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  • तिरुपति लड्डू विवाद पर जांच पूरी, सुप्रीम कोर्ट ने सुब्रमण्यम स्वामी की याचिका ठुकराई

    तिरुपति लड्डू विवाद पर जांच पूरी, सुप्रीम कोर्ट ने सुब्रमण्यम स्वामी की याचिका ठुकराई

    आंध्र प्रदेश
    तिरुपति लड्डू विवाद मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी की याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि तिरुपति मंदिर में मिलावटी घी से लड्डू बनाए जाने के मामले में एसआईटी ने जांच पूरी कर ली है। राज्य सरकार ने अगर अगल से जांच करवाई है तो इसमें भी कुछ गलत नहीं है। स्वामी ने राज्य सरकार की एक सदस्यीय जांच समिति के खिलाफ कोर्ट का रुख किया था।

    पर्याप्त आधार नहीं
    स्वामी ने राज्य सरकार की एक सदस्यीय समिति के गठन को चुनौती दी थी। सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की पीठ ने कहा कि याचिका के समर्थन में पर्याप्त सबूत नहीं हैं। एक सदस्यीय समिति और सुप्रीम कोर्ट की तरफ से गठित की गई एसआईटी की जांच एक दूसरे को ओवरलैप नहीं कर रही हैं। दोनों जांचों का दायरा अलग-अलग है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि प्रशासनिक जांच और चार्जशीट से जुड़ी आपराधिक प्रक्रिया में कोई टकराव नहीं हैं। ऐसे में दोनों प्रक्रियाएं एक साथ चल सकती हैं।

    एसआईटी की जांच में क्या पाया गया
    एसआईटी की जांच में कहा गया है कि भगवान वेंकटेश्वर के मंदिर में प्रसाद बनाने के लिए जिस घी का इस्तेमाल होता था उसमें केमिकल और पामोलिन तेल का इस्तेमाल किया जाता था। ईडी पता लगाएगी कि इस तरह का मिलावटी घी बेचकर किसने कितने पैसे कमाए हैं। हालांकि रिपोर्ट में कहीं भी चर्बी वाले घी की बात नहीं कही गई थी।

    आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने युवजन श्रमिक रायथू कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) नेताओं पर तिरुपति में लड्डू (प्रसाद) बनाने में इस्तेमाल घी में कथित मिलावट के मामले में दूसरों पर दोष मढ़कर जिम्मेदारी से बचने का प्रयास करने का शनिवार को आरोप लगाया था। मुख्यमंत्री ने पलनाडु जिले के विनुकोंडा में एक जनसभा को संबोधित करते हुए दावा किया कि वाईएसआरसीपी नेताओं ने तिरुपति लड्डू में मिलावट की जांच में कई बाधाएं खड़ी कीं और यहां तक ​​कि उच्चतम न्यायालय का रुख भी किया।

    आंध्र सरकार ने एसआईटी की जांच रिपोर्ट की समीक्षा करने के लिए भी एक रिटायर्ड आईएएस अधिकारी की अध्यक्षता में समिति गठित की है। आईएएस अधिकारी दिनेश कुमार के नेतृत्व में एक सदस्यीय समिति गठित की जो दोषी लोगों के खिलाफ उचित कार्रवाई की सिफारिश करेगी। सुप्रीम कोर्ट की ओर से नियुक्त सीबीआई नीत विशेष जांच दल (एसआईटी) द्वारा जांच पूरी करने और आरोपपत्र दाखिल करने के बाद इस समिति का गठन किया गया है।

     

  • 33 घंटे के महाजाम का असर: 1.2 लाख लोगों को मिलेगा टोल रिफंड, खातों में लौटेंगे करोड़ों रुपये

    33 घंटे के महाजाम का असर: 1.2 लाख लोगों को मिलेगा टोल रिफंड, खातों में लौटेंगे करोड़ों रुपये

    मुंबई
    मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर 3 फरवरी को लगे भीषण जाम में अगर आप भी फंसे थे आपके लिए एक खुशखबरी है। कभी भी आपके अकाउंट में टोल टैक्स रिफंड हो सकता है। महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इस महीने की शुरुआत में मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर एक गैस टैंकर दुर्घटना के बाद भीषण यातायात जाम में फंसे एक लाख से अधिक वाहन चालकों को कुल मिलाकर 5.16 करोड़ रुपये का टोल रिफंड मिलेगा। जानकारी के मुताबिक कुल 1.2 लाख यात्रियों को टोल रिफंड होगा।

    33 घंटे का भीषण जाम
    तीन फरवरी को एक्सप्रेसवे के खोपोली खंड पर एक गैस टैंकर पलट गया, जिससे 33 घंटे तक यातायात ठप रहा और कई किलोमीटर तक यातायात अवरूद्ध रहा, जिससे कई वाहन चालकों और यात्रियों को पानी, भोजन और अन्य बुनियादी सुविधाओं की कमी का सामना करना पड़ा। दुर्घटना के बाद, प्रशासन ने टोल वसूली को तत्काल निलंबित करने का आदेश दिया था। हालांकि, तब तक कई वाहन चालकों के फास्टैग खातों से टोल शुल्क पहले ही काटे जा चुके थे।

    अधिकारी ने बताया, 'टोल वसूली रोकने का आदेश जारी होने के बावजूद वाहन मालिकों से वसूल की गई पूरी राशि वापस करने का निर्णय लिया गया है। 5.16 करोड़ रुपये की यह वापसी राशि एमएसआरडीसी द्वारा भुगतान की जाएगी। यह राशि अगले कुछ दिनों में, प्रभावित वाहन मालिकों के फास्टैग खातों में सीधे जमा कर दी जाएगी।'

    रिपोर्ट के मुताबिक आईआरबी इन्फ्रास्ट्रक्चर से फास्टैग कटौती का डेटा मांगा गया था। एमएसआरडीसी ने आईआरबी से पूछा था कि आखिर टोल कलेक्शन रोकने का आदेश होने के बाद भी टोल क्यों वसूल जा रहा था। इस भीषण ट्रैफिक जाम में सभी यात्रियों और खासकर बुजुर्गों और महिलाओं को बड़ी मुसीबत उठानी पड़ी थी। कई लोग वापस जाने का विचार कर रहे थे लेकिन उनके पास गाड़ी मुड़ाने का भी ऑप्शन नहीं था। वहीं जब टोल कलेक्शन की बात सामने आई तो लोगों को गुस्सा और बढ़ गया।

    कब मिल सकता है टोल का रिफंड
    टोल रिफंड करने को लेकर कुछ नियम हैं। अगर ज्यादा लंबा जाम होता है और ज्यादा देर तक यह खुल नहीं पाता है तब टोल रिफंड किया जा सकता है। अगर फास्टैग की गड़बड़ी की वजह से गलत पैसे कटते हैं तब भी पैसे रिफंड किए जाते हैं। इसके अलावा बिना टोल प्लाजा से गुजरे ही अगर टोल कटता है तो इसे रिफंड किया जाता है। एक बार गुजरने पर दो बार डिडक्शन होने पर भी रिफंड करने का नियम है।

     

  • नेपाल में धार्मिक स्थल पर बवाल, वीरगंज में कर्फ्यू; लाठीचार्ज के बाद सेना तैनात

    नेपाल में धार्मिक स्थल पर बवाल, वीरगंज में कर्फ्यू; लाठीचार्ज के बाद सेना तैनात

    वीरगंज
    नेपाल के सीमावर्ती शहर वीरगंज में दो गुटों के बीच हुई हिंसक झड़प और पथराव के बाद स्थिति तनावपूर्ण देखते हुए परसा जिला प्रशासन ने सोमवार सुबह 9:45 बजे से अगले आदेश तक वीरगंज महानगर क्षेत्र में अनिश्चितकालीन कर्फ्यू लागू कर दिया है। सुरक्षा व्यवस्था को पुख्ता करने के लिए नेपाल पुलिस के साथ-साथ नेपाल सेना और आर्म्ड पुलिस फोर्स (एपीएफ) को सड़कों पर तैनात किया गया है। उल्लेखनीय है कि एक धार्मिक स्थल के पास विवाद से रविवार को भड़की हिंसा में आधा दर्जन लोग घायल हो गए थे।

    पुलिस ने हालात को नियंत्रण में लाने के लिए लाठीचार्ज भी किया था। ​पर्सा के डीएसपी हरिबहादुर बस्नेत के अनुसार, विवाद वीरगंज वार्ड नं. 11 स्थित श्रीपुर में एक धार्मिक स्थल के पास शुरू हुआ। आरोप है कि सड़क पर खड़े स्थानीय युवकों के साथ बिना किसी ठोस कारण के मारपीट की गई, जिससे स्थिति अनियंत्रित हो गई और दोनों पक्षों में पथराव शुरू हो गया। इस हिंसा में ललन महतो, अमर महतो और धीरज साह सहित करीब आधा दर्जन लोग घायल हुए हैं, जिनका उपचार नारायणी अस्पताल में चल रहा है।​

    पुलिस ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए दो संदिग्धों को हिरासत में लिया है। घटना का मुख्य आरोपी नेकपा (एमाले) मधेस प्रदेश कमेटी के सदस्य मोहम्मद निजाम फिलहाल फरार बताया जा रहा है। पुलिस ने उनके घर पर छापेमारी की, लेकिन वह वहां नहीं मिला। प्रशासन उनकी तलाश में सघन छापेमारी कर रहा है।स्थानीय लोगों का आरोप है कि आम चुनाव के समय साजिश के तहत यह वाक्या हुआ,जिससे सांप्रदायिक तनाव कायम हो गया। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि कर्फ्यू के दौरान किसी भी प्रकार की सभा, जुलूस, प्रदर्शन या बैठक करना पूर्णतः वर्जित है। आदेश का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध सुरक्षा बल सख्त कानूनी कार्रवाई करेंगे।​

    वीरगंज के हालातों का सीधा असर भारतीय सीमा पर भी पड़ा है। अचानक कर्फ्यू से लग्न और होली के बाजार प्रभावित हुआ है। दोनो ओर लोग फंस गए हैं। रक्सौल और वीरगंज के बीच मैत्री पुल के रास्ते होने वाली आम आवाजाही पूरी तरह ठप है।भारतीय सीमा पर तैनात एसएसबी और स्थानीय पुलिस हाई अलर्ट मोड पर है। बॉर्डर के चप्पे-चप्पे पर नजर रखी जा रही है ।ताकि सीमा पार से कोई अवांछित तत्व शांति भंग न कर सके।

