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  • ऊर्जा आत्मनिर्भरता से विकास को मिलेगी नई गति : मंत्री श्री शुक्ला

    ऊर्जा आत्मनिर्भरता से विकास को मिलेगी नई गति : मंत्री श्री शुक्ला

    भोपाल 

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन में उप मुख्यमंत्री एवं वित्त मंत्री  जगदीश देवड़ा द्वारा विधानसभा में प्रस्तुत वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट का स्वागत करते हुए नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री राकेश शुक्ला ने कहा कि यह बजट प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के गरीब कल्याण, युवा, अन्नदाता, नारी शक्ति, इन्फ्रॉस्ट्रक्चर और इंडस्ट्री के सर्वांगीण विकास के संकल्प को धरातल पर साकार करने वाला है। उन्होंने कहा कि ‘रोलिंग बजट’ जैसी नवाचारी पहल से वित्तीय योजना अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और परिणामोन्मुखी बनेगी, जिससे दीर्घकालिक परियोजनाओं का सकारात्मक परिणाम मिलेगा।

    मंत्री शुक्ला ने बताया कि सामाजिक सुरक्षा, कृषि क्षेत्र में, औद्योगिक निवेश और अधोसंस्थनात्मक विकास के संतुलित संयोजन से प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी। महिलाओं, किसानों और युवाओं के लिए किए गए प्रावधान राज्य को आत्मनिर्भर विकास की दिशा में आगे बढ़ाएंगे।

    सौर ऊर्जा विस्तार और हरित अधोसंरचना को मजबूत आधार

    मंत्री  शुक्ला ने विशेष रूप से ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े प्रावधानों का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री कृषक मित्र सूर्य योजना के अंतर्गत 343 करोड़ रुपए का प्रावधान किसानों को ऊर्जा आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे सौर ऊर्जा आधारित सौर कृषि पंपों को बढ़ावा मिलेगा।

    मंत्री  शुक्ला ने बताया कि प्रधानमंत्री जनमन कार्यक्रम में विद्युतीकरण कार्यों के लिए 96 करोड़ रुपए का प्रावधान दूरस्थ और वंचित क्षेत्रों तक विद्युत पहुंच सुनिश्चित करेगा। मंत्री  शुक्ला ने कहा कि यह बजट पारंपरिक ऊर्जा के साथ नवकरणीय ऊर्जा के संतुलित विस्तार का मार्ग प्रशस्त करता है। इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ आर्थिक विकास को गति मिलेगी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह बजट वर्ष 2047 के विकसित मध्यप्रदेश के लक्ष्य की दिशा में सशक्त आधार सिद्ध होगा।

     

  • मायावती का बड़ा फैसला: यूपी में अकेले चुनाव लड़ेगी बसपा, दिल्ली बंगला विवाद पर भी रखी बात

    मायावती का बड़ा फैसला: यूपी में अकेले चुनाव लड़ेगी बसपा, दिल्ली बंगला विवाद पर भी रखी बात

    लखनऊ

    वर्ष 2027 में होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की रणनीति स्पष्ट हो गई है। पार्टी सुप्रीमो मायावती ने बुधवार को साफ शब्दों में कहा कि बसपा किसी भी दल के साथ गठबंधन नहीं करेगी और 2007 की तरह अपने दम पर चुनाव लड़ेगी।

    गठबंधन की अटकलों को खारिज करते हुए उन्होंने कहा कि विरोधी दल जानबूझकर इस तरह की अफवाहें फैला रहे हैं, ताकि पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं का ध्यान चुनावी तैयारियों से भटकाया जा सके।

    मायावती ने मीडिया में चल रही खबरों को “फेक न्यूज” बताते हुए कहा कि बसपा पूरी मजबूती और आत्मविश्वास के साथ अकेले मैदान में उतरेगी। उन्होंने बताया कि 9 अक्टूबर को पार्टी संस्थापक कांशी राम की पुण्यतिथि पर लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने खुले मंच से अकेले चुनाव लड़ने की घोषणा की थी।

    इसके बाद भी कई बार इस रुख को दोहराया जा चुका है, इसलिए अब इस विषय पर किसी तरह की चर्चा या भ्रम की गुंजाइश नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस, सपा और भाजपा की नीतियां संकीर्ण हैं और ये दल भीमराव आंबेडकर की विचारधारा के अनुरूप काम नहीं करते।

    गठबंधन से बसपा को नुकसान ही हुआ

    मायावती ने कहा कि पिछले अनुभव बताते हैं कि इन दलों के साथ गठबंधन से बसपा को नुकसान ही हुआ है। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे किसी भी साजिश या भ्रामक खबर से प्रभावित न हों और 2027 में सरकार बनाने के लक्ष्य पर केंद्रित रहें।

    दिल्ली में नए बंगले के अलॉटमेंट पर क्या बोलीं

    दिल्ली में नए बंगले के अलॉटमेंट को लेकर चल रही चर्चाओं पर भी मायावती ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने उनकी सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह आवास आवंटित किया है। उन्होंने 2 जून 1995 को लखनऊ के स्टेट गेस्ट हाउस में हुए हमले का उल्लेख करते हुए कहा कि उस घटना के बाद से उनकी सुरक्षा संवेदनशील विषय रही है और वर्तमान परिस्थितियों में खतरा और बढ़ गया है।

    मायावती ने कहा कि जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आएंगे, विरोधियों की साजिशें तेज होंगी। ऐसे में पार्टी कार्यकर्ताओं को सतर्क रहकर संगठन को मजबूत करने और चुनावी तैयारियों में जुटे रहने की जरूरत है।

     

  • पर्यटन मंत्री  राजेश अग्रवाल कोल विद्रोह के महानायक वीर बुधु भगत की 234 वीं जयंती पर आयोजित समारोह में हुए शामिल

    पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल कोल विद्रोह के महानायक वीर बुधु भगत की 234 वीं जयंती पर आयोजित समारोह में हुए शामिल

    रायपुर

    पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री  राजेश अग्रवाल

    पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री  राजेश अग्रवाल ने जशपुर जिले के डांडटोली में कोल विद्रोह के महानायक, अमर शहीद वीर बुधु भगत की 234 वीं जयंती पर आयोजित समारोह में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने उरांव समाज के लिए निर्मित सामुदायिक भवन का लोकार्पण किया तथा उपस्थित जनसमूह को शुभकामनाएं प्रदान कीं।

    समारोह को संबोधित करते हुए मंत्री  अग्रवाल ने कहा कि अमर शहीद वीर बुधु भगत ने जनजातीय अस्मिता, स्वाभिमान और अधिकारों की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व समर्पित कर दिया। उनका जीवन संघर्ष, साहस और संगठन शक्ति का अनुपम उदाहरण है। उन्होंने कहा कि राज्य शासन जनजातीय समाज के गौरवशाली इतिहास के संरक्षण तथा नई पीढ़ी तक उसके प्रसार के लिए निरंतर प्रयासरत है।

    उन्होंने कहा कि “अमर शहीद वीर बुधु भगत का बलिदान हमें अन्याय और शोषण के विरुद्ध     दृढ़तापूर्वक खड़े रहने की प्रेरणा देता है। उनका संघर्ष केवल इतिहास की स्मृति नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य के लिए मार्गदर्शन है।”

    ज्ञातव्य है कि वीर बुधु भगत की जयंती प्रतिवर्ष 17 फरवरी को श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई जाती है। वर्ष 2026 में उनकी 234वीं जयंती मनाई गई। वे उरांव समुदाय से थे और 19वीं शताब्दी के प्रारंभिक काल में अंग्रेजी शासन के विरुद्ध संघर्ष करने वाले प्रमुख जनजातीय क्रांतिकारी थे। उन्होंने 1831-32 के कोल विद्रोह में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई तथा अंग्रेजों की दमनकारी नीतियों, अत्यधिक कर वसूली और स्थानीय शोषण के विरुद्ध जनजागरण किया।

    उनके नेतृत्व में जनजातीय समाज संगठित हुआ और विदेशी शासन को चुनौती दी। अंग्रेजी शासन ने उनके बढ़ते प्रभाव को देखते हुए उन्हें पकड़ने के लिए सैन्य अभियान चलाया। संघर्ष के दौरान 13 फरवरी 1832 को वे वीरगति को प्राप्त हुए। उनका बलिदान जनजातीय अस्मिता और स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में अमिट है।

    समारोह में जनप्रतिनिधियों, समाज के वरिष्ठजनों तथा बड़ी संख्या में नागरिकों की उपस्थिति रही। सभी ने अमर शहीद वीर बुधु भगत को नमन करते हुए उनके आदर्शों पर चलने का संकल्प लिया।

  • धुम्मा गोडरी नदी में रेत का अवैध खनन, प्रशासन की भूमिका पर उठे सवाल

    धुम्मा गोडरी नदी में रेत का अवैध खनन, प्रशासन की भूमिका पर उठे सवाल

    अनूपपुर

    जिले के भालूमाड़ा थाना तथा फुनगा चौकी क्षेत्र अंतर्गत धुम्मा गोडरी नदी में इन दिनों अवैध रेत उत्खनन का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार एक-एक दिन छोड़कर लगातार रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक रेत माफिया सक्रिय रहते हैं और ट्रैक्टरों के माध्यम से नदी का दोहन किया जा रहा है।
    प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि रात भर ट्रैक्टर नदी से रेत निकालकर विभिन्न स्थानों तक पहुंचाते हैं। आरोप है कि स्थानीय पुलिस प्रशासन एवं खनिज विभाग की शिथिल कार्यप्रणाली के कारण रेत चोरों के हौसले बुलंद हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो नदी का अस्तित्व संकट में पड़ सकता है।
    बताया जा रहा है कि रेत माफिया प्रशासन से एक कदम आगे रहते हुए रणनीति के तहत काम करते हैं। नदी से मुख्य सड़क तक आने वाले तिराहों और रास्तों पर उनके लोग निगरानी में तैनात रहते हैं। किसी भी प्रकार की आशंका होते ही वे ट्रैक्टर लेकर मौके से फरार हो जाते हैं।

