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  • Asian Games 2026: जापान से 1-3 से हारी भारतीय महिला बैडमिंटन टीम, मेडल का सपना टूटा

    Asian Games 2026: जापान से 1-3 से हारी भारतीय महिला बैडमिंटन टीम, मेडल का सपना टूटा

    नई दिल्ली
     एशियन गेम्स-2026 में मंगलवाल को भारत को एक बड़ी निराश हाथ लगी है। पीवी सिंधू जैसी स्टार खिलाड़ी से सज्जित भारतीय महिला बैडमिंटन टीम को जापान के हाथों हार का सामना करना पड़ा। जापान ने भारत को 3-1 से मात दी। इसी के साथ भारत का सफर इन खेलों में निराशाजनक रूप से खत्म हो गया।

    इस हार के साथ ही भारत का एशियाई खेलों में महिला बैडमिंटन टीम इवेंट में मेडल का सूखा जारी है। भारत ने आखिरी बार साल 2014 में इस इवेंट में ब्रॉन्ज मेडल जीता था। इस बार उम्मीद की जा रही थी कि भारतीय टीम ये सूखा खत्म करेगी,लेकिन ऐसा नहीं हो सका और जापान ने जबरदस्त घरेलू दर्शकों के समर्थन से भारत को बुरी तरह हरा दिया।

    सिंधू ने किया निराश
    पूरे देश को सिंधू से बहुत उम्मीदें थीं। उनका मुकाबला तीन बार की वर्ल्ड चैंपियन और पुरानी प्रतिद्वंद्वी अकाने यामागुची से था जो पिछले महीने वर्ल्ड चैंपियनशिप के फाइनल में भी पहुंची थीं। इस साल चार मुकाबलों में से दो बार वर्ल्ड नंबर-3 खिलाड़ी को हराने के बाद सिंधू पूरे आत्मविश्वास में दिखीं और अच्छी शुरुआत करते हुए पहला गेम 23-21 से जीता, लेकिन फिर जापानी खिलाड़ी ने वापसी की और दूसरा गेम 21-18 से जीतकर मैच को निर्णायक गेम में पहुंचा दिया। दो बार की ओलंपिक मेडलिस्ट सिंधू निर्णायक गेम 11-21 से हार गईं। यामागुची की इस जीत से जापान ने 1-0 की बढ़त बना ली।

    इसके बाद, 20 साल की टोमोका मियाजाकी ने उन्नति हुड्डा को आसानी से 21-16, 21-18 से हरा दिया। इस जीत ने जापान को 2-0 से आगे कर दिया।

    जॉली और गोपीचंद ने जगाई उम्मीद
    हालांकि, त्रिसा जॉली और गायत्री गोपीचंद की जोड़ी अगर मैच हार जाती तो भारत की हार यहीं तय हो जाती। इस जोड़ी ने भारत को एक उम्मीद थी। पिछले महीने चैंपियनशिप में ब्रॉन्ज मेडल जीतने के बाद पूरे आत्मविश्वास से भरी भारतीय जोड़ी ने वर्ल्ड नंबर-3 युकी फुकुशिमा और मायु मात्सुमोतो को हरा दिया। भारतीय जोड़ी ने ये मैच 21-17, 21-16 से अपने नाम किया।

    इस जीत ने भारत की वापसी की उम्मीद जगाई जो अगले ही मैच में खत्म हो गई। अगले मैच में युवा तन्वी शर्मा का सामना पूर्व वर्ल्ड चैंपियन नोजोमी ओकुहारा से था। ओकुहारा ने 18 मिनट में 21-12, 21-10 से जीत दर्ज की और जापान को 3-1 से जीत दिलाने में मदद की।

  • DGP अरुण देव गौतम जगदलपुर पहुंचे, बस्तर की सुरक्षा व्यवस्था पर बनेगी रणनीति

    DGP अरुण देव गौतम जगदलपुर पहुंचे, बस्तर की सुरक्षा व्यवस्था पर बनेगी रणनीति

    जगदलपुर.

    जगदलपुर.
    नक्सल गतिविधियों पर नियंत्रण के बाद अब बस्तर में सुरक्षा व्यवस्था के अगले चरण पर पुलिस का फोकस है. इसी सिलसिले में पुलिस महानिदेशक अरुण देव गौतम जगदलपुर पहुंचे. उन्होंने बस्तर संभाग के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय बैठक की. बैठक में नक्सल मुक्त हुए इलाकों की मौजूदा सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की गई.

    मैदानी अधिकारियों से अभियान और जमीनी हालात को लेकर फीडबैक लिया गया. अब चुनौती नक्सल गतिविधियों की वापसी रोकने के साथ सामान्य व्यवस्था को मजबूत करना है. बैठक में आगामी सुरक्षा रणनीति और कानून-व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई. नक्सल प्रभावित इलाकों में पुलिस की मौजूदगी और निगरानी को और प्रभावी बनाने पर जोर दिया गया. साथ ही सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए पुलिस की आगामी कार्ययोजना पर मंथन किया गया. डीजीपी का यह दौरा नक्सल उन्मूलन के बाद बदले सुरक्षा परिदृश्य की समीक्षा के तौर पर देखा जा रहा है.

    गांवों तक पहुंचे पुलिस, विकास कार्यों पर भी नजर
    डीजीपी ने पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों को अंदरूनी इलाकों और गांवों में नियमित भ्रमण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि, जवान क्षेत्र में जाकर स्थानीय लोगों की समस्याओं को समझें और वहां चल रहे विकास कार्यों का भी अवलोकन करें। शासन-प्रशासन के साथ समन्वय बनाकर जनता का विश्वास जीतने को पुलिसिंग की प्राथमिकता बताया।

    सरेंडर करने वालों को पुनर्वास नीति का पूरा लाभ
    बैठक में नक्सल पुनर्वास नीति के क्रियान्वयन पर भी चर्चा हुई। डीजीपी ने पात्र पुनर्वासितों को नीति के प्रावधानों के अनुसार अधिकतम लाभ दिलाने और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के निर्देश दिए।

    तकनीक के इस्तेमाल और पारदर्शिता पर जोर
    सभी जिलों में तकनीक आधारित पुलिसिंग को मजबूत करने के निर्देश दिए गए। पुलिस की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के साथ आधुनिक तकनीक के बेहतर इस्तेमाल पर जोर दिया गया।

