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  • IAS ट्रांसफर अपडेट: मोहन के मिडनाइट मैसेज के बाद मनीष सिंह और वर्णवाल बने ताकतवर, CM ने 2026 रोडमैप पर जताई गंभीरता

    IAS ट्रांसफर अपडेट: मोहन के मिडनाइट मैसेज के बाद मनीष सिंह और वर्णवाल बने ताकतवर, CM ने 2026 रोडमैप पर जताई गंभीरता

    भोपाल 

    मध्यप्रदेश सरकार ने शुक्रवार देर रात बड़े स्तर पर प्रशासनिक बदलाव किए। इसमें 11 आईएएस अधिकारियों के तबादले हुए। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने परफॉर्मेंस और 2026 के रोडमैप को ध्यान में रखते हुए ये फैसले लिए। बताया जा रहा है कि स्वास्थ्य विभाग में लंबे समय से प्रमुख सचिव  संदीप सिंह और मंत्री राजेंद्र शुक्ला के बीच तालमेल ठीक नहीं बैठ रहा था, यही वजह है कि संदीप सिंह को ट्रांसफर किया गया। अब स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी अपर मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल को दी गई है। संदीप सिंह को वन विभाग को प्रुख सचिव बनाया गया है।  

    वहीं, जनसंपर्क विभाग के कामकाज से भी मुख्यमंत्री नाखुश थे। यहीं वजह है कि वर्तमान जनसंपर्क आयुक्त दीपक सक्सेना को अब आबकारी आयुक्त बनाया गया है। वहीं, मनीष सिंह को फिर से जनसंपर्क आयुक्त नियुक्त किया गया है और उनके पास परिवहन विभाग का अतिरिक्त प्रभार भी रहेगा। वहीं, आबकारी आयुक्त को लंबे समय से बदलने की अटकलें चल रही थी। अब करीब दो साल तक आबकारी आयुक्त रहे अभिजीत अग्रवाल अब प्रबंध संचालक, राज्य सहकारी विपणन संघ बनाया गया है। वहीं, उनकी जगह दीपक सक्सेना को आबकारी आयुक्त बनाया गया है।   वहीं, मध्य प्रदेश सरकार ने 2026 को कृषि वर्ष के रूप में घोषित किया है। इसमें सरकार किसानों की आय बढ़ाने से लेकर उत्पादकता की आमदनी बढ़ाने का लक्ष्य रखा है। बताया जा रहा है कि कृषि विभाग के डायरेक्टर अजय सिंह के अब तक के कामकाज मुख्यमंत्री की उम्मीदों के अनुसार नहीं रहा। अब उनको हटा कर जबलपुर विद्युत कंपनी में प्रबंध संचालक की जिम्मेदारी दी गई है। 

    ट्रांसफर आदेश के अनुसार 2011 बैच के IAS उमाशंकर भार्गव को राजभवन से किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग का संचालक बनाया गया। जिला स्तर पर कई CEO और मुख्य कार्यपालन अधिकारी बदले गए। इनमें भिंड जिला पंचायत के CEO सुनील दुबे को राज्यपाल का उप सचिव बनाया गया।, संघमित्रा गौतम को आलीराजपुर जिला पंचायत CEO, नंदा भलावे कुशरे को राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान में अपर परियोजना संचालक और कमल सोलंकी को राससेन जिला पंचायत CEO की जिम्मेदारी दी गई है।  

  • कुपोषण पर करारा वार: मुख्यमंत्री बाल संदर्भ योजना और ‘वजन त्यौहार’ से बच्चों को मिला नया जीवन

    कुपोषण पर करारा वार: मुख्यमंत्री बाल संदर्भ योजना और ‘वजन त्यौहार’ से बच्चों को मिला नया जीवन

    रायपुर.

    कुपोषण उन्मूलन की सशक्त पहल: मुख्यमंत्री बाल संदर्भ योजना एवं ‘वजन त्यौहार’ से बच्चों को मिला स्वास्थ्य संबल

    प्रदेश सरकार की जनकल्याणकारी पहल के अंतर्गत कुपोषण उन्मूलन की दिशा में ठोस एवं परिणाममुखी कार्य किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री बाल संदर्भ योजना तथा महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा आयोजित “वजन त्यौहार” अभियान के माध्यम से बच्चों और गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य की सतत निगरानी कर उन्हें समुचित उपचार एवं पोषण परामर्श उपलब्ध कराया जा रहा है।

    महासमुंद जिले में नयापारा शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में आयोजित विशेष स्वास्थ्य शिविर में 0 से 5 वर्ष आयु वर्ग के कुल 80 बच्चों का विस्तृत स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। परीक्षण के दौरान 29 बच्चे कुपोषित एवं अति कुपोषित श्रेणी में पाए गए, जिन्हें तत्काल आवश्यक दवाइयां, चिकित्सकीय परामर्श तथा पोषण संबंधी उपचार उपलब्ध कराया गया। गंभीर रूप से प्रभावित बच्चों को नियमित फॉलोअप एवं आवश्यकता पड़ने पर पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती की जानकारी दी गई।

    महासमुंद जिले में इसी क्रम में 9 से 18 फरवरी तक आयोजित “वजन त्यौहार” के अंतर्गत शहरी परियोजना क्षेत्र के डॉ. सुशील सैमुअल वार्ड (सेक्टर-01) में विशेष शिविर आयोजित कर बच्चों एवं गर्भवती महिलाओं का वजन एवं ऊंचाई मापी गई। प्राप्त आंकड़ों के आधार पर कुपोषित एवं अत्यंत कुपोषित बच्चों की पहचान कर उन्हें विशेष पोषण आहार, चिकित्सा सुविधा एवं निरंतर निगरानी से जोड़ा गया। गर्भवती महिलाओं को आयरन, कैल्शियम एवं आवश्यक सूक्ष्म पोषक तत्वों के नियमित सेवन तथा संतुलित आहार अपनाने की सलाह दी गई।

