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  • रामायण का भूला हुआ अंगद: मुस्लिम अभिनेता जिसने लंका में रखा पैर, पर हिला न सका कोई महाबली

    रामायण का भूला हुआ अंगद: मुस्लिम अभिनेता जिसने लंका में रखा पैर, पर हिला न सका कोई महाबली

    मुंबई

    रामानंद सागर का पौराणिक धारावाहिक 'रामायण' जब कोविड में दोबारा टीवी पर आया तो इसने हलचल मचा दी। इसके पुनः प्रसारण के बाद से ही यह धारावाहिक कई कारणों से खबरों में आ गया। हाई टीआरपी से लेकर महिला सशक्तिकरण, शारीरिक शक्ति और कई सारी चीजें, सोशल मीडिया पर ढेर सारे मीम्स शेयर किए गए। 1980 और 1990 के दशक में दूरदर्शन सबसे बड़े टीवी चैनलों में से एक था। यह चैनल अपने पौराणिक शोज के लिए काफी प्रसिद्ध हुआ – रामानंद सागर की रामायण उनमें से एक थी, जिसे जनता ने खूब पसंद किया। उस समय, इसके लीड एक्टर्स बहुत फेमस थे। हालांकि, समय बीतने और नई पीढ़ियों के आने के साथ, वे धीरे-धीरे गुमनामी में खो गए। इन्हीं में से एक थे अंगद का किरदार निभाने वाले एक्टर बशीर खान।

    आज हम एक ऐसे अभिनेता की बात करेंगे, जिन्होंने रामानंद सागर की मशहूर टीवी सीरियल में अंगद का किरदार निभाया था। उनका नाम बशीर खान है। सीरियल में बाली और तारा के बेटे अंगद के दमदार किरदार से उन्हें खूब प्रसिद्धि मिली। अंगद के रूप में उनका एक सीन आज भी दर्शकों को याद है, जब वे रावण के दरबार में मजबूती से खड़े हो गए और किसी को भी उन्हें हिलाने की हिम्मत नहीं थी। पूरा सीन उनके दृढ़ संकल्प, शक्ति और व्यक्तित्व को दिखाता है।

    वीरेंद्र सहवाग ने की थी तारीफ
    कोविड के वक्त भी एक एपिसोड में अंगद का वह सीन दिखाया गया जिसमें रावण उनका पैर हिलाने की कोशिश करता है लेकिन असफल हो जाता है। इस सीन ने लोगों को इस किरदार की खूब तारीफ करने पर मजबूर कर दिया। यहां तक कि पूर्व भारतीय क्रिकेटर वीरेंद्र सहवाग ने भी ये फोटो शेयर करते हुए कहा था कि यहीं से उन्हें अपनी बल्लेबाजी की प्रेरणा मिली। उन्होंने लिखा, 'तो यहीं से मुझे अपनी बल्लेबाजी की प्रेरणा मिली 🙂 पैर हिलाना मुश्किल ही नहीं, नामुमकिन है। #अंगद जी रॉक्स'

    'महाभारत' और 'श्री कृष्ण' में भी किया काम
    'रामायण' के अलावा, बशीर खान ने बी.आर. चोपड़ा की 'महाभारत' (1988) और 'श्री कृष्ण' (1993) जैसे क्लासिक पौराणिक शोज में भी अभिनय किया। उनकी एक्टिंग ने भारतीय टेलीविजन पर अमिट छाप छोड़ी और दर्शकों के दिलों में एक खास जगह बनाई।

    बशीर खान गुमनामी में खोए
    बशीर खान ने अपने एक्टिंग करियर की शुरुआत रामानंद सागर के उस समय के फेमस शो 'विक्रम बेताल' से की थी। हालांकि, उन्हें असली पहचान रामायण में अंगद के किरदार को निभाने के बाद मिली, जिसे आज भी कई लोग इस क्लासिक शो में उनके योगदान के लिए याद करते हैं। लेकिन आज वो गुमनामी में खो गए हैं और अब उन्हें रोल्स ऑफर नहीं होते हैं।

