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  • US Open फाइनल में हार के बाद रैकेट तोड़ना पड़ा महंगा, सबालेंका पर लगा ₹7.19 लाख जुर्माना

    US Open फाइनल में हार के बाद रैकेट तोड़ना पड़ा महंगा, सबालेंका पर लगा ₹7.19 लाख जुर्माना

     न्यूयॉर्क
    यूएस ओपन के फाइनल में हार के बाद गुस्से में रैकेट तोड़ने वाली आर्यना सबालेंका पर 7500 अमेरिकी डॉलर का जुर्माना लगाया गया है। यूएस ओपन की तरफ से लगाए गए जुर्माने की कीमत भारतीय करेंसी में 7,19,530 रुपये है। सबालेंका लगातार तीसरी बार यूएस ओपन के फाइनल में पहुंची थीं। उनके पास जीत की हैट्रिक लगाने का मौका था, लेकिन वह फाइनल में हारकर इस स्वर्णिम मौके स चूक गईं।

    फाइनल मैच में हार के कारण सबालेंका को नंबर एक महिला टेनिस खिलाड़ी का ताज भी गंवाना पड़ा। इसके बाद वह बेहद गुस्से में नजर आईं और कोर्ट पर ही पटक-पटक कर अपना रैकेट तोड़ दिया। इस दौरान एक व्यक्ति उनका वीडियो बना रहा था। इस व्यक्ति पर भी सबालेंका भड़क गईं। बाद में उन्होंने बताया कि कोर्ट पर ही गुस्सा निकल जाना उनके लिए अच्छा था। ऐसा नहीं होने पर उनका गुस्सा और खराब हो सकता था।

    रायबाकिना ने पहली बार जीता यूएस ओपन
    कजाकिस्तान की एलेना रायबाकिना ने पहली बार महिला एकल कैटेगरी में यूएस ओपन का खिताब जीता है। इस साल के फाइनल में उन्होंने बेलारूस की एरिना सबालेंका को 2 घंटे 21 मिनट तक चले मुकाबले में 6-4, 5-7, 6-2 से हराया। अपना पहला यूएस ओपन फाइनल खेल रही रायबाकिना ने सबालेंका को ऑस्ट्रेलियन ओपन के फाइनल में भी हराया था। रायबाकिना का यह तीसरा ग्रैंड स्लैम खिताब है। उनके पास चार मेजर खिताब में अब सिर्फ फ्रेंच ओपन नहीं है।

    44 मिनट में जीता पहला सेट
    रायबाकिना ने 44 मिनट में पहला सेट 6-4 से जीता। सबालेंका ने जोरदार वापसी की और दूसरा सेट 7-5 से जीता। तीसरे और निर्णायक सेट में सबालेंका ने मैराथन ओपनिंग सर्विस गेम में कई ब्रेक पॉइंट बचाए, लेकिन रायबाकिना ने तुरंत फिर से दबाव बना दिया। रायबाकिना ने दो एस के साथ लव बनाए रखा और आखिरकार 2-1 से ब्रेकथ्रू हासिल किया। एक बार बढ़त मिलने के बाद कजाखिस्तान की खिलाड़ी ने पीछे मुड़कर नहीं देखा और अंतत: 6-2 से निर्णायक सेट अपने नाम किया।

  • PF Salary Limit बढ़ने की तैयारी! ₹15,000 से बढ़कर ₹25,000 हो सकती है सीमा

    PF Salary Limit बढ़ने की तैयारी! ₹15,000 से बढ़कर ₹25,000 हो सकती है सीमा

    नई दिल्ली
     देश के करोड़ों नौकरीपेशा कर्मचारियों के लिए एक बड़ी और महत्वपूर्ण खबर आ रही है. आज केंद्रीय कैबिनेट की अहम बैठक होने वाली है, कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) और कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) को लेकर एक बड़ा फैसला लिया जा सकता है. सरकार पीएफ और पेंशन के दायरे में आने वाले कर्मचारियों के लिए अनिवार्य मासिक वेतन सीमा को ₹15,000 से बढ़ाकर ₹25,000 प्रति माह करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे सकती है। 

    यदि कैबिनेट इस प्रस्ताव पर मुहर लगाती है, तो यह करीब 12 साल बाद पीएफ नियमों में होने वाला सबसे बड़ा सुधार होगा. इससे पहले आखिरी बार 1 सितंबर 2014 को इस सीमा को ₹6,500 से बढ़ाकर ₹15,000 किया गया था. इस नए फैसले से देश के संगठित क्षेत्र के करीब 1 करोड़ अतिरिक्त कर्मचारी सीधे तौर पर पीएफ और पेंशन जैसी सामाजिक सुरक्षा के दायरे में आ जाएंगे। 

    किस पर और कैसे लागू होगा यह नया नियम?
    वर्तमान नियमों के अनुसार, जिन कर्मचारियों की बेसिक सैलरी और महंगाई भत्ता (DA) मिलाकर ₹15,000 तक है, उनके लिए पीएफ खाता खोलना और उसमें योगदान देना अनिवार्य है. नई सीमा लागू होने के बाद, ₹25,000 तक की मासिक आय वाले सभी नए कर्मचारियों के लिए पीएफ और पेंशन फंड में योगदान करना जरूरी हो जाएगा। 

    हालांकि, ₹25,000 से अधिक बेसिक सैलरी पाने वाले कर्मचारियों के लिए राहत की बात यह है कि उनके लिए इस योजना में शामिल होना पूरी तरह स्वैच्छिक रहेगा. वे अपनी इच्छा के अनुसार ही इसमें योगदान देने का फैसला कर सकते हैं। 