    ये अफसर भी रहे मौजूद
    बैठक में अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक नक्सल ऑपरेशन विवेकानंद सिन्हा, आईजी बस्तर बीएन मीणा, आईजी सीआरपीएफ कबीब के, आईजी बीएसएफ संजय पंत, केंद्रीय सुरक्षा बलों के डीआईजी, बस्तर, कोंडागांव और सुकमा के एसपी समेत अन्य राजपत्रित अधिकारी मौजूद रहे।

  • राज्यसभा चुनाव का ऐलान, यूपी की 10 सीटों पर 16 अक्टूबर को वोटिंग

    राज्यसभा चुनाव का ऐलान, यूपी की 10 सीटों पर 16 अक्टूबर को वोटिंग

    नई दिल्ली

    चुनाव आयोग ने राज्यसभा चुनावों के तारीखों की घोषणा कर दी है। उत्तर प्रदेश की 10 सीटों सहित 12 राज्यसभा सीटों पर आगामी 16 अक्टूबर को मतदान होंगे। वहीं वोटों की गिनती भी 16 अक्टूबर को ही शुरू हो जाएगी और देर शाम तक नतीजे घोषित होने की संभावना है। सबसे अहम बात यह है कि 12 में से 10 सीटें उत्तर प्रदेश की हैं। यूपी में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले राज्यसभा चुनाव पर निगाहें टिकी हुई हैं।

    वहीं एक सीट उत्तराखंड की है। यहां से भाजपा के श्री नरेश बंसल रिटायर हो रहे हैं। इसके अलावा टीएमसी सांसद रुक्मिणी मलिक के इस्तीफे के बाद बंगाल की एक सीट पर भी उपचुनाव होगा।

    गौरतलब है कि आगामी 25 नवंबर को राज्यसभा के कुल 11 सांसदों का कार्यकाल खत्म हो रहा है। इनमें भाजपा के कुल 8 सांसद हैं। वहीं एक बहुजन समाज पार्टी और एक समाजवादी पार्टी के एक सांसद शामिल हैं। भाजपा के नरेश बंसल, बृजलाल, सीमा द्विवेदी, चंद्रप्रभा, हरदीप सिंह पुरी, नीरज शेखर, अरुण सिंह, बीएल वर्मा का कार्यकाल खत्म हो रहा है। वहीं, सपा से राम गोपाल यादव और बसपा के एकमात्र सांसद रामजी भी रिटायर हो रहे हैं।

    चुनाव का पूरा शेड्यूल
    चुनाव आयोग द्वारा जारी प्रेस नोट के मुताबिक राज्यसभा चुनावों के लिए आगामी 29 सितंबर को नोटिफिकेशन जारी किया जाएगा। इसके बाद 6 अक्टूबर को नामांकन जमा करने की आखिरी तारीख होगी। उम्मीदवार 9 सितंबर तक अपना नामांकन वापस ले सकते हैं। चुनाव 16 अक्टूबर, शुक्रवार को सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक संपन्न कराया जाएगा। 16 अक्टूबर को वोटों की गिनती होगी।

    विधान परिषद चुनाव का भी ऐलान
    इसके अलावा आयोग ने चार राज्यों की 28 विधान परिषद (MLC) सीटों पर भी चुनाव की घोषणा की है। इनमें उत्तर प्रदेश की 11 सीटें, बिहार की 8 सीटें, महाराष्ट्र की 5 सीटें और कर्नाटक की 4 सीटें शामिल हैं। सभी 28 सीटों पर 23 अक्टूबर को सुबह 8 बजे से शाम 4 बजे तक मतदान होगा। वहीं 27 अक्टूबर को मतगणना होगी। चुनाव आयोग ने संबंधित क्षेत्रों में तत्काल प्रभाव से आचार संहिता लागू कर दी है।

    UP में NDA खेमे के पास करीब 292 विधायक
    यूपी में एनडीए खेमे के पास करीब 292 विधायक हैं. इस लिहाज से बीजेपी गठबंधन आसानी से 7 से 8 सीटें जीत सकता है. वहीं, सपा के पास विधानसभा में 100 से अधिक विधायक हैं. इस संख्या बल के साथ सपा 2 सीटें बेहद आसानी से अपने पाले में कर लेगी. वहीं, उत्तराखंड से खाली हो रही सीट पर सत्ताधारी दल का मजबूत दबदबा है. मौजूदा समीकरणों को देखते हुए यह सीट भी भाजपा के पाले में जाएगी। 

    बंगाल की 1 सीट पर उपचुनाव क्यों हो रहा?
    पश्चिम बंगाल की एक सीट पर उपचुनाव इसलिए हो रहा है क्योंकि हाल ही में टीएमसी सांसद रुक्मिणी मलिक ने राज्यसभा से इस्तीफा दे दिया था. इसी साल अप्रैल में वह राज्य सभा के लिए चुनी गईं थीं. अब यहां उपचुनाव हो रहा है। 

    चुनाव का टाइम टेबल
    राज्यसभा चुनाव के लिए नोटिफिकेशन 29 सितंबर को जारी किया जाएगा और नॉमिनेशन 6 अक्टूबर को बंद होंगे। नॉमिनेशन की जांच 7 अक्टूबर को होगी और नाम वापस लेने की आखिरी तारीख 9 अक्टूबर है। वोटिंग 16 अक्टूबर को सुबह 9:00 बजे से शाम 4:00 बजे तक होगी और उसी दिन शाम 5:00 बजे वोटों की गिनती शुरू होगी।

    कौन-कौन हो रहा रिटायर?
    उत्तर प्रदेश से रिटायर होने वाले राज्यसभा सदस्यों में केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी, अरुण सिंह, बृजलाल, बीएल वर्मा, राम गोपाल यादव, नीरजा शेखर, गीता उर्फ चंद्रप्रभा, रामजी, सीमा और डॉ दिनेश शर्मा शामिल हैं। नरेश बंसल उत्तराखंड से एकमात्र सेवानिवृत्त सदस्य हैं।