  • CM का बड़ा ऐलान- केन-बेतवा लिंक से 300 गांवों को मिलेगा पानी

    CM का बड़ा ऐलान- केन-बेतवा लिंक से 300 गांवों को मिलेगा पानी

    दमोह
    मध्य प्रदेश के दमोह जिले के नोहटा में आयोजित नोहलेश्वर महोत्सव और किसान सम्मेलन के मंच से मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दमोह जिले के लिए विकास योजनाओं की झड़ी लगा दी। उन्होंने कहा कि औद्योगिक प्रक्षेत्र, सिंचाई परियोजनाओं और पर्यटन विस्तार से जिले के युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर मिलेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा, सूखे खेत को पानी मिल जाए तो फसल सोने जैसी हो जाती है और केन-बेतवा लिंक परियोजना दमोह की तस्वीर बदल देगी।

    चीतों की संख्या 35 हुई
    सीएम ने बताया कि प्रदेश में चीतों का पुनर्स्थापन देश के लिए उदाहरण बना है। श्योपुर के उद्यान में लाए गए चीतों की संख्या अब बढ़कर 35 हो चुकी है और इसी वर्ष जून से पहले नौरादेही अभयारण्य में भी चीते छोड़े जाएंगे। इससे दमोह क्षेत्र में वन्यजीव पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। ग्रामीणों की आय बढ़ाने के लिए घर ठहराव योजना के तहत अनुदान भी दिया जा रहा है।

    600 करोड़ की घोषणा
    सिंचाई के मोर्चे पर मुख्यमंत्री ने व्यारमा नदी से पानी लिफ्ट कर बांदकपुर-सेमरखो जलाशय की क्षमता बढ़ाने और दमोह विधानसभा के 33 गांवों की 14 हजार हेक्टेयर भूमि को सिंचाई सुविधा देने के लिए 600 करोड़ रुपये की घोषणा की। साथ ही राजनगर तालाब, सीतानगर और सतधरू बांध पर पर्यटन गतिविधियां तथा जल क्रीड़ा केंद्र विकसित किए जाएंगे।

    एक नजर में घोषणाएं-:
        नौरादेही अभयारण्य में चीता पुनर्स्थापन
        गीता भवन निर्माण के लिए 2 करोड़
        600 करोड़ की लिफ्ट सिंचाई योजना
        नवीन जिला जेल के लिए 70 करोड़
        तेंदूखेड़ा और हटा में खेल स्टेडियम
        राजनगर तालाब व बांधों पर पर्यटन और बोट क्लब
        नोहटा को नगर परिषद बनाने पर परीक्षण
        व्यारमा नदी पर जल क्रीड़ा केंद्र

  • ग्वालियर के डॉ. श्रीवास्तव ने किया देहदान प्रदेश सरकार के निर्णय अनुसार दिया गया गार्ड ऑफ़ ऑनर

    ग्वालियर के डॉ. श्रीवास्तव ने किया देहदान प्रदेश सरकार के निर्णय अनुसार दिया गया गार्ड ऑफ़ ऑनर

    भोपाल.

    ग्वालियर के डॉ. अरुण श्रीवास्तव के देहांत के बाद उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देशानुसार प्रदेश में देहदान का फैसला लेने वालों की पार्थिव देह को पुलिस दस्ते के द्वारा गार्ड ऑफ़ ऑनर दिया जाता है। ग्वालियर में लम्बे समय तक शासकीय चिकित्सक रहे डॉ. अरुण श्रीवास्तव का शुक्रवार की रात लम्बी बीमारी के बाद निधन हो गया। उनकी इच्छा अनुरूप उनके परिजनों ने उनकी पार्थिव देह को गजराराजा मेडिकल कॉलेज को दान कर दिया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव के निर्देशानुसार ग्वालियर कलेक्टर श्रीमती रुचिका चौहान ने पार्थिव देह को गार्ड ऑफ़ ऑनर देने के लिये आवश्यक प्रबंध सुनिश्चित किये। निर्देशानुसार डॉ. श्रीवास्तव की पार्थिव देह को ग्वालियर के गांधीनगर में गार्ड ऑफ़ ऑनर दिया गया। गार्ड ऑफ़ ऑनर के बाद दिवंगत डॉ. श्रीवास्तव के परिजनों ने गजराराजा मेडिकल कॉलेज पहुँचकर देहदान की औपचारिकताएं पूरी की।

     

  • शंकराचार्य का बड़ा सवाल: योगी होकर CM कैसे? अविमुक्तेश्वरानंद का तीखा हमला

    शंकराचार्य का बड़ा सवाल: योगी होकर CM कैसे? अविमुक्तेश्वरानंद का तीखा हमला

    वाराणसी
    शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने सीएम योगी के बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि शंकराचार्य की पहचान राजनीतिक प्रमाणपत्र से नहीं होती। सवाल यह है कि अगर आप योगी हैं, तो मुख्यमंत्री  कैसे रह सकते हैं?

    शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बीच बयानबाजी को लेकर सियासी और धार्मिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। अविमुक्तेश्वरानंद ने मुख्यमंत्री के उस बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी है, जिसमें उन्होंने कहा था कि हर व्यक्ति खुद को शंकराचार्य नहीं कह सकता और कोई भी कानून से ऊपर नहीं है। इस बयान के बाद शंकराचार्य ने पलटवार करते हुए कहा कि सनातन परंपरा में शंकराचार्य की पहचान किसी राजनीतिक प्रमाणपत्र या सरकारी मान्यता से तय नहीं होती। उन्होने कहा कि जो योगी बन गया, उसे राजपाट से दूर रहना चाहिए। राजा योगी बन सकता है, लेकिन योगी फिर से राजा नहीं बनता। तो सवाल यह है कि अगर आप योगी हैं, विरक्त हैं, तो मुख्यमंत्री सत्ता स्वीकार कैसे कर रहे हैं?

    'कोई सीएम शंकराचार्य नियुक्त नहीं करेगा'
    एक मीडिया संस्थान को दिए इंटरव्यू में अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि सपा ने शंकराचार्य को मारा था। आप भी मार चुके हो। मतलब सपा ने जिसे मारा, उसे हम भी मार सकते हैं। अगर यही परिभाषा है, तो सपा से अलग कैसे हो सकते हो? जो अहंकार 2015 में अखिलेश के माथे पर चढ़ा था, वही अहंकार चढ़ गया है। अखिलेश तो बर्बाद हो गए। अब इनका देखिएगा। सनातन में ऐसी कोई परंपरा नहीं कि कोई मुख्यमंत्री या सरकार प्रमाणपत्र देकर शंकराचार्य नियुक्त करे।

    उन्होने कहा कि सनातन धर्म की परंपराएं सदियों पुरानी हैं और इनमें धार्मिक पदों का निर्धारण आध्यात्मिक परंपरा, गुरु-शिष्य परंपरा और धार्मिक मान्यताओं के आधार पर होता है। उन्होंने कहा कि सरकार या कोई राजनीतिक दल यह तय नहीं कर सकता कि कौन शंकराचार्य होगा या नहीं।

    सीएम योगी ने क्या कहा था?
    शंकराचार्य विवाद पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को अपना पक्ष रखा था। उन्होंने कहा कि कोई भी व्यक्ति खुद को शंकराचार्य नहीं लिख सकता और कानून से ऊपर कोई नहीं है, यहां तक कि मुख्यमंत्री भी नहीं। योगी ने कहा कि सनातन धर्म में शंकराचार्य का पद सर्वोच्च और पवित्र माना जाता है और इसकी अपनी परंपराएं व नियम हैं, जिनका पालन जरूरी है।

    उन्होने आरोप लगाया कि माघ मेले में जिस मुद्दे को लेकर विवाद बनाया गया, वह वास्तविक नहीं था बल्कि जानबूझकर माहौल खराब करने की कोशिश की गई। उन्होंने कहा कि मौनी अमावस्या पर साढ़े चार करोड़ श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने विशेष व्यवस्था बनाई थी और किसी को भी नियम तोड़ने की अनुमति नहीं दी जा सकती। योगी ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए पूछा कि अगर संबंधित व्यक्ति शंकराचार्य थे तो पूर्व में उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों की गई।

    'गेरुआ वस्त्र पहनने से कोई योगी नहीं बन जाता'
    वहीं समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री के बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि केवल गेरुआ वस्त्र पहनने या कान छिदवाने से कोई योगी नहीं बन जाता और संतों का सम्मान होना चाहिए। इस मुद्दे पर प्रदेश की राजनीति गरमा गई है।

     

  • कोरबा में सनसनी: पति ने पत्नी पर चापड़ से ताबड़तोड़ वार, बचाने आई मां-बहन भी घायल

    कोरबा में सनसनी: पति ने पत्नी पर चापड़ से ताबड़तोड़ वार, बचाने आई मां-बहन भी घायल

    कोरबा.

