Author: Admin

  • 6 साल में 1% मजदूरों को नहीं मिला 100 दिन का काम; कोविड में हटाए गए 10 लाख परिवारों के नाम, विधानसभा में जवाब आया

    6 साल में 1% मजदूरों को नहीं मिला 100 दिन का काम; कोविड में हटाए गए 10 लाख परिवारों के नाम, विधानसभा में जवाब आया

    भोपाल 

    प्रदेश में मनरेगा के तहत पिछले छह वर्षों में 1 प्रतिशत मजदूरों को भी पूरे 100 दिन का रोजगार नहीं मिल पाया। यह खुलासा विधानसभा में पूछे गए प्रश्न के लिखित उत्तर में हुआ। जवाब में सामने आया कि बड़ी संख्या में मजदूर पंजीकृत होने के बावजूद सीमित परिवारों को ही 100 दिन का काम मिला।

    विधानसभा में दिए गए जवाब के अनुसार वर्ष 2021 में 1 करोड़ 70 लाख से अधिक पंजीकृत मजदूरों में से केवल 1 लाख 23 हजार परिवारों को ही 100 दिन का रोजगार मिला। वर्ष 2022 में यह संख्या घटकर 63 हजार 898 परिवार, वर्ष 2023 में 40 हजार 588, वर्ष 2024 में 30 हजार 420 और वर्ष 2025 में 32 हजार 560 परिवार रह गई। आंकड़ों के आधार पर विपक्ष ने आरोप लगाया कि छह वर्षों में 1 प्रतिशत मजदूरों को भी पूरा रोजगार नहीं मिल सका।

    150 दिन रोजगार का प्रावधान भी अधूरा

    मनरेगा के तहत वनाधिकार पट्टाधारियों को वर्ष में 150 दिन रोजगार देने का प्रावधान है, लेकिन विधानसभा में प्रस्तुत जानकारी के अनुसार वर्ष 2025-26 में 24 जिलों में एक भी मजदूर को 150 दिन का रोजगार नहीं मिला। चार जिलों में मात्र एक-एक परिवार को ही 150 दिन काम दिया गया।

    जानकारी में बताया गया कि सबसे अधिक अलीराजपुर जिले में 112 परिवारों को 150 दिन रोजगार मिला, जबकि छिंदवाड़ा में 28, धार में 21, मंडला में 17 और दमोह में 16 परिवारों को यह लाभ मिला। आदिवासी जिला झाबुआ में 150 दिन रोजगार का आंकड़ा शून्य रहा।

    मजदूरी की मांग बढ़ी, रोजगार नहीं

    विधानसभा में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार कोविड काल के बाद से मजदूरी की मांग लगातार बढ़ी, लेकिन रोजगार उपलब्धता उसी अनुपात में नहीं बढ़ सकी। बड़ी संख्या में परिवारों और श्रमिकों ने काम की मांग की, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार की स्थिति पर सवाल खड़े हुए हैं।

    जॉब कार्डधारी परिवार बढ़े, काम कम मिला

    प्रदेश में जॉब कार्डधारी परिवारों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन प्रति परिवार मिलने वाले कार्य दिवस घटे हैं। विपक्ष ने इसे सरकार की रोजगार नीति की विफलता बताते हुए कहा कि ग्रामीण मजदूरों को पर्याप्त काम नहीं मिल पाने के कारण पलायन की स्थिति बन रही है।

    ऐसे घटता गया 100 दिन रोजगार पाने वालों का आंकड़ा

    सालपंजीकृत मजदूर100 दिन रोजगार पाने वाले परिवार
    20211,70,19,6811,23,624
    20221,81,42,20763,898
    20231,69,07,20740,588
    20241,70,42,20730,420
    20251,86,57,08032,560

    150 दिन रोजगार का प्रावधान भी अधूरा

    मनरेगा के तहत वनाधिकार पट्टाधारियों को वर्ष में 150 दिन रोजगार देने का प्रावधान है, लेकिन 2025-26 में स्थिति कमजोर रही।

    जिलावार स्थिति (150 दिन रोजगार):

    • 24 जिलों में — एक भी परिवार को नहीं मिला रोजगार
    • 4 जिलों में — सिर्फ 1 परिवार को मिला रोजगार
    • अलीराजपुर — 112 परिवार
    • छिंदवाड़ा — 28 परिवार
    • धार — 21 परिवार
    • मंडला — 17 परिवार
    • दमोह — 16 परिवार
    • झाबुआ — शून्य

    विधानसभा में पूछे गए प्रश्न के लिखित उत्तर में सरकार ने स्वीकार किया कि पिछले वर्षों में लाखों परिवारों और श्रमिकों के नाम जॉब कार्ड से हटाए गए, जिनमें सबसे ज्यादा नाम कोविड काल के दौरान काटे गए।

    कोरोना काल में सबसे ज्यादा नाम हटे

    विधानसभा में पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2021 में 10 लाख 46 हजार 786 परिवारों के 43 लाख 43 हजार 378 श्रमिकों के नाम जॉब कार्ड से हटाए गए। उस समय रोजगार की मांग सबसे अधिक थी, लेकिन बड़ी संख्या में मजदूर योजना से बाहर हो गए।

    वर्षवार जॉब कार्ड से हटाए गए नाम

    • 2021: 10,46,786 परिवार — 43,43,378 श्रमिक
    • 2022: 1,71,389 परिवार — 7,71,730 श्रमिक
    • 2023: 5,28,579 परिवार — 20,24,552 श्रमिक
    • 2024: 45,516 परिवार — 1,91,183 श्रमिक
    • 2025: 25,684 परिवार — 1,23,524 श्रमिक