     

  • लाड़ली बहनों को मिलेगा डबल तोहफा! CM मोहन यादव ने ₹3000 की तारीख का किया ऐलान

    लाड़ली बहनों को मिलेगा डबल तोहफा! CM मोहन यादव ने ₹3000 की तारीख का किया ऐलान

    भोपाल
    विधानसभा में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव(CM Mohan Yadav Ladli Behna Yojana) ने सोमवार को स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना के लिए राशि बढ़ाकर तीन हजार रुपये करने का वादा भाजपा के संकल्प (घोषणा) पत्र में किया गया है। यह पांच साल यानी 2028 तक के लिए है। उन्होंने कहा कि किसी को चिंता करने की जरूरत नहीं है, हम तीन हजार रुपये देकर रहेंगे। नए पंजीयन को लेकर उन्होंने कहा कि धीरे-धीरे सब होगा। कांग्रेस के सदस्य सरकार के जवाब से संतुष्ट नहीं हुए और विरोध स्वरूप बहिर्गमन कर गए।

    प्रश्नकाल में उठा मुद्दा
    प्रश्नकाल में कांग्रेस के महेश परमार ने नए पंजीयन न होने, तीन हजार रुपये का वादा करने के बाद भी न देने और 60 वर्ष के होते ही योजना से हितग्राही का नाम काटने का मुद्दा उठाया। साथ ही कहा कि सेना की अधिकारी सोफिया कुरैशी का अपमान करने वाले मंत्री विजय शाह यहां बैठे हैं। उन्होंने रतलाम में कहा कि सीएम के सम्मान कार्यक्रम में लाड़ली बहना नहीं आएंगी तो नाम काट देंगे। वहीं, राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा पर भी धमकाने का आरोप लगाया।

    नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने पंजीयन प्रारंभ करने की तिथि पूछी। महिला एवं बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया ने बताया कि योजना के प्रारंभ से प्रश्न दिनांक तक 1,31,06,525 महिलाओं का पंजीयन किया गया। वर्तमान में 1,25,29,051 पंजीयन सक्रिय हैं। नए पंजीयन का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।

    लाड़ली बहना योजना में मृत्यु होने या 60 वर्ष से अधिक आयु होने पर हितग्राही को योजना से बाहर किया जाता है। 60 वर्ष से अधिक आयु होने पर अन्य योजना में पात्रता अनुसार आवेदन किया जा सकता है।

    राशि और व्यय का ब्यौरा
    वर्ष 2025-26 में 1,500 रुपये प्रतिमाह के हिसाब से लाड़ली बहनों को 18,528 करोड़ रुपये दिए जा चुके हैं। एक हजार रुपये प्रतिमाह से प्रारंभ हुई योजना की राशि में निरंतर वृद्धि हो रही है। इसका उपयोग बहनें शिक्षा, पोषण सहित अन्य कार्यों में कर रही हैं।

    विपक्ष ने किया बहिर्गमन
    मुख्यमंत्री ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि जब योजना लागू हुई थी तब कहा जाता था कि यह चुनावी योजना है और बंद हो जाएगी, लेकिन आज हम 1,500 रुपये प्रतिमाह दे रहे हैं। तीन हजार रुपये देने की घोषणा हमारे संकल्प पत्र में है, जो पांच वर्ष के लिए है और हम देकर रहेंगे। पंजीयन पर उन्होंने कहा कि धीरे-धीरे सब होगा। विपक्ष जवाब से संतुष्ट नहीं हुआ और नारेबाजी करते हुए बहिर्गमन कर गया।

  • सतत जीवन शैली की ओर अग्रसर महाविद्यालय: ‘वेस्ट टू वेल्थ’ कार्यशाला में नवाचारों की गूंज

    सतत जीवन शैली की ओर अग्रसर महाविद्यालय: ‘वेस्ट टू वेल्थ’ कार्यशाला में नवाचारों की गूंज

    भोपाल

    आज दिनांक 23 फरवरी 2026 को महाविद्यालय में इको क्लब के तत्वावधान में पर्यावरण शिक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का विषय “सतत जीवन शैली : वेस्ट टू वेल्थ” रहा। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को अपशिष्ट प्रबंधन, संसाधनों के पुनः उपयोग एवं सतत विकास की दिशा में प्रेरित करना था। कार्यक्रम का शुभारंभ सरस्वती वंदना एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुआ।

    महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. उमेश कुमार धुर्वे ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि पर्यावरण संरक्षण आज समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने छात्राओं को शोध, नवाचार एवं सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से सतत विकास लक्ष्यों की दिशा में कार्य करने के लिए प्रेरित किया। साथ ही इको क्लब द्वारा आयोजित इस सार्थक पहल की सराहना करते हुए भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रम निरंतर आयोजित करने की बात कही।

    इसके पश्चात इको क्लब प्रभारी डॉ. सतीश बालापुरे ने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए बताया कि इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों में पर्यावरणीय उत्तरदायित्व की भावना विकसित करना है। उन्होंने अपशिष्ट प्रबंधन, वृक्षारोपण एवं जैव विविधता संरक्षण से जुड़े आगामी कार्यक्रमों की जानकारी भी साझा की।

    मुख्य वक्ता एवं पर्यावरणविद डॉ. आनंद पटेल हेक्सा हिवा इंटरनेशनल (HHI), भोपाल ने अपने उद्बोधन में “वेस्ट टू वेल्थ” की अवधारणा को व्यवहारिक रूप से समझाते हुए अनेक नवाचारों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि संतरे एवं नींबू के छिलकों से बायो-एंज़ाइम तैयार कर घरेलू स्वच्छता एवं जैविक उपयोग में लाया जा सकता है। साथ ही प्लास्टिक कचरे के पुनः उपयोग हेतु इको ब्रिक निर्माण की प्रक्रिया समझाई, जिसमें खाली प्लास्टिक बोतलों में अपशिष्ट प्लास्टिक भरकर उपयोगी निर्माण सामग्री तैयार की जाती है। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण हेतु मल्टी लेयर सीड बॉल की तकनीक समझाई, जिसके माध्यम से बीजों को मिट्टी, खाद एवं सुरक्षात्मक परतों के साथ तैयार कर बड़े स्तर पर हरितावरण बढ़ाया जा सकता है।

    डॉ. पटेल ने सर्कुलर इकॉनॉमी के विचार को स्पष्ट करते हुए बताया कि संसाधनों का पुनर्चक्रण एवं पुनः उपयोग ही सतत विकास का आधार है। उन्होंने “मिशन लाइफ” की 7 थीम के आधार पर दैनिक जीवन में अपनाए जा सकने वाले 70 व्यवहारिक उपायों की जानकारी भी दी।

    अंत में उन्होंने महाविद्यालय को एक इको-फ्रेंडली सोलर लैंप भेंट स्वरूप प्रदान किया, जो ऊर्जा संरक्षण एवं हरित जीवन शैली का प्रेरणादायी प्रतीक रहा।
    द्वितीय वक्ता एवं विषय विशेषज्ञ उषा दुबे नर्मदापुरम ने अपने संबोधन में दैनिक जीवन में छोटे-छोटे सकारात्मक परिवर्तनों के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने छात्राओं को सिंगल यूज़ प्लास्टिक से बचने, रसोई अपशिष्ट से कंपोस्ट तैयार करने तथा कपड़े एवं कागज़ के पुनः उपयोग के उपाय बताए। उन्होंने कहा कि यदि प्रत्येक विद्यार्थी अपने घर और समाज में पर्यावरण के प्रति जागरूकता फैलाए, तो “वेस्ट टू वेल्थ” एक जन आंदोलन का रूप ले सकता है।

    अंत में इको क्लब सह-प्रभारी डॉ. रजनीकांत वर्मा ने अपने वक्तव्य में कहा कि “वेस्ट टू वेल्थ” केवल एक विचार नहीं, बल्कि व्यवहार में अपनाई जाने वाली जीवन शैली है। उन्होंने छात्राओं से घर एवं परिसर में कचरे का पृथक्करण, जैविक खाद निर्माण एवं पुनर्चक्रण की आदत विकसित करने की अपील की। उन्होंने कहा कि युवाओं की सक्रिय भागीदारी से ही पर्यावरण संरक्षण की दिशा में ठोस परिवर्तन संभव है।
    मंच संचालन डॉ. मनीष दीक्षित ने किया तथा डॉ. रजनीकांत वर्मा ने सभी का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर प्राध्यापकगण रजनीश जाटव, मनोज कुमार प्रजापति, धीरेंद्र दुबे, डॉ. दुर्गा मीना, प्रवीण साहू, मयंक गौर, रजनी हरियाले, नीलम दुबे,  नीलू लोवंशी, राहुल मालवीय एवं इको क्लब इकाई की छात्राएँ तथा महाविद्यालय का समस्त स्टाफ उपस्थित रहा। कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

     

  • पड़ोसी देश में दाल संकट गहराया, आम लोगों की थाली से गायब हो रही जरूरी चीज

    पड़ोसी देश में दाल संकट गहराया, आम लोगों की थाली से गायब हो रही जरूरी चीज

    फैसलाबाद
    पड़ोसी देश पाकिस्तान की आर्थिक बदहाली की खबरें नई नहीं हैं। खस्ताहाल पाकिस्तान दुनिया की कई वैश्विक संस्थानों से कर्ज लेकर अपनी जरूरतें पूरी कर पा रहा है। अब हाल ही में यह खबरें सामने आई हैं कि पाकिस्तान में दाल के लिए हाहाकार मचा हुआ है। स्थिति यह है कि पाकिस्तान अब अपनी जरूरतें पूरी करने के लिए लगभग पूरी तरह आयात पर निर्भर हो चुका है। पाकिस्तान में दाल का उत्पादन लगातार घट रहा है, जिससे देश को जरूरतें पूरी करने के लिए हर साल करीब 98 करोड़ डॉलर आयात पर खर्च करने पड़ रहे हैं।

    रिपोर्ट के मुताबिक कृषि विशेषज्ञों ने इस हालात पर गंभीर चिंता जताई है और कहा है कि अगर उत्पादन नहीं बढ़ा तो आयात पर निर्भरता और बढ़ेगी। पंजाब पल्सेज इंपोर्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष और ग्रेन मार्केट के चेयरमैन राणा मुहम्मद तैय्यब ने बताया कि 1998 से पहले पाकिस्तान दाल का प्रमुख निर्यातक देश था। लेकिन परवेज मुशर्रफ के दौर में लगाए गए निर्यात बैन के बाद किसानों का उत्साह कम हो गया, क्योंकि दाल कम मुनाफे वाली फसल बन गई। जानकारों के मुताबिक देश में हर साल करीब 16.2 लाख टन दाल की खपत होती है, जिसमें से लगभग 10.7 लाख टन आयात की जाती है। यानी पाकिस्तान को देश में खपत होने वाली करीब 80 प्रतिशत दाल आयात करनी पड़ती है।

