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  • ग्वालियर में 26 सितंबर से वेस्ट जोन रीजनल ज्यूडिशियरी कांफ्रेंस, 60+ न्यायमूर्ति जुटेंगे

    ग्वालियर में 26 सितंबर से वेस्ट जोन रीजनल ज्यूडिशियरी कांफ्रेंस, 60+ न्यायमूर्ति जुटेंगे

     ग्वालियर
     ग्वालियर में आगा
    मी दिनों में वेस्ट जोन रीजनल ज्यूडिशियरी कांफ्रेंस होने जा रही है। न्यायिक शिक्षा के बढ़ते आयाम विषय पर इसका आयोजन 26 से 27 सितंबर तक विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय के नवीन परिसर स्थित दंतोपंत्त ठेंगड़ी सभागार में किया जाएगा।

    कांफ्रेंस में सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट के न्यायमूर्तिगण सहित विभिन्न न्यायालयों के न्यायाधीश शामिल होंगे। वहीं भारत के मुख्य न्यायाधीश भी इस आयोजन में शामिल हो सकते हैं।

    इसमें सुप्रीम कोर्ट व हाई कोर्ट के 60 से ज्यादा न्यायामूर्तिगण व जिला न्यायालयों के बड़ी संख्या में न्यायाधीश शामिल होंगे। इस महत्वपूर्ण आयोजन के चलते जिला प्रशासन व पुलिस ने तैयारियां शुरू कर दी हैं।

    शहर के प्रमुख होटलों में कमरों का आरक्षण किया जा रहा है। साथ ही एयरपोर्ट से लेकर रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्मों पर हेल्प डेस्क बनाई जाएगी।

    इससे पहले इंदौर में हुआ था सम्मेलन
    बता दें कि, इससे पहले इंदौर में वेस्ट जोन रीजनल कांफ्रेंस का आयोजन किया गया था। यह कार्यक्रम नेशनल लीगल सर्विसेज अथॉरिटी की देखरेख में और मध्य प्रदेश स्टेट लीगल सर्विसेज अथॉरिटी द्वारा आयोजित किया गया था।

    सीजेआई ने कार्यक्रम का शुभारंभ किया था। अब ग्वालियर में रीजनल कांफ्रेंस का आयोजन किया जा रहा है। इस आयोजन को लेकर सुरक्षा व्यवस्था व लाइजनिंग को लेकर तैयारियां की जा रहीं हैं, बड़ी संख्या में अधिकारियों की डयूटी इसमें लगाई जा रही है।

    यह है प्रस्तावित शेडयूल…

    26 सितंबर 2026 सत्र एक समय

    दोपहर 12 बजे से एक बजे तक

    विषय: न्यायिक शिक्षा की आवश्यकताएं।

    उभरती पद्धतियां, गुणवत्ता मानक और संस्थागत उत्कृष्टता।

    बदलती कानूनी और सामाजिक आवश्यकताओं के अनुरूप न्यायिक शिक्षा का विकास।

    क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय न्यायिक शिक्षा मॉडलों का तुलनात्मक विश्लेषण।

    न्यायिक शिक्षा ऑडिट

    संस्थागत शक्तियों, चुनौतियों और सर्वोत्तम प्रथाओं की पहचान करना।

    न्यायिक प्रशिक्षण के लिए मापने योग्य प्रदर्शन संकेतक और गुणवत्ता मानक विकसित करना।

    सत्र दो समय: दोपहर एक बजे से 2:30 बजे तक।

    न्यायिक शिक्षा में नवाचार।

    साझाकरण के माध्यम से सीखना।

    चर्चा का प्रस्तावित दायरा

    व्यस्क शिक्षा के सिद्धांत और योग्यता-आधारित न्यायिक शिक्षा।

    केस स्टडी (मामलों के अध्ययन), न्यायिक अनुकरण (सिमुलेशन) और भूमिका निर्वहन (रोल प्ले) अभ्यासों के माध्यम से व्यावहारिक सीख।

    न्यायिक निर्णय लेने की क्षमता को बढ़ाने के लिए समस्या-आधारित और परिदृश्य-संचालित शिक्षण।

    संवादात्मक (इंटरैक्टिव) और प्रतिभागी-केंद्रित न्यायिक प्रशिक्षण कार्यक्रमों को तैयार करना।

    सत्र तीन समय: दोपहर 3:30 बजे से शाम पांच बजे तक।

    विषय: संकाय उत्कृष्टता को सुदृढ़ करना।

    नेतृत्व, पाठ्यक्रम नवाचार और भविष्य के लिए तैयार न्यायिक अकादमियां।

    चर्चा का प्रस्तावित दायरा:

    ट्रेन-द-ट्रेनर (प्रशिक्षकों का प्रशिक्षण) कार्यक्रमों के माध्यम से अत्यधिक सक्षम न्यायिक संकाय (फैकल्टी) का एक कैडर तैयार करना।

    समकालीन कानूनी विकास और न्यायिक आवश्यकताओं के अनुरूप पाठ्यक्रम में नवाचार।

    न्यायिक शिक्षा में अंतःविषय (इंटरडिसिप्लिनरी) दृष्टिकोण को शामिल करना।

    परिणाम-आधारित मूल्यांकन और निरंतर फीडबैक तंत्र के माध्यम से प्रशिक्षण की प्रभावशीलता की निगरानी करना।

    27 सितंबर 2026 सत्र चार समय: सुबह 10 से 11:30 बजे तक।

    विषय: न्यायिक शिक्षा का डिजिटल परिवर्तन

    अवसर, चुनौतियां और आगे की राह।

    चर्चा का प्रस्तावित दायरा

    आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस साक्षरता और न्यायिक निर्णय लेने पर इसके प्रभाव।

    साइबर कानून, डिजिटल साक्ष्य, डेटा संरक्षण और उभरती प्रौद्योगिकियों में न्यायिक दक्षता।

    प्रौद्योगिकी में हालिया प्रगति और इसके संभावित उपयोग के मामले।

    जेनरेटिव एआई समर्थित शिक्षण उपकरणों के माध्यम से न्यायिक शिक्षा को बदलना।

    भौतिक (फिजिकल), आभासी (वर्चुअल) और स्व-गतिशील (सेल्फ-पेस्ड) शिक्षा को मिलाने वाले ब्लेंडेड लर्निंग माडल।

    सत्र पांच समय: दोपहर 12 बजे से 1:30 बजे तक।

    विषय: उत्तरदायी और समावेशी न्याय के लिए न्यायिक दक्षताओं का निर्माण।

    चर्चा का प्रस्तावित दायरा: सामाजिक संदर्भ में न्यायनिर्णयन

    समावेशी और न्यायसंगत न्याय को बढ़ावा देना।

    न्याय करने में निष्पक्षता और तटस्थता।

    नए आपराधिक कानूनों के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए न्यायिक क्षमता को बढ़ाना।

    न्यायिक नैतिकता, सत्यनिष्ठा और व्यावसायिक जिम्मेदारी को मजबूत करना।

    आलोचनात्मक सोच (क्रिटिकल थिंकिंग), न्यायिक तर्क और निर्णय लेने के कौशल का विकास करना।

    फीडबैक और ऑडिट: दोपहर 1:30 से 1:40 बजे तक (प्रतिभागियों द्वारा पाठ्यक्रम का फीडबैक और ऑडिट)।

     

  • PF New Rule: बेसिक ₹30, ₹40 या ₹50 हजार है तो कितना कटेगा PF? जानें EPFO का नियम

    PF New Rule: बेसिक ₹30, ₹40 या ₹50 हजार है तो कितना कटेगा PF? जानें EPFO का नियम

     नई दिल्ली

    जब से सरकार ने पीएफ की अनिवार्य वेतन सीमा को 15,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये महीने किया है. तब से इस बात की चर्चा हो रही है कि जिनकी बेसिक सैलरी 25 हजार रुपये से ज्यादा है, उनके लिए क्या नियम है।  

    सरकार का कहना है कि इससे पहले 2014 में बदलाव हुआ था. अब नए बदलाव से लगभग 51 लाख नए कर्मचारी सीधे तौर पर PF, पेंशन और मुफ्त जीवन बीमा के दायरे में आ गए हैं. इस फैसले का मुख्य उद्देश्य देश के संगठित और असंगठित क्षेत्र के करोड़ों कर्मचारियों को व्यापक सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाना है. हालांकि, पीएफ कटौती बढ़ने के कारण टेक-होम सैलरी थोड़ी कम हो जाएगी। 

    पहले अगर कोई कर्मचारी 15,000 रुपये महीने से अधिक के बेसिक सैलरी पर पहली बार नौकरी में जुड़ता था, तो उसके लिए अनिवार्य रूप से पीएफ खाता खोलना जरूरी नहीं था। 

    महंगाई और न्यूनतम वेतन में तालमेल 
    दरअसल, साल 2014 से अब तक देश में औसत वेतन और न्यूनतम वेतन में काफी बढ़ोतरी हुई है. कई राज्यों में न्यूनतम वेतन ही 15,000 रुपये के आसपास पहुंच गया है. ऐसे में पुरानी सीमा प्रासंगिक नहीं रह गई थी. अनिवार्य अंशदान की सीमा बढ़ने से कर्मचारियों की मासिक बचत में इजाफा होगा, जिससे लंबी अवधि में उनका रिटायरमेंट फंड काफी बड़ा बनेगा। 

    अनिवार्य न्यूनतम योगदान
    पुरानी सीमा (15,000 रुपये पर कर्मचारी का 12% योगदान)= 1,800 रुपये/माह
    नई सीमा (25,000 रुपये पर कर्मचारी का 12% योगदान) = 3,000 रुपये/माह

    इसमें कंपनी और कर्मचारी दोनों की तरफ से 12-12% का योगदान दिया जाता है. ऐसे में 25,000 रुपये की सीलिंग पर कर्मचारी की सैलरी 1200 रुपये कम मिल सकती है, क्योंकि योगदान राशि 1800 रुपये से बढ़कर 3000 रुपये हो गई। 

    अब तमाम कर्मचारियों के मन में यह सवाल उठता है कि अगर उनकी बेसिक सैलरी 40,000 या 50,000 रुपये है, तो उन पर क्या नियम लागू होगा?

    नियम कहता है कि कंपनी कानूनी तौर पर केवल 25,000 रुपये की सीमा पर ही अपना हिस्सा 3,000 रुपये देने के लिए बाध्य है. आइए इसे एक उदाहरण से समझते हैं. राकेश एक प्राइवेट कंपनी में काम करते हैं और उनकी बेसिक सैलरी 50 हजार रुपये है. राकेश की कंपनी CTC स्ट्रक्चर पर काम करती है, ऐसे में वो अपनी पूरी बेसिक (50,000 रुपये का 12%= 6,000 रुपये) पीएफ में कटवा सकते हैं. कंपनी भी 6000 रुपये ही जमा करेगी. लेकिन वह पैसा राकेश की ही CTC पैकेज से एडजस्ट होगा, जिससे राकेश की Take-Home सैलरी कम हो जाएगी. क्योंकि कंपनी केवल 25,000 रुपये की सीमा तक का ही दायित्व 3000 रुपये उठाएगी। 

    अगर किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी 40 हजार रुपये मंथली है, तो क्या विकल्प है? 
    पहला विकल्प: अधिकतर निजी कंपनियां अनिवार्य वैधानिक सीमा पर ही पीएफ काटती हैं. इस हिसाब से कर्मचारी का योगदान 25,000 रुपये का 12%= 3,000 रुपये प्रति माह बनता है.  