    स्थानीय नागरिकों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि रात्रि गश्त बढ़ाई जाए और अवैध खनन पर तत्काल प्रभाव से सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

  • सीएम योगी के ‘टेंपल इकॉनमी मॉडल’ से मजबूत हो रही यूपी की अर्थव्यवस्था

    सीएम योगी के ‘टेंपल इकॉनमी मॉडल’ से मजबूत हो रही यूपी की अर्थव्यवस्था

    लखनऊ

     उत्तर प्रदेश में पिछले कुछ वर्षों में धार्मिक पर्यटन केवल आस्था का विषय नहीं रहा, बल्कि यह प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई गति देने वाला सशक्त मॉडल बनकर उभरा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में ‘टेंपल इकॉनमी मॉडल’ ने यह साबित कर दिया है कि यदि प्राचीन धार्मिक स्थलों के आधारभूत ढांचे को सुदृढ़ किया जाए तो आस्था, पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था, तीनों को एक साथ मजबूती से आगे बढ़ाया जा सकता है।

    पिछली सरकारों के दौर में उपेक्षित रहे अनेक धार्मिक स्थलों पर अब सुनियोजित विकास कार्यों ने तस्वीर बदल दी है। सड़कों का चौड़ीकरण, घाटों का सौंदर्यीकरण, आधुनिक यात्री सुविधाएं, समुचित पार्किंग, प्रकाश व्यवस्था, ठोस सुरक्षा प्रबंधन और स्वच्छता व्यवस्था जैसे बुनियादी सुधारों ने श्रद्धालुओं के अनुभव को बेहतर बनाया है। इसका सीधा परिणाम यह हुआ कि उत्तर प्रदेश आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों की संख्या में रिकॉर्ड वृद्धि दर्ज की जा रही है। आंकड़ों के अनुसार, बीते वर्ष उत्तर प्रदेश में 122 करोड़ से अधिक श्रद्धालु और पर्यटक पहुंचे। यह संख्या न केवल राज्य के प्रशासनिक प्रबंधन की क्षमता को दर्शाती है, बल्कि इस तथ्य को भी स्थापित करती है कि धार्मिक पर्यटन अब प्रदेश की अर्थव्यवस्था का मजबूत स्तंभ बन चुका है।

    बड़े धार्मिक केंद्रों से लेकर छोटे शहरों तक असर

    अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि परिसर के विकास और भव्य अवसंरचना निर्माण ने वैश्विक स्तर पर पहचान बनाई है। वहीं वाराणसी में काशी क्षेत्र के व्यापक विकास, घाटों के पुनरुद्धार और यात्री सुविधाओं के विस्तार ने पर्यटन को नई ऊंचाई दी। प्रयागराज में संगम क्षेत्र के विकास और महाकुंभ व माघ मेला जैसे विशाल धार्मिक आयोजनों के सफल संचालन ने भी इस मॉडल की प्रभावशीलता को प्रमाणित किया है। महत्वपूर्ण बात यह है कि ‘टेंपल इकॉनमी मॉडल’ का प्रभाव केवल इन प्रमुख धार्मिक शहरों तक सीमित नहीं रहा। मथुरा, चित्रकूट, नैमिषारण्य, विंध्याचल और अन्य छोटे धार्मिक नगरों में भी आधारभूत ढांचे के विकास के साथ स्थानीय व्यापार और सेवाक्षेत्र में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है।

    धार्मिक पहचान से आर्थिक पुनर्जागरण तक

    आईआईएम लखनऊ की अयोध्या पर आधारित हालिया रिपोर्ट भी टेंपल इकोनॉमी को सपोर्ट करती है। रिपोर्ट में अध्ययन के आधार पर बताया गया है कि अयोध्या में राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के बाद आर्थिक गतिविधियों में ऐतिहासिक उछाल दर्ज किया गया। करोड़ों श्रद्धालुओं के आगमन ने आतिथ्य, परिवहन, निर्माण और सेवा क्षेत्र में नई संभावनाएं पैदा कीं। 150 से अधिक नए होटल और होमस्टे स्थापित हुए, हजारों एमएसएमई सक्रिय हुए और स्थानीय बाजारों में कारोबार कई गुना बढ़ा। छोटे दुकानदारों और रेहड़ी-पटरी व्यवसायियों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। रियल एस्टेट क्षेत्र में भी तेज उछाल देखा गया, जिससे निजी निवेश को मजबूती मिली। अंतरराष्ट्रीय स्तर के हवाई अड्डे, आधुनिक रेलवे स्टेशन, चौड़ी सड़कों और नगर सौंदर्यीकरण जैसे कार्यों ने अयोध्या को एक सुव्यवस्थित धार्मिक-पर्यटन केंद्र में परिवर्तित करने की दिशा में ठोस आधार प्रदान किया।