    इन-हैंड सैलरी और कंपनियों पर क्या पड़ेगा असर?
    इस फैसले का सीधा असर कर्मचारियों की टेक-होम (In-Hand) सैलरी पर पड़ेगा. जो कर्मचारी ₹15,000 से ₹25,000 के वेतन ब्रैकेट में आते हैं और अब तक पीएफ का हिस्सा नहीं थे, उनके वेतन से हर महीने पीएफ का 12% हिस्सा कटेगा. इस वजह से हर महीने उनके हाथ में आने वाली नगद सैलरी थोड़ी कम हो जाएगी, लेकिन दूसरी तरफ उनकी भविष्य की बचत और रिटायरमेंट फंड में तेजी से बढ़ोतरी होगी। 

    वहीं, उद्योगों और कंपनियों को वित्तीय बोझ से बचाने के लिए सरकार ने एक बीच का रास्ता निकाला है. प्रस्ताव के मुताबिक, कंपनियों को अपना पीएफ योगदान कैलकुलेट करने के लिए पुरानी ₹15,000 की लिमिट का इस्तेमाल जारी रखने की छूट मिल सकती है. इससे कंपनियों पर अचानक कोई बड़ा आर्थिक बोझ नहीं पड़ेगा. कैबिनेट की मंजूरी के बाद सरकार जल्द ही इसकी आधिकारिक अधिसूचना जारी कर सकती है। 

  • ओवैसी के बयान पर रामेश्वर शर्मा का पलटवार, बोले- ‘बदतमीजी की भाषा छोड़ दो’

    ओवैसी के बयान पर रामेश्वर शर्मा का पलटवार, बोले- ‘बदतमीजी की भाषा छोड़ दो’

    भोपाल
     समान नागरिक संहिता यानी कि UCC के विरोध में आयोजित एक जनसभा को संबोधित करने भोपाल पहुंचे AIMIM प्रमुख और सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने बीजेपी विधायक रामेश्वर शर्मा के एक विवादित बयान पर तीखा पलटवार किया। भोपाल के सेंट्रल लाइब्रेरी ग्राउंड में आयोजित कार्यक्रम में ओवैसी ने शर्मा के बयान का जिक्र करते हुए उन्हें सीधे चुनौती दी। इस दौरान उन्होंने विधायक के खिलाफ बेहद आपत्तिजनक भाषा का भी इस्तेमाल किया।

    क्या बोले असदुद्दीन ओवैसी?
    ओवैसी ने कहा कि उन्होंने रामेश्वर शर्मा का बयान सुना है, जिसमें उन्होंने करोंद चौराहे से काजी कैंप तक मिसाइल लॉन्च करने की बात कही थी। ओवैसी ने कहा,

        'रामेश्वर शर्मा, अगर तुम माई के लाल हो तो बताओ, कब मिसाइल लॉन्च करोगे? मैं अकेला काजी कैंप में खड़ा रहूंगा। मैं शहीद होने के लिए तैयार हूं, मरने के लिए तैयार हूं, लेकिन तुम्हारे सामने सिर झुकाने के लिए तैयार नहीं हूं। रामेश्वर शर्मा को काजी कैंप का इतिहास मालूम होना चाहिए। ये काजी कैंप क्या है? सुनो रामेश्वर शर्मा, ये काजी कैंप कौन थे? आजादी के मुजाहिदीन कौन थे?'

    शर्मा को औवैसी ने 'छोटू' कहा
    भाषण के दौरान ओवैसी ने शर्मा के खिलाफ एक बेहद आपत्तिजनक शब्द का भी इस्तेमाल किया। इस दौरान सभा में  मौजूद लोग जमकर तालियां बजाते दिखे। ओवैसी ने अपने भाषण में काजी सैयद आबिद अली, वाजिद अली हुसैनी, खान शाहिद अली खान, फाजिल मोहम्मद खान, अब्दुल खान, शेख हमजा, सादात खान और रिसालदार वाली शाह जैसे नामों का भी जिक्र किया। उन्होंने रामेश्वर शर्मा पर निशाना साधते हुए उन्हें 'छोटू' कहा और बोले कि ऐसी बातें नहीं करनी चाहिए।

    विधायक शर्मा ने पलटवार करते हुए कहा कि ओवैसी बैरिस्टर हो तो बदतमीजी की भाषा छोड़ दो। तुम बदतमीजी की भाषा बोलोगे तो मैं पूछता हूं कि औवेसी क्या तुम हिजड़े की संतान हो? हमारे वैज्ञानिकों ने जो मिसाइल तैयार की, उसे भारत की सेना ने ऑपरेशन सिंदूर में तुम्हारे अब्बा के घर गिराकर बता दी। जब मिसाइल इस्लामाबाद में गिरी तो वहां आतंकवादी और इस्लामिक कट्टरपंथी रो रहे थे और यहां तुम जैसे नए-नए जिन्ना रो रहे हैं, छाती पीट रहे हैं।विधायक ने कहा, मिसाइल चलती थी, मिसाइल चलती रहेगी। जहां-जहां आतंकवाद के कैंप रहेंगे, जहां-जहां भारत विरोधी कैंप रहेंगे, वहां भारत की मिसाइल तैयार है। मैं कल भी अपने बयान पर कायम था, आज भी हूं। ओवैसी, तुम पूरा भाषण सुनो और तुम तो वकील हो, कोर्ट ले जाओ।