    शहर के कोतवाली थाना क्षेत्र स्थित सीतामणी वैष्णो दरबार बस्ती में घरेलू विवाद ने शनिवार को भयावह रूप ले लिया। एक युवक ने अपनी पत्नी को कमरे में बंद कर धारदार चापड़ से ताबड़तोड़ हमला कर दिया। पत्नी को बचाने पहुंची उसकी मां और बहन पर भी आरोपित ने वार कर दिया। तीनों महिलाएं गंभीर रूप से घायल हैं, जिनमें पत्नी की हालत नाजुक बताई जा रही है। घटना वैष्णो देवी मंदिर के पास स्थित बस्ती की है।

    पुलिस के अनुसार आरोपित रामेश्वर साहू का अपनी पत्नी सुकृता साहू से लंबे समय से विवाद चल रहा था। शनिवार को विवाद बढ़ने पर उसने पत्नी को कमरे के भीतर बंद कर दिया और दौड़ा-दौड़ाकर चापड़ से हमला करने लगा। घर से चीख-पुकार सुनकर आसपास के लोग सतर्क हो गए। इसी दौरान आरोपित की मां सावन साहू और बहन निर्मला साहू मौके पर पहुंचीं। दरवाजा नहीं खुलने पर खिड़की तोड़कर अंदर घुसीं, लेकिन आरोपित ने उन पर भी हमला कर दिया।

    हमले से घर में अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोगों ने तत्काल डायल 112 और कोतवाली पुलिस को सूचना दी। पुलिस मौके पर पहुंची और तीनों घायलों को उपचार के लिए अस्पताल भेजा। चिकित्सकों ने सुकृता साहू की स्थिति गंभीर बताई है। अन्य दोनों महिलाओं का भी इलाज जारी है। निर्मला साहू ने बताया कि वह घर के पास दुकान पर थी। शोर सुनकर पहुंची तो देखा कि उसका बड़ा भाई कमरे में बंद कर भाभी पर वार कर रहा था। काफी कोशिश के बाद भी दरवाजा नहीं खुला, तब खिड़की तोड़कर अंदर प्रवेश किया गया। बीच-बचाव के दौरान आरोपी ने उन पर भी चापड़ से हमला कर दिया।

    पहले भी जेल जा चुका है आरोपी

    पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपित पहले भी पत्नी से मारपीट के मामले में जेल जा चुका है। उस पर पत्नी के चरित्र पर संदेह करने और पैसों की मांग को लेकर विवाद करने के आरोप हैं। कोरबा सीएसपी प्रतीक चतुर्वेदी ने बताया कि आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है और उसके खिलाफ प्रकरण दर्ज कर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जा रही है। मामले की विस्तृत जांच जारी है।

     

  • भारत को बड़ी राहत: पाकिस्तान के खिलाफ मैदान में उतरेंगे अभिषेक शर्मा, कप्तान सूर्यकुमार का ऐलान

    भारत को बड़ी राहत: पाकिस्तान के खिलाफ मैदान में उतरेंगे अभिषेक शर्मा, कप्तान सूर्यकुमार का ऐलान

    कोलंबो

    पाकिस्तान के खिलाफ मुकाबले से पहले भारतीय प्रशंसकों के लिए खुशखबरी है। कप्तान सूर्यकुमार यादव ने इस बात की पुष्टि कर दी है कि अभिषेक शर्मा रविवार को कोलंबो में चिर-प्रतिद्वंदी टीम के खिलाफ खेलते नजर आएंगे। दरअसल, विस्फोटक बल्लेबाज हाल ही में नामीबिया के खिलाफ मैच में भारत की प्लेइंग 11 का हिस्सा नहीं बन पाए थे। उन्हें पेट में संक्रमण के कारण अस्पताल में भर्ती भी होना पड़ा था। हालांकि, उन्हें छुट्टी मिल गई थी।

