ग्वालियर
स्वास्थ्य व्यवस्था को आधुनिक, सुदृढ़ और मरीज-केंद्रित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। स्वास्थ्य विभाग ने लगभग 184 करोड़ रुपए के प्रस्ताव को मंजूरी के लिए भोपाल भेज दिया है। यह प्रस्ताव वर्ष 2026-27 के एन्युअल प्लान के अंतर्गत तैयार किया गया है, जिसके लागू होने से शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों के मरीजों को उन्नत सुविधाएं उपलब्ध होंगी। इससे गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए बाहर के शहरों दिल्ली-मुबंई की यात्रा काफी हद तक कम हो जाएगी।
डिजिटल क्रांति से बढ़ेगी पारदर्शिता और दक्षता
प्रस्ताव में डिजिटल गवर्नेंस को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। जिला अस्पताल सहित प्रमुख स्वास्थ्य संस्थानों में अत्याधुनिक कंम्प्यूटर लैब स्थापित की जाएंगी। मरीजों का पंजीकरण, इलाज का रिकॉर्ड, रिपोर्टिंग और रेफरल सिस्टम पूरी तरह डिजिटल हो जाएगा। इससे समय की बचत के साथ पारदर्शिता बढ़ेगी।
डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों को तकनीक- आधारित प्रशिक्षण भी मिलेगा। सीएमएचओ कार्यालय में 20 कंम्प्यूटरों वाली विशेष कंम्प्यूटर लैब बनाई जाएगी, जहां स्वास्थ्य कार्यक्रमों की रियल-टाइम मॉनिटरिंग और डेटा एंट्री होगी। जननी सुरक्षा योजना और प्रसूता सहायता जैसी योजनाओं के भुगतान में गति और पारदर्शिता आएगी।
बुनियादी ढांचे का मजबूत उन्नयन
प्रस्ताव में अस्पतालों के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर भी जोर है। आधुनिक चिकित्सा उपकरणों की उपलब्धता, वार्डों का विस्तार, साफ-सफाई व्यवस्था में सुधार और मरीजों की अन्य सुविधाएं सुनिश्चित की जाएंगी। डॉ. सचिन श्रीवास्तव, सीएमएचओ, ग्वालियर ने बताया कि यह प्रस्ताव स्वास्थ्य सेवाओं के समग्र सुधार के लिए तैयार किया गया है। स्वीकृति मिलते ही कार्य शुरू हो जाएगा, जिससे जिले की स्वास्थ्य तस्वीर पूरी तरह बदल जाएगी।
नए एनआरसी केंद्र स्थापित होंगे जिले में कुपोषण की समस्या से निपटने के लिए विशेष फोकस किया गया है। भितरवार और बरई में दो नए पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) स्थापित करने का प्रस्ताव शामिल है। इन केंद्रों में कुपोषित बच्चों को विशेषज्ञ देखरेख, पोषण आहार और उचित इलाज मिलेगा। यह पहल ग्रामीण एवं पिछड़े इलाकों के लिए विशेष रूप से लाभदायक साबित होगी।
