    स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिला नया जीवन

    इसी तर्ज पर अन्य धार्मिक स्थलों में भी सुविधाएं बढ़ने से श्रद्धालुओं की संख्या में वृद्धि हुई और इसके साथ ही स्थानीय उत्पादों, हस्तशिल्प, प्रसाद उद्योग, होटल एवं गेस्ट हाउस व्यवसाय, परिवहन सेवाओं, रेस्तरां, गाइड सेवाओं और छोटे व्यापारियों के कारोबार में भी उल्लेखनीय विस्तार हुआ। हजारों युवाओं को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार के अवसर मिले। हस्तशिल्प और पारंपरिक उत्पादों की मांग बढ़ने से ‘लोकल टू ग्लोबल’ की अवधारणा को भी बल मिला है। धार्मिक पर्यटन स्थलों पर स्थानीय कारीगरों और स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों की बिक्री बढ़ी है, जिससे ग्रामीण और अर्धशहरी अर्थव्यवस्था को सीधा लाभ पहुंचा है।

    आस्था से अर्थव्यवस्था तक का समन्वय

    योगी सरकार का यह मॉडल इस सोच पर आधारित है कि आस्था और अर्थव्यवस्था एक दूसरे के पूरक हो सकते हैं। यदि धार्मिक स्थलों का समग्र विकास किया जाए, तो यह न केवल सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण का माध्यम बनता है, बल्कि क्षेत्रीय विकास और निवेश आकर्षण का भी आधार तैयार करता है। आज उत्तर प्रदेश में धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ होटल इंडस्ट्री, रियल एस्टेट, परिवहन नेटवर्क और डिजिटल सेवाओं में भी तेजी देखी जा रही है। बेहतर कानून-व्यवस्था और सुव्यवस्थित आयोजन क्षमता ने निवेशकों का विश्वास भी बढ़ाया है।

    सनातन अर्थशास्त्र का आधुनिक मॉडल

    अर्थशास्त्री पंकज जायसवाल का कहना है कि 122 करोड़ पर्यटकों और श्रद्धालुओं का आगमन यह दर्शाता है कि धार्मिक-सांस्कृतिक केंद्र अब “इमोशनल स्पेस” से आगे बढ़कर “इकोनॉमिक जोन” बन चुके हैं। योगी सरकार ने भारत की पारंपरिक ग्राम-नगर-तीर्थ संरचना को आधुनिक नीति और अवसंरचना से जोड़कर एक ऐसा मॉडल प्रस्तुत किया है, जिसमें आस्था आर्थिक सशक्तिकरण का माध्यम बनती है। प्रदेश सरकार के हालिया बजट में नगर विकास के लिए ₹26,514 करोड़ का प्रावधान किया गया है। यह निवेश केवल अवसंरचना निर्माण तक सीमित नहीं, बल्कि नगर-आधारित आर्थिक पुनरुत्थान की दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है। काशी-विंध्य क्षेत्रीय विकास प्राधिकरण और प्रयागराज-चित्रकूट क्षेत्र के प्रस्तावित विकास जैसे कदम सांस्कृतिक भूगोल को आर्थिक भूगोल में रूपांतरित करने की दिशा में उठाए गए हैं। रामपथ, तीर्थ सौंदर्यीकरण, सांस्कृतिक केंद्रों और पर्यटन सुविधाओं का विस्तार धार्मिक स्थलों को स्थायी आर्थिक केंद्रों में बदलने का आधार तैयार कर रहा है।

  • योगी सरकार का गांव व किसान के समावेशी विकास पर लगातार फोकस

    योगी सरकार का गांव व किसान के समावेशी विकास पर लगातार फोकस

    लखनऊ

    भारत की आत्मा गांवों में बसती है। गांव व अन्नदाता किसान सशक्त होंगे तो देश समृद्ध रहेगा और उत्तर प्रदेश के समावेशी विकास का लक्ष्य भी तभी प्राप्त होगा। इसी नीति को केंद्र में रखते हुए योगी सरकार ने गांव और किसान को अपनी प्राथमिकता में रखकर बीते 9 वर्ष में उत्तर प्रदेश का नव निर्माण किया है। यह नया उत्तर प्रदेश शहर व गांव के बीच अंतर को पाटता है, ग्रामीण क्षेत्रों से पलायन रोकता है। इसी नीति को आगे बढ़ाते हुए योगी सरकार का बजट 2026-27 भी खेती-किसानी और ग्राम्य विकास को नई ऊंचाइयों पर ले जाता दिखाई दे रहा है। यह ग्रामीण इन्फ्रास्ट्रक्चर को प्रोत्साहन देता है। किसानों को नई तकनीकों से, नए बाजारों से जोड़ता और उद्यमिता से जोड़ता है। खेती-किसानी व इससे संबद्ध क्षेत्रों में रोजगार के नए माध्यमों को जन्म देता है। यह उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था में किसानों सिर्फ लाभार्थी नहीं, बल्कि आर्थिक प्रगति में भागीदार बनाता है। 