    अभिषेक की होगी वापसी

    टी20 विश्व कप के हाई-वोल्टेज मुकाबले से पहले भारतीय कप्तान सूर्यकुमार यादव ने पुष्टि कर दी है कि इस मैच में अभिषेक शर्मा खेलते नजर आएंगे। उन्होंने कहा, 'अगर आप सब चाहते हैं कि अभिषेक शर्मा खेले तो हम उसे खिलाएंगे।' मौजूदा टूर्नामेंट में अभिषेक ने अब तक सिर्फ एक मैच खेला है। अमेरिका के खिलाफ वह खाता भी नहीं खोल पाए थे। वहीं, नामीबिया के खिलाफ वह खराब स्वास्थ्य के कारण शामिल नहीं हुए। अब वह पाकिस्तान के खिलाफ मैच में वापसी करेंगे।

    एशिया कप में पाकिस्तान के खिलाफ अभिषेक का प्रदर्शन

    अभिषेक ने पिछले साल एशिया कप में पाकिस्तान के खिलाफ दो टी20 मैचों में 31 और 74 रन बनाए थे, जबकि फाइनल में वह सिर्फ 5 रन पर आउट हुए थे। बावजूद इसके भारत ने दोनों मुकाबलों में जीत दर्ज की थी। कम समय में अभिषेक शर्मा भारत के उभरते हुए टी20 सितारे बन गए हैं। 39 मैचों में 1297 रन बनाते हुए उन्होंने दो शतक और आठ अर्धशतक लगाए हैं। उनका सर्वोच्च स्कोर 135 रन है, जो उन्होंने इंग्लैंड के खिलाफ वानखेड़े स्टेडियम में बनाया था।

  • लाडली बहना योजना की 33वीं किस्त जारी, 1.25 करोड़ महिलाओं के खातों में पहुंचे 1500 रुपये

    लाडली बहना योजना की 33वीं किस्त जारी, 1.25 करोड़ महिलाओं के खातों में पहुंचे 1500 रुपये

    खंडवा
    सीएम मोहन यादव ने लाड़ली बहना योजना की 33वीं किस्त के 1500 रुपए उनके खातों में ट्रांसफर कर दिए हैँ। ये राशि मोहन यादव ने एमपी के खंडवा की तहसील पंधाना से भेजे हैं। आपके मोबाइल पर मैसेज भी आया होगा। अगर नहीं तो ladli behna yojana portal पर जाकर आप खाते का अपडेट देख सकती हैं।

    इस बार इनके नहीं आएंगे 1500 रुपए
    हालांकि 14 फरवरी को उन लाड़ली बहनों के खाते में पैसे नहीं आएंगे, जिनके नाम से पूरे दस्तावेज नहीं हैं। उनके बैंक खाता आधार से लिंक नहीं है या समग्र आईडी डिलीट हो गई या फिर उनकी आयु 60 से पार हो चुकी है।
     
    255 करोड़ का भूमिपूजन और 354 करोड़ के कार्यों का लोकार्पण किया
    255 करोड़ के डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स का भूमि पूजन किया और 354 करोड़ के 11 पूरे हो चुके प्रोजेक्ट्स का उद्घाटन किया। इसके साथ ही 252 करोड़ की लागत से बनने वाले खंडवा नगर निगम के सीवरेज प्रोजेक्ट के साथ-साथ 2.90 करोड़ की लागत से बनने वाले पंधाना बस स्टैंड, शॉपिंग कॉम्प्लेक्स और 'रैन बसेरा' के निर्माण का भूमि पूजन किया।

    क्या है लाडली बहनों के लिए पात्रता?
        मध्यप्रदेश की स्थानीय निवासी हों
        विवाहित हो, जिनमें विधवा, तलाकशुदा एवं परित्यक्ता महिला भी सम्मिलित होंगी
        आवेदन के कैलेंडर वर्ष में, 01 जनवरी की स्थिति में 21 वर्ष पूर्ण कर चुकी हों तथा 60 वर्ष की आयु से कम हो।
        महिला का स्वयं का बैंक खाता होना अनिवार्य है, संयुक्त खाता मान्य नहीं होगा
        महिला के स्वयं के बैंक खाते मे आधार लिंक एवं डीबीटी सक्रिय होना चाहिए
        समग्र पोर्टल पर आधार के डाटा का ओटीपी या बायोमेट्रिक के माध्यम से वेरिफाई होना चाहिए

