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  • MP में मानसून की विदाई अटकी, सितंबर के आखिरी हफ्ते फिर झमाझम बारिश के आसार

    MP में मानसून की विदाई अटकी, सितंबर के आखिरी हफ्ते फिर झमाझम बारिश के आसार

    भोपाल 
     मध्यप्रदेश में मानसून अब विदाई की ओर है, लेकिन बारिश का एक और दौर प्रदेश को तरबतर सकता है. मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार 2 अक्टूबर के आसपास मानसून की सामान्य विदाई से पहले सितंबर के आखिरी सप्ताह में बंगाल की खाड़ी से बनने वाला नया सिस्टम बारिश बढ़ा सकता है. फिलहाल प्रदेश में सामान्य से करीब 7 प्रतिशत कम बारिश है, लेकिन मानसून के अंत तक यह कमी सामान्य सीमा के भीतर रहने के आसार हैं. जबकि प्रदेश की सामान्य मौसमी बारिश 37.3 इंच है। 

    7 प्रतिशत की कमी, फिर भी कोटा पूरा होने की उम्मीद कम
    मौसम वैज्ञानिक अरुण शर्मा के अनुसार, '' 1 जून से 17 सितंबर तक मध्यप्रदेश में दीर्घकालिक औसत से 7 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है. वहीं, पूर्वी मध्यप्रदेश में कमी 2 प्रतिशत और पश्चिमी मध्यप्रदेश में 11 प्रतिशत है. मौसम विशेषज्ञों के अनुसार अगले कुछ दिनों में बारिश होने के बावजूद मानसून का पूरा कोटा हासिल होना मुश्किल है. हालांकि, अंतिम आंकड़ा सामान्य सीमा के भीतर रह सकता है। 

    सितंबर के आखिरी सप्ताह में फिर एक्टिव होगा मानसून
    मौसम केंद्र के अनुसार विदाई से पहले दक्षिण-पश्चिम मानसून का एक अच्छा दौर आ सकता है. बंगाल की खाड़ी में 18 सितंबर की शाम तक ऊपरी हवा का चक्रवाती परिसंचरण बनने की संभावना है. इसके प्रभाव से 19 सितंबर की शाम तक निम्न दबाव का क्षेत्र बन सकता है. वहीं, यह सिस्टम पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ा और मजबूत हुआ तो मध्य प्रदेश में बारिश की गतिविधियां फिर बढ़ सकती हैं. फिलहाल 20 सितंबर तक प्रदेश में कहीं भी अति भारी या भारी बारिश का अलर्ट नहीं है. ऊपरी हिस्से से मानसून ट्रफ गुजर रही है और अरब सागर में भी कम दबाव का क्षेत्र सक्रिय है, लेकिन इनका मध्यप्रदेश पर बड़ा असर नहीं दिख रहा है. हालांकि, स्थानीय मौसम तंत्र से कुछ जिलों में तेज बौछारें पड़ सकती हैं। 

    32 जिलों में बारिश, हाटपिपलिया में पौने 2 इंच
    पिछले 24 घंटों में प्रदेश के 32 जिलों में कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश हुई. भोपाल, सीहोर, रायसेन, विदिशा, जबलपुर, कटनी, छिंदवाड़ा, मंडला, बालाघाट, डिंडौरी, भिंड, मुरैना, सागर, दमोह, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़, मैहर, रीवा, सिंगरौली, सीधी, सतना, मऊगंज, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, अशोकनगर, धार, खरगोन, खंडवा, देवास और शाजापुर में बारिश दर्ज की गई है. सबसे अधिक बारिश देवास के हाटपिपलिया में करीब 45 मिमी रही. रहटगढ़ में 29.4 मिमी और सतना में 25.2 मिमी पानी गिरा। 

    बीते 13 साल में आखिरी सप्ताह में बारिश का ट्रेंड
    भोपाल के पिछले 13 साल के आंकड़े बताते हैं कि सितंबर के आखिरी सप्ताह में हर साल बारिश हुई है. कभी एक दिन तो कभी लगातार पांच दिन तक पानी बरसा. साल 2019 में पूरे सप्ताह बारिश हुई थी, जबकि 2025 में तीन दिन बारिश दर्ज की गई. 2023 और 2024 में सितंबर के अंतिम सप्ताह के दौरान एक दिन में दो इंच से ज्यादा बारिश भी रिकॉर्ड हुई थी। 

  • यूपी में 136 ग्राम पंचायतों पर बड़ा एक्शन, सचिव और प्रधानों से होगी ₹13 करोड़ की वसूली

    यूपी में 136 ग्राम पंचायतों पर बड़ा एक्शन, सचिव और प्रधानों से होगी ₹13 करोड़ की वसूली

    अंबेडकरनगर
    यूपी के अंबेडकरनगर में गांवों में विकास कार्य के लिए शासन स्तर से दी गई धनराशि में ऑडिट के दौरान वित्तीय अनियमितता पकड़ी गई है। कहीं बिना कार्य कराए धन निकाल लिया गया है तो कहीं आधा अधूरा कार्य पर ही धनराशि में हेराफेरी की गई है। सत्यापन के बाद ऐसी 136 ग्राम पंचायतों से कुल 13 करोड़ रुपए की वसूली की कार्रवाई शुरू की गई है। ग्राम पंचायत सचिव और प्रधानों पर ऐक्शन शुरू हो गया हे। जिला पंचायत राज अधिकारी ने आरोपित सचिवों के वेतन से कटौती का आदेश जारी किया गया है। जबकि ग्राम प्रधान और सेवानिवृत्त सचिवों के खिलाफ ऑनलाइन आरसी जारी करने की कार्रवाई की जा रही है।

    ग्राम पंचायतों में विकास के बजट से कराए गए कार्यों की ऑडिट टीम के जांच दौरान अभिलेख न प्रस्तुत करने व कार्य के स्थलीय सत्यापन में अनियमितता पाई जाने पर आरोपित ग्राम पंचायत के प्रधान और सचिव से कुल 13 करोड़ 37 लाख 53 हजार 854 ररुपए की वसूली की जाएगी। इसमें जिलाधिकारी स्तर से आरसी का अनुमोदन होने के उपरान्त पंचायती राज विभाग ने आरोपितों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है। विभागीय स्तर से तत्कालीन ग्राम पंचायत सचिवों के वेतन से कटौती का आदेश जारी किया गया है। प्रधान और सेवानिवृत्त सचिवों से वसूली के लिए ऑनलाइन आरसी जारी करने की कार्रवाई की जा रही है।

    कई रिटायर तो कई की मृत्यु भी हो चुकी
    यह अनियमितता वित्तीय वर्ष 211-12 से 2018-19 में ऑडिट के दौरान पायी गई थी। प्रकरण पुराना होने व विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया पूरी करने में विलम्ब होने के चलते कई सचिवों और ग्राम प्रधान की मृत्यु भी हो चुकी है। जबकि कई सचिव सेवानिवृत्त हो चुके हैं।अकबरपुर के सुबारपुर ग्राम पंचायत में वर्ष 2012-13 में ऑडिट के दौरान तीन प्रकरणों में 1881760 रुपए की अनियमितता पायी गई है, जिसमें पूर्व प्रधान से 940880 रुपए व तत्कालीन सचिव से 940880 रुपए की वसूली की जाएगी। 

    अकबरपुर नैली में वर्ष 2012-13 में ऑडिट के दौरान कुल 1163529 रुपए की अनियमिता पकड़ी गई है, जिसमें पूर्व प्रधान से 581764 रुपए तथा तत्कालीन सचिव से 581764 रुपए की वसूली की जाएगी। वहीं रोशनगढ़ ग्राम पंचायत में वर्ष 2013-14 में दो प्रकरणों में 1648294 रुपए की अनियमिता पायी गई है, जिसमें पूर्व प्रधान से 824147 व तत्कालीन सचिव से 824147 रुपए की वसूली की जाएगी। इसी तरह ऑडिट के दौरान विभिन्न वित्तीय वर्षों में जनपद की कुल 136 ग्राम पंचायतों में कुल 13 करोड़ 37 लाख 53 हजार 854 रुपए के गबन का मामला पकड़ा गया है।

    सचिवों के वेतन से कटौती का आदेश जारी
    इस बारे में डीपीआरओ उपेंद्र कुमार पांडेय का कहना है कि आरोपित सचिवों व ग्राम प्रधानों से धन के रिकवरी की कार्रवाई की जा रही है। सचिवों के वेतन से कटौती का आदेश जारी हो गया है। ग्राम प्रधान और सेवानिवृत्त सचिवों से वसूली के लिए ऑनलाइन आरसी जारी करने की कार्रवाई की जा रही है। गबन में जिन अरोपितों की मृत्यु हो चुकी है उनकी वसूली संभव नहीं होगी।

  • भारत से पंगा लेने उतरा PNS हुनैन, खटारा जहाज होने का दावा; जानें कितना पुराना है पोत

    भारत से पंगा लेने उतरा PNS हुनैन, खटारा जहाज होने का दावा; जानें कितना पुराना है पोत

    मुंबई 
    मंगलवार को जब अरब सागर में पाकिस्तान के PNS हुनैन की टक्कर भारतीय नौसेना के कोलकाता क्लास डिस्ट्रायर से हुई, तो यह कमजोर बनाम ताकतवर वाली स्थिति जैसी थी. एक और जहां PNS हुनैन 2,600 टन का ऑफशोर पेट्रोल वेसल (समुद्र में गश्त करने वाला जहाज़) है, वहीं INS कोलकाता भारत के सबसे ताकतवर और आधुनिक युद्धपोतों में से एक है और इसका वज़न PNS हुनैन से लगभग तीन गुना ज्यादा यानी कि 7,400 टन ज़्यादा है. साफ है कि पाकिस्तान ने भारत से पंगा लेने के लिए गलत और जहाज चुना था अगर उस वक्त भारत के युद्धपोत ने पलटकर पाकिस्तानी पोत को टक्कर मारी होती तो ये जहाज साफ डूब सकता था। 

    इस टक्कर का नतीजा सबके सामने था. पाकिस्तानी जहाज के अगले हिस्से में ज़बरदस्त टक्कर का निशान बन गया और उसे मरम्मत के लिए बंदरगाह लौटना पड़ा, जबकि भारतीय डिस्ट्रॉयर अपने ऑपरेशनल मिशन पर आगे बढ़ता रहा. विदेश मंत्रालय ने बताया कि INS कोलकाता को कोई ढांचागत नुकसान नहीं हुआ। 

    डिफेंस एनालिस्ट संदीप उन्नीथन ने इंडिया टुडे को बताया कि दोनों युद्धपोतों के बीच "बहुत बड़ा" अंतर है। 

    उन्नीथन ने कहा, "हुनैन एक ऑफशोर पेट्रोल वेसल है, जिसमें कुछ और मिसाइलें लगाकर उसकी मारक क्षमता थोड़ी बढ़ाई गई है. INS कोलकाता भारतीय नौसेना के सबसे बड़े फ्रंटलाइन जहाज़ों में से एक है. वह जहाज़ विशालकाय और शक्तिशाली है। 

    इस घटना से राजनयिक तनाव पैदा हो गया है और दोनों देशों ने एक-दूसरे के राजनयिकों को तलब किया है. भारत ने कहा कि युद्धपोत उत्तरी अरब सागर में नियमित निगरानी मिशन पर था, तभी पाकिस्तानी जहाज ने उसका पीछा करना शुरू कर दिया. PNS हुनैन पाकिस्तान नौसेना के 'सी स्पार्क' अभ्यास के तहत उस इलाके में मौजूद था। 

    सूत्रों के मुताबिक पाकिस्तानी जहाज़ तेज़ी से आगे बढ़ रहा था, तभी बहुत पास से गुज़रने की कोशिश में वह INS कोलकाता से टकरा गया. खबरों के अनुसार, PNS हुनैन में एक बड़ा डेंट पड़ गया और शायद उसमें दरार भी आ गई. OSINT अकाउंट 'War and Gore' ने दावा किया कि इस घटना में पाकिस्तान के चार लोग घायल हुए. हालांकि पाकिस्तान की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। 

    उन्नीथन ने कहा कि यह घटना पाकिस्तान के लिए बहुत बुरी साबित हो सकती थी. उन्होंने कहा, "अगर INS कोलकाता अपने क्रू की सुरक्षा के लिए मुड़कर पाकिस्तानी जहाज़ को टक्कर मार देता, तो वह पलटकर डूब जाता. पाकिस्तान ने बहुत खतरनाक पैंतरेबाज़ी की थी। 
     
    दोनों जहाजों के बीच फ़र्क सिर्फ़ साइज़ का नहीं है, बल्कि इस बात का है कि ये जहाज़ किस तरह की लड़ाई के लिए बनाए गए हैं। 

    INS कोलकाता में हथियारों और सेंसर का एक एडवांस्ड सिस्टम लगा है, जिसमें ब्रह्मोस सुपरसोनिक ज़मीन-से-ज़मीन पर मार करने वाली मिसाइलें शामिल हैं. इसमें लंबी दूरी तक मार करने वाली ज़मीन-से-हवा में मार करने वाली मिसाइलें, 360-डिग्री रडार, 76-mm की गन और AK-630 क्लोज़-इन वेपन सिस्टम भी लगे हैं। 

    दुश्मन की पनडुब्बियों से निपटने के लिए, इसमें टॉरपीडो लॉन्चर, रॉकेट लॉन्चर और आगे की तरफ़ लगा सोनार सिस्टम है. INS कोलकाता दो हेलीकॉप्टर (आमतौर पर सीकिंग और चेतक) भी ऑपरेट कर सकता है। 

    उन्नीथन ने इस बात पर ज़ोर दिया कि INS कोलकाता को इस तरह डिज़ाइन किया गया था कि वह भारी हमले और कई बार टकराने के बावजूद लड़ाई में टिक सके। 

    इसकी ताकत और क्षमता 2021 में मुंबई से टकराए चक्रवात 'ताउते' के दौरान दिखी थी. चक्रवात के समय हवा की रफ़्तार 120 km/h तक पहुंच गई थी और लहरें नौ मीटर तक उठ रही थीं। 

    उन्नीथन ने बताया, "उस समय भारतीय नौसेना ने जो दो जहाज़ भेजे थे, वे INS कोलकाता और INS कोच्चि थे. इस साइज़ के यही दो जहाज़ ऐसे हैं जो तूफ़ान के बीच से गुज़रकर लोगों को बचा सकते हैं। 

    सीधे शब्दों में कहें तो INS कोलकाता बिल्कुल अलग तरह का जहाज़ है. जैसा कि X पर एक यूज़र ने बहुत सही बात कही, "आप डिस्ट्रॉयर से भागते हैं, उसकी तरफ़ नहीं दौड़ते!

    'माउंटेन रैट्स' (Mountain Rats) नाम के X हैंडल से पोस्ट करने वाले एक डिफेंस एनालिस्ट ने कहा, "कितनी बेवकूफ़ी है कि 2500 टन का जहाज 7500 टन के डिस्ट्रॉयर से भिड़ने का फ़ैसला करता है। 

    हालांकि, यह पहली बार नहीं था जब किसी पाकिस्तानी नौसैनिक जहाज़ ने अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में कोई दुस्साहस करने की कोशिश की हो. 16 जून, 2011 को अदन की खाड़ी में PNS बाबर भारतीय युद्धपोत INS गोदावरी के बहुत करीब से गुज़रा था. ऐसा लगता है कि पाकिस्तान इससे कोई सबक नहीं सीख रहा है। 

  • प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना को जन-जन तक पहुंचाने कंपनी लगाएगी ‘सेवा सेतु कैंप’

    प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना को जन-जन तक पहुंचाने कंपनी लगाएगी ‘सेवा सेतु कैंप’

    सेवा संकल्प अभियान
    प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना को जन-जन तक पहुंचाने कंपनी लगाएगी ‘सेवा सेतु कैंप’

    भोपाल

    प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना को अधिक से अधिक नागरिकों तक पहुंचाने और पात्र हितग्राहियों को योजना का लाभ दिलाने के लिये मध्यप्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा 17 सितम्बर से 17 अक्टूबर 2026 तक ब्लॉक एवं तहसील स्तर पर ‘सेवा सेतु कैंप’ आयोजित किए जाएंगे।

    इन शिविरों के माध्यम से नागरिकों को रूफटॉप सोलर संयंत्र लगाने की प्रक्रिया, योजना में उपलब्ध प्रोत्साहन/सब्सिडी, ऑनलाइन आवेदन तथा ऋण सुविधा सहित आवश्यक जानकारी एक ही स्थान पर उपलब्ध कराई जाएगी। शिविरों में उपभोक्ताओं की जिज्ञासाओं का समाधान करते हुए उन्हें योजना का लाभ लेने के लिए आवश्यक मार्गदर्शन भी दिया जाएगा। कंपनी द्वारा शिविरों में सोलर संयंत्र लगाने वाले पंजीकृत वेंडरों को भी बुलाया जाएगा, जिससे इच्छुक उपभोक्ताओं को संयंत्र की लागत, स्थापना प्रक्रिया एवं उपलब्ध विकल्पों की जानकारी मौके पर ही मिल सके। साथ ही, योजना के व्यापक प्रचार-प्रसार के लिए स्थानीय जनप्रतिनिधियों एवं विभिन्न माध्यमों से नागरिकों को जागरूक किया जाएगा।

    मध्यप्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने सभी पात्र एवं इच्छुक उपभोक्ताओं से ‘सेवा सेतु कैंप’ का लाभ उठाकर "प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना" से जुड़ने की अपील की है। योजना के माध्यम से उपभोक्ता अपने घर की छत पर सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित कर स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के साथ बिजली खर्च में भी कमी ला सकते हैं।

     