    ‘मिसाइल इस्लामाबाद में गिरी, आतंकवादी रो रहे थे’
    ओवैसी के इसी बयान पर जवाब देते हुए शर्मा ने कहा कि भारत के वैज्ञानिकों ने जो मिसाइल तैयार की है, उसे भारतीय सेना ने ऑपरेशन सिंदूर में इस्तेमाल कर अपनी ताकत दिखाई। उन्होंने कहा, “जब मिसाइल इस्लामाबाद में गिरी तो वहां आतंकवादी और इस्लामिक कट्टरपंथी रो रहे थे और यहां तुम जैसे नए-नए जिन्ना रो रहे हैं, छाती पीट रहे हैं। शर्मा ने आगे कहा कि मिसाइल चलती थी और चलती रहेगी। उनके मुताबिक जहां-जहां आतंकवाद के कैंप और भारत विरोधी कैंप होंगे, वहां भारत की मिसाइल तैयार है। उन्होंने कहा कि वह अपने पुराने बयान पर कल भी कायम थे और आज भी कायम हैं।  

    ‘पूरा भाषण सुनो, वकील हो तो कोर्ट ले जाओ’
    रामेश्वर शर्मा ने ओवैसी से कहा कि वह उनका पूरा भाषण सुनें। उन्होंने कहा, “तुम तो वकील हो, कोर्ट ले जाओ। शर्मा ने कहा कि उनके बयान का संदर्भ समझने की जरूरत है और वह अपने बयान पर कायम हैं।

    यूसीसी पर भी ओवैसी को घेरा
    रामेश्वर शर्मा ने ओवैसी के यूसीसी विरोध पर भी पलटवार किया। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि जब हर राजनीतिक दल हिंदुओं के वोट लेना चाहता है तो फिर हिंदू कानून क्या बुरा है। उन्होंने कहा कि “पांच बीवी, 25 बच्चे की फैक्ट्री बंद होगी।  शर्मा ने दावा किया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की घोषणा के अनुसार 2029 तक 21 राज्यों में यूसीसी लागू हो जाएगा और मध्य प्रदेश में यह लागू हो चुका है। उन्होंने कहा कि यूसीसी लागू होगा और इसे बाबा साहेब आंबेडकर की भावना के अनुरूप लागू किया जाएगा। 

     

    UCC पर कहा-ये 5 बीवी, 25 बच्चे की फैक्ट्री बंद होगी
    यूसीसी पर विधायक शर्मा ने कहा कि हर दल हिंदुओं से वोट लेना चाहता है तो फिर हिंदू कानून क्या बुरा है? ये 5 बीवी, 25 बच्चे की फैक्ट्री बंद होगी। भारत के गृह मंत्री अमित शाह की घोषणा है कि 2029 तक 21 प्रांतों में UCC लागू हो जाएगा। मध्य प्रदेश में लागू हो गया है। अब तुम छाती पीटो या इस्लामाबाद से अपने तार जोड़ो, UCC लागू होगा और बाबा साहेब अंबेडकर की भावना के अनुसार ही होगा।

    किस बयान पर हुआ विवाद?
    दरअसल, कुछ दिन पहले जन्माष्ट
    मी के दौरान आयोजित मटकी फोड़ कार्यक्रम में बीजेपी विधायक रामेश्वर शर्मा ने कथित तौर पर कहा था, 'करोंद स्क्वायर से मिसाइल चलाओ तो काजी कैंप पर गिरे।' उनके इस बयान पर विवाद खड़ा हुआ था। हालांकि, बाद में शर्मा ने सफाई देते हुए कहा था कि उनका इशारा पाकिस्तान के काजी कैंप की ओर था, न कि भोपाल के काजी कैंप की ओर। इसी बयान को लेकर अब ओवैसी ने भोपाल में आयोजित जनसभा के दौरान रामेश्वर शर्मा पर पलटवार किया।

    रामेश्वर शर्मा ने किया ओवैसी पर पलटवार
    रामेश्वर शर्मा ने असदुद्दीन ओवैसी के बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि भारत से चलने वाली मिसाइल का डर सिर्फ इस्लामाबाद में ही नहीं, बल्कि ओवैसी जैसे लोगों में भी है। उन्होंने कहा कि उनका पूरा बयान करोंद से इस्लामाबाद के काजी कैंप पर मिसाइल दागने को लेकर था। शर्मा ने सवाल उठाया कि कांग्रेस को कैसे पता कि काजी कैंप इस्लामाबाद में है। उन्होंने कहा कि जहां भी आतंकवादियों के कैंप होंगे, वहां भारत की मिसाइलें दागी जाएंगी। साथ ही उन्होंने ओवैसी और राहुल गांधी पर आतंकवाद के मुद्दे पर राजनीति करने का आरोप लगाया। शर्मा ने ओवैसी पर निशाना साधते हुए कहा 'हैदराबाद तुम्हारे बाप का नहीं है, हैदराबाद भारत का हिस्सा है।'

    UCC के मुद्दे पर भी सरकार पर निशाना
    जनसभा से पहले और प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान असदुद्दीन ओवैसी ने समान नागरिक संहिता के मुद्दे पर केंद्र और राज्य सरकार पर निशाना साधा। ओवैसी ने आरोप लगाया कि UCC के नाम पर अल्पसंख्यकों के अधिकार छीनने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने UCC के विरोध में आयोजित जनसभा के दौरान इसी मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। 

