कहते हैं किताबों की मोहब्बत में खामियाजा सफ़लता का उठाना पड़ता है। और यह ऐसी महबूब है जिसके इश्क़ में पड़ना हर किसी की चाहत  हुआ करती और जो इसके इश्क़ में पड़ जाए उन आशिकों को दुनियाँ सलाम करती है।  फिर बात आती है इनके रचनाकारों और पाठकों की।  मगर बीच का एक हिस्सा जो सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है उसकी भूमिका को लोग भुला दिया करते है। मगर किसी एक फितरत को ज़माने की बात जान लेना भी कहाँ तक उचित होगा। 

प्रभा खेतान फाउंडेशन की ओर पूरे भारत नहीं बल्कि विश्व भर में पिछले कई सालों से किताब और किताबकार के सम्मान में अलग अलग राज्यों के अलग शहरों में "अहसास "  के अन्तर्गत कार्यक्रम"द राइट सर्किल " की शुरुआत की गई है।  जिसके द्वारा किताबकारों को एक ऐसा मंच दिया जा रहा है जहाँ वो अपने किताब की ऐसी बातें जो पन्नों के अभाव में लिखने से चूक गए या यूँ कहें कि उन्हों यह सोच कर छोड़ दिया कि भला कौन सुनेगा और कौन पढ़ेगा। मगर सायद वो भूल जाते हैं कि किताबों को पढ़ने की चाहत हर किसी की हो या ना हो मगर कहानियाँ पढ़ना और सुनना तो उम्र का हरेक पहलु चाहता है।

"द राइट सर्किल " कार्यक्रम के इस कड़ी में दिनांक 30 जून 2022 को बारी थी की चंद्रचूर घोष की नयी रचना  नेता जी सुभाषचंद्र बोस की आत्मकथा "बोस "  की कहानी की। जिस कार्यक्रम में खुद चंद्रचूर घोष ने अपनी इस रचना के सभी पहलुओं पर बातचीत करके
अपनी बात रखी। जिसमें उन्होंने अपने पुस्तक की रचना के शुरूआती दौर से लेकर किताब लिखने और फ़िर उसके विमोचन तक कि सारी बातों को रखा।  बातचीत के दरमियाँ अपनी रचना के बारे में बोलते हुए उन्होंने सुभाषचंद्र बोस के अलग अलग जीवन शैलियों का ज़िक्र किया जिसमें उन्होंने कहा कि लोग अपने हिसाब से  उनके बारे पढ़कर ,सुनकर यह अनुमान लगाते है कि वो एक राजनेता थे, स्वतंत्रता सेनानी थे, एक सफल छात्र थे और भी कई उपाधियों से उनका नामकरण करते हैं मगर बोस एक महान विचारक थे। जिन्हें सिर्फ़ किसी एक व्यक्ति के आत्मकथा के लिए नहीं पढ़ना चाहिए ताकि उनकी जीवनी की जानकारियां प्राप्त हो। बल्कि उन्हें इसलिए भी पढ़ा जाना चाहिए क्योंकि एक ऐसा व्यक्ति जो किसी व्यक्तिगत परिसीमा में रह कर अपने विचारों और चीजों को लेकर भारत और भारतीयता का पर्याय है। आज उनके मृत्यु के वर्षों बाद भी खुद में एक रहस्य है जिसका एक छोटा सा अंश मैंने अपने इस रचना में अंकित किया है। जिसका मकसद बोस के जीवन शैली को लोगों तक लाया जाए ताकि बोस जैसे महान व्यक्तित्व के बारे में फैली अंधविश्वास और अफवाहों को खत्म किया जाए। बातचीत के दौरान उन्होंने  महात्मा गाँधी के साथ उनके रिश्तों को लेकर उड़ रही अफवाहों पर अपने शोध के अनुसार प्राप्त जानकारियों के आधार पर पूछे गए सवालों का जवाब दिया।  इसके साथ-साथ बोस के राजनीति , कॉलेज, और सामाजिक व्यवहार के आरोपों का खंडन किया। 

इस बातचीत कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के साथ "अहसास "  रायपुर की  कल्पना चौधरी मौजूद थी। वर्तमान में कल्पना चौधरी "अहसास " की सदस्य होने के साथ-साथ एच गोयल स्कूल की डायरेक्टर भी है। बातचीत कार्यक्रम के अंत में छत्तीसगढ़ पाठ्यपुस्तक निगम के चेयरमैन शैलेश नितिन त्रिवेदी ने मुख्य अतिथि चंद्रचूर घोष को शॉल देकर सम्मानित किया ।

प्रभा खेतान फाउंडेशन  समाज की सामाजिक, सांस्कृतिक और शैक्षणिक उन्नति के लिए समर्पित है।  यह कोलकाता स्थित एनजीओ है जो देश भर में मानवीय परियोजनाओं को चलाता है जिसमें महिला प्रशिक्षण केंद्र, बाल साक्षरता कार्यक्रम, और सहायता ड्राइव शामिल हैं। "अहसास" प्रभा खेतान फाउंडेशन की एक पहल है।यह महिलाओं का एक समूह है जो जीवन के सभी क्षेत्रों से है जो अपने तरीके से  समाज के सुधार के लिए दूसरों को प्रेरित करते हैं। वर्तमान में यह भारत के अलग अलग शहरों में काफ़ी सक्रियता से अपने कार्यों को संपादित कर रहीं है। कार्यक्रम का आयोजन हयात होटल में किया गया। जिसे प्रभा खेतान फाउंडेशन ने श्री सीमेंट के द्वारा आयोजित किया था।