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  • असम चुनाव से पहले हिमंता का बड़ा कदम, लाखों महिलाओं के खाते में कैश और नौकरियों में आरक्षण का ऐलान

    असम चुनाव से पहले हिमंता का बड़ा कदम, लाखों महिलाओं के खाते में कैश और नौकरियों में आरक्षण का ऐलान

    गुवाहाटी
     असम में विधानसभा चुनावों की आहट के साथ ही सियासत गर्मा गई है. मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने राज्य की जनता के लिए बड़ी घोषणाओं की झड़ी लगा दी है.  असम कैबिनेट की बैठक में कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए, जिन्हें चुनाव से पहले सरकार का सबसे बड़ा कार्ड माना जा रहा है. सरकार ने ‘मुख्यमंत्री महिला उद्यमिता योजना’ का दायरा बढ़ाते हुए इसमें 1 लाख से ज्यादा नए लाभार्थियों को जोड़ने का फैसला किया है. इसके अलावा आदिवासी और चाय बागान समुदाय के लोगों के लिए सरकारी नौकरियों में आरक्षण का रास्ता भी साफ कर दिया गया है.

    महिलाओं के खाते में सीधे पहुंचेगा पैसा, क्या है सरकार की स्कीम?

    असम सरकार की ‘मुख्यमंत्री महिला उद्यमिता योजना’ राज्य में काफी लोकप्रिय हो रही है. इस योजना के तहत राज्य की 32 लाख महिलाओं को पहले ही 10,000 रुपये की पहली किस्त मिल चुकी है. मुख्यमंत्री ने बताया कि कुछ पात्र महिलाएं इस फंड से वंचित रह गई थीं. इसी को देखते हुए कैबिनेट ने आज 1,03,500 नई लाभार्थियों को जोड़ने की मंजूरी दी है. बिहार, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र की कैश ट्रांसफर योजनाओं की तर्ज पर असम की यह स्कीम भी महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए शुरू की गई है. जानकारों का मानना है कि चुनाव से ठीक पहले इतनी बड़ी संख्या में महिलाओं को कैश देना वोट बैंक को साधने की एक बड़ी कोशिश है.

    नौकरियों में 3 प्रतिशत आरक्षण और नए सैनिक स्कूल की सौगात

    हिमंता कैबिनेट ने केवल महिलाओं के लिए ही नहीं, बल्कि आदिवासी और चाय बागान समुदायों के लिए भी बड़ा फैसला लिया है. अब राज्य की सरकारी नौकरियों (ग्रेड 1 और ग्रेड 2) में इन समुदायों के लिए 3 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित किया गया है. चाय बागान समुदाय असम की राजनीति में एक निर्णायक भूमिका निभाता है. ऐसे में यह आरक्षण चुनावी गणित को बदलने की ताकत रखता है. साथ ही कैबिनेट ने कार्बी आंगलोंग के लांगवोकु क्षेत्र में राज्य का दूसरा सैनिक स्कूल बनाने के लिए 335 करोड़ रुपये के फंड को भी हरी झंडी दिखा दी है.

    असम बना देश का सबसे तेजी से बढ़ने वाला राज्य

    असम की वित्त मंत्री अजंता नियोग ने विधानसभा में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 62,294.78 करोड़ रुपये का अंतरिम बजट (लेखानुदान) पेश किया. बजट भाषण के दौरान उन्होंने आरबीआई के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि असम इस समय देश का सबसे तेजी से बढ़ने वाला राज्य है. उन्होंने दावा किया कि राज्य की प्रति व्यक्ति आय पिछले पांच वर्षों में दोगुनी से भी अधिक हो गई है. साल 2020-21 में यह 86,947 रुपये थी, जो 2025-26 में बढ़कर 1,85,429 रुपये पहुंच गई है. यह 113 प्रतिशत की जबरदस्त बढ़ोतरी है. सरकार का लक्ष्य असम को 2028 तक 10 लाख करोड़ रुपये की अर्थव्यवस्था बनाना है.

    चुनाव आयोग की तैयारी और राजनीतिक दलों की मांग

    एक तरफ सरकार घोषणाएं कर रही है, तो दूसरी तरफ चुनाव आयोग ने भी कमर कस ली है. मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की अगुवाई में आयोग की टीम असम के दौरे पर है. मंगलवार को सभी प्रमुख राजनीतिक दलों ने चुनाव आयोग से मुलाकात की. कांग्रेस, बीजेपी और आम आदमी पार्टी समेत कई दलों ने मांग की है कि असम में चुनाव एक या अधिकतम दो चरणों में कराए जाएं. इसके साथ ही दलों ने सुझाव दिया है कि चुनाव की तारीखें तय करते समय बिहू त्योहार का खास ख्याल रखा जाए. वर्तमान विधानसभा का कार्यकाल 20 मई को समाप्त हो रहा है, ऐसे में मार्च या अप्रैल में चुनाव होने की पूरी संभावना है.