  • सुशांत गोल्फ सिटी को लेकर बड़ा फैसला, LDA करेगा हाईटेक टाउनशिप का टेकओवर

    सुशांत गोल्फ सिटी को लेकर बड़ा फैसला, LDA करेगा हाईटेक टाउनशिप का टेकओवर

    लखनऊ
    राजधानी की पहली हाईटेक टाउनशिप सुशांत गोल्फ सिटी में घर व दुकान खरीदारों को बड़ी राहत देने वाली खबर है। यह अहम परियोजना अब लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) के हाथ होगी।

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में एलडीए को हाईटेक टाउनशिप टेकओवर करने पर मुहर लग गई है। इतना ही नहीं सरकार विकास कार्य व देनदारियों के लिए 2912 करोड़ रुपये की धनराशि भी देगी।

    मेसर्स अंसल प्रापर्टी एंड इंफ्रास्ट्रक्चर (अंसल एपीआइ) की अधूरी आवासीय परियोजना को लेकर पिछले डेढ़ साल से उहापोह का माहौल रहा। राष्ट्रीय कंपनी विधि अधिकरण (एनसीएलटी) से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक इस मामले की सुनवाई हुई। अब खरीदारों को राहत देने का रास्ता प्रदेश सरकार ने निकाला है।

    अधूरी परियोजना को पूरा कराने का विस्तृत प्रस्ताव एलडीए ने तैयार किया। उसी प्रस्ताव पर कैबिनेट में मंथन करने के बाद निर्णय लिया गया कि हाईटेक टाउनशिप के तहत अंसल एपीआइ को लाइसेंस दिया गया था, अब स्वीकृत परियोजना को लखनऊ विकास प्राधिकरण टेकओवर करते हुए उसे पूरा कराने का प्रस्ताव एनसीएलटी के समक्ष प्रस्तुत करे।

    यह भी चर्चा हुई कि प्रारंभिक अनुमान के अनुसार इस परियोजना की अधिकतम देनदारी करीब 2912 करोड़ रुपये है, लेकिन इसकी वास्तविक देयता सीआइआरपी यानि कारपोरेट दिवालियापन समाधान प्रक्रिया से ही तय होगी।

    देनदारियों के भुगतान के लिए आवश्यक धनराशि प्राधिकरण को सीड कैपिटल यानि शुरुआती धन दिया जाएगा। एलडीए के टेकओवर करने से होम बायर्स में विश्वास पैदा होगा। रियल एस्टेट क्षेत्र व निर्माण गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा और रोजगार का सृजन तेजी से बढ़ेगा।

    यह होंगे तत्काल लाभ
    इस कदम से 5000 होम बायर्स यानि घर-दुकान खरीदारों की समस्या का समाधान हो सकेगा। साथ ही टाउनशिप की शेष अवस्थापना सुविधाओं व उपयोगिताओं का विकास संभव होगा।

    बंधक व ग्राम समाज की भूमि किसी तीसरे पक्ष को देने की जगह अब लखनऊ विकास प्राधिकरण को दी जाएगी, ताकि सरकार के भूमि की रक्षा होगी और भविष्य में शासकीय विभागों की देनदारियां पूरी की जा सकेंगी। परियोजना पूरी होने से शहर का सुनियोजित विकास होगा। अब फिर से परियोजना में विकास कार्य शुरू होंगे।

    यह है मामला
    अंसल एपीआइ ने आइएल एंड एफएस फाइनेंशियल सर्विसेज से मार्च 2016 में 50 करोड़ और नवंबर 2016 में 100 करोड़ रुपये ऋण लिया था, खाता एनपीए होने से ब्याज सहित बकाया बकाया 257 करोड़ रुपये पहुंचने पर फाइनेंस कंपनी ने राष्ट्रीय कंपनी विधि अधिकरण (एनसीएलटी) में याचिका दाखिल की थी।

    एनसीएलटी ने 25 फरवरी 2025 को अंसल ग्रुप को दिवालिया घोषित करने की प्रक्रिया शुरू करते हुए आइआरपी (रिसीवर) नवनीत कुमार गुप्ता को नियुक्त किया था। यह आदेश को राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) में होम बायर्स ने चुनौती दी।

    एनसीएलएटी ने होम बायर्स का पक्ष स्वीकार करके एनसीएलटी में एलडीए का पक्ष सुनने का आदेश दिया। इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई लेकिन, शीर्ष कोर्ट ने एनसीएलएटी के आदेश को सही माना। एनसीएलटी में अब 23 सितंबर को सुनवाई होनी है।

  • आलू से बनाएं कुरकुरी जलेबी, स्वाद ऐसा कि बार-बार बनाने का करेगा मन; जानें आसान रेसिपी

    आलू से बनाएं कुरकुरी जलेबी, स्वाद ऐसा कि बार-बार बनाने का करेगा मन; जानें आसान रेसिपी

     जलेबी का नाम सुनते ही मुंह में पानी आ जाता है. चाशनी में डूबी गरमागरम और कुरकुरी जलेबी आखिर किसे पसंद नहीं होती. आमतौर पर आपने मैदा या आटे से बनी जलेबी ही खाई होगी लेकिन क्या आपने कभी आलू से बनी जलेबी ट्राई की है. जी हां, आलू से बनी कुरकुरी जलेबी का स्वाद आम जलेबी से थोड़ा अलग होता है और इसे घर पर बनाना भी काफी आसान है.

    अगर आप मीठे में कुछ नया और टेस्टी ट्राई करना चाहते हैं तो आलू की जलेबी बना सकते हैं. आज हम आपको घर पर उबले आलू से टेस्टी जलेबी बनाना बताएंगे, जिसे एक बार खाने के बाद आप बार-बार बनाना पसंद करेंगे. आइए जानते हैं कि घर पर आलू से जलेबी कैसे बना सकते हैं और इसे बनाने के लिए किन-किन चीजों की जरूरत होगी.