    कैसे चेक करें खाता?
    लाड़ली बहना योजना (Ladli Behna Yojana) की भुगतान स्थिति ऑनलाइन पोर्टल पर उपलब्ध है। पोर्टल पर जाकर 'आवेदन एवं भुगतान की स्थिति' विकल्प चुनें। फिर रजिस्ट्रेशन नंबर या समग्र आईडी डालें। ओटीपी भरने के बाद नवीनतम स्टेटस दिखाई देगा।

    लाड़ली बहना योजना के लिए जरूरी हैं ये डॉक्यूमेंट्स
        समग्र पोर्टल द्वारा जारी परिवार आईडी अथवा सदस्य आईडी
        UIDAI द्वारा जारी फोटो आईडी
        समग्र पोर्टल में दर्ज मोबाइल नंबर

    लाडली बहना योजना के लिए अपात्र हैं ये महिलाएं
        जिनके स्वयं/परिवार की सम्मिलित रूप से स्वघोषित वार्षिक आय 2.5 लाख से अधिक हो।
        जिनके स्वयं/परिवार का कोई भी सदस्‍य आयकरदाता हो।

        जिनके स्वयं/परिवार का कोई भी सदस्य भारत सरकार अथवा राज्‍य सरकार के शासकीय विभाग/ उपक्रम/ मण्‍डल/ स्‍थानीय निकाय में नियमित/स्‍थाईकर्मी/संविदाकर्मी के रूप में नियोजित हो अथवा सेवानिवृत्ति उपरांत पेंशन प्राप्त कर रहा हो।

    नए रजिस्ट्रेशन कब होंगे शुरू?
    महिलाओं के बीच यह सवाल बना हुआ है कि लाड़ली बहना योजना के नए रजिस्ट्रेशन (Ladli Behna Yojana) कब शुरू होंगे। यहां बता दें कि 2023 से नए फॉर्म भरने की प्रक्रिया बंद है और इस बार भी कोई अपडेट नहीं है। अधिकारियों के अनुसार नए रजिस्ट्रेशन की योजना फिलहाल शुरू नहीं होगी।

  • उस्मान तारिक बने पाकिस्तान का ‘ट्रंप कार्ड’, सलमान अली ने बॉलिंग एक्शन विवाद पर दिया करारा जवाब

    उस्मान तारिक बने पाकिस्तान का ‘ट्रंप कार्ड’, सलमान अली ने बॉलिंग एक्शन विवाद पर दिया करारा जवाब

    नई दिल्ली
    भारत और पाकिस्तान के बीच टी20 विश्व कप 202 का सबसे रोमांचक मुकाबला रविवार को कोलंबो के प्रेमदासा स्टेडियम में खेला जाएगा। भारतीय टीम इस मुकाबले के लिए पहुंच गई है और दोनों टीमें हाईवोल्टेज मुकाबले से पहले अपनी तैयारी में कोई भी कमी नहीं छोड़ना चाहती। पाकिस्तान द्वारा भारत के खिलाफ मुकाबले को बॉयकॉट करने के बाद मैच खेलने के लिए तैयार होने तक इस मुकाबले को लेकर काफी बवाल मच चुका है, हालांकि पाकिस्तान के स्पिनर उस्मान तारिक के गेंदबाजी एक्शन को लेकर चर्चा खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। पाकिस्तान के कप्तान सलमान अली आगा ने मैच की पूर्व संध्या पर अपने स्पिनर उस्मान का सपोर्ट करते हुए उन्हें टीम का ट्रंप कार्ड बताया है।

    पाकिस्तान के कप्तान सलमान अली आगा ने मैच से पहले कहा, ''उस्मान तारिक हमारे लिये ट्रंपकार्ड है । उसके एक्शन को लेकर बातों की हमें परवाह नहीं है। उस्मान के एक्शन को दो बार क्लीन चिट मिल गई है और मुझे समझ में नहीं आता कि इस पर बात क्यो हो रही है।''

  • आलीराजपुर में खौफनाक वारदात: चाय में कीटनाशक मिलाकर मां ने ली तीन बच्चों की जान

    आलीराजपुर में खौफनाक वारदात: चाय में कीटनाशक मिलाकर मां ने ली तीन बच्चों की जान

    आलीराजपुर.