  • 900 अतिथि शिक्षकों को बड़ा झटका, आरक्षण नहीं मिलेगा, नौकरी की उम्मीदें टूटीं

    900 अतिथि शिक्षकों को बड़ा झटका, आरक्षण नहीं मिलेगा, नौकरी की उम्मीदें टूटीं

    भोपाल 

    मध्यप्रदेश के सरकारी आइटीआई संस्थानों में लंबे समय से कार्यरत लगभग 900 अतिथि शिक्षक भर्ती प्रक्रिया को लेकर परेशान हैं। विभाग ने 1120 प्रशिक्षण अधिकारी (टीओ) पदों पर भर्ती निकली है, इस सीधी नियमित भर्ती में उन्हें न आरक्षण मिला, न अनुभव का लाभ और न ही आयु सीमा में छूट दी गई है।

    इन शिक्षकों में कई ऐसे हैं जो 10 से 15 वर्षों से न्यूनतम मानदेय पर सेवाएं दे रहे हैं। उनका कहना है कि जब विभाग में नियमित स्टाफ की कमी थी, तब उन्होंने संस्थानों को संभाला। अब जब स्थायी नियुक्ति का अवसर आया, तो उन्हें सामान्य अभ्यर्थियों की तरह प्रतिस्पर्धा में खड़ा कर दिया गया है।

    अलग नीति अपना रही सरकार

    कई शिक्षक आयु सीमा पार करने की स्थिति में हैं, जिससे उनकी नौकरी की उम्मीद लगभग खत्म हो गई है। अतिथि शिक्षकों का आरोप है कि सरकार अन्य विभागों में अलग नीति अपना रही है। स्कूल शिक्षा विभाग में अतिथि शिक्षकों को 50 प्रतिशत आरक्षण दिया जा रहा है, जबकि उच्च शिक्षा में 25 प्रतिशत आरक्षण और अनुभव के अंक का प्रावधान है।

    लेकिन आईटीआई अतिथि शिक्षकों को ऐसा कोई लाभ नहीं मिला। तत्कालीन मंत्री यशोधरा राजे ङ्क्षसधिया के समय प्रस्तावित 'संविदा नीति' आज तक लागू नहीं हो सकी। वर्तमान मंत्री गौतम टेटवाल से भी संगठन कई बार मिल चुका है।

    उच्च शिक्षा विभाग में भी यही हाल

    इधर उच्च शिक्षा विभाग के कॉलेज में कार्यरत अतिथि विद्वानों की स्थिति भी कुछ ऐसी ही है। जिन कॉलेजों में सहायक प्राध्यापकों की नियुक्ति हो रही है उनसे अतिथि विद्वानों को बाहर कर दिया गया है। जबकि उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने किसी भी अतिथि विद्वान को बाहर न करने की घोषणा की थी हरियाणा मॉडल पर नियम तैयार कर इनको नियमित करने की बात भी कही गई थी। स्थिति यह है कि अब तक 100 से अधिक अतिथि विद्वान सेवा से बाहर हो चुके हैं लेकिन अन्य कॉलेजों में नियुक्ति नहीं दी गई।

  • YouTube सर्वर डाउन: भारत सहित कई देशों में यूज़र्स परेशान

    YouTube सर्वर डाउन: भारत सहित कई देशों में यूज़र्स परेशान

     नई दिल्ली

    YouTube की सर्विस अचानक से कई देशों में ठप हो गई है. डाउनडिटेक्टर ने भी इसकी जानकारी दी है और लाखों लोगों ने इसकी रिपोर्ट भी की है. जब लोगों ने Youtube पर विजिट किया तो वह उसकी सर्विस को एक्सेस नहीं कर पा रहे हैं, जिसके बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर भी इसकी जानकारी शेयर की है. अमेरिका में 3 लाख से ज्यादा लोगों ने डाउन डिटेक्टर पर इसकी रिपोर्ट की है. 

    यूट्यूब होमपेज डाउनलोड नहीं हो रहा है और उनको ये मैसेज दिखा रहा है, जिसका स्क्रीनशॉट हमने नीचे शेयर किया है. भारत, ब्रिटेन और अमेरिका समेत कई देशों में Youtube प्रभावित हुआ है. 

