशुल्क है। आधार ऑपरेटरों को प्रतिदिन शिविर की जानकारी निर्धारित प्रारूप में संधारित करने तथा शिविर स्थल पर आवश्यक दस्तावेज सूची, शुल्क सूची एवं अन्य निर्देश प्रदर्शित करने कहा गया हैं। 

  • प्रदेश ने खोए जमीन से जुड़े और जनजातीय समाज के नेता: सीएम योगी

    प्रदेश ने खोए जमीन से जुड़े और जनजातीय समाज के नेता: सीएम योगी

    • प्रदेश ने खोए जमीन से जुड़े और जनजातीय समाज के नेता: सीएम योगी
    • मुख्यमंत्री ने विधानसभा के दिवंगत सदस्यों के प्रति अर्पित की श्रद्धांजलि
    • सीएम बोले- प्रो. श्याम बिहारी लाल ने शिक्षण अनुभव को जनसेवा से जोड़कर लोकतंत्र को दी मजबूती
    • विजय सिंह गौड़ ने जल-जंगल-जमीन और बुनियादी अधिकारों के लिए सदन से सड़क तक किया संघर्ष: सीएम योगी

    लखनऊ
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश विधानमंडल के बजट सत्र के दूसरे दिन मंगलवार को दिवंगत विधायकों को श्रद्धांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री ने शोक जताते हुए सदन में कहा कि वर्तमान विधानसभा के सदस्य प्रोफेसर श्याम बिहारी लाल का निधन 2 जनवरी 2026 को 60 वर्ष की आयु में हो गया। वह दूसरी बार विधानसभा के लिए निर्वाचित हुए थे और फरीदपुर (बरेली) से भारतीय जनता पार्टी के विधायक थे। प्रोफेसर श्याम बिहारी लाल मिलनसार और जमीन से जुड़े जनप्रतिनिधि थे। शिक्षा जगत से उनका गहरा जुड़ाव रहा। वह इतिहास संकलन समिति, बरेली के अध्यक्ष तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली की कार्यसमिति के सदस्य भी रहे।
    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रोफेसर श्याम बिहारी लाल ने अपने निर्वाचन क्षेत्र में बुनियादी विकास कार्यों को गति दी और पिछड़े, वंचित व गरीब वर्ग के कल्याण के लिए निरंतर काम किया। शिक्षा जगत से जुड़े विद्वान जब जनप्रतिनिधि बनते हैं तो वह लोकतांत्रिक परंपराओं को सशक्त करते हैं। उनके निधन से प्रदेश और भारतीय जनता पार्टी को अपूर्णनीय क्षति हुई है।

    मुख्यमंत्री ने वर्तमान विधानसभा के वरिष्ठ सदस्य विजय सिंह गौड़ के निधन पर भी शोक व्यक्त किया। उन्होंने सदन को बताया कि समाजवादी पार्टी से विधायक विजय सिंह का निधन 8 जनवरी 2026 को 71 वर्ष की आयु में हो गया था। वह आठवीं बार विधानसभा सदस्य निर्वाचित हुए थे। वर्ष 1980 से उनका राजनीतिक सफर शुरू हुआ था। उन्होंने सर्वप्रथम वर्ष 1980, फिर 1985, 1989, 1991, 1993, 1996, 2002 में चुनाव जीता था। वर्ष 2024 के उप चुनाव में वह दुद्धी विधानसभा से निर्वाचित हुए थे। वह जनजातीय समाज की सशक्त आवाज के रूप में जाने जाते थे।

    सीएम योगी ने कहा कि विजय सिंह गौड़ ने जल, जंगल, जमीन के अधिकारों के साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क और रोजगार जैसे बुनियादी मुद्दों को सदैव प्राथमिकता दी। उनके निधन से न केवल जनजातीय समाज, बल्कि पूरे प्रदेश ने संघर्षशील समाजसेवी और अनुभवी राजनेता को खो दिया है।

    मुख्यमंत्री ने दोनों दिवंगत सदस्यों के प्रति श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए ईश्वर से शोकाकुल परिजनों को संबल देने की प्रार्थना की।

  • इंदौर में दूषित पानी का कहर: बच्ची और बुजुर्ग की मौत, मृतकों की संख्या 35 पहुंची