    इंग्रेडिएंट्स (Ingredients)
    100 ग्राम मैदा
    2 मीडियम उबले हुए आलू
    1/2 कप दही
    ¼ छोटी चम्मच फ्रूट सॉल्ट
    तलने के लिए तेल
    1 चुटकी केसर
    ¼ छोटी चम्मच इलायची पाउडर
    1 कप चीनी

    आलू की जलेबी कैसे बनाएं?

    • आलू की जलेबी बनाने के लिए सबसे पहले एक पैन में चीनी और पानी डालकर चाशनी तैयार करें. इसमें केसर और इलायची पाउडर डालें और लगभग 5-7 मिनट तक उबालें. चाशनी को बहुत ज्यादा गाढ़ा न करें, इसे हल्का चिपचिपा रखें.
    • अब एक बड़े बर्तन में मैदा, दही, उबले और मैश किए हुए आलू और फ्रूट सॉल्ट डालें. सभी चीजों को अच्छी तरह मिलाकर गाढ़ा घोल तैयार कर लें. ध्यान रखें कि घोल न ज्यादा पतला हो और न ही बहुत ज्यादा गाढ़ा.
    • इसके बाद तैयार घोल को किसी कपड़े या जलेबी बनाने वाली पाइपिंग बोतल में भर लें. अगर कपड़े का इस्तेमाल कर रहे हैं तो उसके एक कोने में छोटा सा छेद कर लें.
    • अब कड़ाही में तेल गर्म करें और घोल को गोल-गोल घुमाते हुए जलेबी का आकार दें. जलेबियों को मीडियम आंच पर सुनहरा और कुरकुरा होने तक तलें.
    • तली हुई जलेबियों को तुरंत तैयार चाशनी में डालें और 2-3 मिनट तक डुबोकर रखें. इसके बाद जलेबियों को चाशनी से निकालकर गरमागरम सर्व करें.
    • आलू से बनी यह जलेबी स्वाद में थोड़ी अलग होती है और इसे आप घर पर आसानी से बना सकते हैं.   

     

  • Second Hand Phone खरीदने से पहले जरूर करें ये स्क्रीन टेस्ट, वरना हो सकता है बड़ा नुकसान

    Second Hand Phone खरीदने से पहले जरूर करें ये स्क्रीन टेस्ट, वरना हो सकता है बड़ा नुकसान

    पिछले कुछ सालों से सेकंड हैंड फोन का मार्केट तेजी से बढ़ रहा है. बहुत सारे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म हैं, जहां आपको पुराने फोन आसानी से मिल जाते हैं. साथ ही ऑफलाइन मार्केट में भी सेकंड हैंड फोन आसानी से मिल जाते हैं. अगर आप भी सेकंड हैंड फोन खरीदने जा रहे हैं, तो खरीदने से पहले आपको फोन की स्क्रीन का टेस्ट जरूर करना चाहिए. इस ट्रिक की मदद से आप आसानी से पता कर सकते हैं कि फोन की स्क्रीन की कंडीशन कैसी है.

    स्मार्टफोन में सबसे ज्यादा जरूरी हिस्सा उसकी डिस्प्ले होती है. इसी की मदद से आप फोन का इस्तेमाल करते हैं. ऐसे में सेकंड हैंड फोन खरीदते समय अगर स्क्रीन पर ध्यान नहीं दिया गया, तो आपको खराब फोन मिल सकता है. इसलिए फोन खरीदने से पहले स्क्रीन को अच्छी तरह चेक करना जरूरी है. आइए जानते हैं स्क्रीन टेस्ट करने का आसान तरीका.

    जानिए स्क्रीन टेस्ट करने का आसान तरीका
    सेकंड हैंड स्मार्टफोन खरीदते समय आपको सिर्फ फोन की बॉडी चेक नहीं करनी चाहिए. सिर्फ बाहर से फोन देखने पर आपको पता नहीं चल सकता कि फोन के अंदर या स्क्रीन में कोई खराबी है या नहीं.

    इसके लिए आपको फोन की स्क्रीन को भी अच्छी तरह टेस्ट करना चाहिए. स्क्रीन टेस्ट की मदद से आप पता कर सकते हैं कि डिस्प्ले सही तरीके से काम कर रही है या नहीं और स्क्रीन पर कोई निशान या खराब पिक्सेल तो नहीं हैं.

    स्क्रीन बर्न क्या होता है?
    जब आप किसी फोन का बहुत लंबे समय तक इस्तेमाल करते हैं, तो उसकी डिस्प्ले के कुछ पिक्सेल खराब होने लगते हैं. इसकी वजह से स्क्रीन पर किसी पुराने आइकन, टेक्स्ट या इमेज का निशान दिखाई देने लगता है. इसे स्क्रीन बर्न कहा जाता है.

    कई बार स्क्रीन बर्न इतना हल्का होता है कि सामान्य इस्तेमाल में आसानी से नजर नहीं आता. इसलिए सेकंड हैंड फोन खरीदते समय इसे अलग से चेक करना जरूरी है.

    ऐसे करें फोन की स्क्रीन टेस्ट
    अगर आप सेकंड हैंड फोन खरीदने जा रहे हैं, तो फोन की बॉडी के साथ स्क्रीन को भी जरूर चेक करें. इसके लिए आप YouTube पर जाकर White Screen या Grey Screen Test का वीडियो चला सकते हैं.