    Youtube ने किया पोस्ट 

    Youtube की सर्विस ठप होने के बाद कंपनी ने इसको लेकर X प्लेटफॉर्म (पुराना नाम Twitter) पर पोस्ट किया है. कंपनी ने बताया है अगरआपको अभी भी यूट्यूब की सर्विस एक्सेस करने में परेशानी हो रही है तो आप अकेले नहीं है. कंपनी जल्द ही इस प्रॉब्लम को सॉल्व करेगी, उनकी टीम इसपर काम कर रही है.  

    दुनियाभर के पोर्टल की सर्विस और आउटेज को ट्रैक करने वाली वेबसाइट डाउनडिटेक्टर ने भी Youtube Down होने की जानकारी दी है. यह प्रॉब्लम पोर्टल और ऐप दोनों पर सामने आई है. इसकी वजह से वीडियो स्ट्रीमिंग को लेकर बड़ी समस्या हो रही है.

    गूगल का Youtube दुनियाभर में पॉपलर है. इसका इस्तेमाल एंटरटेनमेंट से लेकर भजन आदि सुनने में भी किया जाता है. बहुत से स्टूडेंट Youtube की मदद से पढ़ाई भी करते हैं. ऐसे में सर्विस ठप होने की वजह से उन लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है. 

    सोशल मीडिया पर छाया ट्रेंड
    Youtube की सर्विस ठप होने के बाद X प्लेटफॉर्म पर बहुत से यूजर्स ने पोस्ट किया. इसके बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर #YouTubeDOWN ट्रेंड करने लगा. कई यूजर्स ने स्क्रीनशॉट्स शेयर किया. किसी ने कहा कि आज सुबह Youtube भी देर से सुबह है तो किसी ने इस जल्द ठीक करने का रिक्वेस्ट की. 

  • पहाड़ों में बदला मिजाज, गर्मी के बीच बारिश और बर्फबारी के संकेत

    पहाड़ों में बदला मिजाज, गर्मी के बीच बारिश और बर्फबारी के संकेत

    शिमला
     हिमाचल प्रदेश में मौसम बदलने वाला है. प्रदेश में जहां दोपहर तक बादल छाए रहे. लेकिन दोपहर बाद धूप निकल आई. मौसम विभाग ने 17 और18 फरवरी को प्रदेश में बारिश और बर्फबारी के आसार जताए हैं. हालांकि,कोई अलर्ट जारी नहीं किया है.

    मौसम विज्ञान के शिमला केंद्र ने दोपहर को जारी बुलेटिन में बताया कि पश्चिमी विक्षोभ एक्टिव हो रहा है और इसका असर पंजाब और आसपास के इलाकों में देखने को मिलेगा. विभाग ने बताता किया पश्चिमी विक्षोभ के चलते दक्षिण-पूर्व पाकिस्तान और आसपास के इलाकों में भी मौसम बदलने के आसार हैं और ऐसे में हिमाचल प्रदेश के ऊँचे पहाड़ी क्षेत्रों में 17 और 18 फरवरी को कुछ स्थानों पर हल्की बारिश और बर्फबारी की संभावना है. हालांकि, अगले सात दिन तक राज्य में मौसम शुष्क रहने की संभावना है. मौसम विभाग ने बताया कि अगले 3–4 दिनों के दौरान अधिकतम और न्यूनतम तापमान में कोई बड़ा बदलाव होने की संभावना नहीं है.

    चढ़ने लगा है पारा

    हिमाचल प्रदेश में अब दिन के समय तेज धूप खिल रही है. ऐसे में प्रदेश में पारा भी चढ़ने लगा है. उधऱ ज्यादातर स्थानों पर अधिकतम तापमान सामान्य से 4 से 7 डिग्री सेल्सियस अधिक दर्ज किया गया है. सुबह और शाम को हल्की ठंड महसूस हो रही है. लेकिन वैसे मौसम सुहावना बना हुआ है.

    इस बार कम बारिश हुई

    हिमाचल प्रदेश में विंटर सीजन में इस बार कम बारिश और बर्फबारी हुई. प्रदेश में चुनिंदा ही स्पेल देखने को मिले. अक्तूबर 2025 के बाद सीधे नए साल पर ही बारिश और बर्फबारी देखने को मिली. हालांकि, बीच में जोरदार बारिश और बर्फबारी एक स्पेल में हुई थी. मौसम विभाग ने बताया कि विंटर सीजन में इस बार सामान्य से 27 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई है. चंबा में सामान्य से 45 फीसदी कम बादल बरसे हैं. इसी तरह, कांगड़ा में 24 फीसदी, किन्नौर में 59, कुल्लू में 10, लाहौल-स्पीति में 26, मंडी में 2, शिमला में 30 और सिरमौर में 6 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई. ऊना में 51 फीसदी अधिक बारिश दर्ज की गई है.

