ललितपुर।
 
बीस साल पहले एक ग्रामीण के साथ किस्मत ने जो खेल खेला उसकी भरपाई अभी तक नहीं हो पाई। अब वापस लौटा तो ग्रामीण पूरी तरह से टूट चुका था, उसे एक सहारे की तलाश थी। ग्रामीण ने जिसे अपना सहारा बनाया वह भी धोखेबाज निकली। ये कहानी है यूपी के ललितपुर निवासी एक ग्रामीण की। इस ग्रामीण ने जिंदगी के बीस साल बिना कसूर के ही सलाखों के पीछे गुजार दिए। बीस साल बाद हाईकोर्ट ने ग्रामीण को निर्दोष करार दिया तो वह अपने घर लौटा, लेकिन उसे क्या पता था कि किस्मत ने अभी भी उससे मुंह मोड़ रखा है। यहां जिस महिला से युवक ने कुछ दिन पहले शादी कि उसने भी धोखा दे दिया और फुर्र हो गई। अब पीड़ित ग्रामीण महिला और उसके परिजनों की खोजबीन कर रहा है ताकि उसे सबक सिखा सके।

मामला जिले के महरौनी कोतवाली अंतर्गत ग्राम पंचायत सिलावन में रहने वाले विष्णु तिवारी दुष्कर्म व एससीएसटी के फर्जी मामले में बीस वर्ष जेल में निरुद्ध रहे। उनको बीते वर्ष हाईकोर्ट ने निर्दोष करार देते हुए रिहा कर दिया था। गांव में रहने वाली कुछ महिलाओं ने जमीनी विवाद होने पर उनके खिलाफ साजिशन यह मुकदमा दर्ज कराया था। गांव आने के बाद आर्थिक रूप से टूट चुके विष्णु की सामाज के लोगों ने तरह-तरह से मदद की। कुछ दिन अकेले काटने के बाद उसने विवाह का निर्णय लिया। गांव में रहने वाले एक व्यक्ति के समक्ष उसने अपनी इच्छा रखी तो उसने एक परिवार से उनकी मुलाकात करवा दी।

लड़की पसंद आने पर शादी के एवज में एक लाख रुपये ले लिए। दुल्हन के चढ़ावे वाले जेवरात व साड़ियां भी ले लीं। शादी तय करवाने वाले व्यक्ति ने बीस हजार रुपये अलग से मांगे। फिर 22 जुलाई को डोंगरा स्थित देवी जी के मंदिर में शादी कराई गई। विष्णु हंसी खुशी अपनी नई नवेली दुल्हन को लेकर घर चला गया। सुबह लड़की ने अपनी मां से मिलने की बात कही तो विष्णु अपनी पत्नी को लेकर तुवन मंदिर आए। यहां वह पानी की बोतल लेने दुकान पर गए तभी दुल्हन दबे पांव फुर्र हो गई। अब विष्णु ने आरोपितों के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई।