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  • बच्चे को मिला सहभागिता का अधिकार बच्चे की इच्छा बनी आयोग की प्राथमिकता

    बच्चे को मिला सहभागिता का अधिकार बच्चे की इच्छा बनी आयोग की प्राथमिकता

    रायपुर
     छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने 16 सितंबर 2026 को कवर्धा प्रवास के दौरान शासकीय बालक गृह का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान बाल गृह में निवासरत एक बालक का जन्मदिन होने की जानकारी मिली। इस अवसर पर अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने बालक के साथ उसका जन्मदिन मनाया तथा उससे संवाद कर उसकी इच्छा और आवश्यकताओं के संबंध में जानकारी ली। इस दौरान बालक से जन्मदिन पर मिलने वाले उपहार के संबंध में पूछे जाने पर उसने संकोच एवं उत्साह के साथ साइकिल की इच्छा व्यक्त की। बालक की इच्छा को ध्यान में रखते हुए आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने उसे आश्वस्त किया कि उसकी पसंद के अनुसार साइकिल उपलब्ध कराई जाएगी।

    आयोग की अध्यक्ष द्वारा किए गए आश्वासन के अनुरूप दो दिन के भीतर बोड़ला कवर्धा के बाल विकास परियोजना अधिकारी  श्री नमन शर्मा द्वारा बालक को साथ लेकर उसकी पसंद की साइकिल का चयन कराया गया तथा साइकिल बालक को बालक गृह में उपलब्ध कराई गई।साइकिल प्राप्त होने के पश्चात आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने बालक से दूरभाष के माध्यम से संवाद किया। बातचीत के दौरान बालक ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए अध्यक्ष के प्रति आभार व्यक्त किया। आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने कहा कि बाल अधिकारों में बच्चों की सहभागिता का महत्वपूर्ण स्थान है। बच्चों की बात सुनना, उनकी भावनाओं एवं इच्छाओं को महत्व देना तथा उनकी राय का सम्मान करना बाल अधिकार संरक्षण की मूल भावना है। उन्होंने कहा कि बाल गृहों में निवासरत बच्चों को संरक्षण एवं आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ-साथ उनके व्यक्तित्व, भावनात्मक आवश्यकताओं और सहभागिता के अधिकार को भी सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है।

  • CJI सूर्यकांत ने सुप्रीम कोर्ट को बताया पर्यावरण न्याय का बरगद, विकास-संरक्षण संतुलन जरूरी

    CJI सूर्यकांत ने सुप्रीम कोर्ट को बताया पर्यावरण न्याय का बरगद, विकास-संरक्षण संतुलन जरूरी

    नई दिल्ली
    पर्यावरण और पारिस्थितिकी की सुरक्षा में सुप्रीम कोर्ट की भूमिका का जिक्र करते हुए CJI सूर्यकांत ने शनिवार को शीर्ष अदालत को पर्यावरण न्याय का ‘बरगद का पेड़’ बताया। उन्होंने कहा कि संरक्षण और विकास एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं, बल्कि दोनों के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है। राष्ट्रीय हरित अधिकरण ( NGT ) की ओर से आयोजित ‘पर्यावरण और जलवायु गतिशीलता का भविष्य’ कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए CJI ने पर्यावरण संरक्षण से जुड़े संवैधानिक प्रावधानों और न्यायपालिका की भूमिका पर विस्तार से बात की।

    CJI सूर्य कांत ने कहा कि पर्यावरण की सुरक्षा के लिए संविधान में प्रावधान मौजूद हैं, लेकिन संविधान के शब्द केवल बीज की तरह हैं। इन्हें अंकुरित होने और जीवन पाने के लिए न्यायिक समझ के पोषण की जरूरत होती है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने इसी भूमिका को निभाया है। उनके मुताबिक, शीर्ष अदालत पर्यावरण न्याय के ‘बरगद के पेड़’ की तरह मजबूती से खड़ी रही है, जिसकी जड़ें भारत के सभ्यतागत मूल्यों में गहरी हैं और जिसकी शाखाएं आने वाली पीढ़ियों के अधिकारों की रक्षा करती हैं।

    ‘संरक्षण के बिना प्रगति मृगतृष्णा’
    CJI ने कहा कि दशकों से सुप्रीम कोर्ट इस विचार का समर्थन करता रहा है कि संरक्षण के बिना प्रगति एक ऐसी मृगतृष्णा है, जो पारिस्थितिक विनाश के रेगिस्तान में गायब हो जाती है। उन्होंने कहा कि अदालत के फैसलों में इस बात पर जोर दिया गया है कि प्रकृति की रक्षा करना केवल परोपकार का कार्य नहीं, बल्कि आत्म-संरक्षण है। यह जीवन की निरंतरता में किया जाने वाला निवेश है।

    अनुच्छेद 21 के तहत प्रदूषण मुक्त पर्यावरण का अधिकार
    सुप्रीम कोर्ट के सक्रिय दृष्टिकोण का उल्लेख करते हुए CJI सूर्यकांत ने कहा कि शीर्ष अदालत ने प्रदूषण मुक्त पर्यावरण के अधिकार को अनुच्छेद 21 में सीधे शामिल करके इसे मौलिक अधिकार बनाया है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण से जुड़े न्यायिक दृष्टिकोण का यही क्रम आज तक आगे बढ़ा है और हाल में सुप्रीम कोर्ट ने ‘पारिस्थितिकी-केंद्रित आनुपातिकता’ की अवधारणा को स्पष्ट किया है।

    विकास की अनुमति, लेकिन शर्तों और जवाबदेही के साथ
    CJI ने कहा कि ‘पारिस्थितिकी-केंद्रित आनुपातिकता’ का अर्थ यह है कि पर्यावरण संरक्षण मजबूत होना चाहिए, लेकिन इतना विवेकपूर्ण भी होना चाहिए कि वह दुनिया के मौजूदा स्वरूप के साथ तालमेल बैठा सके। उन्होंने कहा कि इस अवधारणा के तहत विकास की अनुमति देने का व्यावहारिक तरीका यह है कि उसके साथ लागू करने योग्य शर्तें, विशेषज्ञों की निगरानी, बहाली, क्षतिपूरक वनीकरण और जवाबदेही सुनिश्चित की जाए।

    जलवायु परिवर्तन से मौलिक अधिकार भी प्रभावित
    CJI सूर्यकांत ने कहा कि हालिया भारतीय जलवायु न्यायशास्त्र ने इस मुद्दे को संवैधानिक रूप से और अधिक महत्वपूर्ण बना दिया है। उन्होंने कहा कि न्यायशास्त्र यह मानता है कि जलवायु परिवर्तन के प्रतिकूल प्रभाव समानता, आजीविका और स्वास्थ्य जैसे मौलिक अधिकारों को प्रभावित कर सकते हैं। इसके साथ ही यह उन आवश्यक परिस्थितियों को भी प्रभावित कर सकता है, जो इन अधिकारों का सार्थक रूप से आनंद लेने के लिए जरूरी हैं।

     

  • AI के ‘गॉडफादर’ Geoffrey Hinton की चेतावनी, बोले- खतरा समझेंगे तो रात में चैन से नहीं सो पाएंगे

    AI के ‘गॉडफादर’ Geoffrey Hinton की चेतावनी, बोले- खतरा समझेंगे तो रात में चैन से नहीं सो पाएंगे

    आज के समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की वजह से सभी के अंदर डर का माहौल बना हुआ है. पिछले कुछ सालों में AI में होने वाली तेजी को देखकर कई लोग हैरान हो चुके हैं. बड़ी कंपनियों में कई एंट्री-लेवल जॉब्स भी खत्म हो रही हैं. इसकी वजह से नए स्टूडेंट्स हों या जॉब करने वाले लोग, सभी के दिमाग में AI का डर होना आम बात है.

    लेकिन ऐसे कई बच्चे भी होंगे जो इसको बहुत ज्यादा सीरियस प्रॉब्लम नहीं मान रहे होंगे. हालांकि, दुनिया भर के एक्सपर्ट्स ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के तेजी से हो रहे डेवलपमेंट को देखकर बहुत बड़ी चिंता जाहिर की है. इनमें AI के 'गॉडफादर' कहे जाने वाले Geoffrey Hinton भी शामिल हैं. उन्हें 2024 में नोबेल प्राइज से नवाजा गया था.

    ज्योफ्री हिंटन ने AI के खतरे को लेकर चिंता जाहिर करते हुए कहा है कि अगर आप रात में चैन से सो पा रहे हैं, तो शायद आप AI के असली खतरे को समझ नहीं रहे हैं. आइए जानते हैं कि AI कितना बड़ा खतरा बन सकता है और क्यों दुनिया भर के एक्सपर्ट्स इसके खतरे को लेकर चिंता जाहिर कर रहे हैं.

    जानिए 'गॉडफादर' का क्या कहना है AI के बारे में
    आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के 'गॉडफादर' कहे जाने वाले ज्योफ्री हिंटन दुनिया के जाने-माने AI एक्सपर्ट हैं. उन्हें साल 2024 में फिजिक्स का नोबेल प्राइज दिया गया था.

    AI के खतरों को लेकर एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा था कि अगर आप AI के तेजी से बढ़ते खतरे के बावजूद आराम से सो पा रहे हैं, तो शायद आप इस खतरे की गंभीरता को नहीं समझ रहे हैं. उनका मानना है कि AI का खतरा काफी गंभीर है. यही वजह है कि कई एक्सपर्ट्स भी AI के खतरों के बारे में सोचकर चिंता जाहिर कर चुके हैं.

    इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस, बेंगलुरु के प्रोफेसर ने भी जताया था खतरा
    डॉ. प्रतोष, जो भारत के नंबर 1 माने जाने वाले इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस, बेंगलुरु में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं, उनका एक लेक्चर वीडियो भी वायरल हो रहा है. इसमें वह बता रहे हैं कि दुनिया में AI को लेकर जो कुछ हो रहा है, उसे देखने के बाद वह भी ठीक से सो नहीं पा रहे हैं.

    इसके अलावा सोशल मीडिया पर भी AI को लेकर कई ऐसी बातें सामने आ रही हैं, जिनमें इसके तेजी से बढ़ते इस्तेमाल और इसके संभावित खतरों को लेकर चिंता जताई जा रही है.

    इंसानों को खत्म करने वाली बात
    OpenAI के एक कर्मचारी ने कंपनी से रिजाइन करने के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर AI के खतरे को लेकर अपनी चिंता जाहिर की. उनका कहना था कि आने वाले 10 सालों में AI इंसानों के लिए बड़ा खतरा बन सकता है. उन्होंने यह भी दावा किया कि AI की वजह से इंसानों के खत्म होने की 10 फीसदी संभावना हो सकती है.

    इस एम्पलाई का नाम Jacob Coxon है. इन सभी बातों से यह साफ नजर आ रहा है कि AI के बढ़ते इस्तेमाल और इसके संभावित खतरों को लेकर दुनिया भर के एक्सपर्ट्स और AI को बनाने वाले लोग भी चिंता जाहिर कर रहे हैं.

  • भोपाल में दिनदहाड़े युवक की हत्या, चलती बाइक पर दोस्त ने सिर में मारी गोली

    भोपाल में दिनदहाड़े युवक की हत्या, चलती बाइक पर दोस्त ने सिर में मारी गोली

    भोपाल.

    निशातपुरा थाना क्षेत्र की हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी रविवार सुबह दिनदहाडे चलती बाइक पर युवक को उसके ही दोस्त ने पिस्टल से सिर में गोली मार दी। घटना के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई।

    पुलिस ने इस मामले में आरोपित के खिलाफ हत्या का केस दर्ज कर उसकी तलाश शुरू कर दी है। पुलिस के मुताबिक 21 वर्षीय ताशी हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में रहता है, और प्राइवेट काम करता है। वह सुबह अपने दोस्त अलीम उर्फ अल्लू व एक अन्य साथी के साथ मछली पकड़ने के लिए जा रहा था।

    अलीम पीछे वाली सीट पर बैठा हुआ था, जबकि मृतक ताशी बीच और उसका तीसरा साथी बाइक चल रहा था। तभी रास्ते में अलीम ने अपना पास रखी पिस्टल उसके सिर में लगाकर गोली चला दी। गोली चलते ही तीनों बाइक से नीचे गिर गए। हमले में ताशी की मौके पर ही मौत हो गई।

  • नंदीग्राम उपचुनाव से पहले शुभेंदु अधिकारी का अल्पसंख्यकों को संदेश, बोले- 6 अक्टूबर को होगा ‘टेस्ट’

    नंदीग्राम उपचुनाव से पहले शुभेंदु अधिकारी का अल्पसंख्यकों को संदेश, बोले- 6 अक्टूबर को होगा ‘टेस्ट’

    कोलकाता
    पश्चिम बंगाल की सबसे हाई-प्रोफाइल सीट नंदीग्राम एक बार फिर देश की सियासत के केंद्र में है। 2011 में वाममोर्चा के 34 साल के शासन को उखाड़ फेंकने से लेकर 2026 में बीजेपी के सत्ता में आने तक, नंदीग्राम हमेशा से राज्य के राजनीतिक बदलाव की धुरी रहा है। अब 6 अक्टूबर को होने जा रहे उपचुनाव से पहले मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने क्षेत्र के अल्पसंख्यक समुदाय को एक बड़ा संदेश देकर बहस छेड़ दी है।

    भाजपा उम्मीदवार हसीरानी रथ के नामांकन से ठीक पहले एक जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने सीधे तौर पर कहा, "जो लोग मुझे वोट नहीं देते, जो बीजेपी को वोट नहीं देते… मैं उन अल्पसंख्यकों से अपील करता हूं। आपके पास एक मौका आया है- आप सरकार के साथ रहना चाहते हैं या नहीं? अगर आप मुख्यमंत्री के साथ कदम से कदम मिलाकर चलना चाहते हैं और अपने इलाके में काम कराना चाहते हैं, तो 6 अक्टूबर को रेजीनगर और नंदीग्राम में आपका असली टेस्ट है।"