    बजट में खास ध्यान, कृषि योजनाओं के लिए 10,888 करोड़ रुपये

    2017 में सत्ता संभालने के तत्काल बाद योगी सरकार द्वारा किसानों की 36 हजार करोड़ रुपये कर्जमाफी से लेकर केंद्र सरकार द्वारा पीएम किसान सम्मान निधि के 94,668.58 करोड़ रुपये स्थानांतरित करने तक, डबल इंजन सरकार ने किसानों को आर्थिक समृद्धि के केंद्र में रखा है। डीबीटी के माध्यम से योजनाओं का लाभ अकाउंट में देकर बिचौलियों का राज समाप्त किया गया। बजट 2026-27 में कृषि योजनाओं के लिए 10,888 करोड़ रुपये की व्यवस्था सरकार की प्राथमिकता स्पष्ट कर देती है। यह राशि पिछले बजट के मुकाबले 20 प्रतिशत अधिक है। सरकार ने यूपीएग्रीज परियोजना में एक्वा कल्चर आधारभूत संरचना के तहत विश्वस्तरीय हैचरी तथा विश्वस्तरीय ट्रेनिंग सेंटर की स्थापना की बाह्य सहायतित परियोजना के लिये 155 करोड़ रुपये, एग्री-एक्सपोर्ट हब की स्थापना के लिये 245 करोड़ रुपये तथा किसान उत्पादक संगठनों हेतु रिवाल्विंग फण्ड योजना के लिये 75 करोड़ रुपये की व्यवस्था की है। किसानों के डीजल पंप सेट को सोलर में परिवर्तित करने की योजना के लिए 673.84 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। ये बजट प्रावधान कृषि एवं सबद्ध क्षेत्रों के तकनीकी उन्नयन में मददगार होंगे।

    ग्रामीण अर्थव्यवस्था को दी जा रही मजबूती

    बजट में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को एक बार फिर मजबूती दी गई है। प्रदेश के सभी जनपदों को शामिल करते हुए 94,300 हेक्टेयर में नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फॉर्मिंग योजना संचालित है। बजट में इसके लिए 298 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। निजी नलकूपों को अनवरत बिजली आपूर्ति हो, इसका ध्यान रखा गया है। इसके लिए 2400 करोड़ प्रस्तावित हैं। पं. दीनदयाल उपाध्याय किसान समृद्धि योजना के लिए लगभग 103 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। इससे स्पष्ट है कि सरकार किसानों के लिए मजबूत सपोर्ट सिस्टम पर लगातार कार्यरत है।

    ग्रामीण अर्थतंत्र में नई ऊर्जा भरेगा गन्ना 

    पिछली सरकारों की अनदेखी के शिकार गन्ना किसानों के जीवन में 2017 के बाद से मिठास घुल गई है। योगी सरकार ने 3.04 लाख करोड़ रुपये से अधिक के रिकॉर्ड गन्ना मूल्य का भुगतान किया। इस ऐतिहासिक निर्णय ने गन्ना किसानों को बड़ी राहत दी। पेराई सत्र 2025-26 के लिए गन्ना मूल्य में 30 रुपये प्रति कुन्तल की वृद्धि की। अगेती गन्ना प्रजाति का मूल्य 400 रुपये प्रति कुन्तल तथा सामान्य प्रजाति का मूल्य 390 रुपये प्रति कुन्तल निर्धारित किया गया। इस वृद्धि से गन्ना किसानों को लगभग ₹3,000 करोड़ का अतिरिक्त भुगतान होगा। योगी सरकार के कार्यकाल में यह चौथी बार है, जब गन्ना मूल्य में बढ़ोतरी की गई। यह निर्णय गन्ना किसानों की आमदनी में वृद्धि के साथ ही ग्रामीण अर्थतंत्र में भी नई ऊर्जा भरेगा।

    दुग्ध, मत्स्य पालकों के लिए भी खोले दरवाजे 

    योगी सरकार ने दुग्ध व मत्स्य पालकों के लिए भी दरवाजे खोले हैं। सहकारी क्षेत्र के तहत प्रदेश में 19 दुग्ध संघों के माध्यम से दुग्धशाला विकास कार्यक्रम चलाया जा रहा है। मथुरा में पहले 30 हजार लीटर क्षमता की नवीन डेयरी परियोजना प्रस्तावित की गयी थी, लेकिन अब 1 लाख लीटर प्रतिदिन क्षमता के नवीन डेयरी प्लांट की स्थापना का प्रस्ताव है। सरकार ने दुग्ध संघों के सुदृढ़ीकरण व उन्हें पुनर्जीवित करने की योजना पर भी जोर दिया है। छुट्टा गोवंश के कारण किसानों को होने वाली समस्याओं के निदान पर भी सरकार ने जोर लगाया। छुट्टा गोवंश के रखरखाव के लिए 2,000 करोड़ का प्रावधान किया है। मत्स्य पालक किसानों का भी बजट में ख्याल रखा गया है। इसके अतिरिक्त 36.87 लाख किसानों को निःशुल्क तिलहन बीज मिनीकिट, लगभग 83 हजार सोलर पंप की स्थापना, लगभग 32 हजार खेत तालाबों का निर्माण, 2.46 लाख से अधिक कृषि यंत्रों का वितरण और किसान पाठशाला में लगभग दो करोड़ किसानों की सहभागिता से भी अन्नदाता किसानों के जीवन में बदलाव लाया गया है।