    बारिश ने भी तरसाया
    तैय्यब ने जलवायु परिवर्तन के असर का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि थल जैसे वर्षा आधारित इलाकों में समय पर बारिश हो जाए तो पैदावार 35 प्रतिशत तक बढ़ सकती है, लेकिन बारिश कम होने पर भारी नुकसान होता है और किसान अगले सीजन में दाल बोने से हिचकते हैं।

    जानकारों ने जताई चिंता
    ये मुद्दे विश्व दाल दिवस के मौके पर आयूब एग्रीकल्चरल रिसर्च इंस्टीट्यूट के पल्सेज रिसर्च इंस्टीट्यूट में आयोजित एक सेमिनार में उठाए गए। विशेषज्ञों ने कहा कि पाकिस्तान की सालाना जरूरत करीब 15 लाख टन है, लेकिन लोकल उत्पादन इसका सिर्फ एक छोटा हिस्सा ही पूरा कर पा रहा है। इसी कारण हर साल करीब 10 लाख टन दाल आयात करनी पड़ती है।

    AARI के पल्सेज सेक्शन के चीफ साइंटिस्ट खालिद हुसैन ने कहा कि दाल मानव पोषण और मिट्टी की उर्वरता दोनों के लिए जरूरी है। लेकिन सीमित मुनाफा और निर्यात बैन के कारण किसान इसकी खेती से बच रहे हैं। दाल उत्पादन बढ़ाने के मकसद से एक प्रस्ताव तैयार कर संबंधित अधिकारियों को भेजा गया है, लेकिन उसे अभी तक मंजूरी नहीं मिली है।

     

  • देवेंद्र फडणवीस बोले- ‘अजित दादा जैसा नेता दुर्लभ’, उनके जाने से राजनीति में बड़ा खालीपन

    देवेंद्र फडणवीस बोले- ‘अजित दादा जैसा नेता दुर्लभ’, उनके जाने से राजनीति में बड़ा खालीपन

