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  • राजभर के 2 विधायक सपा को देंगे वोट? ओमप्रकाश राजभर ने खुद बताई स्थिति

    राजभर के 2 विधायक सपा को देंगे वोट? ओमप्रकाश राजभर ने खुद बताई स्थिति

     लखनऊ
    उत्तर प्रदेश में राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी हलचल के बीच सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के अध्यक्ष और कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने अपनी ही पार्टी के दो विधायकों को लेकर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि  अब्बास अंसारी और जौनपुर की जफराबाद सीट से विधायक जगदीश नारायण राय सुभासपा के चुनाव चिह्न पर जीतकर विधानसभा पहुंचे, लेकिन दोनों शुरू से ही समाजवादी पार्टी के साथ रहे हैं. राजभर के मुताबिक, ये विधायक सपा का झंडा और टोपी लगाकर घूमते हैं और उनका राजनीतिक झुकाव भी समाजवादी पार्टी की ओर है. उन्होंने कहा कि ये दोनों सपा के लिए वोट कर सकते हैं। 

    ओमप्रकाश राजभर ने कहा कि अब्बास अंसारी  और जगदीश नारायण राय को लेकर कहा कि ये दोनों विधायकों का व्यवहार चुनाव बाद से ही सुभासपा से अलग रहा है. उन्होंने दावा किया कि पार्टी के जिन 12 प्रत्याशियों को सुभासपा ने चुनाव में उतारा था, उनमें से कई का झुकाव सपा की ओर था. उनके मुताबिक, जो चुनाव हार गए, वे भी अलग हो गए और जीतने वाले विधायक भी सुभासपा के साथ सक्रिय नहीं रहे. राजभर ने कहा कि उन्हें इन विधायकों के जाने से कोई खास चिंता नहीं है और वह चुनाव का इंतजार कर रहे हैं। 

    धनराज नथवानी की उम्मीदवारी पर भी उठाए सवाल

    राज्यसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी की ओर से धनराज परिमल नथवानी को उम्मीदवार बनाए जाने पर भी ओमप्रकाश राजभर ने सवाल उठाए. उन्होंने आरोप लगाया कि सपा की ओर से जिस उद्योगपति को उम्मीदवार बनाया गया है, उनके परिवार का भाजपा से भी राजनीतिक जुड़ाव रहा है. राजभर ने इसे भाजपा और सपा के बीच कथित तालमेल से जोड़ने की कोशिश की. उन्होंने कहा कि जो सपा के लोग बोलते हैं कि बसपा भाजपा की B टीम है. ओवैसी, भाजपा की B टीम है तो अब तो यह खुद ही बीजेपी की B टीम हो गए हैं. दरअसल, उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों के लिए 16 अक्टूबर को चुनाव होना है. सपा ने रामगोपाल यादव और धनराज परिमल नथवानी को उम्मीदवार बनाया है. तीसरी सीट को लेकर भी सियासी चर्चाएं जारी हैं। 

    'पीडीए का मतलब परिवार डेवलपमेंट अथॉरिटी'
    ओमप्रकाश राजभर ने आजतक से बातचीत में अखिलेश यादव के पीडीए यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक वाले राजनीतिक नारे पर भी निशाना साधा. उन्होंने तंज कसते हुए पीडीए का अर्थ 'परिवार डेवलपमेंट अथॉरिटी' बताया. राजभर का आरोप था कि समाजवादी पार्टी की राजनीति में परिवार और आर्थिक रूप से प्रभावशाली लोगों को प्राथमिकता दी जा रही है. उन्होंने सपा की ओर से राज्यसभा उम्मीदवारों के चयन पर सवाल उठाते हुए कहा कि पार्टी को अपने पीडीए के दावे और उम्मीदवारों के चयन के बीच तालमेल स्पष्ट करना चाहिए. राजभर ने अपने बयान में धनराज नथवानी और रामगोपाल यादव का उल्लेख करते हुए सपा नेतृत्व पर परिवारवाद की राजनीति करने का आरोप लगाया। 

    47 से 125 सीटों तक पहुंचने का श्रेय लेने पर सपा को घेरा
    इंटरव्यू के दौरान राजभर ने 2022 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के प्रदर्शन और अपने दल की भूमिका पर भी विस्तार से बात की. उन्होंने कहा कि 2017 में भाजपा के साथ रहते हुए वह खुद चुनाव जीते थे. इसके बाद सपा ने उन्हें अपने गठबंधन में शामिल किया और 2022 के चुनाव में सहयोगियों के साथ मिलकर चुनाव लड़ा. राजभर ने दावा किया कि 2022 में सपा गठबंधन की सीटें बढ़ने में सुभासपा की भी महत्वपूर्ण भूमिका थी. उन्होंने कहा कि पूर्वांचल के कई जिलों में उनके समर्थन से सपा को फायदा हुआ. राजभर ने गाजीपुर, मऊ, बलिया, आजमगढ़ और आंबेडकर नगर जैसे जिलों का उल्लेख करते हुए अखिलेश यादव से पूछा कि गठबंधन में सुभासपा के योगदान को क्यों भुलाया जा रहा है। 

    उन्होंने सपा नेताओं के उन बयानों पर भी नाराजगी जताई, जिनमें सपा की जीत को केवल अपनी पार्टी की ताकत से जोड़कर देखा जाता है. राजभर ने कहा कि गठबंधन में दोनों दलों का योगदान था और किसी एक दल को पूरी सफलता का श्रेय देना उचित नहीं है। 

    कांग्रेस के साथ गठबंधन पर बोले- दोनों साथ मिलकर लड़ेंगे
    कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच गठबंधन को लेकर पूछे गए सवाल पर राजभर ने कहा कि दोनों दलों के बीच राजनीतिक जरूरत का रिश्ता है. उन्होंने दावा किया कि सीटों के बंटवारे को लेकर खींचतान के बावजूद दोनों पार्टियां अंततः मिलकर चुनाव लड़ेंगी. राजभर ने कांग्रेस की ओर से सीटों की मांग को लेकर भी कटाक्ष किया. उन्होंने कहा कि कांग्रेस को कम सीटों की मांग करने के बजाय ज्यादा सीटें मांगनी चाहिए. उन्होंने अपने इंटरव्यू में मध्य प्रदेश और उत्तराखंड की राजनीति का भी उल्लेख किया. राजभर ने अखिलेश यादव और कांग्रेस के संबंधों पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि अलग-अलग राज्यों में विपक्षी दलों के नेताओं के बयान उनके गठबंधन की एकजुटता पर प्रश्न खड़े करते हैं। 

    चुनाव आयोग पर विपक्ष के आरोपों को लेकर भी साधा निशाना
    चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर विपक्ष की ओर से उठाए जाने वाले सवालों पर भी ओमप्रकाश राजभर ने प्रतिक्रिया दी. उन्होंने समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के पुराने शासन का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि विपक्षी दल अपने कार्यकाल में चुनावी व्यवस्था पर सवाल नहीं उठाते थे, लेकिन सत्ता से बाहर होने के बाद चुनाव आयोग पर आरोप लगाते हैं. राजभर ने कहा कि चुनाव में जनता का फैसला सबसे महत्वपूर्ण होता है. उनके मुताबिक, जनता सरकार के कामकाज और राजनीतिक दलों के प्रदर्शन के आधार पर अपना निर्णय लेती है। 

