इंदौर
 धार भोजशाला मामले में गुरुवार को हाई कोर्ट में सुनवाई हुई। केंद्र सरकार, पुरातत्व विभाग, मौलाना कलामुद्दीन वेलफेयर सोसायटी, महाराजा भोज सेवा संस्थान और राज्य शासन को याचिका में जवाब देना था लेकिन किसी भी पक्षकार का जवाब नहीं आया। कोर्ट ने समय देते हुए सुनवाई आगे बढ़ा दी। अगली सुनवाई 15 जुलाई को होगी।

गौरतलब है कि धार भोजशाला मामले में चार जनहित याचिकाएं हाई कोर्ट में पहले से चल रही थीं। मई के दूसरे सप्ताह में इस मामले में एक नई याचिका दायर हुई जिसे हिंदू फ्रंट फार जस्टिस ने दायर किया है। इसमें धार भोजशाला को हिंदुओं का पवित्र स्थान बताते हुए मांग की गई है कि मुसलमानों को भोजशाला में नमाज पढ़ने से तुरंत रोका जाए और हिंदूओं को नियमित पूजा का अधिकार दिया जाए।

याचिका में यह भी कहा है कि हर मंगलवार हिंदू भोजशाला में यज्ञ कर उसे पवित्र करते हैं और शुक्रवार को मुसलमान नमाज के नाम पर उन्हीं यज्ञ कुंडों में थूककर उन्हें अपवित्र कर देते हैं। 11 मई 2022 को याचिका में सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट की युगलपीठ ने सभी पक्षकारों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। गुरुवार को किसी भी पक्षकार का जवाब नहीं आया।

एक याचिकाकर्ता ने वापस ले ली याचिका

धार भोजशाला मामले में 2016 से चल रही एक जनहित याचिका गुरुवार को खुद याचिकाकर्ता ने वापस ले ली। याचिकाकर्ता की तरफ से पैरवी कर रहे एडवोकेट मनीष यादव ने नईदुनिया को बताया कि धार भोजशाला को लेकर हाई कोर्ट में चल रही सभी याचिकाओं में मुद्दा लगभग सामान है। इसलिए हमने हमारी याचिका वापस ले ली है।