    आयोग ने निर्देश दिया है कि मतपत्रों पर प्राथमिकताएं अंकित करने के लिए केवल रिटर्निंग अधिकारियों द्वारा उपलब्ध कराए गए पहले से तय विनिर्देशों वाले एकीकृत बैंगनी रंग के स्केच पेन का ही उपयोग किया जाए।

     

  • ग्वालियर में 17 फर्जी पासपोर्ट का खुलासा, एक मोबाइल नंबर और पते से बने दस्तावेज

    ग्वालियर में 17 फर्जी पासपोर्ट का खुलासा, एक मोबाइल नंबर और पते से बने दस्तावेज

     ग्वालियर
     जाली दस्तावेजों के जरिए बांग्लादेशी नागरिकों के पासपोर्ट बनने के लिए मामले में अब जांच पुलिसकर्मियों तक पहुंच गई है। ग्वालियर के डबरा स्थित बौद्ध विहार के पते पर एक ही मोबाइल नंबर और एक ही पते पर 17 बांग्लादेशी नागरिकों के हिंदू नाम से पासपोर्ट बन गए।

    इसके बाद यह लोग चाइना, थाइलैंड, म्यामांर व अन्य देशों की यात्रा भी कर आए। कुछ विदेश भी भाग गए। इस मामले में एसटीएफ ने तत्कालीन डबरा थाना प्रभारी विनायक शुक्ला और पासपोर्ट के लिए पुलिस सत्यापन का काम देख रहे आरक्षक भूपेंद्र गुर्जर की लापरवाही मानी है।

    एसटीएफ डीआईजी ने लिखा पत्र
    इसके चलते एसटीएफ के डीआईजी राहुल लोढ़ा द्वारा ग्वालियर पुलिस अधीक्षक धर्मवीर सिंह को इन दोनों पुलिसकर्मियों की प्राथमिक-विभागीय जांच के लिए पत्र लिखा गया है। पत्र ग्वालियर आने के बाद इस मामले में जांच शुरू हो जाएगी।

    एसटीएफ के अधिकारियों के मुताबिक, अगर पुलिस सत्यापन में ही एक ही मोबाइल नंबर व अन्य दस्तावेजों की बारीकी से जांच हो जाती तो उस समय ही यह फर्जीवाड़ा खुल सकता था। पासपोर्ट नहीं बनते और यह लोग भी पकड़े जा सकते थे, जो बांग्लादेशी हैं, बल्कि बौद्ध भिक्षु बनकर भारत में रह रहे थे।

    पुलिस विभाग की लापरवाही आई सामने
    पुलिसकर्मियों की लापरवाही के कारण पासपोर्ट बने। इसमें से कुछ बांग्लादेशी विदेश भी भाग चुके हैं। भोपाल पुलिस आयुक्त और बैतूल पुलिस अधीक्षक को भी लिखा पत्र भोपाल के गोविंदपुरा स्थित अन्नानगर बौद्ध मठ से 40 बांग्लादेशी नागरिकों के पासपोर्ट बने।

    वहीं, बैतूल से 11 पासपोर्ट बने, इसमें भी पुलिस सत्यापन में लापरवाही बरती गई। डीआईजी राहुल लोढ़ा ने बताया कि भोपाल में तत्कालीन गोविंदपुरा थाना प्रभारी, बैतूल में पुलिस सत्यापन प्रक्रिया में शामिल थाना प्रभारी, पासपोर्ट सेल प्रभारी की जांच के लिए पत्र लिखा है।

    विभागीय जांच रिपोर्ट का इंतजार, नोटिस जारी होंगे
    इन सभी पुलिसकर्मियों की विभागीय जांच रिपोर्ट एसटीएफ द्वारा संबंधित जिलों के पुलिस अधीक्षक से ली जाएगी। इस दौरान इन्हें नोटिस जारी होंगे और पासपोर्ट बनाने वाले केस में एसटीएफ भी बयान दर्ज करेगी।

    सेवा केंद्र के कर्मचारी की तलाश में लगी टीमें
    भोपाल में रहने वाले एजेंट नसीम अख्तर ने पासपोर्ट सेवा केंद्र के कर्मचारी का नाम बताया था। पासपोर्ट सेवा केंद्र का कर्मचारी पंजाब-हरियाणा बार्डर के जिले में पदस्थ है। अब उसकी तलाश में टीमें लगी हैं। इसके बाद आगे की चेन पता लगेगी।

        पुलिस सत्यापन में लापरवाही हुई, इसलिए पासपोर्ट जारी हुए। पहले ही यह चूक पकड़ ली जाती तो बड़ा नेटवर्क का राजफाश हो सकता था। लापरवाही की जांच के लिए संबंधित जिलों के पुलिस अधीक्षक को पत्र लिखा गया है। नोटिस भी जारी किए जाएंगे, एसटीएफ सभी के बयान लेगी। डी. वर्मा, एडीजी, एसटीएफ

  • दूरस्थ अंचलों में माताओं का सहारा बन रही प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना

    दूरस्थ अंचलों में माताओं का सहारा बन रही प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना

    दूरस्थ अंचलों में माताओं का सहारा बन रही प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना

    शीला कर्मा को मिली सहायता से बेहतर हुई जच्चा-बच्चा की देखभाल

    रायपुर
    प्रदेश के दूरस्थ अंचलों तक जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से जरूरतमंद परिवारों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आ रहा है। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना से लाभान्वित सुकमा की श्रीमती शीला कर्मा को गर्भावस्था के संवेदनशील समय में मिली आर्थिक सहायता ने उन्हें न केवल पोषण और स्वास्थ्य संबंधी जरूरतें पूरी करने में मदद की, बल्कि भविष्य के प्रति नया आत्मविश्वास भी दिया।

    नगर पालिका परिषद सुकमा के देवी चौक निवासी श्रीमती शीला कर्मा को योजना के तहत उनके बैंक खाते में सीधे 5 हजार रुपये की सहायता राशि प्राप्त हुई। उन्होंने इस राशि का उपयोग पौष्टिक आहार, दवाइयों और अन्य आवश्यक सामग्री के लिए किया। समय पर मिली सहायता से गर्भावस्था के दौरान उनकी देखभाल बेहतर हुई और शिशु के स्वास्थ्य एवं पोषण संबंधी जरूरतों को पूरा करने में भी परिवार को सहारा मिला।