    रोजगार की मांग के बीच बाहर हुए मजदूर

    आंकड़ों के मुताबिक कोविड के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार की मांग लगातार बढ़ी, लेकिन उसी दौरान बड़ी संख्या में लोगों के नाम जॉब कार्ड से हटाए जाने से मजदूरों को काम पाने में कठिनाई हुई।

    विपक्ष का आरोप

    कांग्रसे ने आरोप लगाया कि जब ग्रामीण मजदूरों को सबसे ज्यादा रोजगार की जरूरत थी, उसी समय नाम काटे जाने से उन्हें काम से वंचित होना पड़ा और पलायन की स्थिति बनी। विधानसभा में सामने आए इन आंकड़ों के बाद मनरेगा के क्रियान्वयन और जॉब कार्ड सत्यापन प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो गए हैं।

    मजदूरी की मांग भी रही ऊंची

    वर्षपरिवारश्रमिक
    2021-2261,66,7801,21,95,233
    2022-2353,13,45492,99,519
    2023-2446,99,74776,31,549
    2024-2544,79,77669,86,086
    2025-2642,64,41465,47,787

     

  • MP में 380 दिन में सुलझ रहे पॉक्सो मामले, दिल्ली में बच्चों से जुड़े अपराधों के लिए लगते हैं 4.5 साल

    MP में 380 दिन में सुलझ रहे पॉक्सो मामले, दिल्ली में बच्चों से जुड़े अपराधों के लिए लगते हैं 4.5 साल

    भोपाल 

    मध्य प्रदेश में पॉक्सो (POCSO) एक्ट के तहत दर्ज होने वाले गंभीर अपराधों के मामलों में पीड़ितों को न्याय मिलने की रफ्तार देश के कई बड़े राज्यों और महानगरों की तुलना में काफी बेहतर है।

    राज्यसभा में पेश किए गए सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, मध्यप्रदेश के फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालयों (FTSC) में इन मामलों के ट्रायल (विचारण) में लगने वाला औसत समय राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और गुजरात जैसे राज्यों के मुकाबले काफी कम है।

    एमपी में 380 दिन में फैसला, दिल्ली में साढ़े 4 साल

    विधि और न्याय मंत्रालय द्वारा जारी 2024 के आंकड़ों के अनुसार, मध्यप्रदेश में एक पॉक्सो मामले के निपटारे में औसतन 380 दिन का समय लगता है। इसकी तुलना यदि अन्य राज्यों से की जाए, तो तस्वीर काफी चौंकाने वाली है।

        दिल्ली: यहां पॉक्सो केस के ट्रायल में औसतन 1639.5 दिन (लगभग 4.5 साल) लग रहे हैं।
        गुजरात: यहां न्याय मिलने में औसतन 1292.5 दिन का समय लगता है।
        उत्तर प्रदेश: यहां भी ट्रायल में औसतन 861 दिन लगते हैं, जो एमपी से दोगुने से भी अधिक है।

    देशभर में 2.24 लाख से ज्यादा मामले लंबित

    मंत्रालय ने बताया कि 31 दिसंबर 2025 तक देश के 29 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में पॉक्सो अधिनियम के तहत कुल 2,24,572 मामले लंबित थे। इन मामलों के त्वरित निपटान के लिए वर्तमान में देश भर में 774 फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालय कार्य कर रहे हैं, जिनमें 398 विशेष तौर पर केवल पॉक्सो (ई-पॉक्सो) कोर्ट हैं।

    चाइल्ड फ्रेंडली न्याय प्रणाली पर सरकार का फोकस

    सरकार पीड़ितों को सुविधाजनक माहौल देने के लिए न्यायालय परिसरों के भीतर सुभेद्य साक्षी निक्षेपण केन्द्रों (VWDC) के उपयोग को प्रोत्साहित कर रही है। इसके माध्यम से बच्चों के लिए डरावने न्यायिक वातावरण के बजाय एक 'चाइल्ड फ्रेंडली' माहौल तैयार किया जा रहा है। इसके लिए अब तक 10,000 से अधिक प्रतिभागियों को विशेष प्रशिक्षण भी दिया जा चुका है।

    कानून व्यवस्था राज्य की जिम्मेदार
    मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि 'पुलिस' और 'सार्वजनिक व्यवस्था' राज्य के विषय हैं। इसलिए, कानून व्यवस्था बनाए रखने, नागरिकों की सुरक्षा और अपराधों की जांच व अभियोजन की मुख्य जिम्मेदारी राज्य सरकारों की है। केंद्र सरकार महिलाओं की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है और इसके लिए कई कदम उठा रही है।

    2.45 मामले अभी भी पेंडिंग
    न्याय में तेजी लाने के लिए केंद्र सरकार ने फास्ट-ट्रैक विशेष अदालतों और विशेष POCSO अदालतों की स्थापना के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की है। 31 दिसंबर 2025 तक, देश भर में 774 FTSCs और 398 e-POCSO अदालतें काम कर रही हैं। इन अदालतों ने 3.66 लाख से अधिक मामलों का निपटारा किया है, जबकि लगभग 2.45 लाख मामले अभी भी लंबित हैं।

    22 राज्यों में 880 फास्ट ट्रैक अदालत
    इसके अलावा, 22 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में 880 फास्ट-ट्रैक अदालतें भी चल रही हैं। ये अदालतें गंभीर अपराधों, महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों, दिव्यांगों और लंबी बीमारियों से पीड़ित लोगों से जुड़े मामलों की त्वरित सुनवाई करती हैं। हालांकि, यह ध्यान देने योग्य है कि मध्य प्रदेश में इन 880 अदालतों में से एक भी फास्ट-ट्रैक अदालत कार्यरत नहीं है। वहीं, उत्तर प्रदेश में 373 और महाराष्ट्र में 102 ऐसी अदालतें हैं। मध्य प्रदेश में 67 फास्ट-ट्रैक विशेष अदालतें, जिनमें POCSO अदालतें भी शामिल हैं, कार्यरत हैं।

    अब ट्रायल को भी समझ लीजिए

        ट्रायल का औसत समय: विशेष रूप से उस अवधि को दर्शाता है जो अदालत में 'ट्रायल' (विचारण) की प्रक्रिया शुरू होने से लेकर अंतिम फैसले तक लगती है।

        ट्रायल की शुरुआत: कानूनी प्रक्रिया में ट्रायल तब शुरू माना जाता है, जब पुलिस अपनी जांच पूरी कर अदालत में आरोप पत्र (Charge Sheet) दाखिल कर देती है और अदालत उस पर संज्ञान लेकर कार्यवाही शुरू करती है।

        अवधि की गणना: दस्तावेजों में 'औसत विचारण समय' की गणना उन दिनों के आधार पर की गई है जो फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालयों (FTSC) और अनन्य पॉक्सो (e-POCSO) न्यायालयों में मामले की सुनवाई चलने और फैसला आने के बीच व्यतीत हुए हैं।

        केस दर्ज होने से अंतर: आमतौर पर केस दर्ज होने (FIR) और विचारण (Trial) शुरू होने के बीच 'जांच' का समय होता है। जो 380 दिन (मध्य प्रदेश के लिए) का आंकड़ा दिया गया है, वह मुख्य रूप से अदालती कार्यवाही (Trial) में लगने वाला समय है।

        त्वरित निपटान का लक्ष्य: इन विशेष न्यायालयों का उद्देश्य ही यह है कि विचारण की इस अवधि को कम किया जाए ताकि पीड़ितों को वर्षों तक इंतजार न करना पड़े।

    मंत्री बोले- जितना जल्दी न्याय मिलेगा, तभी हम कहेंगे न्याय हुआ पॉक्सो के मामलों के जल्द निपटारे पर मप्र के स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा राज्यमंत्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल ने कहा- न्याय जितने जल्दी मिले, तभी हम कह सकते हैं कि न्याय हुआ। अन्यथा जितना देरी होगी उतना अन्याय की दिशा में हम बढे़ेंगे। मप्र के लिए हमें यह संतोष है कि जो शिकायतें हुई उनका जितना जल्दी हो सके न्याय दिलाने का प्रयास किया है।

  • समंदर में पाकिस्तान के गुरूर की कब्र पर भारत का ‘निस्तार’ खड़ा, गर्व का पल

    समंदर में पाकिस्तान के गुरूर की कब्र पर भारत का ‘निस्तार’ खड़ा, गर्व का पल

    विशाखापत्तनम 
    इंडियन नेवी के इतिहास
    में कुछ तारीखें और कुछ जगहें ऐसी हैं, जो दुश्मन के कलेजे में हमेशा खौफ पैदा करती हैं. इस साल का इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू (IFR) और ‘मिलन’ एक्सरसाइज एक बार फिर उसी इतिहास को जिंदा करने जा रहा है. इस आयोजन का सबसे बड़ा संदेश विशाखापत्तनम के उस समंदर से निकल रहा है, जहां आज से ठीक 55 साल पहले पाकिस्तान की अकड़ और उसका गुरूर पीएनएस गाजी (PNS Ghazi) हमेशा के लिए दफन हो गया था. गर्व की बात यह है कि जहां गाजी की कब्र है, आज ठीक उसी जगह भारत का अपना स्वदेशी डाइविंग सपोर्ट वेसल (DSV) ‘निस्तार’ सीना ताने खड़ा है. यह सिर्फ एक जहाज की मौजूदगी नहीं है, बल्कि यह पाकिस्तान के लिए एक ऐसा ट्रॉमा है जिसे वह कभी भूल नहीं पाएगा.

    1971 की वो घटना, जब गाजी शिकार बन गया

        बात 1971 की है, जब पाकिस्तान ने भारत के सबसे ताकतवर एयरक्राफ्ट कैरियर आईएनएस विक्रांत (INS Vikrant) को डुबोने के लिए अपनी सबसे घातक अमेरिकी सबमरीन पीएनएस गाजी को भेजा था. पाकिस्तान को लगा था कि गाजी चुपचाप आएगी और विशाखापत्तनम के पास विक्रांत का काम तमाम कर देगी. लेकिन इंड‍ियन नेवी की रणनीति के आगे गाजी की एक न चली.

        आईएनएस राजपूत ने विशाखापत्तनम के तट के पास ही गाजी को ट्रैक किया और समंदर की गहराइयों में उसे हमेशा के लिए सुला दिया. उस वक्त जब गाजी के मलबे को खोजने और समंदर के नीचे डाइविंग ऑपरेशन चलाने की बारी आई, तो यह काम नेवी के तत्कालीन आईएनएस निस्तार ने बखूबी अंजाम दिया था. आज उसी ‘निस्तार’ का आधुनिक और स्वदेशी अवतार उसी जगह मौजूद है, जो पाकिस्तान के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा है.

    आईएनएस निस्तार यानी समंदर का बादशाह

    भारतीय नौसेना को 18 जुलाई 2025 को अपना पहला स्वदेशी डाइविंग सपोर्ट वेसल मिला. इससे पहले नौसेना के पास ऐसे जहाजों की भारी कमी थी, लेकिन अब निस्तार और निपुण के आने से भारत इस क्षेत्र में सेल्फ-रिलायंट बन गया है. न‍िस्‍तार की खूब‍ियां ऐसी हैं, ज‍िससे इसे समंदर के बादशाह के नाम से भी जाना जाता है.

