नई दिल्ली

इस साल की शुरुआत से ही भाजपा विभिन्न चुनाव में विपक्ष पर भारी पड़ी है। इसका असर राष्ट्रपति चुनाव पर भी दिख सकता है। भाजपा को उन दलों का भी समर्थन मिल सकता है जो उससे दूर थे। साथ ही विपक्षी खेमे में भी सेंध लग सकती है। राष्ट्रपति पद के लिए विपक्ष ने जहां यशवंत सिन्हा को उम्मीदवार बनाया है। वहीं, एनडीए की तरफ से द्रौपदी मुर्मू मैदान में हैं। सपा-शिवसेना जैसे मजबूत क्षेत्रीय दलों के दरक रहे गढ़ों के बीच कांग्रेस और आम आदमी पार्टी को भी अब झटका लगा है। इसका आने वाले विधानसभा चुनावों और लोकसभा चुनाव पर भी इन परिस्थितियों का प्रभाव पड़ सकता है। रविवार को आए तीन लोकसभा और सात विधानसभा के उपचुनाव में भाजपा ने दो लोकसभा और तीन विधानसभा चुनाव जीतने में सफलता हासिल की है। इससे विपक्षी एकता पर यक्ष प्रश्न खड़ा हुआ है। इसके साथ ही ज्वलंत मुद्दों पर मोदी सरकार की लोकप्रियता भारी पड़ती दिखाई दी है।गुजरात और हिमाचल  प्रदेश के विधानसभा चुनावों के मद्देनजर भी भाजपा ने जमीन मजबूत कर ली है। उसके बाद 2024 के लोकसभा चुनाव की तैयारी पर भी इन सब का काफी असर पड़ सकता है।

टीआरएस , एआईएमआईएम का सिन्हा को समर्थन
तेलंगाना में सत्तारूढ़ टीआरएस ने सोमवार को कहा कि वह राष्ट्रपति चुनाव में विपक्षी दलों के संयुक्त उम्मीदवार यशवंत सिन्हा का समर्थन करेगी। यशवंत सिन्हा के नामांकन के दौरान पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष केटी रामाराव अपने सांसदों के साथ मौजूद रहे। वहीं, असदुद्दीन ओवैसी के नेतृत्व वाली ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहाद-उल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) ने सिन्हा के समर्थन की घोषणा की। ओवैसी ने विज्ञप्ति जारी कर कहा कि पार्टी के प्रतिनिधि यशवंत सिन्हा के पक्ष में मतदान करेंगे।

विपक्ष नाकाम
उपचुनाव के दौरान ‘अग्निपथ’ योजना पर देशभर में बवाल मचा हुआ था। ऐसे में भाजपा ने सफलता हासिल कर साबित कर दिया है कि विपरीत परिस्थितियों में भी जनता का विश्वास हासिल करने में सफल है।

हमारी एकता 2024 तक रहेगी : सिन्हा
यशवंत सिन्हा ने कहा कि राष्ट्रपति पद के चुनाव में इतनी सारी विपक्षी पार्टियों का एकसाथ आना एक शुरुआत है। यह एकता आगे भी कायम रहेगी। उन्होंने कहा कि चुनाव में विपक्षी दलों के विभाजन का फायदा भाजपा को मिलता था। 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को यह फायदा नहीं मिलेगा। विपक्षी पार्टियां एकजुट होकर चुनाव लड़ेंगी। सिन्हा समर्थन जुटाने के लिए देशव्यापी दौरा करेंगे। वह केरल से अपने दौरे की शुरुआत करेंगे। उन्होंने कहा कि वह समर्थन के लिए भाजपा में अपने पुराने साथियों से संपर्क साधने का भी प्रयास करेंगे।

अमित शाह और खड़गे से मिले सोरेन
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राष्ट्रपति चुनाव में समर्थन की रणनीति तय करने के लिए सोमवार को गृह मंत्री अमित शाह और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खड़गे से मुलाकात की। लेकिन शाम को दिल्ली से रवाना होने से पूर्व उन्होंने अपनी रणनीति का खुलासा नहीं किया कि वे किसे वोट करेंगे। शाह ने सोरेन से एनडीए उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू को समर्थन देने का आग्रह किया।

सांसत में शिवसेना
पहले राज्यसभा और फिर विधान परिषद चुनाव में भाजपा ने शिवसेना को बड़ा झटका दिया था। महाराष्ट्र में राज्यसभा और विधान परिषद दोनों में एक-एक सीट ज्यादा जीती। शिवसेना को अपनी पार्टी बचाना मुश्किल हो रहा है।