    श्रीमती कर्मा बताती हैं कि आर्थिक आवश्यकता के समय मिली यह सहायता उनके परिवार के लिए बड़ी राहत साबित हुई। आवश्यक खर्च के बाद बची राशि उन्होंने अपने नवजात शिशु के सुरक्षित भविष्य के लिए बैंक खाते में सहेजकर रखी है। उन्होंने कहा कि योजना ने मातृत्व के कठिन समय में परिवार के सदस्य की तरह उनका साथ दिया।श्रीमती कर्मा ने कहा कि दूरस्थ अंचलों तक योजना का लाभ सीधे हितग्राहियों तक पहुंचना शासन की संवेदनशीलता को दर्शाता है।

    प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के अंतर्गत गर्भवती एवं धात्री माताओं को डीबीटी के माध्यम से आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। इसका उद्देश्य माताओं के पोषण स्तर में सुधार के साथ गर्भावस्था और प्रसव के बाद होने वाले आर्थिक खर्च की आंशिक भरपाई करना है।

  • लखनऊ में घर का सपना होगा पूरा, 24 सितंबर से 5 हजार प्लॉटों का खुलेगा रजिस्ट्रेशन

    लखनऊ में घर का सपना होगा पूरा, 24 सितंबर से 5 हजार प्लॉटों का खुलेगा रजिस्ट्रेशन

    लखनऊ
    राजधानी लखनऊ में अपना घर बनाने के लिए प्लॉट का इंतजार कर रहे लोगों के लिए खुशखबरी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आगरा रोड पर प्रस्तावित वरुण विहार योजना में आयोजित समारोह में 24 सितम्बर को एलडीए की नव विकसित वरुण विहार और नैमिषनगर योजना का भूमि पूजन कर शुभारंभ करेंगे। मुख्यमंत्री के हाथों शुभारंभ के साथ ही दोनों योजनाओं में लगभग 5000 भूखंडों के लिए पंजीकरण भी खोल दिया जाएगा।

    एलडीए की ओर से समारोह की तैयारियां तेज कर दी गई हैं। नया हेलीपैड भी बनाया जा रहा है। एलडीए की टीम रात दिन काम में लग गई है। यह दोनों योजनाएं राजधानी के भविष्य के शहरी विस्तार का आधार बनेंगी और आधुनिक सुविधाओं से युक्त विकसित नगरों के रूप में तैयार की जाएंगी।

    पहले चरण में 5,000 भूखंडों के लिए पंजीकरण
    एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने बताया कि दोनों योजनाओं में पहले चरण में लगभग 5,000 भूखंडों के लिए पंजीकरण शुरू किया जाएगा। मुख्यमंत्री के भूमि पूजन के बाद आम नागरिकों के लिए आवेदन प्रक्रिया खोल दी जाएगी।

    वरुण विहार और नैमिष नगर योजना को कुल 10,680 एकड़ क्षेत्र में विकसित किया जाएगा। दोनों परियोजनाओं पर लगभग 12,000 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। योजनाओं के तहत सड़क, जलापूर्ति, सीवरेज, हरित क्षेत्र, सार्वजनिक सुविधाएं और आधुनिक शहरी ढांचा विकसित किया जाएगा जिससे सुव्यवस्थित नगर तैयार हों सकें।

    यह होगी भूखंडों की दर, मिलेंगे कई विकल्प
    एलडीए के अनुसार वरुण विहार योजना में भूखंड 2,800 रुपये प्रति वर्गफुट की दर से उपलब्ध होंगे जबकि नैमिषनगर योजना में भूखंडों की दर 3,800 रुपये प्रति वर्गफुट निर्धारित की गई है। दोनों योजनाओं में विभिन्न आकार के भूखंड उपलब्ध कराए जाएंगे ताकि अलग-अलग वर्गों को विकल्प मिल सके।

    नैमिषनगर में सुविधाओं आध्यात्मिकता का संगम
    सीतापुर रोड पर विकसित की जा रही नैमिषनगर योजना को धार्मिक और आध्यात्मिक पर्यटन के साथ आधुनिक जीवनशैली से जोड़कर विकसित किया जाएगा। यहां आध्यात्मिक साधना, योग एवं शांति जीवनशैली केंद्र, ध्यान केंद्र, आश्रम और सांस्कृतिक केंद्र बनाए जाएंगे। एक जिला एक उत्पाद केंद्र, वाणिज्यिक केंद्र, शिक्षा केंद्र, खुले व्यायाम स्थल, सामुदायिक पार्क और खरीदारी मार्ग जैसी सुविधाएं भी प्रस्तावित हैं। योजना में 800 वर्गफुट से 5000 वर्गफुट तक के प्लॉट होंगे जिनकी कीमत 30 लाख से 1.90 करोड़ तक होगी। सबसे छोटे प्लॉट के लिए 1.52 लाख और सबसे बड़े प्लॉट के लिए 9.50 लाख पंजीकरण राशि देनी होगी।

    हाईटेक सुविधाओं पर रहेगा फोकस
    प्राधिकरण का दावा है कि दोनों योजनाओं को आधुनिक और हाईटेक स्वरूप में विकसित किया जाएगा। चौड़ी सड़कों, बेहतर यातायात व्यवस्था, आधुनिक आधारभूत ढांचे और सुनियोजित विकास के जरिए इन्हें राजधानी की नई पहचान बनाने की तैयारी है।

    पांच अपार्टमेंट योजनाओं का भी होगा शिलान्यास
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 24 सितंबर को वरुण विहार योजना में होने वाले भूमि पूजन कार्यक्रम के दौरान लखनऊ विकास प्राधिकरण की पांच अपार्टमेंट योजनाओं का भी शिलान्यास करेंगे। इन पांच परियोजनाओं में कुल 4150 फ्लैट बनाए जाएंगे। एलडीए ने अपनी विभिन्न आवासीय योजनाओं में इन अपार्टमेंट के निर्माण की तैयारी की है। कुछ योजनाओं में पंजीकरण हो चुका है, कुछ में प्रक्रिया चल रही है।

    एलडीए की पांचों योजनाओं में सबसे अधिक फ्लैट अनंत नगर में प्रस्तावित आदिती अपार्टमेंट में बनाए जाएंगे। 1932 फ्लैट प्रस्तावित हैं। विराज खंड में लेक व्यू अपार्टमेंट में 646 फ्लैट बनाए जाएंगे।