    ‘निस्तार’ क्यों है इतना खास?

        संस्कृत में ‘निस्तार’ का अर्थ होता है ‘मुक्ति’ या ‘उद्धार’. इससे आप न‍िस्‍तार की ताकत का अंदाजा लगा सकते हैं. वैसे तो इसका मुख्य काम किसी भी सबमरीन इमरजेंसी के दौरान नौसैनिकों का रेस्क्यू करना है. लेकिन यह बहुत काम की चीज है.

        यह जहाज अपने साथ डीप सबमर्जेंस रेस्क्यू व्हीकल ले जाता है, जो गहरे समंदर में जाकर फंसी हुई सबमरीन से लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल सकता है. हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड द्वारा बनाया गया यह जहाज लगभग 80 प्रतिशत स्वदेशी है.

        निस्तार 120 मीटर लंबा और 10,000 टन वजनी है. यह 18 नॉटिकल मील प्रति घंटा की रफ्तार से सफर करता है. यह अत्याधुनिक डाइविंग उपकरणों और सबमरीन रेस्क्यू सपोर्ट सिस्टम से लैस है.

    विशाखापत्तनम में पाकिस्तान के लिए ‘डेथ जोन’

    इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू में चीन और पाकिस्तान को कभी नहीं बुलाया जाता, लेकिन भारत की यह सामरिक तैयारी उनके लिए सबसे बड़ी चेतावनी है. जिस जगह गाजी डूबा था, आज वहां सिर्फ निस्तार ही नहीं, बल्कि भारत का स्वदेशी आईएनएस विक्रांत भी मौजूद है. यह वही विक्रांत है जिसे डुबोने का सपना लेकर गाजी आया था. आज विक्रांत का नया अवतार उसी जगह खड़ा होकर दुनिया को बता रहा है कि भारत की समुद्री सीमाएं अब अभेद्य हैं.

    निस्तार और निपुण की जोड़ी अभेद्य

    नेवी के इस प्रोजेक्ट के तहत दो डाइविंग सपोर्ट वेसल तैयार किए जा रहे हैं. निस्तार के बाद अब ‘निपुण’ पर काम तेजी से चल रहा है. ये दोनों जहाज भारतीय नौसेना को दुनिया की उन चुनिंदा नौसेनाओं की कतार में खड़ा कर देंगे जिनके पास अपनी सबमरीन रेस्क्यू क्षमता है. कुल मिलाकर, विशाखापत्तनम में आईएफआर (IFR) का यह आयोजन केवल एक प्रदर्शन नहीं है. यह पाकिस्तान की उस हार का जश्न है जिसने 1971 में दक्षिण एशिया का भूगोल बदल दिया था. जहां पाकिस्तान का गुरूर दफन हुआ था, आज वहां भारत का ‘निस्तार’ खड़ा होकर नए भारत की बुलंद तस्वीर पेश कर रहा है.

  • भारत का विमानन धमाका: टाटा बनाएगी देसी 5वीं जनरेशन फाइटर, F-35 और Su-57 को टक्कर

    भारत का विमानन धमाका: टाटा बनाएगी देसी 5वीं जनरेशन फाइटर, F-35 और Su-57 को टक्कर

    मुंबई 

    भारत ने पांचवीं पीढ़ी के देसी स्टेल्थ फाइटर जेट (5th Gen Fighter Jet) एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) के लिए बड़ा कदम उठाया है. रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने इस 5th जेन फाइटर जेट का प्रोटोटाइप डिजाइन करने के लिए तीन दावेदारों को शॉर्टलिस्ट किया है. इनमें टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड सबसे बड़ी दावेदार के तौर पर उभरी है, जबकि लार्सन एंड टुब्रो–भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड का कंसोर्टियम और भारत फोर्ज (BEML लिमिटेड) डेटा पैटर्न्स का संयुक्त समूह शामिल है.

    एएमसीए प्रोजेक्ट के तहत भारत का स्वदेशी सिंगल-सीटर, ट्विन-इंजन स्टेल्थ फाइटर जेट विकसित किया जाना है, जिसमें एडवांस्ड स्टेल्थ कोटिंग और इंटरनल वेपन बे जैसी अत्याधुनिक खूबियां होंगी. इस परियोजना के अंतर्गत 125 से अधिक फाइटर जेट तैयार किए जाने की योजना है, जिनके 2035 तक भारतीय वायुसेना में शामिल होने की उम्मीद है. इसके साथ ही भारत उन चुनिंदा देशों की सूची में शामिल हो जाएगा, जिनके पास पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट हैं. ये विमान अमेरिका के पांचवी पीढ़ी के विमान F-35 और रूसी फिफ्थ जेन फाइटर जेट Su-57 की टक्कर के होंगे.

    इस 5th जेनरेशन स्टेल्थ फाइटर जेट एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) का पहला प्रोटोटाइप 2028 के आखिर तक रोल आउट होने वाला है, और पहली उड़ान 2029 में प्लान की गई है. इस प्रोजेक्ट का मकसद पांच उड़ने वाले प्रोटोटाइप डेवलप करना है, जिसका पूरा डेवलपमेंट 2034 तक पूरा होने और शुरुआती प्रोडक्शन 2035 तक होने का टारगेट है.
    HAL और अडाणी डिफेंस ने भी लगाई थी बोली

    रिपोर्ट के मुताबिक, डीआरडीओ ने अपनी एरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी के जरिये जुलाई 2025 में इस परियोजना के लिए टेंडर जारी किए थे. शुरुआत में सात कंसोर्टियम ने बोली लगाई थी, जिनमें हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) और अडाणी डिफेंस जैसे नाम शामिल थे. शॉर्टलिस्ट किए गए दावेदारों को अब सरकार की ओर से फंडिंग सहायता मिलने की संभावना है, ताकि वे एएमसीए के प्रोटोटाइप विकसित कर सकें. इसके बाद ही उत्पादन अधिकार दिए जाएंगे.

    सूत्रों के हवाले से बताया कि, HAL शुरुआती स्क्रीनिंग में एक अनिवार्य दस्तावेजी मानदंड में त्रुटि के कारण बाहर हो गया. हालांकि कंपनी को बाद में लाइसेंस निर्माण के लिए बोली लगाने का अवसर मिल सकता है. HAL के सीएमडी डीके सुनील ने हाल ही में कहा था कि एएमसीए एक 10 साल की परियोजना है और भले ही उनकी कंपनी शुरुआती चरण में चयनित न हो, वह आगे लाइसेंस मैन्युफैक्चरिंग के लिए जरूर बोली लगाएगी.
    भारत के 5th Gen फाइटर जेट प्रोजेक्ट की खास बातें…

    भारत का AMCA प्रोग्राम क्या है?

    AMCA यानी Advanced Medium Combat Aircraft भारत का स्वदेशी पांचवीं पीढ़ी का स्टेल्थ फाइटर जेट प्रोग्राम है, जिसे डीआरडीओ विकसित कर रहा है.

    AMCA की सबसे बड़ी खासियत क्या होगी?

    यह एक सिंगल-सीटर, ट्विन-इंजन स्टेल्थ फाइटर जेट होगा, जिसमें एडवांस्ड स्टेल्थ कोटिंग, इंटरनल वेपन बे और आधुनिक एवियोनिक्स सिस्टम शामिल होंगे.

    AMCA के लिए किन कंपनियों को शॉर्टलिस्ट किया गया है?

    डीआरडीओ ने तीन दावेदारों को शॉर्टलिस्ट किया है— टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड (स्टैंडअलोन), लार्सन एंड टुब्रो और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड का कंसोर्टियम और भारत फोर्ज, बीईएमएल लिमिटेड और डेटा पैटर्न्स का संयुक्त समूह

    AMCA प्रोजेक्ट के तहत कितने फाइटर जेट बनाए जाएंगे?

    इस प्रोजेक्ट के तहत 125 से अधिक फाइटर जेट बनाए जाने की योजना है.

    AMCA कब तक भारतीय वायुसेना में शामिल हो सकता है?

    AMCA के 2035 तक भारतीय वायुसेना में शामिल होने की उम्मीद है.

    भारत में बनेंगे 90 राफेल जेट

    एएमसीए परियोजना भारतीय वायुसेना के आधुनिकीकरण की व्यापक योजना का हिस्सा है. इसी क्रम में रक्षा अधिग्रहण परिषद ने हाल ही में फ्रांस से 114 राफेल लड़ाकू विमान खरीदने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है, जिनमें से 90 विमान भारत में बनाए जाएंगे. यह मंजूरी फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के 17 से 19 फरवरी के भारत दौरे से कुछ दिन पहले दी गई.

    इसके अलावा, रक्षा अधिग्रहण परिषद ने नौसेना के लिए अमेरिका से छह अतिरिक्त पी-8आई समुद्री निगरानी और पनडुब्बी रोधी विमानों की खरीद को भी मंजूरी दी है. यह सभी फैसले भारत की सैन्य क्षमताओं को मजबूत करने और स्वदेशी रक्षा उद्योग को बढ़ावा देने की दिशा में अहम माने जा रहे हैं.

     

  • 19 फरवरी का राशिफल: आज किन राशियों की चमकेगी किस्मत, पढ़ें दैनिक भविष्यफल

    19 फरवरी का राशिफल: आज किन राशियों की चमकेगी किस्मत, पढ़ें दैनिक भविष्यफल

    मेष

    19 फरवरी के दिन आप एक बिजी लेकिन प्रोडक्टिव ऑफिस लाइफ के साथ-साथ एक शानदार लव लाइफ का अनुभव करेंगे। आज के दिन धन का इस्तेमाल समझदारी से करें। सेहत से जुड़ी छोटी-मोटी समस्याएं आपको परेशान कर सकती हैं।
    वृषभ

    19 फरवरी के दिन प्यार और ऑफिस लव दोनों में चुनौतियों को सुलझाएं। सुरक्षित भविष्य के लिए सबसे अच्छे पैसे के निवेश के विकल्पों पर विचार करें। आज के दिन आपका स्वास्थ्य भी सामान्य रहेगा।
    मिथुन

    19 फरवरी के दिन एक चेकलिस्ट फॉलो करें। घर पर, प्यार भरे शब्द और मददगार काम शांति लाएंगे। खर्च करने में सावधानी बरतें। जब भी हो सके बचत करें। रूटीन, धैर्य और ईमानदारी से किया गया काम जल्द ही लगातार, क्लियर प्रोग्रेस देगा।
    कर्क

    19 फरवरी के दिन सिंपल प्लान भरोसेमंद नतीजे देंगे और धैर्य से काम करें। फोकस और प्रैक्टिकल प्लान आपको अपने काम को लगातार पूरा करने में मदद करेंगे। प्रोजेक्ट्स को छोटे-छोटे स्टेप्स में बांटें।
    सिंह

    19 फरवरी के दिन दूसरों को अपना भरोसेमंद काम देखने दें। आज आप स्टेबल और फोकस्ड महसूस करेंगे। छोटे-छोटे फैसलों से काम और घर पर क्लियर प्रोग्रेस होगी। प्यार से बात करें।
    कन्या

    19 फरवरी के दिन आज आपका दिल छोटी-छोटी बातों पर ध्यान देगा। रचनात्मकता से मददगार विचार आएंगे। भावनाओं को सावधानी से शेयर करें। ध्यान से सुनें, और शांत फैसलों को अपने कामों को गाइड करने दें।
    तुला

    19 फरवरी के दिन जल्दबाजी में की गई टिप्पणियों से बचें, जिनसे टकराव हो सकता है। धीमे, सावधानी भरे कदम विश्वास पैदा करेंगे और क्लियर रिजल्ट देंगे। महत्वपूर्ण छोटे कामों को पूरा करने के लिए फोकस का उपयोग करें।
    वृश्चिक

    19 फरवरी के दिन अपने रोमांटिक रिश्ते में समस्याओं को सुलझाएं। काम की जगह पर, अपने काम में ईमानदार रहें और आपके प्रयासों को पहचाना जाएगा। आप धन और स्वास्थ्य दोनों के मामले में भाग्यशाली हैं।
    धनु

    19 फरवरी के दिन जब आप छोटी-छोटी बातों में सावधानी और धैर्य से काम करेंगे, तो शांत योजनाएं आगे बढ़ेंगी। धनु राशि वाले देखेंगे कि उनकी ताकत प्रगति में उनका मार्गदर्शन कर रही है। लक्ष्यों को मामूली रखें और सोच-ससमझकर बोलें।
    मकर

    19 फरवरी के दिन पैसे के मामले में सावधान रहें और अचानक रिस्क लेने से बचें। छोटे, क्लियर कदम और शांत फोकस जल्द ही प्रगति लाएंगे। आप जीवन में गहरा फोकस और शांत शक्ति महसूस करेंगे।
    कुंभ

    19 फरवरी के दिन आपकी कल्पना और ध्यान से सुनना आज नए मौके खोल सकता है। एक आसान क्रिएटिव काम की योजना बनाने के लिए शांत समय का उपयोग करें। घर पर, धैर्यवान व मददगार काम दूसरों को खुशी देंगे।
    मीन

    19 फरवरी के दिन प्रोफेशनल सफलता के साथ-साथ एक खुशहाल लव रिलेशनशिप का आनंद लेंगे। आपकी फाइनेंशियल सिचूऐशन अच्छी है। आज के दिन स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हो सकती हैं।

  • बर्तन मांजकर खेलने उतरे पाकिस्तानी खिलाड़ी, वतन वापसी पर कप्तान का गुस्सा फूटा

    बर्तन मांजकर खेलने उतरे पाकिस्तानी खिलाड़ी, वतन वापसी पर कप्तान का गुस्सा फूटा

     कराची/लाहौर

    पाकिस्तान हॉकी टीम के ऑस्ट्रेलिया दौरे से लौटते ही एक बड़ा विवाद सामने आ गया है. टीम के कप्तान शकील अम्माद बट (Shakeel Ammad Butt) ने पाकिस्तान हॉकी फेडरेशन (PHF) पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उनका कहना है कि खिलाड़ियों को मैच खेलने से पहले बर्तन तक मांजने पड़े और कई घंटों तक सड़कों पर भटकना पड़ा.

    लाहौर एयरपोर्ट पर मीडिया से बातचीत में बट ने साफ कहा, 'अब बहुत हो चुका है… जब खिलाड़ी मैच खेलने से पहले किचन साफ करें और बर्तन धोएं, तो उनसे आप किस तरह के नतीजों की उम्मीद करेंगे?'

    13-14 घंटे एयरपोर्ट पर इंतजार

    ऑस्ट्रेलिया पहुंचने के बाद टीम को सबसे पहले सिडनी एयरपोर्ट पर 13-14 घंटे इंतजार करना पड़ा. इसके बाद जब टीम कैनबरा में FIH Pro League मुकाबलों के लिए होटल पहुंची तो पता चला कि बुकिंग ही नहीं की गई थी.

    खिलाड़ियों को बताया गया कि होटल प्रबंधन को अग्रिम भुगतान नहीं मिला है. नतीजा यह हुआ कि टीम को घंटों तक इंतजार करना पड़ा और अस्थायी व्यवस्था होने तक इधर-उधर भटकना पड़ा. अगले ही दिन पाकिस्तान को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पहला मैच खेलना था, जिसमें टीम 2-3 से हार गई. दौरे के दौरान पाकिस्तान को मेजबान ऑस्ट्रेलिया और जर्मनी दोनों से हार का सामना करना पड़ा.

    10 दिन का Airbnb, 13 दिन का दौरा
    कप्तान बट ने खुलासा किया कि टीम के लिए Airbnb आवास सिर्फ 10 दिनों के लिए बुक किया गया था, जबकि दौरा 13 दिनों का था. मजबूरी में खिलाड़ियों को बाद में सस्ते ठिकाने पर शिफ्ट होना पड़ा.

    उन्होंने आरोप लगाया कि फेडरेशन खिलाड़ियों से सच्चाई छिपाता रहा और मीडिया से बात करने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई थी. बट ने कहा, 'मैं इसलिए बोल रहा हूं क्योंकि जो हमने ऑस्ट्रेलिया में झेला, वह अस्वीकार्य है.'

    10 मिलियन रुपये का सवाल
    इस पूरे विवाद के बीच Pakistan Sports Board ने पुष्टि की है कि उसने टीम के होटल इंतजाम के लिए PHF को 10 मिलियन पाकिस्तानी रुपये से अधिक की राशि जारी की थी.

    PSB के महानिदेशक नूर उस सबा (Noor us Sabah) ने कहा है कि मामले की विस्तृत रिपोर्ट प्रधानमंत्री को सौंपी जाएगी.

    प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, जो PHF के पैट्रन-इन-चीफ भी हैं, ने पूरे प्रकरण की जांच के आदेश दे दिए हैं.