  • रबी फसलों के MSP में बढ़ोतरी, दलहन-तिलहन पर सरकार का खास जोर

    रबी फसलों के MSP में बढ़ोतरी, दलहन-तिलहन पर सरकार का खास जोर

    बांदा
    केंद्र सरकार ने रबी विपणन सीजन 2027-28 के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में बढ़ोतरी का ऐलान किया है। सरकार ने इस बार गेहूं की तुलना में दलहन-तिलहन पर ज्यादा मेहरबानी दिखाई है।

    गेहूं का एमएसपी 2585 से बढ़ाकर 2610 रुपये प्रति क्विंटल किया गया है, यानी सिर्फ 25 रुपये की वृद्धि। जबकि चने में 83 रुपये, मसूर में 390 रुपये, रेपसीड-सरसों में 413 रुपये, जौ में 136 रुपये, कुसुम (तिलहन) में सबसे ज्यादा 675 रुपये बढ़ाया है। हालांकि जिले में कुसुम का उत्पादन किया ही नहीं जाता है।

    दलहन और खाद्य तेलों के आयात को कम करने पर फोकस
    सरकार की मंशा स्पष्ट है कि देश में गेहूं का बफर स्टाक पहले से ही पर्याप्त है। 2014-15 से 2025-26 के बीच 3715 लाख टन गेहूं की खरीद एमएसपी पर हुई है, जो 2004-05 से 2013-14 के 2254 लाख टन से काफी अधिक है। इसलिए अब फोकस दलहन और खाद्य तेलों के आयात को कम करने पर है। जिले के किसानों के लिए यह फैसला सीधे जेब से जुड़ा है। लेकिन गेहूं के दाम में कम बढ़ोतरी पर किसान मायूस हैं।

    जिले में 3.39 लाख किसान हैं, जो करीब 3.77 लाख हेक्टेयर खेती में रबी फसलों की पैदावार करते हैंं। इसमें से 1.94 लाख खेती में किसान गेहूं की उपज पैदा करते हैं। जिले में रबी की मुख्य फसलें गेहूं, चना, मसूर और सरसों हैं।

    अतिरिक्त लाभ का हिसाब
    कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार, बीते वर्ष 2026-27 में जिले की मंडियों और सरकारी क्रय केंद्रों पर कुल 6,00,120 क्विंटल गेहूं, 1,52,051 क्विंटल चना, 41,444 क्विंटल मसूर और 23,526 क्विंटल सरसों की खरीद/उत्पादन दर्ज किया गया था।

    यदि इसी उत्पादन को आधार मानें तो नए बढ़े हुए एमएसपी से किसानों को होने वाले अतिरिक्त फायदे में गेहूं बीते वर्ष 6,00,120 क्विंटल हुआ, इसमें बढ़ोतरी धनराशि यदि 25 रुपये बढ़ा दिया जाए तो करीब 1.50 करोड़ रुपये की होगी। वहीं यदि चने की बात करें तो बीते वर्ष 1,52,051 क्विंटल का उत्पादन हुआ तो बढ़ोतरी 83 रुपये होने पर अतिरिक्त लाभ में करीब 1.26 करोड़ रुपये का सीधे लाभ होगा।

    मसूर में भी बीते वर्ष 41,444 क्विंटल का उत्पादन हुआ, यदि बढ़ोतरी 390 रुपये होने पर किसानों को होने वाले फायदे की बात करें तो करीब 1.61 करोड़ रुपये का लाभ होगा। सरसों बीते वर्ष 23,526 क्विंटल हुई, बढ़ोतरी 413 रुपये की सरकार ने की तो इस हिसाब से करीब 97 लाख रुपये का अतिरिक्त लाभ होगा।

    यानी यदि आने वाले रबी सीजन में इतना ही उत्पादन हुआ तो बांदा के किसानों की जेब में पिछले साल के मुकाबले कुल पांच करोड़ 35 लाख दो हजार 631 रुपये अतिरिक्त आएंगे। इसमें सबसे ज्यादा फायदा मसूर और सरसों के किसानों को होगा। गेहूं सबसे ज्यादा पैदा होने के बावजूद सबसे कम लाभ देगा।

        पानी की कमी के कारण दलहन-तिलहन की खेती ज्यादा फायदेमंद है। एमएसपी बढ़ने से किसान को चना-मसूर-सरसों में ज्यादा फायदा होगा, किसानों को चाहिए चना, मसूर, सरसों जैसी खेती की ओर लौटें, जिससे भूजल बचेगा और फायदा भी अधिक होगा।

        -संजय कुमार, जिला कृषि अधिकारी, बांदा

    बढ़ोतरी एक नजर में

    फसल2026-272027-28बढ़ोतरी
    गेहूं2,5852,61025
    जौ2,1502,286136
    चना5,8755,95883
    मसूर7,0007,390390
    रेपसीड-सरसों6,2006,613413
    कुसुम (तिलहन)6,5407,215675

     

  • डिंडौरी में डेढ़ लाख पेड़ों की कटाई का लक्ष्य, अब तक सिर्फ 4516 पेड़ कटे

    डिंडौरी में डेढ़ लाख पेड़ों की कटाई का लक्ष्य, अब तक सिर्फ 4516 पेड़ कटे

    डिंडौरी

    डिंडौरी जिले के 30 हजार हेक्टेयर में फैले साल के जंगल पर साल बोरर कीट का खतरा बढ़ गया है। इससे प्रभावित करीब 1.50 लाख पेड़ों को 31 दिसंबर तक काटने की तैयारी है। इसके लिए जंगल को 113 सेक्टर में बांटा गया है। हालांकि, विभाग के बताए आंकड़ों और मौके पर काम की रफ्तार को देखें तो तय समय में डेढ़ लाख पेड़ों की कटाई पूरी करना चुनौतीपूर्ण नजर आता है। विभाग के मुताबिक दो मजदूर एक पेड़ काटने में करीब डेढ़ से ढाई घंटे लेते हैं। वहीं, 60 सेक्टर में रोजाना औसतन करीब 565 पेड़ ही काटे जा रहे हैं। इस रफ्तार से पूरी कटाई में लंबा समय लग सकता है।

    डिंडौरी से करीब 85 किमी दूर मौके पर पहुंची  टीम
    टीम डिंडौरी से करीब 85 किमी दूर पश्चिम करंजिया वन परिक्षेत्र के चौरा दादर और खारी डीह के बीच स्थित जंगल में पहुंची। यहां करीब डेढ़ किमी पहाड़ी और कीचड़ भरे रास्ते से तरवर टोला के जंगल तक पहुंचना पड़ा। बारिश के कारण कुछ देर काम बंद रहा। बारिश थमने के बाद जंगल में फिर कुल्हाड़ी और आरी चलने लगी

    60 सेक्टर में करीब 600 मजदूर लगाने का दावा
    वन विभाग के मुताबिक 60 सेक्टर में करीब 10-10 मजदूर लगाए गए हैं, यानी करीब 600 मजदूर कटाई में लगे हैं। विभाग का कहना है कि जरूरत पड़ने पर छत्तीसगढ़ सीमा से लगे गांवों से भी मजदूर बुलाए जाएंगे।