    इस सीधे संदेश के बाद नंदीग्राम के मुस्लिम बहुल इलाकों में रहने वाले आम लोगों और अल्पसंख्यक मतदाताओं क्या कहना आइए जानते हैं।

    नंदीग्राम के अल्पसंख्यकों ने क्या कहा?
    न्यूज18 बांग्ला की रिपोर्ट मुताबिक, शुभेंदु अधिकारी की अपील के बाद नंदीग्राम के स्थानीय मुस्लिम समुदाय की प्रतिक्रिया काफी दिलचस्प और सकारात्मक नजर आ रही है

    जाहिदा परवीन कहती हैं, "हमें सरकार के साथ खड़ा होना ही पड़ेगा। सरकार हमारी जरूरतों को देख रही है और काम कर रही है।"

    शेख आलम कहते हैं, "हमने 2026 के मुख्य चुनाव में भी 'दादा' (शुभेंदु अधिकारी) को वोट दिया था। अब उपचुनाव हो रहा है, तो इस बार भी हमारा वोट दादा को ही जाएगा।"

    शेख अब्दुल्ला ने कहा, "मैं पहले भी उनके साथ था, आज भी हूं और आगे भी रहूंगा। क्षेत्र में विकास के काम अच्छे चल रहे हैं। अगर ऐसे ही काम होता रहा तो और भी लोग उनके साथ जुड़ेंगे। नंदीग्राम में शांति है और काम हो रहा है। हम चाहते हैं कि शुभेंदु जी ही मुख्यमंत्री बने रहें।"

    अजमुल इस्लाम का कहना है, "सड़कों का निर्माण काम तेजी से चल रहा है। पहले सड़कों का काम अटका पड़ा था, लेकिन उनके आने के बाद काम तेजी से शुरू हुआ है। इस लिहाज से शुभेंदु जी बिल्कुल ठीक हैं।"

    वहीं रुकशान बीबी ने बोला, "हम देश के नागरिक हैं, वोट देना हमारा फर्ज है। अगर सरकार हमारे भले के लिए काम कर रही है, तो हमें भी सरकार का साथ देना होगा।"

    कैसा है नंदीग्राम का वोट गणित?
    राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, नंदीग्राम में चुनाव का गणित बेहद संवेदनशील और दिलचस्प है।

    नंदीग्राम का ब्लॉक-1 अल्पसंख्यक बहुल इलाका माना जाता है।
    SIR के बाद हाल ही में आई वोटर लिस्ट में नंदीग्राम से करीब 2,826 वोटरों के नाम कटे थे, जिनमें से लगभग 95.5 प्रतिशत (करीब 2,700 वोटर) मुस्लिम समुदाय से हैं।

    राजनीतिक जानकारों का मानना है कि नंदीग्राम के 75% हिंदू वोटों का एक बड़ा हिस्सा बीजेपी के पक्ष में एकजुट हो सकता है। ऐसे में करीब 25% अल्पसंख्यक मतदाता ही यह तय करेंगे कि जीत का मार्जिन कितना बड़ा होगा।

    ममता बनर्जी की पार्टी का प्रत्याशी मैदान से हटने और कांग्रेस उम्मीदवार की गिरफ्तारी के बीच शुभेंदु अधिकारी का यह "विकास और सरकार का साथ" देने का दांव नंदीग्राम में नया इतिहास रचता है या नहीं यह देखना होगा।

  • पश्चिम एशिया में बढ़ा तनाव, कैंप डेविड दौरा बीच में छोड़कर अचानक व्हाइट हाउस लौटे ट्रंप

    पश्चिम एशिया में बढ़ा तनाव, कैंप डेविड दौरा बीच में छोड़कर अचानक व्हाइट हाउस लौटे ट्रंप

    वाशिंगटन
    पश्चिम एशिया में गहराते सैन्य संकट और तेजी से बदलते घटनाक्रमों के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपना वीकेंड दौरा बीच में ही छोड़कर शनिवार को अचानक व्हाइट हाउस लौट आए हैं। ट्रंप का मैरीलैंड स्थित राष्ट्रपति आवास 'कैंप डेविड' से तय समय से एक दिन पहले वॉशिंगटन लौटना इस बात का साफ संकेत है कि क्षेत्र में तनाव बेहद नाजुक मोड़ पर पहुंच चुका है।

    व्हाइट हाउस प्रशासन की ओर से ट्रंप के अचानक लौटने की कोई आधिकारिक वजह नहीं बताई गई है, लेकिन यह कदम अमेरिकी विदेश मंत्रालय की ओर से जारी उस आपातकालीन सुरक्षा एडवाइजरी के तुरंत बाद आया है, जिसमें अमेरिकी नागरिकों को पश्चिम एशिया की यात्रा टालने और स्थिति के "अनियंत्रित रूप से बिगड़ने" की सख्त चेतावनी दी गई है।

    रियाद पर हूती मिसाइल हमला और US का 'ट्रैवल रेड अलर्ट'
    तनाव में इस ताजा उछाल की मुख्य वजह यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों की सऊदी अरब की राजधानी रियाद को निशाना बनाकर दागी गई बैलिस्टिक मिसाइल है।

    सऊदी अधिकारियों का कहना है कि उन्होंने मिसाइल को बीच हवा में ही नष्ट कर दिया, जबकि हूतियों का दावा है कि उन्होंने रियाद के संवेदनशील ठिकानों को सफलतापूर्वक निशाना बनाया।

    इस हमले के तुरंत बाद अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने अपने दूतावासों के जरिए चेतावनी जारी करते हुए कहा, "यह सैन्य संघर्ष बेहद तेजी से उग्र रूप ले सकता है। क्षेत्र के भीतर या वहां से होकर यात्रा करने वाले सभी अमेरिकी नागरिक अपनी योजनाओं पर तुरंत पुनर्विचार करें।"

    ईरान की ट्रंप को 7 शर्तें: "पैसा छोड़ो, नौसेना नाकाबंदी हटाओ"
    इस भीषण तनाव के बीच ईरान ने युद्ध विराम और बातचीत की मेज पर लौटने के लिए वॉशिंगटन के सामने सात शर्तें रख दी हैं।

    ईरान के शीर्ष सुरक्षा प्रमुख मोहसेन रजाई ने अल जजीरा से बातचीत में खुलासा किया कि कतर के माध्यम से ये शर्तें अमेरिका को सौंप दी गई हैं और तेहरान अब राष्ट्रपति ट्रंप के जवाब का इंतजार कर रहा है।

    रजाई ने सार्वजनिक रूप से तीन मुख्य शर्तों का खुलासा किया:
    सभी मोर्चों पर युद्ध की तुरंत समाप्ति: क्षेत्र में जारी तमाम सैन्य कार्रवाइयों पर पूर्ण विराम।

    फ्रीज फंड की रिहाई: अलग-अलग इंटरनेश बैंकों में जब्त किए गए ईरान के अरबों डॉलर के फंड को तुरंत बहाल करना।

    अमेरिकी नौसेना नाकाबंदी का अंत: लाल सागर और फारस की खाड़ी में ईरान व उसके सहयोगियों के खिलाफ जारी अमेरिकी नेवल ब्लॉकैड को खत्म करना।

    निर्णायक जंग के लिए तैयार: तेहरान की दोटूक चेतावनी
    ईरानी सुरक्षा प्रमुख ने अमेरिकी प्रशासन को सख्त लहजे में चेतावनी देते हुए कहा कि अगर वॉशिंगटन ने इन शर्तों को खारिज कर दिया, तो ईरान 'निर्णायक युद्ध' के लिए पूरी तरह तैयार है।

    उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप की धमकियों से ईरान डरने वाला नहीं है। कतर की मध्यस्थता में चल रही इस कूटनीतिक कोशिश के बीच अब पूरी दुनिया की नजरें व्हाइट हाउस पर टिकी हैं कि राष्ट्रपति ट्रंप ईरान की शर्तों पर क्या रुख अपनाते हैं।

  • 43 साल पुराना महानदी जल विवाद सुलझेगा, CM साय बोले- छत्तीसगढ़-ओडिशा के बीच बनेगी सहमति

    43 साल पुराना महानदी जल विवाद सुलझेगा, CM साय बोले- छत्तीसगढ़-ओडिशा के बीच बनेगी सहमति

    रायपुर.

    छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच 1983 से चल रहा महानदी जल बंटवारा विवाद सुलझने की ओर अग्रसर है. इस मुद्दे पर कई बैठक हुई लेकिन सकारात्मक परिणाम नहीं निकल पाया था. हाल में दिल्ली में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल, दोनों मुख्यमंत्री और अधिकारियों के बीच चर्चा हुई थी.

    मुख्यमंत्री साय रविवार को ओडिशा के दो दिवसीय दौरे पर रवाना हुए. इससे पहले उन्होंने महानदी जल विवाद को लेकर बयान दिया है. रायपुर एयरपोर्ट पर पत्रकारों से चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री साय ने बताया कि बीते दिनों दिल्ली में दोनों राज्यों मुख्यमंत्री और अधिकारी बैठकर चर्चा किए थे. यह विषय सीडब्ल्यूसी (Central Water Commission) को सौंप दिया गया है. उन्होंने कहा कि बहुत जल्द महानदी जल विवाद का समाधान होने वाला है.