    योगी सरकार का किसानों की ‘आर्थिक समृद्धि’ पर विशेष जोर

    धान खरीद अभियान के जरिए योगी सरकार का स्पष्ट लक्ष्य अन्नदाता किसानों की आर्थिक समृद्धि सुनिश्चित करना है। एक ओर सरकार धान की निर्बाध खरीद कर रही है, तो दूसरी ओर डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से किसानों को सीधे बैंक खातों में भुगतान किया जा रहा है। इससे बिचौलियों की भूमिका खत्म हुई और किसानों को समय पर पैसा मिल रहा है। धान खरीद की बात करें तो योगी सरकार एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) पर किसानों से यह खरीद कर रही है। धान खरीद सत्र 2025-26 में 18 फरवरी दोपहर 12 बजे तक 12.78 लाख किसानों ने पंजीकरण कराया है। इतना ही नहीं, 4869 क्रय केंद्रों के माध्यम से अब तक 10.17 लाख से अधिक किसानों से 60.98 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद की जा चुकी है।

    विशेषज्ञ की राय

    “योगी सरकार ने गांव व किसान को समृद्धि का आधार कहा था। सरकार ने पौने नौ साल में इसे वास्तविकता के धरातल पर उतारा भी है। चाहें बजट प्रावधान हों या किसान पाठशाला के जरिये खेती-किसानी को उन्नत तकनीक से जोड़ना, सरकार किसानों को आत्मनिर्भरता व उद्यमिता की तरफ ले जा रही है। किसी भी प्रदेश के समावेशी विकास के लिए जरूरी है कि कृषि व उससे जुड़े क्षेत्रों में कार्यरत लोग सिर्फ सरकारी अनुदान योजनाओं पर आश्रित न रहें। राज्य की अर्थव्यवस्था व समृद्धि में उनकी अन्य क्षेत्रों के समान ही हिस्सेदारी होनी चाहिए। इससे शहर व गांवों के बीच की खाई पटती है और पलायन पर रोक लगती है। योगी सरकार इस दिशा में लगातार प्रभावी काम कर रही 

  • छत्तीसगढ राज्य खाद्य आयोग के अध्यक्ष  संदीप शर्मा ने ली अधिकारियों की बैठक

    छत्तीसगढ राज्य खाद्य आयोग के अध्यक्ष संदीप शर्मा ने ली अधिकारियों की बैठक

    रायपुर

    छत्तीसगढ राज्य खाद्य आयोग के अध्यक्ष  संदीप शर्मा ने ली अधिकारियों की बैठक

    छत्तीसगढ राज्य खाद्य आयोग के अध्यक्ष  संदीप शर्मा ने   आज कोण्डागांव प्रवास के दौरान कलेक्टोरेट स्थिति सभाकक्ष में सार्वजनिक वितरण प्रणाली, पूरक पोषण आहार योजना, मध्यान्ह भोजन योजना तथा शासकीय आश्रम तथा छात्रावास को बीपीएल दर पर प्रदाय खाद्यान्न भोजन की समीक्षा की गई। समीक्षा बैठक में माह फरवरी और मार्च हेतु जिले की सभी उचित मूल्य दुकानों में खाद्यान्न के भंडारण की समीक्षा कर माह फरवरी हेतु शेष दुकानों में खाद्यान्न का भंडारण और वितरण 07 दिवस के भीतर पूर्ण करने के निर्देश दिए।

     सभी खाद्य निरीक्षको द्वारा दुकानों का निरीक्षण और प्राप्त शिकायत का तत्परता से पूर्ण निराकरण करने, दुकानों की निगरानी समिति को कार्यशील बनाने तथा इसके सदस्यों के मोबाईल नंबर सभी दुकानों में प्रदर्शित करने के निर्देश भी दिए। जिले के ऐसे सभी स्कूल जहां रसोईया हड़ताल के कारण मध्यान्ह भोजन योजना प्रभावित हुई है उन्हें तत्काल प्रारंभ करने के निर्देश दिए गए। जिले के सभी बालक छात्रावास की विशेषकर साफ़-सफाई एवं भोजन व्यवस्था की विशेष निगरानी की आवश्यकता पर बल दिया गया। आंगनबाड़ी केंद्रों के सतत निरीक्षण और बच्चों की उपस्थिति रिपोर्टिंग व्यवस्था को त्रुटिरहित बनाने के निर्देश दिए गए।

    सभी विद्यालयों, आंगनबाड़ी केंद्र तथा छात्रावास में फोर्टीफाईड चावल को पकाने की सही विधि और उपभोग के लाभ की जानकारी हेतु संबंधित को प्रशिक्षण दिए जाने, प्रति डाइट अनुसार खाद्यान्न पात्रता प्रदर्शित करने तथा शिकायत और सुझाव हेतु खाद्य आयोग के काल सेंटर नंबर को स्थाई रूप से प्रदर्शित करने के निर्देश आयोग के अध्यक्ष द्वारा दिए गए।

    राज्य खाद्य आयोग के दल द्वारा अनुसूचित जनजाति कन्या छात्रावास, माकड़ी और बालक छात्रावास, शामपुर  का निरीक्षण किया गया । कन्या छात्रावास में व्यवस्था बेहतर पाई गई जबकि बालक छात्रावास, शामपुर में छात्रों से चर्चा उपरांत  दाल  और सब्जी की गुणवत्ता में सुधार, साफ़-सफाई की व्यवस्था में सुधार तथा प्रति डाइट अनुसार खाद्यान्न की पात्रता तथा खाद्य आयोग के काल सेंटर नंबर को प्रदर्शित करने के निर्देश दिए गए। 

  • डायल 112 में मर्सिडीज गाड़ी? 972 करोड़ का खर्च सुनते ही हाई कोर्ट सख्त, राज्य सरकार को कड़ी फटकार

    डायल 112 में मर्सिडीज गाड़ी? 972 करोड़ का खर्च सुनते ही हाई कोर्ट सख्त, राज्य सरकार को कड़ी फटकार

    जबलपुर

     मध्य प्रदेश में डायल 112 फेज-2 प्रोजेक्ट को लेकर छिड़ा विवाद अब हाई कोर्ट की दहलीज पर पहुंच गया है। 972 करोड़ रुपए की भारी-भरकम लागत और टेंडर की शर्तों को लेकर हाई कोर्ट ने राज्य सरकार पर तीखी टिप्पणी की है। चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान परियोजना की लागत पर हैरानी जताई।

    जब यह तथ्य सामने आया कि 1200 वाहनों के इस प्रोजेक्ट पर 972 करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे हैं, तो कोर्ट ने मौखिक रूप से पूछा- 'क्या आप डायल 112 में मर्सिडीज कार चला रहे हैं?' यह टिप्पणी सीधे तौर पर सरकारी धन के उपयोग और प्रोजेक्ट की प्लानिंग पर सवाल उठाती है।

    अदालत ने 6 करोड़ 29 लाख रुपए के सीएडी (कंप्यूटर आधारित प्रेषण) सॉफ्टवेयर के लिए जारी नए टेंडर पर अंतरिम रोक लगा दी है। कोर्ट ने सरकार को एक सप्ताह में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है और पुलिस विभाग से वर्तमान सॉफ्टवेयर की कार्यक्षमता पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।

    विवाद की क्या है मुख्य वजह?
    ईएमआरआई ग्रीन हेल्थ सर्विसेज (EMRI) के अनुसार, उन्हें मार्च 2025 में सिस्टम इंटीग्रेटर नियुक्त किया गया था और सितंबर 2025 से सेवाएं शुरू हो चुकी हैं। कंपनी का आरोप है कि दिसंबर 2025 में सॉफ्टवेयर के लिए अलग टेंडर जारी करना मूल अनुबंध की शर्तों का उल्लंघन है।

    राज्य सरकार और पुलिस विभाग का तर्क है कि 972 करोड़ रुपए में केवल वाहन ही नहीं, बल्कि डेटा सेंटर, तकनीकी ढांचा और परिचालन लागत भी शामिल है। उनका दावा है कि वर्तमान सॉफ्टवेयर में तकनीकी खामियां हैं, जिन्हें दूर करने के लिए नया टेंडर अनिवार्य था।

    प्रोजेक्ट की क्या है स्थिति?
    फेज-2 के तहत 1200 वाहनों के माध्यम से पुलिस सहायता को आधुनिक बनाने का लक्ष्य है। हालांकि, तकनीकी और कानूनी पेच ने फिलहाल इस महत्वाकांक्षी परियोजना की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है।

  • प्यास की राजनीति से उबरा बुंदेलखंडः 98 प्रतिशत से अधिक घरों तक नल से जल

    प्यास की राजनीति से उबरा बुंदेलखंडः 98 प्रतिशत से अधिक घरों तक नल से जल

    लखनऊ

    कभी पानी की किल्लत और प्यास की राजनीति के लिए चर्चित रहा बुंदेलखंड अब नल से जल आपूर्ति के मामले में नई पहचान बना रहा है। ‘जल जीवन मिशन’ के अंतर्गत वर्तमान आंकड़ों के अनुसार बुंदेलखंड मंडल के सातों जिलों में 98 प्रतिशत से अधिक ग्रामीण घरों को फंक्शनल हाउसहोल्ड टैप कनेक्शन (एफएचटीसी) उपलब्ध कराया जा चुका है। कई जिलों में यह कवरेज 99 प्रतिशत के करीब पहुंच गया है। योगी आदित्यनाथ सरकार इसे ग्रामीण जीवन स्तर में ऐतिहासिक बदलाव का संकेत मान रही है।

    बांदा में कुल 2,68,960 ग्रामीण घरों में से 2,68,722 घरों को नल कनेक्शन दिया जा चुका है, जो लगभग 99.91 प्रतिशत है। चित्रकूट में 1,63,970 में से 1,63,698 घरों तक कनेक्शन पहुंचा है, जो 99.83 प्रतिशत है। महोबा में 1,40,149 में से 1,39,904 घरों (99.83 प्रतिशत),  हमीरपुर में 1,86,530 में से 1,85,693 घरों (99.55 प्रतिशत) और ललितपुर में 2,06,983 में से 2,05,966 घरों (99.51 प्रतिशत) को नल से जल सुविधा मिल चुकी है। झांसी में 2,51,232 में से 2,49,111 (99.16 प्रतिशत) तथा जालौन में 2,12,069 में से 2,08,174 घरों (98.16 प्रतिशत) को कवर किया गया है। समूचे बुंदेलखंड जोन में कुल 7,59,609 घरों में से 7,58,017 घरों तक कनेक्शन पहुंच चुका है, जो 99.79 प्रतिशत कवरेज दर्शाता है।

    2019 से पहले प्रदेश में ग्रामीण नल जल कवरेज दो प्रतिशत से भी कम था। बुंदेलखंड जैसे सूखा प्रभावित क्षेत्र में पाइप से पेयजल सुविधा अपवाद मानी जाती थी। जल जीवन मिशन की शुरुआत के बाद बड़े पैमाने पर आधारभूत ढांचे का निर्माण किया गया। ट्यूबवेल, पंप हाउस, ओवरहेड टैंक और व्यापक पाइपलाइन नेटवर्क बिछाने का कार्य तेजी से पूरा किया गया। भौतिक संरचना लगभग पूर्ण हो चुकी है और अब ध्यान कमीशनिंग तथा नियमित जल आपूर्ति सुनिश्चित करने पर है।

    इससे ग्रामीण महिलाओं के जीवन में बड़ा बदलाव आया है। दूरदराज क्षेत्रों में पानी लाने की मजबूरी खत्म होने से समय की बचत, स्वास्थ्य में सुधार और सामाजिक-आर्थिक गतिविधियों में वृद्धि देखी जा रही है। सरकार का लक्ष्य दिसंबर 2026 तक शत प्रतिशत कनेक्शन और निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करना है।

     

  • मैदान पर आपा खो बैठे जॉर्ज मुन्से, हेलमेट फेंकने के मामले में ICC ने लगाई फटकार

    मैदान पर आपा खो बैठे जॉर्ज मुन्से, हेलमेट फेंकने के मामले में ICC ने लगाई फटकार

    कोलंबो

    स्कॉटलैंड के सलामी बल्लेबाज जॉर्ज मुन्से को नेपाल के खिलाफ आईसीसी टी20 विश्व कप के ग्रुप सी मैच के दौरान विज्ञापन बोर्ड पर अपना हेलमेट फेंकने के लिए फटकार लगाई गई है और एक डिमेरिट अंक दिया गया है। मुन्से को खिलाड़ियों और खिलाड़ियों के सहयोगी स्टाफ के लिए आईसीसी आचार संहिता के नियम 2.2 के उल्लंघन का दोषी पाया गया जो अंतरराष्ट्रीय मैच के दौरान क्रिकेट उपकरण या पोशाल, मैदान के उपकरण या साजो-सामान के दुरुपयोग' से संबंधित है।

    इसके अलावा मुन्से के अनुशासनात्मक रिकॉर्ड में एक डिमेरिट अंक भी जोड़ा गया है। यह उनके लिए 24 महीने की अवधि में पहला अपराध था। यह घटना स्कॉटलैंड की पारी के 10वें ओवर के समापन पर हुई जब मुन्से ने आउट होने के बाद ड्रेसिंग रूम में वापस जाते समय अपना हेलमेट विज्ञापन बोर्ड पर फेंक दिया।

    मुन्से ने अपराध और सजा स्वीकार कर ली जो आईसीसी मैच रैफरी के अंतरराष्ट्रीय पैनल के डेविड गिल्बर्ट ने प्रस्तावित की थी जिसके कारण औपचारिक सुनवाई की जरूरत नहीं पड़ी। मैदानी अंपायर केएन अनंतपद्मनाभन और एलेक्स व्हार्फ, तीसरे अंपायर एड्रियन होल्डस्टॉक और चौथे अंपायर लेंगटन रुसेरे ने ये आरोप लगाए थे। लेवल एक के उल्लंघन में कम से कम आधिकारिक फटकार और अधिक से अधिक खिलाड़ी की मैच फीस का 50 प्रतिशत जुर्माना और एक या दो डिमेरिट अंक मिलते हैं।