    चार अन्य योजनाओं में भी निर्माण प्रस्तावित
    बागेश्वरी अपार्टमेंट में 824 फ्लैट होंगे। ऐशबाग स्क्वायर में 384 फ्लैट बनाए जाएंगे। वहीं बसंत कुंज स्थित राष्ट्र प्रेरणा स्थल के पास पार्क व्यू अपार्टमेंट में 364 फ्लैट प्रस्तावित हैं। मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में वरुण बिहार योजना के भूमि पूजन के साथ इन पांच अपार्टमेंट परियोजनाओं का शिलान्यास भी प्रस्तावित है।

  • आपने युवाओं को शूटर बनाया, पैसे लेकर नौकरी दी’, अखिलेश यादव पर ओमप्रकाश राजभर का सीधा हमला

    आपने युवाओं को शूटर बनाया, पैसे लेकर नौकरी दी’, अखिलेश यादव पर ओमप्रकाश राजभर का सीधा हमला

    लखनऊ
    सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष और कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर बेहद तीखे अंदाज में हमला बोला है। राजभर ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए अखिलेश यादव को संबोधित कर पूछा- 'का भइया अखिलेश जी, हाल-चाल ठीक है न?' इसके साथ ही उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि लगता नहीं है कि हाल ठीक होगा, क्योंकि चुनाव से पहले एक लाख युवाओं को नौकरी मिलने जा रही है।

    राजभर ने अपनी पोस्ट में कहा कि ये नौकरियां बिना लेन-देन, बिना भेदभाव, बिना जात-पात और बिना क्षेत्रवाद के दी जा रही हैं। उन्होंने कहा कि योगी सरकार में नौ साल में साढ़े नौ लाख नौकरियां दी जा चुकी हैं और कुछ ही हफ्तों में दस लाख का आंकड़ा भी पूरा हो जाएगा।

    राजभर ने इसी मुद्दे पर अखिलेश यादव पर व्यंग्य करते हुए लिखा कि मुख्यमंत्री ने कहा है कि 'बस गिनती करते जाइए।' उन्होंने अखिलेश से भी गिनती शुरू करने को कहा। साथ ही तंज कसा कि अगर वह ठीक से गिनती न कर पाएं तो 'चच्चू को लगा दीजिएगा।' राजभर ने आरोप लगाया कि अखिलेश सरकार के समय लूट का पूरा हिसाब-किताब चच्चू (शिवपाल यादव) ही करते थे।

    ‘चुनाव आ रहा है, दोपहर 12 बजे तक सोना छोड़ दीजिए’
    राजभर ने अपने पोस्ट में आगामी चुनाव को लेकर भी अखिलेश यादव पर सीधा निशाना साधा। उन्होंने लिखा- 'सुनिए महाराज, चुनाव आ रहा है। दोपहर 12 बजे तक सोना छोड़ दीजिए।'

    इसके बाद उन्होंने सपा के पिछले विधानसभा चुनावों के प्रदर्शन का जिक्र करते हुए लिखा कि 2017 में 47 और 2022 में 111 सीट मिली थी। राजभर ने तंज किया कि इस बार 47 सीट भी आ जाए तो कहिएगा।

    ‘आपने युवाओं को शूटर बनाया’
    राजभर ने अपने पोस्ट में सपा सरकार के कार्यकाल पर गंभीर आरोप भी लगाए। उन्होंने लिखा कि जब अखिलेश यादव का समय था, तब उन्होंने 'युवाओं को शूटर बनाया' और भेदभाव करके, पैसे लेकर नौकरी दी। राजभर ने आगे लिखा कि शूटरों के भरोसे चुनाव जीतने के चक्कर में थे, लेकिन 'शूटर तो ढेर हो गए।' इसके बाद उन्होंने आरोप लगाया कि अब कुछ अपराधी सपा के कार्यकर्ता बनकर घूम रहे हैं और उन्हें उम्मीद है कि सरकार आने पर वे फिर लूट और अपराध करेंगे।

    अपने पोस्ट के अगले हिस्से में राजभर ने लिखा कि 'यकीन मानिए, सरकार तो आयेगी नहीं।' उन्होंने आगे कहा कि जो अपराधी बचे हैं, वे भी जल्दी ही निपट जाएंगे। पोस्ट के अंत में राजभर ने अखिलेश यादव पर फिर तंज कसते हुए लिखा- 'ख़ैर, ठीक से चुनाव लड़िए महाराज। एकतरफा चुनाव में मज़ा नहीं आता है।

  • छत्तीसगढ़ के जनजातीय क्षेत्रों में आयोग का भ्रमण

    छत्तीसगढ़ के जनजातीय क्षेत्रों में आयोग का भ्रमण

    छत्तीसगढ़ के जनजातीय क्षेत्रों में आयोग का भ्रमण

    चार जिले रायपुर, सक्ती, जशपुर और कांकेर में आश्रम छात्रावासों का स्थलीय निरीक्षण

    रायपुर
    राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की टीम छत्तीसगढ़ में जनजातीय समुदायों से जुड़े विभिन्न प्रकरणों की जमीनी स्थिति जानने के लिए चार जिलों के दौरे पर है। 20 से 25 सितंबर तक चलने वाले इस दौरे में रायपुर, सक्ती, जशपुर और कांकेर में जनजातीय आवासीय छात्रावासों का आकस्मिक निरीक्षण, ग्राम भ्रमण और समुदाय के लोगों से सीधे संवाद किया जा रहा है।

    आयोग की टीम विशेष रूप से नागवंशी, संसारी उरांव, पहाड़ी कोरवा और दिहाड़ी कोरवा समुदायों से जुड़े क्षेत्रों में पहुंचकर उनकी समस्याओं एवं शिकायतों से संबंधित अभ्यावेदन प्राप्त करेगी। जशपुर में 22 और 23 सितंबर को विशेष रूप से जनजातीय ग्रामों का भ्रमण निर्धारित है।

