Author: Admin

  • उन्नत टमाटर की खेती से शाहिद की मेहनत लाई रंग, 2 एकड़ में कमाए 1.20 लाख रुपये

    उन्नत टमाटर की खेती से शाहिद की मेहनत लाई रंग, 2 एकड़ में कमाए 1.20 लाख रुपये

    रायपुर

    मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा किसानों को आधुनिक और उन्नत कृषि तकनीकों से जोड़कर खेती को अधिक लाभकारी बनाने की दिशा में निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। किसानों को विभागीय योजनाओं की जानकारी और तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराकर उद्यानिकी फसलों एवं व्यावसायिक खेती के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसी कड़ी में गौरेला- पेंड्रा- मरवाही जिले के गौरेला विकासखंड के ग्राम पंचायत सारबहरा के कृषक  शाहिद जमा खान ने उन्नत तकनीकों को अपनाकर टमाटर की खेती से बेहतर आर्थिक लाभ अर्जित किया है।

     शाहिद जमा खान ने लगभग 2 एकड़ क्षेत्र में टमाटर की खेती की है, जिससे उन्हें अब तक करीब 1 लाख 20 हजार रुपये का लाभ प्राप्त हुआ है। उन्होंने टमाटर की खेती में आधुनिक एवं उन्नत कृषि तकनीकों को अपनाने के साथ फसल प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया। समय पर आवश्यक कृषि कार्य, फसल की नियमित देखभाल और वैज्ञानिक तकनीकों के समुचित उपयोग से उनकी फसल बेहतर हुई। अच्छी पैदावार और उचित प्रबंधन के परिणामस्वरूप टमाटर की खेती उनके लिए आय का बेहतर माध्यम बनकर उभरी है।

     शाहिद खान पूर्व में भी उद्यानिकी विभाग की विभिन्न योजनाओं का लाभ प्राप्त कर चुके हैं। विभाग द्वारा उन्हें समय-समय पर योजनाओं की जानकारी देने के साथ उन्नत कृषि तकनीक, फसल प्रबंधन तथा आवश्यक कृषि कार्यों के संबंध में तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान किया जा रहा है। विभागीय मार्गदर्शन और स्वयं की मेहनत से उन्होंने उद्यानिकी फसलों को आय बढ़ाने के प्रभावी माध्यम के रूप में अपनाया है।

    छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा किसानों को परंपरागत खेती के साथ उद्यानिकी एवं आधुनिक कृषि पद्धतियों से जोड़ने के प्रयासों के बीच शाहिद जमा खान जैसे किसान उन्नत तकनीकों को अपनाकर अपनी आय बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। उनकी सफलता बताती है कि वैज्ञानिक कृषि तकनीक, बेहतर फसल प्रबंधन और समय पर मिलने वाले तकनीकी मार्गदर्शन का समुचित उपयोग खेती को अधिक लाभकारी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

    टमाटर की उन्नत खेती से मिली सफलता ने  शाहिद जमा खान को उद्यानिकी फसलों के माध्यम से अपनी आय को और बेहतर करने के लिए प्रोत्साहित किया है। उनकी यह पहल क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए भी आधुनिक एवं व्यावसायिक खेती की संभावनाओं को सामने रखती है।

  • ओरछा के ‘सेवा संकल्प शिविर’ में उमड़े ग्रामीण 237 मरीजों को मिला मुफ़्त इलाज

    ओरछा के ‘सेवा संकल्प शिविर’ में उमड़े ग्रामीण 237 मरीजों को मिला मुफ़्त इलाज

    ​रायपुर

    राज्य सरकार के 'सेवा संकल्प अभियान' के तहत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ओरछा में आयोजित एक दिवसीय विशेष स्वास्थ्य शिविर दूरस्थ अंचलों के ग्रामीणों के लिए वरदान साबित हुआ। शिविर में क्षेत्र के 237 से अधिक मरीजों ने पहुंचकर एक ही छत के नीचे विभिन्न जटिल बीमारियों के नि:शुल्क इलाज और जांच सुविधाओं का लाभ उठाया।

     ​स्वास्थ्य दल द्वारा शिविर में व्यापक पैथोलॉजी एवं नैदानिक सेवाएं उपलब्ध कराई गईं। मलेरिया उन्मूलन की दिशा में कदम बढ़ाते हुए 169 लोगों की जांच की गई, जिनमें 41 मरीज पीएफ और 7 मरीज पीवी पॉजिटिव पाए गए। इसी प्रकार कुपोषण और एनीमिया की रोकथाम के लिए 146 लोगों के हीमोग्लोबिन की जांच की गई, जिसमें 39 ग्रामीणों में रक्त की कमी दर्ज की गई। मधुमेह नियंत्रण अभियान के तहत 138 लोगों की रक्त शर्करा की जांच में 6 मरीज उच्च शर्करा स्तर से पीड़ित मिले, जिन्हें तत्काल आवश्यक दवाएं और परामर्श दिया गया। इसके अलावा उच्च रक्तचाप और सिकल सेल से पीड़ित मरीजों की पहचान कर उनकी निरंतर चिकित्सा देखभाल का मार्ग प्रशस्त किया गया।

    मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए शिविर में 19 गर्भवती महिलाओं का पंजीयन कर उनकी प्रसव पूर्व जांच की गई। ग्रामीणों को विशेषज्ञ सेवाएं प्रदान करने हेतु नेत्र जांच, दंत चिकित्सा, टीबी रोग की पहचान के लिए बलगम के नमूने संग्रह करने के साथ-साथ एचआईवी, हेपेटाइटिस, डेंगू, टाइफाइड, लिवर, किडनी और थायरॉइड जैसी आवश्यक जांचें भी मौके पर ही की गईं।

     ​डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार करते हुए शिविर में दो पात्र हितग्राहियों के ऑन-द-स्पॉट 'आयुष्मान कार्ड' भी तैयार किए गए। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार शिविर में चिन्हित सभी मरीजों की स्वास्थ्य स्थिति की नियमित निगरानी की जाएगी, ताकि उन्हें आगे भी सुलभ और गुणवत्तापूर्ण उपचार मिलता रहे।

  • गुजरात से निकली बाइक रैली का उदयपुर में भव्य स्वागत, मंत्री राजेश अग्रवाल ने किया आत्मीय अभिनंदन

    गुजरात से निकली बाइक रैली का उदयपुर में भव्य स्वागत, मंत्री राजेश अग्रवाल ने किया आत्मीय अभिनंदन

    रायपुर

    सेवा, संस्कार और समाज के प्रति समर्पण का संदेश लेकर गुजरात से निकली बाइक रैली के उदयपुर आगमन पर पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने बाइक राइडर टीम का भव्य स्वागत एवं आत्मीय अभिनंदन किया। सेवा संकल्प अभियान के तहत आयोजित इस अवसर पर रैली के माध्यम से सेवा भावना, सामाजिक सरोकार, सांस्कृतिक मूल्यों और जनसेवा के प्रति प्रतिबद्धता का संदेश दिया गया।

    पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि गुजरात से सेवा और संकल्प का संदेश लेकर निकली बाइक रैली के प्रतिभागियों का उदयपुर में स्वागत करना सुखद अवसर रहा। उन्होंने कहा कि यह बाइक रैली केवल एक यात्रा नहीं, बल्कि सेवा, संस्कार, एकता और सामाजिक दायित्व के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का प्रेरक प्रयास है। युवाओं की ऊर्जा जब सेवा और समाजहित के संकल्प से जुड़ती है, तो वह सकारात्मक परिवर्तन की मजबूत शक्ति बन जाती है।

    मंत्री अग्रवाल ने कहा कि सेवा भारतीय संस्कृति का मूल संस्कार है। हमारी संस्कृति हमें स्वयं से पहले समाज और राष्ट्र के हित के बारे में सोचने की प्रेरणा देती है। सेवा का संकल्प, संस्कारों का सम्मान और समाज के प्रति समर्पण हमारी पहचान और हमारी शक्ति है। सेवा संकल्प अभियान इसी भावना को समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचाने का माध्यम बन रहा है।

    बाइक रैली के स्वागत के पश्चात पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल बाइक राइडर टीम के सदस्यों के साथ रामगढ़ स्थितराम मंदिर पहुंचे। यहां मंत्री अग्रवाल और बाइक राइडर्स ने प्रभुराम के दर्शन कर विधिवत पूजा-अर्चना की तथा क्षेत्रवासियों की सुख-समृद्धि, शांति और मंगलमय जीवन की कामना की। इस अवसर पर आस्था, संस्कृति और सेवा का सुंदर संगम देखने को मिला।

    मंत्री अग्रवाल ने कहा कि प्रभुराम का जीवन हमें मर्यादा, कर्तव्य, त्याग और लोककल्याण की प्रेरणा देता है। आज बाइक राइडर साथियों के साथ रामगढ़ की पावन धरा पर प्रभुराम के दर्शन का सौभाग्य मिला। सेवा का संदेश लेकर निकले इन युवाओं का हमारी आस्था और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ना इस यात्रा को और भी सार्थक बनाता है।

    उन्होंने कहा कि रामगढ़ हमारी समृद्ध ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण केंद्र है। हमारी धरोहरें केवल अतीत की स्मृतियां नहीं हैं, बल्कि नई पीढ़ी को अपने इतिहास, संस्कृति और संस्कारों से जोड़ने वाली अमूल्य विरासत हैं। इनके संरक्षण और संवर्धन के साथ इनके गौरव को नई पीढ़ी तक पहुंचाना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।

    मंत्री अग्रवाल ने कहा कि सेवा संकल्प अभियान समाज में सेवा और जनकल्याण की भावना को और मजबूत कर रहा है। सेवा किसी विशेष अवसर तक सीमित न रहकर हमारे जीवन और आचरण का स्थायी संस्कार बने, यही इस अभियान का मूल संदेश है।

  • अवैध खनिज परिवहन पर सख्ती, रेत-पत्थर से भरे 6 वाहन जब्त

    अवैध खनिज परिवहन पर सख्ती, रेत-पत्थर से भरे 6 वाहन जब्त

    रायपुर

    मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य शासन द्वारा खनिजों के अवैध उत्खनन, परिवहन एवं भंडारण पर प्रभावी रोक लगाने के लिए लगातार कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में कलेक्टर  विजय दयाराम के. के निर्देश पर खनिज विभाग के उड़नदस्ता दल द्वारा सतत जांच अभियान चलाया जा रहा है। विभागीय दल ने आज विभिन्न क्षेत्रों में कार्रवाई करते हुए रेत एवं पत्थर का अवैध परिवहन करते कुल 6 ट्रैक्टर वाहनों को जब्त किया।

    खनिज विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार बस्ती-बगरा क्षेत्र में रेत से भरे 4 ट्रैक्टर वाहनों को जब्त कर सुरक्षार्थ कोडगार चौकी में रखा गया है। इसी तरह सारबहरा क्षेत्र में पत्थर से भरे एक ट्रैक्टर वाहन तथा अंडी क्षेत्र में रेत से भरे एक ट्रैक्टर वाहन को जब्त कर सुरक्षार्थ अमरपुर पुलिस लाइन में रखा गया है।

    विभाग द्वारा सभी संबंधित वाहन मालिकों के विरुद्ध खान और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम के प्रावधानों के तहत नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है। प्रकरणों में निर्धारित अर्थदंड अथवा समझौता राशि खनिज मद में जमा कराए जाने के बाद नियमानुसार वाहनों को मुक्त करने की कार्रवाई की जाएगी।

    कलेक्टर  विजय दयाराम के. ने खनिज विभाग को जिले में अवैध खनिज गतिविधियों पर सतत निगरानी रखते हुए नियमानुसार सख्त कार्रवाई जारी रखने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने विभागीय अमले को क्षेत्र में नियमित जांच करने तथा अवैध उत्खनन, परिवहन एवं भंडारण के मामलों में तत्परता से कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा है।

    कलेक्टर ने सीएम हेल्पलाइन के माध्यम से प्राप्त शिकायतों को भी गंभीरता से लेते हुए उनकी गुणवत्तापूर्ण जांच और समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

  • 88 साल बाद फिर खुलेगा उज्जैन की वैश्य टेकरी का राज, 2300 साल पुराने इतिहास से उठेगा पर्दा

    88 साल बाद फिर खुलेगा उज्जैन की वैश्य टेकरी का राज, 2300 साल पुराने इतिहास से उठेगा पर्दा