    इंदौर में दूषित पानी का कहर: बच्ची और बुजुर्ग की मौत, मृतकों की संख्या 35 पहुंची

    इंदौर
    इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से मौतों का सिलसिला जारी है। मंगलवार को बस्ती में दो लोगों की मौत हो गई। इनमें दो साल की बच्ची रिया भी शामिल है। इसके अलावा 75 वर्षीय शालिग्राम ठाकुर की भी जान चली गई। उन्हें सात दिन पहले उल्टी दस्त की शिकायत के चलते निजी अस्पताल में भर्ती किया गया था।  

    परिजनों का कहना है कि उन्हें लकवे की शिकायत थी, अन्य कोई बीमारी नहीं थी। उधर दो वर्षीय रिया प्रजापति को भी दिसंबर में उल्टी दस्त की शिकायत के चलते भर्ती किया गया था। बाद में उसे डिस्चार्ज कर दिया गया। परिजनों का कहना है कि बीमार होने के कारण रिया काफी कमजोर हो गई थी और उसकी हालत लगातार बिगड़ती जा रही थी। 15 दिन पहले रिया को चाचा नेहरू अस्पताल में एडमिट कराया गया था। उसे लीवर की शिकायत थी। 

    बच्ची ने इलाज के दौरान तोड़ा दम

    परिजनों के मुताबिक, बच्ची की तबीयत बिगड़ने पर चाचा नेहरू अस्पताल में दाखिल किया गया था। वहां इलाज में फायदा नहीं होने पर सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में दाखिल किया गया और इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।

    इधर, 75 वर्षीय शालिग्राम के परिजनों ने बताया कि दो जनवरी को उल्टी-दस्त के कारण शैल्बी अस्पताल में रेफर किया गया था। वहां से उन्हें बॉम्बे हॉस्पिटल में एडमिट कराया गया। इसके बाद वह वेंटिलेटर पर ही थे। करीब 12 दिन पहले उन्हें डिस्चार्ज कर दिया गया था।

    फिलहाल दोनों मौतों को मौत की पुष्टि स्वास्थ्य विभाग ने डायरिया की वजह से नहीं की है। डॉक्टरों का कहना है कि दोनों को दूसरी बीमारियां भी थीं। बता दें कि अब तक 35 मौतें दूषित पानी के कारण हो चुकी हैं। कोर्ट ने अफसरों ने 16 लोगों की मौत डायरिया की वजह मानी है।

    आयोग ने जांच शुरू की

    इंदौर भागीरथपुरा में दूषित जल से 35 मौतें और सैकड़ों लोगों के बीमार होने के मामले में उच्च न्यायालय द्वारा गठित आयोग की जांच शुरू हो गई है। आयोग के समक्ष रहवासी या अन्य व्यक्ति शिकायत और आवेदन प्रस्तुत कर सकते हैं।

    उच्च न्यायालय ने भागीरथपुरा क्षेत्र में पेयजल प्रदूषण तथा उससे जनस्वास्थ्य और अन्य क्षेत्रों पर पड़े प्रभाव की जांच के लिए न्यायमूर्ति सुशील कुमार गुप्ता पूर्व न्यायाधीश उच्च न्यायालय की अध्यक्षता में जांच आयोग का गठन किया है। आयोग द्वारा जल प्रदूषण के कारणों, प्रशासनिक लापरवाही, जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध कार्रवाई,

    जनहानि, चिकित्सकीय प्रभाव तथा सुधारात्मक उपायों की जांच की जाएगी। आयोग ने इसे लेकर सार्वजनिक सूचना जारी की है। इसके तहत भागीरथपुरा एवं आसपास के क्षेत्रों के सभी प्रभावित नागरिक, परिजन, जनप्रतिनिधि, चिकित्सक, अस्पताल, सामाजिक संगठन, ठेकेदार, शासकीय अधिकारी अथवा कोई भी व्यक्ति, जिनके पास प्रकरण से संबंधित जानकारी, दस्तावेज या साक्ष्य उपलब्ध हों, वह आयोग के सामने पेश कर सकता है।

    साथ ही पेयजल प्रदूषण से संबंधित शिकायतें या आवेदन, चिकित्सकीय अभिलेख, अस्पताल में भर्ती होने की पर्चियां, डिस्चार्ज समरी, मृत्यु प्रमाण पत्र, जल पाइप लाइन में रिसाव, सीवरेज मिश्रण या क्षति से संबंधित फोटो/वीडियो, जल आपूर्ति से संबंधित टेंडर दस्तावेज, कार्य आदेश, निरीक्षण रिपोर्ट या कोई अन्य सामग्री भी आयोग के कार्यालय स्कीम नंबर 140 आरसीएम 10, प्रथम मंजिल आनंद वन स्थित आयोग के कार्यालय में 28 फरवरी तक प्रस्तुत कर सकते हैं।

    बच्ची के लिवर में तकलीफ बताई गई थी 15 दिन पहले रिया को चाचा नेहरू अस्पताल में एडमिट किया गया था। यहां उसके लिवर में तकलीफ बताई गई थी। इसके बाद उसे सुपर स्पेशियालिटी हॉस्पिटल में एडमिट किया गया, जहां करीब 5 दिन बाद उसकी मौत हो गई। परिजन का आरोप है कि दूषित पानी के कारण ही तबीयत बिगड़ी। उसका असर लिवर तक हुआ।

    गुइलेन बैरे सिंड्रोम से जूझ रही महिला

    57 वर्षीय एक महिला गंभीर जीबीएस (गुइलेन बैरे सिंड्रोम) से जूझ रही हैं। हालांकि इस मरीज को जीबीएस होने का स्वास्थ्य विभाग खंडन कर चुका है, लेकिन परिजन का कहना है कि इसी बीमारी के कारण उन्हें HDU (High Dependency Unit) में एडमिट किया गया है।

    दरअसल, दूषित पानी के कारण इस महिला की हालत 28 दिसंबर को बिगड़ी थी। पहले उसे एक प्राइवेट हॉस्पिटल में एडमिट किया गया था। इसके बाद 2 जनवरी को दूसरे बड़े हॉस्पिटल में रेफर किया गया।

    इस तरह करीब डेढ़ माह से इलाज चल रहा है। इस बीच हालत गंभीर होने पर 20 दिन से ज्यादा समय तक वह आईसीयू, वेंटिलेटर पर भी एडमिट रही। परिजन के मुताबिक, अभी ठीक होने में समय लगेगा।

    जीबीएस गंभीर न्यूरोलॉजिकल बीमारी जीबीएस एक दुर्लभ और गंभीर न्यूरोलॉजिकल बीमारी है। इसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली अपनी ही स्वस्थ तंत्रिकाओं पर हमला करने लगती है। इसका एक कारण गंदे पानी में पनपने वाला कैम्पीलोबैक्टर जेजुनी बैक्टीरिया भी है।

    बीमारी के तहत हाथ-पैरों में झुनझुनी और सुन्नपन होता है। यह गैस्ट्रोएंटेराइटिस (पेट का इंफेक्शन) देखने में आता है। इसमें मरीज को ठीक होने में समय लगता है। इसमें 70% मरीज स्वस्थ हो पाते हैं। इसमें मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं। मरीज सांस तक नहीं ले पाता है और वेंटिलेटर पर भी रखना पड़ता है।

    ये क्या…12 किमी दूर जाकर करें शिकायत

    जिस भागीरथपुरा में दूषित जल से हुई मौतों व बीमारी के मामले में जांच होनी है, उसका ऑफिस भागीरथपुरा से करीब 12 किलोमीटर दूर खोला गया है। प्रशासन द्वारा ऑफिस के लिए जगह उपलब्ध कराने की बात सामने आई है। पीडितों को शिकायत करने के लिए लंबी दूरी तय करनी होगी। भागीरथपुरा से स्कीम 140 तक का लंबा सफर चर्चा का विषय है।

    HC के आदेश पर बना आयोग कर रहा जांच

    मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के आदेश पर इस मामले की जांच के लिए एक आयोग बनाया गया है। इस आयोग के अध्यक्ष एमपी हाईकोर्ट के रिटायर्ट जज सुशील कुमार गुप्ता हैं।

    आयोग किन पॉइंट्स पर जांच कर रहा?