    नियोक्ता का योगदान (12%): कुल 3000 रुपये, जो दो हिस्सों में बंटेगा-
    EPS (पेंशन फंड- 8.33%): 25 हजार रुपये का 8.33%= 2,083 रुपये/माह
    EPF (भविष्य निधि- 3.67%): ₹917/माह

    ऐसे में बेसिक 40 हजार रुपये होने के बावजूद कर्मचारी के वेतन से केवल 3,000 प्रति माह कटेंगे. 

    दूसरा विकल्प: पूरी बेसिक सैलरी यानी 40 हजार रुपये पर PF काटना. 
    अगर आपकी कंपनी और आप सहमत हैं, तो आप अपनी पूरी बेसिक सैलरी पर 12% पीएफ का योगदान दे सकते हैं. 
    कर्मचारी का योगदान: ₹40,000 का 12% = ₹4,800 प्रति महीने
    नियोक्ता का योगदान: कुल ₹4,800 प्रति माह
    EPS (पेंशन फंड): अधिकतम 25,000 की सीमा पर ही रहेगा, जो कि 2,083 रुपये महीने (अगर उच्च पेंशन का विकल्प नहीं चुना गया है.)
    EPF (भविष्य निधि): बचा हुआ पूरा हिस्सा यानी 2,717 रुपये/माह.

    ऐसे में कर्मचारी के वेतन से 4,800 रुपये प्रति माह कटेंगे और इतना ही योगदान कंपनी की तरफ से कुल पीएफ/पेंशन में जाएगा. लेकिन ऐसी स्थिति में इन हैंड सैलरी कम हो जाएगी। 

  • सागर के चौराहों की बदली सूरत, कबाड़ से बनी कलाकृतियों ने बढ़ाई सुंदरता

    सागर के चौराहों की बदली सूरत, कबाड़ से बनी कलाकृतियों ने बढ़ाई सुंदरता

    सागर 
     स्वच्छ भारत संकल्प के तहत सागर नगर निगम ने 'वेस्ट टू वंडर' कार्यक्रम शुरू किया है. इसके तहत नगर निगम के पास जितना भी कबाड़ आता है, उससे शहर के चौराहों और पार्क में सौंदर्यीकरण किया जाता है. इसके तहत पानी की प्लास्टिक की बोतल से पार्क में प्लास्टिक दानव की प्रतिमा बनाकर प्लास्टिक कचरे के नुकसान बताए गए, तो वहीं चौराहों पर कबाड़ से सुंदर कलाकृतियां बनाई गई हैं, जिनमें स्वच्छता के नायक, रेडियो और कई तरह की सुंदर प्रतिमाएं चौराहों की शोभा बढ़ा रही हैं. सागर नगर निगम की इस पहल को केंद्र और राज्य सरकार ने सराहा है। 

    वेस्ट टू वंडर बना बदलाव की मिसाल
    स्वच्छ भारत अभियान के तहत स्मार्ट सिटी सागर को खूबसूरत बनाने और प्लास्टिक के कचरे के साथ दूसरे कबाड़ का उपयोग कर सुंदर-सुंदर कलाकृतियां बनाई गई हैं। 

    सबसे पहले लाखा बंजारा झील किनारे बने विशाल अटल पार्क में प्लास्टिक की बोतल से प्लास्टिक दानव बनाया गया, जो प्लास्टिक से होने वाले नुकसान बताने के साथ ये बताता है कि इसी तरह प्लास्टिक का उपयोग होता रहा, तो ये कचरा दानव बनकर मानव के लिए परेशानी पैदा करेगा। 

    कबाड़ से चौराहों का सौंदर्यीकरण
    इसी कड़ी में नगर निगम द्वारा साफ सफाई में आने वाले कबाड़ से सुंदर-सुंदर कलाकृतियों से चौराहों का सौंदर्यीकरण किया गया है. शहर के वाणिज्यकर चौराहे पर एक विशाल रेडियो की कलाकृति कबाड़ से बनाई गई है। 

    वहीं, स्वच्छता के नायकों को सम्मान देने के लिए बस स्टेंड़ के नजदीक तीनमढ़िया पर स्वच्छता के नायकों की प्रतिमाएं कबाड़ से बनाई गई है. इसके अलावा संजय ड्राइव पर गदा कलाकृति और चित्रगुप्त चौराहे पर कलम-दवात की कलाकृति कलाकृति कबाड़ से बनाई गई है. राहतगढ़ ब्रिज के पास तोप और शहीद कालीचरण चौराहे पर ब्रह्मोस मिसाइल की कलाकृति स्थापित की गई है। 

    क्या कहना है नगर निगम का
    नगर निगम की महापौर संगीता सुशील तिवारी कहती हैं, '' स्वच्छ भारत अभियान के तहत प्लास्टिक और कबाड़ को कम करने, उनके रीसाइकिल करने और फिर से इस्तेमाल के उद्देश्य के साथ शहर में कई तरह के कार्य किए जा रहे हैं. प्लास्टिक के उपयोग को लेकर जनजागरूकता बढ़ाने के लिए अटल पार्क मेंप्लास्टिक का दानव और इसी तरह शहर के अलग-अलग चौराहों पर सुंदर कलाकृतियां कबाड़ से बनाई गई हैं, जो चौराहों की सुंदरता बढ़ाने के साथ-साथ कबाड़ के रीसाइकिल करने के उद्देश्य को सार्थक कर रही हैं। 

  • इंदौर में पहली अंडरग्राउंड मेट्रो टनल की खुदाई शुरू, TBM नर्मदा बनाएगी 3.5 KM सुरंग

    इंदौर में पहली अंडरग्राउंड मेट्रो टनल की खुदाई शुरू, TBM नर्मदा बनाएगी 3.5 KM सुरंग

    इंदौर 

    इंदौरवासियों के लिए अंडरग्राउंड मेट्रो का सपना अब जमीन पर उतरने जा रहा है। मंगलवार से शहर में मेट्रो टनल की खुदाई का काम आधिकारिक रूप से शुरू हो जाएगा। यह शहर के इतिहास में पहला मौका होगा जब एयरपोर्ट के ठीक सामने टनल बोरिंग मशीन (TBM) जमीन के भीतर खुदाई करेगी।

    शुरुआती दौर में धीमी रहेगी रफ्तार
        जमीन के अंदर मौजूद मिट्टी और चट्टानों की वास्तविक स्थिति को समझने के लिए, शुरुआत में टीबीएम को 'सॉफ्ट लॉन्चिंग' के तहत बेहद धीमी गति से चलाया जाएगा।

        भूमिगत हिस्से के निर्माण के लिए अलग-अलग परिस्थितियों में काम करने वाली 'मिक्स्ड फेस शील्ड' टीबीएम का इस्तेमाल किया जा रहा है। यह सुरंग जमीन की सतह से लगभग 9 से 28 मीटर की गहराई में बनाई जाएगी। सुरंग को स्थायी मजबूती देने के लिए इसके भीतर प्रीकास्ट आरसीसी (RCC) रिंग्स लगाई जाएंगी।

    आसपास की इमारतों की 24 घंटे होगी निगरानी
        चूंकि एयरपोर्ट से रेलवे स्टेशन तक का यह अंडरग्राउंड रूट घनी आबादी वाले इलाकों से होकर गुजरेगा, इसलिए सुरक्षा पर खास ध्यान दिया जा रहा है। मशीन और पूरे निर्माण क्षेत्र में अत्याधुनिक सेंसर लगाए गए हैं।

        जैसे-जैसे टीबीएम आगे बढ़ेगी, ये सेंसर जमीन और आसपास के भवनों में होने वाले किसी भी मामूली बदलाव को रियल-टाइम में दर्ज करेंगे। यदि कोई भी अप्रत्याशित बदलाव नजर आता है, तो इंजीनियरिंग टीम तुरंत आवश्यक कदम उठाएगी।

    खुदाई के बाद डलेगी रिंग
    सामान्य बोरिंग मशीन वर्टिकल (सीधी) खुदाई करती है, लेकिन टीबीएम जमीन के समानांतर खुदाई करती है। यह मशीन 'थ्री-टियर सिस्टम' पर काम करती है, जिसमें तीन काम एक साथ होते हैं- पहला ड्रिलिंग, दूसरा प्रीकास्ट सेगमेंटल रिंग (केसिंग पाइप की तरह) डालना और तीसरा मलबा बाहर निकालना।

        काम की गति: काम को बिना रोके 24 घंटे चलाने के लिए तीन शिफ्टें तय की गई हैं। सुरक्षा के लिए हर 1 मीटर की खुदाई के तुरंत बाद रिंग लगा दी जाएगी।

        रूट और मशीन: टीबीएम 'नर्मदा' एयरपोर्ट से बड़ा गणपति के बीच 3.5 किलोमीटर लंबी सुरंग तैयार करेगी, जिसमें 4 अंडरग्राउंड स्टेशन भी बनेंगे। इस भारी-भरकम टीबीएम का कुल वजन लगभग 410 मीट्रिक टन है।

    भोपाल की तर्ज पर काम और मलबे का बेहतरीन इंतजाम
        जिस तरह राजधानी भोपाल में मेट्रो टनलिंग का काम रोजाना औसतन 1 से 2 मीटर की गति से चल रहा है, उसी तरह इंदौर में भी सुरक्षा के मद्देनजर शुरुआती रफ्तार 1 से 2 मीटर प्रतिदिन या इससे कम ही रखी जाएगी। 

    टनलिंग के दौरान निकलने वाले करीब 4 लाख टन मलबे को बाहर निकालने के लिए कन्वेयर बेल्ट का इस्तेमाल होगा, जहां से इसे डंपरों में भरकर हटाया जाएगा।

    शहर में 17.5 किलोमीटर का एलिवेटेड (हवा में) कॉरिडोर पहले ही पूरा हो चुका है। अब अंडरग्राउंड काम के दौरान नागरिकों की सुविधा और सड़क यातायात पर कम से कम असर पड़े, इसके लिए मशीन की रफ्तार को नियंत्रित रखा जा रहा है।

     

  • यूपीआईटीएस 2026 : डेयरी और मत्स्य क्षेत्र को मिलेगा वैश्विक बाजार

    यूपीआईटीएस 2026 : डेयरी और मत्स्य क्षेत्र को मिलेगा वैश्विक बाजार

    यूपीआईटीएस 2026 : डेयरी और मत्स्य क्षेत्र को मिलेगा वैश्विक बाजार

    निवेशकों और खरीदारों से सीधे जुड़ेंगे उत्तर प्रदेश के उद्यमी

    ग्रामीण अर्थव्यवस्था को वैश्विक बाजार से जोड़ने का सशक्त मंच बनेगा यूपीआईटीएस

    मछली पालन से दुग्ध उत्पादन तक दिखेगी ग्रामीण अर्थव्यवस्था की नई तस्वीर

    देश-विदेश के खरीदारों से रूबरू होंगे डेयरी क्षेत्र से जुड़े 14 प्रमुख स्टेकहोल्डर्स और मत्स्य क्षेत्र से जुड़ीं आठ प्रमुख कंपनियां

    लखनऊ
     उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो (यूपीआईटीएस)-2026 में प्रदेश के डेयरी व मत्स्य क्षेत्र की उपलब्धियों, संभावनाओं और उद्यमिता की नई तस्वीर देखने को मिलेगी। 25 से 29 सितंबर तक ग्रेटर नोएडा स्थित इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट में होने वाले इस अंतरराष्ट्रीय ट्रेड शो में मत्स्य एवं डेयरी को प्रमुख फोकस सेक्टर के रूप में शामिल किया गया है। इसका उद्देश्य इन क्षेत्रों में उत्तर प्रदेश की विविध क्षमताओं को देश-विदेश के खरीदारों, निवेशकों और कारोबारियों के सामने प्रस्तुत करना है।