  • बांधवगढ़ में 4100 कुओं पर मुंडेर का निर्माण, वन्यजीवों की मौत से लिया सबक, प्रशासन और टाइगर रिजर्व की पहल

    बांधवगढ़ में 4100 कुओं पर मुंडेर का निर्माण, वन्यजीवों की मौत से लिया सबक, प्रशासन और टाइगर रिजर्व की पहल

    उमरिया

    उमरिया स्थित विश्व प्रसिद्ध बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए एक बड़ा कदम उठाया गया है। जिला प्रशासन और टाइगर रिजर्व प्रबंधन ने रिजर्व क्षेत्र के नौ परिक्षेत्रों में लगभग 4,100 खुले कुओं पर मुंडेर (सुरक्षा दीवार) बनाने का काम की शुरुआत हो गई है। 

    वन क्षेत्र और उससे सटे ग्रामीण इलाकों में स्थित इन खुले कुओं में अक्सर जंगली जानवर और कभी-कभी ग्रामीण भी गिर जाते हैं। धमोखर परिक्षेत्र सहित कई इलाकों से ऐसी घटनाएं सामने आती रही हैं। हाल ही में जनवरी माह में धमोखर के रायपुर क्षेत्र में एक बाघ के कुएं में गिरने से मौत हो गई थी, जिसके बाद इस अभियान को और तेज किया गया।

    टाइगर रिजर्व के कोर और बफर दोनों क्षेत्रों में चिन्हित कुओं पर मुंडेर निर्माण का काम शुरू हो चुका है। अधिकारियों और कर्मचारियों की टीमें गांव-गांव जाकर बिना मुंडेर वाले कुओं का सर्वे कर रही हैं और प्राथमिकता के आधार पर निर्माण कार्य करा रही हैं।

    वन्यजीव फोटोग्राफर चेतन घारपुरे ने इस पहल को सराहनीय बताया। उन्होंने कहा कि बिना मुंडेर वाले कुओं में वन्य प्राणियों के साथ-साथ ग्रामीणों के गिरने का भी खतरा बना रहता है। कुओं पर मजबूत मुंडेर बनने से वन्यजीव और मानव दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी।

    जिला प्रशासन और टाइगर रिजर्व प्रबंधन का लक्ष्य है कि चिन्हित सभी कुओं पर चरणबद्ध तरीके से मुंडेर निर्माण पूरा कर पूरे क्षेत्र को वन्यजीवों और स्थानीय निवासियों के लिए सुरक्षित बनाया जाए।

  • बिना इंटरनेट चलेगा स्वदेशी AI ‘Sarvam’, Google Gemini और ChatGPT को दी टक्कर का दावा

    बिना इंटरनेट चलेगा स्वदेशी AI ‘Sarvam’, Google Gemini और ChatGPT को दी टक्कर का दावा

     नई दिल्ली 

    India AI Impact Summit के दौरान Sarvam AI का नाम तेजी से सामने आया है. वजह है कंपनी का नया प्लेटफॉर्म Sarvam Edge. इसे ऑन-डिवाइस AI के तौर पर पेश किया गया है.

    आसान शब्दों में कहें तो यह AI आपके मोबाइल और लैपटॉप पर बिना इंटरनेट के भी चल सकता है. मतलब हर सवाल या कमांड के लिए डेटा क्लाउड पर भेजने की जरूरत नहीं होगी. प्रोसेसिंग डिवाइस के अंदर ही होगी.

    यह आइडिया नया नहीं है, लेकिन भारत जैसे देश में यह काफी प्रैक्टिकल हो सकता है. यहां हर जगह तेज और स्टेबल इंटरनेट नहीं मिलता. ऐसे में ऑफलाइन या लो-इंटरनेट पर चलने वाला AI ज्यादा काम का साबित हो सकता है.

    Sarvam Edge क्या करता है और किसके लिए बना है
    Sarvam Edge का फोकस रोजमर्रा के बेसिक AI कामों पर है. जैसे वॉइस को टेक्स्ट में बदलना. टेक्स्ट को दूसरी भाषा में ट्रांसलेट करना. और कुछ लिमिटेड AI असिस्टेंट टास्क.

    कंपनी भारतीय भाषाओं पर ज्यादा काम कर रही है. इसलिए इसका इस्तेमाल उन यूजर्स के लिए ज्यादा फायदेमंद हो सकता है जो हिंदी या दूसरी लोकल लैंग्वेज में काम करते हैं.

    ऑन-डिवाइस होने का एक फायदा प्राइवेसी से जुड़ा है. यूजर का डेटा बाहर सर्वर पर नहीं जाता. सब कुछ फोन या लैपटॉप में ही प्रोसेस होता है. हालांकि इसका दूसरा पहलू भी है. अगर डिवाइस पुराना है या कमजोर हार्डवेयर है तो परफॉर्मेंस और बैटरी पर असर पड़ सकता है.

