नई दिल्ली
एसेट क्लास यानी कई सारी संपत्तियों में निवेश करना एक चुनौतीपूर्ण काम होता है। निवेशक अक्सर यह सोच कर हैरान रह जाते हैं कि निवेश का निर्णय लेते समय किसी विशेष एसेट क्लास के लिए मूल्यांकन सस्ता है या महंगा। एक चुनौती यह भी आती है कि किसी विशेष एसेट क्लास में कब प्रवेश करें और कब बाहर निकलें।

एक प्रसिद्ध कहावत है- कभी भी सभी अंडों को एक टोकरी में नहीं रखना चाहिए। यही कहावत वित्तीय योजना बनाते समय भी लागू होती है। अगर आपके पास 100 रुपये हैं तो इसे अलग-अलग साधनों में लगाएं, ताकि अगर कोई जोखिम हो तो कम घाटा हो।

इस समय सस्ते भाव पर उपलब्ध हैं अच्छे शेयर
राइट स्टैंडर्ड वेंचर्स एलएलपी के मैनेजिंग पार्टनर वकार नकवी कहते हैं कि एक आम निवेशक के लिए तभी निवेश करना सही समय होता है, जब निवेश का साधन सस्ते भाव में उपलब्ध हो। इसके साथ ही यह भी ध्यान रखना चाहिए कि कोई एक ऐसा फंड की योजना हो, जिसके जरिये कई जगह पर निवेश हो सके। चाहे वह सोना हो, शेयर हो या फिर डेट हो। यह ऐसे क्षेत्र हैं, जो अभी निचले स्तर पर हैं। इसलिए इनमें निवेश का सही समय है।

शेयर बाजार जहां उच्च स्तर से करीब 17 फीसदी टूट चुका है, वहीं सोना भी 56 हजार प्रति दस ग्राम के सार्वकालिक स्तर से 5 हजार गिरकर 51 हजार पर है। डेट में अब ब्याज दरें ऊपर जाने की ओर हैं। बैंकों ने सावधि जमा (एफडी) पर ब्याज बढ़ा दिया है। कंपनियों ने भी यही रास्ता अख्तियार किया है। इन तीनों क्षेत्रों का जो फिलहाल रुझान है, वह यह कि इनमें अगले एक साल में दो अंकों से ज्यादा का रिटर्न मिलने की उम्मीद है।

असेट अलोकेशन आसान काम नहीं
एसेट क्लास यानी कई सारी संपत्तियों में निवेश करना एक चुनौतीपूर्ण काम होता है। निवेशक अक्सर यह सोच कर हैरान रह जाते हैं कि निवेश का निर्णय लेते समय किसी विशेष एसेट क्लास के लिए मूल्यांकन सस्ता है या महंगा। एक चुनौती यह भी आती है कि किसी विशेष एसेट क्लास में कब प्रवेश करें और कब बाहर निकलें। ऐसे में जब भी जरूरी हो, सही एसेट क्लास में निवेश करना और उसके बाद फिर से संतुलन स्थापित करना कोई आसान काम नहीं है।

चुनौतियों से निपटने में एसेट अलोकेटर फंड माहिर
आंकड़ों से पता चलता है कि एसेट क्लास (इक्विटी, डेट और सोना) की स्कीम जो निवेश करती है वह लंबे समय को ध्यान में रखकर करती है। एक आम आदमी यह निर्णय नहीं ले पाएगा कि वह कब शेयर, डेट या सोने में निवेश करे क्योंकि उसके पास इतना अनुभव नहीं होता है। लेकिन म्यूचुअल फंड की स्कीम के जो फंड प्रबंधक हैं, उनको इस काम में महारत हासिल होती है।

मार्च, 2020 में शेयर में निवेश 83 फीसदी
कोरोना की शुरुआत के दौरान मार्च, 2020 में शेयर बाजार में एसेट अलोकेटर का निवेश 83 फीसदी था। पर बाजारों में जैसे-जैसे तेजी आई, दिसंबर, 2020 तक यह निवेश घटकर 45 फीसदी हो गया। मई, 2022 तक यह केवल 33 फीसदी रह गया है। आगे जैसे-जैसे बाजार में सुधार होगा, इसमें और कमी आती जाएगी।