जालंधर
जालंधर में बस्तियात क्षेत्र के रहने वाले कमल कल्याण के साथ पाकिस्तान के लाहौर की शुमैला थाेड़ी देर में ही परिणय सूत्र में बंध जाएगी। कमल व शुमैला समारोह स्थल पर पहुंच गए है। शादी की रस्में शुरू हो गई हैं। इनकी सगाई 2018 में हो गई थी। 2020 में दोनों का विवाह तय किया गया, लेकिन कोरोना वायरस की वजह से दोनों देशों की सीमाओं पर आवाजाही बंद कर दी गई। लिहाजा दोनों की शादी नहीं हो सकी। अब कोरोना के हालात सामान्य होने के बाद शनिवार को लेडीज संगीत, मेहंदी तथा चुनरी की रस्म अदा की गई।

कमल कल्याण अपने पिता व अन्य रिश्तेदारों के साथ।
शुमैला एक सप्ताह पहले पाकिस्तान से जालंधर आ गई थीं। कमल कल्याण ने बताया कि उनकी शादी में दो देशों की सीमाएं नहीं बल्कि कोरोना बाधा बना था। अब हालात सामान्य होने के बाद यह बाधा भी दूर हो चुकी है। वहीं शुमैला ने कहा कि सरहद कभी भी बाधा नहीं बन सकती।

शुमैला का भाई वाजिद गिल व अन्य रिश्तेदार।
ईसाई धर्म से संबंध रखने वाली शुमैला व कमल कल्याण कोर्ट मैरिज भी करेंगे। इससे पहले इनकी शादी तमाम रस्में हो रही हैं।

सगाई के चार साल बाद मिली भारत आने की आज्ञा
सगाई के चार साल बाद शुमैला को भारत आने की आज्ञा मिली तो वह सीमा पार की सभी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद सपरिवार पहुंच गई। अटारी सीमा पर उसे लेने के लिए मंगेतर कमल कल्याण परिवार के साथ पहुंचे थे। भारत पहुंचने पर शुमैला ने कहा कि वह बहू के रूप में नहीं, बल्कि बेटी बनकर यहां आई है। यहां सभी मेरे अपने हैं। मैं यहां आकर बहुत खुश हूं। उसने बताया कि पाकिस्तान में वह कमल से वीडियो काल के जरिए लगातार संपर्क में रही। शुमैला ने कहा कि कमल कल्याण के दादा पाकिस्तान में रहते थे। वहां दोनों परिवारों का मेलजोल हो गया। इंटरनेट मीडिया पर कमल के साथ मेरा संपर्क होता रहा। इसी बीच दोनों में नजदीकियां बनीं। इसके बाद परिवार ने हमारी सगाई इंटरनेट मीडिया पर ही कर दी। इसके बाद दोनों परिवारों के बीच सबसे बड़ी समस्या दोनों की शादी करने की थी।