    कांकेर में 24 सितंबर को जनजाति महिला जनप्रतिनिधियों के सशक्तिकरण को लेकर संवाद कार्यक्रम होगा। इसमें पंचायत एवं जिला स्तर की महिला जनप्रतिनिधियां शामिल होंगी। 25 सितंबर को रायपुर में आयोग में लंबित प्रकरणों को लेकर संबंधित अधिकारियों एवं प्राधिकारियों के साथ बैठक होगी। आयोग की ओर से संबंधित अधिकारियों को जांच दल को आवश्यक सहयोग, दस्तावेज उपलब्ध कराने और मौके पर उपस्थिति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

  • विश्वरंग, भोपाल का आठवां संस्करण नालंदा, बिहार में 3 अक्टूबर से 8 अक्टूबर तक

    विश्वरंग, भोपाल का आठवां संस्करण नालंदा, बिहार में 3 अक्टूबर से 8 अक्टूबर तक

    विश्वरंग, भोपाल का आठवां संस्करण नालंदा, बिहार में 3 अक्टूबर से 8 अक्टूबर तक

    नालंदा में होगा भारतीय भाषाओं, संस्कृति और ज्ञान-परम्परा पर राष्ट्रीय संवाद

    देश के प्रमुख शिक्षण संस्थानों के प्रतिनिधि और अनेक प्रतिष्ठित साहित्यकार होंगे सहभागी
    भोपाल

    भारत की भाषाई, साहित्यिक, सांस्कृतिक और बौद्धिक विरासत को समकालीन संदर्भों से जोड़ते हुए नालंदा में एक राष्ट्रीय स्तर के बहुआयामी सांस्कृतिक एवं बौद्धिक कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। विश्वरंग, भोपाल द्वारा आयोजित इस राष्ट्रीय कार्यक्रम में देश के विभिन्न हिस्सों से शिक्षाविदों, साहित्यकारों, कलाकारों, अनुवादकों, शोधकर्ताओं और सांस्कृतिक कार्यकर्ताओं की सहभागिता होगी।

    इस आयोजन में रवीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय, भोपाल तथा नालंदा विश्वविद्यालय के साथ-साथ सी. वी. रमन यूनिवर्सिटी, वैशाली, आइसेक्ट यूनिवर्सिटी हजारीबाग, स्कोप ग्लोबल स्किल्स यूनिवर्सिटी, भोपाल, सी वी रमन यूनिवर्सिटी, बिलासपुर, सी वी रमन यूनिवर्सिटी, खण्डवा, गुवाहाटी विश्वविद्यालय, आईआईटी खड़गपुर, त्रिपुरा विश्वविद्यालय, मिजोरम विश्वविद्यालय, दिल्ली विश्वविद्यालय, इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (इग्नू), कलकत्ता विश्वविद्यालय, फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया तथा एमिटी यूनिवर्सिटी, गुरुग्राम जैसे प्रमुख शिक्षण संस्थानों के प्रतिनिधियों की उपस्थिति रहेगी। साहित्य और संस्कृति के क्षेत्र से नन्द किशोर आचार्य, अरुण कमल, अलका सरावगी, ए. अरविन्दाक्षन, देवेन्द्र राज अंकुर, जितेंद्र श्रीवास्तव, जयंत परमार, प्रफुल्ल शिलेदार, यतीन्द्र मिश्र, सोमा बंद्योपाध्याय और अनंत विजय सहित अनेक प्रतिष्ठित रचनाकार एवं विचारक कार्यक्रम में सहभागी होंगे।

    कार्यक्रम के लिए नालंदा का चयन केवल उसके ऐतिहासिक महत्व के कारण नहीं किया गया है। नालंदा भारतीय उपमहाद्वीप और एशिया के बीच ज्ञान, विचार और संस्कृति के ऐतिहासिक आदान-प्रदान का एक महत्वपूर्ण प्रतीक रहा है। इसी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को आधार बनाकर कार्यक्रम में यह विचार किया जाएगा कि भारत की बहुभाषिक और बहुसांस्कृतिक विरासत आज के समय में किस प्रकार नए सांस्कृतिक संवाद और बौद्धिक सहयोग का आधार बन सकती है।

    कार्यक्रम का एक प्रमुख आयाम भारतीय ज्ञान-परम्परा और शिक्षा होगा। नालंदा की शिक्षा-दृष्टि, अनुसंधान, बहुविषयक अध्ययन तथा भारत की बौद्धिक परम्परा पर विशेष सत्र आयोजित किया जाएगा। इसके माध्यम से प्राचीन भारतीय शिक्षा-अनुभव और समकालीन उच्च शिक्षा के बीच संभावित संवाद पर विचार किया जाएगा।

    भारतीय भाषाओं को कार्यक्रम में विशेष महत्व दिया गया है। दक्षिण एशियाई भाषाओं की साझा सांस्कृतिक जमीन, भारतीय भाषाओं के पारस्परिक संबंध और भाषाई विविधता में निहित सांस्कृतिक एकात्मता पर विमर्श होगा। पूर्वोत्तर भारत की भाषाओं और साहित्य को भी कार्यक्रम में विशेष स्थान दिया गया है।

    कार्यक्रम में भारतीय भाषाओं में साहित्यिक अनुवाद, भाषा और परम्परा के संबंध तथा अनुवाद के माध्यम से विभिन्न भारतीय समाजों के बीच बढ़ते सांस्कृतिक संवाद पर चर्चा होगी। भारतीय भाषाओं के साहित्य के अनुवाद-पाठ का आयोजन भी किया जाएगा।

    कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण पक्ष भारत के दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया के साथ ऐतिहासिक एवं समकालीन संबंधों से जुड़ा होगा। नालंदा से लेकर व्यापार, यात्राओं, सांस्कृतिक संपर्कों और विचारों के आदान-प्रदान तक भारत और एशिया के बीच बने संबंधों को वर्तमान संदर्भ में देखने का प्रयास किया जाएगा। इसी क्रम में व्यापार, संस्कृति और सतत विकास के अंतर्संबंधों पर भी चर्चा होगी, जिसमें नवीकरणीय ऊर्जा, पर्यावरणीय संतुलन, उत्तरदायी उद्यम और विकास की नई अवधारणाओं को सांस्कृतिक दृष्टि से देखने का प्रयास किया जाएगा।

