लखनऊ

उत्तर प्रदेश की बांदा जेल में बंद यूपी के कथित माफिया डॉन मुख्तार अंसारी को योगी आदित्यनाथ सरकार के खौफ से बचाने के लिए पंजाब की तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में वकील रखने पर 55 लाख रुपए उड़ा दिए थे। यह खुलासा पंजाब के जेल मंत्री हरजोत बैंस ने मंगलवार को पंजाब विधानसभा में किया है जिस पर सदन में काफी हंगामा हुआ। जेल मंत्री ने बताया कि यूपी से 26 बार पेशी के लिए वारंट आया लेकिन पंजाब से उसे नहीं भेजा गया जिसके बाद यूपी सुप्रीम कोर्ट चला गया। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर मुख्तार अंसारी को अप्रैल, 2019 में रोपड़ की जेल से यूपी के बांदा जेल भेजा गया था।

पंजाब विधानसभा में राज्य के जेल मंत्री हरजोत बैंस ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में मुख्तार अंसारी को यूपी ना भेजने की पैरवी करने के लिए प्रतिदिन 11 लाख रुपए की फीस पर एक सीनियर वकील रखा गया जिनका 55 लाख का बिल आया है। मंत्री ने कहा कि हम क्यों ये पैसा दें। मंत्री ने दावा किया कि जेल में मुख्तार को एक वीवीआईपी की तरह रखा गया। मंत्री ने यह भी दावा किया कि 25 कैदियों की बैरक की जगह में उसे रखा गया जहां उसके साथ उसकी पत्नी भी रहती थी।

मंत्री हरजोत बैंस के इन दावों पर कांग्रेस के नेता प्रताप सिंह बाजवा और पूर्व जेल मंत्री सुखजिंदर रंधावा ने काफी हंगामा किया। दोनों नेताओं ने कहा कि जेल मंत्री ने गलत बात कही है। रंधावा ने तो मंत्री को चैलेंज किया कि वो सबूत दें कि मुख्तार के साथ पत्नी भी रहती थी। इस पर मंत्री बैंस ने कहा कि उन्होंने मामले में एफआईआर दर्ज करने और गहराई से जांच के आदेश दे दिए हैं और सारा सच सामने आ जाएगा। मंत्री ने कहा कि जिम्मेदार लोगों को बख्शा नहीं जाएगा।