        पीने का पानी कैसे और क्यों प्रदूषित हुआ?
        इसमें किस स्तर पर प्रशासन की लापरवाही हुई?
        कौन-कौन लोग इसके जिम्मेदार हैं और उनके खिलाफ क्या कार्रवाई हो सकती है?
        लोगों की सेहत पर इसका क्या असर पड़ा?
        कितनी जनहानि हुई?
        भविष्य में ऐसी घटना दोबारा न हो, इसके लिए क्या सुधार जरूरी हैं?

    इस मामले को लेकर आयोग ने सार्वजनिक सूचना भी जारी की है। इसमें प्रभावित लोगों, उनके परिवारों, जनप्रतिनिधियों, डॉक्टरों, अस्पतालों, सामाजिक संगठनों, ठेकेदारों, सरकारी अधिकारियों और ऐसे किसी भी व्यक्ति से अपील की है जिसके पास इस मामले से जुड़ी कोई जानकारी, कागजात या सबूत हों।

    वे आयोग के सामने आकर अपनी बात रखें और सहयोग करें। यह जांच आम लोगों की सुरक्षा और न्याय के लिए की जा रही है।

  • पहले बायकॉट की साजिश, फिर खुद यू-टर्न लिया… पाकिस्तान ने बांग्लादेश के साथ खेला डबल गेम!

    पहले बायकॉट की साजिश, फिर खुद यू-टर्न लिया… पाकिस्तान ने बांग्लादेश के साथ खेला डबल गेम!

     नई दिल्ली
       भारत-पाकिस्तान मुकाबले को लेकर पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) का ताजा यू-टर्न सिर्फ एक प्रशासनिक फैसला नहीं है, बल्कि उसकी विफल राजनीति की खुली स्वीकारोक्ति है. 2026 टी20 विश्व कप से पहले जिस बायकॉट की धमकी को सिद्धांत, स्वाभिमान और सुरक्षा का मुद्दा बनाकर उछाला गया, वही अंततः पाकिस्तान की कमजोरी बन गई. मैच अब खेला जाएगा- बिना शर्त, बिना रियायत…. और यही इस पूरे प्रकरण का सबसे बड़ा सच है.

    धमकी की शुरुआत, लेकिन दिशा विहीन

    PCB ने जिस आक्रामक भाषा में भारत के खिलाफ खेलने पर आपत्ति जताई, उसने शुरू से यह संकेत दे दिया था कि यह फैसला कम और दबाव की राजनीति ज्यादा है. सुरक्षा जैसे पुराने तर्क दोहराए गए, लेकिन कोई नई परिस्थिति, कोई नया खतरा या कोई ठोस रिपोर्ट सामने नहीं रखी गई

    यह बायकॉट कोई अंतिम निर्णय नहीं था, बल्कि सौदेबाजी का औजार था और यही इसकी सबसे बड़ी कमजोरी भी बनी.

    सीधे टकराव से बचने की चाल

    भारत के खिलाफ सीधे खड़े होने की हिम्मत PCB में नहीं दिखी. इसकी बजाय बांग्लादेश की मांगों को आगे कर दिया गया, ताकि विवाद को क्षेत्रीय सहमति का रूप दिया जा सके. यह एक सोची-समझी रणनीति थी- खुद पीछे रहो, माहौल दूसरों के जरिए बनाओ और ICC पर दबाव डालो.

    … लेकिन यह चाल ज्यादा देर नहीं चल सकी. ICC के भीतर यह स्पष्ट हो गया कि बांग्लादेश का नाम केवल ढाल है, असली एजेंडा पाकिस्तान की अपनी राजनीतिक जिद है.

    बांग्लादेश के साथ 'डबल गेम'

    यही वह मोड़ था, जहां पाकिस्तान की राजनीति पूरी तरह बेनकाब हो गई.जिस बांग्लादेश को PCB ने बायकॉट की मुहिम में आगे किया, उसी को यू-टर्न के वक्त पूरी तरह किनारे कर दिया गया. न कोई साझा बयान, न कोई संयुक्त विरोध, न कोई नैतिक जिम्मेदारी.दबाव बनाने के लिए बांग्लादेश का इस्तेमाल हुआ, लेकिन जब ICC के सामने चाल नाकाम हुई, तो पाकिस्तान ने अकेले पीछे हटना बेहतर समझा.

    यह ‘साझा चिंता’ नहीं, बल्कि सुविधाजनक साझेदारी थी- काम निकलते ही खत्म.

