भोपाल

प्रदेश के 133 निकायों की मतगणना के अगले दिन सोमवार को राष्ट्रपति चुनाव के लिए होने वाले मतदान को लेकर दोनों ही दलों की तैयारियां अपने चरम पर है। दोनों ही दलों के दूरस्थ क्षेत्रों के विधायकों का रविवार शाम तक भोपाल पहुंचना फिलहाल मुश्किल भरा लग रहा है। राष्ट्रपति चुनाव से पहले भाजपा ने रविवार शाम को विधायक दल की बैठक बुलाई हैं। जबकि पार्टी ने निकाय चुनाव की मतगणना में भी विधायकों को जिम्मेदारी सौंपी हैं। इसी तरह कांग्रेस ने भी विधायकों को जिम्मेदारी दी है, इसके चलते उसने विधायकों को सोमवार सुबह तक आने की छूट दी हैं। इन सब के बीच कांग्रेस को अपने दल में सेंध लगने की आशंका भी सता रही है। निकाय चुनाव की मतगणना के लिए  पहली बार भाजपा और कांग्रेस के दिग्गज नेताओं से लेकर मंडल अध्यक्ष तक सक्रिय रहेंगे। भोपाल से परिणामों की दोनों ही दलों के दिग्गज नेता मॉनिटरिंग करेंगे। कांग्रेस के कई दिग्गज नेताओं की शहरों में पीसीसी चीफ ने तैनाती की हैं, वहीं भाजपा की ओर से मंत्री, विधायक से लेकर जिला अध्यक्ष तक को जिम्मेदारी सौंपी गई है। दोनों ही दलों का मुख्य रूप से फोकस भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर सहित 11 नगर निगमों के महापौर परिणामों पर रहेगा।

भाजपा निगम से परिषद तक एक्टिव
भाजपा की नजर न सिर्फ 11 नगर निगमों के चुनाव परिणामों पर हैं, बल्कि नगर पालिका और परिषद के पार्षदों के परिणामों पर भी है। मतगणना के लिए भाजपा ने स्थानीय विधायकों को एक्टिव किया है। विधायकों के अलावा जिला अध्यक्ष भी नगर निगम वाले क्षेत्रों में सक्रिय रहेंगे। नगर पालिका वाले क्षेत्रों में भी विधायकों के साथ ही मंडल अध्यक्षों को भी जिम्मेदारी दी गई है।