    कार्यक्रम के अंतर्गत पटना में रवीन्द्रनाथ टैगोर की सांस्कृतिक चेतना और उनके सांस्कृतिक अवदान पर विशेष विमर्श, चित्रकला प्रदर्शनी, चित्रकला कार्यशाला भी आयोजित की जाएगी।

    विश्वरंग के महानिदेशक संतोष चौबे के अनुसार, कार्यक्रम का मूल उद्देश्य अतीत के गौरव का केवल स्मरण करना नहीं, बल्कि भारत की ऐतिहासिक सांस्कृतिक और बौद्धिक विरासत को वर्तमान और भविष्य की चुनौतियों से जोड़कर देखना है। नालंदा इस संवाद के लिए एक ऐसी ऐतिहासिक भूमि उपलब्ध कराता है जहाँ भारत और एशिया के बीच ज्ञान, भाषा और संस्कृति के दीर्घकालिक संबंधों को एक साथ देखा जा सकता है।

  • 84 लाख योनियों का रहस्य: क्या हर आत्मा को सभी योनियों से गुजरना पड़ता है?

    84 लाख योनियों का रहस्य: क्या हर आत्मा को सभी योनियों से गुजरना पड़ता है?

     क्या मृत्यु के बाद मनुष्य फिर से जन्म लेता है? अगर हां, तो उसका अगला जन्म किस रूप में होता है? क्या यह सब केवल भाग्य से तय होता है या हमारे कर्म ही अगली यात्रा का रास्ता बनाते हैं?

    हिंदू धर्म के प्राचीन ग्रंथ इन सवालों का बेहद गहरा जवाब देते हैं. पद्म पुराण में 84 लाख योनियों का उल्लेख मिलता है, जबकि गरुड़ पुराण में मृत्यु के बाद जीव की गति को उसके कर्मों से जोड़ा गया है. कुछ महापापों के संदर्भ में ऐसे पुनर्जन्मों का भी वर्णन मिलता है, जिन्हें सुनकर सामान्य मनुष्य हैरान हो सकता है. लेकिन यहीं से एक बड़ा सवाल भी खड़ा होता है.

    आज इंटरनेट और सोशल मीडिया पर 84 लाख योनियों को लेकर कई तरह के दावे किए जाते हैं. कहीं कहा जाता है कि हर आत्मा को सभी 84 लाख योनियों में जन्म लेना ही पड़ता है. कहीं हर पाप के लिए एक निश्चित पशु योनि बता दी जाती है. लेकिन क्या हमारे मूल शास्त्र वास्तव में यही कहते हैं? या फिर समय के साथ कुछ लोक मान्यताएं भी शास्त्रों के साथ जुड़ती चली गईं?

    आज जानेंगे कि 84 लाख योनियों का उल्लेख कहां मिलता है, क्या हर आत्मा को इन सभी योनियों से गुजरना पड़ता है, मृत्यु के बाद जीव की गति कैसे निर्धारित होती है, कर्म अगले जन्म को किस तरह प्रभावित करते हैं और क्या मनुष्य जन्म-मृत्यु के इस चक्र से मुक्त हो सकता है.

    84 लाख योनियों का उल्लेख कहां मिलता है?
    पद्म पुराण में एक प्रसिद्ध श्लोक मिलता है-
    जलजा नव लक्षाणि स्थावरा लक्षविंशतिः।
    कृमयो रुद्रसङ्ख्यकाः पक्षिणां दश लक्षकम्।
    त्रिंशल्लक्षाणि पशवश्चतुर् लक्षाणि मानुषाः।।

    इस श्लोक में जीवों की विभिन्न योनियों का वर्गीकरण बताया गया है. इसके अनुसार 9 लाख जलचर, 20 लाख स्थावर यानी पेड़-पौधे और अन्य स्थिर वनस्पतियां, 11 लाख कृमि और कीट, 10 लाख पक्षी, 30 लाख पशु और 4 लाख मानव योनियों का उल्लेख मिलता है. इन सभी को मिलाकर संख्या 84 लाख बताई गई है.

    लेकिन यहां एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है. इस श्लोक का उद्देश्य केवल जीवों की संख्या बताना नहीं माना जाना चाहिए. इसमें सृष्टि में मौजूद जीव-जगत की व्यापकता और विविधता को भी सामने रखा गया है. जल की गहराइयों से लेकर पेड़-पौधों तक, सूक्ष्म जीवों से लेकर पक्षियों और पशुओं तक और फिर मनुष्य तक, सृष्टि के अलग-अलग रूपों का वर्णन किया गया है.

    क्या हर आत्मा को 84 लाख योनियों से गुजरना पड़ता है?
    यहीं 84 लाख योनियों को लेकर सबसे बड़ा भ्रम पैदा होता है. पद्म पुराण में दिए गए इस श्लोक में योनियों का वर्गीकरण मिलता है, लेकिन यह स्पष्ट रूप से नहीं कहा गया कि प्रत्येक आत्मा को एक-एक करके सभी 84 लाख योनियों में जन्म लेना ही पड़ेगा.

    इसलिए यह कहना कि हर आत्मा पहले जलचर बनेगी, फिर वनस्पति, फिर कीट, फिर पक्षी और फिर पशु-पक्षी की सभी योनियों से गुजरते हुए मनुष्य बनेगी, इस श्लोक से सीधे सिद्ध नहीं होता है.

    अगला जन्म किस आधार पर मिलता है?
    श्रीमद्भगवद्गीता में भगवान श्रीकृष्ण आत्मा और शरीर के संबंध को समझाते हुए कहते हैं कि जैसे मनुष्य पुराने वस्त्र छोड़कर नए वस्त्र धारण करता है, उसी तरह आत्मा पुराने शरीर को छोड़कर नया शरीर धारण करती है. अर्थात शरीर बदलता है, लेकिन आत्मा को नश्वर शरीर के समान नहीं माना गया है.

    क्या केवल एक कर्म से तय होता है अगला जन्म?
    यहां एक और जरूरी बात समझनी होगी. अगला जन्म केवल किसी एक कर्म से तय होता है, ऐसा सरल नियम शास्त्रों की पूरी शिक्षा को व्यक्त नहीं करता. कर्मों का संचय, जीवन की प्रवृत्तियां, संस्कार और चेतना जैसे विषय भी इस चर्चा में महत्वपूर्ण माने गए हैं.