    यहीं PCB का दोहरा चरित्र उजागर होता है.पहले बांग्लादेश को ढाल बनाना और फिर हालात बिगड़ते ही उसे मैदान में अकेला छोड़ देना.

    क्रिकेट नहीं, आर्थिक हकीकत ने तोड़ा भ्रम

    PCB शायद यह भूल बैठा कि आधुनिक क्रिकेट भावनाओं और नारों से नहीं चलता. भारत–पाक मुकाबला किसी भी ICC टूर्नामेंट की आर्थिक रीढ़ है. इस एक मैच से जुड़े प्रसारण अधिकार, विज्ञापन, प्रायोजन और वैश्विक दर्शक संख्या पूरे आयोजन की दिशा तय करते हैं.

    इस मैच के न होने से ICC को झटका जरूर लगता, लेकिन सबसे बड़ा नुकसान पाकिस्तान को ही उठाना पड़ता- आर्थिक रूप से भी और क्रिकेटिंग प्रासंगिकता के लिहाज से भी.

    ICC के सामने नहीं चलीं शर्तें

    PCB की उम्मीद थी कि हाइब्रिड मॉडल, विशेष प्रावधान या राजनीतिक सहानुभूति के जरिए वह ICC को झुका लेगा. लेकिन परिषद ने इस बार साफ कर दिया कि टूर्नामेंट किसी एक बोर्ड की जिद से नहीं चलेगा.
    जब यह संदेश स्पष्ट हो गया कि न तो ढांचा बदलेगा और न ही भारत पर कोई दबाव बनेगा, PCB का सख्त रुख अचानक पिघल गया.

    भारत–पाक मैच खेलने पर सहमति बन गई, लेकिन यह सहमति किसी समझौते की जीत नहीं, बल्कि मजबूरी की स्वीकारोक्ति है. PCB न तो कोई शर्त मनवा सका, न किसी तरह की नैतिक या कूटनीतिक बढ़त हासिल कर पाया. जिस बायकॉट को ‘सिद्धांत’ बताया गया था, वह अंततः खोखली बयानबाजी साबित हुआ.

    … साख पर गहरा दाग

    इस पूरे प्रकरण में सबसे बड़ा नुकसान पाकिस्तान क्रिकेट की विश्वसनीयता को हुआ. बार-बार राजनीतिक दबाव की रणनीति अपनाकर PCB ने यह संदेश दिया कि वह क्रिकेट को खेल की बजाय मंच के रूप में इस्तेमाल करता है.

    इसका असर सिर्फ बोर्ड की छवि पर नहीं, बल्कि खिलाड़ियों, प्रशंसकों और अंतरराष्ट्रीय भरोसे पर भी पड़ता है.

    नतीजा पहले से तय था

    भारत-पाक मुकाबले को लेकर PCB की रणनीति हर मोर्चे पर विफल रही. बायकॉट की धमकी बेअसर रही, बांग्लादेश की आड़ बेनकाब हुई और ICC पर दबाव नहीं बन सका.अंततः वही हुआ, जो शुरू से तय था- मैच खेला जाएगा, नियम ICC तय करेगी और झुकना पाकिस्तान को ही पड़ा.

  • दुर्घटना में जान गंवाने वाले मृतक के परिजनों को ₹2 लाख की प्रतिकर सहायता राशि स्वीकृत

    दुर्घटना में जान गंवाने वाले मृतक के परिजनों को ₹2 लाख की प्रतिकर सहायता राशि स्वीकृत

    महासमुन्द
    दावा निपटान आयुक्त एवं कलेक्टर विनय कुमार लंगेह द्वारा दुर्घटना में मृतक के परिजन को हुए अपहानि को दृष्टिगत रखते हुए दो लाख रूपए प्रतिकर सहायता राशि स्वीकृत की गई है।

    इनमें राष्ट्रीय राजमार्ग-53 में टक्कर मारकर भागने मोटरयान सड़क दुर्घटना में ग्राम लोहारडीह निवासी नेहरू यादव की मृत्यु हो गई थी। अपहानि के कारण मृतक के विधिक प्रतिनिधि के रूप में उनकी माता शिखा यादव को दो लाख रुपये की प्रतिकर सहायता राशि स्वीकृत की गई है।