    मुंबई
    महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सोमवार को कहा कि अजित पवार ऐसे नेता थे जो महाराष्ट्र के सबसे अच्छे मुख्यमंत्री बन सकते थे, लेकिन राज्य को उनका नेतृत्व उस रूप में कभी नहीं मिल पाया। उनके जाने से एक खालीपन पैदा हो गया है और अब वैक्यूम शब्द का असली मतलब समझ में आ रहा है। विधानसभा में बजट सत्र के पहले दिन शोक प्रस्ताव के दौरान अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इस खालीपन को भर पाना नामुमकिन है। उन्होंने कहा कि “दादा” जैसा नेता फिर कभी देखने को नहीं मिलेगा। फडणवीस ने बताया कि विधानसभा सत्र के दौरान अजित पवार हमेशा सबसे पहले विधान भवन पहुंचते थे और अपनी सीट पर मौजूद रहते थे। सदन की कार्यवाही कितनी भी लंबी क्यों न चले, वह अंत तक अपनी जगह पर डटे रहते थे। यह बहुत पीड़ादायक है कि अब वह हमारे बीच नहीं हैं।
    मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि इस वर्ष अजित पवार अपना 12वां बजट पेश करते और अगले साल 13वां बजट पेश कर बैरिस्टर शेषराव वानखेड़े के रिकॉर्ड की बराबरी कर लेते, लेकिन उससे पहले ही उनका निधन हो गया। इस बार बजट पेश करने की जिम्मेदारी खुद संभाल रहे फडणवीस ने कहा कि बजट के मामले में अजित पवार कभी भी कठिन फैसले लेने से पीछे नहीं हटते थे। उन्होंने याद दिलाया कि जब वित्त विभाग ने ‘लड़की बहिन’ योजना पर भारी आर्थिक बोझ का हवाला देते हुए दोबारा विचार करने का सुझाव दिया था, तब भी अजित पवार अपने फैसले पर कायम रहे और यह सुनिश्चित किया कि योजना शुरू की जाए।
    मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा, “लड़की बहन योजना शुरू होने के बाद अजित पवार ने गुलाबी जैकेट पहनना शुरू कर दिया था। उन्होंने हमें भी वह जैकेट पहनाई थी। अब ये बातें सिर्फ यादें बनकर रह गई हैं। यह शोक प्रस्ताव लाना मेरी संवैधानिक जिम्मेदारी है, लेकिन मेरे लिए यह बहुत भावुक क्षण है।”
    महाकवि भास के नाटक स्वप्नवासवदत्तम की एक पंक्ति का उल्लेख करते हुए फडणवीस ने कहा कि अजित पवार का जाना केवल राजनीतिक नुकसान नहीं है, बल्कि यह उनके लिए गहरा व्यक्तिगत दुख भी है।
    उन्होंने कहा, “कहते हैं समय हर घाव भर देता है, लेकिन कुछ दर्द ऐसे होते हैं जो कभी कम नहीं होते, चाहे कितना भी समय बीत जाए। यह वैसा ही दर्द है। किसी नेता के जाने के बाद हम अक्सर कहते हैं कि एक ‘खालीपन’ बन गया है, लेकिन जब अजित दादा जैसे नेता चले जाते हैं, तब सच में उस शब्द का मतलब समझ में आता है। उनकी जगह कोई और नहीं ले सकता।”
    मुख्यमंत्री ने एक प्रेरक पंक्ति भी दोहराई, “काम को जिंदगी दो और मौत को आराम।” उन्होंने अजित पवार को ऐसा नेता बताया, जिसने अपने जीवन का हर पल काम के लिए समर्पित किया और हर काम की योजना बनाई।
    फडणवीस ने कहा, “हम दोनों का जन्म 22 जुलाई को हुआ था। वह मुझसे 11 साल बड़े थे, इसलिए सच मायनों में मेरे ‘दादा’ थे। हमारी दस साल से अधिक समय तक गहरी दोस्ती रही। हम 1999 में मिले थे लेकिन 2014 के बाद हमारे बीच एक भावनात्मक रिश्ता बन गया। मैं एनसीपी को राजनीतिक सहयोगी मानता था, लेकिन अजित दादा को हमेशा भावनात्मक रूप से करीब माना।”
    उन्होंने 2019 में सरकार गठन से जुड़े विवाद का जिक्र करते हुए कहा कि अजित पवार ऐसे नेता थे, जो हर स्थिति में अपनी बात खुलकर रखते थे।
    मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा, “2019 में सरकार बनाने का फैसला हुआ था, लेकिन बाद में उनके वरिष्ठ नेताओं ने अपना निर्णय बदल दिया, फिर भी क्योंकि उन्होंने मुझसे वादा किया था, उन्होंने उसे निभाने का फैसला किया। कई लोग इसे ‘सुबह-सुबह की शपथ’ कहते थे, लेकिन इस बात से दादा को चिढ़ होती थी। उनका कहना था कि ‘सुबह-सुबह’ का मतलब छह बजे होता है, जबकि हमने नौ बजे शपथ ली थी। उन्हें इस फैसले की बड़ी कीमत चुकानी पड़ी। जब सुप्रीम कोर्ट ने हमारे खिलाफ फैसला दिया, तब हम दोनों ‘वर्षा’ बंगले पर मौजूद थे। मैंने उनसे कहा था कि वे अपना निर्णय खुद लें, क्योंकि उन्हें अपने साथ जुड़े लोगों के भविष्य के बारे में भी सोचना है।”
    फडणवीस ने आगे कहा कि अजित पवार समय के बेहद पाबंद नेता थे और उनका राजनीतिक सफर भी लंबा और प्रभावशाली रहा। उन्होंने भावुक होकर कहा, “दादा हमेशा समय का पूरा ध्यान रखते थे, लेकिन इस बार वे अपनी ही टाइमिंग से चूक गए। सबने उन्हें लंबी पारी खेलते देखा, लेकिन वे बहुत जल्दी हमें छोड़कर चले गए।” उन्होंने बताया कि अजित पवार छह बार उपमुख्यमंत्री रहे, जो अपने आप में एक रिकॉर्ड है। वे अक्सर मजाक में कहते थे, “मैं किसी दिन मुख्यमंत्री बनूंगा लेकिन अभी के लिए उपमुख्यमंत्री ही ठीक है।”

  • मॉल में मेडिकल छात्रा से बदसलूकी, दिल्ली के बाद यूपी में भी नस्लीय टिप्पणी का मामला गरमाया

    मॉल में मेडिकल छात्रा से बदसलूकी, दिल्ली के बाद यूपी में भी नस्लीय टिप्पणी का मामला गरमाया

    गोरखपुर
    साउथ दिल्ली के मालवीय नगर में किराए के फ्लैट में एसी लगवाने के दौरान अरुणाचल प्रदेश की एक प्रतियोगी छात्रा और उसकी दो सहेलियों द्वारा लगाए गए नस्लीय टिप्पणी के आरोपों का मामला अभी शांत भी नहीं हुआ है कि अब यूपी के गोरखपुर शहर में उत्तर-पूर्व भारत की एक मेडिकल छात्रा बदसलूकी की घटना सामने आ गई है। छात्रा ने आरोप लगाया है कि शहर के ओरियन मॉल से बाहर निकलने के दौरान उसके साथ ‘बैड टच’ और दुर्व्यवहार की यह घटना हुई। घटना 22 फरवरी की रात करीब आठ बजे की बताई जा रही है। छात्रा ने नस्लीय टिप्प्णी किए जाने का भी आरोप लगाया है। हालांकि पुलिस ने अभी तक घटना के बारे में कोई भी जानकारी होने से इनकार किया है।