    ChatGPT से तुलना, दोनों का अप्रोच अलग है
    ChatGPT क्लाउड पर चलने वाला बड़ा AI मॉडल है. यह इंटरनेट के जरिए काम करता है. इसकी ताकत यह है कि यह काफी जटिल सवालों को हैंडल कर सकता है. लॉन्ग कन्वर्सेशन कर सकता है. और कई टॉपिक्स पर डीप जवाब देता है.

    Sarvam Edge का अप्रोच अलग है. यह छोटे और हल्के मॉडल पर काम करता है. इसका मकसद हर तरह का जनरल AI बनना नहीं है. बल्कि कुछ खास टास्क को लोकल लेवल पर आसान बनाना है. जहां इंटरनेट नहीं है या स्लो है, वहां यह ज्यादा काम का हो सकता है.

    सीधी भाषा में कहें तो ChatGPT ज्यादा पावरफुल है, लेकिन Sarvam Edge ज्यादा प्रैक्टिकल कंडीशन को टारगेट करता है. दोनों का यूज-केस अलग है.

    Google Gemini से तुलना, स्केल और टारगेट में फर्क
    Google Gemini भी क्लाउड बेस्ड AI सिस्टम है. यह बड़े डेटा सेंटर पर चलता है. Gemini का फोकस मल्टीमॉडल AI पर है. यानी टेक्स्ट, इमेज और दूसरी चीजों को एक साथ समझना. यह हाई-एंड यूजर्स और कंपनियों के लिए ज्यादा डिजाइन किया गया है.

    Sarvam Edge यहां भी अलग रास्ता लेता है. इसका स्केल छोटा है. लेकिन टारगेट ज्यादा ग्राउंड लेवल यूजर हैं. खासकर वे लोग जो लोकल लैंग्वेज में काम करते हैं. और जिनके पास हर समय तेज इंटरनेट नहीं होता.

    इसलिए Gemini और Sarvam Edge को सीधा कंपटीटर कहना सही नहीं होगा. दोनों अलग जरूरतों को पूरा करते हैं.

    भारत के AI इकोसिस्टम में Sarvam की जगह
    भारत सरकार IndiaAI Mission के जरिए लोकल AI को बढ़ावा देने की बात कर रही है. Sarvam AI जैसे स्टार्टअप इसी इकोसिस्टम का हिस्सा हैं. इनका फोकस भारत के यूज-केस पर है. खासकर भाषा और एक्सेस से जुड़े मुद्दों पर.

    फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि Sarvam Edge भारत का ChatGPT बन गया है. अभी यह एक शुरुआती स्टेज का प्रोडक्ट है. असली तस्वीर तब साफ होगी जब ज्यादा लोग इसे अपने फोन और लैपटॉप पर इस्तेमाल करेंगे. और देखा जाएगा कि रियल लाइफ में यह कितना स्टेबल और काम का है.

    Sarvam AI का दावा, Gemini और ChatGPT से बेहतर कहां और क्यों
    Sarvam AI की टीम यह कह रही है कि उनके कुछ मॉडल भारत से जुड़े टास्क में Gemini और ChatGPT से बेहतर रिजल्ट दे रहे हैं. यह दावा जनरल AI पर नहीं है. कंपनी खास टास्क की बात कर रही है. जैसे इंडियन लैंग्वेज टेक्स्ट पढ़ना.

    पुराने डॉक्युमेंट समझना. और OCR जैसे काम. Sarvam का कहना है कि इन केस में उनके मॉडल ज्यादा सही आउटपुट दे रहे हैं. खासकर तब जब इनपुट में हिंदी, दूसरी लोकल भाषाएं या हिंग्लिश हो.

    यह दावा कहां तक सही है और इसकी लिमिट क्या है
    यह समझना जरूरी है कि यह तुलना हर तरह के AI काम पर लागू नहीं होती. Sarvam के दावे कुछ लिमिटेड बेंचमार्क और उनके अपने टेस्ट पर बेस्ड हैं. यह नहीं कहा जा सकता कि Sarvam हर मामले में Gemini या ChatGPT से बेहतर है.

    जनरल सवाल-जवाब, लॉन्ग चैट या बड़े नॉलेज टास्क में ग्लोबल मॉडल अब भी ज्यादा आगे हैं. Sarvam का स्ट्रॉन्ग पॉइंट लोकल यूज-केस है. खासकर इंडियन लैंग्वेज और लोकल कंटेंट से जुड़े काम.

  • चारधाम यात्रा में लग सकता है रजिस्ट्रेशन शुल्क, कमेटी जल्द सरकार को देगी रिपोर्ट

    चारधाम यात्रा में लग सकता है रजिस्ट्रेशन शुल्क, कमेटी जल्द सरकार को देगी रिपोर्ट

    देहरादून
    उत्तराखंड की विश्वप्रसिद्ध चार धाम यात्रा (Char Dham Yatra) से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है. राज्य सरकार चारधाम यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं से रजिस्ट्रेशन शुल्क लेने पर विचार कर रही है. इस प्रस्ताव पर अंतिम फैसले से पहले डिटेल्‍ड अध्ययन के लिए कमेटी गठित कर दी गई है. गढ़वाल मंडल के कमिश्नर विनय शंकर पांडेय की अध्यक्षता में बनी यह कमेटी अलग-अलग पक्षों से राय लेकर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी. कमेटी यह तय करेगी कि शुल्क लिया जाए या नहीं और अगर लिया जाए तो उसकी रकम कितनी हो. आखिरी फैसला राज्य सरकार द्वारा लिया जाएगा.

    स्टेकहोल्डर्स से हुई विस्तृत बातचीत
    दरअसल, पिछले कुछ दिनों से इस विषय पर मंथन चल रहा था. चारधाम यात्रा से जुड़े विभिन्न स्टेकहोल्डर्स जैसे होटल व्यवसायी, तीर्थ पुरोहित, स्थानीय व्यापारी और अन्य संबंधित पक्षों से अलग-अलग चरणों में बातचीत की गई. इन्हीं चर्चाओं के बाद रजिस्ट्रेशन शुल्क के प्रस्ताव को सैद्धांतिक रूप से हरी झंडी मिली है.

    क्या है शुल्क लगाने के पीछे तर्क?
    सरकार की ओर से जो तर्क सामने आया है उसके मुताबिक, यात्रा के दौरान अवांछित तत्वों पर निगरानी मजबूत की जा सके. केवल गंभीर और वास्तविक श्रद्धालु ही यात्रा के लिए पंजीकरण कराएं. ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को ज्‍यादा सुव्यवस्थित और जिम्मेदार बनाया जा सके. भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था को और प्रभावी किया जा सके. इस मकसद के साथ शुल्‍क लगाने के बारे में विचार किया जा रहा है.

    हर वर्ष लाखों श्रद्धालु चारधाम यात्रा में शामिल होते हैं. अब ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन जरूरी होने के बाद प्रशासन यात्रा प्रबंधन को और बेहतर बनाने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है. कमेटी अपनी विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर राज्य सरकार को सौंपेगी. इसके बाद ही यह तय होगा कि रजिस्ट्रेशन शुल्क लागू किया जाएगा या नहीं और उसकी दर क्या होगी?

  • PhD छात्रों को बड़ी राहत: अब हर यूनिवर्सिटी को जारी करना होगा ‘पीएचडी कैलेंडर’

    PhD छात्रों को बड़ी राहत: अब हर यूनिवर्सिटी को जारी करना होगा ‘पीएचडी कैलेंडर’

    भोपाल 

     अब हर विश्वविद्यालय को यूजी-पीजी की तरह पीएचडी कैलेंडर भी अपनी वेबसाइट पर सार्वजनिक करना होगा। इसका उद्देश्य है प्रवेश प्रक्रिया में पारदर्शिता लाना और छात्रों को समय पर सही जानकारी उपलब्ध कराना। अब तक स्थिति यह थी कि कई विश्वविद्यालय पीएचडी की तारीखें, सीटों की संख्या और पात्रता शर्तें सार्वजनिक नहीं करते थे। कई बार सीटें होते हुए भी यह बताया जाता था कि उम्मीदवार नहीं मिले।

    उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने यूजीपीजी की पीएचडी की जानकारी भी वेबसाइट पर अपलोड करने के निर्देश दिए हैं। सूत्रों के अनुसार, कुछ विश्वविद्यालयों में पसंदीदा अभ्यर्थियों के लिए रास्ता आसान करने के आरोप भी लगते रहे हैं। जब प्रवेश प्रक्रिया की स्पष्ट समय-सीमा नहीं होती, तो इंटरव्यू, वेटेज और पात्रता के नियम भी मनमाने ढंग से लागू किए जाते थे। यही कारण है कि कई सरकारी विश्वविद्यालयों में पीएचडी सीटें खाली रह जाती हैं।

    कई विषयों में आधी से ज्यादा सीटें खाली

    बीयू में करीब 40 विषयों में पीएचडी की कुल 2,379 सीटें हैं। जुलाई में शुरू हुई प्रवेश प्रक्रिया के दौरान केवल नेट स्कोर को पात्र मानने की वजह से कई विषय में आधी से अधिक सीटें खाली रह गईं हैं। इसके लिए बीयू ने नवंबर में एक बार फिर अभ्यर्थियों को मौका दिया, लेकिन एंट्रेंस टेस्ट नहीं लिया। इस बार भी नेट क्वालिफाई को ही मौका दिया गया। स्थिति यह है कि किस विषय में कितनी सीटें खाली हैं स्थिति क्या है। यह जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।

    पीएचडी में नहीं चलेगा AI से कॉपी-पेस्ट!