    मौके पर मिले मजदूर गोपाल नेताम ने बताया कि उस दिन उसके साथ करीब 13 लोग काम कर रहे थे। मोटे पेड़ों को आरी से और बाकी को कुल्हाड़ी से काटा जा रहा था।

    पेड़ गिराने के बाद सिर्फ तना काटना ही काम नहीं है। मजदूरों को टहनियां काटने और छाल उतारने का काम भी करना पड़ता है। घने जंगल में जंगली घास और वनस्पति के कारण काम जोखिम भरा है। मजदूरों के मुताबिक, यहां अकसर सांप भी दिखाई देते हैं।

    हेलमेट-जूते तो दूर, प्राथमिक इलाज की भी परेशानी
    मजदूर फूल सिंह ने बताया कि उन्हें हेलमेट, दस्ताने और सुरक्षा जूते उपलब्ध नहीं कराए गए हैं। उनके मुताबिक पेड़ काटते समय चोट लगने पर मौके पर प्राथमिक इलाज की भी पर्याप्त व्यवस्था नहीं है।

    फूल सिंह ने बताया कि बारिश के मौसम में काम के दूसरे विकल्प कम होने के कारण मजदूर यह काम कर रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि जंगल में पीने के पानी की व्यवस्था नहीं है। प्यास लगने पर मजदूर करीब 200-250 मीटर दूर स्थित झिर से पानी लेते हैं। बारिश के दौरान इसमें भी मटमैला पानी आने की बात उन्होंने कही।

    80 हजार हेक्टेयर से ज्यादा क्षेत्र में साल के जंगल
    डिंडौरी जिले में कुल 80,263 हेक्टेयर क्षेत्र में साल के जंगल हैं। इनमें करीब 76,230 हेक्टेयर सघन और 4,032 हेक्टेयर विरल वन क्षेत्र है।

    वन विभाग के मुताबिक, दो साल में साल बोरर से प्रभावित पेड़ों की संख्या तेजी से बढ़ी है। पिछले साल 5-6 हजार पेड़ों पर निशान लगाए गए थे, जबकि इस बार यह संख्या करीब डेढ़ लाख तक पहुंच गई है।

    विशेषज्ञों के अनुसार, साल बोरर का प्राकृतिक चक्र करीब 30 साल का होता है। डिंडौरी में 1997-98 में भी इसका बड़ा प्रकोप सामने आया था।

    30 साल पहले 22.15 लाख पेड़ काटने पड़े थे
    वन विभाग के अनुसार, 1997-98 में साल बोरर के प्रकोप के कारण 1.42 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में 22.15 लाख पेड़ काटने पड़े थे। उस दौरान 1.39 करोड़ कीट नष्ट किए गए थे।

    इस बार प्रभावित पेड़ों की कटाई के बाद छोटे पौधों को सुरक्षित रखने की बात कही जा रही है। हालांकि, कटे हुए जंगल को दोबारा विकसित होने में 20 से 30 साल लग सकते हैं।

    विभाग के अनुमान के मुताबिक कटाई के बाद करीब 46,390 घनमीटर इमारती लकड़ी और 43,940 घनमीटर जलाऊ लकड़ी मिलेगी। कटाई और परिवहन पर करीब 8 से 10 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है। लकड़ी की नीलामी ई-ऑक्शन के जरिए की जाएगी।

    डिंडौरी में जलाए गए 19.50 लाख 'साल बोरर' कीड़े
    मध्यप्रदेश के डिंडौरी में वन विभाग ने आठ संग्रहण केंद्रों पर करीब 19 लाख 50 हजार साल बोरर कीड़े जलाए। गुरुवार दोपहर करीब 12 बजे कीड़ों से बनी मालाओं को लकड़ियों के बीच रखकर आग लगाई गई। अकेले करंजिया संग्रहण केंद्र पर 3 लाख 50 हजार कीड़े जलाए गए।

    साल बोरर क्या है ?

    साल बोरर एक बीटल होता है. ये पेड़ के अंदर रहता है और पेड़ को अंदर से खोखला करता है. इसके बाद ये पेड़ किसी काम का नहीं बचता है. फिर उस एक पेड़ को पूरी तरह से बर्बाद करने के बाद ये कीट दूसरे पेड़ में चला जाता है. इसकी पहचान करने का सबसे आसान तरीका ये है कि पेड़ के सबसे नीचे वाले भाग में थोड़ा बुरादा टाइप होता है या फिर पत्तियों की बात करें तो पत्तियां पीली पड़ने लगेंगी. ये सिंप्टम्स होते हैं, अगर बाहर से पहचानना चाहें तो। 

    पेड़ों को काटना क्यों है जरूरी
    साल बोरर कीट लगातार पकड़ा भी जा रहा है. इसके अलावा इस कीट से प्रभावित पेड़ को काटना जरूरी इसलिए भी होता है, क्योंकि अगर संक्रमित पेड़ को काटेंगे नहीं, तो एक पेड़ से दूसरे पेड़ में संक्रमित हो जाएगा. लार्वा थ्रेडिंग के जरिये ये फैलता है. पहले एक पेड़ को खोखला कर फिर दूसरे पेड़ में जाता है, ऑब्जर्वेशन में पाया गया है कि जब तक की एक पेड़ को ये खत्म नहीं कर देते पूरी तरह से, तब तक दूसरे पेड़ में नहीं जाते हैं. अनूपपुर में लगभग 35% साल के पेड़ हैं, अगर साल बोरर कीट से प्रभावित पेड़ों को काटेंगे नहीं तो और संक्रमित होंगे जिससे और ज्यादा नुकसान होगा। 

    अमरकंटक में साल बोरर का कितना प्रकोप
    अमरकंटक का जंगल करीब 8525 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला है. यहां लगभग 40 लाख साल के पेड़ हैं. क्षेत्र के 10 बीट में से आठ में साल बोरर का संक्रमण भी पाया गया है. इनमें अमरकंटक, सोनमुड़ा, कपिलधारा, उमरगोहान, भूड़ाकोना, दमगढ़, पौड़ी, ताली बीट शामिल है। 

  • 8वें वेतन आयोग के बीच OPS की मांग, सरकार लाई NPS की नई ‘तत्काल’ स्कीम

    8वें वेतन आयोग के बीच OPS की मांग, सरकार लाई NPS की नई ‘तत्काल’ स्कीम

    नई दिल्ली

    एक ओर जहां कई कर्मचारी संगठनों ने 8वें वेतन आयोग के सामने OPS को बहाल करने की डिमांड की है तो दूसरी ओर पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (PFRDA) ने एनपीएस में 2-3 करोड़ नए सब्सक्राइबर जुड़ने की उम्मीद लगा रखी है।PFRDA की चेयरपर्सन एस रमन ने कहा है कि उन्हें उम्मीद है कि अगले दो साल में NPS से करीब 2-3 करोड़ नए सब्सक्राइबर जुड़ेंगे। रमन ने एनपीएस दिवस के मौके पर PTI से बातचीत में कहा कि इस बढ़ोतरी की वजह हाल ही में शुरू की गई ‘NPS तत्काल’ सुविधा हो सकती है। इसका मकसद NPS अकाउंट खोलने के प्रोसेस को तेज और आसान बनाना है।

    बता दें सरकार ने 1 जनवरी 2004 को ओल्ड पेंशन स्कीम की जगह NPS शुरू किया था। इस नई स्कीम के तहत लोग अपने कामकाजी सालों में पैसा जमा करते हैं और यह रकम बाजार से जुड़े फंडो में लगाई जाती है।

    8वें वेतन आयोग से गारंटीड पेंशन की मांग
    सर्वे ऑफ इंडिया की MSA ने 8वें वेतन आयोग से OPS बहाल करने की मांग की है। संगठन ने अंतिम वेतन के 50 प्रतिशत के बराबर गारंटीड पेंशन की मांग भी रखी है। वहीं फेडरेशन ऑफ नेशनल पोस्टल आर्गेनाइजेशन ने NPS और UPS के तहत आने वाले कर्मचारियों को भी पेंशन व्यवस्था में लाने की मांग की है।

    केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए NPS जरूरी
    रिटायरमेंट के समय जमा हुई रकम से पेंशन जैसी सुविधाएं मिलती हैं, जिनमें एन्युइटी आधारित आय भी शामिल है। केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए NPS जरूरी है, जबकि प्राइवेट सेक्टर के लोग इसमें स्वेच्छा से जुड़ सकते हैं।

    NPS तत्काल से छोटे शहरों में बढ़ेगा पेंशन कवरेज
    NPS तत्काल सुविधा से टियर-2 और टियर-3 शहरों में रहने वाले लोगों में भी पेंशन कवरेज बढ़ने की उम्मीद है। रमन ने कहा कि यह सुविधा इन्फॉर्मल सेक्टर के और लोगों को भी पेंशन सिस्टम से जोड़ सकती है। इससे NPS का दायरा सिर्फ सैलरीड और फॉर्मल सेक्टर के कर्मचारियों तक सीमित नहीं रहेगा।

    NPS तत्काल स्कीम क्या है?
    अब तक ग्राहक BHIM ऐप या अपने बैंक के UPI ऐप से सीधे NPS में एनरोल या नया NPS अकाउंट नहीं खोल सकते थे। हालांकि, इन प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल आगे पैसा जमा करने के लिए किया जा सकता था।

    NPS में औपचारिक रूप से जुड़ने के लिए पहले ऑनलाइन या ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन करना पड़ता था, जिससे परमानेंट रिटायरमेंट अकाउंट नंबर (PRAN) मिलता था।

    ‘NPS तत्काल’ स्कीम के जरिए PFRDA, UPI से नए NPS सब्सक्राइबर जोड़ेगा। इसकी शुरुआत NPCI के BHIM UPI ऐप से होगी। इसके लिए KYC-वेरिफाइड बैंक अकाउंट चाहिए और ऑनलाइन पेमेंट ऑप्शन से पैसा जमा किया जा सकता है।

    BHIM ऐप पर NPS अकाउंट कैसे खोलें?
    NPS तत्काल स्कीम से लोग BHIM ऐप डाउनलोड करने के बाद महज कुछ आसान स्टेप्स में पेंशन अकाउंट खोल सकते हैं। स्टेप्स ये हैं…

    1. BHIM ऐप खोलें, होमस्क्रीन पर रिचार्ज और बिल पेमेंट सेक्शन में ‘view all’ पर क्लिक करें, फिर NPS टैब पर जाएं।

    2. अपना डेट ऑफ बर्थ जैसी बेसिक जानकारी दें।

    3. प्रोसेस के दौरान दिख रहे अपने बैंक अकाउंट को चुनें।

    4. UPI से कम से कम ₹250 का पहला कंट्रीब्यूशन ऑथराइज करें। इससे आपका PRAN बनेगा और अकाउंट एक्टिव हो जाएगा।
    किन बैंकों के ग्राहक आवेदन कर सकते हैं?

    रमन ने यह भी दोहराया कि फिलहाल स्टेट बैंक, ICICI बैंक, HDFC बैंक, एक्सिस बैंक और IDFC फर्स्ट बैंक के ग्राहक BHIM ऐप से NPS अकाउंट खोलने की इस सुविधा का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके लिए कागजी काम की जरूरत नहीं है, पूरा प्रोसेस डिजिटल है और KYC तुरंत पूरी हो जाती है। तत्काल रूट का मकसद NPS अकाउंट खोलने के प्रोसेस को आसान और तेज बनाना है।

  • इंदौर से पलासनेर तक 6 लेन होगा आगरा-मुंबई रोड, ब्लैक स्पॉट पर थमेंगे हादसे

    इंदौर से पलासनेर तक 6 लेन होगा आगरा-मुंबई रोड, ब्लैक स्पॉट पर थमेंगे हादसे

    इंदौर
     आगरा-मुंबई हाईवे पर इंदौर से पलासनेर के बीच हादसों को रोकने के लिए यहां रोड 6 लेन का किया जा रहा है। 154 किमी के इस हिस्से में रोड चौड़ा किया जाना है। इसी रोड पर सबसे ज्यादा करीब 15 ब्लैक स्पॉट चिह्नित किए गए थे। जहां 25 से ज्यादा हादसों में कई लोगों ने अपनी जान गवाई और कई घायल हो गए थे।

    आगरा-मुंबई रोड (एनएच-52) के इंदौर से खलघाट होते हुए पलासनेर(महाराष्ट्र) तक के हिस्से को सिक्स लेन करने का काम शुरू हो गया है। एनएच-52 के 154.77 किमी हिस्से में मौजूदा 4 लेन सड़क का विस्तार होगा। यह कवायद इसलिए है क्योंकि इस साल जनवरी से जुलाई के बीच एनएच-52 पर 15 ब्लैक स्पॉट्स पर 27 सड़क हादसे हुए, जिनमें 27 लोगों को जान गंवानी पड़ी।

    सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित कमेटी के चेयरमैन जस्टिस एएम सप्रे ने एनएचएआई के अधिकारियों से पूछा कि हादसों को रोकने के लिए क्या कदम उठा रहे हैं। अधिकारियों ने कहा था कि इंदौर-खलघाट हाईवे को सिक्स लेन किया जा रहा है। प्रोजेक्ट के लिए मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के कुल 178 गांवों से जमीन अधिग्रहित की जानी है। सबसे ज्यादा महू के 41 गांवों से जमीनों का अधिग्रहण होगा। अभी डीपीआर पर भी काम जारी है।

    NH-52:15 ब्लैक स्पॉट्स पर 27 जानें गईं

    धार के 16, धरमपुरी के 30 गांव नेशनल हाईवे अथॉरिटी ने जो प्लान संभागायुक्त भास्कर लक्षकार को दिखाया है, उसके मुताबिक परियोजना का बड़ा असर इंदौर जिले की महू तहसील में होगा। यहां 41 गांव इसके दायरे में हैं। धार तहसील में 16 गांव हैं। धरमपुरी तहसील में 30 गांव हैं। बड़वानी जिले की राजपुर तहसील में 22 गांव प्रोजेक्ट के दायरे में हैं। सेंधवा में 15 गांव हैं। निवाली में 9 गांव हैं। वरला में 2 गांव हैं। खरगोन जिले की महेश्वर तहसील के 6 गांव शामिल हैं। कसरावद के 28 गांव भी इसमें शामिल हैं। महाराष्ट्र की ओर के 9 गांव भी इस हाइवे विस्तार में शामिल हैं। इस तरह मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र के कुल 178 गांव प्रोजेक्ट के दायरे में आ रहे हैं।