    वीडियो चलाने के बाद फोन की पूरी स्क्रीन एक ही रंग की हो जाएगी. अब स्क्रीन को ध्यान से देखें. अगर कहीं कोई दाग, अलग रंग का हिस्सा या पुराने आइकन का निशान दिखाई दे रहा है, तो फोन की स्क्रीन में दिक्कत हो सकती है.

    इस छोटे से टेस्ट की मदद से आप सेकंड हैंड फोन खरीदने से पहले उसकी स्क्रीन की कंडीशन का बेहतर अंदाजा लगा सकते हैं. इससे आपको खराब डिस्प्ले वाला फोन खरीदने से बचने में मदद मिल सकती है.

  • Ramayana के ‘जय जय राम’ में दिखा राम-भरत का भावुक रिश्ता, जानें भरत के त्याग की पूरी कहानी

    Ramayana के ‘जय जय राम’ में दिखा राम-भरत का भावुक रिश्ता, जानें भरत के त्याग की पूरी कहानी

     नितेश तिवारी के डायरेक्शन में बनी फिल्म रामायण का पहला गाना 'जय जय राम' हाल ही में रिलीज हुआ है. ए.आर. रहमान के संगीत, डॉ. कुमार विश्वास के बोल और अरिजीत सिंह व श्रेया घोषाल की सुरीली आवाज से सजा यह गाना दर्शकों के बीच काफी पसंद किया जा रहा है. इस गाने में श्रीराम (रणबीर कपूर) और माता सीता (साई पल्लवी) के भव्य विवाह, अयोध्या में नगरवासियों द्वारा पुष्प वर्षा से स्वागत और राजा दशरथ (अरुण गोविल) के साथ भावनात्मक दृश्यों को दिखाया गया है. लेकिन इस पूरे गाने का सबसे दिल को छू लेने वाला दृश्य वह है, जहां श्रीराम अपने छोटे भाई भरत से गले मिलते हैं.

    इस गाने के माध्यम से फिल्म मेकर्स ने भरत के किरदार में नजर आने वाले एक्टर आदिनाथ कोठारे की पहली झलक भी दिखाई है. तो आइए जानते हैं कि रामायण में भरत का किरदार कितना महत्वपूर्ण था और आदिनाथ कोठारे पर्दे पर जिसका किरदार निभाएंगे उनका वास्तविक सच क्या है.

    कौन थे भरत?
    रामायण व रामचरितमानस के मुताबिक, भरत केवल श्रीराम के भाई (अनुज) नहीं थे, बल्कि वे निस्वार्थ प्रेम, धर्म और त्याग के सर्वोच्च प्रतीक भी माने जाते हैं. भरत सूर्यवंशी राजा दशरथ और उनकी प्रिय रानी कैकेयी के पुत्र थे. बचपन से ही भरत का अपने बड़े भाई श्रीराम के प्रति स्नेह और आदर रखते थे. भरत का विवाह राजा जनक के भाई कुशध्वज की पुत्री मांडवी से हुआ था.

    मातृ-मोह पर धर्म की विजय
    रामायण के अनुसार, जब भरत अपने ननिहाल (कैकेय देश) से अयोध्या लौटे और उन्हें ज्ञात हुआ कि उनकी माता कैकेयी ने राजा दशरथ से दो वरदान मांगकर श्री राम को 14 वर्ष का वनवास पर भेजा है और उनके लिए राजसिंहासन मांगा है, तो वे अत्यंत दुखी और लज्जित हुए. भरत ने बिना किसी झिझक के अपनी माता के इस अनुचित कार्य का विरोध किया. उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि अयोध्या के सिंहासन पर केवल बड़े भाई श्रीराम का अधिकार है और किसी भी अनैतिक सुख को वे स्वीकार नहीं करेंगे. उन्होंने अपनी माता कैकेयी के इस अपराध की कठोर शब्दों में निंदा भी की थी.

    चित्रकूट में राम-भरत मिलाप
    इसके बाद भरत केवल दुखी होकर शांत नहीं बैठे, बल्कि वे पूरी अयोध्या नगरी, माताओं और गुरु वशिष्ठ के साथ श्री राम को वापस लाने के लिए चित्रकूट के जंगलों की ओर चल पड़े थे. चित्रकूट में जब श्रीराम और भरत का मिलाप हुआ, तो वह प्रसंग इतना भावुक था कि वहां मौजूद हर किसी की आंखें नम हो गई थी. भरत ने श्रीराम के चरणों में गिरकर अयोध्या वापस लौटने की विनती भी की थी. हालांकि, श्रीराम ने अपने पिता के वचनों का मान रखते हुए अयोध्या लौटने से इनकार कर दिया था.

    जब श्री राम ने लौटने से मना कर दिया था, तो भरत ने श्री राम की 'चरण पादुकाएं' (खड़ाऊ) मांगी थी. उन्होंने संकल्प लिया कि वे कभी भी अयोध्या के राजसिंहासन पर नहीं बैठेंगे. भरत ने श्री राम की पादुकाओं को सिंहासन पर विराजमान किया और स्वयं को केवल उनका 'प्रतिनिधि' (सेवक) मानकर राज्य का संचालन किया था.