    पीएचडी करने वाले स्टूडेंट्स को जानकारी के लिए बता दें कि बीते दिनों पहले यूनियन ग्रांट कमीशन (UGC) ने कई रिसर्च थीसिस को वापस किया है जिनमें AI से लिखा गया कंटेंट पाया गया। बिहार की एक यूनिवर्सिटी से दर्जनों छात्रों की पीएचडी थीसिस यूजीसी को भेजी थी, जिनमें ये गड़बड़ियां पाईं गई।

    यूनिवर्सिटी से भेजी गई रिसर्च थीसिस में यूजीसी के चेक करने पर 40 प्रतिशत से ज्यादा कंटेंट चोरी का पाया गया। यूजीसी ने इसको वापस कर दिया है। बताया गया है कि सबसे ज्यादा इंग्लिश भाषा में सबमिट हुई थीसिस में एआई कंटेंट पाया गया है। हिंदी में जमा की गईं थीसिस में ज्यादा गड़बड़ी नहीं पाई गईं हैं।

  • ऋतेश्वर महाराज ने की योगी आदित्यनाथ की सराहना, बोले—योगी राज में यूपी हुआ भयमुक्त

    ऋतेश्वर महाराज ने की योगी आदित्यनाथ की सराहना, बोले—योगी राज में यूपी हुआ भयमुक्त

    सतना
     प्रसिद्ध कथावाचक और आध्यात्मिक गुरु संत ऋतेश्वर धारकुंडी आश्रम जाने से पूर्व सतना जिले की धर्मनगरी चित्रकूट पहुंचे है। उनके साथ भारतीय कुश्ती संघ के पूर्व अध्यक्ष और पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह भी मौजूद रहे। चित्रकूट प्रवास के दौरान उन्होंने मीडिया से खुलकर बातचीत की और उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था, संतों के बीच चल रहे वैचारिक मतभेदों और देश के सामाजिक मुद्दों पर अपनी बेबाक राय रखी। वे यहां से सतना जिले के धारकुंडी आश्रम के लिए रवाना हुए, जहां उन्होंने ब्रह्मलीन परमहंस स्वामी सच्चिदानंद जी महाराज की समाधि पर श्रद्धांजलि अर्पित की।

    जमकर की CM योगी की तारीफ
    उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था पर बोलते हुए ऋतेश्वर महाराज ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा योगी आदित्यनाथ एक संत-महंत भी हैं और एक कुशल प्रशासक भी। उनके नेतृत्व में उत्तर प्रदेश को भयमुक्त वातावरण मिला है, इस सच से कोई इनकार नहीं कर सकता। एक सन्यासी जब सत्ता संभालता है, तो वह राजधर्म का पालन पूरी निष्ठा से करता है।

    'वादे वादे जायते बोध:'
    हाल के दिनों में संतों के बीच विभिन्न मुद्दों पर चल रही बयानबाजी और मतभिन्नता पर ऋतेश्वर महाराज ने बहुत ही संतुलित और शास्त्र सम्मत जवाब दिया। उन्होंने संस्कृत के सूत्र 'वादे वादे जायते बोध:' का उदाहरण देते हुए कहा कि मैं इसे विवाद के रूप में नहीं, बल्कि वाद के रूप में देखता हूं। संवाद और चर्चा से ही तत्व का बोध होता है। अगर संतों के बीच किसी बात को लेकर मतभिन्नता है, तो उस मंथन से सनातन धर्म के लिए सुखद और सकारात्मक परिणाम ही निकलेंगे।

    यूजीसी को क्या बोले संत रितेश्वर
    यूजीसी के संदर्भ में पूछे गए सवाल और सामाजिक कानूनों पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि देश का बहुसंख्यक समाज शांतिप्रिय है और एक गांव की तरह मिलजुल कर रहना चाहता है। उन्होंने कहा कि मैंने देखा है कि अगर कोई गलत फैसला आता है, तो समाज सामूहिक रूप से उसका विरोध करता है। मुझे विश्वास है कि जो लोग नीति-निर्धारक हैं, वे पुनर्विचार करेंगे। देश में ऐसा कोई कानून नहीं बनना चाहिए, जिससे समाज में विद्वेष पैदा हो या आपसी भाईचारा खंडित हो।

