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  • भारत पर सुपर अल-नीनो का खतरा! जानलेवा गर्मी से 15,800 अतिरिक्त मौतों का अनुमान

    भारत पर सुपर अल-नीनो का खतरा! जानलेवा गर्मी से 15,800 अतिरिक्त मौतों का अनुमान

    नई दिल्ली
    भारत में आने वाले महीनों में गर्मी का असर और गंभीर हो सकता है। शिकागो यूनिवर्सिटी के एनर्जी पॉलिसी इंस्टीट्यूट की एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, सितंबर 2026 से फरवरी 2027 के बीच देश में सामान्य साल की तुलना में करीब 15800 अतिरिक्त मौतें हो सकती हैं। रिपोर्ट में इसकी बड़ी वजह सुपर अल नीनो को बताया गया है।

    यूनिवर्सिटी की क्लाइमेट इम्पैक्ट लैब (CIL) की रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि इसके चलते तापमान में तेज बढ़ोतरी होगी। वैश्विक स्तर पर जमीन का तापमान सामान्य से 1.2 डिग्री सेल्सियस ज्यादा रह सकता है। इससे लोगों को ऐसी गर्म परिस्थितियों का सामना करना पड़ेगा-जैसी जलवायु परिवर्तन के कारण करीब 20 साल बाद देखने का अनुमान है। रिपोर्ट के अनुसार, सामान्य साल की तुलना में बेहद गर्म दिनों की संख्या 44 फीसदी अधिक हो सकती है।

    रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि दुनियाभर में जून से शुरू हुए मौजूदा अल नीनो के दौरान अब तक गर्मी से जुड़ी करीब 4.51 लाख अतिरिकत मौतें हुई हैं। इनमें से 2.39 लाख मौतें सितंबर 2026 से फरवरी 2027 के बीच के छह महीनों में होने का अनुमान है।

    सितंबर 2026 से मौसम को लेकर एक ऐसी चेतावनी सामने आई है, जिसका असर सिर्फ तापमान के रिकॉर्ड तक सीमित नहीं रह सकता. एक नए आकलन के मुताबिक, मौजूदा El Nino के दौरान दुनिया में सामान्य वर्षों की तुलना में करीब 4.51 लाख अतिरिक्त गर्मी से जुड़ी मौतें हो सकती हैं. भारत भी उन देशों में है जहां इसका असर खास तौर पर गंभीर रहने का अनुमान है। 

    भारत के लिए दिसंबर से फरवरी अहम
    ‘क्लाइमेट इम्पैक्ट लैब’ (Climate Impact Lab) के अनुमान के मुताबिक सितंबर 2026 से फरवरी 2027 के बीच भारत में करीब 15,800 अतिरिक्त हीट रिलेटेड डेथ का अनुमान है. रिपोर्ट के मुताबिक भारत में इसका बड़ा हिस्सा दिसंबर से फरवरी के तीन महीनों में सामने आ सकता है. और खतरा यहीं खत्म नहीं होता. शोधकर्ताओं ने संकेत दिया है कि भारत और पाकिस्तान जैसे उत्तरी गोलार्ध के इलाकों में अगले साल गर्मियों के दौरान ‘तेज गर्मी के चलते होने वाली मौतें’ और बढ़ सकती हैं। 

    दुनिया के दूसरे हिस्सों में भी आंकड़े काफी बड़े हैं. अफ्रीका के साहेल क्षेत्र में करीब 66,800 अतिरिक्त मौतों का अनुमान है, जिनमें अकेले नाइजीरिया में 31,400 शामिल हैं. साउथ ईस्ट एशिया के फिलीपिंस, वियतनाम, थाईलैंड और कंबोडिया में मिलाकर करीब 19,400 और इंडोनेशिया में 19,300 अतिरिक्त मौतों का अनुमान लगाया गया है. ब्राजील के लिए ये आंकड़ा 13,300 बताया गया है। 

    नेपाल की बाढ़ त्रासदी से तुलना
    शोधकर्ताओं ने इस अनुमानित मौतों की संख्या की तुलना हाल ही में नेपाल में आई बाढ़ में मारे गए या लापता लोगों से की है। उनके मुताबिक, अल नीनो से जुड़ी अनुमानित मौतों की संख्या नेपाल की उस बाढ़ में मारे गए या लापता लोगों की संख्या से करीब 65 गुना ज्यादा है।

    आपको बता दें कि अल नीनो एक मौसमी घटना है जिसमें भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर के पानी का तापमान असामान्य रूप से बढ़ जाता है। इसका असर भारतीय मानसून पर भी पड़ता है और इससे तापमान सामान्य से ज्यादा रहने की स्थिति बन सकती है।

    रिपोर्ट की सह-लेखिका एमिली ग्रोवर-कोपेक ने बताया कि मौतों का यह अनुमान क्लाइमेट इम्पैक्ट लैब (CIL) की उस रिसर्च पर आधारित है। इसमें तापमान और गर्मी से होने वाली अतिरिक्त मौतों के बीच संबंध का अध्ययन किया गया है। इसके लिए दुनियाभर के 24378 क्षेत्रों के अलग-अलग आंकड़ों का इस्तेमाल किया गया ताकि स्थानीय जलवायु, लोगों की संवेदनशीलता और बदलते मौसम के अनुकूल ढलने की क्षमता को ध्यान में रखा जा सके।

    इसके बाद इन आंकड़ों को यूरोपियन सेंटर फॉर मीडियम-रेंज वेदर फोरकास्ट्स (ECMWF) के मौसमी मौसम पूर्वानुमान पर लागू किया गया। इससे 1996 से 2025 के औसत की तुलना में संभावित अतिरिक्त मौतों का अनुमान लगाया गया। रिपोर्ट में दिए गए अनुमान की अनिश्चितता दो मुख्य वजहों से जुड़ी है-

    इससे 1996 से 2025 के औसत की तुलना में संभावित अतिरिक्त मौतों का अनुमान लगाया गया। रिपोर्ट में दिए गए अनुमान की अनिश्चितता दो मुख्य वजहों से जुड़ी है- 51 अलग-अलग पूर्वानुमानों वाले मॉडल समूह (ensemble) में अंतर और तापमान व मौतों के बीच संबंध को लेकर मौजूद अनिश्चितता।

    ग्रोवर-कोपेक रोडियम ग्रुप में क्लाइमेट एंड एनर्जी प्रैक्टिस की निदेशक भी हैं और क्लाइमेट इम्पैक्ट लैब के साथ कंपनी के काम का नेतृत्व करती हैं। उन्होंने कहा कि यह मॉडल सख्त वैज्ञानिक तरीके से तैयार किया गया है और लगातार विकसित हो रहा है। जैसे-जैसे नए सबूत और आंकड़े सामने आएंगे, मॉडल को और बेहतर बनाया जा सकेगा।
    भारत पर कितना असर पड़ेगा?