    पोषण, स्वच्छता और टीकाकरण पर विशेष जोर

    चिकित्सकों एवं स्वास्थ्य दल द्वारा पालकों को संतुलित आहार की उपयोगिता, नियमित टीकाकरण, स्वच्छता, कृमिनाशक दवा सेवन, साफ पेयजल के उपयोग तथा दस्त-उल्टी जैसी स्थिति में त्वरित उपचार के महत्व से अवगत कराया गया। बच्चों के भोजन में दाल, हरी सब्जियां, दूध, अंडा, फल एवं मौसमी खाद्य पदार्थ शामिल करने की सलाह दी गई।पालकों को यह भी बताया गया कि जीवन के प्रारंभिक छह वर्ष बच्चे के शारीरिक, मानसिक एवं बौद्धिक विकास की आधारशिला होते हैं। नियमित वजन-ऊंचाई मापन और पोषण प्रबंधन से एनीमिया एवं कुपोषण जैसी समस्याओं की प्रभावी रोकथाम संभव है।

    सामाजिक जागरूकता के साथ शिक्षा से जोड़ने की पहल

    अभियान के दौरान केवल स्वास्थ्य ही नहीं, बल्कि शिक्षा के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण पहल की गई। देवार जाति की चार शाला त्यागी किशोरियों को पुनः विद्यालय में प्रवेश दिलाने हेतु समझाइश दी गई, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आए। यह प्रयास बालिका शिक्षा को प्रोत्साहन देने तथा सामाजिक समावेशन को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

    उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री बाल संदर्भ योजना के तहत आंगनबाड़ी केंद्रों में पंजीकृत बच्चों की नियमित स्वास्थ्य जांच, पोषण स्तर का मूल्यांकन, आवश्यक दवा वितरण, परामर्श तथा गंभीर मामलों को उच्च स्वास्थ्य संस्थानों में रेफर कर उपचार सुनिश्चित किया जा रहा है। महासमुंद जिले में योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से कुपोषण उन्मूलन की दिशा में जनसहभागिता आधारित सशक्त वातावरण निर्मित हो रहा है।

  • मंत्री  लक्ष्मी राजवाड़े के प्रयास रंग लाए: वनांचल के सुदूर टोलों में पहुंचेगी बिजली

    मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के प्रयास रंग लाए: वनांचल के सुदूर टोलों में पहुंचेगी बिजली

    रायपुर.

     जंगलों के बीच बसे जिन टोलों ने पीढ़ियों तक अंधेरे को अपनी नियति मान लिया था, वहां अब उजाले की पहली किरण पहुंचने जा रही है।सूरजपुर जिले के ओड़गी विकासखंड के तीन सुदूर ग्रामों में आज़ादी के दशकों बाद पहली बार नियमित बिजली पहुंचाने के लिए 3 करोड़ 6 लाख 92 हजार 670 रुपये की बड़ी स्वीकृति जारी की गई है। यह महत्वपूर्ण पहल महिला एवं बाल विकास मंत्री तथा भटगांव विधायक  लक्ष्मी राजवाड़े के विशेष प्रयासों से संभव हो पाई है।

    सूरजपुर जिले के भटगांव विधानसभा क्षेत्र के ग्राम मसंकी, बांक और असुरा के कई मजरा-टोले अब तक मुख्य विद्युत लाइन से कटे हुए थे। रात ढलते ही यहां घना अंधेरा छा जाता था और ग्रामीण ढिबरी या सीमित सोलर लाइट के सहारे जीवन यापन करने को विवश थे। बच्चों की पढ़ाई, किसानों का कार्य और सामान्य जनजीवन अंधेरे की मार झेल रहा था। क्षेत्रीय भ्रमण के दौरान ग्रामीणों की समस्या को गंभीरता से लेते हुए मंत्री  लक्ष्मी राजवाड़े ने ऊर्जा विभाग और राज्य स्तर पर पहल कर इन टोलों के विद्युतीकरण का प्रस्ताव आगे बढ़ाया।

    ‘मुख्यमंत्री मजराटोला विद्युतीकरण योजना’ के तहत स्वीकृत इस राशि से ग्राम मसंकी के लुकभुकिया और पतेरीपारा, ग्राम बांक के खासपारा और स्कूलपारा तथा ग्राम असुरा के खासपारा, पण्डोपारा और असुरा-1 में विद्युत विस्तार कार्य किया जाएगा। करोड़ों की लागत से होने वाला यह कार्य न केवल घरों को रोशन करेगा, बल्कि शिक्षा, कृषि और स्वरोजगार के नए अवसर भी सृजित करेगा।

    सबसे बड़ी चुनौती वन भूमि की अनुमति थी। चूंकि संबंधित टोले घने जंगलों के बीच स्थित हैं, इसलिए विशेष स्वीकृति आवश्यक थी। मंत्री  लक्ष्मी राजवाड़े की पहल पर विभागीय स्तर पर आवश्यक अनापत्ति प्रमाण-पत्र प्राप्त कर लिया गया है और अब शीघ्र ही जमीनी स्तर पर कार्य प्रारंभ किया जाएगा।

    मंत्री  लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा है कि राज्य सरकार की प्राथमिकता है कि प्रदेश का कोई भी घर अंधेरे में न रहे। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि विद्युत सुविधा उपलब्ध होने से बच्चों को अध्ययन में सुविधा मिलेगी, किसानों को कृषि कार्यों में सहूलियत होगी तथा स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार और लघु उद्यमों को प्रोत्साहन मिलेगा। यह पहल वनांचल क्षेत्रों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होगी।

  • प्रमोद भगत का कमाल—पैरा बैडमिंटन में जीता रिकॉर्ड छठा विश्व खिताब

    प्रमोद भगत का कमाल—पैरा बैडमिंटन में जीता रिकॉर्ड छठा विश्व खिताब

    नई दिल्ली
    37 वर्षीय भगत ने पुरुष एकल एसएल3 वर्ग के फाइनल में इंडोनेशिया के मोहम्मद अल इमरान को 21-12, 21-18 से हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। यह उनके करियर का लगातार चौथा विश्व चैंपियनशिप एकल स्वर्ण और कुल मिलाकर छठा विश्व खिताब है।