  • सुप्रीम कोर्ट का CBSE को निर्देश, ‘तीसरी भाषा’ अगले साल से लागू करने पर विचार

    सुप्रीम कोर्ट का CBSE को निर्देश, ‘तीसरी भाषा’ अगले साल से लागू करने पर विचार

    नईदिल्ली 
    सुप्रीम कोर्ट ने CBSE की 3 भाषा नीति को अचानक लागू करने पर एक बार फिर सवाल उठाया है. कोर्ट ने कहा कि छठी क्लास के बच्चों के लिए तीसरी भाषा को अगले साल से लागू किया जाना चाहिए. इससे बच्चों को मानसिक रूप से तैयार होने का समय मिलेगा. CBSE ने विचार के लिए समय मांगा। सुप्रीम कोर्ट में  सुनवाई के दौरान कक्षा 9 के छात्रों को भी राहत देने की मांग उठी। इस पर भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा, “हर कोई बिना कुछ पढ़े मुफ्त में डिग्री चाहता है। यही संस्कृति हम बढ़ावा दे रहे हैं… कक्षा 9 एक परिपक्व कक्षा है।”

    याचिका में क्या मांग की गई है?
    याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यह व्यवस्था छात्रों और स्कूलों पर अतिरिक्त बोझ डाल सकती है तथा कुछ राज्यों की भाषा नीतियों से भी टकरा सकती है। वहीं, सीबीएसई का कहना है कि नई शिक्षा नीति (NEP) 2020 के अनुरूप यह कदम भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देने और बहुभाषी शिक्षा को मजबूत करने के लिए उठाया गया है।

    यह मामला सीबीएसई की तीन भाषा नीति से जुड़ा है, जिसके तहत कक्षा 9 के छात्रों के लिए तीन भाषाओं की पढ़ाई का प्रावधान किया गया है। मामले में कक्षा 6 के छात्रों के लिए भी राहत पर पहले अदालत ने सीबीएसई से अपने रुख पर दोबारा विचार करने को कहा था।

    छटी क्लास के बच्चों को मिले छूट: SC
    पीठ ने सालिसिटर जनरल (एसजी) तुषार मेहता से कहा, 'इस वर्ष कक्षा-छह पर विचार करें… यदि उन्हें कुछ समायोजन दिया जा सकता है।' एसजी मेहता ने अदालत से याचिकाओं की सुनवाई को टालने का अनुरोध किया क्योंकि अतिरिक्त सालिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी उपलब्ध नहीं थीं।

    हालांकि, उन्होंने आश्वासन दिया कि संबंधित अधिकारी पीठ के सुझाव पर विचार करेंगे। एक याचिकाकर्ता के वरिष्ठ अधिवक्ता ने कहा कि इस मामले में अधिक स्थगन के कारण देरी नहीं होनी चाहिए क्योंकि छात्रों को अंततः परीक्षा देनी है और इससे उनके माता-पिता में चिंता बढ़ रही है।

    सुप्रीम कोर्ट एक समूह की याचिकाओं की सुनवाई कर रहा था जो कक्षा-नौ के छात्रों के लिए तीन भाषाओं का अध्ययन अनिवार्य करने वाली सीबीएसई की नीति को चुनौती दे रही थीं, जिसमें दो भारतीय भाषाएं शामिल हैं, जो एक जुलाई से लागू होनी थीं।

    क्या है सीबीएसई की 3 भाषा नीति?
    20 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने सीबीएसई नीति से उत्पन्न समस्याओं के समाधान की आवश्यकता पर यह कहते हुए जोर दिया कि बच्चों को किसी भी प्रकार के दबाव में नहीं आना चाहिए।

    पीठ ने यह भी नोट किया कि एक पहलू जो विचार करने की आवश्यकता है, वह यह है कि उपलब्ध भाषा विकल्पों के संबंध में पर्याप्त मानव संसाधन बुनियादी ढांचा कैसे बनाया जाए।

    उसने कहा, 'यदि आपने कक्षा-छह को प्रारंभिक बिंदु के रूप में चुना है, तो आप इस वर्ष इसके छात्रों को राहत देने पर विचार कर सकते हैं। आप इसे अगले वर्ष से लागू कर सकते हैं।'

    सीबीएसई द्वारा जारी एक परिपत्र के अनुसार, कक्षा नौ के छात्रों के लिए तीन भाषाओं का अध्ययन, जिसमें कम से कम दो भारतीय भाषाएं शामिल हैं, एक जुलाई से अनिवार्य कर दिया गया है।

    क्या है मामला?

        सीबीएसई ने 2026-27 शैक्षणिक सत्र से कक्षा 9 के छात्रों के लिए तीन भाषाओं की पढ़ाई अनिवार्य की है। इनमें कम से कम दो भारतीय भाषाएं शामिल करना जरूरी है।
        इस फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दायर की गई हैं।
        याचिकाकर्ताओं ने नीति लागू करने के तरीके और सीबीएसई के अधिकार को लेकर सवाल उठाए।
        मामले में कोर्ट ने केंद्र, सीबीएसई और एनसीईआरटी से जवाब मांगा और छात्रों पर अतिरिक्त पढ़ाई के दबाव को लेकर भी चर्चा हुई है।
        आज इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई है।

     

  • इंदौर में ₹2,000 से ज्यादा UPI लेन-देन पर चार्ज का विरोध, व्यापारी लगाएंगे पोस्टर

    इंदौर में ₹2,000 से ज्यादा UPI लेन-देन पर चार्ज का विरोध, व्यापारी लगाएंगे पोस्टर

    इंदौर 

    यूपीआइ आज देश की नियमित और वैध डिजिटल भुगतान व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। लोगों को इसकी आदत लगने के बाद इस पर अतिरिक्त शुल्क लगाना उचित नहीं होगा। इससे बाजार में लेन-देन प्रभावित हो सकता है और व्यापारी वर्ग के सामने नई आर्थिक चुनौती खड़ी हो सकती है। भुगतान पर शुल्क बढ़ने पर व्यापारी उसे ग्राहक आधारित कर देने के लिए मजबूर होंगे, जिससे बाजार में लेन-देन की लागत बढ़ने की आशंका रहेगी। यूपीआइ भुगतान पर प्रस्तावित मर्चेंट फीस को लेकर व्यापार जगत ने चिंता जताई है।

    इंदौर के व्यापारियों ने जताया विरोध
    इंदौर में अहिल्या चेम्बर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के संयुक्त सचिव एवं इंदौर रिटेल गारमेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अक्षय जैन ने कहा कि अर्थव्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाने और नकदी आधारित लेन-देन को महंगा करना किसी भी स्थिति में ठीक नहीं है। 2,000 तक के भुगतान रोजमर्रा की छोटी खरीदारी के लिए पर्याप्त हो सकते हैं, लेकिन कपड़े, किराना, स्कूल फीस, इलेक्ट्रॉनिक्स, चिकित्सा, यात्रा और अन्य बड़े भुगतानों में राशि अक्सर इससे अधिक होती है। व्यापारी हर अतिरिक्त लागत अपनी जेब से वहन नहीं कर सकता। यदि यूपीआइ भुगतान पर शुल्क लगता है तो व्यापारी के सामने दो ही रास्ते रहेंगे मार्जिन कम करना या लागत को वस्तु अथवा सेवा की कीमत में शामिल करना। दूसरे विकल्प की स्थिति में इसका भार अंततः ग्राहक पर पड़ सकता है और महंगाई पर अतिरिक्त दबाव बन सकता है।

    नकद व्यवहार में बढ़ोतरी की आशंका
    यूपीआइ भुगतान पर प्रस्तावित मर्चेंट फीस इसके उपयोग को सीमित करेगा। योगेश मेहता, अध्यक्ष एआय एमपी के अनुसार इससे नकद व्यवहार में बढ़ोतरी की आशंका है अतः सरकार को अपने इस फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए और पूरे विश्व में एकमात्र यह यूपीआइ शुद्धतम स्वदेशी विचार से बना हुआ है जिसका उपयोग देश की 100 करोड़ से अधिक जनता कर रही है और इस पर शुल्क लगाना जनता के लिए इसके उपयोग को सीमित करेगा केंद्र सरकार से हम मांग करते हैं कि इस पर पुनर्विचार करें।

    बिजनेस के हिसाब से ये मुश्किल पैदा करेगा
    आदित्य कासलीवाल, महामंत्री कार डीलर एसोसिएशन के अनुसार यह बिजनेस के हिसाब से ये मुश्किल पैदा करेगा। यूपीआइ कम होगा और बिजनेस पर असर पड़ेगा। इसके साथ ही विवाद होगे। चार्ज किसी पर भी लगे, वसूला तो उपभोक्ता से ही जाएगा। मारोठिया बाजार के अध्यक्ष विशाल शमी ने कहा कि डिजिटल भुगतान व्यवस्था को प्रोत्साहित करने के बाद यूपीआइ लेन-देन पर अतिरिक्त शुल्क लगाने का प्रस्ताव व्यापारियों और आम उपभोक्ताओं के लिए चिंता का विषय है।

    अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ेगा
    व्यवसायी राजदीप मल्होत्रा के अनुसार सरकार लंबे समय से डिजिटल और कैशलेस भुगतान को बढ़ावा देती रही है। यूपीआइ को व्यापक रूप से अपनाने के बाद आम जनता और व्यापारियों की दैनिक लेन-देन में इस व्यवस्था पर निर्भरता बढ़ी है। ऐसे में यूपीआइ भुगतान पर मर्चेंट चार्ज लगाने से छोटे एवं मध्यम व्यापारियों पर अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ सकता है।

    सराफा बाजार व्यापारी संघ ने भी इसका विरोध किया है। सोना, चांदी, जवाहरात व्यापारिक एसोसिएशन के अध्यक्ष हुकुम सोनी के अनुसार यह सरासर गलत है, इससे बाजार और बिगड़ जाएगा एवं लोगों में असमंजस की स्थिति बनेगी एवं व्यापारी वर्ग पैसा नहीं ले पाएगा। जीजेसी ने सोने की हॉलमार्किंग शुल्क में 67% वृद्धि को अनुचित बताया।

    हॉल मार्किंग शुल्क को लेकर भी परेशानी
    ऑल इंडिया जेम एंड ज्वेलरी डोमेस्टिक कौंसिल ने सोने की हॉल मार्किंग शुल्क को प्रति आर्टिकल 45 से बढ़ाकर 75 रुपए करने पर गहरी चिंता व्यक्त की है और सरकार तथा भारतीय मानक ब्यूरो से इस निर्णय की तत्काल समीक्षा कर हितधारकों से परामर्श होने तक मौजूदा शुल्क बनाए रखने का आग्रह किया है। राजेश रोकड़े ने कहा कि जीजेसी और आभूषण उद्योग ने लगातार हॉलमार्किंग का समर्थन किया है, क्योंकि शुद्धता आश्वासन और उपभोक्ता विश्वास हमारे व्यापार के मूलभूत तत्व हैं। लेकिन हॉलमार्किंग का समर्थन करने का अर्थ यह नहीं है कि अनिवार्य अनुपालन लागत में लगभग 67% वृद्धि बिना जांच के स्वीकार कर ली जाए। हॉलमार्किंग की मात्रा अत्यधिक बढ़ चुकी है। इसलिए उद्योग को यह समझने का अधिकार है कि इस चरण में प्रति आर्टिकल शुल्क 45 रुपए से 75 रुपए क्यों बढ़ाना आवश्यक है।

    बढ़ेगी परेशानी
    नमकीन-मिठाई विक्रेता संघ के अनुराग बोथरा के अनुसार यूपीआइ का नया फैसला परेशानी बढ़ाएगा। हम लोग पहले ही कई तरह के टैक्स देते हैं। यहां तक कि चिल्लर भी लेते हैं। ऐसी स्थिति में कारोबार को सुगम बनाने की बजाय जटिल करना न्यायोचित नहीं है।

    दुकानों पर लगेंगे पोस्टर
    यूपीआइ भुगतान पर प्रस्तावित मर्चेंट फीस को लेकर व्यापारियों और ग्राहकों में नाराजगी अब बाजारों में दिखाई देने लगेगी। इंदौर रिटेल गारमेंट्स एसोसिएशन ने इस मुद्दे पर सरकार का ध्यान आकर्षित करने के लिए दुकानों पर विरोध के पोस्टर लगाने की मुहिम शुरू करने का निर्णय लिया है। 18 सितंबर से शहर की विभित्र दुकानों पर मर्चेंट फीस का विरोध' सबंधी पोस्टर लगाए जाएंगे। यह अभियान किसी राजनीतिक दल के विरोध में नहीं, बल्कि व्यापारियों और उपभोक्ताओं की चिंता सरकार तक पहुंचाने का शांतिपूर्ण प्रयास है। दुकानों पर लगाए जाने वाले पोस्टरों के माध्यम से ग्राहको को भी इस विषय की। 