    ओडिशा दौरे पर सीएम साय रवाना
    मुख्यमंत्री साय ने ओडिशा दौरे के लेकर जानकारी दी कि वह दो दिवसीय ओडिशा प्रवास पर रहेंगे. मुख्यमंत्री मांझी के साथ विभिन्न विषयों पर चर्चा करेंगे. इसके अलावा पुरी में भगवान जगन्नाथ मंदिर में दर्शन करेंगे और छत्तीसगढ़ की खुशहाली की कामना करेंगे.

    कांग्रेस पर सीएम साय ने साधा निशाना
    मध्यप्रदेश के इंदौर में आयोजित कांग्रेस के छात्रों की गूंज कार्यक्रम पर सीएम साय ने निशाना साधा है. उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जहां-जहां जाते हैं, कांग्रेस का बंटाधार होता है. यही हाल इंदौर और मध्यप्रदेश में कांग्रेस का होने वाला है.

  • वैभव सूर्यवंशी टेस्ट के लायक नहीं? मोंटी पनेसर के दावे पर माइकल क्लार्क ने दिया करारा जवाब

    वैभव सूर्यवंशी टेस्ट के लायक नहीं? मोंटी पनेसर के दावे पर माइकल क्लार्क ने दिया करारा जवाब

    नई दिल्ली
    भारतीय टीम के युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी अपने बल्ले के दम पर लगातार सुर्खियां बटोर रहे हैं. अफगानिस्तान के खिलाफ वैभव सूर्यवंशी टी20 सीरीज के लिए टीम का हिस्सा थे. लेकिन उन्हें एक भी मुकाबले में प्लेइंग इलेवन में शामिल नहीं किया गया.

    दूसरी तरफ वैभव सूर्यवंशी ने दलीप ट्रॉफी में टीम के लिए कुछ अहम पारियां खेलकर टेस्ट के लिए भी अपनी दावेदारी ठोकने का काम किया था. हालांकि, अभी भी क्रिकेट के कुछ दिग्गजों का मानना है कि वैभव सूर्यवंशी टेस्ट के खिलाड़ी नहीं हैं.

    ऐसे में सवाल यह है कि क्या वैभव सिर्फ टी20 के स्टार हैं या वे टेस्ट क्रिकेट में भी अपनी धाक जमा पाएंगे? पूर्व इंग्लैंड स्पिनर मोंटी पनेसर ने वैभव की तकनीक पर सवाल उठाए हैं. वहीं ऑस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान माइकल क्लार्क उनके समर्थन में उतर आए हैं.

    मोंटी पनेसर का मानना है कि वैभव सूर्यवंशी अपनी मौजूदा बैटिंग तकनीक के सहारे तीनों फॉर्मेट (टी20, वनडे और टेस्ट) में लंबे समय तक कामयाब नहीं हो सकते. पनेसर ने एक पॉडकास्ट पर कहा कि वे वैभव को टेस्ट क्रिकेट में सफल होते नहीं देखते.

    पनेसर के मुताबिक मौजूदा दौर में हैरी ब्रुक जैसे गिने-चुने खिलाड़ी ही हैं जो टेस्ट और टी20 दोनों फॉर्मेट में टॉप-10 में शामिल हैं. पनेसर का साफ कहा कि वैभव के पास अभी लाल गेंद के क्रिकेट (टेस्ट) के हिसाब से सही तकनीक नहीं है.

    क्या कहते हैं वैभव के आंकड़े
    अगर वैभव के आंकड़ों पर नजर डालें तो टी20 में उनका प्रदर्शन किसी सपने जैसा है. उन्होंने सभी टी20 मैचों में 216.32 के तूफानी स्ट्राइक रेट और करीब 43 की औसत से 1670 रन बनाए हैं. लेकिन फर्स्ट-क्लास यानी रेड-बॉल क्रिकेट में उनके आंकड़े थोड़े फीके हैं, जहां उन्होंने 17 पारियों में महज 23.47 की औसत से 399 रन ही बनाए हैं.

    माइकल क्लार्क ने क्या कहा?
    दूसरी ओर ऑस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान माइकल क्लार्क पनेसर के इस दावे से बिल्कुल इत्तेफाक नहीं रखते. क्लार्क का मानना है कि वैभव जैसा प्रतिभावान खिलाड़ी तीनों फॉर्मेट में अपना दबदबा बना सकता है.

    उन्होंने विराट कोहली और एबी डिविलियर्स की मिसाल देते हुए कहा कि ये दिग्गज टी20 के खतरनाक बल्लेबाज होने के साथ-साथ टेस्ट क्रिकेट के भी महान खिलाड़ी रहे हैं.