    धारकुंडी पहुंचकर दी श्रद्धांजलि
    चित्रकूट में अल्प प्रवास और दर्शन-पूजन के बाद संत ऋतेश्वर महाराज और बृजभूषण शरण सिंह का काफिला सतना के धारकुंडी आश्रम के लिए रवाना हो गया। वहां वे आश्रम के संस्थापक परमहंस स्वामी सच्चिदानंद जी महाराज के अंतिम दर्शन कर उनकी समाधि स्थल पर अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की है।

     

  • India-US डील पर जल्द होगा साइन, अगले हफ्ते अमेरिका रवाना हो रही टीम

    India-US डील पर जल्द होगा साइन, अगले हफ्ते अमेरिका रवाना हो रही टीम

    नई दिल्‍ली
       

    भारत और अमेरिका व्‍यापार समझौते (India US Trade Deal) को अंतिम रूप देने के लिए भारत की टीम अमेरिका के लिए अगले हफ्ते रवाना होने वाली है.वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने सोमवार को इसकी जानकारी दी. उन्‍होंने कहा कि इस दौरे के दौरान भारत के मुख्य वार्ताकार दर्पण जैन भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के लिए कानूनी समझौते को अंतिम रूप देने के लिए अगले सप्ताह वाशिंगटन में एक टीम को लीड करेंगे. यह यात्रा 23 फरवरी को शुरू होने की संभावना है और डील पर साइन मार्च में होने की संभावना है. 

    इसी महीने की शुरुआत में भारत और अमेरिका ने एक संयुक्त बयान जारी कर अंतरिम व्यापार समझौते का ऐलान कर दिया था. अग्रवाल ने कहा कि संयुक्त बयान डील की रूपरेखा तय करता है. अब इस अंतरिम डील को कानूनी समझौते में बदला जाना बाकी है, जो दोनों पक्षों द्वारा साइन के बाद लागू हो जाएगा. अभी दोनों ही टीमों के बीच वर्चुअल तरीके से बातचीत चल रही है. 

    India-US Trade Deal व्यापार सौदा
    राजेश अग्रवाल ने कहा कि मार्च में समझौते को पूरा करने और हस्ताक्षर करने का प्रयास है. लेकिन इस पर कोई समय सीमा नहीं रखी है क्योंकि कानूनी समझौते को अंतिम रूप देने में भी कुछ चुनौतियां आ सकती हैं, जिसे दोनों पक्षों को सॉल्‍व करेंगे. जबकि वाशिंगटन ने पहले ही रूसी कच्चे तेल की खरीद के लिए भारत पर 25% दंडात्मक टैरिफ को समाप्त कर दिया है और भारतीय वस्‍तुओं पर रेसिप्रोकल टैरिफ 25 फीसदी से कम करके 18 फीसदी कर दिया है. 

     रिपोर्ट के मुताबिक, एक अधिकारी ने कहा कि भारत कपास का बड़ा आयातक है और उसे इसकी ज्‍यादा आवश्‍यकता है, क्‍योंकि वह यूरोपीय संघ और अमेरिका के कपड़ों को के अधिक निर्यात पर नजर रखता है. कृषि, डिजिटल  व्यापार को लेकर  अधिकारी ने कहा कि  अमेरिका और यूरोपीय संघ के साथ व्यापार समझौतों ने भारत के कृषि क्षेत्र के लिए 400 अरब डॉलर का अवसर खोल दिया है. 

    दाल और डिजिटल टैक्‍स  
    अभी भारत का अमेरिका को कृषि निर्यात 2.8 बिलियन डॉलर है, जबकि आयात 1.5 बिलियन डॉलर है. कुल मिलाकर, भारत में कृषि वस्तुओं का आयात 35 अरब डॉलर का है, जबकि निर्यात का मूल्य 51-52 अरब डॉलर है. अधिकारी ने कहा कि संयुक्त बयान में दालें नहीं थीं.  अधिकारियों ने कहा कि दोनों पक्षों ने व्यापार सौदे की पहली किश्त में बातचीत में डिजिटल टैक्‍स, ईकॉमर्स या समकारी लेवी पर चर्चा नहीं की है. 

    गौरतलब है कि अभी भारत और अमेरिका के बीच फाइनल ट्रेड डील नहीं हुई है. यह सिर्फ अंतरिम समझौते का ऐलान किया गया है. भारत पर टैरिफ घटाकर 18 फीसदी कर दिया गया है. वहीं बहुत से प्रोडक्‍ट्स पर टैरिफ शून्‍य लागू है. अमेरिका भी भारत को बड़े लेवल पर समान बेचने वाला है. हालांकि स्‍पष्‍ट और पूरी डिटेल डील पर साइन होने के बाद ही आ सकती है.