    उज्जैन 

     कानीपुरा स्थित वैश्य टेकरी के रूप में स्थित विश्व के सबसे बड़े बौद्ध स्तूप में छिपा 2300 साल पुराना रहस्य जल्द सामने आएगा। 88 साल बाद एक बार फिर वैश्य टेकरी के उत्खनन की तैयारी की जा रही है।

    शुक्रवार को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की नई दिल्ली, भोपाल, इंदौर तथा उज्जैन के पुराविदों के दल ने टेकरी का जीपीआर (ग्राउंड पेनेट्रेटिंग रडार) सर्वे किया। इस तकनीक से जमीन के अंदर दबी हुई दीवारें, कक्ष, नींव, अन्य संरचनाओं तथा दबी हुई वस्तुओं का आसानी से पता लगाया जा सकता है। साथ ही उत्खनन का प्लान भी तैयार किया जा सकता है।

    वैश्य टेकरी स्थित बौद्ध महास्तूप देश के बड़े स्तूपों में से एक है। इसका व्यास 350 फीट तथा ऊंचाई 100 फीट से अधिक है। मान्यता है सम्राट अशोक ने इसका निर्माण कराया था। पाली भाषा में निर्मिथ बौद्ध ग्रंथों में इस स्तूप का उल्लेख मिलता है।

    कहा जाता है गौतम बुद्ध के महाप्रयाण के उपरांत उनसे जुड़ी सैंकड़ों वस्तुओं को देश और विदेश में रहने वाले उनके अनुयायियों में बांट दिया गया था। उन वस्तुओं में तात्कालिक मौर्य शासकों को, जो स्वयं भी बौद्ध अनुयायी थे उन्हें गौतम बुद्ध की आसंदी और चीवर मिले थे। ऐसा माना जाता है वैश्य टेकरी बौद्ध स्तूप में इन दोनों वस्तुओं को रखा गया है। इसीलिए विश्वभर के बौद्ध अनुयायियों के लिए यह स्थान तीर्थ के समान है।
    1938-39 में हुआ था उत्खनन, रोकना पड़ा

    पुरातत्व के जानकार व इतिहासकार बताते हैं सन 1938-39 में वैश्य टैकरी का उत्खनन हुआ था। एनबी गर्दे के निर्देशन में टेकरी की खोदाई की गई थी। इसके मुहाने पर एक वर्तुलाकार गड्ढा खोदा गया था। लेकिन दो हजार साल से अधिक समय तक बंद रहने के कारण इसमें गैस जमा हो गई थी, खोदाई के दौरान कई श्रमिक इसके प्रभाव में आए और बेहोश हो गए। इसके बाद उत्खनन कार्य बंद कर दिया गया। अब 88 साल बाद फिर से इसके उत्खनन की तैयारी की जा रही है।
    दल में यह विशेषज्ञ शामिल

    शुक्रवार को जीपीआर तकनीक से वैश्य टेकरी का सर्वेक्षण करने आए विशेषज्ञों ने मीडिया से कोई जानकारी साझा नहीं की। दल में नई दिल्ली के शिवाकांत वाजपेयी, डा.ऋतुजा चव्हाण, डा.ज्योति सवरूप, डा.रमेश यादव, डा.आशुतोष महाशब्दे, उज्जैन के पुराविद् व त्रिवेणी संग्रहालय के संग्रह अध्यक्ष डा.योगेश पाल, डा.अंकित चौहान आदि शामिल थे।
    बढ़ेगा अवंतिका का महत्व

    छठी शताब्दी ईसा पूर्व अखंड भारत के सोलह जनपद थें, इनमें से उज्जैन को अवंति महाजनपद कहा जाता था। यह नगरी शैव, वैष्णव, शाक्त, बौद्ध और जैन धर्म का प्रमुख केंद्र मानी जाती थी। कर्क रेखा गुजरने से यह नगरी कालगणना का भी प्रमुख केंद्र रही है। शासन की मंशा है कि अवंति महाजनपद का वैभव और बढ़े। इसी उद्देश्य से वैश्य टेकरी के उन्नयन की तैयारी की जा रही है। बौद्ध स्तूप के विकास के बाद यहां जापान, चीन, रशिया, कंबोडिया, श्रीलंका जैसे देश में रहने वाले बौद्ध अनुयायी आएंगे। इससे एक और जहां उज्जैन का धार्मिक महत्व और बढ़ेगा। आर्थिकी भी बढ़ेगी।
     

    88 साल पहले की खोदाई में मिली थे नरकंकाल

    वैश्य टेकरी के समीप कुम्हार टेकरी भी है। यहां भी 1938-39 में खोदाई हुई थी। तब इसमें अलग-अलग अवस्थाओं में (बैठे, लेटे आदि) नरकंकाल मिले थे। इसका भी पूरी तरह से अध्ययन नहीं हो पाया। वैश्य टेकरी के साथ एएसआइ कुम्हार टेकरी का भी अध्ययन करेगी।
    मौर्यकाल की ईंटे प्राप्त हुई थी

    पुराविदों का कहना है कि 1938-39 में खोदाई के दौरान स्तूप की दीवार गुंबद की तरह गोल दिखाई दे रही थीं। खोदाई में जो ईंटे प्राप्त हुई थी वें 22.6 गुणा 18.6 / 15.6 गुणा 3.7 इंच आकार की थी।
    क्या होती है जीपीआर तकनीक

    ग्राउंड पेनेट्रेटिंग रडार (जीपीआर) तकनीक के तहत भूमि के भीतर रडार से तरंगे भेजी जाती हैं। जब ये तरंगे किसी वस्तु या अलग घनत्व से टकराकर वापस आती हैं तो विशेष उपकरण उन्हें रिकार्ड कर वस्तु आदि का चित्र अथवा नक्शा बना देते हैं। आधुनिक समय में इसका उपयोग पाइप लाइन आदि के सर्वे के लिए किया जाता है।

  • वन्यजीव सप्ताह में वन विहार में विभिन्न प्रतियोगिताएं, कार्यक्रम हुए

    वन्यजीव सप्ताह में वन विहार में विभिन्न प्रतियोगिताएं, कार्यक्रम हुए

    भोपाल 

    2 अक्टूबर को "जुड़े आवास, वन्यजीवन का विकास थीम पर आयोजित राज्य स्तरीय वन्यजीव सप्ताह 2026 के अवसर पर पक्षी अवलोकन का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में यूथ हास्टल, शासकीय नूतन एवं अन्य शैक्षणिक संस्थाओं के कुल 109 प्रतिभागियों ने पक्षियों की विभिन्न प्रजातियों का दर्शन किये। पक्षी अवलोकन के दौरान पक्षी प्रेमियों को वन विहार राष्ट्रीय उद्यान में पाए जाने वाले विभिन्न पक्षियों की पहचान, उनके व्यवहार, आवास एवं पारिस्थितिकी तंत्र में उनकी भूमिका के बारे में जानकारी दी गई। इस अवसर पर लगभग 54 पक्षी प्रजातियों का अवलोकन किया गया।

