डिंडौरी
शासन द्वारा स्वस्थ के लिए अनेक योजनाए चलाई जा रही है। हर संभव प्रयास किया जा रहा है की किसी भी प्रकार की दूर दराज से बीमार व्यक्तियों को किसी भी प्रकार की समस्याओ का सामना  ना करना पड़े । इसलिए प्रशासन लाखो रुपये खर्च कर सुबिधा मुहैया कराती है। लेकिन कुछ अधिकारी कर्मचारियो के चलते सरकार की मंशा मे पानी फिरते नजर आ रहा है।जिला चिकित्सालय में चिकित्सों की लापरवाही के चलते रविवार को नवजात शिषु की मौत हो जाने का मामला सामने आया है, वैसे यह कोई हैरान करने वाली नई घटना नही है इससे पहले भी इस तरह के घटना सामने आती रही है और जिम्मेदार कुंभकरण की तरह सो रहै है।

जिला चिकित्सालय में विगत कई महीनों से स्वास्थ्य विभाग की लचर कार्यप्रणाली चर्चाओं में है उसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग के अमले समेत जिले के जिम्मेदार अधिकारी के द्वारा ध्यान न देना सोचनीय विषय है। इससे साफ अंदाजा लगाया जा सकता है कि स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी एवं जिम्मेदार के द्वारा स्वास्थ्य व्यवस्था दुरूस्त कराने में नही बलकि आमजनों के स्वास्थ्य के साथ खेलवाड़ किया जा रहा है। जबकि शासन द्वारा जिला चिकित्सालय में आमजनों की उपचार में कोई कमी न हो इसलिये लाखो करोड़ो रू पानी की तरह बहा रही है किंतु स्वास्थ्य विभाग अधिकारियों के द्वारा सरकार के मंशाओ पर पानी फेर रहै है।

जिला चिकित्सालय में शनिवार के रात में एक गर्भवती महिला को भर्ती कराया गया था। लेकिन रात में चिकित्सों की नदारद होने के कारण महिला रात भर प्रसव पीड़ा से तड़पती रही है। प्राप्त जानकारी के अनुसार डिंडौरी विकासखण्ड अंतर्गत ग्राम सिमरिया निवासी 24 वर्षीय महिला कृष्णा ठाकुर पति जानकी शरण को भर्ती कराया गया था। परिजनों ने बताया कि रविवार को चिकित्सकों को सुबह से ढूॅढते रहै किंतु किसी का पता ही नही चला,इस बीच नर्स उपस्थित थे किंतु उनके द्वारा कोई चिकित्सक को नही बुलाया गया और न ही समूचित उपचार किया गया है। दोपहर लगभग 2 बजे महिला विषेषज्ञ चिकित्सक की अनुपस्थिति में महिला की नर्सो के द्वारा प्रसव कराया गया है,जिससे नवजात शिषु की मौत हो गई। परिजनों ने बताया कि महिला दर्द से तड़पती रही और चिकित्सक नदारत थे,महिला के प्रसव के 20 मिनट बाद एक महिला चिकित्सक आई थी,उससे पहले नवजात शिषु की मौत हो चुकी थी।शिषु  की मौत के बाद नवजात शिषु के परिजन अस्पाताल में घंटो तक विलाप करते रहै।

चिकित्सकों पर लापरवाही बरतने का आरोप
परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है। उन्होने कहा कि यदि जिला चिकित्सालय में मुख्य चिकित्सा अधिकारी के द्वारा सही तरीके से व्यवस्था को दुरूस्त रखा जाता तो कई लांगो की जिंदगी को बचाया जा सकता है किंतु जिम्मेदारों के लापरवाही का खमियाजा भोले भाले आम नागरिकों को भुगतना पड़ रहा है।

दुकानों से दवाई खरीद रहै मरीज
महिला के कमर में दर्द होने के कारण समूचित उपचार के लिए जिला चिकित्सालय में भर्ती कराया गया था। उन्होंने बताया कि अस्पताल में भर्ती हुए 4 दिन हो गए किंतु सही उपचार और न ही दवा दी जा रही है। उन्होंने बताया कि चिकित्सालय में उपचार नही होने के कारण से दवा दुकानों से दवाई खरीदने को मजबूर है।