    क्लार्क के मुताबिक अगर वैभव टेस्ट क्रिकेट में कदम रखते हैं तो उन्हें देखना बेहद रोमांचक होगा, बशर्ते वे खुद टेस्ट क्रिकेट खेलने के इच्छुक हों.

  • UP में छात्राओं को मुफ्त सैनिटरी नैपकिन, कक्षा 6 से 12 तक की सभी लड़कियों को मिलेगा लाभ

    UP में छात्राओं को मुफ्त सैनिटरी नैपकिन, कक्षा 6 से 12 तक की सभी लड़कियों को मिलेगा लाभ

     लखनऊ
     सरकारी विद्यालयों में कक्षा छह से 12 तक पढ़ने वाली सभी छात्राओं को निश्शुल्क सैनिटरी नैपकिन उपलब्ध कराए जाएंगे। प्रदेश में माहवारी स्वास्थ्य एवं स्वच्छता से जुड़ी योजनाओं को एकीकृत कर राज्य स्तरीय नीति बनायी जाएगी, जिसमें स्कूल छोड़ चुकी और स्कूल नहीं जाने वाली किशोरियों तक भी निश्शुल्क सैनिटरी नैपकिन उपलब्ध कराने की व्यवस्था होगी।

    चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के अपर मुख्य सचिव अमित कुमार घोष की अध्यक्षता में शुक्रवार को राज्य स्तरीय माहवारी स्वास्थ्य एवं स्वच्छता समिति की बैठक में यह निर्णय लिया गया। बैठक में माहवारी स्वास्थ्य एवं स्वच्छता सेवाओं की पहुंच बढ़ाने के लिए विभिन्न विभागों के बीच समन्वय मजबूत करने पर जोर दिया गया।

    विद्यालयों में माहवारी स्वास्थ्य एवं स्वच्छता प्रबंधन तथा किशोरावस्था संबंधी जागरूकता गतिविधियों को नियमित रूप से चलाया जाएगा। किशोरियों को माहवारी शुरू होने से पहले जरूरी जानकारी देने के साथ मिथकों, भ्रांतियों और सामाजिक झिझक को दूर करने के लिए डिजिटल, सामाजिक व अन्य संचार माध्यमों का इस्तेमाल किया जाएगा।

    माहवारी स्वास्थ्य एवं स्वच्छता से जुड़ी विभिन्न योजनाओं को एकीकृत कर राज्य नीति विकसित की जाएगी। इसका उद्देश्य सेवाओं को समग्र और संस्थागत स्वरूप देना तथा विभागों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करना है।

    स्कूल से बाहर रहने वाली और वंचित समूहों की किशोरियों तक सेवाएं पहुंचाने पर विशेष जोर रहेगा। अपर मुख्य सचिव ने संबंधित विभागों को समन्वय के साथ समयबद्ध तरीके से जिम्मेदारियां पूरी करने और विद्यालयों में किशोरियों के लिए स्वच्छ व सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

     

  • AI की रफ्तार रोकने का आरोप, Anthropic-OpenAI समेत 4 कंपनियों पर अमेरिका में मुकदमा

    AI की रफ्तार रोकने का आरोप, Anthropic-OpenAI समेत 4 कंपनियों पर अमेरिका में मुकदमा

    आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की रफ्तार रोकने की बात अब सिर्फ बहस तक नहीं रही, मामला कोर्ट पहुंच गया है. अमेरिका में Anthropic, OpenAI, Google और SpaceXAI के खिलाफ मुकदमा दायर किया गया है. आरोप है कि इन बड़ी AI कंपनियों ने मिलकर AI के विकास की रफ्तार कम करने पर सहमति बनाई. अगर ये आरोप साबित होते हैं, तो मामला अमेरिकी एंटीट्रस्ट कानूनों के तहत गंभीर हो सकता है.

    एआई को लेकर अब तक सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की रही है कि इसे कितना तेज बनाया जाए. लेकिन अब सवाल उल्टा हो गया है. क्या AI को जानबूझकर स्लो करने की कोशिश भी कंपनियों के लिए कानूनी मुसीबत बन सकती है? अमेरिका में दायर एक नए मुकदमे में Anthropic, OpenAI, Google और SpaceXAI पर यही आरोप लगाया गया है.

    मामला अमेरिका के नॉर्दर्न डिस्ट्रिक्ट ऑफ कैलिफोर्निया की कोर्ट में पहुंचा है. मुकदमा उन लोगों की तरफ से दायर किया गया है, जो ChatGPT, Claude, Grok और Gemini जैसी AI सर्विस के पेड यूजर हैं.

    एक पोस्ट से शुरू हुआ पूरा विवाद
    इस मामले की शुरुआत 12 सितंबर को एंथ्रोपिक के CEO Dario Amodei के एक सोशल मीडिया पोस्ट से हुई. अमोदेई ने एआई के तेजी से बढ़ते विकास को लेकर चिंता जताई और कहा कि कंपनियों को AI को ज्यादा सावधानी और सेफ्टी के साथ आगे बढ़ाना चाहिए.

    उनकी बात का मतलब था कि AI की रफ्तार इतनी तेज हो रही है कि उसकी सेफ्टी को लेकर भी ज्यादा तैयारी जरूरी है. उन्होंने AI कंपनियों के बीच सुरक्षा से जुड़े मामलों में कोलैबोरेशन की जरूरत की बात भी कही.

    इसके बाद OpenAI के CEO Sam Altman, SpaceXAI के Elon Musk और Google DeepMind के Demis Hassabis ने भी अमोदेई के प्रपोजल पर सार्वजनिक तौर पर रिएक्शन दिया. मुकदमा करने वालों का दावा है कि इन बयानों से पता चलता है कि बड़ी एआई कंपनियां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की रफ्तार कम करने के मुद्दे पर एक-दूसरे के साथ तालमेल कर रही थीं.

    यूजर्स को क्या नुकसान होने का दावा?
    मुकदमे में सबसे दिलचस्प बात यह है कि इसे एआई कंपनियों के कॉम्पिटिटर्स ने नहीं, बल्कि उनके पेड यूजर्स ने दायर किया है.
    पिटीशनर्स का कहना है कि अगर ChatGPT, Claude, Grok और Gemini जैसी सर्विसेज को बेहतर बनाने की रफ्तार कंपनियां मिलकर कम करती हैं, तो इसका सीधा असर यूजर्स को मिलने वाली सर्विस पर पड़ सकता है.

    उनका तर्क है कि अगर कोई एक कंपनी खुद अपनी AI डेवलपमेंट की रफ्तार कम करती है तो उसे बाकी कंपनियों से पीछे रहने का खतरा होगा. लेकिन अगर सभी बड़ी कंपनियां मिलकर ऐसा करें, तो मार्केट में कॉम्पिटिशन कम हो सकता है. हालांकि, यहां एक बात साफ समझना जरूरी है. अभी ये सिर्फ मुकदमे में लगाए गए आरोप हैं. कोर्ट ने इन आरोपों को सही साबित नहीं किया है.

    खुद एंथ्रोपिक ने भी उठाई थी एंटीट्रस्ट की बात
    इस पूरे मामले का एक दिलचस्प पहलू यह है कि एंथ्रोपिक के सीईओ डारियो अमोदेई ने अपने प्रपोजल में खुद भी एंटीट्रस्ट से जुड़ी चिंता का जिक्र किया था. उन्होंने सुझाव दिया था कि अमेरिकी सरकार एआई कंपनियों के बीच सेफ्टी से जुड़ी बातचीत को आसान बनाने में मदद कर सकती है. इसके लिए कुछ खास तरह की सेफ्टी बातचीत को लेकर सीमित कानूनी छूट की जरूरत हो सकती है.

    Sam Altman ने भी ऐसे सरकारी फ्रेमवर्क का समर्थन किया था, जिसमें एआई सेफ्टी को लेकर कंपनियों के लिए एक जैसे नियम हों. हालांकि उनका कहना था कि AI सेफ्टी पर काम शुरू करने के लिए किसी नई एंटीट्रस्ट छूट या कानून का इंतजार जरूरी नहीं है.

    अब कोर्ट के सामने बड़ा सवाल
    अब इस केस में असली सवाल यही है कि एआई कंपनियों का सेफ्टी के लिए साथ काम करना कहां तक सही है. AI कंपनियां अगर अलग-अलग अपने मॉडल की सेफ्टी बढ़ाती हैं, तो यह एक बात है. लेकिन अगर कम्पेटिटर कंपनियां मिलकर एआई के विकास की रफ्तार कम करने पर सहमत होती हैं, तो अमेरिकी एंटीट्रस्ट कानून इसे किस नजर से देखता है, यही इस केस का अहम मुद्दा बन गया है.

    फिलहाल मामला शुरुआती स्टेज में है. एंथ्रोपिक, ओपनएआई, गूगल और स्पेसएक्स एआई के रेप्रेसेंटेटिव ने शनिवार तक इस मुकदमे पर तुरंत कोई जवाब नहीं दिया था. अब आगे कोर्ट में यह तय होना है कि कंपनियों का दावा किया गया सहयोग AI की सुरक्षा के लिए था या फिर इससे मार्केट में कम्पटीशन पर असर पड़ सकता है.