    देखे गए प्रमुख पक्षियों में लिटिल कार्मोरेंट (Little Cormorant), इंडियन पैराडाइज फ्लाइकेचर (Indian Paradise Flycatcher), इंडियन रॉबिन (Indian Robin), प्लम हेडेड पैराकीट (Plum & headed Parakeet), स्पॉटेड डव (Spotted Dove), ब्लैक ड्रोंगो (Black Drongo), सहित अनेक अन्य प्रजातियाँ शामिल रहीं।

    पक्षी अवलोकन में स्रोत व्यक्ति के रूप में डॉ. संगीता राजगीर, मोहम्मद खलीक, गौरा जोशी (भोपाल बर्ड्स) एवं संकल्प किशनानी उपस्थित रहे। उन्होंने प्रतिभागियों को पक्षी अवलोकन की बारीकियों, पक्षियों की पहचान तथा उनके संरक्षण के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम का संचालन सहायक संचालक वन विहार डॉ. रूही हक द्वारा किया गया। इस आयोजन का उद्देश्य आमजन एवं प्रकृति प्रेमियों में पक्षियों के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा जैव विविधता के संरक्षण के लिए लोगों को प्रेरित करना था। प्रतिभागियों ने इस गतिविधि में विशेष रुचि दिखाई और प्रकृति के साथ जुड़ने का अनुभव प्राप्त किया।

    अन्य प्रतियोगिताएं एवं गतिविधियां

    वन्यजीव सप्ताह के अंतर्गत दिनांक 02 अक्टूबर 2026 को प्रातः 10:00 बजे से वन विहार राष्ट्रीय उद्यान में जन-जागरूकता के उद्देश्य से "मध्यप्रदेश के वन्यजीव" विषय पर स्टोन पेंटिंग (खुला वर्ग) एवं वुडन टाइल पेंटिंग (खुला वर्ग) प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया, जिसमें क्रमशः 65 एवं 116 प्रतिभागियों ने भाग लिया।

    इसी क्रम में "खजाने की खोज (खुला वर्ग) प्रतियोगिता भी आयोजित की गई, जिसमें 15 दल बनाये गये जिनमें 121 प्रतिभागियों ने भाग लिया।

    विद्यालयीन विद्यार्थियों के लिए प्रातः 10:00 बजे से 12:00 बजे तक वन विहार में सृजनात्मक कार्यशाला एवं प्रतियोगिता आयोजित की गई। कार्यशाला के दौरान विषय विशेषज्ञ  संजय सोनकेशरिया द्वारा रंगीन कागज के माध्यम से विद्यार्थियों को विभिन्न पक्षियों, तितलियों एवं फूलों की आकृतियां बनाना सिखाया गया।  अरविन्द अनुपम, मूर्तिकार, क्षेत्रीय प्राकृतिक विज्ञान संग्रहालय द्वारा क्ले मॉडलिंग के माध्यम से विद्यार्थियों को अजगर बनाना सिखाया गया। वहीं  पल्लवी तरमाकर द्वारा विद्यार्थियों को स्टोन पेंटिंग बनाने का प्रशिक्षण दिया गया। क्ले मॉडलिंग में 48, स्टोन पेंटिंग में 27 एवं पेपर क्राफ्ट में 15 प्रतिभागियों ने भाग लिया। इसके साथ ही विद्यालयीन विद्यार्थियों के लिए कहानी प्रतियोगिता (कक्षा 9 से 12) का आयोजन किया गया, जिसमें 17 प्रतिभागियों ने भाग लिया।

    3 अक्टूबर 2026 के कार्यक्रम

    वन्यजीव सप्ताह के अंतर्गत दिनांक 03 अक्टूबर 2026 को वन विहार में विभिन्न जागरूकता एवं सहभागिता आधारित कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। प्रातः 08:00 बजे से 09:30 बजे तक दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए "वन विहार की आवाजें" कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। साथ ही विद्यालयीन एवं महाविद्यालयीन विद्यार्थियों के लिए प्रातः 10:30 बजे से दोपहर 01:30 बजे तक "जुड़े आवास, वन्यजीवन का विकास" विषय पर युवा संसद का आयोजन किया जाएगा। इसी विषय पर वन भवन में प्रातः 09:30 बजे से 11:30 बजे तक "स्टेंड फॉर वाइल्ड लाइफ" (खुला वर्ग) का आयोजन भी किया जाएगा। सभी गतिविधियों की विस्तृत जानकारी हेतु नीचे दिये गये QR कोड को स्केन करें।

     

     

  • प्रदेशवासियों को बेहतर, तेज और सुरक्षित आवागमन की मिलेगी सुविधा : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

    प्रदेशवासियों को बेहतर, तेज और सुरक्षित आवागमन की मिलेगी सुविधा : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

    रायपुर

    बरसात के बाद प्रदेश में सड़क और पुल निर्माण के कार्य तेजी से धरातल पर उतरेंगे। राज्य शासन ने इसके लिए तैयारियां पूरी करते हुए 672 करोड़ 22 लाख 30 हजार रुपए के 24 महत्वपूर्ण कार्यों की निविदाओं को मंजूरी दे दी है। इनमें नई सड़कों और पुलों के निर्माण के साथ मौजूदा सड़कों के उन्नयन, चौड़ीकरण, मजबूतीकरण, विद्युतीकरण और सौंदर्यीकरण के कार्य शामिल हैं। लोक निर्माण विभाग ने संबंधित अधिकारियों को चयनित ठेकेदारों एवं निर्माण एजेंसियों को यथाशीघ्र कार्यादेश जारी कर निर्माण कार्य प्रारंभ कराने के निर्देश दिए हैं।

    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि प्रदेश में मजबूत सड़क एवं पुल अधोसंरचना का निर्माण राज्य सरकार की विकास प्राथमिकताओं में शामिल है। बेहतर सड़कें गांवों और शहरों के बीच कनेक्टिविटी मजबूत करने के साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, बाजार और अन्य आवश्यक सेवाओं तक लोगों की पहुंच को सुगम बनाती हैं। इन परियोजनाओं के पूरा होने से आवागमन बेहतर होगा और व्यापार, पर्यटन सहित स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिलेगी।

    मुख्यमंत्री साय ने निर्माण कार्यों में गुणवत्ता और समयबद्धता को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि स्वीकृत परियोजनाओं का लाभ लोगों तक जल्द पहुंचे, इसके लिए कार्यों को निर्धारित समय-सीमा में पूरा किया जाए और निर्माण की गुणवत्ता की नियमित निगरानी सुनिश्चित की जाए।

    उप मुख्यमंत्री एवं लोक निर्माण मंत्री अरुण साव ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश में सड़क और पुल अधोसंरचना के विस्तार के लिए योजनाबद्ध ढंग से काम कर रही है। लोक निर्माण विभाग द्वारा प्रदेशभर में 24 महत्वपूर्ण कार्यों की निविदाओं को मंजूरी दी गई है। अधिकारियों को कार्यादेश जारी कर बरसात के बाद निर्माण कार्यों को तत्काल गति देने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि सभी कार्यों को निर्धारित समय-सीमा में उच्च गुणवत्ता के साथ पूरा किया जाएगा, जिससे प्रदेशवासियों को बेहतर, तेज और सुरक्षित आवागमन की सुविधा मिलेगी।

    लोक निर्माण विभाग द्वारा मंजूर 24 कार्यों में नई सड़कों के सात कार्य, पुल एवं पहुंच मार्गों के दो कार्य, सड़कों के उन्नयन के तीन कार्य तथा चौड़ीकरण एवं मजबूतीकरण के 12 कार्य शामिल हैं।

    दुर्ग, धमतरी, राजनांदगांव सहित विभिन्न जिलों में बनेंगी नई सड़कें

    लोक निर्माण विभाग ने दुर्ग जिले में पुलगांव पुल मुख्य मार्ग से अंजोरा-रसमड़ा राज्य मार्ग में पुल-पुलिया सहित 5.28 किलोमीटर फोरलेन सड़क के निर्माण के लिए 28 करोड़ 2 लाख 70 हजार रुपए की निविदा को मंजूरी दी है। धमतरी जिले में राजनांदगांव-गुंडरदेही-धमतरी-नगरी सिहावा-बोराई राज्य मार्ग के आमदी नगर पंचायत में 3.50 किलोमीटर फोरलेन गौरव पथ के निर्माण एवं सौंदर्यीकरण के लिए 19 करोड़ 26 लाख 10 हजार रुपए की निविदा स्वीकृत की गई है।

    राजनांदगांव जिले के डोंगरगढ़ में पुल-पुलियों सहित आठ किलोमीटर फोरलेन परिक्रमा पथ के लिए 46 करोड़ 22 लाख 8 हजार रुपए, बिलासपुर जिले में 17.61 किलोमीटर झाल से नगपुरा मार्ग के लिए 29 करोड़ 91 लाख 92 हजार रुपए, महासमुंद जिले में पुल-पुलियों सहित 6.50 किलोमीटर सल्डीह-बहादुरपुर मुख्य जिला मार्ग के लिए 11 करोड़ 27 लाख 98 हजार रुपए, बलरामपुर-रामानुजगंज जिले में 7.60 किलोमीटर सिविलदाग-नीलकंठपुर सड़क के लिए 14 करोड़ 13 हजार रुपए तथा रायगढ़ जिले में 3.40 किलोमीटर उर्दना-कृष्णापुर-खैरपुर मार्ग के लिए 13 करोड़ 74 लाख 29 हजार रुपए की निविदा को मंजूरी दी गई है।

    अरपा और खारून नदी पर बनेंगे उच्च स्तरीय पुल

    राज्य शासन ने बिलासपुर जिले में लोधीपारा (सरकंडा)-कोनी मार्ग में अरपा नदी पर उच्च स्तरीय पुल एवं पहुंच मार्ग के लिए 17 करोड़ 63 लाख 32 हजार रुपए तथा चोरहादेवरी-परसदा मार्ग में खारून नदी पर उच्च स्तरीय पुल एवं पहुंच मार्ग के लिए 7 करोड़ 68 लाख 16 हजार रुपए की निविदा को स्वीकृति प्रदान की है। इन पुलों के निर्माण से संबंधित क्षेत्रों में आवागमन सुगम होगा और स्थानीय कनेक्टिविटी मजबूत होगी।

    करीब 79 करोड़ रुपए से तीन महत्वपूर्ण सड़कों का होगा उन्नयन

    लोक निर्माण विभाग ने सड़क उन्नयन के तीन कार्यों के लिए कुल 78 करोड़ 96 लाख 74 हजार रुपए की निविदाओं को मंजूरी दी है। इनमें बलरामपुर-रामानुजगंज जिले में 37 करोड़ 37 लाख 96 हजार रुपए लागत का पुल-पुलिया सहित 18 किलोमीटर परसवार-चलगली मार्ग, रायपुर में 17 करोड़ 32 लाख 31 हजार रुपए लागत से अभनपुर के पुराने राष्ट्रीय राजमार्ग-30 के 2.60 किलोमीटर हिस्से का फोरलेन उन्नयन तथा रायगढ़ में 24 करोड़ 26 लाख 47 हजार रुपए लागत का 12.30 किलोमीटर कोड़ातराई-पुसौर-सूरजगढ़ सड़क का उन्नयन शामिल है।

    धमतरी में कई महत्वपूर्ण मार्गों का होगा चौड़ीकरण और मजबूतीकरण

    धमतरी जिले में मेघा रोड तिराहा-स्टेशन रोड-चरमुड़िया राष्ट्रीय राजमार्ग-30 में 3.75 किलोमीटर चौड़ीकरण एवं मजबूतीकरण के लिए 14 करोड़ 45 लाख 12 हजार रुपए, पचपेड़ी-तर्रागोंदी-भेलवाकूदा-टिपानी-सेमरा (बी) मार्ग में पांच किलोमीटर चौड़ीकरण एवं मजबूतीकरण के लिए 13 करोड़ 32 लाख 82 हजार रुपए, नौ किलोमीटर छाती-गागरा-कंडेल-देवपुर मार्ग के लिए 23 करोड़ 12 लाख 46 हजार रुपए तथा 10 किलोमीटर अर्जुनी-भानपुरी-तरसींवा-कुर्रा-अमलीडीह-हसदा सड़क के लिए 19 करोड़ 42 लाख 22 हजार रुपए की निविदा मंजूर की गई है।