    बड़े बाजार से जुड़ेंगे डेयरी और मत्स्य क्षेत्र के स्टेकहोल्डर्स
    डेयरी और मत्स्य क्षेत्र प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था, रोजगार और स्वरोजगार से सीधे जुड़े हैं। ट्रेड शो में इन क्षेत्रों से संबंधित सरकारी योजनाओं, उत्पादों, सेवाओं, तकनीकों और उद्यमिता के अवसरों को व्यापक मंच मिलेगा। इससे किसानों, दुग्ध उत्पादकों, मत्स्य पालकों, स्वयं सहायता समूहों व उद्यमियों को अपने कार्य और उत्पादों को बड़े बाजार से जोड़ने का अवसर मिलेगा।

    प्रसंस्करण, कोल्ड चेन, पैकेजिंग और विपणन में विकसित होंगे उद्यमिता के अवसर
    मत्स्य क्षेत्र में उत्पादन बढ़ाने के साथ आधुनिक तकनीक, बेहतर प्रबंधन, प्रसंस्करण और विपणन की संभावनाओं को भी सामने लाया जाएगा। यूपीआईटीएस 2026 में मछली पालन, इससे जुड़े उत्पादन, फीड, प्रसंस्करण, कोल्ड चेन, पैकेजिंग और विपणन जैसे क्षेत्रों में उद्यमिता के अवसरों को प्रदर्शित किया जाएगा। इससे मत्स्य पालकों और उद्यमियों को नए बाजारों तक पहुंच बनाने में मदद मिल सकती है।

    इसी तरह पशुधन, पशु स्वास्थ्य, दुग्ध उत्पादन और इससे जुड़े व्यवसायों की पूरी श्रृंखला ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करती है। ट्रेड शो के माध्यम से इन गतिविधियों में उपलब्ध संभावनाओं और कारोबार के अवसरों को भी व्यापक बाजार के सामने रखने का प्रयास किया जाएगा।

    एक मंच पर प्रदर्शित होगी ग्रामीण अर्थव्यवस्था की विविधता
    यूपीआईटीएस में अंतरराष्ट्रीय खरीदारों, घरेलू बी2बी खरीदारों, घरेलू बी2सी ग्राहकों के माध्यम से मत्स्य व डेयरी क्षेत्र से जुड़े उद्यमियों के लिए अपने उत्पादों और सेवाओं को नए खरीदारों तक पहुंचाने की संभावनाएं बढ़ेंगी। डेयरी और मत्स्य विभाग की सरकारी योजनाओं एवं नीतियों के साथ निजी क्षेत्र, उद्यमियों, निवेशकों, निर्यातकों और खरीदारों को एक मंच पर लाने का प्रयास किया जा रहा है। मत्स्य और पशुपालन जैसे कृषि-संबद्ध क्षेत्रों की भागीदारी से प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की ताकत और विविधता को वैश्विक मंच पर प्रदर्शित करने का अवसर मिलेगा। इससे उत्पादन से लेकर प्रसंस्करण, पैकेजिंग, विपणन और बाजार तक पूरी वैल्यू चेन में नए कारोबारी संपर्क विकसित होने की संभावनाएं बनेंगी।

     

    यूपीआईटीएस में मत्स्य विभाग की ओर से इन्हें मिलेगा मंच

    👉पीवीआर एक्वा – गाजियाबाद
    👉 ग्रोवेल फीड – लखनऊ
    👉 देवी फीड्स – बाराबंकी
    👉 फिश व्हाइट – वाराणसी
    👉 मणि एग्रो हब – मुरादाबाद
    👉 एबिस ग्रुप – अयोध्या
    👉 दयाल ग्रुप – लखनऊ
    👉 एडवांस फिश फार्म – मेरठ

    डेयरी क्षेत्र की देश-प्रदेश की 14 कंपनियों की रहेगी मौजूदगी

    👉 नमस्ते इंडिया
    👉 गंगोल सहकारी दुग्ध उत्पादक संघ लिमिटेड
    👉 भारत एसकेवाईआर एंड दूध प्रोडक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड
    👉 सिंहानिया मिल्क प्रोडक्ट्स प्रा. लि. (मलाई धारा)
    👉 वीआरएस फूड्स लिमिटेड
    👉 क्रीमी फूड्स लिमिटेड
    👉 सीपी मिल्क एंड फूड प्रोडक्ट्स प्रा. लि. (ज्ञान डेयरी)
    👉 भोले बाबा मिल्क
    👉 अमूल (गुजरात को-ऑपरेटिव मिल्क मार्केटिंग फेडरेशन लिमिटेड)
    👉 न्यू एरा डेयरी इंजीनियर्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड
    👉 ज्यूड्स मिल्क
    👉 अल्फा मिल्क फूड
    👉 श्याम डेयरी
    👉 पराग डेयरी

    वर्जन 
    उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो के चतुर्थ संस्करण (25 से 29 सितंबर) के आयोजन में डेयरी व मत्स्य विभाग की भी महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी। अतिथि व आगंतुक दुग्ध-मत्स्य क्षेत्र में उत्तर प्रदेश की प्रगति से रूबरू होंगे। आयोजन में दुग्ध उत्पादकों, मत्स्य पालकों, स्टेक होल्डर्स, कंपनियों आदि की भी सहभागिता रहेगी। दोनों विभागों की तैयारी पूरी हो गई है।
    धनलक्ष्मी के. 
    दुग्ध आयुक्त/महानिदेशक, मत्स्य
    उत्तर प्रदेश

  • 8वें वेतन आयोग में OPS की बहाली होगी या NPS रहेगा? कर्मचारियों की नजर

    8वें वेतन आयोग में OPS की बहाली होगी या NPS रहेगा? कर्मचारियों की नजर

    नई दिल्ली

    केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए 8वां वेतन आयोग इस समय वेतन, पेंशन और भत्तों से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचार कर रहा है। 3 नवंबर 2025 को गठन के बाद आयोग को अपनी अंतिम रिपोर्ट सरकार को सौंपने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है और करीब 10 महीने बीत भी चुके हैं।