    नियुक्त होंगे भू-अर्जन अधिकारी : प्रोजेक्ट के लिए जमीन का भू-अर्जन प्रस्तावित है। इसमें निजी, सरकारी और वनभूमि शामिल है। सड़क किनारे की सुविधाओं और जंक्शन के लिए जरूरी जमीन भी शामिल है। सभी संबंधित जिलों की तहसीलों में सक्षम प्राधिकारी भू-अर्जन (कम्पिटेंट अथॉरिटी फॉर लैंड एक्विजिशन-CALA) की नियुक्ति की जानी है। इसके लिए धारा 3(ए) का प्रकाशन किया जाना है।

    अभी तक यहां फोरलेन सड़क
    इंदौर से महाराष्ट्र के पलासनेर के बीच अभी तक फोरलेन सड़क है। कुछ दिनों पहले सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित समिति ने एनएचएआई से इस रास्ते पर हादसे रोकने को लेकर उठाए जा रहे कदम पर सवाल पूछा था। इस पर अधिकारियों ने कमेटी को बताया था कि सड़क को फोरलेन से सिक्स लेन किए जाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इसके लिए मधय प्रदेश और महाराष्ट्र के 170 से ज्यादा गांवों से जमीन अधिग्रहण किया जाना है।

    मध्य प्रदेश इन जिलों के गांवों से लेंगे जमीन
    मध्य प्रदेश के इंदौर, धार, बड़वानी, खरगोन जिलों के गांवों से हाईवे को चौड़ा करने के लिए जमीन का अधिग्रहण किया जाएगा। इस प्रोजेक्ट के लिए भू-अर्जन अधिकारी नियुक्ति भी की जाएगी। महाराष्ट्र की ओर से भी करीब 9 गांवों से यह सड़क गुजरती है। इसे चौड़ा करने के लिए वहां भी जमीन का अधिग्रहण किया जाएगा।

    आर्थिक और औद्योगिक केन्द्रों को मिलेगा फायदा
    यह मार्ग आगरा-मुंबई कॉरिडोर का हिस्सा है, जो उत्तर भारत को पश्चिमी एवं दक्षिणी भारत से जोड़ता है. इंदौर एवं मुंबई जैसे प्रमुख आर्थिक व औद्योगिक केंद्रों को जोड़ने वाले इस कॉरिडोर पर लगातार यातायात का दबाव बढ़ रहा है. इस रूट पर प्रतिदिन लगभग 40 हजार वाहनों का आवागमन हो रहा है. इस रूट के 6-लेन का किए जाने से देश के लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को मजबूती मिलेगी और माल परिवहन की दक्षता में बढ़ोत्तरी होगी। 

    इस परियोजना के तहत भेरू घाट, बाकानेर घाट एवं बिजासन घाट जैसे चुनौतीपूर्ण घाट खंडों को 6-लेन में बदला जाएगा. इस दौरान इस रूट पर पड़ने वाले ब्लैक स्पॉट को भी खत्म किया जाएगा. इस रूट पर कई स्थानों पर ढलाने हैं, इनका संतुलन किया जाएगा. कैरिजवे का चौड़ीकरण किया जाएगा. ढलान को कम तीखा और मोड़ों को अधिक सुरखित बनाया जाएगा. इस नई सड़क पर सुरक्षा के लिहाज से सुरक्षित किया जाएगा। 

    इसको सेफ्टी फर्स्ट के सिद्धांत पर तैयार किया जाएगा. इसमें क्रैश बैरियर्स, उच्च गुणवत्ता की रोड मार्किंग, रेट्रो-रिफ्लेक्टिव साइनज, इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम एवं आधुनिक स्लोप स्टेबिलाइजेशन तकनीकों का उपयोग किया जाएगा. इन उपायों के माध्यम से घाट खंडों को उच्च क्षमता, अधिक सुरक्षित एवं निर्बाध यातायात के अनुरूप अत्याधुनिक 6-लेन कॉरिडोर के रूप में विकसित किया जाएगा। 

    बनेंगे फ्लाई ओवर, अंडरपास
    परियोजना के अंतर्गत खलघाट क्षेत्र में नर्मदा नदी पर एक नए समानांतर पुल का निर्माण भी किया जाएगा. इससे मौजूदा पुल पर ट्रैफिक का दबाव कम होगा. इसके अलावा आसपास के छोटे बड़े शहरों में होने वाले जाम को कम करने के लिए बायपास, सर्विस रोड, फ्लाई ओवर और अंडरपास का भी निर्माण किया जाएगा. इससे हाईवे और स्थानीय यातायात व्यवस्था को अलग-अलग व्यवस्थित किया जा सकेगा. यह व्यवस्था न केवल जाम की समस्या को कम करेगी, बल्कि लोगों की सुरक्षा, सुविधा एवं यात्रा अनुभव को भी बेहतर बनाएगी। 

    पीथमपुर क्षेत्र को मिलेगा फायदा
    यह परियोजना एनएच-47 व प्रस्तावित इंदौर वेस्टर्न बायपास के साथ मिलकर स्थानीय लॉजिस्टिक्स नेटर्व को और मजबूत करेगी. खासतौर से पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र को इससे फायदा मिलेगा. इससे सप्लाई चेन और बेहतर होगी. एनएचएआई के प्रोजेक्ट डायरेक्टर प्रवीण यादव के मुताबिक "इस सिक्स लेन हाईवे के निर्माण से इंदौर से महाराष्ट्र और मुंबई तक की यात्रा कम समय में पूरी होगी. इसके अलावा लॉजिस्टिक नेटवर्क में भी मजबूती आएगी. इसकी डीपीआर दिसंबर के अंत तक पूरी होने की संभावना है। 

  • केन्द्रीय सहकारिता एवं गृह मंत्री शाह उज्जैन को देंगे 255 करोड़ रूपये के अत्याधुनिक डेयरी प्लांट की सौगात

    केन्द्रीय सहकारिता एवं गृह मंत्री शाह उज्जैन को देंगे 255 करोड़ रूपये के अत्याधुनिक डेयरी प्लांट की सौगात

    केन्द्रीय सहकारिता एवं गृह मंत्री शाह उज्जैन को देंगे 255 करोड़ रूपये के अत्याधुनिक डेयरी प्लांट की सौगात

    केंद्रीय सहकारिता मंत्री 3 अक्टूबर को करेंगे डेयरी प्लांट का डिजिटल भूमि-पूजन

    प्लांट की शुरूआत 3 लाख लीटर प्रतिदिन की क्षमता से होगी, भविष्य में 5 लाख लीटर तक होगा विस्तार