    जिले में शुक्रवार शाम एक दिल दहला देने वाली घटना ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया। आंबुआ थाना क्षेत्र के ग्राम अडवाड़ा के माफीदार फलिया में 28 वर्षीय महिला ने अपने तीन मासूम बच्चों को चाय में कीटनाशक मिलाकर पिला दिया और बाद में स्वयं भी वही चाय पी ली। इस हृदय विदारक घटना में तीनों बच्चों की मौत हो गई, जबकि महिला की हालत गंभीर बनी हुई है।

    प्राप्त जानकारी के अनुसार, नूरीबाई पति मुकेश ने शुक्रवार को अपनी सात वर्षीय बेटी सावित्री, पांच वर्षीय बेटे कार्तिक और तीन वर्षीय बेटी दिव्या को चाय पिलाई। बताया जा रहा है कि चाय में कीटनाशक मिला हुआ था।

    कुछ ही देर में चारों की तबीयत बिगड़ने लगी। स्वजन तत्काल उन्हें जिला अस्पताल लेकर रवाना हुए, लेकिन रास्ते में ही सावित्री ने दम तोड़ दिया। जिला अस्पताल में प्राथमिक उपचार के बाद चिकित्सकों ने कार्तिक, दिव्या और नूरीबाई की हालत गंभीर देखते हुए उन्हें गुजरात के दाहोद रेफर किया।

    दाहोद ले जाते समय रास्ते में कार्तिक और दिव्या ने भी दम तोड़ दिया। जिला अस्पताल के चिकित्सक डॉ. आर. जमरा ने बताया कि अस्पताल लाए जाने के समय सभी की स्थिति अत्यंत गंभीर थी। प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर इलाज के लिए रेफर किया गया, लेकिन बच्चों को बचाया नहीं जा सका।

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    बड़ी बेटी को स्कूल नहीं भेजा, बेटे को खेत से बुलाया

    ग्रामीणों के अनुसार, शुक्रवार को बड़ी बेटी सावित्री को स्कूल नहीं भेजा गया था। वहीं दूसरा बेटा कार्तिक, जो अपने दादा के साथ खेत पर गया हुआ था, उसे भी मां ने घर बुला लिया था। इसके बाद दोपहर में चाय के साथ सभी ने जहर पी लिया। घटना के बाद गांव में तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं, हालांकि वास्तविक कारण अभी स्पष्ट नहीं हो पाया है।
    पति जामनगर में करता है मजदूरी

    घटना की सूचना मिलते ही पुलिस अधीक्षक रघुवंश सिंह मौके पर पहुंचे और हालात का जायजा लिया। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि महिला का पति मुकेश गुजरात के जामनगर में मजदूरी करता है।

    पुलिस द्वारा पूछताछ में मुकेश ने बताया कि 22 जनवरी को वह पत्नी और बच्चों को अडवाड़ा छोड़कर मजदूरी के लिए जामनगर चला गया था। उसने परिजनों से कहा था कि वह मजदूरी कर भगोरिया पर्व तक वापस लौट आएगा। मुकेश के अनुसार परिवार में ऐसा कोई विवाद नहीं था, जिससे उसकी पत्नी को इतना बड़ा कदम उठाना पड़े।

    महिला की हालत गंभीर, मर्ग कायम

    आम्बुआ चौकी प्रभारी मोहन डावर ने बताया कि महिला नूरीबाई की हालत अभी भी गंभीर बनी हुई है और उसका इलाज दाहोद में जारी है। मामले में मर्ग कायम कर लिया गया है। विवेचना के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि महिला ने यह कदम किन कारणों से उठाया।
    पुलिस की मौजूदगी में अंतिम संस्कार

    शनिवार को तीनों बच्चों का अंतिम संस्कार पुलिस की मौजूदगी में किया गया। मासूमों के शव देखकर स्वजन का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। पूरे गांव और आसपास के क्षेत्र में शोक और सन्नाटा पसरा रहा। घटना की खबर फैलते ही मातम छा गया और हर कोई इस हृदय विदारक घटना से स्तब्ध नजर आया। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की गंभीरता से जांच कर रही है। महिला के बयान और विस्तृत विवेचना के बाद ही घटना के पीछे के वास्तविक कारणों का खुलासा हो सकेगा।