    एसएल3 वर्ग में वे खिलाड़ी हिस्सा लेते हैं जिनके निचले अंगों में गंभीर विकलांगता होती है। पांच साल की उम्र में पोलियो से प्रभावित होने के बावजूद भगत ने अपने खेल से दुनिया में भारत का नाम रोशन किया है।

    उन्होंने इससे पहले 2009, 2015, 2019, 2022 और 2024 में भी विश्व चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता था। इस जीत के साथ वह विश्व चैंपियनशिप इतिहास में सबसे सफल एकल खिलाड़ी बन गए हैं।

    यह जीत इसलिए भी खास है क्योंकि हाल ही में वे डोपिंग रोधी नियमों के ‘वेयरअबाउट्स’ उल्लंघन के कारण 18 महीने के निलंबन का सामना कर चुके थे, जिसकी वजह से वह 2024 पेरिस पैरालंपिक में हिस्सा नहीं ले पाए थे। लेकिन उन्होंने शानदार वापसी करते हुए एक बार फिर अपना दबदबा साबित किया।

     

  • नीलकंठेश्वर महादेव मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा में शामिल हुए सीएम विष्णु देव साय, प्रदेश की खुशहाली की कामना

    नीलकंठेश्वर महादेव मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा में शामिल हुए सीएम विष्णु देव साय, प्रदेश की खुशहाली की कामना

    रायपुर.

    नीलकंठेश्वर महादेव मंदिर के प्राण-प्रतिष्ठा समारोह में मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय हुए शामिल

    मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय आज जशपुर प्रवास के दौरान दुलदुला विकास खंड के ग्राम सिरीमकेला स्थित  नीलकंठेश्वर महादेव मंदिर के पावन प्राण-प्रतिष्ठा समारोह में सम्मिलित हुए। उन्होंने विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर देवाधिदेव महादेव से समस्त छत्तीसगढ़वासियों के सुख, समृद्धि और कल्याण की मंगलकामना की। महाशिवरात्रि के पावन पर्व के एक दिन पूर्व आयोजित इस आध्यात्मिक आयोजन को उन्होंने श्रद्धा, आस्था और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक बताया। 

    मुख्यमंत्री  साय ने ग्राम सिरीमकेला में सामुदायिक भवन निर्माण की घोषणा करते हुए कहा कि इससे स्थानीय नागरिकों को सामाजिक, सांस्कृतिक एवं पारिवारिक आयोजनों के लिए सुदृढ़ आधार मिलेगा।

    मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि कल हम सब महाशिवरात्रि का पावन पर्व मनाएंगे और इस अवसर पर आप सभी को हार्दिक बधाई देता हूं। उन्होंने कहा कि सिरीमकेला में भक्तों और अपने परिवारजनों के बीच आकर उन्हें आध्यात्मिक शांति और आनंद की अनुभूति हो रही है। भक्ति और श्रद्धा के इस अनूठे आयोजन में उन्होंने कहा कि राज्य सरकार सनातन परंपरा को पुनर्स्थापित करते हुए अयोध्या धाम दर्शन योजना एवं मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना के माध्यम से हजारों श्रद्धालुओं को धार्मिक यात्राएँ करा रही है। श्रवण कुमार के पदचिन्हों पर चलने का प्रयास करते हुए अब तक प्रदेश के 42 हजार से अधिक तीर्थ यात्रियों को रामलला के दर्शन कराए जा चुके हैं। 

    उन्होंने कहा कि 500 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद अयोध्या धाम में  रामलला का भव्य मंदिर बनकर तैयार हुआ है और हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल नेतृत्व में राम जन्मभूमि मंदिर के शिखर पर आज ध्वज लहरा रहा है। प्रत्येक राम भक्त की आस्था 500 वर्षों तक प्रज्वलित रही — यह एक ऐसा यज्ञ था जिसकी लौ कभी नहीं डगमगाई। हम सब निमित्त मात्र हैं, जो अपने भांचा राम के दर्शन उनके भव्य मंदिर में कर रहे हैं और श्रद्धालुओं को करा पा रहे हैं।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि आज नीलकंठेश्वर महादेव का दर्शन पाकर वे स्वयं को अत्यंत सौभाग्यशाली महसूस कर रहे हैं। दशहरा पर्व के दिन नीलकंठ के दर्शन को अत्यंत शुभ माना जाता है और आज प्राण-प्रतिष्ठा के उपरांत यहाँ निरंतर दर्शन लाभ मिलना हम सबके लिए गौरव का विषय है। उन्होंने कहा कि जशपुर में मधेश्वर महादेव स्थित हैं, जिसे लोक मान्यता के अनुसार एशिया का सबसे बड़ा प्राकृतिक शिवलिंग कहा जाता है। सनातन परंपरा में भक्ति का विशेष महत्व है और राज्य सरकार भक्तों का सम्मान करती है। सावन माह में भोरमदेव मंदिर में कांवड़ियों पर पुष्पवर्षा कर हर वर्ष आस्था प्रकट की जाती है।

    मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि छत्तीसगढ़ का प्रयाग कहे जाने वाले राजिम त्रिवेणी संगम में इन दिनों राजिम कुंभ कल्प का भव्य आयोजन हो रहा है, जहाँ आस्था और संस्कृति का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। उन्होंने श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर भगवान कुलेश्वरनाथ महादेव के दर्शन अवश्य करें। उन्होंने कहा कि सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत के संरक्षण के लिए राज्य सरकार निरंतर प्रयासरत है। राजिम कुंभ कल्प की प्रतिष्ठा को पुनर्स्थापित किया गया है, ऐतिहासिक बस्तर दशहरा की पहचान देश-विदेश तक है तथा छत्तीसगढ़ के पाँच शक्ति पीठों के विकास के लिए कार्य योजना बनाकर सतत कार्य किया जा रहा है।

