नई दिल्ली।
भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा है कि शनिवार से पश्चिमी तट और मध्य भारत में व्यापक बारिश होने की संभावना है। उनका कहना है कि मानसून ट्रफ एक लंबा और कम दबाव के क्षेत्र के साथ दक्षिण की ओर शिफ्ट होने की संभावना है। ट्रफ एक लंबा कम दबाव वाला क्षेत्र है जहां अधिकांश नमी केंद्रित होती है। मानसून के दौरान यह आमतौर पर मध्य पाकिस्तान से ओडिशा तक फैला होता है। साथ ही भारत-गंगा के मैदान (IGP) क्षेत्र को भी कवर करता है। आईएमडी के अनुसार, जुलाई के लिए ट्रफ अपनी सामान्य स्थिति के दक्षिण में बनी हुई है। इसके कारण मध्य भारत में तीव्र बारिश और बाढ़ आई है। वहीं, लेकिन उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल सहित गंगा के किनारे स्थित राज्यों में बारिश में अभी भी 40% से अधिक की कमी देखी गई है।

आपको बता दें कि जून के महीना में वर्षा में 8% की कमी दर्ज की गई। वहीं, जुलाई में अब तक 10% अधिक बारिश दर्ज की गई है। हालांकि, इससे बड़े पैमाने पर कृषि का काम संभव नहीं हो सका है। शुक्रवार तक गंगीय पश्चिम बंगाल में 50 प्रतिशत, झारखंड में 51 प्रतिशत, बिहार में 45 प्रतिशत, पूर्वी उत्तर प्रदेश में 61 प्रतिशत और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 52 प्रतिशत वर्षा की कमी दर्ज की गई। दूसरी ओर तेलंगाना में 111% अधिक बारिश दर्ज की गई है। मराठवाड़ा में 73% अधिक, सौराष्ट्र और कच्छ में 79% अधिक बारिश हुई है। विदर्भ में भी 48% अधिक बारिश हुई है। समग्र रूप से देश में 10 फीसदी ज्यादा बारिश हो रही है।

आईएमडी में राष्ट्रीय मौसम पूर्वानुमान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक आरके जेनामणि ने कहा, "महासागरीय विशेषताएं, हवा की स्थिति, समुद्र की सतह का तापमान, वायुमंडल की क्लाउड ट्रिगरिंग क्षमता, मध्य अक्षांश प्रणाली पूर्व-पश्चिम मानसून ट्रफ की स्थिति को प्रभावित करती है।" आमतौर पर मानसून ट्रफ का पूर्वी भाग कभी दक्षिण की ओर और कभी उत्तर की ओर दोलन करता है। दक्षिण की ओर प्रवास के परिणामस्वरूप भारत के प्रमुख हिस्सों में सक्रिय / जोरदार मानसून होता है, लेकिन उत्तर की ओर बढ़ने से मानसून की स्थिति बाधित होती है और हिमालय की तलहटी में भारी बारिश होती है। इससे कभी-कभी ब्रह्मपुत्र नदी में बाढ़ आ जाती है।

आईएमडी के महानिदेशक एम महापात्र ने कहा, “20 से 22 जुलाई के दौरान आईजीपी राज्यों में कुछ बारिश हुई थी, लेकिन अब मॉनसून ट्रफ दक्षिण की ओर शिफ्ट हो जाएगी। इसका अर्थ है कि उत्तरी राज्यों और आईजीपी क्षेत्र में बारिश कम हो जाएगी और मध्य भारत में वृद्धि होगी। 26 जुलाई के बाद ट्रफ फिर से उत्तर की ओर खिसकेगी। यह दोलन है जो मानसून के वितरण को निर्धारित करता है।”