    आयोग की अध्यक्षता न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई कर रही हैं। आयोग कर्मचारी संगठनों, पेंशनर संगठनों और अन्य एसोसिएशनों से उनकी मांगों और सुझावों पर चर्चा कर रहा है। पिछले कुछ महीनों में देश के अलग-अलग शहरों में आयोग की बैठकें हो चुकी हैं। सितंबर में आयोग ने 9 सितंबर को पुडुचेरी और 16 से 18 सितंबर के बीच चंडीगढ़ में बैठकें कीं। अक्टूबर में बेंगलुरु में 7 और 8 अक्टूबर को बैठक प्रस्तावित है।

    फिटमेंट फैक्टर से लेकर पेंशन तक पर चर्चा
    आयोग के सामने कर्मचारी संगठनों की ओर से फिटमेंट फैक्टर बढ़ाने, वेतन संशोधन, पेंशन में सुधार और विभिन्न भत्तों में बदलाव समेत कई मांगें रखी गई हैं। हालांकि, इनमें पुरानी पेंशन योजना (OPS) और राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) का मुद्दा खास तौर पर महत्वपूर्ण बना हुआ है। 2004 के बाद भर्ती हुए केंद्रीय कर्मचारियों के लिए रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली आर्थिक सुरक्षा को लेकर कई कर्मचारी संगठनों ने आयोग के सामने अपनी चिंताएं रखी हैं।

    OPS की बहाली की मांग
    कई कर्मचारी संगठनों का कहना है कि मौजूदा अंशदायी पेंशन व्यवस्था से सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाली आर्थिक सुरक्षा उनकी अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं है। उनके मुताबिक कर्मचारियों और उनके परिवारों के लिए निश्चित पेंशन व्यवस्था जरूरी है।

    सर्वे ऑफ इंडिया की MSA ने OPS बहाल करने की मांग की है। संगठन ने अंतिम वेतन के 50 फीसदी के बराबर गारंटीड पेंशन की मांग भी रखी है।

    वहीं फेडरेशन ऑफ नेशनल पोस्टल आर्गेनाइजेशन ने NPS और UPS के तहत आने वाले कर्मचारियों को भी परिभाषित लाभ वाली पेंशन व्यवस्था में लाने की मांग की है। रेलवे सीनियर सिटिजनंस सोसाइटी ने भी न्यूनतम गारंटीड पेंशन और सेवानिवृत्ति के बाद अधिक वित्तीय सुरक्षा की मांग उठाई है।

    8वें वेतन आयोग में आगे क्या होगा?
    इन संगठनों की मांगें उनके संबंधित ज्ञापनों के माध्यम से 8वें वेतन आयोग के सामने रखी गई हैं। दूसरे कर्मचारी और पेंशनर संगठनों ने भी फिटमेंट फैक्टर, पेंशन समानता और न्यूनतम पेंशन बढ़ाने समेत कई सुझाव दिए हैं।

    अब आयोग इन मांगों और विभिन्न पक्षों से मिले सुझावों का अध्ययन करेगा। इसके बाद आयोग अपनी सिफारिशें सरकार को सौंपेगा। उपलब्ध समयसीमा के अनुसार अंतिम रिपोर्ट मई-जून 2027 के आसपास आने की संभावना बताई जा रही है।

  • यूपी में राज्यसभा की 10 सीटों पर चुनावी बिसात, BJP-NDA को 7 सीटों का दावा

    यूपी में राज्यसभा की 10 सीटों पर चुनावी बिसात, BJP-NDA को 7 सीटों का दावा

    लखनऊ
    यूपी में राज्यसभा की 10 सीटों और विधान परिषद की 11 सीटों को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है. अगले दो महीने में इन सीटों के लिए चुनाव और चयन की पूरी प्रक्रिया पूरी होगी. राज्यसभा की इन 10 सीटों का कार्यकाल 25 नवंबर को खत्म हो रहा है, जिनमें बीजेपी की 8, सपा की 1 और बसपा की 1 सीट शामिल है. बसपा के राज्यसभा से पूरी तरह खाली होने के बीच अब सबकी नजर बीजेपी और एनडीए के अतिरिक्त वोटों पर टिकी है, जबकि सपा के खाते में 2 सीटों का गणित बनता दिख रहा है। 

    लखनऊ से मिली जानकारी के मुताबिक, अक्टूबर और नवंबर में त्योहारों के साथ-साथ सियासी समीकरण भी तेजी से बदलेंगे. जिन बीजेपी सदस्यों का कार्यकाल खत्म हो रहा है, उनमें पूर्व डीजीपी बृजलाल, सीमा द्विवेदी, नीरज शेखर, गीता शाक्य, हरदीप सिंह पुरी, अरुण सिंह और बीएल वर्मा शामिल हैं. डॉ. दिनेश शर्मा का कार्यकाल भी 25 नवंबर तक था, लेकिन अंडमान-निकोबार के एलजी बनने के बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया, इसलिए उनकी सीट पर भी अब चुनाव होगा. इसके अलावा सपा के वरिष्ठ नेता रामगोपाल यादव और बसपा के रामजी गौतम का कार्यकाल भी समाप्त हो रहा है। 

    सूत्रों की मानें तो अक्टूबर के दूसरे पखवाड़े में राज्यसभा चुनाव का कार्यक्रम घोषित हो सकता है. आमतौर पर अधिसूचना जारी होने से लेकर मतगणना तक पूरी प्रक्रिया में करीब 20 दिन का समय लगता है. यूपी विधानसभा में कुल 403 सीटें हैं, लेकिन पिछले एक साल में 6 विधायकों के निधन के बाद अभी विधायकों की संख्या 397 रह गई है. मौजूदा गणित के हिसाब से राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए करीब 37 विधायकों के वोट चाहिए होंगे। 

    बसपा विधानसभा में पहले ही शून्य हो चुकी है और रामजी गौतम का कार्यकाल खत्म होते ही पार्टी राज्यसभा में भी शून्य हो जाएगी. सपा के पास 101 विधायक हैं, जिससे उसे 2 सीटें मिलने का रास्ता बनता है और करीब 7 वोट अतिरिक्त बच जाएंगे. वहीं बीजेपी के पास 256 विधायक हैं और सहयोगी दलों को जोड़कर एनडीए का आंकड़ा करीब 289 बताया जा रहा है। 

    तीन निर्दलीय विधायकों और राजा भैया की पार्टी के 2 विधायकों के समर्थन से यह आंकड़ा 294 तक पहुंच जाता है, हालांकि सुभासपा के 2 विधायकों के सपा की तरफ झुकाव के चलते एनडीए की असल ताकत करीब 292 ही मानी जा रही है. इस हिसाब से बीजेपी और उसके सहयोगी दल 7 सीटें आसानी से जीत सकते हैं, लेकिन उसके बाद भी एनडीए के पास वोट बचेंगे जिससे दूसरी पसंद के वोट 10वीं सीट का फैसला कर सकते हैं। 

  • रूस से तेल खरीद पर US को जेमी डिमॉन की नसीहत, बोले- भारत पर कार्रवाई से पहले सोचें

    रूस से तेल खरीद पर US को जेमी डिमॉन की नसीहत, बोले- भारत पर कार्रवाई से पहले सोचें

    नई दिल्ली

    जेपी मॉर्गन चेज के सीईओ जेमी डिमॉन ने रूस से कच्चा तेल खरीदने को लेकर भारत पर कार्रवाई को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका को कोई सख्त कार्रवाई करने से पहले उसके असर को समझना चाहिए। यूएस को भारत और पूरी दुनिया के तेल बाजार पर पड़ने वाले प्रभाव को ध्यान में रखना होगा। डिमॉन ने यह बात मुंबई में जेपी मॉर्गन इंडिया इन्वेस्टर कॉन्फ्रेंस के दौरान सीएनबीसी-टीवी18 से बातचीत में कही। उन्होंने कहा, 'वॉशिंगटन को पहले समझना चाहिए कि भारतीय रिफाइनर रूस से मिलने वाले तेल का किस तरह इस्तेमाल करते हैं।'

    जेमी डिमॉन ने कहा, 'उम्मीद है कि अमेरिका इन सभी मुद्दों को समझेगा और ऐसा नहीं करेगा कि रूस के खिलाफ जरूरी कदम उठाते हुए भारत और दुनिया के तेल बाजार को नुकसान पहुंचा दे।' उन्होंने भारतीय रिफाइनरियों में इस्तेमाल होने वाले रूसी तेल को लेकर भी बात रखी। डिमॉन के मुताबिक, रूस से आने वाले तेल का कुछ हिस्सा भारत में रिफाइन होकर इस्तेमाल होता है और कुछ तेल रिफाइनरियों की खास जरूरत के मुताबिक खरीदा जाता है। उन्होंने कहा कि अगर भारत यह तेल रूस से नहीं खरीदेगा तो उसे किसी दूसरे देश से लेना होगा और हो सकता है कि वहां से मिलने वाला तेल भारतीय रिफाइनरियों के लिए सही न हो।

    रूस से तेल खरीदने पर 100% तक टैरिफ
    डिमॉन का यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिकी कांग्रेस ने रूस पर नए प्रतिबंधों से जुड़ा विधेयक पास किया है। इस कानून के तहत राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार मिल सकता है। डिमॉन ने कहा कि अमेरिका को रूस पर दबाव बनाने के उपायों के साथ-साथ यह भी देखना चाहिए कि ऐसे कदमों का तेल बाजार पर कितना व्यापक असर पड़ सकता है। अमेरिका को यूक्रेन के समर्थन के लिए और कदम उठाने चाहिए।

    भारत पर अमेरिका और यूरोपीय संघ का दबाव
    रूस से कच्चा तेल खरीदने को लेकर भारत पर अमेरिका और यूरोपीय संघ की ओर से दबाव बढ़ा हुआ है। भारत लगातार रूसी तेल खरीद को लेकर हो रही आलोचना को खारिज करता रहा है। नई दिल्ली ने अपनी ऊर्जा खरीद को निशाना बनाने को अनुचित और गैरवाजिब बताया है। रूस पर प्रतिबंध वाले अमेरिकी कानून पर भी भारत ने कहा कि इससे दोनों देशों के संबंध प्रभावित हो सकते हैं। विदेश मंत्रालय ने कहा था कि भारत अपने व्यापार और आर्थिक हितों की रक्षा के लिए जरूरी कदम उठाएगा। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक है और रूसी तेल के बड़े खरीदारों में शामिल है।

  • इंदौर जू में बनेगा अंडरवॉटर टनल एक्वेरियम, 35 करोड़ रुपये होंगे खर्च

    इंदौर जू में बनेगा अंडरवॉटर टनल एक्वेरियम, 35 करोड़ रुपये होंगे खर्च

    इंदौर

    इंदौर के कमला नेहरू प्राणी संग्रहालय में प्रदेश का पहला अंडरवाॅटर फिश एक्ववेरियम का काम शुरू हो चुका है। यह करीब डेढ़ एकड़ में बनेगा। इसके लिए प्राणी संग्रहालय में पांच फीट गहराई में खुदाई भी हो चुकी है।

    डेढ़ साल में इसके निर्माण को पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है। दस करोड़ रुपये से अधिक पहले चरण में खर्च किए जाएंगे। दर्शक जब अंडरवाॅटर फिश एक्वेरियम में प्रवेश करेंगे तो उन्हें अपने सिर के उपर से मछलियां और समुद्री जीव तैरते हुए दिखाई देंगे।