    नंदीग्राम में 14 वर्षों का कठिन तपस्वी जीवन
    भरत केवल नाम के त्यागी नहीं थे, बल्कि उन्होंने अपने आचरण से उसे सिद्ध किया था. उन्होंने राजमहल के सारे सुख-वैभव का त्याग कर दिया था. महल के वैभव और सुख-सुविधाओं को छोड़कर, भरत ने अयोध्या के बाहर नंदीग्राम में एक साधारण कुटिया बनाई थी. जहां 14 वर्षों तक उन्होंने भी अपने भाई श्रीराम की तरह सिर पर जटाएं रखीं, वल्कल वस्त्र पहने, कंद-मूल खाया और भूमि पर सोकर एक तपस्वी का जीवन बिताया था. उनका मानना था कि यदि उनके भाई श्रीराम वनों में कष्ट सह रहे हैं, तो वे महल की सुख-सुविधाओं का आनंद लेने के हकदार नहीं हैं.

    आज के समाज के लिए भरत का संदेश
    भरत का चरित्र हमें सिखाता है कि रिश्ते, मूल्य और भ्रातृ-प्रेम किसी भी भौतिक संपत्ति या पद से कहीं ऊपर होते हैं. उन्होंने सिद्ध किया था कि सच्चा अधिकार वही है जो धर्म और न्याय पर आधारित हो, न कि जबरन छीना गया हो.

  • ‘रामबोला’ नाम पर छिड़ा विवाद, एक ही दिन दो फिल्मों का ऐलान; जानें किसके नाम है टाइटल

    ‘रामबोला’ नाम पर छिड़ा विवाद, एक ही दिन दो फिल्मों का ऐलान; जानें किसके नाम है टाइटल

     'हनुमान अंश' फिल्म की जादुई सफलता से मेकर्स की खुशी का ठिकाना नहीं है. नीम करोली बाबा पर बनी फिल्म की सक्सेस को देखते हुए 'हनुमान अंश' के डायरेक्टर विशाल चतुर्वेदी ने गणेष चतुर्थी के शुभ मौके पर अपनी अगली फिल्म का ऐलान किया, जो महाकवि तुलसीदास के जीवन पर आधारित होगी. फिल्म का नाम 'रामबोला' होगा.

    रामबोला पर विवाद क्यों?
    विशाल चतुर्वेदी ने अपनी अपकमिंग फिल्म की घोषणा के साथ ही इसका नाम भी अनाउंस कर दिया. उन्होंने बताया कि उनकी फिल्म का नाम 'रामबोला' होगा. विशाल चतुर्वेदी ने प्रोडक्शन हाउस महावीर जैन के साथ मिलकर रामबोला नाम की फिल्म बनाने का ऐलान करके फैंस को बड़ा तोहफा दिया. उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्टर भी शेयर किया.

    लेकिन उसी दिन एक दूसरे डायरेक्टर और डॉक्टर चंद्रप्रकाश द्विवेदी ने भी 'रामबोला' नाम से एक और फिल्म का ऐलान कर दिया. अनाउंसमेंट पोस्ट में बताया गया कि 'रामबोला' फिल्म डॉक्टर चंद्रप्रकाश के निर्देशन में बनेगी, जबकि इसे मधु मंटेना और मंदिरा द्विवेदी प्रोड्यूस करेंगी.  

    'रामबोला' नाम से एक साथ एक ही दिन दो फिल्में अनाउंस होने पर फिल्म के टाइटल को लेकर विवाद खड़ा हो गया. अब सवाल यह उठता है कि आखिर फिल्म का टाइटल किसे मिलेगा?

    किसे मिलेगा टाइटल?
    दैनिक भास्कर की रिपोर्ट में महावीर जैन से जुड़े एक करीबी सूत्र के हवाले से बताया गया है कि 'रामबोला' टाइल 'हनुमान अंश' बनाने वाले विशाल चतुर्वेदी को ही मिलेगा, क्योंकि यह टाइटल उन्हीं के नाम पर रजिस्टर है. सूत्र ने आगे बताया कि विशाल ने कुछ समय पहले 'रामबोला' फिल्म को लेकर महावीर जैन से मुलाकात की थी. आपसी सहमति से फिल्म बनाने पर बात हुई. फिल्म के राइट्स भी विशाल चतुर्वेदी और महावीर जैन प्रोडक्शन के पास हैं.

    लेकिन कहानी में एक और ट्विस्ट है. चंद्रप्रकाश द्विवेदी का दावा है कि 'रामबोला' फिल्म के टाइटल के राइट्स उनके पास हैं. चंद्रप्रकाश द्विवेदी ने एक इंटरव्यू में दावा किया है कि उन्होंने 'रामबोला' पिल्म को लेकर महावीर जैन से मुलकाता की थी. उन्होंने महावीर जैन को मेल पर वीडियो भी भेजा था.

    हालांकि, टाइटल पर छिड़े विवाद के बीच IMPAA  'इंडियन मोशन पिक्चर आर्टिस्ट एसोसिएशन ने एक नोट जारी कर बताया है कि 'रामबोला' टाइटल विशाल चतुर्वेदी के नाम से रिजस्टर है. 23 जून को विशाल ने एसोसिएशन की मीटिंग में रामबोला टाइटल रजिस्टर करवाया था.
     

  • जल संसाधन विभाग की बड़ी सौगात-   धमतरी और बालोद जिलों में 5 सिंचाई योजनाओं के लिए 21.50 करोड़ रुपये स्वीकृत

    जल संसाधन विभाग की बड़ी सौगात- धमतरी और बालोद जिलों में 5 सिंचाई योजनाओं के लिए 21.50 करोड़ रुपये स्वीकृत

    जल संसाधन विभाग की बड़ी सौगात-
     
    धमतरी और बालोद जिलों में 5 सिंचाई योजनाओं के लिए 21.50 करोड़ रुपये स्वीकृत

    रायपुर
     छत्तीसगढ़ शासन के जल संसाधन विभाग द्वारा किसानों को बड़ी राहत देते हुए धमतरी और बालोद जिलों की पांच प्रमुख सिंचाई योजनाओं के सुदृढ़ीकरण एवं विकास कार्यों के लिए कुल 21 करोड़ 50 लाख 23 हजार रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई है। इन योजनाओं के पूर्ण होने से क्षेत्रीय किसानों को बेहतर सिंचाई सुविधा का लाभ मिलेगा।

    प्रमुख स्वीकृतियाँ 

                धमतरी जिला के राजाडेरा लघु जलाशय जलद्वार के नवीनीकरण एवं जीर्णाेद्धार कार्य के लिए 1 करोड़ 65 लाख 7 हजार रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इससे लगभग 285 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी। इसी प्रकार खट्टी एनीकट (महानदी) महानदी पर निर्मित खट्टी एनीकट के संरक्षण और जलद्वारों के उन्नयन कार्य हेतु 4 करोड़ 89 लाख 30 हजार रुपये मंजूर किए गए हैं, जिससे करीब 30 हेक्टेयर क्षेत्र सिंचित होगा।

              बालोद जिला (कुल 3 योजनाएं) के जलाशयों में विद्युतीकरण तांदुला, गोंदली और खरखरा जलाशय में विद्युतीकरण व प्रकाश व्यवस्था के कार्यों के लिए 4 करोड़ 95 लाख 99 हजार रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इससे 285 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा मिलेगी। खरखरा नदी के बांयी तट पर शीतला मंदिर के पास घाट एवं ग्राम मारीदेवरी तटबंध निर्माण कार्य के लिए 4 करोड़ 99 लाख 98 हजार रुपये की स्वीकृति दी गई है, जिससे 183 हेक्टेयर कृषि क्षेत्र लाभांवित होगा।
             तांदुला परियोजना के अंतर्गत सकरैद वितरक नहर (नाहंदा माईनर, डौकीडीह माईनर, सुखरी माईनर और भदेरा माईनर) के रिमॉडलिंग, लाइनिंग एवं पक्के कार्यों के उन्नयन के लिए 4 करोड़ 99 लाख 89 हजार रुपये मंजूर किए गए हैं। इससे भी 183 हेक्टेयर क्षेत्र के किसानों को सिंचाई का सीधा लाभ मिलेगा। इस प्रकार कुल 21.50 करोड़ रुपये की इन परियोजनाओं से प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में जल प्रबंधन मजबूत होगा और कृषि उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा।

  • IPL 2027 मिनी ऑक्शन भारत में होगा, BCCI गवर्निंग काउंसिल ने लिया बड़ा फैसला

    IPL 2027 मिनी ऑक्शन भारत में होगा, BCCI गवर्निंग काउंसिल ने लिया बड़ा फैसला

    नई दिल्ली
    आईपीएल 2027 से पहले मिनी ऑक्शन का आयोजन होना है। लीग के पिछले तीन ऑक्शन विदेश में हुए थे। आईपीएल 2027 का ऑक्शन भारत में करवाने का फैसला किया गया है। क्रिकबज की रिपोर्ट में यह दावा किया गया है। हर आईपीएल सीजन से पहले खिलाड़ियों की खरीद के लिए बीसीसीआई ऑक्शन का आयोजन करवाती है। बुधवार को गवर्निंग काउंसिल की मीटिंग में यह फैसला लिया गया।

    यूएई और सउदी अरह में हुए ऑक्शन
    आईपीएल 2023 के लिए खिलाड़ियों की नीलामी कोच्चि में की गई थी। उसके बाद यूएई के दुबई, सउदी अरब के जेद्दा और फिर यूएई के ही अबु धाबी लगातार तीन सीजन की नीलामी हुई। इस बार बीसीसीआई ने आईपीएल ऑक्शन में फिर से भारत में करवाने का फैसला कर लिया है। क्रिकबज को जानकारी रखने वाले सूत्रों ने बताया है कि अगले साल होने वाला मेगा ऑक्शन फिर से विदेश में हो सकता है।

    विदेश में ऑक्शन होने पर कई चुनौतियां
    विदेश में होने वाले मिनी-ऑक्शन के लिए अपनी टीमों को विदेश ले जाने में आने वाली लॉजिस्टिकल और ऑपरेशनल चुनौतियों को लेकर चिंता जताई थी। रिपोर्ट में कहा गया है कि बीसीसीआई के सदस्यों ने पिछले साल अबु धाबी में हुए ऑक्शन के दौरान उनकी बातों पर विचार किया था। इसी को ध्यान में रखते हुए गवर्निंग काउंसिल ने इस साल के ऑक्शन के लिए भारतीय शहर ही चुनने का फैसला किया है।

    वेन्यू पर फैसला जगह की उपलब्धता देखकर
    आईपीएल का ऑक्शन मुख्य रूप से नवंबर या दिसंबर में होता है। उस समय भारत में शादियों का भी सीजन रहता है। इसी वजह से वेन्यू का फैसला फ्रेंचाइजी और उनके डेलिगेशन के लिए रहने की जगह की उपलब्धता के आधार पर किया जाएगा। ऑक्शन करवाने के लिए बीसीसीआई को 5 स्टार होटल में 100 से ज्यादा कमरों की जरूरत पड़ती है। इन्हीं सब को देखने के बाद ऑक्शन की तारीख और वेन्यू का फैसला लिया जाएगा।