    राजनांदगांव-गुंडरदेही-धमतरी-नगरी सिहावा-बोराई राज्य मार्ग में 23 किलोमीटर लंबाई के मजबूतीकरण एवं डामरीकरण के लिए 11 करोड़ 70 लाख 83 हजार रुपए की निविदा को भी मंजूरी दी गई है।

    रायगढ़ में फोरलेन सड़कों के साथ होगा विद्युतीकरण

    रायगढ़ जिले के रायगढ़-लोइंग-महापल्ली मुख्य जिला मार्ग में पांच किलोमीटर हिस्से के फोरलेन चौड़ीकरण एवं विद्युतीकरण के लिए 59 करोड़ 49 लाख 4 हजार रुपए तथा रायगढ़-कोतरा-नंदेली राज्य मार्ग के पांच किलोमीटर हिस्से में फोरलेन चौड़ीकरण एवं विद्युतीकरण के लिए 47 करोड़ 77 लाख 76 हजार रुपए की निविदा स्वीकृत की गई है।

    कांकेर से सरगुजा तक मजबूत होगा सड़क नेटवर्क

    विभाग ने कांकेर-भानुप्रतापपुर-संबलपुर राज्यीय राजमार्ग में पुल-पुलियों सहित 36.80 किलोमीटर सड़क के चौड़ीकरण एवं मजबूतीकरण के लिए 85 करोड़ 83 लाख 4 हजार रुपए की निविदा को मंजूरी दी है।

    बेमेतरा जिले में देवकर-साजा-खम्हरिया मुख्य जिला मार्ग के 30.80 किलोमीटर हिस्से के मजबूतीकरण के लिए 30 करोड़ 22 लाख 88 हजार रुपए, दुर्ग जिले में भिलाई-सिरसा-औरी-मोतीपुर मुख्य जिला मार्ग के 15.50 किलोमीटर हिस्से के चौड़ीकरण एवं मजबूतीकरण के लिए 14 करोड़ 16 लाख 16 हजार रुपए, सरगुजा जिले में 28 किलोमीटर लंबे सोनतराई-मैनपाट मार्ग के मजबूतीकरण एवं सौंदर्यीकरण के लिए 26 करोड़ 7 लाख 34 हजार रुपए तथा महासमुंद जिले में बिहाझर-गांजर-रेवा मार्ग की 25.90 किलोमीटर सड़क के चौड़ीकरण एवं मजबूतीकरण के लिए 59 करोड़ 89 लाख 21 हजार रुपए की निविदा मंजूर की गई है।

    गुणवत्ता पर विशेष नजर, निर्धारित समय-सीमा में पूरे होंगे कार्य

    राज्य शासन ने संबंधित सभी कार्यपालन अभियंताओं को अनुबंधित कार्यों का संपादन एवं पर्यवेक्षण विभागीय मापदंडों के अनुसार सुनिश्चित करते हुए निर्माण की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए हैं। विभाग ने स्पष्ट किया है कि इन कार्यों को किसी अन्य को सबलेट नहीं किया जा सकेगा तथा कार्य संपादन के लिए पॉवर ऑफ अटॉर्नी मान्य नहीं होगी।

    कार्यपालन अभियंताओं को अनुबंधित समयावधि में कार्यों को पूर्ण कराने तथा प्रशासकीय स्वीकृति एवं आबंटन की सीमा में अनुबंध के अनुसार कार्य संपादित कराने के निर्देश भी दिए गए हैं।

  • गांवों को वोट बैंक समझने वालों की राजनीति से गांव पीछे रह गए- सीएम योगी

    गांवों को वोट बैंक समझने वालों की राजनीति से गांव पीछे रह गए- सीएम योगी

    गांवों को वोट बैंक समझने वालों की राजनीति से गांव पीछे रह गए- सीएम योगी

    ‘ग्राम स्वराज कोई राजनीतिक नारा नहीं, आत्मनिर्भर यूपी का संकल्प है’—सीएम योगी आदित्यनाथ

    'पूर्व की सरकारों में गांव हुए बदहाल, अराजकता और जातिवाद की आग में झोंका'- सीएम योगी का सपा पर निशाना

    सीएम योगी का दावा- 57,600 ग्राम सचिवालयों में डिजिटल सुविधाओं से बदली गांवों की तस्वीर

    'हमारे ग्राम स्वराज में परिवारवादी मॉडल की कोई जगह नहीं- मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

    लखनऊ, 
     उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 2 अक्टूबर को गांधी जयंती के अवसर पर ग्राम स्वराज को लेकर अपनी सरकार के कामकाज और गांवों में किए गए बदलावों का जिक्र करते हुए पिछली सरकारों की कार्यशैली पर सवाल उठाए। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए कहा कि 2017 से पहले गांवों को विकास के बजाय सिर्फ वादे मिले और गांवों के नाम पर राजनीति होती रही। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार गांवों को विकास की अंतिम सीढ़ी नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश और नए भारत की पहली इकाई मानकर काम कर रही है।

    ‘2017 से पहले गांवों को विकास नहीं, सिर्फ वादे मिले’
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा, "वर्ष 2017 से पहले गांवों को विकास नहीं, सिर्फ वादे मिले। गांवों के नाम पर राजनीति होती रही, लेकिन व्यवस्था में न पारदर्शिता थी, न जवाबदेही। आय और जाति प्रमाण-पत्र बनवाने के लिए तहसील, थाना और जिला मुख्यालयों के चक्कर काटने पड़ते थे।"

    उन्होंने आगे कहा, "जिन्होंने गांवों को सिर्फ अराजकता और जातिवाद की आग में झोंका, गांवों को केवल वोट बैंक समझा, उनकी राजनीति की वजह से गांव पीछे रह गए।"

    ‘गांवों को लेकर हमारी सोच अलग है’- सीएम योगी
    सीएम योगी ने कहा कि उनकी सरकार की सोच गांवों को लेकर अलग है। उन्होंने कहा, "हमारी सरकार गांव को विकास की अंतिम सीढ़ी नहीं, नए भारत के आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश की पहली इकाई मानकर काम कर रही है।"

    मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले साढ़े नौ वर्षों में सरकार ने गांवों से जुड़ी व्यवस्थाओं में बदलाव किया है। उन्होंने कहा, "पिछले साढ़े नौ वर्षों में हमारी सरकार ने इस व्यवस्था को बदला है।"

    57,600 ग्राम सचिवालयों में डिजिटल सुविधा
    मुख्यमंत्री ने गांवों में डिजिटल सुविधाओं और पंचायत व्यवस्था का जिक्र करते हुए कहा, "57,600 ग्राम सचिवालयों में आज ई-ग्राम स्वराज, डिजिटल भुगतान, ऑनलाइन मॉनिटरिंग और ग्राम सचिवालयों के माध्यम से ग्राम वासियों को समस्त सुविधाएं गांव में मिल रही हैं। पंचायतों के कामकाज पारदर्शी और जवाबदेह हैं।"

    उन्होंने यह भी कहा कि ग्राम सचिवालयों के संचालन से गांवों में रोजगार के अवसर पैदा हुए हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा, "ग्राम सचिवालयों के संचालन से प्रत्येक गांव में 5 से 7 रोजगार के अवसर सृजित हुए हैं।"

    11,350 ग्राम पंचायतों में डिजिटल लाइब्रेरी
    सीएम योगी ने गांवों में शिक्षा और डिजिटल सुविधाओं का जिक्र करते हुए कहा कि 11,350 ग्राम पंचायतों में डिजिटल लाइब्रेरी स्थापित की जा रही है।
    ग्राम स्वराज की अवधारणा को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा, "हमारे लिए ग्राम स्वराज कोई राजनीतिक नारा नहीं, महात्मा गांधी के सपनों के गांव और उसकी आत्मनिर्भरता का संकल्प है।"

    उन्होंने अपनी पोस्ट के अंत में कहा, "सशक्त पंचायत, समृद्ध गांव और आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश- यही हमारा ग्राम स्वराज है। हमारे ग्राम स्वराज में परिवारवादी मॉडल की कोई जगह नहीं है।"

  • सशक्त पंचायत, समृद्ध गांव ही ग्राम स्वराज की आधारशिला, इसमें परिवारवादी मॉडल की कोई जगह नहीं: मुख्यमंत्री

    सशक्त पंचायत, समृद्ध गांव ही ग्राम स्वराज की आधारशिला, इसमें परिवारवादी मॉडल की कोई जगह नहीं: मुख्यमंत्री

    सशक्त पंचायत, समृद्ध गांव ही ग्राम स्वराज की आधारशिला, इसमें परिवारवादी मॉडल की कोई जगह नहीं: मुख्यमंत्री

    ग्राम स्वराज को आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश की पहली इकाई मानकर काम कर रही हमारी सरकार: मुख्यमंत्री

    सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा- 2017 से पहले गांवों को विकास के बजाय मिले केवल वादे, ग्रामीणों को लगाने पड़ते थे चक्कर

    गांवों को केवल वोट बैंक के रूप में देखने वाली राजनीति के कारण ग्रामीण क्षेत्रों का विकास प्रभावित हुआ: सीएम योगी

    हमारी सरकार में 57,600 ग्राम सचिवालयों में ई-ग्राम स्वराज, डिजिटल भुगतान और ऑनलाइन मॉनिटरिंग की व्यवस्था: सीएम

    11,350 ग्राम पंचायतों में स्थापित की जा रही डिजिटल लाइब्रेरी: मुख्यमंत्री

    लखनऊ,
     राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती के अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उनकी सरकार गांव को विकास की अंतिम सीढ़ी नहीं, बल्कि नए भारत के आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश की पहली इकाई मानकर काम कर रही है। सशक्त पंचायत व समृद्ध गांव ही ग्राम स्वराज की आधारशिला हैं, जिसमें परिवारवादी मॉडल के लिए कोई जगह नहीं है।

    मुख्यमंत्री ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर साझा की गई पोस्ट में कहा कि वर्ष 2017 से पहले गांवों को विकास नहीं, केवल वादे मिले। गांवों के नाम पर राजनीति होती रही, लेकिन व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही का अभाव रहा। आय और जाति प्रमाण-पत्र जैसे सामान्य कार्यों के लिए भी ग्रामीणों को तहसील, थाना और जिला मुख्यालय के चक्कर लगाने पड़ते थे। गांवों को केवल वोट बैंक के रूप में देखने वाली राजनीति के कारण ग्रामीण क्षेत्रों का विकास प्रभावित हुआ। वर्तमान सरकार ने व्यवस्था में बदलाव करते हुए ग्राम पंचायतों को सुविधाओं और सेवाओं से जोड़ने पर काम किया है।

    57,600 ग्राम सचिवालयों में डिजिटल सुविधाएं
    मुख्यमंत्री ने अपनी पोस्ट में लिखा कि पिछले साढ़े नौ वर्षों में प्रदेश के 57,600 ग्राम सचिवालयों के माध्यम से ग्रामीणों को ई-ग्राम स्वराज, डिजिटल भुगतान, ऑनलाइन मॉनिटरिंग जैसी विभिन्न सुविधाएं उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। इससे ग्राम पंचायतों के कामकाज में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की गई है। ग्राम सचिवालयों के संचालन से प्रत्येक गांव में 5 से 7 रोजगार के अवसर भी सृजित हुए हैं। इसके साथ ही प्रदेश की 11,350 ग्राम पंचायतों में डिजिटल लाइब्रेरी स्थापित की जा रही हैं।

    ग्राम स्वराज को बताया आत्मनिर्भरता का संकल्प
    मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार के लिए ग्राम स्वराज कोई राजनीतिक नारा नहीं, बल्कि महात्मा गांधी के सपनों के गांव और उसकी आत्मनिर्भरता का संकल्प है। सशक्त पंचायत व समृद्ध गांव ही ग्राम स्वराज और आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश की आधारशिला हैं। ग्राम स्वराज की इस व्यवस्था में परिवारवादी मॉडल के लिए कोई जगह नहीं है। मुख्यमंत्री ने “सशक्त पंचायत, समृद्ध गांव और आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश” को ग्राम स्वराज की दिशा में सरकार के दृष्टिकोण के रूप में रेखांकित किया।

  • केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह करेंगे नवीन न्याय संहिताओं पर आधारित भव्य प्रदर्शनी का उद्घाटन

    केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह करेंगे नवीन न्याय संहिताओं पर आधारित भव्य प्रदर्शनी का उद्घाटन

    भोपाल 

    केंद्रीय गृह मंत्रालय के मार्गदर्शन में नवीन न्याय संहिताओं के प्रति आम नागरिकों को जागरूक करने के उद्देश्य से भोपाल में पाँच दिवसीय भव्य प्रदर्शनी आयोजित की जा रही है। प्रदर्शनी का उद्घाटन 3 अक्टूबर को माननीय केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह द्वारा किया जाएगा। यह प्रदर्शनी 3 से 7 अक्टूबर 2026 तक बीएचईएल दशहरा मैदान, गोविंदपुरा, भोपाल में आयोजित होगी।

    नवीन न्यायिक संहिता के अनुरूप आधुनिक एवं वैज्ञानिक अन्वेषण प्रणाली का सजीव प्रदर्शन

    प्रदर्शनी में नवीन न्यायिक संहिता के अनुरूप अपराध नियंत्रण, अन्वेषण तथा वैज्ञानिक साक्ष्य संकलन की संपूर्ण प्रक्रिया को सरल, सहज एवं सजीव रूप में प्रस्तुत किया जाएगा। इसमें घटना घटित होने से लेकर साक्ष्य संकलन, वैज्ञानिक परीक्षण, अपराधियों की पहचान तथा न्याय दिलाने तक की कार्रवाई को क्रमबद्ध तरीके से प्रदर्शित किया जाएगा।

    इसके अंतर्गत घटना की सूचना डायल-112 अथवा ई-एफआईआर के माध्यम से प्राप्त होने के बाद पुलिस की त्वरित प्रतिक्रिया, थाना स्टाफ के घटनास्थल पर पहुंचने तथा आवश्यकता के अनुसार फॉरेंसिक टीम, डॉग स्क्वॉड एवं फिंगरप्रिंट विशेषज्ञों द्वारा की जाने वाली कार्रवाई का सजीव प्रदर्शन होगा। घटनास्थल से तकनीकी एवं वैज्ञानिक विधियों से साक्ष्य एवं नमूने एकत्र करने तथा उनकी सुरक्षित प्रक्रिया को भी प्रदर्शित किया जाएगा।

    वैज्ञानिक साक्ष्यों से अपराध के खुलासे तक की पूरी प्रक्रिया

    प्रदर्शनी में संकलित साक्ष्यों एवं प्राप्त चिन्हों के तकनीकी परीक्षण और उपलब्ध पुलिस प्रणालियों के माध्यम से मिलान की प्रक्रिया को समझाया जाएगा। साक्ष्यों को फॉरेंसिक साइंस लैबोरेटरी (FSL) तथा आवश्यकतानुसार मेडिको-लीगल जांच के लिए भेजे जाने की प्रक्रिया भी प्रदर्शित की जाएगी। वैज्ञानिक एवं तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर अपराध की विवेचना को मजबूत बनाने तथा प्राप्त निष्कर्षों को प्रभावी ढंग से न्यायिक प्रक्रिया के समक्ष प्रस्तुत किए जाने की कार्यप्रणाली को भी सजीव दर्शाया जाएगा।

    तकनीक और लाइव डेमो होंगे प्रदर्शनी के प्रमुख आकर्षण

    प्रदर्शनी में क्राइम सीन के 3D मॉडल, डिजिटल डिस्प्ले, वीडियो तथा लाइव डेमो के माध्यम से आधुनिक अन्वेषण प्रणाली को प्रदर्शित किया जाएगा। क्राइम सीन पर साक्ष्य संकलन और वैज्ञानिक जांच की प्रक्रिया का सजीव प्रदर्शन विशेष आकर्षण का केंद्र रहेगा। साइबर सुरक्षा के लिए ‘सेफ क्लिक अभियान’ तथा ऑनलाइन ई-जीरो एफआईआर की जानकारी भी नागरिकों को दी जाएगी।

    इसके साथ ही ऑपरेशन मुस्कान, महिला हेल्प डेस्क एवं ‘Say No to Drugs’ जैसे जन-जागरूकता अभियानों के माध्यम से पुलिस की नागरिक-केंद्रित भूमिका को प्रदर्शित किया जाएगा। नागरिकों एवं विद्यार्थियों के लिए नवीन न्याय संहिताओं पर आधारित लाइव डिजिटल क्विज़ का भी आयोजन होगा।

    पुलिस की प्रमुख उपलब्धियों की भी होगी प्रस्तुति

    प्रदर्शनी में आधुनिक एवं वैज्ञानिक अन्वेषण प्रणाली के सजीव प्रदर्शन के साथ मध्यप्रदेश पुलिस की महत्वपूर्ण उपलब्धियों को भी प्रदर्शित किया जाएगा। साइबर अपराधों की रोकथाम एवं उनके खुलासे में किए गए चलाये गए 'सेफ़ क्लिक’ अभियान, CCTNS के माध्यम से तकनीकी नवाचार एवं नेटवर्क के सफल क्रियान्वयन तथा नारकोटिक्स द्वारा चलाए गए ‘नशे से दूरी हे जरूरी' अभियानों और उनमें प्राप्त प्रमुख उपलब्धियों को प्रदर्शित किया जाएगा।

    नागरिकों के लिए आधुनिक न्याय व्यवस्था को समझने का अवसर

    प्रदर्शनी का उद्देश्य नागरिकों को नवीन न्याय संहिताओं में हुए महत्वपूर्ण बदलावों, अन्वेषण में तकनीक एवं वैज्ञानिक साक्ष्यों के बढ़ते उपयोग तथा अपराध नियंत्रण की आधुनिक कार्यप्रणाली से परिचित कराना है। प्रदर्शनी के माध्यम से पुलिस की त्वरित प्रतिक्रिया से लेकर वैज्ञानिक साक्ष्य संकलन और उनके परीक्षण तक की प्रक्रिया को सरल एवं सहज तरीके से समझाया जाएगा।

    मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा नागरिकों, विद्यार्थियों एवं युवाओं से प्रदर्शनी में सहभागिता कर आधुनिक एवं वैज्ञानिक अन्वेषण प्रणाली तथा नवीन न्याय संहिताओं को समझने का आग्रह किया गया है।