  • आंगनवाड़ी कार्यकर्ता से अधिकारी तक, सेवा संबंधी समस्याओं का होगा त्वरित निराकरण

    आंगनवाड़ी कार्यकर्ता से अधिकारी तक, सेवा संबंधी समस्याओं का होगा त्वरित निराकरण

    आंगनवाड़ी कार्यकर्ता से अधिकारी तक, सबकी सेवा संबंधी समस्याओं का होगा त्वरित निराकरण

    संभाग-जिला स्तर पर हर माह प्रथम एवं तृतीय बुधवार को होंगे शिविर

    भोपाल 

    आयुक्त महिला एवं बाल विकास संदीप जी.आर. ने विभागीय अधिकारियों-कर्मचारियों की सेवा संबंधी समस्याओं के त्वरित एवं समयबद्ध निराकरण के लिए महत्वपूर्ण पहल की है। उनके निर्देशानुसार अब संभाग एवं जिला स्तर पर प्रत्येक माह के प्रथम एवं तृतीय बुधवार को दोपहर 2 से शाम 5 बजे तक नियमित समस्या निवारण शिविर आयोजित किए जाएंगे। इस संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।

    शिविरों में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिका से लेकर जिला स्तर के अधिकारी-कर्मचारी तक अपनी सेवा संबंधी समस्याएं और आवेदन प्रस्तुत कर सकेंगे। नियुक्ति, समयमान वेतनमान, पदोन्नति, अनुकंपा नियुक्ति, सेवानिवृत्ति उपरांत पेंशन तथा अन्य देय स्वत्वों से संबंधित प्रकरणों की सुनवाई कर नियमानुसार समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। प्रत्येक प्राप्त प्रकरण का अभिलेख भी संधारित किया जाएगा, जिससे उसके निराकरण की नियमित निगरानी की जा सके।

    आयुक्त संदीप जी.आर. ने कर्मचारियों को उनके अधिकारों एवं देय स्वत्वों के लिए अनावश्यक कठिनाई से बचाने के साथ ही विभागीय व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने पर जोर दिया है। इसी क्रम में कर्मचारियों के वेतन का भुगतान प्रत्येक माह की पहली तारीख को सुनिश्चित करने तथा आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं के मानदेय के साथ विभागीय कर्मचारियों के चिकित्सा देयक, यात्रा भत्ता और अन्य स्वत्वों का समय पर भुगतान करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

    समस्या निवारण शिविरों की जानकारी सभी अधिकारियों-कर्मचारियों तक पहुंचाने के साथ प्राप्त प्रकरणों के निराकरण की नियमित समीक्षा और रिपोर्टिंग की व्यवस्था भी की जाएगी। विभाग का उद्देश्य है कि कर्मचारियों की सेवा संबंधी समस्याओं का समाधान उनके निकटतम स्तर पर, पारदर्शी प्रक्रिया के माध्यम से और निर्धारित समय-सीमा में सुनिश्चित हो।

     

  • जल संरक्षण और सिंचाई विस्तार की उपलब्धि, जीपीएम में सिंचाई क्षमता छह गुना से अधिक बढ़ी

    जल संरक्षण और सिंचाई विस्तार की उपलब्धि, जीपीएम में सिंचाई क्षमता छह गुना से अधिक बढ़ी

    जल संरक्षण और सिंचाई विस्तार की उपलब्धि, जीपीएम में सिंचाई क्षमता छह गुना से अधिक बढ़ी

    जल संसाधन विभाग की 25 वर्षों की विकास यात्रा ने बदली कृषि की तस्वीर, 4,458 हेक्टेयर से बढ़कर 25,936 हेक्टेयर हुई सिंचाई क्षमता

    रायपुर
    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विकसित भारत के विजन और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में जल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन, सिंचाई सुविधाओं के विस्तार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में निरंतर कार्य किया जा रहा है। इसी क्रम में गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में जल संसाधन विभाग की 25 वर्षों की विकास यात्रा ग्रामीण विकास और कृषि क्षेत्र में आए महत्वपूर्ण बदलावों को रेखांकित करती है। राज्य निर्माण के बाद जिले में सिंचाई अधोसंरचना के विस्तार से सिंचाई क्षमता 4,458 हेक्टेयर से बढ़कर वर्ष 2026 में 25,936 हेक्टेयर हो गई है।

    राज्य गठन के समय सीमित थीं सिंचाई सुविधाएं

              राज्य गठन के समय जिले में जल संसाधन अधोसंरचना सीमित थी। 1 नवंबर 2000 से पूर्व जिले में कुल 28 जल संसाधन परियोजनाएं निर्मित थीं। इनमें 17 जलाशय, 4 व्यपवर्तन योजनाएं, 2 स्टॉप डेम और 5 एनीकट शामिल थे। इन परियोजनाओं से मात्र 4,458 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई हो पाती थी। सिंचाई के सीमित साधनों के कारण कृषि मुख्यतः मानसूनी वर्षा पर निर्भर थी।

    25 वर्षों में 57 नई परियोजनाओं का निर्माण

              राज्य गठन के पश्चात जल संसाधन विभाग ने चरणबद्ध तरीके से सिंचाई सुविधाओं के विस्तार और आधुनिकीकरण पर विशेष जोर दिया। पिछले 25 वर्षों में जिले में 57 नई जल संसाधन परियोजनाओं का निर्माण पूर्ण किया गया। पूर्व की 28 परियोजनाओं और नई 57 परियोजनाओं को मिलाकर जिले में कुल 85 जल संसाधन योजनाओं का आधार तैयार हुआ है।

