इस्लामाबाद/काबुल
पाकिस्तान भले ही तालिबान को अपना छोटा भाई मानता हो, लेकिन तालिबान पाकिस्तान को किसी भी तरह की रियायत देने के लिए तैयार नहीं है। तालिबान ने पहले तहरीक-ए-तालिबान को लेकर पाकिस्तान की बात नहीं मानी और अब तालिबान ने कंगाल होते पाकिस्तान को एक और बड़ा झटका दिया है। पाकिस्तान को बड़ा झटका पाकिस्तान इन दिनों भीषण आर्थिक संकट से गुजर रहा है और इस आर्थिक संकट में भी तालिबान ने अपने 'बड़े भाई' पाकिस्तान को किसी भी तरह की छूट नहीं दी है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने जैसे ही अफगानिस्तान से कोयला आयात करने की मंजूरी दी, ठीक वैसे ही तालिबान ने कोयले की कीमत में 100 प्रतिशत से ज्यादा की वृद्धि कर दी। अफगानिस्तान की मीडिया के मुताबिक, अफगानिस्तान के वित्त मंत्रालय ने विश्व बाजारों में कोयले की कीमतों में वृद्धि के कारण कोयले की कीमत 90 डॉलर प्रति टन से बढ़ाकर 200 डॉलर प्रति टन कर दी है। जबकि, शहबाज शरीफ की सरकार ने अनुमान लगाया था, कि अफगानिस्तान से कोयला खरीदने पर पाकिस्तान को करीब 2 अरब डॉलर का बचत होगा।

तालिबान की क्या है दलील?
 पाकिस्तान के एक समाचार चैनल के मुताबिक, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री कार्यालय की तरफ से जारी बयान में कहा गया है कि, अफगानिस्तान से हाई क्वालिटी वाले कोयले के आयात से न केवल सस्ती बिजली का उत्पादन होगा, बल्कि देश को महत्वपूर्ण विदेशी मुद्रा के संरक्षण में भी मदद मिलेगी, जो कि भारी वित्तीय संकट में है। शहबाज शरीफ ने देश में कम लागत वाली बिजली पैदा करने में मदद करने के लिए डॉलर के बजाय पाकिस्तानी रुपये में अफगानिस्तान से सुपर-क्रिटिकल गुणवत्ता वाले कोयले के आयात को मंजूरी दी है, ताकि डॉलर बचाया जा सके। पाकिस्तान पीएमओ के मुताबिक, संबंधित अधिकारियों को इस संबंध में एक कुशल प्रणाली बनाने के आदेश भी दिए गये हैं।

वहीं, तालिबान के मुताबिक, कोयले की कीमत बढ़ाने का मकसद टैक्स की रकम बढ़ाना और उससे देश के लिए राजस्व पैदा करना है जो पहले से ही अंतरराष्ट्रीय सहायता के अभाव में आर्थिक उथल-पुथल में है। प्राकृतिक संसाधनों पर निर्भर है तालिबान अफगानिस्तान की सरकार ने कोयले की कीमतों में भारी इजाफा कर दिया है, क्योंकि तालिबान को पता है, कि पाकिस्तान सरकार के पास अब कोई विकल्प नहीं बचा है और उसे किसी भी कीमत पर अफगानिस्तान से ही कोयले का आयात करना होगा। वहीं, वैश्विक मदद मिलना बंद होने के बाद विभिन्न प्रतिबंधों के बीच, तालिबान अब जीवित रहने के लिए अपने प्राकृतिक संसाधनों पर निर्भर है। तालिबान पाकिस्तान को कोयला निर्यात बढ़ा रहा है और बिक्री पर शुल्क बढ़ा दिया है, अधिकारियों ने कहा, क्योंकि समूह का लक्ष्य प्रत्यक्ष विदेशी धन के अभाव में अपने खनन क्षेत्र से अधिक राजस्व उत्पन्न करना है।
 पूरी दुनिया में बढ़े कोयले के दाम आपको बता दें कि, पूरी दुनिया में कोयले के कीमत में इजाफा हुआ है और कोयले का उत्पादन करने वाला एक बड़ा देश इंडोनेशिया ने इसी साल सबको हैरान करते हुए कोयले के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया था और फिर रूस-यूक्रेन युद्ध ने स्थिति को और भी गंभीर कर दिया है। लिहाजा, वैश्विक कोयले के निर्यात में बाधा पहुंची और दाम में इजाफा हुआ है और इसका फायदा अब तालिबान ने उठाया है। हालांकि, तालिबान सरकार का पाकिस्तान के साथ कोयला निर्यात समझौता नहीं है। अफगान पेट्रोलियम मंत्रालय के प्रवक्ता के मुताबिक, उन्होंने द इंडिपेंडेंट उर्दू से बात करके मुफ्ती इस्मातुल्ला बुरहान ने कहा कि, 'सरकारी स्तर पर या किसी अन्य पार्टी के साथ, हमने पाकिस्तान या किसी भी पाकिस्तानी इकाई के साथ ऐसा कोई समझौता नहीं किया है'।

‘पाकिस्तान से लाभ की उम्मीद नहीं’ तालिबान सरकार के मंत्री इस्मातुल्ला ने कहा कि, 'हमें पाकिस्तान से किसी लाभ की उम्मीद नहीं है क्योंकि हम डॉलर और यूरो के स्वाद और पाकिस्तानी मुद्रा की खराब स्थिति से अवगत हैं'। उन्होंने कहा कि, हालांकि चार साल पहले स्थानीय डीलरों के लिए कोयले की कीमत में 30 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी, जबकि स्थानीय व्यापारियों के लिए कीमत स्थिर बनी हुई थी, और टैरिफ केवल देश से बाहर निर्यात किए गए कोयले पर लागू होगा। इस्मातुल्लाह ने आगे कहा कि, 'अब तक, पाकिस्तान को हमारी और अफगान लोगों की प्रतिक्रिया का अनुमान हो गया होगा, इसलिए, हमने कोयले पर लेवी 200 डॉलर प्रति टन से बढ़ा दी है।" तालिबान ने पिछले महीने की शुरुआत में अपने पहले वार्षिक बजट की घोषणा करते हुए कहा था, कि वे पूरी तरह से स्थानीय राजस्व पर निर्भर हैं।