वाशिंगटन
 भारत ही नहीं दुनिया के कई हिस्सों में कोरोना के मामले फिर से बढ़े हैं। वहीं इस बीच अमेरिका ने छह महीने से अधिक उम्र के बच्चों के लिए वैक्सीन निर्माता कंपनियों की ओर निर्मित कोविड -19 टीकों को मंजूरी दे दी है। फाइजर और मॉडर्ना कंपनी की द्वारा निर्मित कोरोना वैक्सीन 6 माह या फिर उससे कम उम्र के बच्चों को लगाई जा सकती है।

भारत की स्वदेशी कोवैक्सीन 2 साल के बच्चों के लिए भी सेफ पाई गई है। आपको याद होगा, Covaxin की क्षमता पर कई तरह की बातें हुई थीं, लेकिन अब पूरी दुनिया इसका लोहा मान रही है। अब भारत की यह वैक्सीन 2 साल से 18 साल की उम्र के बच्चों के लिए सुरक्षित पाई गई है। लांसेट जर्नल में प्रकाशित स्टडी में बताया गया है कि वयस्कों की तरह यह बच्चों में भी बराबर कारगर पाई गई है। दूसरे और तीसरे चरण के ट्रायल में पाया गया कि भारत बायोटेक की कोविड-19 वैक्सीन कोवैक्सीन बिल्कुल सुरक्षित और उच्च प्रतिरोधक क्षमता विकसित करने वाली साबित हुई है। ये ट्रायल जून 2021 और सितंबर 2021 के बीच कराए गए। इधर, एक अच्छी खबर अमेरिका से आई है। वहां अब 6 महीने के शिशुओं को कोरोना वैक्सीन लगाने की तैयारी शुरू हो गई है।

भारत बायोटेक ने यह पता लगाने के लिए दूसरे और तीसरे फेज की स्टडी की थी कि अगर दो से 18 साल आयु वर्ग के स्वस्थ बच्चों और किशोरों को कोवैक्सीन का टीका लगाया जाता है, तो उनके लिए यह कितना सुरक्षित होगा। उनका शरीर कोवैक्सीन लगने के बाद क्या प्रतिक्रिया देगा और उनकी प्रतिरक्षा क्षमता पर इसका क्या असर होगा।

बच्चों पर किए गए टेस्ट में यह टीका सुरक्षित पाया गया, इसका स्वास्थ्य पर कोई खास असर नहीं हुआ और इससे रोग-प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ी। यह जानकारी अक्टूबर 2021 में केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) को सौंपी गई और कोवैक्सीन को 6 साल से 18 साल की आयु के लोगों में आपातकालीन उपयोग के लिए मंजूरी मिल गई।

भारत बायोटेक के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक डॉ. कृष्णा एला ने कहा, ‘बच्चों के लिए टीके का सुरक्षित पाया जाना महत्वपूर्ण है और हमें यह बताते हुए खुशी हो रही है कि आंकड़े बच्चों के लिए कोवैक्सीन के सुरक्षित होने और इससे उनकी रोग-प्रतिरोधी क्षमता बढ़ने की बात साबित करते हैं। हमने प्राथमिक टीकाकरण और बूस्टर खुराक के तौर पर वयस्कों और बच्चों के लिए एक सुरक्षित और प्रभावी कोविड-19 टीका विकसित करके और कोवैक्सीन को एक सार्वभौमिक टीका बनाकर अपना लक्ष्य हासिल कर लिया है।’

साइड इफेक्ट के 350 से ज्यादा केस
भारत में बच्चों को दी गईं पांच करोड़ से अधिक खुराकों के आंकड़ों के आधार पर यह टीका अत्यधिक सुरक्षित साबित हुआ है। अध्ययन में कोई गंभीर दुष्प्रभाव नजर नहीं आया। दुष्प्रभाव यानी साइड इफेक्ट्स के कुल 374 मामले सामने आए और इनमें से ज्यादातर दुष्प्रभाव मामूली थे और उन्हें एक दिन में दूर कर दिया गया था। टीका लगने की जगह पर दर्द की शिकायत के मामले सर्वाधिक पाए गए। कंपनी ने दावा किया है कि उसके पास कोवैक्सीन की पांच करोड़ से अधिक खुराक हैं, जो आवश्यकता पड़ने पर वितरण के लिए तैयार हैं।

अमेरिका में शिशुओं को भी लगेगी वैक्सीन
अमेरिका में अब 6 महीने के शिशुओं को भी कोविड वैक्सीन लगेगी। अमेरिकी नियामक संस्था ने नन्हे-मुन्ने बच्चों को वैक्सीन लगाने को मंजूरी दे दी। अगले हफ्ते से छोटे बच्चों को वैक्सीन लगना शुरू हो जाएगी। FDA के सलाहकार पैनल ने मॉडर्ना और फाइडर की वैक्सीन लगाने की सिफारिश कर दी है। अमेरिका में 5 साल से कम उम्र के बच्चे इस वैक्सीन के लिए पात्र हैं और इनकी संख्या 18 मिलियन होती है। गौर करने वाली बात यह है कि अमेरिका में वयस्कों के लिए वैक्सीन उपलब्ध होने के डेढ़ साल बाद छोटे बच्चों की वैक्सीन आई है।

मॉडर्ना और फाइजर ने मांगी थी अनुमति
रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) द्वारा एक विशेषज्ञ टीम बनाई गई थी। ऐसा इसलिए किया गया क्योंकि फाइजर ने 6 महीने से 4 साल तक के बच्चों को कोरोना वैक्सीन की तीन माइक्रोग्राम की तीन डोज देने के लिए एफडीए से अनुमति मांगी थी, जबकि मॉडर्ना ने 6 महीने से 5 साल तक के बच्चों के लिए उच्च 25 माइक्रोग्राम की दो डोज के लिए एफडीए से अनुमति मांगी थी।

भारत  में लगाई जा रही बूस्टर डोज के बीच कोवैक्सीन को लेकर अच्छी खबर आई है। भारत की स्वदेशी कोवैक्सीन 2 साल के बच्चों के लिए भी सेफ पाई गई है। आपको याद होगा, Covaxin की क्षमता पर कई तरह की बातें हुई थीं, लेकिन अब पूरी दुनिया इसका लोहा मान रही है। अब भारत की यह वैक्सीन 2 साल से 18 साल की उम्र के बच्चों के लिए सुरक्षित पाई गई है।