Author: Admin

  • पितृ पक्ष में इन 4 कामों से करें परहेज, श्राद्ध-तर्पण के बाद जरूर रखें सावधानी

    पितृ पक्ष में इन 4 कामों से करें परहेज, श्राद्ध-तर्पण के बाद जरूर रखें सावधानी

     इस बार पितृ पक्ष की शुरुआत 27 सितंबर, रविवार से होने जा रही है और समापन 10 अक्टूबर, शनिवार के दिन होगा. हिंदू धर्म में पितृ पक्ष (श्राद्ध पक्ष) का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है. भाद्रपद पूर्णिमा से शुरू होकर आश्विन अमावस्या (सर्वपितृ अमावस्या) तक चलने वाले इन 16 दिनों में पूर्वजों (पितरों) की आत्मा की शांति, तृप्ति और आशीर्वाद प्राप्ति के लिए पिंड दान, तर्पण और श्राद्ध कर्म किए जाते हैं.

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पितृ पक्ष के दौरान हमारे पूर्वज अदृश्य रूप में धरती पर आते हैं और परिजनों द्वारा दिए गए जल व अन्न को स्वीकार करते हैं. हालांकि, कई बार लोग विधि-विधान से पूजा और श्राद्ध तो कर लेते हैं, लेकिन उसके बाद कुछ अनजानी गलतियां कर बैठते हैं. ज्योतिष और शास्त्र नियमों के अनुसार, तर्पण या श्राद्ध पूजा के तुरंत बाद की गई 4 गलतियां आपकी पूरी पूजा का फल निष्फल कर सकती हैं और पितृ दोष का कारण बन सकती हैं. आइए जानते हैं कि पितरों की पूजा के बाद किन 4 कामों से सख्त परहेज करना चाहिए.

    तर्पण के तुरंत बाद भोजन करना या भोजन में जल्दबाजी
    श्राद्ध या तर्पण की पूजा संपन्न होने के तुरंत बाद स्वयं भोजन करने बैठ जाना सही नहीं माना जाता है. जब तक ब्राह्मणों को भोजन न करा दिया जाए और पंचबलि (गाय, कुत्ता, कौआ, देव और चींटी) के लिए भोजन का अंश न निकाल दिया जाए, तब तक गृहस्थ को स्वयं भोजन ग्रहण नहीं करना चाहिए. पितरों और पंचबलि को भोजन अर्पण के बाद ही सात्विक भोजन ग्रहण करें.

    लहसुन-प्याज और तामसिक पदार्थों का सेवन
    तर्पण या श्राद्ध कर्म करने के बाद भी पूरे पितृ पक्ष के दौरान घर का माहौल और भोजन सात्विक होना चाहिए. श्राद्ध पूजा के बाद भूलकर भी शराब, मांस-मदिरा या लहसुन-प्याज से युक्त तामसिक भोजन का सेवन न करें. ऐसा करने से पितर रुष्ट हो सकते हैं और घर की सुख-शांति प्रभावित हो सकती है.

    घर में क्लेश, गुस्सा या किसी का अनादर करना
    पितृ पक्ष के दौरान हमारे पूर्वज सूक्ष्म रूप में घर के आसपास ही मौजूद रहते हैं. तर्पण के बाद घर में कटु शब्द बोलना या अशांति फैलाना नकारात्मक ऊर्जा लाता है. श्राद्ध पूजा के बाद विशेष रूप से क्रोध, अहंकार और घर के सदस्यों या बुजुर्गों से वाद-विवाद करने से बचें. इसके अलावा, द्वार पर आए किसी भी गरीब, असहाय व्यक्ति या पशु-पक्षी को डांटकर न भगाएं, उन्हें अन्न-जल जरूर दें.

    बाल-दाढ़ी कटवाना या नए वस्त्र-सामग्री की खरीदारी
    हिंदू परंपरा में पितृ पक्ष को संयम, साधना और पूर्वजों के प्रति आदर व्यक्त करने का समय माना गया है, न कि भौतिक उत्सव या साज-सज्जा का. तर्पण और श्राद्ध पूजा वाले दिन बाल, नाखून या दाढ़ी कटवाने से बचना चाहिए. साथ ही, पूजा के तुरंत बाद नए कपड़े, वाहन या प्रॉपर्टी जैसी भौतिक सुख-सुविधाओं की खरीदारी या किसी नए मांगलिक कार्य की शुरुआत करने से परहेज करें.

    श्राद्ध पूजा का पूर्ण फल पाने का सबसे आसान तरीका
    पितृ पक्ष में तर्पण और पिंडदान के बाद अपने हाथों से गाय को हरा चारा या गुड़-रोटी, कौवे और कुत्ते को भोजन का अंश जरूर दें. कौवे को पितरों का संदेशवाहक माना जाता है, इसलिए उनके माध्यम से पहुंचाया गया अन्न सीधे पूर्वजों तक पहुंचता है. इसके बाद निष्काम भाव से पितरों से परिवार की सुख, शांति और समृद्धि की प्रार्थना करें.

  • Bank Strike: 27 सितंबर को बैंक खुलेंगे या बंद? ग्राहकों में असमंजस

    Bank Strike: 27 सितंबर को बैंक खुलेंगे या बंद? ग्राहकों में असमंजस

     नई दिल्‍ली

    बैंक कर्मचारियों ने 28 सितंबर से देशभर में हड़ताल करने का ऐलान किया है, जो तीन दिन यानी 30 सितंबर तक जारी रहेगा. यह हड़ताल वीकेंड के बाद शुरू हो रहा है, जिस कारण RBI और सरकार की ओर से रविवार को बैंक शाखाएं खोलने के लिए कहा गया है। 

    केंद्र सरकार ने कहा है कि सार्वजनिक क्षेत्र और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक रविवार को खुले रहेंगे, लेकिन बैंक अधिकारियों के एक संघ ने अपने सदस्‍यों से रविवार को काम पर न आने का अनुरोध किया है. ऐसे में कस्‍टमर्स कंफ्यूज हो गए हैं कि क्‍या सच में रविवार को बैंक खुलेंगे या फिर बंद रहेंगें? 