  • TESLA को झटका: 13 साल बाद VP राज जगन्नाथन ने दिया इस्तीफा, जानिए उनकी कहानी

    TESLA को झटका: 13 साल बाद VP राज जगन्नाथन ने दिया इस्तीफा, जानिए उनकी कहानी

     नई दिल्ली

     इलेक्ट्रिक कार बनाने वाली दिग्गज अमेरिकन कंपनी टेस्ला के लिए यह समय आसान नहीं चल रहा है. इसी बीच कंपनी को एक और बड़ा झटका लगा है. टेस्ला के वाइस प्रेसिडेंट राज जगन्नाथन (Raj Jegannathan) ने 13 साल तक काम करने के बाद कंपनी छोड़ने का ऐलान कर दिया है. उन्होंने यह जानकारी लिंक्डइन पर एक छोटे से पोस्ट के जरिए दी. राज जगन्नाथन ने टेस्ला में अपने सफर को “लगातार बदलते और आगे बढ़ते रहने वाली जर्नी” बताया.

    राज जगन्नाथन ने अपने लिंक्डइन पोस्ट में लिखा कि, "13 साल के सफर को एक ही पोस्ट में समेटना आसान नहीं है. टेस्ला में यह यात्रा लगातार बदलाव और आगे बढ़ने की रही है. दुनिया के सबसे बड़े एआई क्लस्टर में से एक को डिजाइन करने, तैयार करने और चलाने की तकनीकी चुनौतियों से लेकर आईटी, सिक्योरिटी, सेल्स और सर्विस में अहम योगदान देना मेरे लिए एक सम्मान की बात रही है." हालांकि उन्होंने कंपनी छोड़ने की वजह को लेकर ज्यादा जानकारी साझा नहीं की.
    क्या थी राज जगन्नाथन की भूमिका

    राज जगन्नाथन टेस्ला में वाइस प्रेसिडेंट के तौर पर आईटी, एआई इंफ्रास्ट्रक्चर, बिजनेस एप्लीकेशंस और इंफॉर्मेशन सिक्योरिटी की जिम्मेदारी संभाल रहे थे. पिछले साल उन्हें टेस्ला की सेल्स टीम को लीड करने की जिम्मेदारी भी सौंपी गई थी. यह जिम्मेदारी उन्हें तब मिली थी जब नॉर्थ अमेरिका के सेल्स हेड ट्रॉय जोन्स को कंपनी से हटा दिया गया था.

    टेस्ला की गिरती बिक्री 

    इस समय टेस्ला कई चुनौतियों से जूझ रही है. कंपनी की इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री में गिरावट देखी जा रही है. इसकी एक बड़ी वजह टेस्ला के पुराने हो चुके इलेक्ट्रिक वाहन मॉडल माने जा रहे हैं. इसके अलावा सीईओ एलन मस्क के राजनीतिक बयानों और गतिविधियों को लेकर भी कंपनी को आलोचना का सामना करना पड़ा है. इससे टेस्ला की ब्रांड इमेज को काफी नुकसान पहुंचा है. यूरोपीय बाजार में भी टेस्ला की कारों की बिक्री गिर चुकी है.

    EV के गढ़ में लड़खड़ाई टेस्ला 

    Tesla कारों की बिक्री में आई सुस्ती का असर अब उन बाजारों में भी नजर आने लगा है, जिन्हें टेस्ला का गढ़ माना जाता था. नॉर्वे ऐसा ही एक देश है, जहां इलेक्ट्रिक गाड़ियों की जबरदस्त मांग रहती है, लेकिन अब यहां भी टेस्ला की पकड़ ढीली पड़ती दिख रही है. जनवरी 2026 के नए रजिस्ट्रेशन आंकड़ों के अनुसार, नॉर्वे में Tesla Model Y की सिर्फ 62 यूनिट्स बिकीं. यह कुल नई कार बिक्री का केवल 2.8 प्रतिशत है. पूरी टेस्ला रेंज की बात करें तो कंपनी ने कुल 83 कारें बेचीं, जो पिछले साल जनवरी में बेचे गए कारों के मुकाबले 88 प्रतिशत की बड़ी गिरावट है.
    पहली बार घटा रेवेन्यू

    टेस्ला के लिए 2025 एक अहम साल साबित हुआ. इस साल कंपनी का रेवेन्यू 3 प्रतिशत गिर गया, जो अब तक का पहला मौका है जब टेस्ला की कमाई में गिरावट दर्ज की गई. अब कंपनी पर दबाव है कि वह इलेक्ट्रिक वाहन बिक्री को दोबारा रफ्तार दे और लंबे समय से किए जा रहे ड्राइवरलेस तकनीक के वादों को पूरा करे.