     

  • वैश्विक तनाव के दौर में भारत बना भरोसेमंद साथी, यूरोप-कनाडा ने बढ़ाई साझेदारी

    वैश्विक तनाव के दौर में भारत बना भरोसेमंद साथी, यूरोप-कनाडा ने बढ़ाई साझेदारी

    असम  
    तेजी से बदलते वैश्विक हालात में भारत यूरोप और कनाडा के लिए एक अहम आर्थिक और रणनीतिक साझेदार बनकर उभर रहा है। अमेरिका, चीन और रूस के बीच बढ़ती टकरावपूर्ण राजनीति ने ब्रसेल्स और ओटावा को मजबूर कर दिया है कि वे अपनी अर्थव्यवस्थाओं को “डी-रिस्क” करने के लिए भारत के साथ रिश्ते और गहरे करें। हाल ही में Donald Trump और Narendra Modi के बीच हुए बहुप्रतीक्षित व्यापार समझौते ने अमेरिका-भारत संबंधों में आई गिरावट को थामने का काम किया है। इस समझौते के तहत अमेरिका ने भारतीय वस्तुओं पर ‘रेसिप्रोकल टैरिफ’ 25% से घटाकर 18% करने पर सहमति जताई, जबकि भारत ने अमेरिकी निर्यात पर शुल्क और गैर-शुल्क बाधाएं कम करने का वादा किया।

    हालांकि ट्रंप ने इस डील को भू-राजनीतिक रंग देते हुए दावा किया कि भारत रूसी तेल खरीदना बंद करेगा और अमेरिका से ऊर्जा खरीदेगा। प्रधानमंत्री मोदी ने इस दावे की न तो पुष्टि की और न ही खंडन। विशेषज्ञों का मानना है कि यह चुप्पी रणनीतिक थी, क्योंकि भारत किसी बड़े ऊर्जा पुनर्संयोजन में खुद को बांधना नहीं चाहता।इस डील का समय भी बेहद अहम है। इसके ठीक पहले भारत और European Union के बीच 25 साल से अटके मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर सहमति बनी। इस समझौते से दुनिया के सबसे बड़े व्यापारिक ब्लॉकों में से एक का निर्माण होगा। माना जा रहा है कि यह सफलता भारत-EU उत्साह से ज्यादा ट्रंप के टैरिफ दबाव और यूरोप के साथ उनके टकरावपूर्ण रवैये का नतीजा थी।
     
    यूरोप आज दुविधा में है। एक ओर अमेरिका की अनिश्चित नीतियां और टैरिफ धमकियां हैं, तो दूसरी ओर China के साथ बढ़ते रिश्तों से जुड़ी सुरक्षा और मानवाधिकार संबंधी चिंताएं। यूरोपीय नेता चीन से व्यापार बढ़ाने को लेकर घरेलू आलोचना झेल रहे हैं, जहां उन्हें मुनाफे के लिए लोकतांत्रिक मूल्यों से समझौते का आरोपी ठहराया जा रहा है। इसी बीच, यूरोप ने भारत को एक “तीसरे विकल्प” के रूप में देखना शुरू किया है ऐसा विकल्प जो चीन जैसी राजनीतिक बोझिलता के बिना विशाल बाजार और उत्पादन क्षमता देता है।

    यही सोच कनाडा में भी दिख रही है। प्रधानमंत्री Mark Carney के नेतृत्व में कनाडा अपनी रणनीति को विविध बना रहा है, ताकि वह वाशिंगटन और बीजिंग के बीच संतुलन बना सके। भारत के साथ बढ़ते रिश्ते इस नई नीति का अहम हिस्सा बनते जा रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, भारत अब न सिर्फ एक उभरती अर्थव्यवस्था है, बल्कि एक स्थिर और भरोसेमंद साझेदार भी है जो यूरोप और कनाडा को वैश्विक अस्थिरता के दौर में आर्थिक सुरक्षा प्रदान कर सकता है।