    उज्जैन 

    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा दुग्ध प्रसंस्करण क्षमता के विस्तार और डेयरी क्षेत्र को सुदृढ़ करने की दिशा में लगातार प्रयास किया जा रहा है। उज्जैन एवं आसपास के क्षेत्रों में दुग्ध प्रसंस्करण क्षमता के विस्तार और डेयरी क्षेत्र को सुदृढ़ करने की दिशा में मध्यप्रदेश राज्य सहकारी दुग्ध महासंघ द्वारा 255 करोड़ रुपये की लागत से आधुनिक डेयरी प्लांट स्थापित किया जा रहा है। केंद्रीय सहकारिता एवं गृह मंत्री अमित शाह 3 अक्टूबर 2026 को भोपाल से इस प्लांट का डिजिटल भूमि-पूजन करेंगे।

    उज्जैन में स्थापित होने वाला यह अत्याधुनिक डेयरी प्लांट क्षेत्र में दुग्ध प्रसंस्करण, मूल्यवर्धन और विभिन्न डेयरी उत्पादों के उत्पादन को नई गति देगा। परियोजना की कुल लागत में से 170 करोड़ रुपये राज्य शासन द्वारा अनुदान के रूप में प्रदान किए जाएंगे, जबकि शेष 85 करोड़ रुपये दुग्ध संघ द्वारा ऋण के माध्यम से जुटाए जाएंगे।परियोजना को अगले दो वर्ष में पूर्ण करने का लक्ष्य है।

    प्रस्तावित प्लांट की शुरुआत 3 लाख लीटर प्रतिदिन दूध प्रसंस्करण क्षमता के साथ होगी। भविष्य में इसकी क्षमता को बढ़ाकर 5 लाख लीटर प्रतिदिन तक किया जा सकेगा। इससे उज्जैन और आसपास के क्षेत्रों में बढ़ती दुग्ध उपलब्धता के साथ प्रसंस्करण क्षमता का विस्तार भी संभव होगा।

    पैक्ड मिल्क से लेकर घी तक का होगा उत्पादन

    प्लांट में आधुनिक प्रसंस्करण सुविधाओं के साथ विभिन्न प्रकार के डेयरी उत्पादों का उत्पादन किया जाएगा। इसमें 1.50 लाख लीटर प्रतिदिन पैक्ड मिल्क, 25 हजार लीटर प्रतिदिन दही तथा 10 हजार लीटर प्रतिदिन लस्सी/छाछ के उत्पादन की क्षमता होगी। इसके अलावा 10 मीट्रिक टन प्रतिदिन क्षमता का घी प्लांट भी स्थापित किया जाएगा।

    मध्यप्रदेश राज्य सहकारी दुग्ध महासंघ के प्रबंध संचालक जयदेव बिस्वास ने कहा, “उज्जैन में आधुनिक डेयरी प्लांट की स्थापना मध्यप्रदेश के डेयरी क्षेत्र के विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री शाह द्वारा भोपाल से इस परियोजना का डिजिटल भूमि-पूजन किया जाएगा। इस परियोजना से दुग्ध उत्पादकों से प्राप्त दूध का बेहतर प्रसंस्करण और मूल्यवर्धन सुनिश्चित होगा तथा उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण डेयरी उत्पाद उपलब्ध कराने की क्षमता बढ़ेगी।” उन्होंने कहा, “प्लांट को भविष्य में 5 लाख लीटर प्रतिदिन तक विस्तारित करने का प्रबंध किया गया है। इससे उज्जैन एवं आसपास के क्षेत्रों में दुग्ध उत्पादन, संग्रहण, प्रसंस्करण और विपणन की पूरी श्रृंखला को मजबूती मिलेगी तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी गति मिलेगी।”

    यह परियोजना आधुनिक प्रसंस्करण सुविधाओं के माध्यम से दुग्ध उत्पादकों से प्राप्त दूध के बेहतर उपयोग और मूल्यवर्धन को बढ़ावा देगी। साथ ही क्षेत्र में डेयरी गतिविधियों के विस्तार से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने तथा उपभोक्ताओं तक उच्च गुणवत्ता वाले डेयरी उत्पाद पहुंचाने की दिशा में भी यह महत्वपूर्ण पहल साबित होगी।

     

  • MP से 10 अक्टूबर तक विदा होगा मानसून, अगले 3 दिन तेज धूप; फिर बारिश के आसार

    MP से 10 अक्टूबर तक विदा होगा मानसून, अगले 3 दिन तेज धूप; फिर बारिश के आसार

    भोपाल 

    मध्यप्रदेश में मानसून अब विदाई की ओर बढ़ रहा है और 10 अक्टूबर तक प्रदेश से इसके लौटने की संभावना है। अगले तीन दिनों तक कई इलाकों में तेज धूप रहने के आसार हैं, जिससे दिन का तापमान बढ़ सकता है, जबकि रात में हल्की ठंडक महसूस होगी। 5 अक्टूबर को 9 जिलों में बारिश की संभावना जताई गई है। प्रदेश में अब तक करीब 35.8 इंच बारिश दर्ज हुई है, जो सामान्य से लगभग 4% कम है। पूर्वी मध्यप्रदेश में सामान्य से करीब 4% ज्यादा, जबकि पश्चिमी मध्यप्रदेश में लगभग 12% कम बारिश दर्ज की गई है। 

    ग्वालियर-चंबल और उज्जैन से हो सकती है मानसून की वापसी
    मध्य प्रदेश में मानसून का आधिकारिक सीजन 30 सितंबर को समाप्त हो चुका है, लेकिन अभी तक प्रदेश के किसी भी जिले से मानसून की औपचारिक विदाई नहीं हुई है। वर्तमान में मानसून की वापसी रेखा पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान के कुछ हिस्सों से होकर गुजर रही है। इसका असर मध्य प्रदेश के ग्वालियर-चंबल और उज्जैन संभाग के आसपास भी देखा जा रहा है।

    मौसम विभाग के अनुमान के मुताबिक, मानसून की वापसी की शुरुआत इन्हीं क्षेत्रों से हो सकती है। इसके बाद धीरे-धीरे इंदौर, भोपाल, नर्मदापुरम, सागर, जबलपुर, रीवा और शहडोल संभाग से मानसून विदा हो सकता है। इसकी शुरुआत शुक्रवार या शनिवार से होने की संभावना जताई जा रही है।

    अक्टूबर में दिन गर्म, रातें रहेंगी ठंडी
    अक्टूबर को मौसम के बदलाव का महीना माना जाता है। मानसून की विदाई के साथ आसमान साफ होने लगता है, जिससे दिन में धूप का असर बढ़ता है, जबकि रात के तापमान में गिरावट आने लगती है। यही वजह है कि अक्टूबर की शुरुआत में ही प्रदेश के कई शहरों में रात के तापमान में कमी दर्ज की गई है।

    मौसम विशेषज्ञ के अनुसार, अक्टूबर में प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में अधिकतम तापमान सामान्य से ऊपर रहने की संभावना है। हालांकि, कुछ क्षेत्रों में हल्की बारिश भी हो सकती है।

    5 अक्टूबर को इन जिलों में बारिश के आसार
    5 अक्टूबर को पूर्वी मध्य प्रदेश के पन्ना, सतना, रीवा, मऊगंज, मैहर, सीधी, सिंगरौली, शहडोल और अनूपपुर में हल्की बारिश होने का अनुमान है।

    25 जिलों में बारिश का कोटा पूरा
    प्रदेश के 25 जिलों में इस मानसून सीजन में बारिश का निर्धारित कोटा पूरा हो चुका है। इनमें भोपाल, राजगढ़, बुरहानपुर, खरगोन, कटनी, मंडला, डिंडौरी, ग्वालियर, गुना, दतिया, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, मैहर, आगर-मालवा, भिंड, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, सतना, मऊगंज, शहडोल, उमरिया और अनूपपुर शामिल हैं।

    ऐसे में संभावना है कि यहीं से मानसून वापसी करेगा। इसके बाद इंदौर, भोपाल, नर्मदापुरम, सागर, जबलपुर, रीवा और शहडोल संभाग से इसकी विदाई होगी। शुक्रवार-शनिवार को इसकी शुरुआत हो सकती है।

    अक्टूबर में दिन गर्म और रातें ठंडी होंगी
    मौसम विभाग के अनुसार, प्रदेश में अक्टूबर में बारिश, गर्मी और ठंड का ट्रेंड रहा है। इस बार भी ऐसा ही होने का अनुमान है। दूसरी ओर, अक्टूबर का महीना चेंज ओवर पीरियड रहता है। इस महीने मानसून विदाई पर रहता है। इससे आसमान साफ हो जाता है। इस कारण दिन में गर्मी और रात में ठंड पड़ती है। यही वजह है कि अक्टूबर के पहले ही दिन कई शहरों में रात के तापमान में गिरावट देखने को मिली है।

    कम बारिश, लेकिन गर्मी का अहसास बढ़ सकता है
    मौसम विशेषज्ञ नायक ने बताया कि अक्टूबर में प्रदेश के अधिकांश हिस्से में अधिकतम तापमान सामान्य से अधिक रहने की संभावना है। कहीं-कहीं हल्की बारिश होने का अनुमान भी है। 5 अक्टूबर को पन्ना, सतना, रीवा, मऊगंज, मैहर, सीधी, सिंगरौली, शहडोल और अनूपपुर में हल्की बारिश हो सकती है।

    इस बार प्रदेश में 35.8 इंच बारिश रिकॉर्ड
    दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान मध्य प्रदेश में कुल 908.4 मिमी यानी 35.8 इंच (95.9 प्रतिशत) बारिश हुई है। यह सामान्य बारिश 37.3 इंच (949.5 मिमी) की तुलना में 1.5 इंच कम है। वहीं, ओवरऑल 4 प्रतिशत कम पानी गिरा है। पूर्वी हिस्से में 4% ज्यादा और पश्चिमी हिस्से में औसत से 12% बारिश कम हुई है।

    प्रदेश के पूर्वी हिस्से जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में बारिश का आंकड़ा चार प्रतिशत ज्यादा है। अधिकांश जिलों में कोटे से ज्यादा पानी गिर चुका है लेकिन बालाघाट, छिंदवाड़ा, दमोह, जबलपुर, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, रीवा, सागर, सिवनी में 5% से 21% तक कम बारिश हुई है।

    प्रदेश के पश्चिमी हिस्से आलीराजपुर, अशोकनगर, बड़वानी, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में औसत से 9% से 51% कम पानी गिरा है।

    इन 25 जिलों में कोटा फुल
    भोपाल, राजगढ़, बुरहानपुर, खरगोन, कटनी, मंडला, डिंडौरी, ग्वालियर, गुना, दतिया, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, मैहर, आगर-मालवा, भिंड, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, सतना, मऊगंज, शहडोल, उमरिया और अनूपपुर में बारिश का कोटा पूरा हो चुका है।

  • 3 अक्टूबर राशिफल: शनिवार को चमकेगी इन राशियों की किस्मत, जानें अपना भविष्यफल

    3 अक्टूबर राशिफल: शनिवार को चमकेगी इन राशियों की किस्मत, जानें अपना भविष्यफल

    मेष राशि– दिन पॉजिटिव रहेगा। आर्थिक मामलों में लाभ होगा। रिश्तों में भावनाएं गहरी होंगी, पर अति संवेदनशीलता से बचें। सेहत को लेकर ध्यान रखें। खासकर खानपान में संतुलन जरूरी है। शाम का समय रिलैक्स करने वाला रहेगा।

    वृषभ राशि- भावनाएं गहरी रहेंगी। किसी पुराने रिश्ते या याद से मन विचलित हो सकता है, लेकिन काम में ध्यान रखें। ऑफिस या बिजनेस में मेहनत का फल जल्द ही दिखाई देगा। सेहत ठीक रहेगी। दिन के दूसरे भाग में कोई अप्रत्याशित खुशखबरी मिल सकती है।

    मिथुन राशि- दिन मेहनत और व्यस्तता से भरा रहेगा, लेकिन नतीजे उम्मीद से बेहतर रहेंगे। टीमवर्क से जुड़े कामों में सफलता मिलेगी। किसी पुराने दोस्त से मुलाकात हो सकती है जो मन को हल्का कर देगी। सेहत अच्छी रहेगी। आज जरूरत है खुद को थोड़ा वक्त देने की।संगीत, पढ़ाई या शांति में समय बिताना मानसिक आराम देगा।

    कर्क राशि- भाग्य का साथ मिलेगा। जो लोग विदेश या किसी बड़ी परीक्षा से जुड़े हैं, उन्हें सफलता के संकेत हैं। पारिवारिक जीवन अच्छा रहेगा। कोई पुराना विवाद खत्म हो सकता है। सेहत अच्छी रहेगी। ध्यान और मेडिटेशन करने से मन शांत रहेगा।

    सिंह राशि- करियर में प्रगति के मजबूत संकेत हैं। बॉस से तारीफ मिल सकती है। मेहनत के बल पर नए अवसर बनेंगे। परिवार और काम के बीच संतुलन बनाए रखें। सेहत सामान्य रहेगी, लेकिन नींद की कमी असर डाल सकती है। रिश्तों में विश्वास बनाए रखें।

    कन्या राशि- काम में संतुलन रहेगा, लेकिन किसी सहयोगी के साथ गलतफहमी से बचें। आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। प्रेम जीवन में समझ और संवेदनशीलता बढ़ेगी। हेल्थ में सुधार के संकेत हैं, पर नींद का ख्याल रखें। जो लोग स्टूडेंट हैं, उनके लिए पढ़ाई में फोकस बढ़ेगा।

    तुला राशि- दोस्तों और सहकर्मियों से जुड़ाव मजबूत होगा। आज का दिन नेटवर्किंग और नए अवसरों का है। जो लोग मीडिया, पब्लिक रिलेशन या ट्रैवल से जुड़े हैं, उन्हें लाभ मिलेगा। प्रेम जीवन स्थिर रहेगा। आर्थिक स्थिति में सुधार होगा। बस जल्दबाजी में कोई कदम न उठाएं।

