जबलपुर
 हाई कोर्ट ने भोपाल गैस राहत अस्पताल, बीएमएचआरसी में स्टाफ व सुविधाओं की कमी को लेकर सुप्रीम कोर्ट की ओर से गठित मानिटरिंग कमेटी की सिफारिशों और हाई कोर्ट के पूर्व निर्देशों का पालन न होने पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा।मुख्य न्यायाधीश रवि मलिमठ व न्यायमूर्ति विशाल मिश्रा की युगलपीठ ने केन्द्र सरकार को जवाब के लिए एक सप्ताह की मोहलत दी है। मामले की अगली सुनवाई 18 जुलाई को निर्धारित की गई है।उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर हाई कोर्ट में इस याचिका पर सुनवाई की जा रही है। सुप्रीम कोर्ट ने 2012 में भोपाल गैस पीड़ित महिला उद्योग संगठन सहित अन्य की ओर से दायर याचिका की सुनवाई करते हुए भोपाल गैस पीड़ितों के उपचार और पुनर्वास के संबंध में 20 निर्देश जारी किए थे। वहीं निर्देश में शामिल बिंदुओं के क्रियान्वयन के लिए मानिटरिंग कमेंटी को गठित करने का निर्देश भी दिया गया था।

सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट को मानिटरिंग कमेटी की हर तीन माह में पेश रिपोर्ट के आधार पर राज्य सरकार को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करने के भी निर्देश दिए थे।वरिष्ठ अधिवक्ता नमन नागरथ ने कोर्ट को बताया कि याचिका के लंबित रहने के दौरान मानिटरिंग कमेटी की अनुशंसा का राज्य सरकार द्वारा परिपालन नहीं किया जाने के खिलाफ अवमानना याचिका दायर की गई। इसमे कहा गया कि गैस त्रासदी के पीड़ित व्यक्तियों के न तो हेल्थ कार्ड बनाए गए न ही अस्पतालों में आवश्यकता अनुसार उपकरण व दवाएं उपलब्ध कराई गईं। वहीं बीएमएचआरसी के भर्ती नियम निर्धारित होने के कारण डाक्टर व पैरा मेडिकल स्टाफ स्थाई तौर पर अपनी सेवाएं प्रदान नहीं कर रहे हैं।पिछली सुनवाईयों के दौरान कोर्ट ने यह पूछा था कि गैस पीडि़तों के इलाज के लिए क्या इंतजाम किए गए हैं।कोर्ट ने अभी तक मानिटरिंग कमेटी द्वारा पेश की गयी सभी त्रैमासिक रिपोर्ट में की गई अनुशंसाओं का परिपालन कर विस्तृत रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए थे। परिपालन न होने पर कोर्ट ने सभी सम्बंधित अधिकारियों के खिलाफ अवमानना नोटिस जारी करने के निर्देश दिए थे। शुक्रवार को नोटिस के जवाब के लिए केंद्र सरकार की ओर से समय मांगा गया।।