    इसकी योजना चार साल पहले नगर निगम ने बनाई थी, लेकिन अब उसे मूर्त रुप दिया जा रहा है। नगर निगम के बजट में भी इसकी घोषणा की गई है। मेयर पुष्य मित्र भार्गव ने कहा कि अंडरवाॅटर फिश एक्वेरियम के बनने से चिडि़याघर के प्रति शहरवासियों का आकर्षण और बढ़ेगा। मनोरंजन शहवासियों को मिलेगा और नगर निगम की आय भी इससे बढ़ेगी। इसके अलावा नगर निगम में 14 डी थिएटर का निर्माण भी जल्दी शुरू होगा।

    इंदौर के प्राणी संग्रहालय (जू) में घूमने का मजा अब दोगुना होने वाला है। जल्द ही शहरवासियों को यहां समुद्र जैसी गहरी और खूबसूरत जलीय दुनिया का अहसास होगा। शहर के जू में एक आधुनिक अंडरवॉटर टनल एक्वेरियम बनाने की रुकी हुई योजना ने अब फिर से रफ्तार पकड़ ली है।

    नगर निगम इसे पीपीपी (PPP) मॉडल पर तैयार करने जा रहा है। करीब 35 करोड़ रुपये के बजट वाले इस भव्य प्रोजेक्ट के जरिए लोगों को सिर्फ रंग-बिरंगी मछलियां ही नहीं, बल्कि पेंगुइन, टच पूल और स्नॉर्कलिंग जैसे रोमांचक अनुभव भी मिलेंगे।

    पानी के बीच से गुजरती पारदर्शी टनल
        इस पूरे प्रोजेक्ट की जान इसका 'अं
    डरवॉटर टनल' होगा, जिसके डिजाइन के लिए लगभग 128 वर्गमीटर की जगह तय की गई है। जब दर्शक इस पारदर्शी टनल से गुजरेंगे, तो उन्हें ऐसा लगेगा जैसे वे खुद पानी के भीतर चल रहे हों और मछलियां उनके चारों ओर तैर रही हों।

        टनल में स्पष्ट रूप से देखने के लिए खास एक्रेलिक पैनल वाली खिड़कियां लगाई जाएंगी। जलीय जीवों को उनके अनुकूल माहौल देने के लिए पानी को लगातार फिल्टर करने, ऑक्सीजन की सप्लाई, और तापमान नियंत्रित करने वाले बेहद आधुनिक सिस्टम यहां काम करेंगे।

    मनोरंजन के साथ शिक्षा का भी बनेगा केंद्र
        नगर निगम ने इस प्रोजेक्ट के डेवलपमेंट और बाद में इसके रखरखाव व संचालन के लिए किसी अनुभवी एजेंसी की तलाश शुरू कर दी है। जू प्रभारी उत्तम यादव के मुताबिक, इस बार नियमों को थोड़ा लचीला बनाया गया है ताकि काम करने वाली एजेंसी आसानी से मिल सके।

        इस पूरे प्रोजेक्ट को एक से डेढ़ साल के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। खास बात यह है कि यह एक्वेरियम सिर्फ मछलियां देखने की जगह तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे मीठे और समुद्री पानी के जीवों के बारे में जानकारी देने वाले एक बड़े मनोरंजन और शिक्षा केंद्र के तौर पर विकसित किया जाएगा।

    पेंगुइन से लेकर स्नॉर्कलिंग तक, मिलेंगी ये शानदार सुविधाएं

    इस नए कॉम्प्लेक्स में पर्यटकों के लिए कई विश्वस्तरीय सुविधाएं मौजूद होंगी:

        5 एक्वेरियम हॉल: यहां अलग-अलग प्रजातियों की मछलियों और जलीय जीवों को करीब से निहारने की सुविधा होगी।

        पेंगुइन प्रदर्शनी: 75 वर्गमीटर के एक खास क्षेत्र में पेंगुइन देखने की व्यवस्था की जाएगी।

        टच पूल और स्नॉर्कलिंग जोन: जलीय दुनिया को छूकर महसूस करने के लिए 'टच पूल' और पानी के भीतर का जीवन देखने के लिए 'स्नॉर्कलिंग जोन' भी बनाया जाएगा।

        अन्य आकर्षण: इसके अलावा परिसर में 125 वर्गमीटर का एक पूल वाला तालाब, बेहतरीन तस्वीरों के लिए 'सेल्फी पॉइंट', आगंतुकों के खाने-पीने के लिए 'रेस्टोरेंट' और यादगार तोहफे खरीदने के लिए 'सुवेनियर शॉप' भी मौजूद रहेगी।

     

  • सेवा संकल्प अभियान के तहत विद्यार्थियों को दिया कैरियर मार्गदर्शन

    सेवा संकल्प अभियान के तहत विद्यार्थियों को दिया कैरियर मार्गदर्शन

    रायपुर

    सेवा संकल्प अभियान के तहत विद्यार्थियों को दिया कैरियर मार्गदर्शन

    सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत रायगढ़ जिले के  शासकीय स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट हिंदी माध्यम उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, चक्रधरनगर रायगढ़ में कैरियर मार्गदर्शन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन जिला रोजगार एवं स्वरोजगार मार्गदर्शन केंद्र के तत्वावधान में किया गया। 

     कार्यक्रम में विद्यार्थियों को शिक्षा के बाद उपलब्ध विभिन्न कैरियर विकल्पों, रोजगार की संभावनाओं और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के संबंध में मार्गदर्शन दिया गया। विद्यार्थियों को अपनी रुचि और क्षमता के अनुरूप कैरियर का चयन करने के लिए प्रेरित किया गया। इस दौरान विद्यार्थियों ने कैरियर से जुड़े विभिन्न विषयों पर जानकारी प्राप्त की और अपनी जिज्ञासाओं का समाधान भी किया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को भविष्य की पढ़ाई और रोजगार के अवसरों को लेकर सही दिशा प्रदान करना रहा। इस अवसर पर संबंधित अधिकारी, स्कूल के प्राचार्य एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।