    दरअसल, बैंक यूनियनों के यूनियन फोरम (UFBU) और सात अन्य यूनियनों ने 28 से 30 सितंबर तक तीन दिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल का प्रस्ताव रखा है, जो 11 सितंबर को हुई एक दिवसीय हड़ताल के बाद दूसरी ऐसी कार्रवाई है। 

    किसने लिया रविवार को बैंक खोलने का फैसला? 
    ऐसे में केंद्र सरकार का 27 सितंबर को बैंकों को खुला रखने का निर्णय वित्त मंत्री और पब्लिक सेक्‍टर के बैंकों, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों, भारतीय बैंक संघ (IBA) और नाबार्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों के बीच 21 सितंबर को हुई बैठक के बाद लिया गया। 

    यह कदम बैंकिंग सेवाओं में लंबे समय तक व्यवधान को कम करने के उद्देश्य से उठाया गया है, क्योंकि प्रस्तावित हड़ताल की तारीखें 26 और 27 सितंबर को सप्‍ताह की छुट्टियों के बाद आ रही हैं. अगर रविवार को भी छुट्टी रहती है, तो ग्राहकों को नियमित बैंकिंग सेवाओं तक पहुंच के बिना पांच दिनों तक की अवधि का सामना करना पड़ सकता है। 

    रविवार को लेकर बना हुआ है कंफ्यूजन
    RBI ने 27 सितंबर को बैंक शाखाओं, कार्यालयों, एटीएम से जुड़ी शाखाओं और करेंसी चेस्ट खोलने को भी मंजूरी दे दी है. हालांकि, अनिश्चितता बनी हुई है क्योंकि ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन (AIBOA) ने अपने सदस्यों को रविवार को काम पर न आने की सलाह दी है, यह कहते हुए कि औद्योगिक विवाद अधिनियम के तहत 27 सितंबर एक हॉलिडे है। 

    3 दिन की हड़ताल जारी रहेगी 
    वहीं यूएफबीयू ने दोहराया है कि 28 से 30 सितंबर तक प्रस्तावित तीन दिवसीय हड़ताल जारी रहेगी. यह हड़ताल मुख्य रूप से पांच दिन बैंकिंग सप्ताह की मांग को लेकर बुलाई गई है. अन्य मांगों में पेंशन संबंधी संशोधन और कुछ कर्मचारियों के लिए महंगाई भत्ता (DA) और पेंशन योजनाओं में बदलाव शामिल हैं। 

    ग्राहकों के लिए, रविवार को शाखा सेवाएं इस बात पर निर्भर कर सकती हैं कि कर्मचारी ड्यूटी पर उपस्थित होते हैं या नहीं. डिजिटल बैंकिंग, एटीएम और अन्य सेवाएं उपलब्ध रहने की उम्मीद है. जिन ग्राहकों को शाखा में काम करना है, वे इसे पहले से ही पूरा कर सकते हैं. खासकर सप्ताहांत के तुरंत बाद प्रस्तावित हड़ताल को देखते हुए। 

  • मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन का 62% काम पूरा, सफर में अभी इंतजार

    मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन का 62% काम पूरा, सफर में अभी इंतजार

    अहमदाबाद
    मुंबई–अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना का कुल निर्माण कार्य जुलाई 2026 के अंत तक 62.16% पूरा हुआ था. सूचना का अधिकार (आरटीआई) के तहत मिले जवाब में नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (NHSRCL) ने यह जानकारी दी। 

    परियोजना के पूरा होने की संभावित तारीख या वर्ष पूछे जाने पर NHSRCL ने कहा, 'सभी ठेके दिए जाने और ट्रेनसेट की आपूर्ति के बाद ही परियोजना के पूरा होने की संभावित समयसीमा का आकलन किया जा सकेगा. 21 सितंबर 2026 का यह जवाब 17 अगस्त 2026 को दाखिल आरटीआई आवेदन पर दिया गया। 

    NHSRCL के मुताबिक, 508 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर के लिए आवश्यक 1,389.49 हेक्टेयर ज़मीन अधिग्रहित की जा चुकी है. इसमें गुजरात और दादरा एवं नगर हवेली की 959.04 हेक्टेयर तथा महाराष्ट्र की 430.45 हेक्टेयर ज़मीन शामिल है। 

    निर्माण कार्य कहां तक पहुंचा?
    आरटीआई जवाब के अनुसार, 366 किलोमीटर वायाडक्ट पर गर्डर लगाए जा चुके हैं, जबकि लगभग 380 किलोमीटर के लिए गर्डर ढाले जा चुके हैं. 459.90 किलोमीटर में नींव का काम पूरा हो चुका है और 455.10 किलोमीटर में पियर तैयार किए जा चुके हैं. गुजरात के सभी स्टेशनों पर नींव और ऊपरी ढांचे का काम पूरा हो चुका है. वहां फिनिशिंग का काम चल रहा है. महाराष्ट्र में स्टेशनों का निर्माण जारी है। 

    सुरंग, डिपो और ट्रैक की स्थिति
    परियोजना में 21 किलोमीटर लंबी सुरंग शामिल है, जिसका सात किलोमीटर हिस्सा समुद्र के नीचे होगा. NHSRCL के मुताबिक, टनल बोरिंग मशीन से सुरंग बनाने का काम चल रहा है. न्यू ऑस्ट्रियन टनलिंग मेथड से बनाई जा रही सुरंग का 4.88 किलोमीटर हिस्सा पूरा हो चुका है. आठ पहाड़ी सुरंगों में से चार की खुदाई आर-पार पूरी हो गई है. आरटीआई जवाब के अनुसार, साबरमती डिपो का 32.28% और ठाणे डिपो का 17.23% काम पूरा हुआ था. 27 अगस्त 2026 तक CAM इंजेक्शन सहित 97 रूट किलोमीटर में ट्रैक स्लैब बिछाए जा चुके थे। 

    पहले ट्रेनसेट का निर्माण शुरू
    चेन्नई की इंटीग्रल कोच फैक्ट्री ने कॉरिडोर के लिए दो हाई-स्पीड ट्रेनसेट के डिजाइन, निर्माण और कमीशनिंग का ऑर्डर BEML को दिया है. NHSRCL के मुताबिक, पहले ट्रेनसेट का निर्माण शुरू हो गया है. NHSRCL ने यह भी कहा कि मुंबई–अहमदाबाद लाइन फिलहाल उसकी एकमात्र स्वीकृत हाई-स्पीड रेल परियोजना है, जिस पर निर्माण कार्य चल रहा है। 

     

  • अक्टूबर से बदलेंगे कई नियम, LPG से UPI तक होगा असर

    अक्टूबर से बदलेंगे कई नियम, LPG से UPI तक होगा असर

    नई दिल्ली

    अक्टूबर 2026 की शुरुआत आम लोगों के लिए कई बड़े बदलाव लेकर आ रही है। घरेलू LPG गैस सिलेंडर की सब्सिडी से लेकर दिल्ली में महिलाओं की मुफ्त बस यात्रा, कारोबारियों के UPI भुगतान और प्रॉपर्टी खरीदने की टैक्स प्रक्रिया तक नियम बदलने जा रहे हैं। कुछ बदलाव सीधे जेब पर असर डाल सकते हैं, जबकि कुछ में कागजी कार्रवाई कम होगी।

    जेब पर सबसे बड़ा असर कहां?
    अक्टूबर के बदलावों में सबसे सीधा आर्थिक असर LPG सब्सिडी से जुड़ा है। आधार आधारित e-KYC पूरा नहीं करने वाले पात्र ग्राहक को सब्सिडी का लाभ नहीं मिलेगा। UPI के मामले में फिलहाल ग्राहक से सीधे अतिरिक्त शुल्क लेने का प्रावधान नहीं है। वहीं NRI से प्रॉपर्टी खरीदने वालों को टैक्स प्रक्रिया में राहत मिलेगी, जबकि दिल्ली में बिना स्मार्ट कार्ड के महिलाओं को बस किराया देना पड़ सकता है।

    गैस सिलेंडर पर सब्सिडी के लिए आधार जरूरी
    1 अक्टूबर से घरेलू LPG सिलेंडर पर सब्सिडी का लाभ लेने के लिए Biometric Aadhaar Authentication (BAA) जरूरी होगा। पेट्रोलियम मंत्रालय के मुताबिक 27.43 करोड़ सक्रिय घरेलू LPG ग्राहकों में करीब 89.9 फीसदी पहले ही यह प्रक्रिया पूरी कर चुके हैं। जिन लोगों ने BAA करा लिया है, उन्हें दोबारा कुछ करने की जरूरत नहीं होगी।

    जिन ग्राहकों ने अभी तक आधार ऑथंटिकेशन नहीं कराया है, उन्हें सब्सिडी वाले दाम पर सिलेंडर बुक कराने के लिए यह प्रक्रिया पूरी करनी होगी। सरकार के मुताबिक सितंबर में 14.2 किलो के घरेलू सिलेंडर पर करीब 210 रुपये की अप्रत्यक्ष सब्सिडी थी। यानी ऑथंटिकेशन नहीं कराने पर पात्र उपभोक्ता को इस लाभ से वंचित होना पड़ सकता है। BAA डिलीवरी के समय, गैस एजेंसी के कार्यालय में या इंडेन के लिए IndianOil ONE, भारत गैस के लिए HelloBPCL और HP Gas के लिए HP PAY ऐप से किया जा सकता है।

    UPI पर 15 अक्टूबर से नया चार्ज, लेकिन ग्राहक से नहीं
    UPI को लेकर भी अक्टूबर में बड़ा बदलाव प्रस्तावित है। 15 अक्टूबर से चुनिंदा 2,000 रुपये से ज्यादा के P2M यानी ग्राहक से कारोबारी भुगतान पर 0.4 फीसदी MDR लागू होगा। 75,000 रुपये या उससे अधिक के भुगतान पर यह शुल्क अधिकतम 300 रुपये तक सीमित रहेगा। हालांकि आम ग्राहक से यह शुल्क लेने की अनुमति नहीं है।

    P2P यानी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति के भुगतान और 2,000 रुपये तक के P2M भुगतान इस MDR से बाहर रहेंगे। छोटे कारोबारियों के लिए भी छूट का प्रावधान है। सरकार के अनुसार करीब 96 फीसदी P2M लेनदेन प्रभावित नहीं होंगे।

    इसका सीधा असर फिलहाल ग्राहक की जेब पर नहीं होना चाहिए, लेकिन कारोबारियों का कहना है कि इससे उनकी लागत बढ़ सकती है। इसी मुद्दे पर कुछ राज्यों में व्यापारिक संगठनों ने 'No UPI Day' जैसे विरोध का ऐलान किया है।

    NRI से प्रॉपर्टी खरीदने पर TAN की जरूरत नहीं
    1 अक्टूबर से NRI से अचल संपत्ति खरीदने वाले निवासी व्यक्ति या HUF के लिए TDS प्रक्रिया कुछ आसान होगी। नए आयकर कानून के तहत PAN आधारित प्रक्रिया और Form 141 का इस्तेमाल किया जाएगा। इससे अलग से TAN लेने की जरूरत वाले अनुपालन को सरल बनाया गया है।

    हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि NRI से प्रॉपर्टी खरीदने पर TDS खत्म हो गया है। टैक्स काटने की जिम्मेदारी बनी रहेगी, केवल उसे जमा करने और रिपोर्ट करने की प्रक्रिया बदलेगी। इसलिए बड़ी प्रॉपर्टी खरीद में खरीदार को टैक्स विशेषज्ञ से सही दर और प्रक्रिया की पुष्टि करनी चाहिए।

    मध्य प्रदेश के 24 जिलों में ESIC का दायरा बढ़ेगा
    1 अक्टूबर से मध्य प्रदेश के कई क्षेत्रों में ESIC का दायरा भी बढ़ाया जा रहा है। इसका मतलब यह है कि अधिसूचना के तहत आने वाले पात्र प्रतिष्ठानों और कर्मचारियों पर ESIC योगदान लागू होगा और संबंधित कर्मचारियों को ESIC के तहत मिलने वाले स्वास्थ्य एवं सामाजिक सुरक्षा लाभों का दायरा बढ़ेगा।

    यह बदलाव कर्मचारियों के लिए तत्काल नकद बचत के बजाय सामाजिक सुरक्षा और स्वास्थ्य कवर से जुड़ा है। कर्मचारी और नियोक्ता दोनों की निर्धारित हिस्सेदारी के अनुसार योगदान होगा।
    दिल्ली में महिलाओं की मुफ्त बस यात्रा के लिए स्मार्ट कार्ड

    दिल्ली में महिलाओं और ट्रांसजेंडर यात्रियों के लिए मुफ्त DTC और क्लस्टर बस यात्रा को लेकर भी बड़ा बदलाव है। 30 सितंबर तक पेपर पिंक टिकट की व्यवस्था जारी रहेगी, लेकिन 1 अक्टूबर से Saheli Pink Smart Card से टैप करने पर ही मुफ्त यात्रा की सुविधा मिलेगी। यानी जिनके पास स्मार्ट कार्ड नहीं होगा, उन्हें सामान्य टिकट लेकर किराया देना पड़ सकता है। कार्ड का पहला निर्गमन मुफ्त है, जबकि खोने या खराब होने पर रिप्लेसमेंट के लिए 59 रुपये देने होंगे।

    परेशानी बढ़ा सकती है बैंक हड़ताल
    त्योहारों के महीना अक्टूबर उल्लास के बीच परेशानियां भी खड़ी कर सकता है। बैंक यूनियन पांच दिन की बैंकिंग व्यवस्था लागू करने समेत कर्मचारियों से जुड़े कई मुद्दों के समाधान की मांग कर रहे हैं। इनमें पेंशन में सुधार, सभी पेंशनर्स के लिए समान महंगाई भत्ता फॉर्मूला और NPS से जुड़े कर्मचारियों को पुरानी पेंशन व्यवस्था में जाने का विकल्प देने जैसी मांगें शामिल हैं। यूनियनों ने मांगें पूरी नहीं होने की स्थिति में 26 अक्टूबर 2026 से अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी भी दी है।

  • EPFO कैंप में PF की अटकी समस्याओं का समाधान, 28 सितंबर को लगेगा कैंप

    EPFO कैंप में PF की अटकी समस्याओं का समाधान, 28 सितंबर को लगेगा कैंप

       नई दिल्ली

    कई कर्मचारियों के लिए EPFO अकाउंट सिर्फ हर महीने सैलरी से कटने वाली PF की रकम तक सीमित रहता है. उन्हें यह जानकारी नहीं होती कि अपने PF अकाउंट से जुड़ी कौन-सी जानकारी ऑनलाइन बदली जा सकती है, किसी गलती को कैसे ठीक कराया जा सकता है या EPFO की अलग-अलग ऑनलाइन सेवाओं और योजनाओं का फायदा कैसे लिया जाए. खासकर जो लोग तकनीक और ऑनलाइन प्रक्रियाओं के साथ सहज नहीं हैं, उनके लिए छोटी-सी प्रक्रिया भी परेशानी बन जाती है। 

    ऐसे कर्मचारियों और PF सदस्यों के लिए EPFO की 'निधि आपके निकट 2.0' पहल उपयोगी साबित हो सकती है. कर्मचारी अब 28 सितंबर 2026 को आयोजित होने वाले 'निधि आपके निकट 2.0' कैंप में EPFO की योजनाओं, सुविधाओं और प्रक्रियाओं की जानकारी सीधे अधिकारियों से ले सकेंगे. इतना ही नहीं, अगर PF अकाउंट या EPFO की किसी सेवा से जुड़ी शिकायत या सवाल है, तो उसे मौके पर अधिकारियों के सामने रखा जा सकेगा। 

    EPFO 28 सितंबर को लगाएगा कैंप

    कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करके 'निधि आपके निकट 2.0' कैंप की जानकारी दी है. EPFO ने सदस्यों से 28 सितंबर को कैंप में पहुंचने की अपील करते हुए बताया कि यहां संगठन की योजनाओं और फायदों के बारे में जानकारी लेने के साथ सेवाओं और उनकी प्रक्रिया को भी समझा जा सकता है. इस पहल का मकसद EPFO की सेवाओं को सब्सक्राइबर के करीब पहुंचाना है, ताकि छोटी-बड़ी दिक्कतों के लिए उन्हें सिर्फ ऑनलाइन प्रक्रिया पर निर्भर न रहना पड़े। 

    अफसरों से सीधे पूछ सकेंगे सवाल
    कैंप में EPFO के अधिकारी सदस्यों से सीधे बातचीत करेंगे. अगर आपको यह समझ नहीं आ रहा कि किसी EPFO सेवा के लिए क्या प्रक्रिया अपनानी है, कौन-से दस्तावेज चाहिए या ऑनलाइन उपलब्ध सुविधा का इस्तेमाल कैसे करना है, तो कैंप में इसके बारे में जानकारी ली जा सकेगी. यह खास तौर पर उन PF सदस्यों के लिए मददगार हो सकता है, जो ऑनलाइन प्रक्रिया या डिजिटल सेवाओं के इस्तेमाल में सहज नहीं हैं। 

    शिकायतों का मौके पर होगा समाधान
    'निधि आपके निकट 2.0' कैंप का एक अहम पहलू खाताधारकों की शिकायतों का मौके पर निपटारा है. कैंप में मौजूद अधिकारी ईपीएफ सदस्यों की शिकायत और समस्याएं सीधे सुनेंगे. यानी अगर EPFO से जुड़ी कोई शिकायत लंबे समय से अटकी हुई है या किसी सेवा को लेकर परेशानी है, तो उसे संबंधित अधिकारियों के सामने रखा जा सकेगा. हालांकि, हर मामले का समाधान उसी समय हो जाएगा, ऐसा मानना सही नहीं होगा. मामले की प्रकृति और जरूरी प्रक्रिया के आधार पर आगे की कार्रवाई भी हो सकती है। 

    EPFO लोकेटर से देखें नजदीकी कैंप
    EPFO ने अलग-अलग जगहों पर आयोजित होने वाले कैंप की जानकारी देखने के लिए एक कैंप लोकेटर लिंक भी शेयर किया है. सदस्य इस फोल्डर में जाकर अपने आसपास आयोजित होने वाले कैंप की लोकेशन देख सकते हैं। 

    'निधि आपके निकट 2.0' क्यों है खास?

    EPFO की सेवाएं लगातार डिजिटल हो रही हैं. PF बैलेंस देखने से लेकर कई दूसरी सुविधाएं ऑनलाइन उपलब्ध हैं. लेकिन हर कर्मचारी डिजिटल प्रक्रिया में समान रूप से सहज नहीं होता. कई बार जानकारी की कमी या ऑनलाइन प्रक्रिया समझ नहीं आने की वजह से कर्मचारी ऐसी सुविधा का इस्तेमाल नहीं कर पाते, जिसे घर बैठे पूरा किया जा सकता है। 

    ऐसे में 'निधि आपके निकट 2.0' का कैंप कर्मचारियों को सीधे अधिकारियों से बात करने और अपनी समस्या समझाने का मौका देता है. खासकर PF अकाउंट, EPFO की योजनाओं, सेवाओं और उनसे जुड़े नियमों को लेकर सवाल रखने वाले सदस्यों के लिए यह एक उपयोगी मौका हो सकता। 

    28 सितंबर कैंप में क्या साथ लेकर जाएं?
    अगर आप EPFO सब्सक्राइबर हैं और अपने PF अकाउंट से जुड़ी किसी समस्या या शिकायत का सामना कर रहे हैं, तो कैंप में जाने से पहले अपनी समस्या से जुड़े जरूरी दस्तावेज और उपलब्ध जानकारी साथ रखना उपयोगी रहेगा. इससे अधिकारी को मामला समझाने में आसानी हो सकती है। 

  • MP के 70 हजार शिक्षकों की बढ़ सकती है सैलरी, ₹20 हजार तक लाभ

    MP के 70 हजार शिक्षकों की बढ़ सकती है सैलरी, ₹20 हजार तक लाभ

     जबलपुर
    मध्य प्रदेश के करीब 70 हजार शिक्षकों के लिए बड़ी राहत देने वाली खबर सामने आई है। दरअसल, जबलपुर हाईकोर्ट ने शिक्षकों की पहली नियुक्ति तिथि से सेवा अवधि की गणना करने के मामले में सख्त रुख अपनाया है। न्यायमूर्ति दीपक खोट की एकलपीठ ने प्रदेश सरकार को अदालती आदेश का अनुपालन करने के लिए 4 हफ्तों का आखिरी समय दिया है। अदालत के इस फैसले से शिक्षकों की वरिष्ठता, वेतन बढ़ोतरी, पेंशन और एरियर जैसे लंबित वित्तीय और सेवा संबंधी फायदे मिलने का रास्ता खुलने की संभावना है।

    ऐसे में प्रदेश के संबंधित शिक्षकों को पहली नियुक्ति तारीख से सेवा लाभ मिलने पर सैलरी में हर महीने 15 से 20 हजार रुपए तक की बढ़ोतरी होने की उम्मीद बनी है। इसके अलावा, 6वें वेतनमान की पात्रता 1 जनवरी 2006 से माने जाने पर करीब 10 साल का एरियर भी मिल सकेगा, जो हर शिक्षक लगभग 7 से 8 लाख रुपए (12 प्रतिशत संभावित ब्याज की दर से) मिलना संभव है।

    प्रदेश सरकार को दिये 4 सप्ताह

    आपको बता दें कि, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के पिछले फैसले के खिलाफ राज्य सरकार ने उच्चतम न्यायालय में विशेष अनुमति याचिका दायर की थी, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने 24 अगस्त 2026 को खारिज कर दिया था। इसके बाद दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने सरकार को 4 हफ्तों का समय दिया है। मामले की अगली सुनवाई 21 अक्टूबर 2026 को होगी।

    यहां से शुरु हुआ पूरा विवाद
    इस मामले में शिक्षक राजेश पांडेय समेत एमपी के 497 अध्यापकों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर अपनी 2018 से पहले की शिक्षकीय सेवाओं को संविलियन में शामिल न करने वाले सरकारी फैसले को चुनौती दी थी। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि, पहली नियुक्ति की तिथि से सेवा अवधि की गणना कर वरिष्ठता और सभी देय लाभ दिए जाएं। वहीं, अब इस मामले में हाईकोर्ट का रुख सामने आने के बाज शिक्षक नेताओं का कहना है कि, सुप्रीम कोर्ट से अपील निरस्त होने के बाद अब सरकार को बिना विलंब किए हाईकोर्ट के आदेश पर अमल करना चाहिए।

    शिक्षक संगठनों ने जताया आभार
    दूसरी तरफ प्रदेश के विभिन्न शिक्षक संगठनों ने स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा 2 दिनों में 600 से अधिक दिवंगत शिक्षकों और कर्मचारियों के आश्रितों को अनुकंपा नियुक्ति पत्र देने के त्वरित फैसले का स्वागत किया। संगठनों ने इस मानवीय पहल के लिए राज्य सरकार और विभागीय अधिकारियों का आभार जताया है।

  • प्रधानमंत्री  आवास योजना से अशफाक खान का पक्के घर का सपना हुआ साकार

    प्रधानमंत्री आवास योजना से अशफाक खान का पक्के घर का सपना हुआ साकार

    रायपुर

    गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले के ग्राम पंचायत गोरखपुर निवासी  अशफाक खान के लिए अपना पक्का मकान होना वर्षों पुराना सपना था। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण वे अपने परिवार के लिए पक्का घर बनाने में असमर्थ थे। ऐसे समय में प्रधानमंत्री आवास योजना उनके परिवार के लिए उम्मीद की नई किरण बनकर सामने आई और उनके पक्के घर का सपना साकार हुआ।

     अशफाक खान ने पक्का मकान बनाने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत आवेदन किया। पात्रता पूरी होने के बाद उनका नाम आवास सूची में शामिल हुआ और उन्हें योजना के तहत आवास निर्माण के लिए सहायता प्राप्त हुई। योजना से मिले सहयोग से उन्होंने अपने परिवार के लिए पक्के मकान का निर्माण कराया। कुछ ही समय में उनका वर्षों पुराना सपना हकीकत में बदल गया।

    नए घर में परिवार के साथ रहने की खुशी  अशफाक खान के चेहरे पर साफ दिखाई देती है। वे बताते हैं कि आर्थिक परेशानियों के कारण पक्का मकान बनाना उनके लिए मुश्किल था, लेकिन प्रधानमंत्री आवास योजना से मिली सहायता ने इस कठिनाई को दूर कर दिया। आज उनका परिवार अपने पक्के और सुरक्षित घर में सुख-शांति के साथ जीवन व्यतीत कर रहा है।

     अशफाक खान ने कहा कि पक्का मकान मिलने से उनके परिवार को सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर मिला है। उन्होंने इस सहयोग के लिए प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त किया।

    प्रधानमंत्री आवास योजना जरूरतमंद परिवारों को पक्की छत उपलब्ध कराने के साथ उनके जीवन में सुरक्षा, स्थायित्व और आत्मविश्वास भी ला रही है।  अशफाक खान का परिवार भी इस योजना से लाभान्वित होकर बेहतर और सुरक्षित भविष्य की ओर आगे बढ़ रहा है।

  • कुपोषण के खिलाफ मैदानी स्तर पर मजबूत हो रही पोषण व्यवस्था : सचिव रश्मि

    कुपोषण के खिलाफ मैदानी स्तर पर मजबूत हो रही पोषण व्यवस्था : सचिव रश्मि

    भोपाल 

    मध्यप्रदेश में बच्चों के पोषण स्तर में सुधार और कुपोषण की चुनौती से निपटने के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा आंगनबाड़ी केन्द्रों पर पोषण व्यवस्था को लगातार मजबूत किया जा रहा है। बच्चों को गुणवत्तापूर्ण एवं पौष्टिक आहार उपलब्ध कराने के साथ कुपोषित बच्चों की पहचान, उपचार, पुनर्वास और निरंतर निगरानी पर भी विभाग का विशेष फोकस है। महिला एवं बाल विकास सचिव जी.वी. रश्मि ने शुक्रवार को विदिशा जिले का भ्रमण कर आंगनबाड़ी केन्द्रों, पोषण पुनर्वास केन्द्र और सामुदायिक रसोई की व्यवस्थाओं का मैदानी स्तर पर जायजा लिया। कलेक्टर श्री अंशुल गुप्ता ने उनके साथ भ्रमण कर जिले में संचालित विभागीय योजनाओं की जानकारी दी।

    सचिव जी.वी. रश्मि ने ग्राम कुंआखेड़ी स्थित सक्षम आंगनबाड़ी के न्द्र का निरीक्षण कर बच्चों के लिए उपलब्ध सुविधाओं, पोषण आहार और शैक्षणिक गतिविधियों की जानकारी ली। इसके बाद विदिशा ग्रामीण परियोजना के अंतर्गत खरी तथा ग्यारसपुर परियोजना के अटारीखेजड़ा क्रमांक-2 एवं 3 और मानोरा क्रमांक-2 स्थित सक्षम आंगनबाड़ी केन्द्रों का निरीक्षण किया। उन्होंने केन्द्रों में बच्चों की उपस्थिति, पोषण एवं स्वास्थ्य संबंधी व्यवस्थाओं तथा विभागीय योजनाओं के क्रियान्वयन की स्थिति को मौके पर देखा।

    कुपोषित बच्चों के उपचार से लेकर पुनर्वास तक पर नजर

    ग्यारसपुर स्थित पोषण पुनर्वास केन्द्र का निरीक्षण करते हुए सचिव ने अतिगंभीर एवं कुपोषित बच्चों के उपचार, पोषण आहार, स्वास्थ्य सेवाओं और पुनर्वास की व्यवस्थाओं की जानकारी ली। उन्होंने बच्चों और उनके परिवारों से संवाद कर उपचार एवं पोषण की स्थिति जानी तथा संबंधित अधिकारियों से बच्चों के स्वास्थ्य में सुधार और उपचार के बाद उनकी निरंतर निगरानी की व्यवस्था के बारे में जानकारी प्राप्त की।

    सचिव रश्मि ने कहा कि कुपोषण से निपटने के लिए बच्चों को केवल भोजन उपलब्ध कराना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनकी पोषण स्थिति की नियमित निगरानी, समय पर कुपोषण की पहचान, आवश्यक उपचार और परिवार की सहभागिता भी जरूरी है। आंगनबाड़ी केन्द्रों को बच्चों के पोषण, स्वास्थ्य और प्रारंभिक शिक्षा से जुड़ी सेवाओं का प्रभावी केन्द्र बनाने की दिशा में लगातार कार्य किया जा रहा है।

    पौष्टिक पोहा चखकर परखी भोजन की गुणवत्ता

    सचिव जी.वी. रश्मि ने ग्यारसपुर में अमेरिकन इंडिया फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में लक्ष्मी स्व-सहायता समूह द्वारा संचालित सामुदायिक रसोई का भी निरीक्षण किया। उन्होंने आंगनबाड़ी केन्द्रों के बच्चों के लिए तैयार किए जा रहे भोजन की निर्माण प्रक्रिया, स्वच्छता, पोषण गुणवत्ता और केन्द्रों तक वितरण व्यवस्था की जानकारी ली।

    सामुदायिक रसोई में तैयार किए जा रहे पौष्टिक पोहा को सचिव जी.वी. रश्मि और कलेक्टर श्री अंशुल गुप्ता ने स्वयं चखकर उसकी गुणवत्ता का जायजा लिया। उन्होंने समूह की महिलाओं से चर्चा कर जाना कि बच्चों की पोषण आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए भोजन में किन पोषक तत्वों और खाद्य सामग्री का समावेश किया जा रहा है। सचिव ने भोजन निर्माण से लेकर आंगनबाड़ी केन्द्र तक पहुंचने की पूरी प्रक्रिया में गुणवत्ता, स्वच्छता और निर्धारित पोषण मानकों का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

    प्रदेश में पोषण सेवाओं को प्रभावी बनाने पर जोर

    प्रदेश के आंगनबाड़ी केन्द्रों के माध्यम से बच्चों, गर्भवती एवं धात्री माताओं तथा अन्य पात्र हितग्राहियों तक पोषण सेवाएं पहुंचाई जा रही हैं। विभाग का प्रयास है कि पोषण आहार की गुणवत्ता और वितरण व्यवस्था के साथ-साथ कुपोषित बच्चों की पहचान एवं उपचार की प्रक्रिया भी प्रभावी हो। मैदानी स्तर पर केन्द्रों के निरीक्षण के माध्यम से व्यवस्थाओं की वास्तविक स्थिति की समीक्षा की जा रही है और जहां आवश्यक है, वहां सुधार के निर्देश दिए जा रहे हैं।

    सामुदायिक रसोई के माध्यम से एक ओर जहां बच्चों को पौष्टिक और गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराने की व्यवस्था को मजबूती मिल रही है, वहीं स्व-सहायता समूहों की महिलाओं को स्थानीय स्तर पर आजीविका से जोड़ने का अवसर भी मिल रहा है। इस प्रकार बाल पोषण के साथ महिला सशक्तिकरण को भी एक साथ आगे बढ़ाया जा रहा है।

    कलेक्टर श्री अंशुल गुप्ता ने सचिव श्रीमति जी वी रश्मि को जिले में संचालित योजनाओं, आंगनबाड़ी केन्द्रों, पोषण पुनर्वास केन्द्र और सामुदायिक रसोई की व्यवस्थाओं की जानकारी दी। उन्होंने बच्चों के पोषण स्तर में सुधार तथा हितग्राहियों को शासन की योजनाओं का लाभ समय पर उपलब्ध कराने के लिए किए जा रहे प्रयासों से भी अवगत कराया।

     

  • सेवा_ संकल्प_ अभियान मत्स्य पालन से संवरी गांधीराम की ज़िंदगी

    सेवा_ संकल्प_ अभियान मत्स्य पालन से संवरी गांधीराम की ज़िंदगी

    रायपुर,

    कहते हैं कि अगर सही दिशा में मेहनत की जाए और सरकारी योजनाओं का सही उपयोग हो, तो परिस्थितियां बदलते देर नहीं लगती। कुछ ऐसी ही मिसाल पेश की है जिले के ग्राम बरदूला निवासी श्री गांधीराम अजगल्ले ने। कभी आर्थिक तंगी और सीमित संसाधनों के बीच जीवन-यापन करने वाले गांधीराम के लिए आज मछली पालन केवल आजीविका का जरिया नहीं, बल्कि परिवार की किस्मत बदलने वाला एक मजबूत जरिया बन चुका है।
       
    प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना ने दिखाया नया रास्ता

    गांधीराम की जिंदगी में यह सकारात्मक मोड़ 'प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना' के तहत आया। उन्होंने अपनी खुद की जमीन पर 0.20 हेक्टेयर जलक्षेत्र में 'तालाब लाइनर' का निर्माण कराया। 16.80 लाख रुपए की कुल लागत वाले इस प्रोजेक्ट के लिए उन्हें सरकार की ओर से 4 लाख रुपए का अनुदान प्राप्त हुआ। योजना से मिली इस शुरुआती मदद ने उन्हें स्वावलंबन का नया मार्ग दिखाया।

    ​उत्पादन और आय का नया कीर्तिमान

     तालाब तैयार होने के बाद गांधीराम ने पूरे लगन और नियमित प्रबंधन के साथ मत्स्य पालन की शुरुआत की। आज परिणाम यह है कि मात्र 0.20 हेक्टेयर के इस छोटे से जलक्षेत्र से वे प्रतिवर्ष औसतन 100 क्विंटल मछली का उत्पादन कर रहे हैं। बाजार में बिक्री के बाद तमाम खर्चे निकालकर उन्हें सालाना 5 से 8 लाख रुपए तक का शुद्ध लाभ प्राप्त हो रहा है।

    ​आर्थिक तंगी से आत्मनिर्भरता तक का सफर

     योजना का लाभ मिलने से पहले गांधीराम का जीवन काफी संघर्षमय था। परिवार की बुनियादी जरूरतों को पूरा करना भी एक बड़ी चुनौती थी। दूसरों पर निर्भर रहने के बजाय उन्होंने मत्स्य पालन को अपना मुख्य व्यवसाय बनाया। आज इस व्यवसाय से न केवल उनके परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है, बल्कि उनका भविष्य भी सुरक्षित हो चुका है।श्री गांधीराम अजगल्ले ने कहा कि योजना से मिले सरकारी सहयोग ने मेरे लिए कमाई का नया रास्ता खोल दिया। अब परिवार की जरूरतें आसानी से पूरी हो रही हैं और आर्थिक रूप से एक बेहतर आधार तैयार हुआ है।

    ​सेवा संकल्प अभियान के तहत सामने आई 'बदलाव की कहानी'

     राज्य सरकार द्वारा चलाए जा रहे ‘सेवा संकल्प अभियान’ के अंतर्गत ऐसी ही वास्तविक बदलाव की कहानियों को सामने लाया जा रहा है, जो यह दर्शाती हैं कि शासकीय योजनाएं किस प्रकार आम नागरिक के जीवन में वास्तविक परिवर्तन ला रही हैं। गांधीराम अजगल्ले की यह सफलता की कहानी प्रदेश के उन तमाम युवाओं और किसानों के लिए प्रेरणास्रोत है जो सीमित संसाधनों के बावजूद कड़ी मेहनत से अपनी तकदीर बदलना चाहते हैं।

  • गजराजों के विश्राम और सेवा का पर्व, ‘हाथी पुनर्यौवनीकरण’ कैंप-2026 का हुआ शुभारंभ

    गजराजों के विश्राम और सेवा का पर्व, ‘हाथी पुनर्यौवनीकरण’ कैंप-2026 का हुआ शुभारंभ

    भोपाल 

    विश्वविख्यात बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में हाथियों की देखभाल, स्वास्थ्य और पुनर्यौवनीकरण को समर्पित ‘हाथी पुनर्यौवनीकरण’ कैंप-2026 का शुभारंभ गुरुवार को परासी गेट के समीप धमोखर बफर क्षेत्र में हुआ। कार्यक्रम में उमरिया कलेक्टर मती राखी सहाय, वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, जनप्रतिनिधि तथा स्थानीय ग्रामीण शामिल हुए।

    बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के उप संचालक  योहान कटारा ने बताया कि हाथी पुनर्यौवनीकरण कैंप का उद्देश्य ‘कैंप हाथियों’ को नियमित कार्य से विश्राम देना, उनके स्वास्थ्य की बेहतर देखभाल करना तथा उन्हें पौष्टिक और पसंदीदा आहार उपलब्ध कराना है। इससे हाथियों को मानसिक और शारीरिक रूप से स्वस्थ रखने में मदद मिलती है।

    नन्हे ‘कृष्णा’ ने खींचा सबका ध्यान

    कैंप के दौरान नन्हा नर हाथी ‘कृष्णा’ आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहा। अपनी चंचलता, उछलकूद और मासूम अंदाज से कृष्णा ने सभी का ध्यान अपनी ओर खींचा। कृष्णा का जन्म अक्टूबर 2025 में बांधवगढ़ में ही हुआ था। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 31 दिसंबर 2025 को बांधवगढ़ प्रवास के दौरान उसका नामकरण किया था।

    15 में से 9 कैंप हाथी कैंप में शामिल

    वर्तमान में बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में कुल 15 ‘कैंप हाथी’ कार्यरत हैं। इनमें से 4 हाथी रेस्क्यू ऑपरेशन और 2 हाथी अनुश्रवण कार्य में लगे हैं। शेष 9 हाथियों को हाथी पुनर्यौवनीकरण कैंप-2026 में शामिल किया गया है। कैंप में इन हाथियों को नियमित कार्य से विश्राम देने के साथ उनके स्वास्थ्य परीक्षण, पौष्टिक एवं पसंदीदा भोजन तथा विशेष देखभाल की जा रही है। इसका उद्देश्य हाथियों को शारीरिक और मानसिक रूप से तरोताजा रखना है।

    बफर क्षेत्र में पर्यटन और जन-जागरूकता को मिलेगा बढ़ावा

    इस वर्ष ‘हाथी पुनर्यौवनीकरण’ कैंप के लिए परासी गेट का चयन किया गया है। इसका उद्देश्य कैंप हाथियों को बेहतर वातावरण उपलब्ध कराने के साथ बफर क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देना और स्थानीय ग्रामीणों को वन्य जीवों के प्रति जागरूक करना है। परासी और आसपास के ग्रामीणों को कैंप में शामिल होकर हाथियों को करीब से देखने तथा उनके व्यवहार, देखभाल और संरक्षण के बारे में जानकारी प्राप्त करने का अवसर मिल रहा है।

    रेस्क्यू अभियान के कारण कुछ कैंप हाथी नहीं हो सके शामिल

    मैहर वन मंडल के गोरसरी फॉरेस्ट क्षेत्र में हाथी रेस्क्यू ऑपरेशन भी जारी है। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक डॉ. अनुपम सहाय के नेतृत्व में बांधवगढ़ के कैंप हाथियों, वन्यजीव स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. तोमर और रेस्क्यू दल द्वारा रेस्क्यू अभियान संचालित किया जा रहा है। इसके चलते कुछ कैंप हाथी इस आयोजन में शामिल नहीं हो सके।