    कौन हैं राज जगन्नाथन

    राज जगन्नाथन ने साल 2012 में टेस्ला जॉइन की थी. उस समय वे क्लाउड सिक्योरिटी और आईटी के तकनीकी विशेषज्ञ थे. धीरे धीरे उन्होंने कंपनी में ऊंचे पद हासिल किए और वाइस प्रेसिडेंट बने. टेस्ला से पहले भी उन्होंने बड़ी टेक कंपनियों के साथ काम किया. उन्होंने ओरेकल में सीनियर प्रोडक्ट मैनेजर के तौर पर काम किया और माइक्रोसॉफ्ट के एज़्योर एआई प्रोजेक्ट्स से भी जुड़े रहे.

    राज जगन्नाथन ने आईआईटी से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन किया है और स्टैनफोर्ड ग्रेजुएट स्कूल ऑफ बिजनेस से एमबीए किया है. अपने करियर की शुरुआत उन्होंने भारत में इंफोसिस से की थी, जहां वे सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट टीम को लीड कर चुके हैं.

    राज जगन्नाथन का जाना टेस्ला के लिए ऐसे समय में हुआ है जब कंपनी पहले से दबाव में है. अमेरिका में इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग में सुस्ती है. वहीं एलन मस्क का फोकस अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेल्फ ड्राइविंग सिस्टम और ह्यूमनॉइड रोबोट्स पर ज्यादा नजर आ रहा है. पिछले साल टेस्ला दुनिया की सबसे बड़ी ईवी कंपनी का खिताब भी चीन की बीवाईडी के हाथों गंवा चुकी है. दुनिया के इलेक्ट्रिक कार बाजार में BYD का दबदबा बढ़ रहा है. 

    टेस्ला में लगातार हो रहे बड़े इस्तीफे

    राज जगन्नाथन अकेले ऐसे सीनियर अधिकारी नहीं हैं जिन्होंने हाल के समय में टेस्ला छोड़ी है. पिछले कुछ सालों में कई बड़े नाम कंपनी से बाहर हो चुके हैं. एलन मस्क के करीबी माने जाने वाले ओमेद अफशार भी पिछले साल कंपनी छोड़ चुके हैं. इसके अलावा ऑप्टिमस रोबोट प्रोजेक्ट के इंजीनियरिंग हेड मिलान कोवाक और लंबे समय तक सॉफ्टवेयर टीम संभालने वाले डेविड लॉ भी टेस्ला से विदा ले चुके हैं.

    इन लगातार हो रहे इस्तीफों ने टेस्ला के भविष्य को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं. अब सबकी नजर इस पर है कि कंपनी इन चुनौतियों से कैसे उबरती है और क्या एक बार फिर अपनी खोई हुई रफ्तार हासिल कर पाती है.

    भारत में भी टेस्ला की शुरुआत बेहद धीमी रही है. पिछले साल जुलाई में टेस्ला ने मुंबई के बांद्र कुर्ला कॉम्प्लेक्स (BKC) में देश का पहला शोरूम शुरू किया. इस दौरान कंपनी ने Tesla Model Y को इंडियन मार्केट में लॉन्च किया है, जिसकी शुरुआती कीमत 59.89 लाख रुपये है. हाई इंपोर्ट ड्यूटी के चलते कार की कीमत काफी ज्यादा है, और इसका असर कार सेल्स पर भी देखने को मिल रहा है. फिलहाल कंपनी इस कार की खरीद पर एक्सचेंज ऑफर भी दे रही है, ताकि बिक्री को रफ्तार दी जा सके. 