    विदेशी कोच की मांग
    कप्तान बट ने यह भी कहा कि यदि पाकिस्तान हॉकी को आगे बढ़ना है तो विदेशी कोच और बेहतर प्रबंधन की जरूरत है. बट ने कहा, 'हमारे पास प्रतिभाशाली खिलाड़ियों का अच्छा संयोजन है, लेकिन सही दिशा और पेशेवर प्रबंधन के बिना आगे बढ़ना मुश्किल है.'

    पाकिस्तान हॉकी की साख पर सवाल
    एक समय दुनिया पर राज करने वाली पाकि
    स्तान हॉकी अब प्रशासनिक अव्यवस्था और वित्तीय पारदर्शिता के संकट से जूझ रही है. खिलाड़ियों की यह खुली नाराजगी बताती है कि मामला सिर्फ हार-जीत का नहीं, बल्कि सिस्टम की जवाबदेही का है.

    अब सबकी नजर इस बात पर है कि जांच के बाद क्या कार्रवाई होती है और क्या पाकिस्तान हॉकी को उसका खोया हुआ सम्मान वापस मिल पाएगा.

  • छत्तीसगढ़ से झारखंड गौवंश तस्करी का खुलासा, पुलिस पीछा में पलटी पिकअप, 3 गायों की मौत

    छत्तीसगढ़ से झारखंड गौवंश तस्करी का खुलासा, पुलिस पीछा में पलटी पिकअप, 3 गायों की मौत

    जशपुर

    जशपुर जिले से गौवंश तस्करी का सनसनीखेज मामला सामने आया है। तस्कर एक पिकअप वाहन में 10 गायों को भरकर छत्तीसगढ़ से झारखंड ले जा रहे थे। पुलिस ने जब वाहन रोकने का प्रयास किया तो चालक तेज रफ्तार में पिकअप भगाने लगा, इसी दौरान वाहन अनियंत्रित होकर पलट गया, जिससे 3 गायों की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं तस्कर मौके से फरार हो गए। यह मामला तपकरा थाना क्षेत्र का है।

    जानकारी के अनुसार, तपकरा पुलिस को गौवंश तस्करी की सूचना मिली थी। इसके बाद रात्री गश्त के दौरान पुलिस ने संदिग्ध पिकअप वाहन को रोकने की कोशिश की। पुलिस को देखते ही चालक ने वाहन की रफ्तार बढ़ा दी और भागने लगा। तेज रफ्तार के कारण ग्राम साजबाहर के पास पिकअप अनियंत्रित होकर सड़क किनारे गड्ढे में जा पलटी। हादसे में पिकअप में लदी 10 गायों में से 3 की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि अन्य गायें घायल हो गईं।

    दुर्घटना के तुरंत बाद पिकअप में सवार तस्कर मौके का फायदा उठाकर फरार हो गए। सूचना मिलते ही तपकरा पुलिस मौके पर पहुंची और घायल गायों को सुरक्षित स्थान पर भिजवाने की कार्रवाई की। वहीं पुलिस ने दुर्घटनाग्रस्त पिकअप वाहन को जब्त कर लिया है और अज्ञात तस्करों के खिलाफ गौवंश संरक्षण अधिनियम सहित अन्य संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर लिया गया है। फिलहाल फरार आरोपियों की तलाश की जा रही है।

  • मिस्ट्री डेथ बनी पहेली: होटल से युवक बाहर नहीं निकला, फिर छात्रा ने कैसे लगा ली फांसी?

    मिस्ट्री डेथ बनी पहेली: होटल से युवक बाहर नहीं निकला, फिर छात्रा ने कैसे लगा ली फांसी?

    शिवपुरी

    फिजिकल थानांतर्गत खिन्नी नाके पर स्थित होटल युवराज में सोमवार को एक छात्रा की संदिग्ध मौत का मामला दो दिन बाद भी अबूझ पहेली बना हुआ है। फिलहाल पुलिस भी मामले में कुछ स्पष्ट रूप से बताने को तैयार नहीं है। फिलहाल मर्ग कायम कर मामले की विवेचना की बात कही जा रही है। उल्लेखनीय है कि 16 फरवरी को सेसई निवासी नैनसी पुत्र राजू राठौर उम्र 20 साल सुबह घर से कॉलेज का फार्म भरने जाने की बात कह कर गांव के अंकुश रावत के साथ खिन्नी नाके के पास स्थित होटल युवराज में पहुंची थी। जहां उसकी संदिग्ध हालातों में मौत हो गई।

    फिलहाल मौत का कारण स्पष्ट नहीं हो सका है। पुलिस पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के उपरांत ही कुछ बता पाने की बात कह रही है। पुलिस ने अंकुश रावत नाम के जिस युवक को हिरासत में लिया था उसे भी छोड़ दिया है। इस मामले में बुधवार को जब होटल युवराज के स्टाफ से घटना के संबंध में जानकारी जुटाने का प्रयास किया तो स्टाफ ने बताया कि सोमवार को लड़का-लड़की दोनों एक साथ कार में सवार होकर सुबह करीब 11:15 बजे होटल पहुंचे थे।

    उन्होंने कमरा नंबर 308 बुक किया। लगभग दो घंटे बाद लड़का, लड़की को बेहोशी की हालत में लेकर नीचे आया और बताया कि अचानक इसकी तबीयत खराब हो गई है। होटल स्टाफ के अनुसार लड़के के कहने पर उन्होंने मदद करके लड़की को कार में रखवाया और वह चला गया। स्टाफ की मानें तो उन्हें प्रथम दृष्टया कमरे में फांसी जैसा कुछ नजर नहीं आया। इसके बाद पुलिस ने कमरे को सील कर दिया है। कमरे की चाबी टीआई मेडम के पास है।
    अभी पोस्टमार्टम रिपोर्ट नहीं आई, लड़का फांसी लगाना बता रहा

    टीआईइस मामले में फिजिकल थाना प्रभारी टीआई नम्रता भदौरिया का कहना है कि लड़के ने प्रारंभिक पूछताछ में यह बताया कि, लड़की उस पर शादी का दबाव बना रही थी, उसने फिलहाल शादी करने से यह कहते हुए इनकार कर दिया कि, वह शादी तो घर वालों की मर्जी से ही करेगा। इसके बाद लड़की ने फांसी लगा ली। हालांकि लड़के की कमरे में मौजूदगी के दौरान लड़की द्वारा फांसी लगा पाने के संबंध में टीआई का कहना है कि लड़के के अनुसार वह जब बाहर चला गया था, तब लड़की ने अपने दुपट्टे से फांसी लगाई, जबकि होटल के स्टाफ की मानें तो लड़का-लड़की जब कमरे में गए उसके बाद कोई भी होटल से बाहर नहीं निकला।

  • उमरिया के स्कूल में छात्राओं के झूमने से फैली दहशत, डॉक्टर बोले– नॉर्मल; ग्रामीणों ने कराई झाड़-फूंक

    उमरिया के स्कूल में छात्राओं के झूमने से फैली दहशत, डॉक्टर बोले– नॉर्मल; ग्रामीणों ने कराई झाड़-फूंक

    नौरोजाबाद

    उमरिया जिले के करकेली जनपद अंतर्गत कल्दा गांव मे स्थित शासकीय हाई स्कूल की चार छात्राएं अचानक झूमने लगीं। छात्राओं के झूमने का वीडियो इंटरनेट मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में विद्यालय में अध्ययनरत कुछ बच्चियों के कथित तौर पर “भूत लगने” की बात सामने आई है, जिसे लेकर पूरे क्षेत्र में चर्चा का माहौल बना हुआ है। हालांकि सीएससी पाली के डा पवन कुमार दीपांक का कहना है कि उन्होंने बच्चियों की जांच की है और वे पूरी तरह से सामान्य हैं।

    उनका कहना है कि उनसे लोग इस मामले को भूत-प्रेत का बता रहे थे पर इस तरह की बातों को मेडिकल साइंस में किसी भी तरह की मान्यता नहीं है।
    कराई गई झाड़फूंक

    बताया जा रहा है कि बच्चियों की तबीयत अचानक बिगड़ने और अजीब व्यवहार करने की बात सामने आने के बाद ग्रामीणों ने इसे अंधविश्वास से जोड़ दिया। इसके बाद गांव के पंडा-पुजारी द्वारा झाड़-फूंक की प्रक्रिया शुरू कर दी गई।

    तेजी से वायरल हो रहा वीडियो

    जानकारी के अनुसार बच्चियों को गांव के ही प्रसिद्ध धार्मिक स्थल महोबादादर मंदिर ले जाया गया, जहां कथित रूप से उनका झाड़-फूंक के जरिए उपचार किया जा रहा है। वीडियो आने के बाद दौड़े अधिकारी इस पूरी घटना का वीडियो किसी ग्रामीण द्वारा बनाकर इंटरनेट मीडिया पर अपलोड कर दिया गया, जिसके बाद यह वीडियो तेजी से वायरल हो गया।

    यह भी पढ़ें- थाने पहुंची महिला बोली- पहले पति ने बेचा, खरीदने वालों ने जहां सगाई की वहां से भी अपहरण कर लिया
    शिक्षा विभाग में चर्चा शुरू

    वीडियो बहुप्रसारित होने के बाद शिक्षा विभाग और प्रशासनिक स्तर पर भी मामले को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। और पाली अनुविभागीय अधिकारी मीनाक्षी इंगले की भी प्रतिक्रिया सामने आई है। उन्होंने कहा है कि बीईओ सरिता जैन को उन्होंने मामले की जांच के निर्देश दिए हैं। जिला शिक्षा अधिकारी आरएस मरावी का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है।

     

  • लोकायुक्त का शिकंजाः रिश्वत की दूसरी किस्त लेते पटवारी रंगे हाथों गिरफ्तार

    लोकायुक्त का शिकंजाः रिश्वत की दूसरी किस्त लेते पटवारी रंगे हाथों गिरफ्तार

    मंदसौर

    मध्यप्रदेश में भ्रष्ट अधिकारी कर्मचारियों के खिलाफ लोकायुक्त की कार्रवाई लगातार जारी है। इसके बाद भी भ्रष्टाचार के मामले कम नहीं हो रहे हैं। ताजा मामला प्रदेश के मंदसौर जिले का है जहां पटवारी को रिश्वत लेते लोकायुक्त पुलिस ने रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। समाचार के लिखे जाने तक आरोपी पटवारी के खिलाफ कार्रवाई जारी थी।

    सुवासरा तहसील का पटवारी हरीश पाटीदार
    दरअसल मामला मंदसौर जिले के सुवासरा तहसील का है जहा पदस्थ पटवारी हरीश पाटीदार रिश्वत लेते हुए पकड़ाया है। उसने भूमि के नामांतरण के लिए 40 हजार की रिश्वत मांगी थी। इसकी शिकायत पीड़ित ने लोकायुक्त से की थी।

    उज्जैन लोकायुक्त पुलिस की कार्रवाई
    शिकायत की पुष्टि के बाद दूसरी किस्त में 30 हजार रुपए लेते हुए लोकायुक्त की टीम ने उसे गिरफ्तार कर लिया। यह कार्रवाई उज्जैन लोकायुक्त पुलिस ने की है। आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं तहत कार्रवाई की जा रही है।