    मुख्यमंत्री ने मंदिर परिसर में पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण एवं संवर्धन का संदेश भी दिया। उन्होंने कहा कि आध्यात्मिकता और प्रकृति संरक्षण एक-दूसरे के पूरक हैं। 

    कार्यक्रम के समापन अवसर पर उन्होंने कहा कि महाशिवरात्रि के इस पावन कालखंड में नीलकंठेश्वर महादेव की कृपा हम सभी पर बनी रहे, प्रदेश में सुख-शांति, समृद्धि और विकास की नई धाराएँ प्रवाहित हों तथा छत्तीसगढ़ आध्यात्मिक चेतना और सांस्कृतिक वैभव के साथ निरंतर प्रगति पथ पर अग्रसर रहे — यही उनकी हार्दिक कामना है।

    इस अवसर पर सरगुजा आदिवासी विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष एवं पत्थलगांव विधायक मती गोमती साय, महासमुंद विधायक  योगेश्वर राजू सिन्हा, पूर्व राज्यसभा सांसद  रणविजय सिंह जुदेव, जिला पंचायत उपाध्यक्ष  शौर्य प्रताप सिंह जुदेव, नगर पालिका उपाध्यक्ष  यश प्रताप सिंह जुदेव, जनपद पंचायत अध्यक्ष मती सुशीला साय,  कृष्णा राय,  पवन साय,  भरत सिंह,  अरविन्द प्रसाद साय,  कपिल देव साय, सरगुजा आईजी  दीपक कुमार झा, कलेक्टर  रोहित व्यास, एसएसपी डॉ. लाल उमेद सिंह, वनमंडलाधिकारी  शशि कुमार तथा महादेव मंदिर समिति के सदस्यगण बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

  • एम.पी. ट्रांस्को मुरैना सब स्टेशन में हुआ जीवन रक्षक सी.पी.आर. प्रशिक्षण शिविर

    एम.पी. ट्रांस्को मुरैना सब स्टेशन में हुआ जीवन रक्षक सी.पी.आर. प्रशिक्षण शिविर

    एम.पी. ट्रांस्को मुरैना सब स्टेशन में हुआ जीवन रक्षक सी.पी.आर. प्रशिक्षण शिविर

    भोपाल 

    मध्यप्रदेश पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी (एम.पी. ट्रांसको) एवं रेड क्रॉस सोसायटी व स्थानीय जिला चिकित्सालयों ,मेडिकल कॉलेजों के सहयोग से मध्यप्रदेश में एम.पी. ट्रांसको के जिला मुख्यालयों में स्थित ट्रांसमिशन लाइन मेंटेनेंस उपसंभागों, सबस्टेशनों आदि में ‘‘सी.पी.आर. एवं अन्य ऐसे ही जीवन रक्षक तकनीकों‘‘ पर प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की जा रही हैं। इसी क्रम में एक प्रशिक्षण कार्यशाला एम.पी. ट्रांसको एवं शासकीय जिला चिकित्सालय, मुरैना के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित की गई।

    मुरैना स्थित 220 के.व्ही. सब स्टेशन में आयोजित इस प्रशिक्षण कार्यशाला के संयोजक ग्वालियर के अधीक्षण अभियंता  राजीव तोतला एवं कार्यपालन अभियंता  सी.के. जैन ने कहा कि ‘‘ट्रांस्को के प्रशिक्षित व्यक्तियों में से अपने जीवन काल में यदि कोई कर्मी किसी एक भी व्यक्ति की जान बचाने में सफल होता है तो कंपनी के लिये प्रशिक्षण का यह उद्देश्य पूर्णतः सफल होगा। इस उपयोगी कार्यशाला में कंपनी के नियमित व आउटसोर्स कार्मिकों ने बडी संख्या में सहभागिता की।

    डॉ. व्यास ने दिया प्रशिक्षण

    मुरैना के चिकित्सा अधिकारी डॉ. अनिल व्यास एवं उनकी टीम ने सी.पी.आर. प्रशिक्षण के लिये उपयोग किये जाने वाले मानव पुतले एवं कुछ वीडियो की सहायता से सी.पी.आर. तकनीक का विस्तृत प्रशिक्षण दिया। प्रशिक्षण के दौरान यह सुनिश्चित किया गया कि प्रत्येक प्रतिभागी विषय विशेषज्ञ की निगरानी में मानव पुतले पर सी.पी.आर. तकनीक का अभ्यास करें।

     

  • अमेरिका में चार दिन से लापता भारतीय छात्र, पुलिस ने जताई जान को खतरे की आशंका

    अमेरिका में चार दिन से लापता भारतीय छात्र, पुलिस ने जताई जान को खतरे की आशंका

    न्यूयॉर्क

    अमेरिका में भारतीय छात्रों की मौत और लापता होने के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। हाल ही में अमेरिका के बर्कले में 22 साल के भारतीय छात्र साकेत श्रीनिवासैया लापता हो गए हैं। अमेरिकी पुलिस डिपार्टमेंट का कहना है कि साकेत की तलाश की जा रही है। अमेरिकी पुलिस ने उनकी जान को खतरा भीबताया है। मंगलवार की शाम 5 बजे उन्हें आखिरी बार देखा गया था।

    पुलिस ने बताया है कि साकेत की लंबाई 6 फीट 1 इंच थीऔर उनका वजन 72 किलो के आसपास था। उनकी आंखें भूरी हैं और बाल छोटे हैं। पुलिस ने इसके अलावा ज्यादा जानकारी सार्वजनिक नहीं की है। सैन फ्रांसिस्को में कॉन्सुलेट जनरल ऑफ इंडिया ने बयान जारी करते हुए घटना पर चिंता जताई है। बयान में कहा गया गया है कि भारतीय कॉन्सुलेट जनरल को साकेत श्रीनिवासैया के गायब होने की चंता है। वह कर्नाटक के रहने वाले हैं और यूसी बर्कली में पोस्टग्रैजुएट स्टूडेंट हैं। कॉन्सुलेट उनके परिवार और यहां स्थानीय प्रशासन के संपर्क में है।

