नई दिल्ली।

इस साल रक्षाबंधन, नवरात्रि और दीवाली के दौरान कपड़ों की कीमतों में इजाफा देखने को मिल सकता है। गारमेंट क्षेत्र के कारोबारियों का आकलन है कि पिछले कई महीनों में लगातार बढ़ रहे कॉटन के दाम और ट्रांसपोर्टेशन की लागत की वजह से न सिर्फ डिस्काउंट में कमी देखने को मिलेगी बल्कि दामों में भी इजाफा करना पड़ेगा। क्रिएटिव गारमेंट के मैनेजिंग डायरेक्टर और क्लॉथिंग मैन्युफैक्चरिंग एसोसिएशन ऑफ इंडिया के पूर्व प्रेसिडेंट राहुल मेहता ने हिन्दुस्तान से बातचीत में माना कि कपड़ों की लागत बढ़ने से इस त्योहारी सीजन में दाम करीब 10-15 फीसदी बढ़ाने पड़ सकते हैं।

लागत बढ़ने के बढ़ेंगे दाम
उन्होंने बताया कि उम्मीद के मुताबिक देश के तमाम हिस्सों के गारमेंट के ऑर्डर मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों को आने शुरू हो गए हैं जिससे लगता है कि त्योहारी सीजन में मांग रहेगी लेकिन इस बार ग्राहकों को हर साल के मुकाबले डिस्काउंट की उम्मीद नहीं करनी चाहिए। दामों के ऊंचे रहने के पीछे उन्होंने पेट्रोल-डीजल के बढ़े हुए दामों से बढ़ी ट्रांसपोर्टेशन लागत को वजह बताया है।

यात्री चलती ट्रेन में भी बुक कर सकेंगे कंफर्म टिकट
उन्होंने कहा कि दुनियाभर के मुकाबले देश में कॉटन की कीमतें ज्यादा रही हैं। इसी वजह से कारोबारियों की लागत भी बढ़ गई है। कारोबारियों ने कॉटन के अलावा दूसरे फैब्रिक पर भी फोकस बढ़ाया है लेकिन ये इतना नहीं बढ़ पाया कि लागत घट सके।

कॉटन के दाम कम न होने का भी असर
रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया भर के साथ साथ देश में भी कॉटन के दाम आने वाले महीनों में भी ऊंचे बने रहने के आसार हैं। रिपोर्ट के मुताबिक सरकार ने इसपर अप्रैल से सितंबर महीने के लिए आयात शुल्क 10 फीसदी से घटाकर शून्य कर दिया है ताकि कॉटन की सप्लाई बढ़ सके और इसके दामों में स्थिरता आ सके। मई 2020 में कॉटत के दामों में महीने दर महीने 10 फीसदी और साल दर साल 90 फीसदी का इजाफा देखा गया है। इस हिसाब से भारतीय कॉटन, अंतरराष्ट्रीय कॉटन के मुकाबले महंगा हो गया है।