    एम्स गोरखपुर से पोस्ट ग्रेजुएशन कर रही इस छात्रा ने आरोप लगाया है कि घटना उस वक्त हुई जब वह मॉल से बाहर निकल रही थी। छात्रा के अनुसार तीन युवकों ने उसका पीछा करते हुए नस्लीय टिप्पणी की और गाली-गलौज की। डॉक्टर उत्तर-पूर्व भारत की रहने वाली हैं। मॉल से लेकर एम्स गोरखपुर के गेट नंबर दो तक, लगभग डेढ़ किलोमीटर तक तीनों उनके पीछे-पीछे चलते रहे। आरोप है कि गेट नंबर दो के पास सेना शिविर के पास एक युवक ने शर्ट उतारकर अशोभनीय हरकत की और डॉक्टर के साथ ‘बैड टच’ किया। इस मामले को लेकर नॉर्थ ईस्ट फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया रेजिडेंट डॉक्टर्स (नाफोर्ड) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर मुख्यमंत्री कार्यालय को टैग किया है। पोस्ट में इसे गंभीर नस्लीय उत्पीड़न और यौन उत्पीड़न का मामला बताया गया है।

    नाफोर्ड क्या है
    नाफोर्ड का फुल फार्म नॉर्थ ईस्ट फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया रेजिडेंट डॉक्टर्स है। यह संगठन मुख्यत:रेजिडेंट डॉक्टरों की समस्याओं और उनके अधिकारों के लिए लड़ता है। यह संगठन रेजिडेंट डॉक्टरों के अधिकारों की सुरक्षा और बेहतर कार्य स्थितियों के लिए एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में काम करता है। इस मामले में नाफोर्ड ने कहा है कि रेजिडेंट डॉक्टरों की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए, ताकि वे सुरक्षित वातावरण में अपनी सेवाएं दे सकें। संगठन ने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

    जानकारी से इनकार कर रही पुलिस
    गोरखपुर में पुलिस तक अभी यह मामला नहीं पहुंचा है। कैंट और एम्स थाना पुलिस ने ऐसे किसी मामले की औपचारिक जानकारी होने से इनकार किया है। पुलिस का कहना है कि तहरीर मिलने पर जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

    दिल्ली में क्या हुआ है?
    रिपोर्ट्स के अनुसार दिल्ली के मालवीय नगर थाना क्षेत्र में अरुणाचल प्रदेश की तीन युवतियां एक फ्लैट के चौथे फ्लोर पर किराए पर रहती हैं। 20 फरवरी की दोपहर वे अपने फ्लैट में एसी लगवा रही थीं। इस दौरान ड्रिलिंग मशीन का इस्तेमाल किया गया। ड्रिलिंग के दौरान गलती से थोड़ा मलबा और धूल नीचे के फ्लोर पर गिर गई। इससे नाराज नीचे के फ्लैट में रहने वाला दंपती ऊपर पहुंचा और आपत्ति जताई। आरोप है कि इस दौरान पति-पत्नी ने युवतियों के साथ दुर्व्यवहार किया और उनके उत्तर-पूर्वी मूल को लेकर नस्लीय और अपमानजनक टिप्पणियां कीं।

     

  • ‘मोहब्बत की दुकान’ में खास मुलाकात: ‘मोहम्मद दीपक’ से मिले राहुल गांधी, जिम जॉइन करने का किया वादा

    ‘मोहब्बत की दुकान’ में खास मुलाकात: ‘मोहम्मद दीपक’ से मिले राहुल गांधी, जिम जॉइन करने का किया वादा

    देहरादून/दिल्ली
    उत्तराखंड के कोटद्वार में 'मोहम्मद दीपक' से देशभर में चर्चा बटोरने वाले दीपक कुमार ने लोकसभा नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से मुलाकात की है। राहुल गांधी ने इस मुलाकात की तस्वीरें सोशल मीडिया पर पोस्ट की हैं। मुलाकात पर अपनी एफबी पोस्ट में राहुल गांधी ने लिखा, "हर इंसान, एक समान यही है भारतीयता, यही है मोहब्बत की दुकान। राहुल गांधी से मुलाकात के बाद दीपक कुमार ने मीडिया से बातचीत में कहा कि राहुल गांधी ने उन्हें साथ देने का भरोसा दिया है। साथ ही कोटद्वार आकर उनके जिम की मेंबरशिप लेने का वादा भी किया है।

    बीते 26 जनवरी को कोटद्वार में मुस्लिम बुजुर्ग की दुकान के बाबा नाम को लेकर विवाद उठा था। हिंदू संगठन बजरंग दल ने नाम आपत्ति जताई थी और बुजुर्ग को दुकान का नाम बदलने की चेतावनी दी थी। इस पर बुजुर्ग के समर्थन में दीपक कुमार अकेले बजरंग दल से भिड़ गए। उन्होंने कथित तौर पर खुद को ‘मोहम्मद दीपक’ बुलाया था। दीपक के ये शब्द देशभर में वायरल हुए थे और सुर्खियां बटोरी। राहुल गांधी ने तब भी सोशल मीडिया पर दीपक कुमार की जमकर तारीफ की थी और कहा था कि दीपक देश के हीरो हैं।

    राहुल गांधी की एफबी पोस्ट
    कोटद्वार में सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल पेश करने वाले जिम मालिक दीपक कुमार ने हाल ही में दिल्ली स्थित '10 जनपथ' पर सोनिया गांधी और राहुल गांधी से मुलाकात की। इस दौरान राहुल गांधी ने दीपक के साहस की सराहना करते हुए उनकी पत्नी से फोन पर बात की। राहुल गांधी ने दीपक कुमार से मुलाकात की तस्वीरें सोशल मीडिया पर पोस्ट की हैं। साथ ही कैप्शन में लिखा है, "हर इंसान, एक समान यही है भारतीयता, यही है मोहब्बत की दुकान। उत्तराखंड के भाई 'मोहम्मद दीपक' से मुलाकात – एकता और साहस की ऐसी ही लौ हर भारतीय युवा में जलनी चाहिए।" राहुल गांधी पहले भी दीपक कुमार की जमकर तारीफ कर चुके हैं। राहुल के अलावा एआईएमआईएम चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने भी दीपक की तारीफ में कहा था कि देश को उत्तराखंड के दीपक जैसे और दीपक चाहिए।