  • हाईकोर्ट का बड़ा आदेश: मुस्लिम व्यक्ति पूरी संपत्ति वसीयत नहीं कर सकता, वारिसों की सहमति जरूरी

    हाईकोर्ट का बड़ा आदेश: मुस्लिम व्यक्ति पूरी संपत्ति वसीयत नहीं कर सकता, वारिसों की सहमति जरूरी

    बिलासपुर 

    छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने लोअर कोर्ट के आदेश को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि कोई मुस्लिम व्यक्ति अपनी संपत्ति का एक तिहाई से अधिक हिस्सा वसीयत के जरिए किसी को नहीं दे सकता। जब तक कि बाकी वैध वारिस अपनी सहमति न दें।

    हाईकोर्ट ने कहा कि मुस्लिम कानून में वारिसों के अधिकारों की सुरक्षा एक मूल सिद्धांत है। यह फैसला कोरबा जिले से जुड़े एक मामले में आया है। जहां एक विधवा को उसके पति की संपत्ति में हिस्सा देने से निचली अदालतों ने इनकार कर दिया था।

    जानिए पूरा मामला

    दरअसल, 64 साल की जैबुननिशा ने अपने पति अब्दुल सत्तार लोधिया की जायदाद पर हक मांगते हुए हाईकोर्ट में अपील की थी। उन्होंने कोरबा के द्वितीय अतिरिक्त जिला न्यायाधीश के फैसले को चुनौती दी थी। कोर्ट ने उनके केस को 2015 और 2016 में खारिज कर दिया था।

    जैबुननिशा के पति की 2004 में मौत हो गई थी। जिसके बाद भतीजे मोहम्मद सिकंदर ने एक वसीयत पेश की, जिसमें दावा किया गया कि सारी जायदाद उसे मिलेगी। सिकंदर ने खुद को ‘’पालक बेटा' बताया था। जैबुननिशा ने इस वसीयत को फर्जी बताया और कहा कि यह उनकी सहमति के बिना बनाई गई थी।

    लोअर कोर्ट के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील

    जैबुननिशा ने पहले निचली अदालतों में मुकदमा दायर किया था, लेकिन दोनों अदालतों ने उनकी याचिका खारिज कर दी। इसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। जस्टिस बीडी गुरु की सिंगल बेंच ने मामले की सुनवाई के बाद निचली अदालतों के आदेश को निरस्त कर दिया।

    कोर्ट ने माना कि निचली अदालतें विधवा के वैध कानूनी अधिकार की रक्षा करने में असफल रही थी।

    मुस्लिम लॉ एक्ट में है यह प्रावधान

    हाईकोर्ट ने मुस्लिम लॉ के सेक्शन 117 और 118 का हवाला देते हुए कहा कि वसीयत के जरिए जायदाद देने की एक सीमा है। मुस्लिम व्यक्ति अपनी जायदाद का सिर्फ एक तिहाई हिस्सा ही वसीयत कर सकता है। अगर इससे ज्यादा जायदाद वसीयत की जाती है, या किसी वारिस को दी जाती है, तो उसके लिए बाकी वारिसों की सहमति जरूरी है।

    जस्टिस बीडी गुरु ने यह भी कहा कि निचली अदालतों ने गलती की कि उन्होंने विधवा पर वसीयत को गलत साबित करने का बोझ डाल दिया। असल में यह सिकंदर की जिम्मेदारी थी कि वह साबित करे कि जैबुननिशा ने पति की मौत के बाद अपनी मर्जी से और पूरी समझदारी से वसीयत के लिए सहमति दी थी।

    कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सिर्फ चुप रहने या केस दायर करने में देरी करने को रजामंदी नहीं माना जा सकता। इस मामले में कोई भी गवाह यह साबित नहीं कर पाया कि जैबुननिशा ने पूरी जायदाद वसीयत करने की इजाजत दी थी।

    हाईकोर्ट ने निरस्त किया लोअर कोर्ट का आदेश

    हाईकोर्ट ने कहा कि अगर सिकंदर की वसीयत असली भी होती, तब भी वह जायदाद का एक तिहाई से ज्यादा हिस्सा नहीं मांग सकता था। हाईकोर्ट ने लोअर कोर्ट के फैसलों को रद्द कर दिया और इस बात पर जोर दिया है कि वारिसों के हक की हिफाजत मुस्लिम कानून का एक बुनियादी सिद्धांत है।

    कोर्ट ने कहा, 'कानूनी एक तिहाई से ज्यादा की वसीयत वारिसों की मौत के बाद की रजामंदी के बिना प्रभावी नहीं हो सकती।