भोपाल

रेलवे माल का परिवहन करने वाले कोचों की कमी से जूझ रहा है। जिसकी भरपाई पुराने हो चुके यात्री कोचों से की जा रही है।
रेलवे इन कोचों में मामूली बदलाव कर इन्हें अगले पांच से दस साल माल वाहक कोचों के रूप में तैयार कर रहा है। यह काम भोपाल के निशातपुरा रेल डिब्बा पुन: निर्माण कारखाने में किया जा रहा है। कारखाना अब तक 200 पुराने यात्री कोचों में बदलाव कर उन्हें माल परिवहन कोचों के लिए बदल चुका है। इन कोचों को चार पिहया वाहनों के परिवहन योग्य बनाया जा रहा है। ये ऐसे कोच हैं जो 12 साल तक यात्री कोचों के रूप में चल चुके हैं। रेलवे यात्री कोचों के लिए जर्मन कंपनी लिंक हाफमैन बुश के तकनीकी सहयोग से तैयार आधुनिक सुविधाओं और तकनीकी से लैस एलएचबी कोचों का उपयोग कर रहा है। जिसके कारण ट्रेनों में पहले से लगे इंटीग्रल कोच फैक्ट्री चेन्नई द्वारा निर्माण किए गए आइसीएफ डिजाइन के कोचों को बाहर कर रहा है। रेलवे इन कोचों को कबाड़ घोषित करने की बजाए माल परिवहन करने वाले कोचों में बदल रहा है। यह काम सभी रेल कारखानों में चल रहा है।

एलएचबी कोचों का पुन: निर्माण
एलएचबी कोचों का पुन: निर्माण शुरू कर दिया है। साथ ही मेंटेनेंस भी किया जाने लगा है। इसके अलावा आइसीएफ डिजाइन के पुराने कोचों को चार पिहया वाहन परिवहन के लिए तैयार किया जा रहा है। इस कारखाने में 2200 से अधिक रेलकर्मी है, जो कई विभागों में बटे हुए हैं और तकनीकी रूप से सक्षम है। यह वही कारखाना है जिसने सबसे पहले देश को महामना एक्सप्रेस ट्रेनों के रैक दिए थे। ये रैक भी पुराने कोचों को माडिफाइड करके बनाए गए थे।