    राहुल कोटद्वार आएंगे और मेरे जिम की मेंबरशिप लेंगे- दीपक
    दीपक कुमार ने कहा कि "राहुल गांधी ने उनके परिवार से बात की है। कहा कि आपने कोई गलत काम नहीं किया। उन्होंने वादा किया कि वे जल्द कोटद्वार आएंगे और उनके जिम की मेंबरशिप लेंगे। राहुल गांधी ने मुझसे कहा है कि घबराने की जरूरत नहीं है। आप सही कदम पर हैं। मुझे बहुत खुशी मिली है कि राहुल जी अगर आएंगे और मेरे जिम की मेंबरशिप लेंगे।"

    सुप्रीम कोर्ट के 12 वकील भी ले चुके जिम की मेंबरशिप
    गौरतलब है कि कोटद्वार में दीपक कुमार का 'हल्क' नाम से जिम सेंटर है। यह कभी 150 से अधिक सदस्यों से भरा रहता था। दीपक कुमार ने हाल ही में आरोप लगाया था कि बाबा दुकान को लेकर हुए हंगामे के बाद उनकी एकमात्र आजिविका पर संकट छा गया है। उन्होंने कहा कि मारे डर के कई लोगों ने उनके जिम से मेंबरशिप हटा दी है। पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के लगभग 12 वरिष्ठ वकीलों ने 10000 रुपये का शुल्क चुकाकर एक साल के लिए जिम की सदस्यता ली है।

  • मंच से जस्टिस का बयान: जो गुरुओं का सम्मान नहीं करता, वो बदमाश है

    मंच से जस्टिस का बयान: जो गुरुओं का सम्मान नहीं करता, वो बदमाश है

    मद्रास
    मद्रास हाईकोर्ट के जज जीआर स्वामीनाथन नए विवाद में पड़ गए हैं। खबर है कि एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कह दिया कि आध्यात्मिक गुरुओं को नहीं मानने वाले दुष्ट होते हैं। मदुरै की तिरुप्परनकुंद्रम पहाड़ी पर 'कार्तिगई दीपम्' जलाने के मामले में जस्टिस स्वामीनाथन विवादों में आ गए थे। उन्होंने 1 दिसंबर 2025 में उन रिट याचिकाओं को स्वीकार किया था, जिसमें दीप जलाने की अनुमति मांगी गई थी।

    रिपोर्ट के अनुसार, जज ने कहा, 'तमिलनाडु में कुछ लोग खुद को रेशनलिस्ट (तर्कवादी) कहते हैं। वो हमें बदमाश, मूर्ख और क्रूर कहते हैं, क्योंकि हम गुरु को भगवान के रूप में देखते हैं। मैं कहता हूं कि ऐसा कहने वाले ही बदमाश, मूर्ख और क्रूर हैं।' वह तमिलनाडु में एक आध्यात्मिक कार्यक्रम में पहुंचे थे और कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।

    उन्होंने कहा, 'मेरी सेवा चार साल की और बची है। मुझे लगता है कि मुझे आगे आना चाहिए और हिम्मत के साथ अपनी बात रखनी चाहिए।' इस दौरान उन्होंने मुश्किल समय में आध्यात्मिक मार्गदर्शन की भूमिका पर भी बात की। उन्होंने कहा कि उन्हें हिम्मत और समर्थन गुरु के आशीर्वाद से मिला है। जज बताते हैं कि वह अभी तेनकासी के पास एक योगी के संपर्क में हैं।

    जब वेदों को लेकर दिया बयान
    कुछ समय पहले जस्टिस स्वामीनाथ ने वेदों को लेकर भी बयान दे दिया था। रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने कहा था, 'अगर हम वेदों की रक्षा करेंगे, तो वेद हमारी रक्षा करेंगे।' इस बयान को लेकर भी विवाद खड़ा हो गया था। आरोप लगाए जा रहे थे कि जज संविधान के ऊपर धार्मिक बातों को प्राथमिकता दे रहे हैं।

    क्या था दीप जलाने का मामला
    जस्टिस स्वामीनाथन ने एक दिसंबर, 2025 को उन रिट याचिकाओं को स्वीकार कर लिया था जिनमें एक दरगाह के निकट तिरुप्परनकुंद्रम पहाड़ी पर स्थित पत्थर के दीप स्तंभ 'दीपथून' पर कार्तिकई दीपम् को प्रज्वलित करने के लिए उचित व्यवस्था करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया था। जब आदेश का पालन नहीं हुआ तो जस्टिस स्वामीनाथन ने तीन दिसंबर को एक और आदेश पारित किया जिसमें श्रद्धालुओं को स्वयं दीपक जलाने की अनुमति दी गई और केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल को उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया। इसके बाद तमिलनाडु सरकार ने शीर्ष अदालत का रुख किया।