    वृश्चिक राशि- दिन जिम्मेदारियों से भरा रहेगा, लेकिन मन में आत्मविश्वास रहेगा। कामकाज में सकारात्मक नतीजे मिलेंगे। जो लोग नौकरी बदलना चाहते हैं, उन्हें अच्छी खबर मिल सकती है। रिश्तों में सच्चाई और भरोसा बनाए रखें। स्वास्थ्य बेहतर रहेगा, लेकिन तनाव से दूरी रखें। परिवार के साथ वक्त बिताना मानसिक सुकून देगा।

    धनु राशि- सूर्य का प्रभाव आपको आत्मविश्वासी बनाए हुए है। आज किसी बड़े निर्णय का दिन है। बिजनेस या करियर से जुड़ी नई दिशा मिल सकती है। परिवार का सहयोग मिलेगा। प्रेम जीवन में नजदीकियां बढ़ेंगी। आर्थिक रूप से स्थिति मजबूत होगी। यात्रा के योग भी बन रहे हैं, जो लाभकारी साबित होंगे।

    मकर राशि- काम के साथ-साथ रिश्तों पर भी ध्यान देना होगा। ऑफिस में नई जिम्मेदारी मिल सकती है। बॉस या सीनियर आपकी मेहनत से प्रभावित होंगे। प्यार में किसी पुरानी गलतफहमी का अंत होगा। आर्थिक स्थिति सामान्य रहेगी। हेल्थ में पेट या डाइजेशन से जुड़ी तकलीफ आ सकती है, सतर्क रहें।

    कुंभ राशि- दिन ऊर्जा और आत्मविश्वास से भरा रहेगा। किसी अधूरे काम को पूरा करने का सही समय है। निजी जीवन में प्यार और अपनापन बढ़ेगा। परिवार से जुड़ी जिम्मेदारियों को लेकर व्यस्तता बढ़ेगी, लेकिन सब संतुलित रहेगा। सेहत सामान्य रहेगी। शाम का समय आत्ममंथन या ध्यान के लिए अच्छा है।

    मीन राशि- दिन वित्तीय रूप से लाभदायक रहेगा। निवेश या किसी पुराने सौदे से फायदा हो सकता है। ऑफिस में सीनियर का सहयोग मिलेगा। पारिवारिक माहौल खुशनुमा रहेगा। रिश्तों में पारदर्शिता बढ़ेगी। जो लोग कला, मीडिया या डिजाइन से जुड़े हैं, उनके लिए दिन रचनात्मकता से भरपूर रहेगा। शाम का समय मनोरंजन और खुशी लेकर आएगा।

  • नुक्कड़ नाटक के जरिए पहुँचाया जनकल्याणकारी योजनाओं का संदेश

    नुक्कड़ नाटक के जरिए पहुँचाया जनकल्याणकारी योजनाओं का संदेश

    ​रायपुर

    सेवा संकल्प अभियान के तहत संचालित ‘नमो सेवा – अनकही कहानियाँ’ कार्यक्रम के अंतर्गत नारायणपुर जिले के सुदूर क्षेत्र कोहकामेटा में शिक्षकों ने एक अनुकरणीय पहल की है। शिक्षकों ने मंच पर उतरकर नुक्कड़ नाटक के माध्यम से आमजन को शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं और सुविधाओं के प्रति जागरूक किया।

     ​शिक्षकों ने अपने प्रभावशाली अभिनय, सहज-सरल संवादों और रचनात्मक प्रस्तुति से योजनाओं के उद्देश्य, पात्रता एवं उनसे मिलने वाले लाभों की जानकारी ग्रामीणों तक पहुँचाई। नाटक के जरिए स्वच्छ भारत मिशन, प्रधानमंत्री आवास योजना, जल जीवन मिशन और प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि जैसी प्रमुख योजनाओं को प्रमुखता से रेखांकित किया गया। इसके साथ ही, जिले को नक्सलमुक्त बनाने के लिए शासन द्वारा चलाई जा रही पहलों का भी सकारात्मक संदेश दिया गया।

    कलाकार बने शिक्षकों ने स्वच्छता, शुद्ध पेयजल, पक्के मकान, कृषि विकास एवं ग्रामीण सशक्तिकरण पर प्रकाश डालते हुए आह्वान किया कि योजनाओं की जानकारी हर घर तक पहुँचे, ताकि कोई भी पात्र व्यक्ति इनके लाभ से वंचित न रहे।

     ​इस रचनात्मक पहल ने न केवल शिक्षकों की कलात्मक प्रतिभा को एक बड़ा मंच दिया, बल्कि उन्हें सीधे जनसेवा और सामाजिक बदलाव की मुहीम से भी जोड़ा। नाटक की जीवंत प्रस्तुति ने ग्रामीणों को गहराई से प्रभावित किया और उनमें योजनाओं के प्रति जनभागीदारी की भावना को जगाया।

      ​कार्यक्रम के दौरान जिला पंचायत अध्यक्ष,उपाध्यक्ष, जनपद पंचायत ओरछा के उपाध्यक्ष, जिला पंचायत सदस्य सहित क्षेत्र के अनेक सरपंच और बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे।

  • एशियन गेम्स में भारतीय महिला हॉकी टीम के स्वर्ण पर मंत्री विश्वास सारंग ने दी बधाई

    एशियन गेम्स में भारतीय महिला हॉकी टीम के स्वर्ण पर मंत्री विश्वास सारंग ने दी बधाई

    भोपाल 

    एशियन गेम्स में भारतीय महिला हॉकी टीम द्वारा शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक जीतने और ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करने पर मध्यप्रदेश के सहकारिता, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री  विश्वास सारंग ने भारतीय टीम और सभी खिलाड़ियों को बधाई दी है।

    मंत्री  सारंग ने कहा कि भारतीय महिला हॉकी टीम की यह ऐतिहासिक उपलब्धि अत्यंत प्रसन्नता और गौरव का विषय है। हमारी बेटियों ने शानदार प्रतिभा, मेहनत और जुझारूपन का प्रदर्शन करते हुए एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक हासिल किया है। इस उपलब्धि से हिंदुस्तान का नाम पूरी दुनिया में रोशन हुआ है।उन्होंने कहा कि भारतीय महिला हॉकी टीम की इस सफलता में मध्यप्रदेश की बेटियों की भी महत्वपूर्ण भागीदारी है। मध्यप्रदेश की ईशिका चौधरी, बिच्छू देवी और सुशीला चानू भारतीय महिला हॉकी टीम का हिस्सा रहीं। इनमें ईशिका चौधरी ग्वालियर की खिलाड़ी हैं, जबकि बिच्छू देवी और सुशीला चानू मध्यप्रदेश हॉकी अकादमी की खिलाड़ी हैं।

    मंत्री  सारंग ने कहा कि एशियन गेम्स में मध्यप्रदेश के खिलाड़ी लगातार शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रदेश के खिलाड़ियों ने विभिन्न स्पर्धाओं में स्वर्ण, रजत और कांस्य—तीनों पदक हासिल कर मध्यप्रदेश का गौरव बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण, आधुनिक खेल सुविधाएं और आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने भारतीय महिला हॉकी टीम को स्वर्णिम सफलता और ओलंपिक क्वालीफिकेशन के लिए शुभकामनाएं देते हुए कहा कि मध्यप्रदेश की बेटियों की यह उपलब्धि प्रदेश के लाखों युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी।