नई दिल्ली

हृदय रोग-हार्ट अटैक हर साल दुनियाभर में लाखों लोगों की मौत का कारण बन रहा है। सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) की रिपोर्ट के मुताबिक अकेले साल 2023 में, कार्डियोवैस्कुलर बीमारियों (सीवीडी) की वजह से दुनिया भर में लगभग 19.2 मिलियन (1.92 करोड़) लोगों की मौत हो गई, इसमें इस्केमिक हार्ट डिजीज के कारण 24 करोड़ लोग प्रभावित हुए। भारतीय आबादी में भी हृदय रोगों की समस्याएं तेजी से बढ़ती जा रही हैं, जिसको लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञ लगातार चिंता जताते रहे हैं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं,  भारत में स्थिति और भी चिंताजनक है, यहां तेजी से बदलती जीवनशैली, तनाव, गड़बड़ खानपान, मोटापा, डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर जैसे कारक हृदय रोगों के खतरे को बढ़ा रहे हैं। सबसे बड़ी समस्या यह है कि कई मामलों में हार्ट अटैक अचानक होता है और मरीज को पहले से कोई स्पष्ट चेतावनी नहीं मिलती।

अच्छी खबर ये है कि आधुनिक तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) ऐसे मामलों में नई उम्मीद बनकर उभर रहा है।  हार्ट अटैक के जोखिमों का पहले से अनुमान लगाने में एआई को मददगार माना जा रहा है।

साइलेंट हार्ट अटैक का पता लगाने वाला एआई टूल
अमर उजाला में प्रकाशित रिपोर्ट्स में हमने बताया है कि गर्भधारण को आसान बनाने के साथ, कैंसर जैसी बीमारियों का पता लगाने तक के लिए एआई को तैयार किया जा रहा है। इसी क्रम में अब विशेषज्ञों की टीम एक ऐसे एआई टूल के बारे में जानकारी दी है जो इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम (ईसीजी) के जरिए दिल के सिग्नल रिकॉर्ड करने में मदद करता है।

    एआई एल्गोरिदम उन पैटर्न को एनालाइज करते हैं जिससे पता चल सकता है कि कहीं आपको पहले से कोई साइलेंट हार्ट अटैक तो नहीं हुआ है?
    एक छोटा इलेक्ट्रॉनिक पैड ईसीजी के जरिए पिछले अटैक का पता लगा सकता है, इसे मोबाइल फोन पर एआई से जोड़ा जा सकता है।
    इस डिवाइस और एआई टूल को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसकी मदद से डॉक्टरों को ऐसे मरीजों का पता लगाने में मदद मिल सकती है जो पहले साइलेंट हार्ट अटैक का शिकार रहे चुके हैं।
    ऐसे मरीजों का समय पर इलाज करके दूसरी बार हार्ट को रोकने और जान बचाने में मदद मिल सकती है।

साइलेंट हार्ट अटैक होता है खतरनाक
साइलेंट हार्ट अटैक या साइलेंट मायोकार्डियल इन्फार्क्शन हृदय की गंभीर समस्या मानी जाती है। इसमें रोगी को दिल का दौरा तो पड़ता है पर उसे लक्षण महससूस नहीं होते।

    इस तरह के हार्ट अटैक में सीने में तेज, हाथों में दर्द या सांस फूलने जैसे आम चेतावनी के संकेत नहीं दिखते हैं।
    जिन लोगों को ये होते हैं, उनमें से अधिकतर लोग मेडिकल मदद नहीं लेते, जिससे दिल की मांसपेशियों को होने वाला नुकसान समय के साथ चुपचाप बढ़ता रहता है।
    इससे भविष्य में हार्ट फेलियर, हार्ट अटैक से जान जाने का खतरा काफी बढ़ जाता है।
    उम्रदराज लोगों, डायबिटीज के शिकार, हाई ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल वाले मरीजों में साइलेंट मायोकार्डियल इन्फार्क्शन का खतरा अधिक देखा जाता रहा है।

कैंसर के मरीजों में हार्ट अटैक का पता लगाने वाला टूल
हृदय रोग और हार्ट अटैक के बढ़ते जोखिमों के बीच एआई टेक्नोलॉजी को गेम-चेंजर के तौर पर देखा जा रहा है।

एआई और दिल की बीमारियों के खतरे को कम करने की दिशा में एक अन्य खोज में यूके स्थित लीसेस्टर यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल करके कैंसर मरीजों में सेकेंडरी हार्ट अटैक के खतरे का पता लगाने के लिए एक नया टूल बनाया है।

    कमजोर कार्डियोवैस्कुलर सिस्टम की वजह से कैंसर के  मरीजों में  हार्ट अटैक का खतरा अधिक रहता है।
    अब तक, डॉक्टरों के पास ऐसे मरीजों के इलाज में गाइड करने के लिए कोई स्टैंडर्ड टूल नहीं था
    अब विशेषज्ञों ने पहले से ही खतरे को बताने वाला मॉडल विकसित किया है, जो खास तौर पर उन कैंसर मरीजों के लिए मददगार हो सकता है जिनमें दिल की बीमारियों का जोखिम ज्यादा होता है।
    ONCO-ACS नाम का यह टूल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल करके कैंसर से जुड़े फैक्टर्स को स्टैंडर्ड क्लिनिकल डेटा के साथ मिलाकर छह महीने के अंदर कार्डियक घटना का अनुमान लगा सकता है।

जन्मजात हृदय रोगा वाल बच्चों के लिए एआई टूल
एक अन्य खोज में  माउंट सिनाई क्राविस चिल्ड्रन्स हार्ट सेंटर के शोधकर्ताओ ने ऐसा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टूल विकसित करने के बारे में जानकारी दी है, जो जन्मजात हृदय रोग के शिकार बच्चों के लिए मददगार साबित हो सकती है।

    कई अन्य संस्थानों के साथ मिलकर विशषज्ञों ने जो टूल तैयार किया है वह  टेट्रालॉजी ऑफ फैलोट वाले मरीजों में हार्ट की समस्या, हार्ट डैमेज का पता लगाने में मदद कर सकती है।
    टेट्रालॉजी ऑफ फैलोट का पता अक्सर जन्म के तुरंत बाद चल जाता है। इसके कारण आपके बच्चे की त्वचा नीली या ग्रे दिख सकती है। स्टेथोस्कोप से बच्चे के दिल की धड़कन सुनते समय फुसफुसाहट जैसी आवाज (हार्ट मर्मर) आती है।
    यह टूल स्टैंडर्ड इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम (ईसीजी) को एनालाइज कर सकता है ताकि जोखिमों का पता लगाया जा सके। आमतौर पर इस खतरे का पता लगाने के लिए कार्डियक एमआरआई की जरूरत होती है।