    श्रीनिवासैया बर्कले की यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफॉर्निया में केमिकल ऐंड बायोमॉलीकुलर इंजीनयिरिंग डिपार्टमेंट में पोस्ट ग्रैजुएशन कर रहे थे। उनकी लिंक्ड इन प्रोफाइल के मुताबिक एमएस पीडीपी 26 प्रोग्राम के तहत उन्होंने यहां ऐडमिशन लिया था। उन्होंने आईआईटी मद्रास से 2025 में अपना बीटेक पूरा किया था। इसके बाद विदेश में पढ़ने का मौका मिला और उन्हें यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफॉर्निया में ऐडमिशन मिल गया।

    बता दें कि विदेश में पढ़ने वाले भारतीय छात्र के साथ यह कोई पहली घटना नहीं है। अकसर अमेरका और अन्य देशोंमें भारतीय छात्रों के साथ नस्लीय भेदभाव के मामले सामने आते रहते हैं। हाल ही में लोकसभा में एआईएमआईएम असुद्द्दीन ओवैसी ने विदेश में पढ़ने वाले छात्रों की सुरक्षा का मुद्दा उठाया था। उनको जवाब देते हुए विदेश मंत्रालय ने कहा था कि सरकार विदेश में पढऩे वाले भारतीय छात्रों की सुरक्षा को प्राथमिकता देती है। विदेश में मौजूद भारत के मिशन पूरा ध्यान रखते हैं कि भारतीयों के साथ बुरा व्यवहार ना होने पाए।

    बता दें कि श्रीनिवासैया के साथ रहने वाले बनेतस सिंह ने उनके गायब होने के बाद मदद के लिए सोशल मीडिया पर पोस्ट किया था। इसमें लिखा गया था कि श्रीनिवासैया 9 फरवीर से लापता हैं। आखिरी बार बर्कले हिल्स के बाद उन्हें देखा गया था। अगर किसी को भी उनके बारे में पता चलता है तो जानकारी दे। उन्होंने कहा, यह मेरे लिए बहुत मुश्किल समय है अगर कोई भी मदद कर सकता है तो कृपया संपर्क करे।

  • UGC का ‘इक्विटी कार्ड’ विवाद: लखनऊ से दिल्ली यूनिवर्सिटी तक छात्रों में तनाव

    UGC का ‘इक्विटी कार्ड’ विवाद: लखनऊ से दिल्ली यूनिवर्सिटी तक छात्रों में तनाव

    नई दिल्ली

    यूजीसी के ‘Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations, 2026’ ने उच्च शिक्षा जगत को 2 हिस्सों में बांट दिया है. इन दिनों दिल्ली, लखनऊ, पटना और इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में जो चल रहा है, उससे पता चलता है कि यह विवाद अब जमीनी संघर्ष बन चुका है. एक तरफ नियमों को ‘ऐतिहासिक’ मानकर समर्थन में मार्च निकाले जा रहे हैं तो दूसरी तरफ इसे ‘पूर्वाग्रह से ग्रसित’ बताकर इसके खिलाफ अदालतों और सड़कों पर मोर्चा खोला गया है.

    प्रशासनिक स्तर पर यूजीसी का तर्क है कि कैंपस में बढ़ते मानसिक उत्पीड़न और जातिगत भेदभाव को रोकने के लिए अब तक के मौजूद तंत्र (जैसे एंटी-रैगिंग सेल) नाकाफी साबित हुए हैं. दिल्ली यूनिवर्सिटी में विरोध कर रहे संगठनों का मानना है कि इन नियमों की आड़ में एक खास वर्ग को लक्षित किया जा रहा है. लखनऊ विश्वविद्यालय में समर्थन में उतरे छात्रों पर हुई पुलिसिया सख्ती ने इस पूरे मामले को और भी संवेदनशील बना दिया है. इस विवाद की हर परत को यहां विस्तार से समझिए.
    समर्थन का पक्ष: क्यों जरूरी हैं यूजीसी के नियम?

    नियमों का समर्थन कर रहे छात्र संगठनों (जैसे AISA, SFI, NSUI और अन्य दलित-पिछड़ा वर्ग संगठन) का तर्क है कि ‘संस्थागत हत्याओं’ (Institutional Murders) को रोकने के लिए सख्त कानूनों की जरूरत है.

        बढ़ती शिकायतों का सच: यूजीसी के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पिछले 5 वर्षों में उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव और प्रताड़ना की शिकायतों में 118% की वृद्धि दर्ज की गई है.

        स्वतंत्र जांच तंत्र: समर्थकों का कहना है कि वर्तमान में भेदभाव की जांच वही प्रशासन करता है जिस पर आरोप होता है. नए नियम बाहरी निगरानी की वकालत करते हैं, जो निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करेगा.

        लखनऊ का ‘समता संवर्धन मार्च’: लखनऊ विश्वविद्यालय में छात्रों ने मांग की कि ‘उच्च शिक्षा सामाजिक न्याय आयोग’ का गठन हो, जिससे फेलोशिप में देरी और पक्षपातपूर्ण मूल्यांकन (Biased Evaluation) जैसे मुद्दों पर कानूनी जवाबदेही तय की जा सके.

    विरोध का पक्ष: क्या हैं आशंकाएं?

    सवर्ण समाज समन्वय समिति (Coordination Committee) और कई ‘सामान्य श्रेणी’ के छात्र संगठनों ने इसे ‘काला कानून’ करार दिया है. उनके विरोध के मुख्य बिंदु नीचे लिखे हैं:

        सुरक्षात्मक प्रावधानों का अभाव: विरोधियों का आरोप है कि 2025 के शुरुआती ड्राफ्ट में ‘झूठी शिकायत’ करने वालों पर दंड का प्रावधान था, जिसे आखिरी नोटिफिकेशन से हटा दिया गया है. इससे निर्दोष छात्रों और शिक्षकों को फंसाए जाने का डर है.

        प्राकृतिक न्याय का उल्लंघन: नए नियमों में ‘सबूत का भार’ (Burden of Proof) आरोपी पर डाल दिया गया है. यानी, अगर किसी पर भेदभाव का आरोप लगता है तो उसे खुद को निर्दोष साबित करना होगा, जो भारतीय दंड संहिता के मूल सिद्धांतों के खिलाफ माना जा रहा है.
        भेदभाव की ‘अस्पष्ट’ परिभाषा: विरोधियों का तर्क है कि ‘अपमानजनक व्यवहार’ की परिभाषा इतनी व्यापक और अस्पष्ट रखी गई है कि सामान्य शैक्षणिक चर्चाओं को भी इसके दायरे में लाकर किसी का करियर बर्बाद किया जा सकता है.

    कैंपस की मौजूदा स्थिति: लखनऊ से दिल्ली यूनिवर्सिटी तक का हाल

    हालिया घटनाक्रमों ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है. लखनऊ विश्वविद्यालय में समर्थन में उतरे छात्रों को जिस तरह पुलिस ने घसीटकर हिरासत में लिया, उसने समर्थकों का आक्रोश बढ़ा दिया है. वहीं दिल्ली विश्वविद्यालय में सवर्ण संगठनों ने यूजीसी मुख्यालय का घेराव कर चेतावनी दी है कि अगर इन नियमों को वापस नहीं लिया गया तो देशव्यापी आंदोलन होगा. कई प्रोफेसर ने भी अपनी पहचान गुप्त रखते हुए कहा है कि ये नियम कैंपस में ‘मुक्त संवाद’ (Free Speech) का माहौल खत्म कर सकते हैं.

    यूजीसी विवाद: इन 5 धाराओं ने कैंपस को ‘अखाड़ा’ बना दिया

    यूजीसी इक्विटी कार्ड विवाद समझने के लिए आपको वो 5 धाराएं भी पता होनी चाहिए, जिनकी वजह से विभिन्न यूनिवर्सिटी में माहौल गर्माया हुआ है.

        धारा 4.2: ‘भेदभाव’ की विस्तृत और अस्पष्ट परिभाषा- इस धारा के तहत ‘जातिगत भेदभाव’ की परिभाषा को इतना व्यापक बना दिया गया है कि इसमें किसी छात्र की शैक्षणिक आलोचना, उपहास या उसे किसी समूह से बाहर रखना भी शामिल है.

    विवाद की वजह: विशेषज्ञों का मानना है कि ‘उपहास’ या ‘भेदभावपूर्ण व्यवहार’ व्यक्तिपरक (Subjective) हो सकते हैं. विरोधियों को डर है कि सामान्य शैक्षणिक चर्चाओं या चुटकुलों को भी इस धारा के तहत ‘अपराध’ की श्रेणी में लाकर प्रोफेसरों और छात्रों को लक्षित किया जा सकता है.

        धारा 6.1 (ख):आरोपी पर ‘सबूत का भार’- आमतौर पर किसी भी कानून में शिकायतकर्ता को आरोप साबित करना होता है, लेकिन इस क्लॉज ने इसे पलट दिया है.

    विवाद की वजह: अगर किसी छात्र ने भेदभाव का आरोप लगाया है तो आरोपी छात्र या शिक्षक को साबित करना होगा कि उसने ऐसा नहीं किया. इसे ‘प्राकृतिक न्याय’ (Natural Justice) के खिलाफ माना जा रहा है.. क्योंकि यह आरोपी को तब तक दोषी मानता है, जब तक वह अपनी बेगुनाही साबित न कर दे.

        धारा 8.4: झूठी शिकायत पर दंड के प्रावधान का हटना- प्रारंभिक ड्राफ्ट (2025) में प्रावधान था कि अगर कोई दुर्भावनापूर्ण तरीके से झूठी शिकायत दर्ज कराता है तो उस पर कार्रवाई होगी. लेकिन 2026 की अंतिम अधिसूचना में यह सुरक्षा कवच हटा दिया गया है.

    विवाद की वजह: विरोध कर रहे छात्र संगठनों का तर्क है कि इस क्लॉज के हटने से व्यक्तिगत रंजिश निकालने के लिए झूठी शिकायतों की बाढ़ आ सकती है और आरोपी के पास इससे बचने का कोई कानूनी रास्ता नहीं बचेगा.

        धारा 10.2: स्वतंत्र ‘लोकपाल’ (Ombudsman) और बाहरी हस्तक्षेप- यह धारा हर विश्वविद्यालय क स्वतंत्र ‘समान अवसर सेल’ और एक बाहरी लोकपाल नियुक्त करने का निर्देश देती है, जो संस्थान के प्रशासन का हिस्सा नहीं होगा.

    विवाद की वजह: समर्थकों (जैसे लखनऊ के प्रदर्शनकारी छात्र) के लिए यह सबसे मजबूत बिंदु है क्योंकि यह निष्पक्षता सुनिश्चित करता है. लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन इसे अपनी ‘स्वायत्तता’ (Autonomy) पर हमला मान रहा है क्योंकि अब आंतरिक मामलों का फैसला बाहरी व्यक्ति करेगा.

        धारा 12.1: फंड में कटौती और ‘डी-रिकग्निशन’ की शक्ति- यह धारा यूजीसी को अधिकार देती है कि अगर कोई संस्थान इन नियमों को सख्ती से लागू नहीं करता तो उसका वार्षिक फंड (Grants) रोक दिया जाए या उसकी मान्यता रद्द करने की सिफारिश की जाए.

    विवाद की वजह: इसे ‘फाइनेंशियल ब्लैकमेलिंग’ के रूप में देखा जा रहा है. कई संस्थानों का तर्क है कि नियमों के क्रियान्वयन में होने वाली मानवीय चूक के लिए पूरे विश्वविद्यालय का फंड रोकना हजारों निर्दोष छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ होगा.