    श्रीमद्भगवद्गीता के आठवें अध्याय में भगवान श्रीकृष्ण अंतिम समय के स्मरण और भाव की महत्ता बताते हैं. इसी आधार पर यह समझा जाता है कि मनुष्य जीवन भर जिस भाव और चेतना को विकसित करता है, उसका प्रभाव अंतिम समय पर भी पड़ सकता है. यानी पुनर्जन्म का विषय केवल एक अच्छे या बुरे कर्म की गणना नहीं, बल्कि जीव की व्यापक कर्म-यात्रा से जुड़ा हुआ माना गया है.

    क्या महापापों से मिलती है विशेष योनि?
    गरुड़ पुराण में कर्मों के फल का विस्तार से वर्णन मिलता है. इसमें कुछ गंभीर पापों के लिए कठोर कर्मफल और विभिन्न गतियों का उल्लेख किया गया है. धर्मशास्त्रीय परंपरा में ब्रह्महत्या, सुवर्ण की चोरी और गुरु-पत्नी के साथ अनुचित संबंध जैसे कर्मों को गंभीर महापापों में गिना गया है. इनके परिणामों के संदर्भ में नरक, कष्ट और पुनर्जन्म जैसी विभिन्न गतियों का वर्णन मिलता है.

    लेकिन यहां भी एक सावधानी जरूरी है. हर पाप के लिए एक निश्चित पशु या पक्षी योनि तय है, ऐसा सरल फॉर्मूला पूरे गरुड़ पुराण की शिक्षा को सही ढंग से प्रस्तुत नहीं करता है. कई प्रसंगों में पहले कर्म के फलस्वरूप कष्ट या नरक का वर्णन आता है और उसके बाद पुनर्जन्म की बात कही जाती है. इसलिए यह कहना कि 'फलां पाप करने पर निश्चित रूप से फलां पशु बनना पड़ता है', हर मामले में शास्त्र का सीधा निष्कर्ष नहीं माना जा सकता है.

    मनुष्य जन्म को इतना महत्वपूर्ण क्यों माना गया?
    अब सवाल उठता है कि अगर जीव अलग-अलग योनियों में जन्म ले सकता है तो मनुष्य जन्म को इतना महत्वपूर्ण क्यों माना गया है? इसका एक बड़ा कारण है – विवेक.

    भोजन, निद्रा, भय और प्रजनन जैसी मूल प्रवृत्तियां मनुष्य के साथ अन्य जीवों में भी देखी जाती हैं. लेकिन मनुष्य में धर्म-अधर्म का विचार करने, अपने कर्मों का चुनाव करने और अपने जीवन की दिशा बदलने की क्षमता विशेष रूप से महत्वपूर्ण मानी गई है.

    मनुष्य ज्ञान प्राप्त कर सकता है. तप कर सकता है. दान और सेवा कर सकता है. भक्ति कर सकता है और अपने भीतर के लोभ, क्रोध और अहंकार को नियंत्रित करने का प्रयास कर सकता है. इसलिए भागवत परंपरा में मनुष्य जन्म को दुर्लभ अवसर के रूप में देखा गया है. यह केवल जीवन जीने का अवसर नहीं बल्कि आत्मज्ञान और मोक्ष की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर भी माना गया है.

    क्या मोक्ष से पुनर्जन्म का चक्र समाप्त हो सकता है?
    सनातन धर्म का अंतिम लक्ष्य केवल अच्छा पुनर्जन्म प्राप्त करना नहीं माना गया है. मनुष्य को जन्म और मृत्यु के चक्र से मुक्त होकर मोक्ष प्राप्त करने की दिशा में आगे बढ़ने की शिक्षा दी गई है. भगवद्गीता में कर्मयोग, ज्ञानयोग और भक्तियोग जैसे मार्गों के माध्यम से आत्मिक उन्नति की बात कही गई है.

    अर्थात लक्ष्य केवल यह नहीं कि अगला जन्म किस योनि में मिलेगा. उससे भी बड़ा प्रश्न यह है कि क्या मनुष्य अपने कर्मों और चेतना को इतना शुद्ध कर सकता है कि वह पुनर्जन्म के बंधन से ही मुक्त हो जाए.

    तो आखिर 84 लाख योनियों का रहस्य क्या है?
    पद्म पुराण में जीवों की विभिन्न योनियों का वर्गीकरण मिलता है. गरुड़ पुराण कर्म और कर्मफल के आधार पर जीव की गति का वर्णन करता है. श्रीमद्भागवत महापुराण राजा भरत और अजामिल जैसे प्रसंगों के माध्यम से कर्म, आसक्ति, पश्चाताप और भक्ति की शिक्षा देता है. वहीं श्रीमद्भगवद्गीता आत्मा की नश्वर शरीर से अलग प्रकृति और पुनर्जन्म के सिद्धांत को समझाती है.

    इन सभी शिक्षाओं को एक साथ देखें तो एक बात स्पष्ट होती है. 84 लाख योनियों को केवल डराने वाली संख्या के रूप में देखने के बजाय इसे सृष्टि की व्यापकता और जीव की अलग-अलग अवस्थाओं से जोड़कर समझा जा सकता है.

    हर आत्मा को एक-एक करके 84 लाख योनियों से गुजरना ही पड़ेगा, ऐसा स्पष्ट शास्त्रीय नियम नहीं मिलता. इसके बजाय कर्म, संस्कार, चेतना और आध्यात्मिक साधना को जीव की आगे की गति से जोड़ा गया है. इसलिए सनातन परंपरा मनुष्य जीवन को बेहद महत्वपूर्ण मानती है. क्योंकि आज हमारे पास जो जीवन है, उसमें हमारे पास अपने कर्म चुनने का अवसर है. हम सत्य, करुणा, सेवा, संयम और भक्ति का मार्ग चुन सकते हैं.

    शायद 84 लाख योनियों की सबसे बड़ी सीख यही है कि अगली यात्रा की चिंता करने से पहले हमें यह देखना चाहिए कि हम इस जीवन की यात्रा किस दिशा में ले जा रहे हैं. क्योंकि हमारे आज के कर्म ही हमारी आगे की यात्रा के महत्वपूर्ण आधार माने गए हैं.