              पुरानी नहरों के जीर्णाेद्धार और विस्तार के साथ दूर-दराज के खेतों तक पानी पहुंचाने के प्रयास किए गए। कम पानी में अधिक क्षेत्र में सिंचाई के लिए माइक्रो एवं लिफ्ट इरिगेशन को बढ़ावा दिया गया। सोलर पंप और डिजिटल तकनीक के उपयोग से जल वितरण की निगरानी जैसे नवाचार भी किए गए। इसके साथ ही नदियों के संरक्षण, एनीकट निर्माण और भू-जल संवर्धन की दिशा में भी कार्य किया गया।

    4,458 से बढ़कर 25,936 हेक्टेयर हुई सिंचाई क्षमता

               जल संसाधन विभाग के प्रयासों का सबसे महत्वपूर्ण परिणाम जीपीएम की सिंचाई क्षमता में दिखाई देता है। राज्य गठन के समय जहां 4,458 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई संभव थी, वहीं वर्ष 2026 तक यह क्षमता बढ़कर 25,936 हेक्टेयर हो गई है। इस प्रकार 25 वर्षों में सिंचाई क्षमता में 21,476 हेक्टेयर की वृद्धि हुई है। यह वृद्धि राज्य गठन के समय की तुलना में छह गुना से अधिक है।

    सिंचाई के विस्तार से कृषि को मिला नया आधार

               सिंचाई सुविधाओं के विस्तार से जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि की तस्वीर में बदलाव आया है। खेतों में पानी की उपलब्धता बढ़ने से किसानों को स्थानीय स्तर पर कृषि गतिविधियों को आगे बढ़ाने और बहुफसलीय खेती की दिशा में बढ़ने का अवसर मिला है। सिंचाई का दायरा बढ़ने से कृषि उत्पादन में सुधार तथा ग्रामीण क्षेत्रों में हरियाली और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिला है।

              जीपीएम जिले की प्रमुख जल संरचनाओं में ग्राम देवरगांव का मलनिया जलाशय, ग्राम आंदुल का जोगीडोंगरी जलाशय तथा ग्राम बनझोरका का एनीकट शामिल हैं। ये जल संरचनाएं जिले में विकसित जल अधोसंरचना और जल संरक्षण के प्रयासों को प्रदर्शित करती हैं।

    जल प्रबंधन में आधुनिक तकनीक और संरक्षण पर जोर

              जीपीएम में सिंचाई सुविधाओं के विस्तार के साथ जल के बेहतर उपयोग और संरक्षण पर भी ध्यान दिया गया है। माइक्रो एवं लिफ्ट इरिगेशन, सोलर पंप तथा डिजिटल तकनीक के उपयोग से जल प्रबंधन को आधुनिक स्वरूप दिया जा रहा है। नदियों के संरक्षण, एनीकट निर्माण और भू-जल संवर्धन जैसे प्रयास जल की उपलब्धता को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण हैं।

              जल संरचनाओं के निर्माण और सिंचाई सुविधाओं के विस्तार का सीधा संबंध खेतों में पानी की उपलब्धता, कृषि गतिविधियों के विस्तार और ग्रामीण परिवारों की आर्थिक संभावनाओं से है। जिले में सिंचाई क्षमता का 4,458 हेक्टेयर से बढ़कर 25,936 हेक्टेयर होना इस दीर्घकालीन प्रयास का महत्वपूर्ण परिणाम है।

              प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विकसित भारत के विजन में जल, कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूती को महत्वपूर्ण आधार माना गया है। इसी व्यापक दृष्टि के अनुरूप जल संसाधनों का बेहतर उपयोग, सिंचाई अधोसंरचना का विस्तार और आधुनिक तकनीक का समावेश ग्रामीण क्षेत्रों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

             मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार का जोर भी प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं के विस्तार और किसानों के लिए बेहतर अवसर तैयार करने पर है। जीपीएम में जल संसाधन विभाग की उपलब्धियां इस दिशा में जिले में हुए अधोसंरचनात्मक विस्तार को दर्शाती हैं।

    नई योजनाओं से सिंचाई क्षमता में और विस्तार की उम्मीद

              जिले में वर्तमान में भी कई नई सिंचाई योजनाएं निर्माणाधीन हैं। इनके पूर्ण होने के बाद सिंचाई क्षमता में और विस्तार होगा। इससे कृषि क्षेत्र को अतिरिक्त आधार मिलेगा और जल प्रबंधन की अधोसंरचना और मजबूत होगी।

              जल संसाधन विभाग की 25 वर्षों की यह यात्रा केवल जल संरचनाओं के निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह खेतों तक पहुंचते पानी, बढ़ती कृषि संभावनाओं, ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों के विस्तार और आत्मनिर्भरता की दिशा में बढ़ते कदमों की विकास गाथा भी है। गौरेला पेन्ड्रा मरवाही जिले की यह उपलब्धि जल संरक्षण, सिंचाई विस्तार और जनकल्याण को विकास के साथ जोड़ने की दिशा में किए गए निरंतर प्रयासों को रेखांकित करती है।

  • सेवा संकल्प अभियान: मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना से मुकेश को मिला जीवन का संबल

    सेवा संकल्प अभियान: मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना से मुकेश को मिला जीवन का संबल

    रायपुर

    मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना जरूरतमंद परिवारों के लिए गंभीर बीमारियों के उपचार में आर्थिक संबल बन रही है। योजना के माध्यम से उपचार के लिए मिली सहायता ने रायगढ़ जिले के खरसिया विकासखंड के ग्राम महुंआपाली निवासी मुकेश कुमार शर्मा के लिए मुश्किल समय में नई उम्मीद जगाई। हृदय संबंधी गंभीर बीमारी के उपचार एवं पेसमेकर प्रत्यारोपण के लिए उन्हें योजना के तहत 8 लाख 91 हजार 778 रुपये की सहायता स्वीकृत की गई। इसके बाद एम्स रायपुर में उनका सफल उपचार किया गया और पेसमेकर प्रत्यारोपित किया गया।

    अचानक सीने में दर्द के बाद सामने आई गंभीर हृदय समस्या

    श्री मुकेश कुमार शर्मा को अचानक सीने में तेज दर्द की शिकायत हुई। परिजन उन्हें उपचार के लिए रायपुर लेकर पहुंचे। चिकित्सकों द्वारा आवश्यक जांच किए जाने पर ईसीजी और इको में हृदय संबंधी गंभीर समस्या सामने आई। चिकित्सकों ने तत्काल उपचार की आवश्यकता बताई और उनका उपचार एम्स रायपुर में शुरू किया गया।

    मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना बनी आर्थिक संबल

    मुकेश का उपचार 18 जुलाई 2024 से अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), रायपुर में शुरू हुआ। उपचार के दौरान परिजनों को मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय, रायगढ़ की आयुष्मान शाखा के माध्यम से मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना की जानकारी मिली। पात्रता के अनुसार परिजनों ने योजना के तहत आवेदन प्रस्तुत किया। आवश्यक प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद पेसमेकर प्रत्यारोपण के लिए 8 लाख 91 हजार 778 रुपये की सहायता राशि स्वीकृत की गई।

    शासकीय सहायता मिलने से उपचार का आर्थिक बोझ कम हुआ और एम्स रायपुर में विशेषज्ञ चिकित्सकों की देखरेख में मुकेश का सफल उपचार एवं पेसमेकर प्रत्यारोपण किया गया।

    सफल उपचार के बाद सामान्य जीवन की ओर लौटे मुकेश

    उपचार के बाद मुकेश कुमार शर्मा अब स्वस्थ होकर सामान्य जीवन की ओर लौट रहे हैं। सेवा संकल्प अभियान के दौरान अपने अनुभव साझा करते हुए उन्होंने बताया कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवार के लिए गंभीर बीमारी का उपचार कराना बड़ी चुनौती होता है। ऐसे कठिन समय में मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना से मिली आर्थिक मदद उनके परिवार के लिए बड़ा संबल बनी।

    मुकेश ने उपचार के लिए मिली सहायता के प्रति राज्य शासन और स्वास्थ्य विभाग का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस सहयोग से उन्हें समय पर उपचार मिल सका और उनके जीवन में नई उम्मीद जगी। मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना उनके जैसे जरूरतमंद परिवारों के लिए कठिन परिस्थितियों में सहारा बन रही है।

  • 18 सितंबर राशिफल: शुक्रवार को चमकेगा इन राशियों का भाग्य, धन लाभ के बनेंगे योग

    18 सितंबर राशिफल: शुक्रवार को चमकेगा इन राशियों का भाग्य, धन लाभ के बनेंगे योग

    मेष राशि- आपका दिन काफी बेहतरीन साबित हो सकता है। करियर के मामले में महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट की जिम्मेदारी आपको दी जा सकती है। आर्थिक स्थिति भी मजबूत रहने वाली है।

    वृषभ राशि- सेहत के मामले में लापरवाही न बरतें। दिन रोमांटिक रहेगा। आज का आपका दिन पॉजिटिव एनर्जी से भरपूर रहने वाला है। इन्वेस्टमेंट को लेकर स्ट्रेटजी बनाने पर ध्यान दें।

    मिथुन राशि- लॉन्ग डिस्टेंस रिलेशन वालों को आज ही प्रेम जीवन में आ रही दिक्कतों पर फोकस करना चाहिए। फिट रहने पर फोकस रखें। आज का दिन आलस भरा साबित हो सकता है।

    कर्क राशि- काम को समय पर पूरा करने पर फोकस रखें। सेहत के मामले में भाग्य साथ देगा। अपने पार्टनर के साथ रोमांटिक डेट प्लान करें। खर्च को इस वक्त कंट्रोल करने की जरूरत है।

    सिंह राशि- आपको सेल्फ लव पर फोकस करना चाहिए। करियर में अपनी जगह बनाने के लिए मेहनत ज्यादा करनी पड़ेगी। किसी पुराने इन्वेस्टमेंट से मनचाहा रिटर्न नहीं मिलेगा।

    कन्या राशि- अपनी बॉडी को फिट रखने के लिए योग ट्राई करें। एक शानदार दिन के लिए तैयार हो जाएं। हाल ही में हुई किसी डील से भारी मात्रा में धन-लाभ हो सकता है। प्रेम जीवन में चल रही दिक्कतें सॉल्व हो जाएंगी।

    तुला राशि- घर में टेंशन का माहौल रहेगा। विदेश यात्रा के योग बन रहे हैं। आज का दिन थोड़ा सा स्ट्रेस भरा साबित हो सकता है। समय पर काम ना पूरा होने से सीनियर्स या मैनेजमेंट की नाराजगी झेलनी पड़ सकती है।

    वृश्चिक राशि- धन का आगमन होगा लेकिन खर्च बढ़ने की संभावना भी ज्यादा है। बाहर के खाने से परहेज करें। आज के दिन बदलावों से भरपूर रहने वाला है। काम के सिलसिले में विदेश की यात्रा के योग बन रहे हैं।

    धनु राशि- व्यापार, सेहत, पैसों का मामला या हो लव लाइफ बड़े चेंज के लिए तैयार हो जाएं। तनाव दूर करने के लिए मेडिटेशन करें। आज का दिन आप लोगों के लिए काफी बिजी साबित हो सकता है।

    मकर राशि– कार्यालय में अतिरिक्त जिम्मेदारियां मिल सकती हैं। बहुत ज्यादा प्रेशर न लें। वर्क लाइफ बैलेंस मेंटेन करके आगे बढ़ें। समय-समय पर ब्रेक जरूर लेते रहें। पार्टनर से सलाह लें।

    कुंभ राशि- दिन उतार-चढ़ाव से भरपूर रहने वाला है। ऑफिस की पॉलिटिक्स आपके लिए नेगेटिव साबित हो सकती है। पॉजिटिव सोच बनाकर रखें। अपने काम पर फोकस करें। गॉसिप से दूर रहें।

    मीन राशि- जरूरत पड़ने पर फैमिली से सलाह लें। आपके रुके हुए काम अपनी रफ्तार पकड़ेंगे। सिंगल लोग रिलेशनशिप में आ सकते हैं। अपनी हेल्थ का ध्यान रखें और स्ट्रेस से बचें।