    क्या है बीच का रास्ता?

    जहां समर्थक इसे सदियों पुराने भेदभाव के खिलाफ ‘संवैधानिक ढाल’ मान रहे हैं, वहीं विरोधी इसे ‘प्रतिशोध का हथियार’ बता रहे हैं. कानून के जानकारों का मानना है कि अगर यूजीसी इसमें ‘झूठी शिकायत पर दंड’ (Safeguard against misuse) का प्रावधान वापस जोड़ दे तो इस विवाद की तीव्रता काफी हद तक कम हो सकती है.

    FAQ: यूजीसी इक्विटी रेगुलेशन 2026 विवाद से जुड़े आम सवाल-जवाब

    यूजीसी ‘इक्विटी रेगुलेशन 2026’ क्या है?

    यह यूजीसी की तरफ से जारी किए गए नए दिशा-निर्देश हैं, जिनका उद्देश्य देश के सभी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में जाति, धर्म, लिंग और विकलांगता के आधार पर होने वाले भेदभाव को खत्म करना है. इसके तहत संस्थानों को एक सख्त निगरानी तंत्र और शिकायत निवारण सेल बनाना अनिवार्य होगा.

    विश्वविद्यालयों में इतना बवाल क्यों मचा है?

    विवाद की मुख्य वजह नियमों की कठोरता और उनके संभावित दुरुपयोग की आशंका है. जहां एक पक्ष (समर्थक) इसे भेदभाव के खिलाफ ‘सुरक्षा कवच’ मान रहा है, वहीं दूसरा पक्ष (विरोधी) इसे ‘दमनकारी’ और एकतरफा कानून बता रहा है.

    ’सबूत का भार’ (Burden of Proof) वाला पेंच क्या है?

    आमतौर पर शिकायतकर्ता को आरोप साबित करना होता है. लेकिन इन नियमों के अनुसार, अगर किसी छात्र पर भेदभाव का आरोप लगता है तो उस आरोपी छात्र या शिक्षक को साबित करना होगा कि वह निर्दोष है. इसे लेकर कानूनी विशेषज्ञ सबसे ज्यादा आपत्ति जता रहे हैं.

    लखनऊ विश्वविद्यालय में छात्र ‘समर्थन’ में क्यों प्रदर्शन कर रहे थे?

    समर्थकों का तर्क है कि मौजूदा व्यवस्था भेदभाव रोकने में नाकाम रही है. वे कैंपस में पक्षपातपूर्ण मूल्यांकन (Biased Marking) और फेलोशिप रोकने जैसी समस्याओं पर स्वतंत्र जांच के लिए ये नियम चाहते हैं.

    क्या झूठी शिकायत करने वालों के लिए कोई सजा है?

    यूजीसी के नए नियमों के अंतिम ड्राफ्ट से ‘झूठी शिकायत पर कार्रवाई’ का क्लॉज हटा दिया गया है. विरोधियों का सबसे बड़ा डर यही है कि इसका इस्तेमाल व्यक्तिगत रंजिश निकालने के लिए किया जा सकता है.

    क्या यूजीसी किसी कॉलेज का फंड भी रोक सकता है?

    हां, इन नियमों में प्रावधान है कि अगर कोई संस्थान इन गाइडलाइंस को लागू नहीं करता या दोषी पाए जाने पर कार्रवाई नहीं करतातो यूजीसी उसकी ग्रांट (Grant) रोक सकता है और उसकी मान्यता भी खतरे में पड़ सकती है.

    ’बाहरी लोकपाल’ (External Ombudsman) की क्या भूमिका है?

    नियमों के तहत भेदभाव की शिकायतों की जांच विश्वविद्यालय का प्रशासन नहीं, बल्कि एक ‘बाहरी लोकपाल’ करेगा. इसका उद्देश्य जांच को निष्पक्ष और आंतरिक दबाव से मुक्त रखना है.

     

  • कांग्रेस ने PM मोदी के लिए बुक किया फ्लाइट टिकट, कहा- बस प्लेन में बैठिए, लोग इंतजार कर रहे

    कांग्रेस ने PM मोदी के लिए बुक किया फ्लाइट टिकट, कहा- बस प्लेन में बैठिए, लोग इंतजार कर रहे

      नई दिल्ली
    असम के दौरे पर पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर कांग्रेस ने तीखा हमला बोला है. कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर एक बेहद व्यंग्यात्मक पोस्ट साझा करते हुए प्रधानमंत्री से हिंसा प्रभावित मणिपुर जाने की अपील की है. 

    X पर एक पोस्ट में, खेड़ा ने तंज कसते हुए कहा, "चुनाव वाले राज्य हमेशा आपकी सर्वोच्च प्राथमिकता होते हैं, लेकिन मणिपुर को "छोड़ा नहीं जाना चाहिए. राज्य 2023 से जल रहा है, और अब फिर से जल रहा है."

    खेड़ा ने दोनों राज्यों के बीच कम दूरी की तरफ इशारा करते हुए लिखा, “आप आज असम में हैं. मणिपुर यहां से सिर्फ एक घंटे की दूरी पर है. कृपया वहां भी जाइए. प्रधानमंत्री की उपस्थिति मणिपुर के लोगों को आश्वस्त करने में बहुत मददगार साबित हो सकती है.” 

    'मेरे पास आपका नंबर नहीं था…':
    कांग्रेस नेता ने फ्लाइट टिकट की फोटो साझा करते हुए लिखा, "आपकी आसानी के लिए हमने गुवाहाटी से इम्फाल का टिकट बुक कर दिया है, आपको बस विमान में सवार होना है. चूंकि मेरे पास आपका नंबर नहीं था, इसलिए मैं टिकट यहीं साझा कर रहा हूं." उन्होंने केंद्र के 'PM CARES' फंड पर कटाक्ष करते हुए संदेश दिया कि प्रधानमंत्री वहां जाकर दिखाएं कि वह वाकई मणिपुर की परवाह करते हैं.

    मणिपुर में 2023 से जारी हिंसा और बीच-बीच में भड़कती घटनाओं को लेकर विपक्ष केंद्र सरकार पर सवाल उठाता रहा है. वहीं सरकार का कहना है कि शांति बहाली के प्रयास जारी हैं.

    प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से इस बयान पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई. इस अनूठे राजनीतिक विरोध ने सोशल मीडिया पर बहस छेड़ दी है. जहां कांग्रेस समर्थक इसे मणिपुर की अनदेखी का मुद्दा बना रहे हैं, वहीं आलोचक इसे राजनीतिक नौटंकी करार दे रहे हैं.

  • Toyota की पहली 3-रो इलेक्ट्रिक SUV लॉन्च, भारत में एंट्री की संभावना

    Toyota की पहली 3-रो इलेक्ट्रिक SUV लॉन्च, भारत में एंट्री की संभावना

    मुंबई 

    जापानी ऑटोमोबाइल कंपनी टोयोटा ने आखिरकार अपनी पहली फ्लैगशिप तीन-रो वाली इलेक्ट्रिक SUV से पर्दा उठा दिया है। लंबे समय से इलेक्ट्रिक सेगमेंट में मौजूद रहने के बावजूद टोयोटा के पास अब तक ऐसी कोई फुल-साइज़ EV नहीं थी, जो सीधे तौर पर फैमिली और प्रीमियम SUV खरीदारों को टारगेट कर सके। इसी खाली जगह को भरने के लिए कंपनी ने नई Toyota Highlander EV को पेश किया है, जिसे 2027 से बिक्री के लिए उतारा जाएगा। इस मॉडल को खास तौर पर Kia EV9 और Hyundai Ioniq 9 जैसी इलेक्ट्रिक SUVs को चुनौती देने के लिए तैयार किया गया है।

    बदला हुआ डिजाइन, ज्यादा दमदार रोड प्रेजेंस
    2027 Toyota Highlander EV को कंपनी की लेटेस्ट डिजाइन लैंग्वेज पर तैयार किया गया है। इसका फ्रंट लुक काफी बोल्ड रखा गया है, जिसमें हैमरहेड-स्टाइल फेस, फुल-लेंथ LED DRL और अलग से सेट किए गए LED हेडलैंप्स देखने को मिलते हैं। साइड प्रोफाइल में शार्प लाइन्स, उभरे हुए फेंडर्स और लंबा ग्लासहाउस इसे एक स्लीक लेकिन मजबूत सिल्हूट देते हैं। पीछे की तरफ कनेक्टेड LED टेललैंप्स और स्पॉइलर इसे मॉडर्न EV पहचान देते हैं।

    आकार के लिहाज से नई Highlander EV पहले से बड़ी हो गई है। इसकी चौड़ाई और व्हीलबेस में बढ़ोतरी की गई है, जिससे केबिन में तीनों रो के लिए ज्यादा स्पेस मिलता है और थर्ड रो में बैठना पहले के मुकाबले ज्यादा आरामदायक हो गया है।

    टेक-फॉरवर्ड और प्रीमियम इंटीरियर
    Toyota Highlander EV का केबिन पूरी तरह मॉडर्न अप्रोच के साथ डिजाइन किया गया है। डैशबोर्ड पर बड़ा 14-इंच का टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम दिया गया है, जो वायरलेस कनेक्टिविटी को सपोर्ट करता है। ड्राइवर के सामने 12.3-इंच का डिजिटल इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर मिलता है, जिसमें फुल-स्क्रीन नेविगेशन की सुविधा दी गई है।

    इसके अलावा हेड-अप डिस्प्ले, 64-कलर एम्बिएंट लाइटिंग और कंपनी का अब तक का सबसे बड़ा पैनोरमिक ग्लासरूफ इसे और प्रीमियम बनाते हैं। फ्रंट सीट्स हीटेड हैं, दूसरी रो में कैप्टन सीट्स दी गई हैं और तीनों रो में चार्जिंग पोर्ट्स की सुविधा मौजूद है, जिससे लंबी यात्राएं ज्यादा सुविधाजनक बनती हैं।

    पावरट्रेन और रेंज के विकल्प
    नई Toyota Highlander EV को XLE और Limited वेरिएंट्स में उतारा जाएगा। इसमें फ्रंट-व्हील ड्राइव और ऑल-व्हील ड्राइव, दोनों ऑप्शन मिलते हैं। बेस वेरिएंट में 77 kWh की बैटरी दी गई है, जो सिंगल मोटर सेटअप के साथ एक चार्ज में करीब 462 किलोमीटर तक की रेंज देने में सक्षम है।

    ऑल-व्हील ड्राइव वर्जन में डुअल मोटर सेटअप मिलता है, जिससे पावर और टॉर्क में बढ़ोतरी होती है, हालांकि रेंज थोड़ी कम हो जाती है। वहीं बड़े 95.8 kWh बैटरी पैक के साथ यह SUV एक चार्ज में 515 किलोमीटर तक चल सकती है, जो इसे लंबी दूरी की फैमिली EV के तौर पर मजबूत बनाता है।

    भारत में लॉन्च की क्या है संभावना?
    Toyota Highlander EV को पहले अमेरिकी बाजार में लॉन्च किया जाएगा और इसकी बिक्री 2027 की शुरुआत से शुरू होने की उम्मीद है। फिलहाल कंपनी ने भारत में इसके लॉन्च को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। हालांकि, अगर इसे भारतीय बाजार में लाया जाता है, तो संभावना है कि यह CBU रूट के जरिए पेश की जाए।

    भारत में इस समय प्रीमियम तीन-रो इलेक्ट्रिक SUV सेगमेंट में Kia EV9 अकेली मजबूत दावेदार है, जबकि लग्ज़री सेगमेंट में Mercedes-Benz EQS और Mercedes-Benz EQB मौजूद हैं। ऐसे में अगर Toyota Highlander EV भारत आती है, तो यह सीधे तौर पर Kia EV9 को कड़ी टक्कर दे सकती है।