    रिपोर्ट के मुताबिक, नाइजीरिया, सूडान, नाइजर और चाड के साहेल इलाकों में गर्मी का सबसे ज्यादा असर देखने को मिल सकता है। यहां करीब 66800 अतिरिक्त मौतों का अनुमान है।

    भारत के दुनिया के सबसे ज्यादा प्रभावित देशों में चौथे स्थान पर रहने का अनुमान है। इससे आगे नाइजीरिया, इंडोनेशिया और सूडान हैं। वहीं फिलीपींस, वियतनाम, थाईलैंड और कंबोडिया में कुल मिलाकर करीब 19400 अतिरिक्त मौतें होने का अनुमान है।

    रिपोर्ट के लेखकों माइकल ग्रीनस्टोन, टैमा कार्लटन, जेनेवीव मैरिकल और ग्रोवर-कोपेक के मुताबिक, भारत में गर्मी से होने वाली मौतें अचानक बढ़ने के बजाय धीरे-धीरे बढ़ सकती हैं। अकेले दिसंबर 2026 से फरवरी 2027 के बीच भारत में करीब 7400 अतिरिक्त मौतों का अनुमान है।

    रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत में फरवरी के बाद भी गर्मी का खतरा कम होने की संभावना नहीं है। भारत और पाकिस्तान को ऐसे उत्तरी गोलार्ध के देशों के तौर पर चिन्हित किया गया है जहां गर्मियों के दौरान गर्मी से होने वाली मौतों का आंकड़ा और बढ़ सकता है।

    भारत में सर्दियों के दौरान गर्मी से होने वाली मौतों के अनुमान को लेकर ग्रोवर-कोपेक ने कहा कि उत्तर भारत में सर्दियां आमतौर पर इतनी ठंडी होती हैं कि वहां गर्मी से मौतें कम होती हैं। इसलिए सर्दियों में सामान्य से थोड़ा ज्यादा तापमान होने पर भी मौतों के आंकड़े में बहुत बड़ा बदलाव नहीं आता।

    वहीं दक्षिण भारत की स्थिति अलग है। वहां सर्दियों में भी तापमान इतना ज्यादा रहता है कि गर्मी से मौतें हो सकती हैं। ऐसे में सामान्य से ज्यादा तापमान होने पर मौतों का आंकड़ा तेजी से बढ़ सकता है। इसी वजह से इस सर्दी में भारत के दुनिया में गर्मी से होने वाली अनुमानित मौतों के मामले में चौथे स्थान पर रहने का अनुमान है।

    ग्रोवर-कोपेक ने कहा कि फरवरी तक के छह महीने के पूर्वानुमान के बाद भी भारत और पाकिस्तान में गर्मी से होने वाली मौतें बढ़ती रह सकती हैं। अगर असामान्य रूप से गर्म मौसम बना रहता है और गर्मियों की गर्मी भी जुड़ जाती है तो खतरा और बढ़ सकता है।

    CIL का कहना है कि चूंकि इन मौतों का अनुमान कई महीने पहले लगाया जा सकता है। इसलिए सरकारों और राहत संगठनों के पास तैयारी करने का समय है। हीट अलर्ट सिस्टम, कूलिंग सेंटर, पानी की व्यवस्था, कामगारों के लिए सुरक्षा उपाय और स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाकर लोगों को बचाने की कोशिश की जा सकती है।

    रिपोर्ट के लेखकों ने मौजूदा गर्म मौसम को ‘postcard from the future (भविष्य की एक झलक)’ बताया है। उनका कहना है कि लंबे समय में जलवायु परिवर्तन से होने वाले असर के मुकाबले पहले से चेतावनी मिलने का यह समय भारत और दूसरे प्रभावित देशों को मौतों से पहले कदम उठाने का मौका देता है।

    अल नीनो के और मजबूत होने का खतरा, अगस्त में धरती फिर 1.5°C से ज्यादा गर्म; 2026-27 में कैसा रहेगा दुनिया का मौसम?

    धरती का तापमान एक बार फिर उस स्तर तक पहुंच गया है जिसे लेकर वैज्ञानिक लंबे समय से चेतावनी देते रहे हैं। अगस्त 2026 में दुनिया का औसत सतही तापमान औद्योगिक युग से पहले के स्तर यानी 1850-1900 के औसत से 1.65°C ज्यादा रहा। यह नवंबर 2025 के बाद पहला महीना है जब वैश्विक तापमान इस महीने के स्तर पर 1.5°C से ऊपर गया।

  • योगी सरकार की पहल से ग्रामीण महिलाओं के स्थानीय उत्पादों को मिल रहा अंतरराष्ट्रीय बाजार

    योगी सरकार की पहल से ग्रामीण महिलाओं के स्थानीय उत्पादों को मिल रहा अंतरराष्ट्रीय बाजार

    आगरा

    ग्रेटर नोएडा में 25 से 29 सितंबर तक आयोजित होने जा रहे यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो (यूपीआईटीएस) 2026 में इस बार ब्रज क्षेत्र की महिलाओं के हुनर का डंका विश्व स्तर पर बजेगा। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार 'लोकल फॉर वोकल' और 'लोकल टू ग्लोबल' के विजन को धरातल पर उतारते हुए ग्रामीण अंचल की महिलाओं को आत्मनिर्भरता की नई उड़ान दे रही है। इसी कड़ी में उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत ब्रज क्षेत्र में गठित स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) की 'दीदियां' इस ट्रेड शो में हिस्सा लेंगी। यहां उनके द्वारा तैयार किए गए उत्कृष्ट उत्पादों का शानदार प्रदर्शन और विपणन किया जाएगा, जिससे उनके व्यवसाय को एक बड़ा अंतरराष्ट्रीय बाजार मिल सकेगा।

    ब्रज के शानदार उत्पादों की होगी प्रदर्शनी

    यूपीआईटीएस में आगरा मंडल से स्वयं सहायता समूहों द्वारा तैयार किए गए उत्पादों की व्यापक प्रदर्शनी लगाई जाएगी। मेले में आने वाले देशी- विदेशी खरीदार और निवेशक फिरोजाबाद जनपद की महिलाओं द्वारा बनाए गए कांच के मनमोहक सजावटी उत्पाद देख सकेंगे। इसके साथ ही मथुरा जनपद की महिलाओं द्वारा तैयार किए गए मिट्टी के खूबसूरत बर्तन, तुलसी गमला और फ्लावर पॉट भी आकर्षण का केंद्र रहेंगे। वहीं मैनपुरी जनपद के समूहों द्वारा निर्मित आकर्षक आर्टिफिशियल ज्वेलरी, टेडीबियर और जूट बैग आदि उत्पादों का स्टॉल भी लगेगा, जहां से इनकी बिक्री कर ग्रामीण महिलाएं सीधे मुनाफा कमा सकेंगी।

    आजीविका मिशन की योजनाओं का होगा प्रचार- प्रसार

    इस अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेले में केवल उत्पादों की बिक्री ही नहीं होगी, बल्कि उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत चल रही विभिन्न लाभकारी योजनाओं की भी जानकारी प्रदान की जाएगी। ट्रेड शो के माध्यम से समूह गठन की प्रक्रिया, टेक होम राशन, बीसी सखी और विद्युत सखी जैसी महिला सशक्तिकरण की योजनाओं के बारे में आगंतुकों को जागरूक किया जाएगा। इस आयोजन में आगरा जनपद से खेरागढ़ तहसील के सैंया ब्लॉक स्थित ग्राम पंचायत ब्रिथला की बीसी सखी ममता भी पूरे उत्साह के साथ प्रतिभाग कर रही हैं, जो ग्रामीण बैंकिंग में महिलाओं की सशक्त भूमिका को प्रदर्शित करेंगी।

    ग्लोबल मंच मिलने से उत्साहित हैं ब्रज की 'दीदियां'

    अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिल रहे इस अवसर को लेकर महिलाओं में भारी उत्साह है। मैनपुरी के लक्ष्मी स्वयं सहायता समूह की रीना ने कहा कि हम गांव में बैठकर आर्टिफिशियल ज्वेलरी, टेडीबियर और जूट बैग बनाते हैं। योगी सरकार की बदौलत आज हमारे हाथ का काम इतने बड़े इंटरनेशनल मंच पर पहुंच रहा है, यह हम ग्रामीण महिलाओं के लिए बहुत गर्व की बात है। वहीं फिरोजाबाद के एकता स्वयं सहायता समूह की शान्ति देवी ने बताया कि हमने अपने हाथों से कांच के जो सजावटी उत्पाद बनाए हैं, उन्हें ग्लोबल पहचान मिलेगी। हमारी मेहनत देश- विदेश के लोग देखेंगे, जिससे हमारी आमदनी तो बढ़ेगी ही, समूह की अन्य महिलाओं का हौसला भी कई गुना बढ़ जाएगा।

    महिलाओं को स्वावलंबी बनाने की सरकार की बड़ी पहल

    इस पूरे आयोजन को लेकर आगरा के उपायुक्त (स्वत: रोजगार) प्रेम चंद ने बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार की पहल पर यूपीआईटीएस महिलाओं को आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनाने का एक बहुत ही सशक्त माध्यम बन रहा है। ब्रज की दीदियों के उत्पादों को ग्लोबल मार्केट मिलने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था सुदृढ़ होगी और इन ग्रामीण महिलाओं की आय में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। यह ट्रेड शो उनके लिए एक मील का पत्थर साबित होगा।

  • सुकमा वन क्षेत्र में बाघ की मौजूदगी के संकेत, ग्रामीणों को सतर्क रहने की अपील

    सुकमा वन क्षेत्र में बाघ की मौजूदगी के संकेत, ग्रामीणों को सतर्क रहने की अपील

    रायपुर

    सुकमा वनमंडल के सुकमा वन परिक्षेत्र में मवेशी के मारे जाने के बाद बाघ की संभावित मौजूदगी के संकेत मिले हैं। सूचना मिलते ही वन विभाग और पुलिस की टीम मौके पर पहुंची तथा पशु चिकित्सकों की टीम ने भी घटनास्थल का निरीक्षण किया। मौके से बाघ के संभावित पगमार्क मिले हैं। उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर वन विभाग ने क्षेत्र में बाघ की संभावित आवाजाही की निगरानी तेज कर दी है। डीएफओ श्री अक्षय भोंसले के नेतृत्व में  संभावित आवागमन वाले क्षेत्रों का वन विभाग के अमले द्वारा निरीक्षण किया जा रहा है।

       कोयाबेकुर, नीलावरम, फूलबगड़ी और केरलपाल पंचायत सहित आसपास के वन क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरती जा रही है। राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण की निर्धारित SOP के अनुरूप निगरानी और आवश्यक कार्रवाई की जा रही है। संभावित प्रभावित क्षेत्रों में वन विभाग की टीमें तैनात की गई हैं, मुनादी कर ग्रामीणों को सतर्क किया जा रहा है और कैमरा ट्रैप लगाए गए हैं, ताकि बाघ की गतिविधियों की पुष्टि एवं निगरानी की जा सके। पुलिस और जिला प्रशासन के सहयोग से सुरक्षा व्यवस्था भी बढ़ाई गई है।

        वन विभाग ने ग्रामीणों से शाम 4 बजे के बाद जंगल में जाने से बचने और आवश्यकता होने पर समूह में ही जाने की अपील की है। बाघ दिखाई देने पर उसके पास जाने, पीछा करने, भीड़ लगाने, उसे भगाने या स्वयं पकड़ने का प्रयास न करने की सलाह दी गई है। बाघ की संभावित गतिविधि अथवा किसी संदिग्ध घटना की जानकारी तत्काल वन विभाग को देने को कहा गया है। साथ ही अपुष्ट फोटो, वीडियो या सूचनाओं को सोशल मीडिया पर प्रसारित न करने तथा केवल वन विभाग और प्रशासन की आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करने की अपील की गई है।

       वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि मवेशी की मौत बाघ के हमले से होने की पुष्टि होने पर शासन के प्रचलित नियमों के अनुसार पात्र पशुपालक को उचित मुआवजा दिया जाएगा। बाघ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची-प् में संरक्षित वन्यजीव है और इसके शिकार, हत्या या शिकार के प्रयास पर कठोर दंड का प्रावधान है, जिसमें अधिकतम 7 वर्ष तक का कारावास और जुर्माना शामिल है। विभाग ने ग्रामीणों से घबराने के बजाय सतर्क रहने, अफवाहों से बचने और इस संबंध में किसी भी सूचना को तत्काल वन विभाग के साथ साझा करने की अपील की है

  • वरुण विहार और नैमिष नगर योजना के किसानों ने सराहा मुआवजा प्रक्रिया को, बोले- पारदर्शिता से मिली धनराशि

    वरुण विहार और नैमिष नगर योजना के किसानों ने सराहा मुआवजा प्रक्रिया को, बोले- पारदर्शिता से मिली धनराशि

    लखनऊ

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गुरुवार को लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) की वरुण विहार एवं नैमिष नगर योजना के भूमि पूजन कार्यक्रम में शामिल हुए। इस दौरान योजना के लिए भूमि देने वाले किसानों और लाभार्थी परिवारों ने योगी सरकार की कार्यप्रणाली की सराहना की। किसानों ने एक स्वर में कहा कि उन्हें उनकी भूमि का मुआवजा पारदर्शी तरीके से मिला और प्राप्त धनराशि से उन्होंने दूसरी जगह जमीन खरीदने, मकान बनाने तथा बच्चों की पढ़ाई के लिए निवेश किया है। 

    रामदेई ने सीएम योगी का जताया आभार

    ग्राम दोना के मुलेश्वर सिंह ने बताया कि वरुण विहार योजना के अंतर्गत उनकी जमीन ली गई है, जिसे उन्होंने अपनी सर्वसम्मति से दिया है। मुआवजे के रूप में मिली राशि से उन्होंने अलग-अलग स्थानों पर जमीन खरीदी है। ग्राम रेवरी की रामदेई ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आभार जताते हुए कहा कि उनकी जमीन योजना में गई और उन्हें अच्छा मुआवजा मिला। उन्होंने मुख्यमंत्री को धन्यवाद देते हुए सरकार के प्रति अपनी प्रसन्नता व्यक्त की।

    एक हेक्टेयर जमीन के बदले कमलेश को मिले 2.80 करोड़ रुपये

    ग्राम दोना के किसान कमलेश कुमार ने बताया कि उन्होंने वरुण विहार योजना के अंतर्गत अपनी एक हेक्टेयर जमीन सहमति से एलडीए को दी है। इसके बदले 2 करोड़ 80 लाख रुपये का मुआवजा मिला है। उन्होंने बताया कि इस धनराशि से उन्होंने उन्नाव जिले में जमीन खरीदी और अपना मकान बनवाया। कमलेश कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री की इस योजना से उनके क्षेत्र और गांव का भी विकास हो रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री को इसके लिए धन्यवाद दिया।

    नैमिष नगर के किसानों ने भी मुआवजा प्रक्रिया को बताया पारदर्शी

    बख्शी का तालाब निवासी सुषमा सिंह ने बताया कि कमलाबाद स्थित उनकी जमीन नैमिष नगर योजना के अंतर्गत एलडीए को दी गई। उन्होंने कहा कि उन्हें 2 करोड़ 90 लाख रुपये का मुआवजा पारदर्शिता के साथ प्राप्त हुआ है। इसके लिए उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आभार व्यक्त किया। 

    नमरा फातिमा को बिना कठिनाई के मिला मुआवजा

    नमरा फातिमा ने हाल ही में 12वीं कक्षा पास की है और नीट की तैयारी कर रही हैं। उन्होंने बताया कि नैमिष नगर में ग्राम सैदापुर स्थित उनकी जमीन एलडीए को दी गई। उन्हें 70 लाख 58 हजार रुपये एकमुश्त डीडी के माध्यम से प्राप्त हुए हैं। नमरा फातिमा ने बताया कि बिना किसी कठिनाई के मिली इस राशि से उन्होंने जमीन खरीदी है और भविष्य में यह धनराशि उनकी मेडिकल की पढ़ाई में काम आएगी। उन्होंने कहा कि इस योजना से क्षेत्र में रोजगार और आवासीय सुविधाओं का विस्तार होगा तथा क्षेत्र के विकास को गति मिलेगी। 

    ओम प्रकाश अवस्थी ने मुआवजे से खरीदी 16 बीघे जमीन

    बक्शी का तालाब के ओम प्रकाश अवस्थी ने नैमिष नगर योजना के तहत अपनी करीब डेढ़ बीघे से अधिक जमीन दी है, जिसके बदले उन्हें 1 करोड़ 96 लाख रुपये मिले हैं। उन्होंने कहा कि मुआवजा प्राप्त करने की प्रक्रिया में उन्हें बार-बार कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़े। ओम प्रकाश अवस्थी ने कहा कि संकल्प पत्र भरने के करीब 15 दिन बाद उन्हें फोन कर रजिस्ट्री के लिए बुलाया गया और इसके बाद डीडी के माध्यम से राशि प्राप्त हुई। अगले दिन पैसा उनके बैंक खाते में पहुंच गया। उन्होंने बताया कि मुआवजे से उन्होंने सीतापुर के बिसवां रोड पर 16 बीघे जमीन खरीदी है, बाकी पैसे को बैंक में जमा कर दिया है।

    उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार की प्रक्रिया से उन्हें अपनी जमीन का बेहतर उपयोग करने का अवसर मिला। उन्होंने मुख्यमंत्री को धन्यवाद और आभार जताया।

  • विज्ञान मेले में विज्ञान, नवाचार और पारंपरिक हुनर का संगम

    विज्ञान मेले में विज्ञान, नवाचार और पारंपरिक हुनर का संगम

    भोपाल 

    13वें भोपाल विज्ञान मेले में आधुनिक विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के नवाचारों के साथ प्रदेश की पारंपरिक कला, ग्रामीण तकनीक, हस्तशिल्प, कृषि नवाचार और स्थानीय संसाधनों पर आधारित आजीविका मॉडल एक ही मंच पर प्रदर्शित किए जा रहे हैं। मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद द्वारा विज्ञान भारती एवं बरकतउल्ला विश्वविद्यालय के सहयोग से 22 से 26 सितंबर तक बरकतउल्ला विश्वविद्यालय मैदान, भोपाल में आयोजित मेले में रूरल टेक्नोलॉजी पेवेलियन विशेष आकर्षण का केन्द्र बना हुआ है। यहां कारीगरों, किसानों, महिला समूहों, नवाचारियों, शैक्षणिक संस्थानों और गैर-सरकारी संगठनों द्वारा विकसित तकनीकों एवं उत्पादों का प्रदर्शन किया जा रहा है।

    विद्यार्थियों को प्रेरित कर रहे नवाचार

    डिंडौरी जिले के शहपुरा निवासी श्री शिवम साहू द्वारा विकसित ‘हैक दि रोबो’ ह्यूमनॉइड रोबोट विद्यार्थियों के लिए विशेष आकर्षण है। यह हिंदी, अंग्रेजी सहित विभिन्न भाषाओं में बातचीत करने में सक्षम है। इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित संवाद, कंप्यूटर विजन, चेहरा पहचानने, दृश्य समझने और ऑब्जेक्ट पहचानने जैसी क्षमताएं प्रदर्शित की जा रही हैं।

    रायसेन की विज्ञान लोकप्रियकरण एवं सामाजिक शोध संस्था द्वारा केप्लर के गति नियमों पर आधारित मॉडल प्रदर्शित किए गए हैं। इनके माध्यम से विद्यार्थियों को ग्रहों की गति और कक्षाओं से जुड़े वैज्ञानिक सिद्धांत प्रयोगात्मक तरीके से समझाए जा रहे हैं।

    भिंड के युवा नवाचारी श्री दीपक वर्मा द्वारा वर्ष 2022 में विकसित ‘सेफ विजन डिस्टेंस सेंसर’ भी प्रदर्शित किया गया है। मोबाइल फोन के अत्यधिक उपयोग से आंखों पर पड़ने वाले प्रभाव को ध्यान में रखते हुए विकसित इस नवाचार को वर्ष 2024 में दिल्ली में आयोजित 11वें नेशनल लेवल एक्जीविशन एण्ड कॉम्पिटीशन में प्रथम स्थान प्राप्त हुआ। राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल एवं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा दीपक वर्मा को सम्मानित किया गया। वर्ष 2025 की 52वीं राष्ट्रीय बाल वैज्ञानिक प्रदर्शनी में भी उनके नवाचार को सराहना मिली।

    कृषि और डेयरी के लिए तकनीकी समाधान

    मौलाना आजाद राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, भोपाल के डॉ. राहुल एम. श्रीवास्तव एवं डॉ. मोहम्मद यासिर द्वारा विकसित ‘डेयरीशील्ड प्रो’ कम लागत वाला सैनिटाइजेशन उपकरण है। इसे डेयरी फार्मों में स्वच्छता और बेहतर वातावरण के उद्देश्य से विकसित किया गया है।

    हैंड्स अराउंड नेचर एण्ड सोसायटी (हैंस) द्वारा सेंसर आधारित मृदा परीक्षण किट और माइक्रो-वेदर स्टेशन के माध्यम से प्रिसिजन फार्मिंग को बढ़ावा दिया जा रहा है। इन तकनीकों से किसान मृदा, मौसम, सिंचाई, उर्वरक और फसल प्रबंधन से जुड़े निर्णय वैज्ञानिक जानकारी के आधार पर ले सकते हैं। संस्था द्वारा मुरैना और सतना जिले के विभिन्न गांवों में किसानों के साथ कृषि आधारित गतिविधियां संचालित की जा रही हैं।

    मैकेनिकल वोटिंग मशीन का प्रदर्शन

    राजगढ़ जिले के पचोर निवासी 75 वर्षीय श्री रामप्रसाद विश्वकर्मा द्वारा विकसित प्योर मैकेनिकल वोटिंग मशीन (एमवीएम) का मेले में लाइव प्रदर्शन किया जा रहा है। आविष्कारक के अनुसार करीब 14 वर्षों के शोध, डिजाइन एवं प्रयोग के बाद इसका प्रोटोटाइप तैयार हुआ। वर्ष 2024 में भारत सरकार के पेटेंट कार्यालय से इसे पेटेंट प्राप्त हुआ। वर्तमान में यह प्रोटोटाइप एवं प्रदर्शन स्तर पर है।

    भोपाल की रेवा एसोसिएट्स द्वारा विकसित स्वयं-सफाई वाली पानी की टंकी भी प्रदर्शित की गई है। इसके ढलानदार निचले हिस्से और ड्रेन वाल्व के माध्यम से पानी के साथ तलछट को बाहर निकालने की व्यवस्था की गई है। बालाघाट में लाख प्रसंस्करण से निकलने वाले अपशिष्ट से ‘भूमिप्लस टी-4’ जैविक मृदा सुधारक विकसित किया गया है। परियोजना को मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद से तकनीकी सहयोग प्राप्त हुआ है।

    कबाड़ से जुगाड़ और प्रयोग आधारित शिक्षा

    सेवानिवृत्त श्री देवेन्द्र प्रकाश तिवारी कबाड़, धातु, प्लास्टिक और ई-वेस्ट से तकनीकी उपकरणों, वाहनों, वाद्य यंत्रों और अंतरिक्ष विज्ञान से जुड़े मिनिएचर मॉडल तैयार करते हैं। वर्ष 2024 में ‘कबाड़ से जुगाड़ प्रतियोगिता’ में उन्हें प्रथम पुरस्कार प्राप्त हुआ था।

    एसटीईएम लर्निंग सोसायटी द्वारा स्थानीय सामग्री से कम लागत वाली हैंड्स-ऑन लर्निंग आधारित एसटीईएम एवं गणितीय शिक्षण सामग्री प्रदर्शित की गई है। गतिविधि आधारित मॉडल और एसटीईएम/टीएलएम किट्स के माध्यम से विद्यार्थियों को प्रयोग के जरिए सीखने का अवसर दिया जा रहा है। पहल का मूल विचार है—‘प्रयोगशाला बच्चे तक नहीं, प्रयोग बच्चे के हाथ तक पहुंचे।’

    पारंपरिक शिल्प और स्थानीय संसाधनों को मंच

    आशा–एड एंड सर्वाइवल ऑफ हैंडीक्राफ्ट आर्टिसंस द्वारा सतपुड़ा अंचल की छीपा हाथ ठप्पा छपाई कला के संरक्षण और संवर्धन का कार्य किया जा रहा है। शिवपुरी के बदरवास की महिलाओं द्वारा खादी, ऊनी एवं सूती कपड़ों से पारंपरिक परिधान और हस्तनिर्मित उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं।

    भोपाल के शिल्पकार श्री लखन कुमार प्रजापति द्वारा मिट्टी से 150 से अधिक प्रकार की कलाकृतियां प्रदर्शित की गई हैं। बुधनी के कारीगर श्री करन शर्मा द्वारा लकड़ी के पारंपरिक खिलौने और श्योपुर के वरिष्ठ खराद शिल्पी श्री निसार अहमद द्वारा पारंपरिक खराद कला का प्रदर्शन किया गया है।

    बुरहानपुर में महिलाओं द्वारा केले के तने से रेशा निकालकर उपयोगी एवं हस्तनिर्मित उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। भोपाल की कॉमन विकास जन सेवा समिति द्वारा सिसल फाइबर निकालने की मशीन प्रदर्शित की गई है। इन पहलों में स्थानीय संसाधनों के उपयोग के साथ रोजगार एवं आजीविका के अवसर विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है।

    पर्यावरण संरक्षण और वैज्ञानिक खेती की पहल

    नर्मदा समग्र न्यास द्वारा आईआईटी जोधपुर के सहयोग से अलीराजपुर के दूरस्थ जनजातीय क्षेत्रों के लिए जी-फिल्टर तकनीक प्रदर्शित की गई है। यह कम लागत वाला गुरुत्वाकर्षण आधारित सिरेमिक जल फिल्टर है, जिसके लिए बिजली या बाहरी दबाव की आवश्यकता नहीं होती। स्वानंद गोविज्ञान, सौसर द्वारा गोबर से निर्मित उपयोगी एवं सजावटी उत्पाद भी प्रदर्शित किए गए हैं।

    कृषि विज्ञान केन्द्र, नकतरा, रायसेन द्वारा ऑन-फार्म परीक्षण, किसान प्रशिक्षण, फ्रंटलाइन प्रदर्शन, महिला स्व-सहायता समूहों का मार्गदर्शन और कृषि प्रदर्शनियों सहित विभिन्न गतिविधियों का प्रदर्शन किया गया है। इनके माध्यम से किसानों तक वैज्ञानिक तकनीकों एवं उन्नत कृषि पद्धतियों की जानकारी पहुंचाई जा रही है।

    विज्ञान के नवाचारों से रूबरू हो रहे विद्यार्थी और आमजन

    विज्ञान मेले में आधुनिक विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के साथ पारंपरिक कला, ग्रामीण तकनीक, हस्तशिल्प, कृषि नवाचार और स्थानीय संसाधनों पर आधारित आजीविका मॉडल प्रदर्शित किए जा रहे हैं। विभिन्न स्टॉलों पर विद्यार्थी और आमजन मॉडल, उत्पाद एवं प्रत्यक्ष प्रदर्शनों के माध्यम से नवाचारों की जानकारी प्राप्त कर रहे हैं। मेले का उद्देश्य विज्ञान को आमजन के जीवन से जोड़ने के साथ प्रदेश की स्थानीय प्रतिभाओं, नवाचारों और पारंपरिक ज्ञान को मंच प्रदान करना है।।

     

  • महिला पुलिस कर्मियों के बच्चों की सुविधा के लिए पुलिस पब्लिक स्कूल नेहरू नगर में नवनिर्मित वात्सल्य झूलाघर का शुभारंभ

    महिला पुलिस कर्मियों के बच्चों की सुविधा के लिए पुलिस पब्लिक स्कूल नेहरू नगर में नवनिर्मित वात्सल्य झूलाघर का शुभारंभ

    भोपाल 

    मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा अपने अधिकारियों एवं कर्मचारियों की पारिवारिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए पुलिस पब्लिक स्कूल, नेहरू नगर में महिला पुलिस कर्मियों के छोटे बच्चों की देखभाल के लिए 60 बच्चों की क्षमता वाले नवनिर्मित वात्सल्य झूलाघर (डे-केयर सेंटर) का पुलिस महानिदेशक  कैलाश मकवाणा द्वारा शुभारंभ किया गया। झूलाघर की सुविधा से ड्यूटी के दौरान छोटे बच्चों की देखभाल को लेकर पुलिस अधिकारी-कर्मचारियों को सुविधा एवं राहत मिलेगी।

    इस अवसर पर पुलिस महानिदेशक  कैलाश मकवाणा ने कहा कि पुलिस विभाग में महिला आरक्षक, महिला सब इंस्पेक्टर, डीएसपी सहित विभिन्न रैंक पर महिला अधिकारी एवं कर्मचारी अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रही हैं। वर्तमान समय में पति-पत्नी दोनों के नौकरीपेशा होने की स्थिति भी सामान्य है। पहले संयुक्त परिवार व्यवस्था में दादा-दादी अथवा परिवार के अन्य सदस्य बच्चों की देखभाल कर लेते थे, लेकिन बदलते समय में नौकरी के लिए परिवार से बाहर रहना पड़ता है। ऐसे में छोटे बच्चों की देखभाल एक महत्वपूर्ण आवश्यकता है।

    उन्होंने कहा कि पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों के छोटे बच्चों की उचित देखभाल बहुत जरूरी है, ताकि वे निश्चिंत होकर अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर सकें। पुलिस सेवा की प्रकृति ऐसी है कि कई बार लंबी अवधि तक ड्यूटी करनी पड़ती है, देर रात तक ड्यूटी रहती है तथा त्योहारों के अवसर पर भी पुलिसकर्मियों को अपने दायित्वों का निर्वहन करना पड़ता है। ऐसी परिस्थितियों में झूलाघर जैसी सुविधा बच्चों की देखभाल सुनिश्चित करने के साथ ही पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों को अपनी ड्यूटी पर बेहतर ढंग से ध्यान केंद्रित करने में सहयोग करेगी। पुलिस महानिदेशक ने कहा कि बच्चों की देखभाल की समुचित व्यवस्था पुलिस परिवारों के लिए महत्वपूर्ण सुविधा है। इससे विशेष रूप से महिला पुलिस अधिकारी एवं कर्मचारी अपनी पारिवारिक जिम्मेदारियों और व्यावसायिक दायित्वों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर सकेंगी।

    झूलाघर के शुभारंभ अवसर पर विशेष पुलिस महानिदेशक  अनिल कुमार, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक  जयदीप प्रसाद, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक  डी. निवास वर्मा, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक  सोलोमन यश कुमार मिंज, भोपाल पुलिस आयुक्त  संजय कुमार, अतिरिक्त पुलिस आयुक्त  मोनिका शुक्ला, पीएसओ टू डीजीपी डॉ. विनीत कपूर, अतिरिक्त पुलिस आयुक्त  शैलेन्द्र सिंह चौहान सहित वरिष्ठ पुलिस अधिकारी उपस्थित रहे।

    इसी अवसर पर पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों के परिवारों के लिए गरबा कार्यक्रम के आयोजन को लेकर बैठक भी आयोजित की गई, जिसमें कार्यक्रम की तैयारियों एवं अन्य व्यवस्थाओं के संबंध में चर्चा की गई।

     

     

  • मिनीमाता महतारी जतन योजना: रेजा मजदूरी से बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की राह पर सुनीता

    मिनीमाता महतारी जतन योजना: रेजा मजदूरी से बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की राह पर सुनीता

    ​रायपुर

     दैनिक मजदूरी के बूते परिवार चला रही एक माँ के लिए बच्चों के बेहतर कल का सपना देखना आसान नहीं होता। सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के ग्राम उच्च मिट्ठी की निवासी सुनीता साहू के लिए भी हर दिन का संघर्ष यही था—सीमित आय में बच्चों की देखभाल और पोषण की चिंता। लेकिन छत्तीसगढ़ सरकार की 'मिनीमाता महतारी जतन योजना' ने इस श्रमिक परिवार की चिंता को एक नए आत्मविश्वास और उम्मीद में बदल दिया है।

    ​मेहनत-मजदूरी के बीच पोषण और देखभाल की चुनौती

     सुनीता साहू पेशे से रेजा मजदूर हैं। रोज़ कुदाल-तगाड़ी उठाकर पसीना बहाने के बाद मिलने वाली दिहाड़ी से ही उनके घर का चूल्हा जलता था। सीमित संसाधनों के बीच बच्चों के उचित खान-पान, कपड़ों और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी जरूरतों को पूरा करना उनके लिए हमेशा एक बड़ी आर्थिक चुनौती बनी रहती थी।

    ​20 हजार रुपए की सहायता से मिला संबल

     श्रम विभाग की 'मिनीमाता महतारी जतन योजना' सुनीता के जीवन में एक बड़ा संबल बनकर आई। योजना के तहत उनके बैंक खाते में सीधे 20 हजार रुपए की सहायता राशि हस्तांतरित की गई। यह राशि सिर्फ एक वित्तीय मदद नहीं, बल्कि संकट के समय में उस माँ के हाथों को मिला वह सहारा थी, जिससे उन्होंने अपने बच्चों के पोषण और दैनिक देखभाल से जुड़ी आवश्यकताओं को बिना किसी तनाव के पूरा किया।

    ​चिंता से आगे, भरोसे का सफर

    सुनीता बताती हैं कि एक श्रमिक परिवार के लिए कठिन समय में मिली यह सीधी सहायता कितनी मायने रखती है। अब वे अपने बच्चों का पालन-पोषण पहले से कहीं अधिक बेहतर और आत्मविश्वासपूर्ण तरीके से कर पा रही हैं। शासन की इस योजना ने उन्हें यह भरोसा दिया है कि आर्थिक अभाव अब उनके बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की राह में बाधा नहीं बनेगा।​मिनीमाता महतारी जतन योजना ने सुनीता जैसे हजारों श्रमिक परिवारों के दैनिक संघर्षों को कम कर उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने और उनके बच्चों के कल को संवारने का सशक्त कार्य किया है।

  • रीवा से अपहृत ढाई वर्षीय मासूम बालिका 6 घंटे में सीधी से सकुशल दस्तयाब

    रीवा से अपहृत ढाई वर्षीय मासूम बालिका 6 घंटे में सीधी से सकुशल दस्तयाब

    भोपाल

    रीवा में ढाई वर्षीय मासूम बालिका के अपहरण की सूचना मिलते ही मध्यप्रदेश पुलिस ने संवेदनशीलता और तत्परता के साथ कार्रवाई करते हुए महज 6 घंटे के भीतर करीब 100 किलोमीटर दूर सीधी जिले के एक दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्र से बालिका को सकुशल दस्तयाब कर लिया। पुलिस टीम ने बालिका को सुरक्षित उसके परिजनों को सौंपते हुए अपहरण की घटना में शामिल 4 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। मासूम की सकुशल वापसी के लिए पुलिस टीम ने रात में ही लगातार सर्चिंग, घेराबंदी और समन्वित कार्रवाई करते हुए अभियान चलाया।

    सूचना मिलते ही सक्रिय हुआ पुलिस तंत्र

    23 सितम्बर रात्रि करीब 8:30 बजे बालिका के परिजन द्वारा थाना समान में रिपोर्ट दर्ज कराई गई कि उनकी ढाई वर्षीय बालिका घर पर नहीं है तथा आसपास संभावित स्थानों पर तलाश के बाद भी उसका पता नहीं चल सका। मामले की गंभीरता को देखते हुए थाना समान में अपराध पंजीबद्ध कर तत्काल पुलिस टीम सक्रिय की गई। पुलिस द्वारा मुखबिर तंत्र को सक्रिय करने के साथ ही सीसीटीवी फुटेज का बारीकी से विश्लेषण किया गया। तकनीकी एवं मैदानी स्तर पर प्राप्त सुरागों के आधार पर संदिग्धों की पहचान की गई। पूछताछ में सामने आया कि बालिका को आंगनवाड़ी केंद्र से बोरी में रखकर दोपहिया वाहन से सीधी जिले की ओर ले जाया गया था।

    रातभर चला सर्च ऑपरेशन, सीधी से सकुशल मिली मासूम

    घटना की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में थाना समान की टीम ने तत्काल कार्रवाई शुरू की। पुलिस टीम ने रीवा से करीब 100 किलोमीटर दूर सीधी जिले के शिकारगंज के आगे स्थित दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्र तक पहुंचकर लगातार तलाशी और घेराबंदी की। रात में चलाए गए इस सर्च ऑपरेशन के दौरान पुलिस ने बालिका को सकुशल दस्तयाब कर लिया। बालिका को सुरक्षित रीवा लाकर परिजनों के सुपुर्द किया गया। वहीं पुलिस ने घटना में शामिल 4 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, जिनसे घटना के संबंध में पूछताछ की जा रही है। मध्यप्रदेश पुलिस की यह कार्रवाई मासूम बालिका की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए सूचना मिलते ही त्वरित पुलिस रिस्पॉन्स, तकनीकी साक्ष्यों के उपयोग, मैदानी स्तर पर सतत प्रयास और टीमवर्क का उदाहरण है।

     

  • भोपाल में राजनीतिक दलों की मौजूदगी में खुला EVM गोदाम, कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने जांची सुरक्षा व्यवस्था

    भोपाल में राजनीतिक दलों की मौजूदगी में खुला EVM गोदाम, कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने जांची सुरक्षा व्यवस्था

     भोपाल

     ईवीएम गोदाम का कलेक्टर व जिला निर्वाचन अधिकारी प्रियंक मिश्रा ने गुरुवार को निरीक्षण कर सुरक्षा और व्यवस्थाएं देखीं। राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में उन्होंने भारत निर्वाचन आयोग की मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के पालन की समीक्षा की।

    इस दौरान गोदाम की त्रिस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था, सीसीटीवी सर्विलांस, सीलिंग प्रक्रिया और ईवीएम के सुरक्षित रखरखाव की बारीकी से जांच की गई।
    सुरक्षा प्रोटोकाल का पालन करने के दिए निर्देश

    कलेक्टर ने अधिकारियों को सुरक्षा प्रोटोकाल और आयोग के दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों से संवाद करते हुए कहा कि ईवीएम की सुरक्षा और निर्वाचन प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए सभी निर्धारित व्यवस्थाओं का पालन किया जा रहा है।

    जिला प्रशासन स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी निर्वाचन कराने के लिए प्रतिबद्ध है।

     

  • बारिश के बीच CM योगी का जनता दर्शन, करीब 200 फरियादियों की सुनी समस्याएं

    बारिश के बीच CM योगी का जनता दर्शन, करीब 200 फरियादियों की सुनी समस्याएं

    लखनऊ
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार सुबह बारिश होने के बावजूद ‘जनता दर्शन’ किया। दूरदराज से आए लोगों से फरियादियों से गोरखनाथ मंदिर में मुलाकात कर सीएम योगी ने उन्हें कार्रवाई का भरोसा दिलाया। जमीन कब्जे की शिकायत पर सीएम योगी ने सख्ती दिखाई। उन्होंने तुरंत अधिकारियों को निर्देशित किया कि जमीन कब्जामुक्त कराने के साथ जबरन कब्जा करने वालों को कड़ा कानूनी सबक सिखाया जाए।

    बारिश की वजह से मुख्यमंत्री के निर्देश पर लोगों की सुविधा के लिए जनता दर्शन का आयोजन गोरखनाथ मंदिर परिसर के महंत दिग्विजयनाथ स्मृति भवन सभागार में किया गया। इस दौरान सीएम योगी ने करीब 200 लोगों की समस्याएं सुनीं और अधिकारियों को उनका समाधान करने का निर्देश दिया। कुर्सियों पर बैठाए गए लोगों तक पहुंचकर मुख्यमंत्री ने उनकी पीड़ा जानी और आश्वस्त किया कि सभी की समस्याओं का समाधान सुनिश्चित किया जाएगा। जनता दर्शन में मुख्यमंत्री ने वहां मौजूद अधिकारियों को निर्देशित किया कि हर पीड़ित व्यक्ति की समस्या पर संवेदनशीलता से ध्यान दें और तत्परता से उसका समयबद्ध व पारदर्शी निस्तारण कराएं।

    इलाज के लिए मिलेगी पर्याप्त राशि
    जनता दर्शन में शिकायत लेकर पहुंचीं कुछ महिलाओं ने उनकी जमीन जबरन कब्जा कर लिए जाने की शिकायत की। इस पर मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि यदि किसी दबंग ने किसी गरीब की जमीन हड़पी है तो उसके खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए। जमीन अवैध याया जबरन कब्जे से मुक्त होनी चाहिए। हर बार की तरह जनता दर्शन में कुछ लोग गंभीर बीमारियों के इलाज में आर्थिक मदद की गुहार लेकर पहुंचे थे। ऐसे मामलों में सीएम योगी ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि इलाज में अस्पताल के एस्टीमेट की प्रक्रिया को जल्द पूर्ण कराकर शासन में भेजें। मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से इलाज के लिए पर्याप्त राशि दी जाएगी।

    लखनऊ के विस्तार को मिलेगी गति
    वहीं दूसरी ओर सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा, लखनऊ के नियोजित विस्तार और नागरिकों के अपने स्थायी घर के सपने को साकार करने की दिशा में गुरुवार को एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। सीएम ने एक्स पर लिखा, 10,680 एकड़ क्षेत्रफल में 12,000 करोड़ रुपये की लागत से विकसित की जा रही वरुण विहार और नैमिष नगर आवासीय योजनाओं का शिलान्यास किया जाएगा। इसके साथ ही इन योजनाओं के तहत भूखंडों के पंजीकरण का शुभारंभ भी होगा। इस अवसर पर 2,166 करोड़ रुपये की लागत से प्रस्तावित पांच बहुमंजिला आवासीय परियोजनाओं की आधारशिला भी रखी जाएगी। योगी आदित्यनाथ ने कहा कि विकसित शहर, सुविधाजनक जीवन और सुरक्षित आवास 'नए उत्तर प्रदेश' में 'नए लखनऊ' की पहचान बन रहे हैं। सरकार का उद्देश्य राजधानी के नियोजित विस्तार के साथ नागरिकों को बेहतर आवासीय सुविधाएं उपलब्ध कराना और उनके अपने स्थायी घर के सपने को साकार करने की दिशा में काम करना है। मुख्यमंत्री के अनुसार, वरुण विहार और नैमिष नगर योजनाओं के विकास तथा प्रस्तावित बहुमंजिला आवासीय परियोजनाओं से लखनऊ के विस्तार को नई दिशा मिलेगी। इन पहलों को राजधानी में आवासीय सुविधाओं के विस्तार और नियोजित शहरी विकास से जोड़कर देखा जा रहा है।