नई दिल्ली

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से आज प्रवर्तन निदेशालय (ED) के दफ्तर में बुलाकर पूछताछ की गई. हाल ही में कोरोना महामारी से उबरीं 75 वर्षीय सोनिया गांधी करीब दो घंटे की पूछताछ के बाद ईडी के दफ्तर से बाहर आईं. खबर है कि उन्हें 25 जुलाई को फिर से पूछताछ के लिए बुलाया गया है. सोनिया से ED की पूछताछ नेशनल हेराल्ड अखबार से जुड़े कथित मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में की जा रही है. हालांकि कांग्रेस ने इसे विपक्ष को दबाने के लिए केंद्रीय जांच एजेंसियों के दुरुपयोग का मसला बताते हुए आरोप लगाया कि बीजेपी सरकार ‘विपक्ष मुक्त भारत’ बनाना चाहती है.

सोनिया गांधी को ईडी दफ्तर में बुलाकर पूछताछ किए जाने के दौरान कांग्रेस सांसदों, कार्य समिति (CWC) के सदस्यों और कार्यकर्ताओं ने एकजुटता दिखाते हुए दिल्ली समेत देश के कई शहरों में विरोध प्रदर्शन किया. कई कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं को इस दौरान हिरासत में भी लिया गया, जिनमें पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम, अजय माकन और सचिन पायलट भी शामिल हैं. इस दौरान कई बड़े नेताओं और सैकड़ों कार्यकर्ताओं को हिरासत में भी लिया गया.

इस बीच, कांग्रेस के अलावा कई और विपक्षी दलों के नेताओं-सांसदों ने भी आज ही एक साझा बयान जारी करके सरकार पर विपक्ष के खिलाफ केंद्रीय जांच एजेंसियों के इस्तेमाल का आरोप लगाया. बयान में कहा गया है कि मोदी सरकार तमाम विपक्षी दलों के प्रमुख नेताओं को जानबूझकर निशाना बनाने और परेशान करने का काम कर रही है. इस तरह की कार्रवाई पहले कभी नहीं देखी गई. बयान में विपक्षी नेताओं ने कहा है कि हम इस तरह की कार्रवाई की कड़ी निंदा करते हैं और मोदी सरकार की जन-विरोधी, किसान विरोधी, संविधान विरोधी और देश के सामाजिक ताने-बाने को बर्बाद करने वाली नीतियों के खिलाफ सामूहिक संघर्ष जारी रखेंगे. विपक्ष के इस साझा बयान पर दस्तखत करने वालों में आरजेडी, शिवसेना, डीएमके, एमडीएमके, टीआरएस, नेशनल कॉन्फ्रेंस, सीपीआई, सीपीएम, आरएसपी समेत कई विपक्षी दलों के नेता शामिल हैं.